﻿
सप्तमे/SMKP अध्याये/NP सूचिते/KN द्वे/SMKY प्रकृती/NP ईश्वरस्य/NP -/PUNC त्रिगुणात्मिका/NV अष्टधा/NV भिन्ना/NV अपरा/NV ,/PUNC संसारहेतुत्वात्/NP ;/PUNC परा/SN च/AVK अन्या/SN जीवभूता/NP क्षेत्रज्ञलक्षणा/NP ईश्वरात्मिका/NV -/PUNC याभ्याम्/SNV प्रकृतिभ्याम्/NP ईश्वरः/NP जगदुत्पत्तिस्थितिलयहेतुत्वम्/NP प्रतिपद्यते/KP ।/PUNC तत्र/A क्षेत्रक्षेत्रज्ञलक्षणप्रकृतिद्वयनिरूपणद्वारेण/NP तद्वतः/KN ईश्वरस्य/NP तत्त्वनिर्धारणार्थम्/NP क्षेत्राध्यायः/NP आरभ्यते/KP ।/PUNC अतीतानन्तराध्याये/NP च/AVK '/PUNC अद्वेष्टा/NV सर्वभूतानाम्/NP '/PUNC इत्यादिना/A यावत्/AVK अध्यायपरिसमाप्तिः/NP तावत्/AVK तत्त्वज्ञानिनाम्/NP संन्यासिनाम्/NP निष्ठा/NP यथा/A ते/SN वर्तन्ते/KP इति/AUD एतत्/SN उक्तम्/KN ।/PUNC केन/SN पुनः/A ते/SN तत्त्वज्ञानेन/NP युक्ताः/KN यथोक्तधर्माचरणात्/NP भगवतः/NP प्रियाः/NP भवन्ति/KP इति/AUD एवमर्थः/NP च/AVK अयम्/SNV अध्यायः/NP आरभ्यते/KP ।/PUNC प्रकृतिः/NP च/AVK त्रिगुणात्मिका/NV सर्वकार्यकरणविषयाकारेण/NP परिणता/KN पुरुषस्य/NP भोगापवर्गार्थकर्तव्यतया/NP ।/PUNC देहेन्द्रियाद्याकारेण/NP संहन्यते/KP ।/PUNC सः/SN अयम्/SN संघातः/KN इदम्/SNV शरीरम्/NP ।/PUNC तत्/SN एतत्/SN 
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP -/PUNC
इदम्/SNV शरीरम्/NP कौन्तेय/NP क्षेत्रम्/NP इति/AUD अभिधीयते/KP ।/PUNC
एतत्/SN यः/SSN वेत्ति/KP तम्/SSN प्राहुः/KP क्षेत्रज्ञः/NV इति/AUD तद्विदः/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इदम्/SN इति/AUD सर्वनाम्ना/NP उक्तम्/KN विशिनष्टि/NV शरीरम्/NP इति/AUD ।/PUNC हे/ASMB कौन्तेय/NP क्षतत्राणात्/NP ,/PUNC क्षयात्/NP क्षरणात्/NP क्षेत्रवत्/ASD वा/APY अस्मिन्/SNV कर्मफलनिष्पत्तेः/NP क्षेत्रम्/NP इति/AUD -/PUNC इतिशब्दः/NP एवंशब्दपदार्थकः/NP -/PUNC क्षेत्रम्/NP इति/AUD एवम्/AUD अभिधीयते/KP कथ्यते/KP ।/PUNC तत्/SNV शरीरम्/NP क्षेत्रम्/NP यः/SN वेत्ति/KP विजानाति/KP ,/PUNC आपादतलमस्तकम्/NP ज्ञानेन/NP विषयीकरोति/KP ,/PUNC स्वाभाविकेन/NP औपदेशिकेन/NP वा/APY वेदनेन/NP विषयीकरोति/KP विभागशः/NP ,/PUNC तम्/SNV वेदितारम्/NP प्राहुः/KP कथयन्ति/KP क्षेत्रज्ञः/NV इति/AUD -/PUNC इतिशब्दः/NP एवंशब्दपदार्थकः/NP एव/INTF पूर्ववत्/ASD -/PUNC क्षेत्रज्ञः/NP इति/AUD एवम्/AUD आहुः/KP ।/PUNC के/SN ?/PUNC तत्/SNV विदः/NP तौ/SNV क्षेत्रक्षेत्रज्ञौ/NP ये/SSN विदन्ति/KP ते/SSN तद्विदः/NV ।।/PUNC
एवम्/AUD क्षेत्रक्षेत्रज्ञौ/NP उक्तौ/KN ।/PUNC किम्/SN तावत्/A मात्रेण/NP ज्ञानेन/NP ज्ञातव्यौ/KN इति/AUD ?/PUNC न/AN इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
क्षेत्रज्ञम्/NP च/AVK अपि/A माम्/SN विद्धि/KP सर्वक्षेत्रेषु/NP भारत/NS ।/PUNC
क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP ज्ञानम्/NP यत्/SSN तत्/SSN ज्ञानम्/NP मतम्/NP मम/SN ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC क्षेत्रज्ञम्/NV यथोक्तलक्षणम्/NV च/APY अपि/A माम्/SNV परमेश्वरम्/NP असंसारिणम्/NV विद्धि/KP जानीहि/KP ।/PUNC सर्वक्षेत्रेषु/NP यः/SSN क्षेत्रज्ञः/NP ब्रह्मादिस्तम्बपर्यन्तानेकक्षेत्रोपाधिप्रविभक्तः/KN ,/PUNC तम्/SSN निरस्तसर्वोपाधिभेदम्/NV सदसदादिशब्दप्रत्ययागोचरम्/NV विद्धि/KP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।/PUNC हे/ASMB भारत/NS ,/PUNC यस्मात्/SSN क्षेत्रक्षेत्रज्ञेश्वरयाथात्म्यव्यतिरेकेण/NP न/AN ज्ञानगोचरम्/NP अन्यत्/SN अवशिष्टम्/NP अस्ति/KP ,/PUNC तस्मात्/SSN क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP ज्ञेयभूतयोः/NP यत्/SSN ज्ञानम्/NP क्षेत्रक्षेत्रज्ञौ/NV येन/SNV ज्ञानेन/NP विषयीक्रियेते/KP ,/PUNC तत्/SSN ज्ञानम्/NP सम्यक्/NV ज्ञानम्/NP इति/AUD मतम्/NP अभिप्रायः/NP मम/SNV ईश्वरस्य/NP विष्णोः/NS ।।/PUNC 
ननु/A सर्वक्षेत्रेषु/NP एकः/SMKY एव/INTF ईश्वरः/NP ,/PUNC न/AN अन्यः/SN तद्व्यतिरिक्तः/KN भोक्ता/NP विद्यते/KP चेत्/A ,/PUNC ततः/A ईश्वरस्य/NP संसारित्वम्/NP प्राप्तम्/KN ;/PUNC ईश्वरव्यतिरेकेण/NP वा/AVK संसारिणः/NP अन्यस्य/SN अभावात्/NP संसाराभावप्रसङ्गः/NP ।/PUNC तत्/SN च/AVK उभयम्/SN अनिष्टम्/KN ,/PUNC बन्धमोक्षतद्धेतुशास्त्रानर्थक्यप्रसङ्गात्/NP ,/PUNC प्रत्यक्षादिप्रमाणविरोधात्/NP च/APY ।/PUNC प्रत्यक्षेण/NP तावत्/A सुखदुःखतद्धेतुलक्षणः/NV संसारः/NP उपलभ्यते/KP ;/PUNC जगद्वैचित्र्योपलब्धेः/NP च/AVK धर्माधर्मनिमित्तः/KN संसारः/NP अनुमीयते/KP ।/PUNC सर्वम्/SN एतत्/SN अनुपपन्नम्/NP आत्मेश्वरैकत्वे/NP ।।/PUNC 
न/AN ;/PUNC ज्ञानाज्ञानयोः/NP अन्यत्वेन/NP उपपत्तेः/KP -/PUNC '/PUNC दूरमेते/NP विपरीते/NP विषूची/NP अविद्या/NP या/SN च/AVK विद्या/NP इति/AUD ज्ञाता/KN (/PUNC क0/PUNC उ0/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 4/PUNC )/PUNC '/PUNC ।/PUNC तथा/AVK च/AVK तयोः/SNV विद्याविद्याविषययोः/NP फलभेदः/NP अपि/A विरुद्धः/NP निर्दिष्टः/KN -/PUNC '/PUNC श्रेयः/NP च/APY प्रेयः/NP च/APY '/PUNC इति/AUD ;/PUNC विद्याविषयः/NV श्रेयः/NP ,/PUNC प्रेयः/NP तु/A अविद्याकार्यम्/NP इति/AUD ।/PUNC तथा/AVK च/AVK व्यासः/NS -/PUNC '/PUNC द्वौ/SMKY इमौ/SN अथ/A पन्थानौ/NP (/PUNC महा0/NS शान्ति0/NS 241/PUNC ।/PUNC 6/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A ,/PUNC '/PUNC इमौ/SNV द्वौ/SMKY एव/INTF पन्थानौ/NP '/PUNC इत्यादि/A च/AVK ।/PUNC इह/A च/AVK द्वे/SMKY निष्ठे/NP उक्ते/KN ।/PUNC अविद्या/NP च/AVK सह/AUP कार्येण/NP हातव्या/KN इति/AUD श्रुतिस्मृतिन्यायेभ्यः/NP अवगम्यते/KP ।/PUNC श्रुतयः/NS तावत्/A -/PUNC '/PUNC इह/A चेत्/A अवेदीत्/KP अथ/A सत्यम्/NP अस्ति/KP न/AN चेत्/A इह/A अवेदीन्/KP महती/NV विनष्टिः/NP (/PUNC के0/PUNC उ0/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 5/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC तम्/SN एवम्/AUD विद्वान्/NP अमृतः/NV इह/A भवति/KP (/PUNC नृ0/PUNC पू0/PUNC उ0/PUNC 6/PUNC )/PUNC ।/PUNC न/AN अन्यः/SNV पन्था/NP विद्यते/KP अयनाय/NP (/PUNC श्वे0/PUNC उ0/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 8/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC विद्वान्/NP न/AN बिभेति/KP कुतश्चन/A (/PUNC तै0/NS उ0/NS 2/PUNC ।4/PUNC )/PUNC '/PUNC ।/PUNC अविदुषः/NP तु/A -/PUNC '/PUNC अथ/A तस्य/SN भयम्/NP भवति/KP (/PUNC तै0/PUNC उ0/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 7/PUNC )/PUNC ,/PUNC  अविद्यायाम्/NP अन्तरे/NP वर्तमानाः/KN (/PUNC क0/PUNC उ0/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 5/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC ब्रह्म/NS वेदः/NS ब्रह्म/NS एव/INTF भवति/KP (/PUNC मु0/PUNC उ0/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 9/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC अन्यः/SN असौ/SN अन्यः/SN अहम्/SN अस्मि/KP इति/AUD न/AN सः/SN वेदः/KP यथा/A पशुः/NP एवम्/AUD सः/SN देवानाम्/NP '/PUNC आत्मवित्/ASD यः/SSN '/PUNC सः/SSN इदम्/SN सर्वम्/SN भवति/KP (/PUNC बृह0/PUNC उ0/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 10/PUNC )/PUNC '/PUNC ;/PUNC '/PUNC यदा/A चर्मवत्/ASD (/PUNC श्वे0/PUNC उ0/PUNC 6/PUNC ।/PUNC 20/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD आद्याः/NP सहस्रशः/SMK ।/PUNC स्मृतयः/NS च/AVK -/PUNC '/PUNC अज्ञानेन/NP आवृतम्/KN ज्ञानम्/NP तेन/SN मुह्यन्ति/KP जन्तवः/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 15/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC इह/A एव/INTF तैः/SN जितः/KN सर्गः/NP येषाम्/SN साम्ये/NP स्थितम्/KN मनः/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC समम्/AUP पश्यन्/KNV हि/A सर्वत्र/A (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 28/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD आद्याः/NP ।/PUNC न्यायतः/NP च/AVK -/PUNC '/PUNC सर्पान्/NP कुशाग्राणि/NV तथा/APY उदपानम्/NP ज्ञात्वा/KKS मनुष्याः/NP परिवर्जयन्ति/KP ।/PUNC अज्ञानतः/NP तत्र/A पतन्ति/KP केचित्/A ज्ञाने/NP फलम्/NP पश्य/KKS यथाविशिष्टम्/NP (/PUNC महा0/PUNC शा0/PUNC 201/PUNC ।/PUNC 16/PUNC )/PUNC '/PUNC ।/PUNC तथा/AVK च/AVK -/PUNC देहादिषु/NP आत्मबुद्धिः/NP अविद्वान्/NP रागद्वेषादिप्रयुक्तः/KN धर्माधर्मानुष्ठानकृत्/NP जायते/KP म्रियते/KP च/APY इति/AUD अवगम्यते/KP ;/PUNC देहादिव्यतिरिक्तात्मदर्शिनः/NP रागद्वेषादिप्रहाणापेक्षधर्माधर्मप्रवृत्त्युपशमात्/NP मुच्यन्ते/KP इति/AUD न/AN केनचित्/A प्रति/AUP आख्यातुम्/KKS शक्यम्NP न्यायतः/NP ।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD सति/A ,/PUNC क्षेत्रज्ञस्य/NV ईश्वरस्य/NP एव/INTF सतः/KN अविद्याकृतोपाधिभेदतः/NP संसारित्वम्/NP इव/ASD भवति/KP ,/PUNC यथा/A देहाद्यात्मत्वम्/NP आत्मनः/NP ।/PUNC सर्वजन्तूनाम्/NP हि/A प्रसिद्धः/KN देहादिषु/NP अनात्मसु/NP आत्मभावः/NP निश्चितः/KN अविद्याकृतः/KN ,/PUNC यथा/A स्थाणौ/NP पुरुषनिश्चयः/NP ,/PUNC न/AN च/AVK एतावता/SNV पुरुषधर्मः/NP स्थाणोः/NP भवति/KP ,/PUNC स्थाणुधर्मः/NP वा/AVK पुरुषस्य/NP ,/PUNC तथा/AVK न/AN चैतन्यधर्मः/NP  देहस्य/NP ,/PUNC देहधर्मः/NP वा/AVK चेतनस्य/NP एवम्/AUD सुखदुःखमोहात्मकत्वादिः/NP आत्मनः/NP न/AN युक्तः/KN ;/PUNC अविद्याकृतत्वाविशेषात्/NP ,/PUNC जरामृत्युवत्/ASD ।।/PUNC
न/AN ,/PUNC अतुल्यत्वात्/NP ;/PUNC इति/AUD चेत्/A -/PUNC स्थाणुपुरुषौ/NP ज्ञेयौ/NP एव/INTF सन्तौ/KP ज्ञात्रा/NP अन्योन्यस्मिन्/SN अध्यस्तौ/KN अविद्यया/NP ;/PUNC देहात्मनोः/NP तु/A ज्ञेयज्ञात्रोः/NP एव/INTF इतरेतराध्यासः/NP ,/PUNC इति/AUD न/AN समः/ASD दृष्टान्तः/KN ।/PUNC अतः/A देहधर्मः/NP ज्ञेयः/NV अपि/A ज्ञातुः/KP आत्मनः/NP भवति/KP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC अचैतन्यादिप्रसङ्गात्/NP ।/PUNC यदि/AVK हि/A ज्ञेयस्य/NP देहादेः/NP क्षेत्रस्य/NP धर्माः/NP सुखदुःखमोहेच्छादयः/NP ज्ञातुः/KP भवन्ति/KP ,/PUNC तर्हि/AVK ,/PUNC '/PUNC ज्ञेयस्य/NV क्षेत्रस्य/NV धर्माः/NP केचित्/A आत्मनः/NP भवन्ति/KP अविद्याध्यारोपिताः/KN ,/PUNC जरामरणादयः/NP तु/A न/AN भवन्ति/KP ' इति/AUD विशेषहेतुः/NV वक्तव्यः/KN ।/PUNC '/PUNC न/AN भवन्ति/KP '/PUNC इति/AUD अस्ति/KP अनुमानम्/NP -/PUNC अविद्याध्यारोपितत्वात्/NP जरामरणादिवत्/ASD इति/AUD ,/PUNC हेयत्वात्/NP ,/PUNC उपादेयत्वात्/NP च/APY इत्यादि/A ।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD सति/A ,/PUNC कर्तृत्वभोक्तृत्वलक्षणः/NV संसारः/NP ज्ञेयस्थः/KN ज्ञातरि/NP अविद्यया/NP अध्यारोपितः/KN इति/AUD ,/PUNC न/AN तेन/SN ज्ञातुः/KP किञ्चित्/A दुष्यति/KP ,/PUNC यथा/A बालैः/NP अध्यारोपितेन/NP आकाशस्य/NP तलमलिनत्वादिना/A ।।/PUNC एवम्/AUD च/AVK सति/A ,/PUNC सर्वक्षेत्रेषु/NP अपि/A सतः/KN भगवतः/NP क्षेत्रज्ञस्य/NV ईश्वरस्य/NP संसारित्वगन्धमात्रम्/NP अपि/A न/AN आशङ्क्यम्/NP ।/PUNC न/AN हि/A क्वचित्/A अपि/A लोके/NP अविद्याध्यस्तेन/NV धर्मेण/NP कस्यचित्/A उपकारः/NP अपकारः/NP वा/APY दृष्टः/KN ।।/PUNC
यत्/SN तु/A उक्तम्/KN -/PUNC ?/PUNC न/AN समः/ASD दृष्टान्तः/KN इति/AUD ?/PUNC तत्/SN असत्/NP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC अविद्याध्यासमात्रम्/NP हि/A दृष्टान्तदार्ष्टान्तिकयोः/NP साधर्म्यम्/NP विवक्षितम्/KN ।/PUNC तत्/SN न/AN व्यभिचरति/KP ।/PUNC यत्/SN तु/A ज्ञातरि/NP व्यभिचरति/KP इति/AUD मन्यसे/KP ,/PUNC तस्य/SN अपि/A अनैकान्तिकत्वम्/NV दर्शितम्/KN जरादिभिः/NP ॥/PUNC 
अविद्यावत्त्वात्/NP क्षेत्रज्ञस्य/NP संसारित्वम्/NP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC अविद्यायाः/NP तामसत्वात्/NP ।/PUNC तामसः/NP हि/A प्रत्ययः/NP ,/PUNC आवरणात्मकत्वात्/NP अविद्या/NP विपरीतग्राहकः/NV ,/PUNC संशयोपस्थापकः/NV वा/AVK ,/PUNC अग्रहणात्मकः/NV वा/APY ;/PUNC विवेकप्रकाशभावे/NP तत्/SN अभावात्/NP ,/PUNC तामसे/NP च/APY आवरणात्मके/NP तिमिरादिदोषे/NP सति/A अग्रहणादेः/NP अविद्यात्रयस्य/NP उपलब्धेः/NP ।।/PUNC
अत्र/A आह/KP -/PUNC एवम्/AUD तर्हि/A ज्ञातृधर्मः/NP अविद्या/NP ?/PUNC न/AN ;/PUNC करणे/NP चक्षुषि/NP तैमिरिकत्वादिदोषोपलब्धेः/NP ।/PUNC यत्/SN तु/A मन्यसे/KP -/PUNC ज्ञातृधर्मः/NP अविद्या/NP ,/PUNC तत्/SN एव/INTF च/AVK अविद्याधर्मवत्त्वम्/NP क्षेत्रज्ञस्य/NP संसारित्वम्/NP ;/PUNC तत्र/A यत्/SN उक्तम्/KN '/PUNC ईश्वरः/NP एव/INTF क्षेत्रज्ञः/NV ,/PUNC न/AN संसारी/NV '/PUNC इति/AUD एतत्/SN अयुक्तम्/KN इति/AUD -/PUNC तत्/SN न/AN ;/PUNC यथा/A करणे/NP चक्षुषि/NP विपरीतग्राहकादिदोषस्य/NP दर्शनात्/NP ।/PUNC न/AN विपरीतादिग्रहणम्/NP तत्/SN निमित्तम्/KN वा/AVK तैमिरिकत्वादिदोषः/NP ग्रहीतुः/KKS ,/PUNC चक्षुषः/NP संस्कारेण/NP तिमिरे/NP अपनीते/NP ग्रहीतुः/KKS अदर्शनात्/NP न/AN ग्रहीतुः/KKS धर्मः/NP यथा/AVK ;/PUNC तथा/AVK सर्वत्र/A एव/INTF अग्रहणविपरीतसंशयप्रत्ययाः/NP तन्निमित्ताः/KN करणस्य/NP एव/INTF कस्यचित्/A भवितुम्/KKS अर्हन्ति/KP ,/PUNC न/AN ज्ञातुः/KP क्षेत्रज्ञस्य/NP ।/PUNC संवेद्यत्वात्/NP च/AVK तेषाम्/SN प्रदीपप्रकाशवत्/ASD न/AN ज्ञातृधर्मत्वम्/NP -/PUNC संवेद्यत्वात्/NP एव/INTF स्वात्मव्यतिरिक्तसंवेद्यत्वम्/NP ;/PUNC सर्वकरणवियोगे/NP च/AVK कैवल्ये/NP सर्ववादिभिः/NP अविद्यादिदोषवत्त्वानभ्युपगमात्/NP ।/PUNC आत्मनः/NP यदि/A क्षेत्रज्ञस्य/NP अग्न्युष्णवत्/ASD स्वः/SN धर्मः/NP ,/PUNC ततः/A न/AN कदाचित्/A अपि/A तेन/SN वियोगः/NP स्यात्/KP ।/PUNC अविक्रियस्य/NP च/AVK व्योमवत्/ASD सर्वगतस्य/SNV अमूर्तस्य/NV आत्मनः/NP केनचित्/A संयोगवियोगानुपपत्तेः/NP ,/PUNC सिद्धम्/KN क्षेत्रज्ञस्य/NP नित्यम्/NV एव/INTF ईश्वरत्वम्/NP ;/PUNC '/PUNC अनादित्वात्/NP निर्गुणत्वात्/NP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 31/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A ईश्वरवचनात्/NP च/APY ।।/PUNC
ननु/A एवम्/AUD सति/A संसारसंसारित्वाभावे/NP शास्त्रानर्थक्यादिदोषः/NP स्यात्/KP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC सर्वैः/SN अभ्युपगतत्वात्/NP ।/PUNC सर्वैः/SN हि/A आत्मवादिभिः/NP अभि/AUP उपगतः/KN दोषः/NP न/AN एकेन/SMK परिहर्तव्यः/KN भवति/KP ।/PUNC कथम्/AP अभि/AUP  उपगतः/KN इति/AUD ?/PUNC मुक्तात्मनाम्/NP हि/A संसारसंसारित्वव्यवहाराभावः/NP सर्वैः/SN एव/INTF आत्मवादिभिः/NP इष्यते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK तेषाम्/SN शास्त्रानर्थक्यादिदोषप्राप्तिः/NP अभि/AUP उपगता/KN ।/PUNC तथा/AVK नः/SN क्षेत्रज्ञानाम्/NP ईश्वरैकत्वे/NP सति/A ,/PUNC शास्त्रानर्थक्यम्/NP भवतु/KKS ;/PUNC अविद्याविषये/NP च/AVK अर्थवत्त्वम्/NP -/PUNC यथा/A द्वैतिनाम्/NP सर्वेषाम्/SNV बन्धावस्थायाम्/NP एव/INTF शास्त्राद्यर्थवत्त्वम्/NP ,/PUNC न/AN मुक्तावस्थायाम्/NP ,/PUNC एवम्/AUD ।।/PUNC
ननु/A आत्मनः/NP बन्धमुक्तावस्थे/NP परमार्थतः/KN एव/INTF वस्तुभूते/NP द्वैतिनाम्/NP सर्वेषाम्/SN ।/PUNC अतः/A हेयोपादेयतत्साधनसद्भावे/NP शास्त्राद्यर्थवत्त्वम्/NP स्यात्/KP ।/PUNC अद्वैतिनाम्/NP पुनः/A ,/PUNC द्वैतस्य/NP अपरमार्थत्वात्/NP ,/PUNC अविद्याकृतत्वात्/NP बन्धावस्थायाः/NP च/AVK आत्मनः/NP अपरमार्थत्वे/NP निर्विषयत्वात्/NP ,/PUNC शास्त्राद्यानर्थक्यम्/NP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC आत्मनः/NP अवस्थाभेदानुपपत्तेः/NP ।/PUNC यदि/A तावत्/A आत्मनः/A बन्धमुक्तावस्थे/NP ,/PUNC युगपत्/A स्याताम्/KP ,/PUNC क्रमेण/NP वा/AVK ?/PUNC युगपत्/A तावत्/A विरोधात्/NP न/AN संभवतः/NP स्थितिगती/NP इव/ASD एकस्मिन्/SN ।/PUNC क्रमभावित्वे/NP च/AVK ,/PUNC निर्निमित्तत्वे/NP अनिर्मोक्षप्रसङ्गः/NP ।/PUNC अन्यनिमित्तत्वे/NP च/AVK स्वतः/SN अभावात्/NP अपरमार्थत्वप्रसङ्गः/NP ।/PUNC तथा/AVK च/AVK सति/A अभ्युपगमहानिः/NP ।/PUNC किञ्च/A ,/PUNC बन्धमुक्तावस्थयोः/NP पौर्वापर्यनिरूपणायाम्/NP बन्धावस्था/NP पूर्वम्/A प्रकल्प्या/NP ,/PUNC अनादिमती/NV अन्तवती/NV च/APY ;/PUNC तत्/SN च/AVK प्रमाणविरुद्धम्/NP ।/PUNC तथा/AVK मोक्षावस्था/NP आदिमती/NV अनन्ता/NV च/APY प्रमाणविरुद्धा/NV एव/INTF अभि/AUP उपगम्यते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK अवस्थावतः/KN अवस्थान्तरम्/NP गच्छतः/KN नित्यत्वम्/NP उपपादयितुम्/KKS शक्यम्/NP ।/PUNC अथ/A अनित्यत्वदोषपरिहाराय/NP बन्धमुक्तावस्थाभेदः/NP न/AN कल्प्यते/KP ,/PUNC अतः/A द्वैतिनाम्/NP अपि/A शास्त्रानर्थक्यादिदोषः/NP अपरिहार्यः/NP एव/INTF ;/PUNC इति/AUD समानत्वात्/NP न/AN अद्वैतवादिना/NP परिहर्तव्यः/KN दोषः/NP ।।/PUNC 
न/AN च/AVK शास्त्रानर्थक्यम्/NP ,/PUNC यथाप्रसिद्धाविद्वत्पुरुषविषयत्वात्/NP शास्त्रस्य/NP ।/PUNC अविदुषाम्/NP हि/A फलहेत्वोः/NP अनात्मनोः/NP आत्मदर्शनम्/NP ,/PUNC न/AN विदुषाम्/NP ;/PUNC विदुषाम्/NP हि/A फलहेतुभ्याम्/NP आत्मनः/NP अन्यत्वदर्शने/NP सति/A ,/PUNC तयोः/SN अहम्/SN इति/AUD आत्मदर्शनानुपपत्तेः/NP ।/PUNC न/AN हि/A अत्यन्त/NV मूढः/NP उन्मत्तादिः/NP अपि/A जलाग्न्योः/NP छायाप्रकाशयोः/NP वा/APY एकात्म्यम्/NP पश्यति/KP ;/PUNC किम्/SN उत/AVK विवेकी/NP ।/PUNC तस्मात्/SN न/AN विधिप्रतिषेधशास्त्रम्/NP तावत्/A फलहेतुभ्याम्/NP आत्मनः/NP अन्यत्वदर्शिनः/NP भवति/KP ।/PUNC न/AN हि/A '/PUNC देवदत्त/NS ,/PUNC त्वम्/SN इदम्/SN कुरु/KP '/PUNC इति/AUD कस्मिंश्चित्/A कर्मणि/NP नियुक्ते/KN ,/PUNC विष्णुमित्रः/NS '/PUNC अहम्/SN नियुक्तः/KN '/PUNC इति/AUD तत्रस्थः/KN नियोगम्/NP शृण्वन्/KNV अपि/A प्रतिपद्यते/KP ।/PUNC वियोगविषयविवेकाग्रहणात्/NP तु/A उपपद्यते/KP प्रतिपत्तिः/NP ;/PUNC तथा/AVK फलहेत्वोः/NP अपि/A ।।/PUNC
ननु/A प्राकृतसंबन्धापेक्षया/NP युक्ता/KN एव/INTF प्रतिपत्तिः/NP शास्त्रार्थविषया/NP -/PUNC फलहेतुभ्याम्/NP अन्यात्मविषयदर्शने/NP अपि/A सति/A -/PUNC इष्टफलहेतौ/NP प्रवर्तितः/KN अस्मि/KP ,/PUNC अनिष्टफलहेतोः/NP च/AVK निवर्तितः/KN अस्मि/KP इति/AUD ;/PUNC यथा/A पितृपुत्रादीनाम्/NP इतरेतरात्मान्यत्वदर्शने/NP सत्यपि/A अन्योन्यनियोगप्रतिषेधार्थप्रतिपत्तिः/NP ।/PUNC न/AN ;/PUNC व्यतिरिक्तात्मदर्शनप्रतिपत्तेः/NP प्राक्/A एव/INTF फलहेत्वोः/NP आत्माभिमानस्य/NP सिद्धत्वात्/NP ।/PUNC प्रतिपन्ननियोगप्रतिषेधार्थः/NP हि/A फलहेतुभ्याम्/NP आत्मनः/NP अन्यत्वम्/NP प्रतिपद्यते/KP ,/PUNC न/AN पूर्वम्/A ।/PUNC तस्मात्/SN विधिप्रतिषेधशास्त्रम्/NP अविद्वद्विषयम्/NP इति/AUD सिद्धम्/KN ।।/PUNC
ननु/A '/PUNC स्वर्गकामः/NP यजेत/KP '/PUNC '/PUNC न/AN कलञ्जम्/NP भक्षयेत्/KP '/PUNC इत्यादौ/NP आत्मव्यतिरेकदर्शिनाम्/NP अप्रवृत्तौ/KN ,/PUNC केवलदेहाद्यात्मदृष्टीनाम्/NP च/AVK ;/PUNC अतः/A कर्तुः/KKS अभावात्/NP शास्त्रानर्थक्यम्/NP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC यथाप्रसिद्धितः/KN एव/INTF प्रवृत्तिनिवृत्त्युपपत्तेः/NP ।/PUNC ईश्वरक्षेत्रज्ञैकत्वदर्शी/NP ब्रह्मवित्/NP तावत्/A न/AN प्रवर्तते/KP ।/PUNC तथा/AVK नैरात्म्यवादी/NP अपि/A न/AN अस्ति/KP परलोकः/NP इति/AUD न/AN प्रवर्तते/KP ।/PUNC यथाप्रसिद्धितः/KN तु/A विधिप्रतिषेधशास्त्रश्रवणान्यथानुपपत्त्या/NP अनुमितात्मास्तित्वः/NP आत्मविशेषानभिज्ञः/NP कर्मफलसंजाततृष्णः/NP श्रद्दधानतया/NP च/APY प्रवर्तते/KP ।/PUNC इति/AUD सर्वेषाम्/SN न/AN प्रति/AUP अक्षम्/NP ।/PUNC अतः/A न/AN शास्त्रानर्थक्यम्/NP ।।/PUNC 
विवेकिनाम्/NP अप्रवृत्तिदर्शनात्/NP तदनुगामिनाम्/NP अप्रवृत्तौ/KN शास्त्रानर्थक्यम्/NP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC कस्यचित्/A एव/INTF विवेकोपपत्तेः/NP ।/PUNC अनेकेषु/SN हि/A प्राणिषु/NP कश्चित्/A एव/INTF विवेकी/NP स्यात्/KP ,/PUNC यथा/A इदानीम्/A ।/PUNC न/AN च/AVK विवेकिनम्/NP अनुवर्तन्ते/KP मूढाः/NP ,/PUNC रागादिदोषतन्त्रत्वात्/NP प्रवृत्तेः/NP ,/PUNC अभिचरणादौ/NP च/AVK प्रवृत्तिदर्शनात्/NP ,/PUNC स्वाभाव्यात्/NP च/AVK प्रवृत्तेः/NP -/PUNC '/PUNC स्वभावः/NP तु/A प्रवर्तते/KP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 14/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD हि/A उक्तम्/KN ।।/PUNC
तस्मात्/SN अविद्यामात्रम्/NP संसारः/NP यथादृष्टविषयः/NP एव/INTF ।/PUNC न/AN क्षेत्रज्ञस्य/NP केवलस्य/NP अविद्या/NP तत्/SNV कार्यम्/NP च/AVK ।/PUNC न/AN च/AVK मिथ्याज्ञानम्/NP परमार्थवस्तु/NP दूषयितुम्/KKS समर्थम्/NP ।/PUNC न/AN हि/A ऊषरदेशम्/NP स्नेहेन/NP पङ्कीकर्तुम्/KKS शक्नोति/KP मरीच्युदकम्/NP ।/PUNC तथा/AVK अविद्या/NP क्षेत्रज्ञस्य/NP न/AN किञ्चित्/A कर्तुम्/KKS शक्नोति/KP ।/PUNC अतः/A च/AVK इदम्/SN उक्तम्/KN -/PUNC '/PUNC क्षेत्रज्ञम्/NP च/AVK अपि/A माम्/SN विद्धि/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC ,/PUNC  '/PUNC अज्ञानेन/NP आवृतम्/KN ज्ञानम्/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 15/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK ।।/PUNC 
अथ/A किम्/SN इदम्/SNV संसारिणाम्/NP इव/ASD '/PUNC अहम्/SN एवम्/AUD '/PUNC '/PUNC मम/SN एव/INTF इदम्/SN '/PUNC इति/AUD पण्डितानाम्/NP अपि/A ?/PUNC शृणु/KP ;/PUNC इदम्/SN तत्/SNV पाण्डित्यम्/NP ,/PUNC यत्/SN क्षेत्रे/NP एव/INTF आत्मदर्शनम्/NP ।/PUNC यदि/AVK पुनः/A क्षेत्रज्ञम्/NP अविक्रियम्/NP पश्येयुः/KP ,/PUNC ततः/A न/AN भोगम्/NP कर्म/NP वा/APY आकाङ्क्षेयुः/KP '/PUNC मम/SN स्यात्/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC विक्रिया/NP एव/INTF भोगकर्मणी/NP ।/PUNC अथ/A एवम्/AUD सति/A ,/PUNC फलार्थित्वात्/NP अविद्वान्/NP प्रवर्तते/KP ।/PUNC विदुषः/NP पुनः/A अविक्रियात्मदर्शिनः/NV फलार्थित्वाभावात्/NP प्रवृत्त्यनुपपत्तौ/NP कार्यकरणसंघातव्यापारोपरमे/NP निवृत्तिः/NP उपचर्यते/KP ।।/PUNC 
इदम्/SN च/AVK अन्यत्/SN पाण्डित्यम्/NP केषाञ्चित्/A अस्तु/KP -/PUNC क्षेत्रज्ञः/NV ईश्वरः/NP एव/INTF ।/PUNC क्षेत्रम्/NP च/AVK अन्यत्/SN क्षेत्रज्ञस्य/NP एव/INTF विषयः/NP ।/PUNC अहम्/SN तु/A संसारी/NP सुखी/NP दुःखी/NP च/APY ।/PUNC संसारोपरमः/NP च/AVK मम/SN कर्तव्यः/KN क्षेत्रक्षेत्रज्ञविज्ञानेन/NP ,/PUNC ध्यानेन/NP च/APY ईश्वरम्/NP क्षेत्रज्ञम्/NV साक्षात्कृत्वा/KKS तत्स्वरूपावस्थानेन/NP इति/AUD ।/PUNC यः/SN च/AVK एवम्/AUD बुध्यते/KP ,/PUNC यः/SN च/AVK बोधयति/KP ,/PUNC न/AN असौ/SNV क्षेत्रज्ञः/NP इति/AUD ।/PUNC एवम्/AUD मन्वानः/KN यः/SSN सः/SSN पण्डितापसदः/NP ,/PUNC संसारमोक्षयोः/NP शास्त्रस्य/NP च/AVK अर्थवत्त्वम्/NP करोमि/KP इति/AUD ;/PUNC आत्महा/NP स्वयम्/SN मूढः/NP अन्यान्/SN च/AVK व्यामोहयति/KP शास्त्रार्थसंप्रदायरहितत्वात्/NP ,/PUNC श्रुतहानिम्/NP अश्रुतकल्पनाम्/NP च/APY कुर्वन्/KP ।/PUNC तस्मात्/SN असंप्रदायवित्/NP सर्वशास्त्रवित्/NP अपि/A मूर्खवत्/ASD एव/INTF उपेक्षणीयः/KN ।।/PUNC 
यत्/SN तु/A उक्तम्/KN '/PUNC ईश्वरस्य/NP क्षेत्रज्ञैकत्वे/NP संसारित्वम्/NP प्राप्नोति/KP ,/PUNC क्षेत्रज्ञानाम्/NP च/AVK ईश्वरैकत्वे/NP संसारिणः/NP अभावात्/NP संसाराभावप्रसङ्गः/NP '/PUNC इति/AUD ,/PUNC एतौ/SNV दोषौ/NP प्रत्युक्तौ/KN '/PUNC विद्याविद्ययोः/NP वैलक्षण्याभ्युपगमात्/NP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC अविद्यापरिकल्पितदोषेण/NP तत्/SNV विषयम्/NP वस्तु/NP पारमार्थिकम्/NP न/AN दुष्यति/KP इति/AUD ।/PUNC तथा/AVK च/AVK दृष्टान्तः/KN दर्शितः/KN -/PUNC मरीच्यम्भसा/NP ऊषरदेशः/NP न/AN पङ्कीक्रियते/KP इति/AUD ।/PUNC संसारिणः/NP अभावात्/NP संसाराभावप्रसङ्गदोषः/NP अपि/A संसारसंसारिणोः/NP अविद्याकल्पितत्वोपपत्त्या/NP प्रत्युक्तः/KN ।।/PUNC
ननु/A अविद्यावत्त्वम्/NP एव/INTF क्षेत्रज्ञस्य/NP संसारित्वदोषः/NP ।/PUNC तत्कृतम्/KN च/AVK सुखित्वदुःखित्वादि/NP प्रत्यक्षम्/NP उपलभ्यते/KP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC ज्ञेयस्य/NP क्षेत्रधर्मत्वात्/NP ,/PUNC ज्ञातुः/NP क्षेत्रज्ञस्य/NP तत्कृतदोषानुपपत्तेः/NP ।/PUNC यावत्/A किञ्चित्/A क्षेत्रज्ञस्य/NP दोषजातम्/KN अविद्यमानम्/NP आसञ्जयसि/KP ,/PUNC तस्य/SN ज्ञेयत्वोपपत्तेः/NP क्षेत्रधर्मत्वम्/NP एव/INTF ,/PUNC न/AN क्षेत्रज्ञधर्मत्वम्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK तेन/SN क्षेत्रज्ञः/NP दुष्यति/KP ,/PUNC ज्ञेयेन/NP ज्ञातुः/KKS संसर्गानुपपत्तेः/NP ।/PUNC यदि/A हि/A संसर्गः/NP स्यात्/KP ,/PUNC ज्ञेयत्वम्/NP एव/INTF न/AN उपपद्येत/KP ।/PUNC यदि/A आत्मनः/SNV धर्मः/NP अविद्यावत्त्वम्/NP दुःखित्वादि/NP च/AVK कथम्/AP भोः/ASMB प्रत्यक्षम्/A उपलभ्यते/KP ,/PUNC कथम्/AP वा/AVK क्षेत्रज्ञधर्मः/NP ?/PUNC '/PUNC ज्ञेयम्/NP च/AVK सर्वम्/SNV क्षेत्रम्/NP ज्ञाता/NP एव/INTF क्षेत्रज्ञः/NP '/PUNC इति/AUD अवधारिते/KN ?/PUNC '/PUNC अविद्यादुःखित्वादेः/NP क्षेत्रज्ञविशेषणत्वम्/NP क्षेत्रज्ञधर्मत्वम्/NP तस्य/SN च/APY प्रत्यक्षोपलभ्यत्वम्/NP ?/PUNC '/PUNC इति/AUD विरुद्धम्/NP उच्यते/KP अविद्यामात्रावष्टम्भात्/NP केवलम्/A ।।/PUNC
अत्र/A आह/KP -/PUNC सा/SNV अविद्या/NP कस्य/SN ?/PUNC इति/AUD ।/PUNC यस्य/SSN दृश्यते/KP तस्य/SSN एव/INTF ।/PUNC कस्य/SN दृश्यते/KP इति/AUD ?/PUNC अत्र/A उच्यते/KP -/PUNC '/PUNC अविद्या/NP कस्य/SN दृश्यते/KP ?/PUNC इति/AUD प्रश्नः/NP निरर्थकः/NV ।/PUNC कथम्/SN ?/PUNC दृश्यते/KP चेत्/A अविद्या/NP '/PUNC तद्वन्तम्/NP अपि/A पश्यसि/KP ।/PUNC न/AN च/AVK तद्वति/ASD उपलभ्यमाने/KN '/PUNC सा/SN कस्य/SN ?/PUNC '/PUNC इति/AUD प्रश्नः/NP युक्तः/KN ।/PUNC न/AN हि/A गोमति/NP उपलभ्यमाने/KN '/PUNC गावः/NP कस्य/SN ?/PUNC '/PUNC इति/AUD प्रश्नः/NP अर्थवान्/KN भवति/KP ।/PUNC ननु/A विषमः/NV दृष्टान्तः/KN ।/PUNC गवाम्/NP तद्वतः/ASD च/AVK प्रत्यक्षत्वात्/NP तत्संबन्धः/NP अपि/A प्रत्यक्षः/NP इति/AUD प्रश्नः/NP निरर्थकः/NV ।/PUNC न/AN तथा/AVK अविद्या/NP तद्वान्/NP च/APY प्रत्यक्षौ/NP ,/PUNC यतः/A प्रश्नः/NP निरर्थकः/NV स्यात्/KP ।/PUNC अप्रत्यक्षेण/NP अविद्यावता/NP अविद्यासंबन्धे/NP ज्ञाते/KN ,/PUNC किम्/SN तव/SN स्यात्/KP ?/PUNC अविद्यायाः/NP अनर्थहेतुत्वात्/NP परिहर्तव्या/KN स्यात्/KP ।/PUNC यस्य/SN अविद्या/NP ,/PUNC सः/SN ताम्/SN परिहरिष्यति/KP ।/PUNC ननु/A मम/SN एव/INTF अविद्या/NP ।/PUNC जानासि/KP तर्हि/A अविद्याम्/NP तद्वन्तम्/NP च/AVK आत्मानम्/NP ।/PUNC जानामि/KP ,/PUNC न/AN तु/A प्रत्यक्षेण/NP ।/PUNC अनुमानेन/NP चेत्/A जानासि/KP ,/PUNC कथम्/AP संबन्धग्रहणम्/NP ?/PUNC न/AN हि/A तव/SN ज्ञातुः/KKS ज्ञेयभूतया/NP अविद्यया/NP तत्काले/NP संबन्धः/NP ग्रहीतुम्/KKS शक्यते/KP ,/PUNC अविद्यायाः/NP विषयत्वेन/NP एव/INTF ज्ञातुः/KKS उपयुक्तत्वात्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK ज्ञातुः/KKS अविद्यायाः/NP च/AVK संबन्धस्य/NP यः/SN ग्रहीता/KN ,/PUNC ज्ञानम्/NP च/AVK अन्यत्/SN तत्/SNV विषयम्/NP संभवति/KP ;/PUNC अनवस्थाप्राप्तेः/NP ।/PUNC यदि/A ज्ञात्रा/NP अपि/A ज्ञेयसंबन्धः/NP ज्ञायते/KP ,/PUNC अन्यः/SNV ज्ञाता/NP कल्प्यः/KKS स्यात्/KP ,/PUNC तस्य/SN अपि/A अन्यः/SN ,/PUNC तस्य/SN अपि/A अन्यः/SN इति/AUD अनवस्था/NV अपरिहार्या/NV ।/PUNC यदि/A पुनः/A अविद्या/NP ज्ञेया/NV ,/PUNC अन्यत्/SN वा/AVK ज्ञेयम्/NV ज्ञेयम्/DV एव/INTF ।/PUNC तथा/AVK ज्ञाता/NP अपि/A ज्ञाता/NV एव/INTF ,/PUNC न/AN ज्ञेयम्/NV भवति/KP ।/PUNC यदा/A च/AVK एवम्/AUD ,/PUNC अविद्यादुःखित्वाद्यैः/NP न/AN ज्ञातुः/KKS क्षेत्रज्ञस्य/NP किञ्चित्/A दुष्यति/KP ।।/PUNC 
ननु/A अयम्/SN एव/INTF दोषः/NP ,/PUNC यत्/SSN दोषवत्क्षेत्रविज्ञातृत्वम्/NP ;/PUNC न/AN च/AVK विज्ञानस्वरूपस्य/ASD एव/INTF अविक्रियस्य/NP विज्ञातृत्वोपचारात्/NP ;/PUNC यथा/A उष्णतामात्रेण/NP अग्नेः/NP तप्तिक्रियोपचारः/NP ,/PUNC तत्/SN वत्/ASD ।/PUNC यथा/AVK अत्र/A भगवता/NP क्रियाकारकफलात्मत्वाभावः/NP आत्मनि/NP स्वतः/SN एव/INTF दर्शितः/KN -/PUNC अविद्याध्यारोपितैः/NP एव/INTF क्रियाकारकादिः/NP आत्मनि/NP उपचर्यते/KP ;/PUNC तथा/AVK तत्र/A तत्र/DV '/PUNC यः/SN एनम्SN वेत्ति/KP हन्तारम्/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC प्रकृतेः/NP क्रियमाणानि/NV गुणैः/NP कर्माणि/NP सर्वशः/SN (/PUNC गीता/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 27/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC न/AN आदत्ते/KP कस्यचित्/A पापम्/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 15/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिप्रकरणेषु/NP दर्शितः/KN ।/PUNC तथा/AVK एव/INTF च/AVK व्याख्यातम्/KN अस्माभिः/SN ।/PUNC उत्तरेषु/NP च/AVK प्रकरणेषु/NP दर्शयिष्यामः/KP ।।/PUNC
हन्त/ABS !/PUNC तर्हि/A आत्मनि/NP क्रियाकारकफलात्मतायाः/NP स्वतः/SN अभावे/NP ,/PUNC अविद्यया/NP च/AVK अध्यारोपितत्वे/NP ,/PUNC कर्माणि/NP अविद्वत्कर्तव्यानि/NP एव/INTF ,/PUNC न/AN विदुषाम्/NP इति/AUD प्राप्तम्/KN ।/PUNC सत्यम्/NP एवम्/AUD प्राप्तम्/KN ,/PUNC एतत्/SN एव/INTF च/AVK '/PUNC न/AN हि/A देहभृता/KN शक्यम्/NP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 11/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD अत्र/A दर्शयिष्यामः/KP ।/PUNC सर्वशास्त्रार्थोपसंहारप्रकरणे/NP च/AVK '/PUNC समासेन/NP एव/INTF कौन्तेय/NP निष्ठा/NP ज्ञानस्य/NP या/SN परा/NV (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 50/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD अत्र/A विशेषतः/KN दर्शयिष्यामः/KP ।/PUNC अलम्/A इह/A बहुप्रपञ्चनेन/NP ,/PUNC इति/AUD उपसंह्रियते/KP ।।/PUNC 
'/PUNC इदम्/SNV शरीरम्/NP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिश्लोकोपदिष्टस्य/NV क्षेत्राध्यायार्थस्य/NV संग्रहश्लोकः/NP अयम्/SN उपन्यस्यते/KP '/PUNC तत्/SNV क्षेत्रम्/NP यत्/SN च/AVK (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A ,/PUNC व्याचिख्यासितस्य/NP हि/A अर्थस्य/NP संग्रहोपन्यासः/NP न्याय्यः/NP इति/AUD -/PUNC
तत्/SNV क्षेत्रम्/NP यत्/SN च/APY यादृक्/A च/APY यत्/SN विकारि/NP यतः/A च/APY यत्/SN ।/PUNC
सः/SN च/AVK यः/SN यत्/SSN प्रभावः/NP च/APY तत्/SSN समासेन/NP मे/SN शृणु/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SSN निर्दिष्टम्/KN '/PUNC इदम्/SNV शरीरम्/NP '/PUNC इति/AUD तत्/SSN तत्/SNV शब्देन/NP परामृशति/KP ।/PUNC यत्/SSN च/AVK इदम्/SNV निर्दिष्टम्/NV क्षेत्रम्/NP तत्/SSN यादृक्/A यादृशम्/ASD स्वकीयैः/SNV धर्मैः/NP ।/PUNC च/A -/PUNC शब्दः/NP समुच्चयार्थः/NP ।/PUNC यत्/SN विकारि/NP यः/SNV विकारः/NP यस्य/SN तत्/SSN यत्/SSN विकारि/NP ,/PUNC यतः/A यस्मात्/SN च/AVK यत्/SN ,/PUNC कार्यम्/NP उत्पद्यते/KP इति/AUD वाक्यशेषः/NP ।/PUNC सः/SN च/AVK यः/SSN क्षेत्रज्ञः/NP निर्दिष्टः/KN सः/SSN यत्/SN प्रभावः/NP ये/SN प्रभावाः/NP उपाधिकृताः/KN शक्तयः/NP यस्य/SN सः/SN यत्/SN  प्रभावः/NP च/AVK ।/PUNC तत्/SNV क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP याथात्म्यम्/NV यथाविशेषितम्/NV समासेन/NP संक्षेपेण/NV मे/SN मम/SN वाक्यतः/KN शृणु/KP ,/PUNC श्रुत्वा/KKS अवधारय/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
तत्/SN क्षेत्रक्षेत्रज्ञयाथात्म्यम्/NP विवक्षितम्/KN स्तौति/NP श्रोतृबुद्धिप्ररोचनार्थम्/NP ?/PUNC -/PUNC
ऋषिभिः/NP बहुधा/A गीतम्/NP छन्दोभिः/NP विविधैः/NP पृथक्/AUP ।/PUNC
ब्रह्म/NS सूत्रपदैः/NS च/APY एव/INTF हेतुमद्भिः/NP विनिश्चितैः/KN ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ऋषिभिः/NP वसिष्ठादिभिः/NS बहुधा/NV बहुप्रकारम्/NV गीतम्/NP कथितम्/KN ।/PUNC छन्दोभिः/NP छन्दांसि/NP ऋगादीनि/NP तैः/SNV छन्दोभिः/NP विविधैः/NV नानाभावैः/NV नानाप्रकारैः/NV पृथक्/AUP विवेकतः/KN गीतम्/NP ।/PUNC किञ्च/A ,/PUNC ब्रह्मसूत्रपदैः/NP च/AVK एव/INTF ब्रह्मणः/NS सूचकानि/NV वाक्यानि/NP ब्रह्मसूत्राणि/NS तैः/SN पद्यते/KP गम्यते/KP ज्ञायते/KP इति/AUD तानि/SNV पदानि/NP उच्यन्ते/KP तैः/SN एव/INTF च/AVK क्षेत्रक्षेत्रज्ञयाथात्म्यम्/NP '/PUNC गीतम्/NP '/PUNC इति/AUD अनुवर्तते/KP ।/PUNC '/PUNC आत्मा/NP इति/AUD एव/INTF उपासीत/KN (/PUNC बृह0/PUNC उ0/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 7/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD आदिभिः/NV ब्रह्मसूत्रपदैः/NP आत्मा/NP ज्ञायते/KP ,/PUNC हेतुमद्भिः/NV युक्तियुक्तैः/NV विनिश्चितैः/NV निःसंशयरूपैः/NV निश्चितप्रत्ययोत्पादकैः/NV इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
स्तुत्या/NP अभिमुखीभूताय/NP अर्जुनाय/NS आह/KP भगवान्/NP -/PUNC
महाभूतानि/NP अहङ्कारः/NP बुद्धिः/NP अव्यक्तम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC
इन्द्रियाणि/NP दशैकम्/SMKY च/AVK पञ्च/SMKY च/AVK इन्द्रियगोचराः/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC 
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC महाभूतानि/NP महान्ति/NP च/AVK तानि/SN सर्वविकारव्यापकत्वात्/NP भूतानि/NP च/AVK सूक्ष्माणि/NV ।/PUNC स्थूलानि/NV तु/A इन्द्रियगोचरशब्देन/NP अभिधायिष्यन्ते/KP अहंकारः/NP महाभूतकारणम्/NP अहंप्रत्ययलक्षणः/NP ।/PUNC अहंकारकारणम्/NP बुद्धिः/NP अध्यवसायलक्षणा/NP ।/PUNC तत्कारणम्/NP अव्यक्तम्/NV एव/INTF च/AVK ,/PUNC न/AN व्यक्तम्/NV अव्यक्तम्/NV अव्याकृतम्/NV ईश्वरशक्तिः/NP '/PUNC मम/SN माया/NP दुरत्यया/NP (/PUNC गीता/NS 7/PUNC ।/PUNC 14/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC एवशब्दः/NP प्रकृत्यवधारणार्थः/NP एतावति/SN एव/INTF अष्टधा/SMKY भिन्ना/NV प्रकृतिः/NP ।/PUNC च/A -/PUNC शब्दः/NP भेदसमुच्चयार्थः/NV ।/PUNC इन्द्रियाणि/NP दश/SMKY ,/PUNC श्रोत्रादीनि/NP पञ्च/SMKY बुद्ध्युत्पादकत्वात्/NP बुद्धीन्द्रियाणि/NP ,/PUNC वाक्पाण्यादीनि/NP पञ्च/SMKY कर्मनिर्वर्तकत्वात्/NP कर्मेन्द्रियाणि/NP ;/PUNC तानि/SN दश/SMK ।/PUNC कम्/SN च/AVK ;/PUNC किम्/SN तत्/SN ?/PUNC मनः/NP एकादशम्/SMKY संकल्पाद्यात्मकम्/NV ।/PUNC पञ्च/SMKY च/AVK इन्द्रियगोचराः/NV शब्दादयः/NP विषयाः/NP ।/PUNC तानि/SNV एतानि/SN सांख्याः/NS चतुर्विंशतितत्त्वानि/NP आचक्षते/KP ।।/PUNC
इच्छा/NP द्वेषः/NP सुखम्/NP दुःखम्/NP सङ्घातः/NP चेतना/NP धृतिः/NP ।/PUNC
एतत्/SNV क्षेत्रम्/NP समासेन/NP सविकारम्/NV उदाहृतम्/KN ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इच्छा/NP ,/PUNC यत्/SSN  जातीयम्/NP सुखहेतुम्/NP अर्थम्/NP ,/PUNC उपलब्धवान्/KN पूर्वम्/A ,/PUNC पुनः/A तत्/SSN जातीयम्/NP उपलभमानः/KN तम्/SNV अर्थम्/NP समादातुम्/KKS इच्छति/KP सुखहेतुः/NP इति/AUD ;/PUNC सा/SN इयम्/SNV इच्छा/NP अन्तःकरणधर्मः/NP ज्ञेयत्वात्/NP क्षेत्रम्/NP ।/PUNC तथा/AVK द्वेषः/NP ,/PUNC यत्/SSN  जातीयम्/NV अर्थम्/NP दुःखहेतुत्वेन/NP अनुभूतवान्/KN ,/PUNC पुनः/A तत्/SSN जातीयम्/NV अर्थम्/NP उपलभमानः/KN तम्/SN द्वेष्टि/NP ;/PUNC सः/SN अयम्SNV द्वेषः/NP ज्ञेयत्वात्/NP क्षेत्रम्/NP एव/INTF ।/PUNC तथा/AVK सुखम्/NP अनुकूलम्/NV प्रसन्नसत्त्वात्मकम्/NP ज्ञेयत्वात्/NP क्षेत्रम्/NP एव/INTF ।/PUNC दुःखम्/NP प्रतिकूलात्मकम्/NP ;/PUNC ज्ञेयत्वात्/NP तत्/SN अपि/A क्षेत्रम्/NP ।/PUNC संघातः/KN देहेन्द्रियाणाम्/NP संहतिः/NP ।/PUNC तस्याम्/SN अभिव्यक्तान्तःकरणवृत्तिः/NP ,/PUNC तप्तः/KN इव/ASD लोहपिण्डे/NV अग्निः/NP आत्मचैतन्याभासरसविद्धा/NV चेतना/NP ;/PUNC सा/SNV च/AVK क्षेत्रम्/NP ज्ञेयत्वात्/NP ।/PUNC धृतिः/NP यया/SN अवसादप्राप्तानि/NV देहेन्द्रियाणि/NP ध्रियन्ते/KP ;/PUNC सा/SN च/AVK ज्ञेयत्वात्/NP क्षेत्रम्/NP ।/PUNC सर्वान्तःकरणधर्मोपलक्षणार्थम्/NP इच्छादिग्रहणम्/NP ।/PUNC यतः/A उक्तम्/KN उपसंहरति/KP तत्/SNV क्षेत्रम्/NP समासेन/NP सविकारम्/NV सह/AUP विकारेण/NP महदादिना/NP उदाहृतम्/KN उक्तम्/KN ।।/PUNC
यस्य/SNV क्षेत्रभेदजातस्य/NP संहतिः/NP '/PUNC इदम्/SNV शरीरम्/NP क्षेत्रम्/NP '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ,/PUNC तत्/SNV क्षेत्रम्/NP व्याख्यातम्/KN महाभूतादिभेदभिन्नम्/NP धृत्यन्तम्/KN ।/PUNC क्षेत्रज्ञः/NP वक्ष्यमाणविशेषणः/NP -/PUNC यस्य/SN सप्रभावस्य/NP क्षेत्रज्ञस्य/NP परिज्ञानात्/NP अमृतत्वम्/NP भवति/KP ,/PUNC तम्/SN '/PUNC ज्ञेयम्/NP यत्/SSN तत्/SSN प्रवक्ष्यामि/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिना/NP सविशेषणम्/NP स्वयम्/SN एव/INTF वक्ष्यति/KP भगवान्/NP ।/PUNC अधुना/A तु/A तज्ज्ञानसाधनगणम्/NP अमानित्वादिलक्षणम्/NP ,/PUNC यस्मिन्/SN सति/A तज्ज्ञेयविज्ञाने/NP योग्यः/NP अधिकृतः/KN भवति/KP ,/PUNC यत्परः/SN संन्यासी/NP ज्ञाननिष्ठः/NV उच्यते/KP ,/PUNC तम्/SNV अमानित्वादिगणम्/NP ज्ञानसाधनत्वात्/NP ज्ञानशब्दवाच्यम्/NP विदधाति/KP भगवान्/NP -/PUNC
अमानित्वम्/NV अदम्भित्वम्/NV अहिंसा/NV क्षान्तिः/NV आर्जवम्/NV ।/PUNC
आचार्योपासनम्/NV शौचम्/NV स्थैर्यम्/NV आत्मविनिग्रहः/NV ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अमानित्वम्/NP मानिनः/NP भावः/NP मानित्वम्/NP आत्मनः/NP श्लाघनम्/NP ,/PUNC तत्/SN अभावः/NP अमानित्वम्/NP ।/PUNC अदम्भित्वम्/NP स्वधर्मप्रकटीकरणम्/NP दम्भित्वम्/NP ,/PUNC तत्/SN अभावः/NP अदम्भित्वम्/NP ।/PUNC अहिंसा/NP अहिंसनम्/NP प्राणिनाम्/NP अपीडनम्/NP ।/PUNC क्षान्तिः/NP परापराधप्राप्तौ/KN अविक्रिया/NP ।/PUNC आर्जवम्/NP ऋजुभावः/NP अवक्रत्वम्/NP ।/PUNC आचार्योपासनम्/NP मोक्षसाधनोपदेष्टुः/NP आचार्यस्य/NP शुश्रूषादिप्रयोगेण/NP सेवनम्/NP शौचम्/NP कायमलानाम्/NP मृज्जलाभ्याम्/NP प्रक्षालनम्/NP ;/PUNC अन्तः/KN च/AVK मनसः/NP प्रतिपक्षभावनया /NP रागादिमलानाम्/NP अपनयनम्/NP शौचम्/NP ।/PUNC स्थैर्यम्/NP स्थिरभावः/NP ,/PUNC मोक्षमार्गे/NP एव/INTF कृताध्यवसायत्वम्/NP ।/PUNC आत्मविनिग्रहः/NP आत्मनः/NP अपकारकस्य/NP आत्मशब्दवाच्यस्य/NP कार्यकरणसंघातस्य/NP विनिग्रहः/NP स्वभावेन/NP सर्वतः/A प्रवृत्तस्य/NP सन्मार्गे/NP एव/INTF निरोधः/NP आत्मविनिग्रहः/NP ।।/PUNC 
किञ्च/AVK -/PUNC
इन्द्रियार्थेषु/NP वैराग्यम्/NP अनहङ्कारः/NP एव/INTF च/AVK ।/PUNC
जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम्/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इन्द्रियार्थेषु/NP शब्दादिषु/NP दृष्टादृष्टेषु/NV भोगेषु/NP विरागभावः/NP वैराग्यम्/NP अनहंकारः/NP अहंकाराभावः/NP एव/INTF च/APY जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम्जन्म/NP च/APY मृत्युः/NP च/APY जरा/NP च/APY व्याधयः/NP च/APY दुःखानि/NP च/APY तेषु/SNV जन्मादिदुःखान्तेषु/NP प्रत्येकम्/A दोषानुदर्शनम्/NP ।/PUNC जन्मनि/NP गर्भवासयोनिद्वारनिःसरणम्/NV दोषः/NP ,/PUNC तस्य/SN अनुदर्शनम्/NP आलोचनम्/NP ।/PUNC तथा/AVK मृत्यौ/NP दोषानुदर्शनम्/NP ।/PUNC तथा/AVK जरायाम्/NP प्रज्ञाशक्तितेजोनिरोधदोषानुदर्शनम्/NP परिभूतता/KN च/AVK इति/AUD ।/PUNC तथा/AVK व्याधिषु/NP शिरोरोगादिषु/NP दोषानुदर्शनम्/NP ।/PUNC तथा/AVK दुःखेषु/NP अध्यात्माधिभूताधिदैवनिमित्तेषु/NP ।/PUNC अथवा/AVK दुःखानि/NP एव/INTF दोषः/NP दुःखदोषः/NP तस्य/SN जन्मादिषु/NP पूर्ववत्/ASD अनुदर्शनम्/NP -/PUNC दुःखम्/NP जन्म/NP ,/PUNC दुःखम्/NP मृत्युः/NP ,/PUNC दुःखम्/NP जरा/NP ,/PUNC दुःखम्/NP व्याधयः/NP ।/PUNC दुःखनिमित्तत्वात्/NP जन्मादयः/NP दुःखम्/NP ,/PUNC न/AN पुनः/A स्वरूपेण/NP एव/INTF दुःखम्/NP इति/AUD ।/PUNC एवम्/AUD जन्मादिषु/NP दुःखदोषानुदर्शनात्/NP देहेन्द्रियादिविषयभोगेषु/NP वैराग्यम्/NP उपजायते/KP ।/PUNC ततः/A प्रत्यगात्मनि/NP प्रवृत्तिः/NP करणानाम्/NP आत्मदर्शनाय/KKS ।/PUNC एवम्/AUD ज्ञानहेतुत्वात्/NP ज्ञानम्/NP उच्यते/KP जन्मादिदुःखदोषानुदर्शनम्/NP ।।/PUNC 
किञ्च/AVK -/PUNC
असक्तिः/NP अनभिष्वङ्गः/NP पुत्रदारगृहादिषु/NP ।/PUNC
नित्यम्/NV च/AVK समचित्तत्वम्/NP इष्टानिष्टोपपत्तिषु/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC असक्तिः/NP सक्तिः/NP सङ्गनिमित्तेषु/NV विषयेषु/NP प्रीतिमात्रम्/NP ,/PUNC तत्/SN अभावः/NP असक्तिः/NP ।/PUNC अनभिष्वङ्गः/NP अभिष्वङ्गाभावः/NP ।/PUNC अभिष्वङ्गः/NP नाम/NP आसक्तिविशेषः/NP एव/INTF अनन्यात्मभावनालक्षणः/NP ;/PUNC यथा/A अन्यस्मिन्/SNV सुखिनि/NP दुःखिनि/NP वा/APY '/PUNC अहम्/SN एव/INTF सुखी/NP ,/PUNC दुःखी/NP च/APY ,/PUNC '/PUNC जीवति/NP मृते/NP वा/APY '/PUNC अहम्/SN एव/INTF जीवामि/KP मरिष्यामि/KP च/APY '/PUNC इति/AUD ।/PUNC क्व/A इति/AUD आह/KP -/PUNC पुत्रदारगृहादिषु/NP ,/PUNC पुत्रेषु/NP दारेषु/NP गृहेषु/NP आदिग्रहणात्/NP अन्येषु/SN अपि/A अत्यन्तेष्टेषु/NP दासवर्गादिषु/NP ।/PUNC तत्/SN च/AVK उभयम्/SN ज्ञानार्थत्वात्/NP ज्ञानम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC नित्यम्/NP च/AVK समचित्तत्वम्/NP तुल्यचित्तता/NP ।/PUNC क्व/AP ?/PUNC इष्टानिष्टोपपत्तिषु/NP इष्टानाम्/NP अनिष्टानाम्/NP च/APY उपपत्तयः/NP संप्राप्तयः/NP तासु/SNV इष्टानिष्टोपपत्तिषु/NP नित्यम्/NP एव/INTF तुल्यचित्तता/NP ।/PUNC इष्टोपपत्तिषु/NP न/AN हृष्यति/KP ,/PUNC न/AN कुप्यति/KP च/AVK अनिष्टोपपत्तिषु/NP ।/PUNC तत्/SN च/AVK तत्/SN नित्यम्/NP समचित्तत्वम्/NP ज्ञानम्/NP ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
मयि/SN च/AVK अनन्ययोगेन/NP भक्तिः/NP अव्यभिचारिणी/NV ।/PUNC
विविक्तदेशसेवित्वम्/NP अरतिः/NP जनसंसदि/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मयि/SN च/AVK इश्वरे/NP अनन्ययोगेन/NP अपृथक्समाधिना/NP '/PUNC न/AN अन्यः/SNV भगवतः/NV वासुदेवात्/NS परः/SN अस्ति/KP ,/PUNC अतः/A सः/SN एव/INTF नः/SN गतिः/NP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD निश्चिता/KN अव्यभिचारिणी/NV बुद्धिः/NP अनन्ययोगः/NP ,/PUNC तेन/SN भजनम्/NP भक्तिः/NP न/AN व्यभिचरणशीला/NV अव्यभिचारिणी/NV ।/PUNC सा/SN च/AVK ज्ञानम्/NP ।/PUNC विविक्तदेशसेवित्वम्/NP ,/PUNC विविक्तः/KN स्वभावतः/KN संस्कारेण/NP वा/AVK अशुच्यादिभिः/NP सर्पव्याघ्रादिभिः/NP च/APY रहितः/KN अरण्यनदीपुलिनदेवगृहादिभिः/NP विविक्तः/KN देशः/NP ,/PUNC तम्/SN सेवितुम्/KKS शीलम्/NP अस्य/SN इति/AUD विविक्तदेशसेवी/NV ,/PUNC तद्भावः/NP विवक्तदेशसेवित्वम्/NP ।/PUNC विविक्तेषु/NV हि/A देशेषु/NP चित्तम्/NP प्रसीदति/KP यतः/AVK ततः/AVK आत्मादिभावना/NP विविक्ते/KP उपजायते/KP ।/PUNC अतः/A विविक्तदेशसेवित्वम्/NP ज्ञानम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC अरतिः/NP अरमणम्/NP जनसंसदि/NP ,/PUNC जनानाम्/NP प्राकृतानाम्/NP संस्कारशून्यानाम्/NV अविनीतानाम्/NV संसत्/NP समवायः/NP जनसंसत्/NP ;/PUNC न/AN संस्कारवताम्/NV विनीतानाम्/NV संसत्/NP ;/PUNC तस्याः/SN ज्ञानोपकारकत्वात्/NP ।/PUNC अतः/A प्राकृतजनसंसदि/NP अरतिः/NP ज्ञानार्थत्वात्/NP ज्ञानम्/NP ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वम्/NV तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्/NV ।/PUNC
एतत्/SNV ज्ञानम्/NP इति/AUD प्रोक्तम्/KN अज्ञानम्/NP यत्/SN अतः/A अन्यथा/A ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अध्यात्मज्ञाननित्यत्वम्/NV आत्मादिविषयम्/NV ज्ञानम्/NP अध्यात्मज्ञानम्/NP ,/PUNC तस्मिन्/SN नित्यभावः/NP नित्यत्वम्/NP ।/PUNC अमानित्वादीनाम्/NP ज्ञानसाधनानाम्/NP भावनापरिपाकनिमित्तम्/KN तत्त्वज्ञानम्/NP ,/PUNC तस्य/SN अर्थः/NP मोक्षः/NP संसारोपरमः/NP ;/PUNC तस्य/SN आलोचनम्/NP तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम्/NP ;/PUNC तत्त्वज्ञानफलालोचने/NP हि/A तत्साधनानुष्ठाने/NP प्रवृत्तिः/NP स्यात्/KP इति/AUD ।/PUNC तत्/SN अमानित्वादितत्त्वज्ञानार्थदर्शनान्तम्/KN उक्तम्/KN ज्ञानम्/NP इति/AUD प्रोक्तम्/KN ज्ञानार्थत्वात्/NP ।/PUNC अज्ञानम्/NP यत्/SN अतः/A अस्मात्/SN यथोक्तात्/NP अन्यथा/A विपर्ययेण/NP ।/PUNC मानित्वम्/NP दम्भित्वम्/NP हिंसा/NP अक्षान्तिः/NP अनार्जवम्/NP इत्यादि/A अज्ञानम्/NP विज्ञेयम्/NP परिहरणाय/KKS ,/PUNC संसारप्रवृत्तिकारणत्वात्/NP इति/AUD ।।/PUNC 
यथोक्तेन/NV ज्ञानेन/NP ज्ञातव्यम्/KN किम्/SN इति/AUD आकाङ्क्षायाम्/NP आह/KP -/PUNC '/PUNC ज्ञेयम्/NP यत्/SN तत्/SN '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC ननु/A यमाः/NP नियमाः/NP च/APY अमानित्वादयः/NP ।/PUNC न/AN तैः/SN ज्ञेयम्/NP ज्ञायते/KP ।/PUNC न/AN हि/A अमानित्वादि/NP कस्यचित्/A वस्तुनः/NP परिच्छेदकम्/NP दृष्टम्/KN ।/PUNC सर्वत्र/A एव/INTF च/AVK यत्/SNV विषयम्/NP ज्ञानम्/NP तत्/SSN एव/INTF तस्य/SNV ज्ञेयस्य/NP परिच्छेदकम्/NP दृश्यते/KP ।/PUNC न/AN हि/A अन्यविषयेण/NP ज्ञानेन/NP अन्यत्/SN उपलभ्यते/KP ,/PUNC यथा/A घटविषयेण/NP ज्ञानेन/NP अग्निः/NP ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ,/PUNC ज्ञाननिमित्तत्वात्/NP ज्ञानम्/NP उच्यते/KP इति/AUD हि/A अवोचाम/KP ;/PUNC ज्ञानसहकारिकारणत्वात्/NP च/AVK -/PUNC 
ज्ञेयम्/NP यत्/SSN तत्/SSN प्रवक्ष्यामि/KP यत्/SSN ज्ञात्वा/KKS अमृतमश्नुते/KP ।/PUNC
अनादिमत्परम्/NV ब्रह्म/NS न/AN सत्/NP तत्/SSN न/AN असत्/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ज्ञेयम्/NP ज्ञातव्यम्/KN यत्/SSN तत्/SSN प्रवक्ष्यामि/KP प्रकर्षेण/NP यथावत्/ASD वक्ष्यामि/KP ।/PUNC किम्/SNV फलम्/NP तत्/SN इति/AUD प्ररोचनेन/NP श्रोतुः/KKS अभिमुखीकरणाय/NP आह/KP -/PUNC यत्/SNV ज्ञेयम्/NP ज्ञात्वा/KKS अमृतम्/NP अमृतत्वम्/NP अश्नुते/KP ,/PUNC न/AN पुनः/A म्रियते/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC अनादिमत्/NP आदिः/NP अस्य/SN अस्ति/KP इति/AUD आदिमत्/NP ,/PUNC न/AN आदिमत्/NP अनादिमत्/NP ;/PUNC किम्/SN तत्/SN ?/PUNC परम्/NV निरतिशयम्/NV ब्रह्म/NS ,/PUNC '/PUNC ज्ञेयम्/NP '/PUNC इति/AUD प्रकृतम्/KN ।।/PUNC 
 अत्र/A केचित्/A '/PUNC अनादि/NV मत्परम्/NV '/PUNC इति/AUD पदम्/NP छिन्दन्ति/KP ,/PUNC बहुव्रीहिणा/NP उक्ते/KN अर्थे/NP मतुपः/NP आनर्थक्यम्/NP अनिष्टम्/NP स्यात्/KP इति/AUD ।/PUNC अर्थविशेषम्/NP च/AVK दर्शयन्ति/KP -/PUNC अहम्/SN वासुदेवाख्या/NP परा/NV शक्तिः/NP यस्य/SN तत्/SN मत्परम्/NV इति/AUD ।/PUNC सत्यम्/NP एवम्/AUD अपुनः/NP उक्तम्/KN स्यात्/KP ,/PUNC अर्थः/NP चेत्/A संभवति/KP ।/PUNC न/AN तु/A अर्थः/NP संभवति/KP ,/PUNC ब्रह्मणः/NS सर्वविशेषप्रतिषेधेन/NP एव/INTF विजिज्ञापयिषितत्वात्/NP '/PUNC न/AN सत्/NP तत्/SN न/AN असत्/NP उच्यते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC विशिष्टशक्तिमत्त्वप्रदर्शनम्/NP विशेषप्रतिषेधः/NP च/AVK इति/AUD विप्रतिषिद्धम्/KN ।/PUNC तस्मात्/SN मतुपः/NP बहुव्रीहिणा/NP समानार्थत्वे/NP अपि/A प्रयोगः/NP श्लोकपूरणार्थः/NP ।।/PUNC 
अमृतत्वफलम्/NP ज्ञेयम्/NV मया/SN उच्यते/KP इति/AUD प्ररोचनेन/NP अभिमुखीकृत्य/KKS आह/KP -/PUNC न/AN सत्/NP तत्/SN ज्ञेयम्/NP उच्यते/KP इति/AUD न/AN अपि/A असत्/NP तत्/SN उच्यते/KP ।।/PUNC
ननु/A महता/NV परिकरबन्धेन/NP कण्ठरवेण/NP उद्धुष्य/KKS '/PUNC ज्ञेयम्/NP प्रवक्ष्यामि/KP '/PUNC इति/AUD ,/PUNC अननुरूपम्/NP उक्तम्/KN '/PUNC न/AN सत्/NP तत्/SN न/AN असत्/NP उच्यते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC न/AN ,/PUNC अनुरूपम्/NP एव/INTF उक्तम्/KN ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC सर्वासु/SNV हि/A उपनिषत्सु/NS ज्ञेयम्/NP ब्रह्म/NS '/PUNC न/AN इति/AUD न/AN इति/AUD (/PUNC बृह0/PUNC उ0/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 22/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC अस्थूलमनणु/NP (/PUNC बृह0/PUNC उ0/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 8/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिविशेषप्रतिषेधेन/NP एव/INTF निर्दिश्यते/KP ,/PUNC न/AN '/PUNC इदम्/SN तत्/SN '/PUNC इति/AUD ,/PUNC वाचः/NP अगोचरत्वात्/NP ।।/PUNC 
ननु/A न/AN तत्/SN अस्ति/KP ,/PUNC यत्/SNV वस्तु/NP अस्तिशब्देन/NP न/AN उच्यते/KP ।/PUNC अथ/A अस्तिशब्देन/NP न/AN उच्यते/KP ,/PUNC न/AN अस्ति/KP तत्/SN ज्ञेयम्/NP ।/PUNC विप्रतिषिद्धम्/KN च/AVK -/PUNC '/PUNC ज्ञेयम्/NP तत्/SN '/PUNC ,/PUNC '/PUNC अस्तिशब्देन/NP न/AN उच्यते/KP '/PUNC इति/AUD च/AVK ।/PUNC न/AN तावत्/A न/AN अस्ति/KP ,/PUNC न/AN अस्ति/KP बुद्ध्यविषयत्वात्/NP ।।/PUNC 
 ननु/A सर्वाः/SNV बुद्धयः/NP अस्ति/KP न/AN अस्ति/KP बुद्ध्यनुगताः/KN एव/INTF ।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD सति/A ज्ञेयम्/NV अपि/A अस्ति/KP बुद्ध्यनुगतप्रत्ययविषयम्/NP वा/AVK स्यात्/KP ,/PUNC न/AN अस्ति/KP बुद्ध्यनुगतप्रत्ययविषयम्/NP वा/AVK स्यात्/KP ।/PUNC  न/AN ,/PUNC अतीन्द्रियत्वेन/NP उभयबुद्ध्यनुगतप्रत्ययाविषयत्वात्/NP ।/PUNC यद्धि/A इन्द्रियगम्यम्/NV वस्तु/NP घटादिकम्/NP ,/PUNC तत्/SN अस्तिबुद्ध्यनुगतप्रत्ययविषयम्/NP वा/AVK स्यात्/KP ,/PUNC न/AN अस्ति/KP बुद्ध्यनुगतप्रत्ययविषयम्/NP वा/AVK स्यात्/KP ।/PUNC इदम्/SN तु/A ज्ञेयम्/KKS अतीन्द्रियत्वेन/NP शब्दैकप्रमाणगम्यत्वात्/NP न/AN घटादिवत्/ASD उभयबुद्ध्यनुगतप्रत्ययविषयम्/NP इत्यतः/KN '/PUNC न/AN सत्/NP तत्/SN न/AN असत्/NP '/PUNC इति/AUD उच्यते/KP ।।/PUNC 
यत्/SN तु/A उक्तम्/KN -/PUNC विरुद्धम्/NP उच्यते/KP ,/PUNC '/PUNC ज्ञेयम्/NP तत्/SN '/PUNC '/PUNC न/AN सत्/NP तत्/SN न/AN असत्/NP उच्यते/KP '/PUNC इति/AUD -/PUNC न/AN विरुद्धम्/NP ,/PUNC '/PUNC अन्यत्/SN  एव/INTF तद्विदितादथो/NP अविदितादधि/NP (/PUNC के0/PUNC उ0/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS ।/PUNC श्रुतिः/NS अपि/A विरुद्धार्था/NP इति/AUD चेत्/A -/PUNC यथा/ASD यज्ञाय/NP शालाम्/NP आरभ्य/KKS '/PUNC यदि/A अमुष्मिन्/SNV लोके/NP अस्ति/KP वा/AVK न/AN वा/AVK इति/AUD (/PUNC तै0/PUNC सं0/PUNC 6/PUNC ।/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC विदिताविदिताभ्याम्/NP अन्यत्वश्रुतेः/NS अवश्यविज्ञेयार्थप्रतिपादनपरत्वात्/NP '/PUNC यदि/A अमुष्मिन्/SN '/PUNC इत्यादि/A तु/A विधिशेषः/NV अर्थवादः/NP ।/PUNC उपपत्तेः/NP च/AVK सदसदादिशब्दैः/NP ब्रह्म/NS न/AN उच्यते/KP इति/AUD ।/PUNC सर्वः/SN हि/A शब्दः/NP अर्थप्रकाशनाय/NP प्रयुक्तः/KN ,/PUNC श्रूयमाणः/KN च/AVK श्रोतृभिः/NP ,/PUNC जातिक्रियागुणसंबन्धद्वारेण/NP संकेतग्रहणसव्यपेक्षः/NP अर्थम्/NP प्रत्याययति/KP ;/PUNC न/AN अन्यथा/A ,/PUNC अदृष्टत्वात्/NP ।/PUNC तत्/SN यथा/A -/PUNC '/PUNC गौः/NP '/PUNC '/PUNC अश्वः/NP '/PUNC इति/AUD वा/AVK जातितः/KN ,/PUNC '/PUNC पचति/KP '/PUNC '/PUNC पठति/KP '/PUNC इति/AUD वा/AVK क्रियातः/KN ,/PUNC '/PUNC शुक्लः/NS '/PUNC '/PUNC कृष्णः/NS '/PUNC इति/AUD वा/AVK गुणतः/KN ,/PUNC '/PUNC धनी/NP '/PUNC '/PUNC गोमान्/NP '/PUNC इति/AUD वा/AVK संबन्धतः/KN ।/PUNC न/AN तु/A ब्रह्म/NS जातिमत्/NP ,/PUNC अतः/A न/AN सदादिशब्दवाच्यम्/NP ।/PUNC न/AN अपि/A गुणवत्/ASD ,/PUNC येन/SNV गुणशब्देन/NP उच्येत/KP ,/PUNC निर्गुणत्वात्/NP ।/PUNC न/AN अपि/A क्रियाशब्दवाच्यम्/NP निष्क्रियत्वात्/NP '/PUNC निष्कलम्/NV निष्क्रियम्/NV शान्तम्/NV (/PUNC श्वे0/PUNC उ0/PUNC 6/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS ।/PUNC न/AN च/AVK संबन्धी/NP ,/PUNC एकत्वात्/NP ।/PUNC अद्वयत्वात्/NP अविषयत्वात्/NP आत्मत्वात्/NP च/APY न/AN केनचित्/A शब्देन/NP उच्यते/KP इति/AUD युक्तम्/KN ;/PUNC '/PUNC यतः/KN वाचः/NP निवर्तन्ते/KP (/PUNC तै0/PUNC उ0/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 9/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A श्रुतिभिः/NS च/AVK ।।/PUNC 
सच्छब्दप्रत्ययाविषयत्वात्/NP असत्त्वाशङ्कायाम्/NP ज्ञेयस्य/NP सर्वप्राणिकरणोपाधिद्वारेण/NP तदस्तित्वम्/NP प्रतिपादयन्/KNV तदाशङ्कानिवृत्त्यर्थम्/NP आह/KP -/PUNC
सर्वतः/AUP पाणिपादम्/NP तत्/SN सर्वतोक्षिशिरोमुखम्/NP ।/PUNC
सर्वतः/AUP श्रुतिमत्/NP लोके/NP सर्वम्/SN आवृत्य/KKS तिष्ठति/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वतःपाणिपादम्/NP सर्वतः/AUP पाणयः/NP पादाः/NP च/APY अस्य/SN इति/AUD सर्वतः/AUP पाणिपादम्/NP तत्/SN ज्ञेयम्/KN ।/PUNC सर्वप्राणिकरणोपाधिभिः/NP क्षेत्रज्ञस्य/NP अस्तित्वम्/NP विभाव्यते/KP ।/PUNC क्षेत्रज्ञश्च/AVK क्षेत्रोपाधितः/KN उच्यते/KP ।/PUNC क्षेत्रम्/NP च/AVK पाणिपादादिभिः/NP अनेकधा/NP भिन्नम्/NP ।/PUNC क्षेत्रोपाधिभेदकृतम्/KN विशेषजातम्/KN मिथ्या/NP एव/INTF क्षेत्रज्ञस्य/NP ,/PUNC इति/AUD तदपनयनेन/NP ज्ञेयत्वम्/NP उक्तम्/KN '/PUNC न/AN सत्/NP तत्/SN न/AN असत्/NP उच्यते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC उपाधिकृतम्/KN मिथ्यारूपम्/ASD अपि/A अस्तित्वाधिगमाय/NP ज्ञेयधर्मवत्/ASD परिकल्प्य/KKS उच्यते/KP '/PUNC सर्वतः/AUP पाणिपादम्/NP '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC तथा/AVK हि/A संप्रदायविदाम्/NV वचनम्/NP -/PUNC '/PUNC अध्यारोपापवादाभ्याम्/NP निष्प्रपञ्चम्/NP प्रपञ्च्यते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC सर्वत्र/A सर्वदेहावयवत्वेन/NP गम्यमानाः/KN पाणिपादादयः/NP ज्ञेयशक्तिसद्भावनिमित्तस्वकार्याः/NP इति/AUD ज्ञेयसद्भावे/NP लिङ्गानि/NP '/PUNC ज्ञेयस्य/NP '/PUNC इति/AUD उपचारतः/KN उच्यन्ते/KP ।/PUNC तथा/AVK व्याख्येयम्/NP अन्यत्/SN ।/PUNC सर्वतः/AUP पाणिपादम्/NP तत्/SN ज्ञेयम्/NP ।/PUNC सर्वतोक्षिशिरोमुखम्/NP सर्वतः/AUP अक्षीणि/NP शिरांसि/NP मुखानि/NP च/APY यस्य/SN तत्/SN सर्वतोक्षिशिरोमुखम्/NP ;/PUNC सर्वतः/AUP श्रुतिमत्/NP श्रुतिः/NS श्रवणेन्द्रियम्/NP ,/PUNC तत्/SN यस्य/SN तत्/SN श्रुतिमत्/NP ,/PUNC लोके/NP प्राणिनिकाये/NP ,/PUNC सर्वम्/SN आवृत्य/KKS संव्याप्य/KKS तिष्ठति/KP स्थितिम्/NP लभते/KP ।।/PUNC
उपाधिभूतपाणिपादादीन्द्रियाध्यारोपणात्/NP ज्ञेयस्य/NP तद्वत्ताशङ्का/NP मा/AN भूत्/KP इति/AUD एवम्/AUD    अर्थः/NP श्लोकारम्भः/NP -/PUNC
सर्वेन्द्रियगुणाभासम्/NV सर्वेन्द्रियविवर्जितम्/NV ।/PUNC
असक्तम्/NV सर्वभृत्/NV च/APY एव/INTF निर्गुणम्/NV गुणभोक्तृ/NV च/APY ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वेन्द्रियगुणाभासम्/NP सर्वाणि/SN च/AVK तानि/SNV इन्द्रियाणि/NP श्रोत्रादीनि/NP बुद्धीन्द्रियकर्मेन्द्रियाख्यानि/NP ,/PUNC अन्तःकरणे/NP च/AVK बुद्धिमनसी/NP ,/PUNC ज्ञेयोपाधित्वस्य/NP तुल्यत्वात्/NP ,/PUNC सर्वेन्द्रियग्रहणेन/NP गृह्यन्ते/KP ।/PUNC अपि/A च/AVK ,/PUNC अन्तःकरणोपाधिद्वारेण/NP एव/INTF श्रोत्रादीनाम्/NP अपि/A उपाधित्वम्/NP इत्यतः/KN अन्तःकरणबहिष्करणोपाधिभूतैः/NP सर्वेन्द्रियगुणैः/NP अध्यवसायसंकल्पश्रवणवचनादिभिः/NP अवभासते/KP इति/AUD सर्वेन्द्रियगुणाभासम्/NP सर्वेन्द्रियव्यापारैः/NP व्यापृतम्/KN इव/ASD तत्/SN ज्ञेयम्/NP इत्यर्थः/NP ;/PUNC '/PUNC ध्यायति/KP इव/ASD लेलायति/KP इव/ASD (/PUNC बृह0/PUNC उ0/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 7/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/NS ।/PUNC कस्मात्/SN पुनः/A कारणात्/NP न/AN व्यापृतम्/KN एव/INTF इति/AUD गृह्यते/KP इत्यतः/KN आह/KP -/PUNC सर्वेन्द्रियविवर्जितम्/KN ,/PUNC सर्वकरणरहितम्/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC अतः/A न/AN करणव्यापारैः/NP व्यापृतम्/KN तत्/SN ज्ञेयम्/NP ।/PUNC यः/SN तु/A अयम्/SNV मन्त्रः/NP -/PUNC '/PUNC अपाणिपादः/NP जवनः/NP ग्रहीता/KN पश्यति/KP अचक्षुः/NP सः/SN शृणोति/KP अकर्णः/NP (/PUNC श्वे0/PUNC उ0/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिः/A ,/PUNC सः/SN सर्वेन्द्रियोपाधिगुणानुगुण्यभजनशक्तिमत्/NP तत्/SN ज्ञेयम्/NP इति/AUD एवम्/AUD प्रदर्शनार्थः/NP ,/PUNC न/AN तु/A साक्षात्/NP एव/INTF जवनादिक्रियावत्त्वप्रदर्शनार्थः/NP ।/PUNC '/PUNC अन्धः/NP मणिम्/NP अविन्दत्/KP (/PUNC तै0/PUNC आ0/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 11/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A मन्त्रार्थवत्/ASD तस्य/SNV मन्त्रस्य/NP अर्थः/NP ।/PUNC यस्मात्/SN सर्वकरणवर्जितम्/KN ज्ञेयम्/NP ,/PUNC तस्मात्/SN असक्तम्/KN सर्वसंश्लेषवर्जितम्/KN ।/PUNC यद्यपि/AVK एवम्/AUD ,/PUNC तथापि/AVK सर्वभृत्/NP च/AVK एव/INTF ।/PUNC सदास्पदम्/NP हि/A सर्वम्/SN सर्वत्र/A सद्बुद्ध्यनुगमात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A मृगतृष्णिकादयः/A अपि/A निरास्पदाः/NV भवन्ति/KP ।/PUNC अतः/A सर्वभृत्/NP सर्वम्/A बिभर्ति/KP इति/AUD ।/PUNC स्यात्/KP इदम्/SN च/AVK अन्यत्/SN ज्ञेयस्य/NP सत्त्वाधिगमद्वारम्/NP -/PUNC निर्गुणम्/NP सत्त्वरजस्तमांसि/NV गुणाः/NP तैः/SN वर्जितम्/KN तत्/SN ज्ञेयम्/NP ,/PUNC तथापि/AVK गुणभोक्तृ/NP च/AVK गुणानाम्/NP सत्त्वरजस्तमसाम्/NS शब्दादिद्वारेण/NP सुखदुःखमोहाकारपरिणतानाम्/NP भोक्तृ/NP च/AVK उपलब्धृ/NP च/AVK तत्/SN ज्ञेयम्/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
किञ्च/AVK -/PUNC
बहिः/NP अन्तः/NP च/APY भूतानाम्/NP अचरम्/NP चरम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC
सूक्ष्मत्वात्/NP तत्/SN अविज्ञेयम्/NP दूरस्थम्/NP च/APY अन्तिके/NP च/APY तत्/SN ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC बहिः/NP त्वक्पर्यन्तम्/KN देहम्/NP आत्मत्वेन/NP अविद्याकल्पितम्/KN अपेक्ष्य/KKS तम्/SN एव/INTF अवधिम्/NP कृत्वा/KKS बहिः/NP उच्यते/KP ।/PUNC तथा/AVK प्रत्यगात्मानम्/NP अपेक्ष्य/KKS देहम्/NP एव/INTF अवधिम्/NP कृत्वा/KKS अन्तः/KN उच्यते/KP ।/PUNC '/PUNC बहिः/NP अन्तः/NP च/APY '/PUNC इति/AUD उक्ते/KN मध्ये/NP अभावे/NP प्राप्ते/KN ,/PUNC इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC अचरम्/NP चरम्/NP एव/INTF च/APY ,/PUNC यत्/SNV चराचरम्/NP देहाभासम्/NP अपि/A तत्/SN एव/INTF ज्ञेयम्/NP यथा/ASD रज्जुसर्पाभासः/NP ।/PUNC यदि/A अचरम्/NP चरम्/NP एव/INTF च/APY स्यात्/KP व्यवहारविषयम्/NP सर्वम्/SN ज्ञेयम्/NP ,/PUNC किमर्थम्/AP '/PUNC इदम्/SN '/PUNC इति/AUD सर्वैः/SN न/AN विज्ञेयम्/NP इति/AUD ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC सत्यम्/NP सर्वाभासम्/NP तत्/SN ;/PUNC तथापि/AVK व्योमवत्/ASD सूक्ष्मम्/NP ।/PUNC अतः/A सूक्ष्मत्वात्/NP स्वेन/NP रूपेण/ASD तत्/SN ज्ञेयम्/NP अपि/A अविज्ञेयम्/NP अविदुषाम्/NP ।/PUNC विदुषाम्/NP तु/A ,/PUNC '/PUNC आत्मा/NP एव/INTF इदम्/SNV सर्वम्/SN (/PUNC छा0/PUNC उ0/PUNC 7/PUNC ।/PUNC 25/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC ब्रह्म/NS एव/INTF इदम्/SNV सर्वम्/SN (/PUNC बृ0/PUNC उ0/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 5/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिप्रमाणतः/KN नित्यम्/NV विज्ञातम्/KN ।/PUNC अविज्ञाततया/NP दूरस्थम्/NP वर्षसहस्रकोट्या/NP अपि/A अविदुषाम्/NP अप्राप्यत्वात्/NP ।/PUNC अन्तिके/AUP च/AVK तत्/SN ,/PUNC आत्मत्वात्/NP विदुषाम्/NP ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
अविभक्तम्/KN च/AVK भूतेषु/NP विभक्तम्/KN इव/ASD च/AVK स्थितम्/KN ।/PUNC
भूतभर्तृ/NP च/AVK तत्/SN ज्ञेयम्/NP ग्रसिष्णु/NS प्रभविष्णु/NS च/APY ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अविभक्तम्/KN च/AVK प्रति/AUP देहम्/NP व्योमवत्/ASD तत्/SN एकम्/SMK ।/PUNC भूतेषु/NP सर्व/SNV प्राणिषु/NP विभक्तम्/KN इव/ASD च/AVK स्थितम्/KN देहेषु/NP एव/INTF विभाव्यमानत्वात्/NP ।/PUNC भूतभर्तृ/NP च/AVK भूतानि/NP बिभर्ति/KP इति/AUD तत्/SN ज्ञेयम्/NP भूतभर्तृ/NP च/AVK स्थितिकाले/NP ।/PUNC प्रलयकाले/NP गृसिष्णु/NS ग्रसनशीलम्/NV ।/PUNC उत्पत्तिकाले/NP प्रभविष्णु/NS च/AVK प्रभवनशीलम्/NV यथा/ASD रज्ज्वादिः/NP सर्पादेः/NP मिथ्याकल्पितस्य/NP ।।/PUNC 
किञ्च/AVK ,/PUNC सर्वत्र/A विद्यमानम्/KN अपि/A सत्/NP न/AN उपलभ्यते/KP चेत्/A ,/PUNC ज्ञेयम्/NP तमः/NP तर्हि/AP ?/PUNC न/AN ।/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC -/PUNC
ज्योतिषाम्/NP अपि/A तत्र/A ज्योतिः/NP तमसः/NP परम्/NV उच्यते/KP ।/PUNC ज्ञानम्/NP ज्ञेयम्/NP ज्ञानगम्यम्/KKS हृदि/NP सर्वस्य/SN विष्ठितम्/KN ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC 
13/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ज्योतिषाम्/NP आदित्यादीनाम्/NS अपि/A तत्/SN ज्ञेयम्/NP ज्योतिः/NP ।/PUNC आत्मचैतन्यज्योतिषा/NP इद्धानि/SN हि/A आदित्यादीनि/NS ज्योतींषि/NP दीप्यन्ते/KP ,/PUNC '/PUNC येन/SN सूर्यः/NP तपति/KP तेजसा/NP इद्धः/KN '/PUNC '/PUNC तस्य/SN भासा/NP सर्वम्/SN इदम्/SN विभाति/KP (/PUNC श्वे0/PUNC उ0/PUNC 6/PUNC ।/PUNC 14/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिश्रुतिभ्यः/NS ;/PUNC स्मृतेः/NS च/APY इह/A एव/INTF -/PUNC '/PUNC यदादित्यगतम्/KN तेजः/NP '/PUNC इत्यादेः/A ।/PUNC तमसः/NP अज्ञानात्/NP परम्/NV अस्पृष्टम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC ज्ञानादेः/NP दुःसंपादनबुद्ध्या/NP प्राप्तावसादस्य/NP उत्तम्भनार्थम्/NP आह/KP -/PUNC ज्ञानम्/NP अमानित्वादि/A ;/PUNC ज्ञेयम्/NP '/PUNC ज्ञेयम्/NP यत्/SSN तत्/SSN प्रवक्ष्यामि/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिना/A उक्तम्/KN ;/PUNC ज्ञानगम्यम्/KKS ज्ञेयम्/NP एव/INTF ज्ञातम्/KN सत्/NP ज्ञानफलम्/NP इति/AUD ज्ञानगम्यम्/KKS उच्यते/KP ;/PUNC ज्ञायमानम्/KN तु/A ज्ञेयम्/NP ।/PUNC तत्/SN एतत्/SNV त्रयम्/SMKY अपि/A हृदि/NP बुद्धौ/NP सर्वस्य/SNV प्राणिजातस्य/NP विष्ठितम्/KN विशेषेण/NV स्थितम्/KN ।/PUNC तत्र/A एव/INTF हि/A त्रयम्/SMK विभाव्यते/KP ।।/PUNC 
यथोक्तार्थोपसंहारार्थः/NP अयम्/SNV श्लोकः/NP आरभ्यते/KP -/PUNC 
इति/AUD क्षेत्रम्/NP तथा/AVK ज्ञानम्/NP ज्ञेयम्/NP च/APY उक्तम्/KN समासतः/KN ।/PUNC
मद्भक्तः/NP एतत्/SN विज्ञाय/KKS मद्भावाय/NP उपपद्यते/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इति/AUD एवम्/AUD क्षेत्रम्/NP महाभूतादि/NP धृत्यन्तम्/KN तथा/AVK ज्ञानम्/NP अमानित्वादि/NP तत्त्वज्ञानार्थदर्शनपर्यन्तम्/KN ज्ञेयम्/NP च/AVK '/PUNC ज्ञेयम्/NP यत्/SSN तत्/SSN '/PUNC इत्यादि/A '/PUNC तमसः/NP परम्/NV उच्यते/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 17/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD अन्तम्/NP उक्तम्/KN समासतः/NV संक्षेपतः/NV ।/PUNC एतावान्/SN सर्वः/SN हि/A वेदार्थः/NP गीतार्थः/NP च/APY उपसंहृत्य/KKS उक्तः/KN ।/PUNC अस्मिन्/SNV सम्यग्दर्शने/NP कः/SN अधि/AUP क्रियते/KP ?/PUNC इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC मद्भक्तः/NP मयि/SNV ईश्वरे/NP सर्वज्ञे/NV परमगुरौ/NV वासुदेवे/NS समर्पितसर्वात्मभावः/NP यत्/SN पश्यति/KP शृणोति/KP स्पृशति/KP वा/APY '/PUNC सर्वम्/SN एव/INTF भगवान्/NV वासुदेवः/NS '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD ग्रहाविष्ट/NV बुद्धिः/NP मद्भक्तः/NP ।/PUNC सः/SN एतत्/SN यथोक्तम्/KN सम्यग्दर्शनम्/NP विज्ञाय/KKS ,/PUNC मद्भावाय/NP मम/SN भावः/NP मद्भावः/NP परमात्म/NV भावः/NP तस्मै/SN मद्भावाय/NP उपपद्यते/KP मोक्षम्/NP गच्छति/KP ।।/PUNC
तत्र/A सप्तमे/SMKP ईश्वरस्य/NP द्वे/SMKY प्रकृती/NP उपन्यस्ते/KP ,/PUNC परापरे/SN क्षेत्रक्षेत्रज्ञलक्षणे/NP ;/PUNC '/PUNC एतद्योनीनि/NV भूतानि/NP '/PUNC इति/AUD च/AVK उक्तम्/KN ।/PUNC क्षेत्रक्षेत्रज्ञप्रकृतिद्वययोनित्वम्/NP कथम्/AP भूतानाम्/NP इति/AUD अयम्/SNV अर्थः/NP अधुना/A उच्यते/KP -/PUNC 
प्रकृतिम्/NP पुरुषम्/NP च/APY एव/INTF विद्धि/KP अनादी/NV उभौ/SN अपि/A ।/PUNC
विकारान्/NP च/AVK गुणान्/NP च/APY एव/INTF विद्धि/KP प्रकृतिसंभवान्/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रकृतिम्/NP पुरुषम्/NP च/APY एव/INTF ईश्वरस्य/NP प्रकृती/NP तौ/SNV प्रकृतिपुरुषौ/NP उभौ/SN अपि/A अनादि/NV विद्धि/KP ,/PUNC न/AN विद्यते/KP आदिः/NP ययोः/SSN तौ/SSN अनादी/NV ।/PUNC नित्येश्वरत्वात्/NP ईश्वरस्य/NP तत्प्रकृत्योः/NP अपि/A युक्तम्/KN नित्यत्वेन/NP भवितुम्/KKS ।/PUNC प्रकृतिद्वयवत्त्वम्/NP एव/INTF हि/A ईश्वरस्य/NP ईश्वरत्वम्/NP ।/PUNC याभ्याम्/SNV प्रकृतिभ्याम्/NP ईश्वरः/NP जगदुत्पत्तिस्थितिप्रलयहेतुः/NP ,/PUNC ते/SNV द्वे/SMKY अनादी/NV सत्यौ/NV संसारस्य/NP कारणम्/NP ।।/PUNC 
न/AN आदी/NV अनादी/NV इति/AUD तत्पुरुषसमासम्/NP केचित्/A वर्णयन्ति/KP ।/PUNC तेन/SN हि/A किल/A ईश्वरस्य/NP कारणत्वम्/NP सिध्यति/KP ।/PUNC यदि/AVK पुनः/A प्रकृतिपुरुषौ/NS एव/INTF नित्यौ/NV स्याताम्/KP तत्कृतम्/KN एव/INTF जगत्/NP न/AN ईश्वरस्य/NP जगतः/NP कर्तृत्वम्/NP ।/PUNC तत्/SN असत्/NP ;/PUNC प्राक्/A प्रकृतिपुरुषयोः/NP उत्पत्तेः/NP ईशितव्याभावात्/NP ईश्वरस्य/NP अनीश्वरत्वप्रसङ्गात्/NP ,/PUNC संसारस्य/NP निर्निमित्तत्वे/NP अनिर्मोक्षप्रसङ्गात्/NP शास्त्रानर्थक्यप्रसङ्गात्/NP बन्धमोक्षाभावप्रसङ्गात्/NP च/APY ।/PUNC नित्यत्वे/NP पुनः/A ईश्वरस्य/NP प्रकृत्योः/NP सर्वम्/SN एतत्/SN उपपन्नम्/KN भवेत्/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC विकारान्/NP च/APY गुणान्/NP च/APY एव/INTF वक्ष्यमाणान्/NV विकारान्/NP बुद्ध्यादिदेहेन्द्रियान्तान्/NV गुणान्/NP च/APY सुखदुःखमोहप्रत्ययाकारपरिणतान्/NP विद्धि/KP जानीहि/KP प्रकृतिसंभवान्/NP ,/PUNC प्रकृतिः/NP ईश्वरस्य/NP विकारकारणशक्तिः/NP त्रिगुणात्मिका/NV माया/NP ,/PUNC सा/SN संभवः/NP येषाम्/SNV विकाराणाम्/NP गुणानाम्/NP च/APY तान्/SNV विकारान्/NP गुणान्/NP च/APY विद्धि/KP प्रकृतिसंभवान्/NP प्रकृतिपरिणामान्/NP ।।/PUNC
के/SN पुनः/A ते/SN विकाराः/NP गुणाः/NP च/APY प्रकृतिसंभवाः/NP -/PUNC

कार्यकारणकर्तृत्वे/NP हेतुः/NP प्रकृतिः/NP उच्यते/KP ।/PUNC
पुरुषः/NP सुखदुःखानाम्/NP भोक्तृत्वे/NP हेतुः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कार्यकरणकर्तृत्वे/NP कार्यम्/NP शरीरम्/NP करणानि/NP तत्/SNV स्थानि/NP त्रयोदश/SMKP ।/PUNC देहस्य/NP आरम्भकाणि/NP भूतानि/NP पञ्च/SMKY विषयाः/NP च/AVK प्रकृतिसंभवाः/NV विकाराः/NP पूर्वोक्ताः/KN इह/A कार्यग्रहणेन/NP गृह्यन्ते/KP ।/PUNC गुणाः/NP च/AVK प्रकृतिसंभवाः/NV सुखदुःखमोहात्मकाः/NV करणाश्रयत्वात्/NP करणग्रहणेन/NP गृह्यन्ते/KP ।/PUNC तेषाम्/SN कार्यकरणानाम्/NP कर्तृत्वम्/NP उत्पादकत्वम्/NP यत्/SSN तत्/SSN कार्यकरणकर्तृत्वम्/NP तस्मिन्/SNV कार्यकरणकर्तृत्वे/NP हेतुः/NP कारणम्/NP आरम्भकत्वेन/NP प्रकृतिः/NP उच्यते/KP ।/PUNC एवम्/AUD कार्यकरणकर्तृत्वेन/NP संसारस्य/NP कारणम्/NP प्रकृतिः/NP ।/PUNC कार्यकारणकर्तृत्वे/NP इति/AUD अस्मिन्/SNV अपि/A पाठे/NP ,/PUNC कार्यम्/NP यत्/SSN यस्य/SSN विपरिणामः/NP तत्/SSN तस्य/SSN कार्यम्/NP विकारः/NP विकारि/NP कारणम्/NP तयोः/SNV विकारविकारिणोः/NP कार्यकारणयोः/NP कर्तृत्वे/NP इति/AUD ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC षोडश/SMKY विकाराः/NP कार्यम्/NP सप्त/SMKY प्रकृतिविकृतयः/NP कारणम्/NP तानि/SN एव/INTF कार्यकारणानि/NP उच्यन्ते/KP तेषाम्/SN कर्तृत्वे/NP हेतुः/NP प्रकृतिः/NP उच्यते/KP ,/PUNC आरम्भकत्वेन/NP एव/INTF ।/PUNC पुरुषः/NP च/AVK संसारस्य/NP कारणम्/NP यथा/A स्यात्/KP तत्/SN उच्यते/KP -/PUNC पुरुषः/NP जीवः/NP क्षेत्रज्ञः/NP भोक्ता/NP इति/AUD पर्यायः/NP ,/PUNC सुखदुःखानाम्/NP भोग्यानाम्/NP भोक्तृत्वे/NP उपलब्धृत्वे/NP हेतुः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 
 कथम्/A पुनः/A अनेन/SNV कार्यकरणकर्तृत्वेन/NP सुखदुःखभोक्तृत्वेन/NP च/APY प्रकृतिपुरुषयोः/NP संसारकारणत्वम्/NP उच्यते/KP इति/AUD ,/PUNC अत्र/A उच्यते/KP -/PUNC कार्यकरणसुखदुःखरूपेण/ASD हेतुफलात्मना/NV प्रकृतेः/NP परिणामाभावे/NP ,/PUNC पुरुषस्य/NP च/AVK चेतनस्य/NP असति/KP तदुपलब्धृत्वे/NP ,/PUNC कुतः/AP संसारः/NP स्यात्/KP ?/PUNC यदा/AVK पुनः/A कार्यकरणसुखदुःखस्वरूपेण/ASD हेतुफलात्मना/NP परिणतया/NP प्रकृत्या/NP भोग्यया/NV पुरुषस्य/NP तद्विपरीतस्य/NP भोक्तृत्वे/NP न/AN अविद्यारूपः/NV संयोगः/NP स्यात्/KP ,/PUNC तदा/AVK संसारः/NP स्यात्/KP  इति/AUD ।/PUNC अतः/A यत्/SNV प्रकृतिपुरुषयोः/NP कार्यकरणकर्तृत्वेन/NP सुखदुःखभोक्तृत्वेन/NP च/APY संसारकारणत्वम्/NP उक्तम्/KN ,/PUNC तत्/SN युक्तम्/KN ।/PUNC कः/SN पुनः/A अयम्/SNV संसारः/NP नाम/NP ?/PUNC सुखदुःखसंभोगः/NV संसारः/NP ।/PUNC पुरुषस्य/NP च/AVK सुखदुःखानाम्/NP संभोक्तृत्वम्/NV संसारित्वम्/NP इति/AUD ।।/PUNC 
यत्/SSN पुरुषस्य/NP सुखदुःखानाम्/NP भोक्तृत्वम्/NV संसारित्वम्/NP इति/AUD उक्तम्/KN तस्य/SN तत्/SSN किम्/SN निमित्तम्/KN इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
पुरुषः/NP प्रकृतिस्थः/NP हि/A भुङ्क्ते/KP प्रकृतिजान्/NV गुणान्/NP ।/PUNC
कारणम्/NP गुणसङ्गः/NP अस्य/SN सदसद्योनिजन्मसु/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC -/PUNC पुरुषः/NP भोक्ता/NV प्रकृतिस्थः/NP प्रकृतौ/NP अविद्यालक्षणायाम्/NP कार्यकरणरूपेण/ASD परिणतायाम्/NP स्थितः/KN प्रकृतिस्थः/NP ,/PUNC प्रकृतिम्/NP आत्मत्वेन/NP गतः/KN इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC हि/A यस्मात्/SSN ,/PUNC तस्मात्/SSN भुङ्क्ते/KP उपलभते/KP इति/AUD अर्थः/NP ।/PUNC प्रकृतिजान्/NP प्रकृतितः/KN जातान्/NP सुखदुःखमोहाकाराभिव्यक्तान्/NV गुणान्/NP '/PUNC सुखी/NV ,/PUNC दुःखी/NV ,/PUNC मूढः/NV ,/PUNC पण्डितः/NV अहम्/SN '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD ।/PUNC सत्याम्/NP अपि/A अविद्यायाम्/NP सुखदुःखमोहेषु/NV गुणेषु/NP भुज्यमानेषु/NP यः/SSN सङ्गः/NP आत्मभावः/NP संसारस्य/NP सः/SSN प्रधानम्/NV कारणम्/NP जन्मनः/NP ,/PUNC '/PUNC सः/SSN यथाकामः/NP भवति/NP तत्/SNV क्रतुः/NP भवति/KP (/PUNC बृह0/PUNC उ0/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 5/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A श्रुतेः/NS ।/PUNC तत्/SN एतत्/SNV आह/KP -/PUNC कारणम्/NP हेतुः/NP गुणसङ्गः/NP गुणेषु/NP सङ्गः/NP अस्य/SNV पुरुषस्य/NP भोक्तुः/NP सदसद्योनिजन्मसु/NP ,/PUNC सत्यः/NP च/AVK असत्यः/NP च/APY योनयः/NP सदसद्योनयः/NP तासु/SNV सदसद्योनिषु/NP जन्मानि/NP सदसद्योनिजन्मानि/NP ,/PUNC तेषु/SNV सदसद्योनिजन्मसु/NP विषयभूतेषु/NV कारणम्/NP गुणसङ्गः/NP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC सदसद्योनिजन्मसु/NP अस्य/SNV संसारस्य/NP कारणम्/NP गुणसङ्गः/NP इति/AUD संसारपदम्/NP अध्याहार्यम्/NP ।/PUNC सद्योनयः/NS देवादियोनयः/NS ;/PUNC असद्योनयः/NS पश्वादियोनयः/NS ।/PUNC सामर्थ्यात्/NP सदसद्योनयः/NS मनुष्ययोनयः/NS अपि/A अविरुद्धाः/KN द्रष्टव्याः/KN ।।/PUNC 
एतत्/SN उक्तम्/KN भवति/KP -/PUNC प्रकृतिस्थत्वाख्या/NV अविद्या/NP ,/PUNC गुणेषु/NP च/AVK सङ्गः/NP कामः/NP ,/PUNC संसारस्य/NP कारणम्/NP इति/AUD ।/PUNC तत्/SN च/AVK परिवर्जनाय/NP उच्यते/KP ।/PUNC अस्य/SN च/AVK निवृत्तिकारणम्/NP ज्ञानवैराग्ये/NP ससंन्यासे/NP गीताशास्त्रे/NP प्रसिद्धम्/KN ।/PUNC तत्/SN च/AVK ज्ञानम्/NP पुरस्तात्/NP उपन्यस्तम्/KN  क्षेत्रक्षेत्रज्ञविषयम्/NP '/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS अमृतम्/NP अश्नुते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK अन्यापोहेन/NP अतद्धर्माध्यारोपेण/NP च/APY ।।/PUNC
तस्य/SN एव/INTF पुनः/A साक्षात्/NV निर्देशः/NP क्रियते/KP -/PUNC
उपद्रष्टा/NV अनुमन्ता/NV च/APY भर्ता/NP भोक्ता/NP महेश्वरः/NS ।/PUNC
परमात्मा/NP इति/AUD च/AVK अपि/A उक्तः/KN देहे/NP अस्मिन्/SNV पुरुषः/NP परः/SN ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC -/PUNC उपद्रष्टा/NP समीपस्थः/NP सन्/A द्रष्टा/NP स्वयम्/SN अव्यापृतः/KN ।/PUNC यथा/ASD ऋत्विग्यजमानेषु /NP यज्ञकर्मव्यापृतेषु/NP तटस्थः/NP अन्यः/SN अव्यापृतः/KN यज्ञविद्याकुशलः/NV ऋत्विग्यजमान/NP व्यापारगुणदोषाणाम्/NP ईक्षिता/KN ,/PUNC तद्वत्/ASD च/AVK कार्यकरणव्यापारेषु/NP अव्यापृतः/KN अन्यः/SN तत्/SN विलक्षणः/NP तेषाम्/SN  कार्यकरणानाम्/NP सर्वव्यापाराणाम्/NP सामीप्येन/NP द्रष्टा/NP उपद्रष्टा/NP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC देहचक्षुर्मनोबुद्ध्यात्मानः/NP द्रष्टारः/NP ,/PUNC तेषाम्/SN बाह्यः/NV द्रष्टा/NP देहः/NP ,/PUNC ततः/A आरभ्य/KKS अन्तरतमः/NP च/AVK प्रत्यक्/A समीपे/AUP आत्मा/NP द्रष्टा/NV ,/PUNC यतः/KN परः/SN अन्तरतमः/NP न/AN अस्ति/KP द्रष्टा/NV ;/PUNC सः/SN अतिशय/NV सामीप्येन/NP द्रष्टृत्वात्/NP उपद्रष्टा/NP स्यात्/KP ।/PUNC यज्ञोपद्रष्टृवत्/ASD वा/AVK सर्वविषयीकरणात्/NP उपद्रष्टा/NP ।/PUNC अनुमन्ता/KN च/AVK ,/PUNC अनुमोदनम्/NP अनुमननम्/NP कुर्वत्सु/KP तत्/SN क्रियासु/NP परितोषः/NP ,/PUNC तत्/SN कर्ता/NP अनुमन्ता/NP च/APY ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC अनुमन्ता/NP ,/PUNC कार्यकरणप्रवृत्तिषु/NP स्वयम्/SN अप्रवृत्तः/KN अपि/A प्रवृत्तः/KN इव/ASD तत्/SN अनुकूलः/NP विभाव्यते/KP ,/PUNC तेन/SN अनुमन्ता/KN ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC प्रवृत्तान्/NP स्वव्यापारेषु/NP तत्/SN साक्षिभूतः/KN कदाचित्/A अपि/A न/AN निवारयति/KP इति/AUD अनुमन्ता/KN ।/PUNC भर्ता/NP ,/PUNC भरणम्/NP नाम/NP देहेन्द्रियमनोबुद्धीनाम्/NP संहतानाम्/NP चैतन्यात्मपारार्थ्येन/NP निमित्तभूतेन/NP चैतन्याभासानाम्/NP यत्/SSN स्वरूपधारणम्/NP ,/PUNC तत्/SSN चैतन्यात्मकृतम्/KN एव/INTF इति/AUD भर्ता/NP आत्मा/NP इति/AUD उच्यते/KP ।/PUNC भोक्ता/NP ,/PUNC अग्न्युष्णवत्/ASD ,/PUNC नित्यचैतन्यस्वरूपेण/ASD बुद्धेः/NP सुखदुःखमोहात्मकाः/NV प्रत्ययाः/NP सर्वविषयविषयाः/NP चैतन्यात्मग्रस्ताः/KN इव/ASD जायमानाः/KN विभक्ताः/KN विभाव्यन्ते/KP इति/AUD भोक्ता/NP आत्मा/NP उच्यते/KP ।/PUNC महेश्वरः/NS ,/PUNC सर्वात्मत्वात्/NP स्वतन्त्रत्वात्/NP च/APY महान्/NV ईश्वरः/NP च/APY इति/AUD महेश्वरः/NP ।/PUNC परमात्मा/NP ,/PUNC देहादीनाम्/NP बुद्ध्यन्तानाम्/NP प्रत्यगात्मत्वेन/NP कल्पितानाम्/NP अविद्यया/NP परमः/NV उपद्रष्टृत्वादिलक्षणः/NP आत्मा/NP इति/AUD परमः/NV आत्मा/NP ।/PUNC '/PUNC सः/SN अन्तः/NV परमात्मा/NP '/PUNC इति/AUD अनेन/SNV शब्देन/NP च/AVK अपि/A उक्तः/KN कथितः/KN श्रुतौ/NS ।/PUNC क्व/AP असौ/KP ?/PUNC अस्मिन्/SNV देहे/NP पुरुषः/NP परः/SN अव्यक्तात्/NP ,/PUNC '/PUNC उत्तमः/NV पुरुषः/NP तु/A अन्यः/SNV परमात्मा/NP इति/AUD उदाहृतः/KN (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 17/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD यः/SN वक्ष्यमाणः/KN ।।/PUNC
'/PUNC क्षेत्रज्ञम्/NP च/AVK अपि/A माम्/SN विद्धि/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD उपन्यस्तः/KN व्याख्याय/NP उपसंहृतः/KN च/AVK ,/PUNC तम्/SN एतम्/SN यथोक्त/KN लक्षणम्/NP आत्मानम्/NP -/PUNC
यः/SN एवम्/AUD वेत्ति/KP पुरुषम्/NP प्रकृतिम्/NP च/APY गुणैः/NP सह/AUP ।/PUNC
सर्वथा/A वर्तमानः/KN अपि/A न/AN सः/SN भूयः/A अभि/AUP जायते/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SN एवम्/AUD यथोक्त/KN प्रकारेण/NP वेत्ति/KP पुरुषम्/NP  साक्षात्/A अहम्/SN इति/AUD प्रकृतिम्/NP च/AVK यथोक्ताम्/NP अविद्यालक्षणाम्/NP गुणैः/NP स्वविकारैः/NP सह/AUP निवर्तिताम्/NV अभावम्/NP आपादिताम्/NV विद्यया/NP ,/PUNC सर्वथा/A सर्व/SNV प्रकारेण/NP वर्तमानः/KN अपि/A सः/SN भूयः/A पुनः/A पतिते/KN अस्मिन्/SNV विद्वच्छरीरे/NP देहान्तराय/NP न/AN अभि/AUP जायते/KP न/AN उत्पद्यते/KP ,/PUNC देहान्तरम्/NP न/AN गृह्णाति/KP इति/AUD अर्थः/NP ।/PUNC अपि/A शब्दात्/NP किमु/SN वक्तव्यम्/KN स्ववृत्तस्थः/NP न/AN जायते/KP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।।/PUNC 
ननु/A ,/PUNC यद्यपि/AVK ज्ञानोत्पत्त्यनन्तरम्/NP पुनः/A जन्माभावः/NP उक्तः/KN ,/PUNC तथापि/AVK प्राक्/A ज्ञानोत्पत्तेः/NP कृतानाम्/NP कर्मणाम्/NP उत्तरकालभाविनाम्/NP  च/APY ,/PUNC यानि/AVK च/AVK अतिक्रान्तानेकजन्मकृतानि/NP तेषाम्/SN च/AVK ,/PUNC फलम्/NP अदत्त्वा/KKS नाशः/NP न/AN युक्तः/KN इति/AUD ,/PUNC स्युः/KP त्रीणि/SMKY जन्मानि/NP ,/PUNC कृतविप्रणाशः/NP  हि/A न/AN युक्तः/KN इति/AUD ,/PUNC यथा/ASD फले/NP प्रवृत्तानाम्/NP आरब्धजन्मनाम्/NP  कर्मणाम्/NP ।/PUNC न/AN च/AVK कर्मणाम्/NP विशेषः/KV अवगम्यते/KP ।/PUNC तस्मात्/SN त्रि/SMKY प्रकाराणि/NP अपि/A कर्माणि/NP त्रीणि/SMKY जन्मानि/NP आरभेरन्/KP ;/PUNC संहतानि/NP वा/AVK सर्वाणि/SN एकम्/SMKY जन्म/NP आरभेरन्/KP ।/PUNC अन्यथा/A कृतविनाशे/NP सति/A सर्वत्र/A अनाश्वासप्रसङ्गः/NP ,/PUNC शास्त्रानर्थक्यम्//NP च/AVK स्यात्/KP ।/PUNC इति/AUD अतः/A इदम्/SN अयुक्तम्/NV उक्तम्/KN '/PUNC न/AN सः/SN भूयः/A अभि/AUP जायते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC न/AN ;/PUNC '/PUNC क्षीयन्ते/KP च/AVK अस्य/SNV कर्माणि/NP (/PUNC मु0/PUNC उ0/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 8/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC ब्रह्म/NS वेद/NS ब्रह्म/NS एव/INTF भवति/KP (/PUNC मु0/PUNC उ0/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 9/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC तस्य/SN तावत्/A एव/INTF चिरम्/A (/PUNC छा0/NS उ0/NS 6/PUNC ।/PUNC 14/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC इषीकातूलवत्/ASD सर्वाणि/SNV कर्माणि/NP प्रदूयन्ते/KP (/PUNC छा0/PUNC उ0/PUNC 5/PUNC ।/PUNC 24/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A श्रुतिशतेभ्यः/SMK उक्तः/KN विदुषः/NP सर्वकर्मदाहः/NP ।/PUNC इह/A अपि/AVK च/AVK उक्तः/KN '/PUNC यथा/A एधांसि/KP '/PUNC इत्यादिना/A सर्वकर्मदाहः/NP ,/PUNC वक्ष्यति/KP च/AVK ।/PUNC उपपत्तेः/NP च/AVK -/PUNC अविद्याकामक्लेशबीजनिमित्तानि/NP हि/A कर्माणि/NP जन्मान्तराङ्कुरम्/NP आरभन्ते/KP ;/PUNC इह/A अपि/AVK च/AVK '/PUNC साहंकाराभिसंधीनि/NV कर्माणि/NP फलारम्भकाणि/NP ,/PUNC न/AN इतराणि/SN '/PUNC इति/AUD तत्र/A तत्र/DV भगवता/NP उक्तम्/KN ।/PUNC '/PUNC बीजानि/NP अग्न्युपदग्धानि/NP न/AN रोहन्ति/KP यथा/A पुनः/A ।/PUNC ज्ञानदग्धैः/NP तथा/APY क्लेशैः/NP न/AN आत्मा/NP संपद्यते/KP पुनः/A '/PUNC इति/AUD च/AVK ।/PUNC अस्तु/KP तावत्/A ज्ञानोत्पत्त्युत्तरकालकृतानाम्/NV कर्मणाम्/NP  ज्ञानेन/NP दाहः/NP ज्ञानसहभावित्वात्/NP ।/PUNC न/AN तु/A इह/A जन्मनि/NP ज्ञानोत्पत्तेः/NP प्राक्/A कृतानाम्/NV कर्मणाम्/NP अतीतजन्म/NV कृतानाम्/NP च/APY दाहः/NP युक्तः/KN ।/PUNC न/AN ;/PUNC '/PUNC सर्व/SNV कर्माणि/NP '/PUNC इति/AUD विशेषणात्/NP ।/PUNC ज्ञानोत्तरकालभाविनाम्/NP एव/INTF सर्व/SNV कर्मणाम्/NP इति/AUD चेत्/A ,/PUNC न/AN ;/PUNC संकोचे/NP कारणानुपपत्तेः/NP ।/PUNC यत्/SSN तु/A उक्तम्/KN '/PUNC यथा/AVK वर्तमानजन्मारम्भकाणि/NV कर्माणि/NP न/AN क्षीयन्ते/KP फलदानाय/NP प्रवृत्तानि/NP एव/INTF सति/A अपि/A ज्ञाने/NP ,/PUNC तथा/AVK अनारब्धफलानाम्/NP अपि/A कर्मणाम्/NP क्षयः/NP न/AN युक्तः/KN '/PUNC इति/AUD ,/PUNC तत्/SSN असत्/NP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC तेषाम्/SN मुक्तेषुवत्/ASD प्रवृत्तफलत्वात्/NP ।/PUNC यथा/ASD पूर्वम्/A  लक्ष्यवेधाय/NP मुक्तः/KN इषुः/NP धनुषः/NP लक्ष्यवेधोत्तरकालम्/NP अपि/A आरब्धवेगक्षयात्/NP पतनेन/NP एव/INTF निवर्तते/KP ,/PUNC एवम्/AUD शरीरारम्भकम्/NV कर्म/NP शरीरस्थितिप्रयोजने/NP निवृत्ते/NP अपि/A ,/PUNC आसंस्कारवेगक्षयात्/NP पूर्ववत्/ASD वर्तते/KP एव/INTF ।/PUNC यथा/AVK सः/SN एव/INTF इषुः/NP प्रवृत्तिनिमित्तानारब्धवेगः/NP तु/A अमुक्तः/KN धनुषि/NP प्रयुक्तः/KN अपि/A उपसंह्रियते/KP ,/PUNC तथा/AVK अनारब्धफलानि/NV कर्माणि/NP स्वाश्रयस्थानि/NP एव/INTF ज्ञानेन/NP निर्बीजी/NV क्रियन्ते/KP इति/AUD ,/PUNC पतिते/KN अस्मिन्/SNV विद्वच्छरीरे/NP '/PUNC न/AN सः/SN भूयः/A अभि/AUP जायते/KP '/PUNC इति/AUD युक्तम्/KN एव/INTF उक्तम्/KN इति/AUD सिद्धम्/KN ।।/PUNC
अत्र/A आत्मदर्शने/NP उपायविकल्पाः/NP इमे/SN ध्यानादयः/NP उच्यन्ते/KP -/PUNC 
ध्यानेन/NP आत्मनि/NP पश्यन्ति/KP केचित्/A आत्मानम्/NP आत्मना/NP ।/PUNC
अन्ये/SNV सांख्येन/NS योगेन/NS कर्मयोगेन/NS च/APY अपरे/SN ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ध्यानेन/NP ,/PUNC ध्यानम्/NP नाम/NP शब्दादिभ्यः/NP विषयेभ्यः/NP श्रोत्रादीनि/NV करणानि/NP मनसि/NP उपसंहृत्य/KKS ,/PUNC मनः/NP च/AVK प्रत्यक्चेतयितरि/NP ,/PUNC एकाग्रतया/NP यत्/SSN चिन्तनम्/NP तत्/SSN ध्यानम्/NP ;/PUNC तथा/AVK ,/PUNC ध्यायति/KP इव/ASD बकः/NP ,/PUNC ध्यायति/KP इव/ASD पृथिवी/NP ,/PUNC ध्यायन्ति/KP इव/ASD पर्वताः/NP (/PUNC छा0/PUNC उ0/PUNC 7/PUNC ।/PUNC 6/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC इति/AUD उपमोपादानात्/NP ।/PUNC तैलधारावत्/ASD संततः/KN अविच्छिन्नप्रत्ययः/NV ध्यानम्/NP ;/PUNC तेन/SNV ध्यानेन/NP आत्मनि/NP बुद्धौ/NP पश्यन्ति/KP आत्मानम्/NP प्रत्यक्चेतनम्/NP आत्मना/NP स्वेन/SN एव/INTF प्रत्यक्चेतनेन/NP ध्यानसंस्कृतेन/NP अन्तःकरणेन/NP केचित्/A योगिनः/NP ।/PUNC अन्ये/SN सांख्येन/NS योगेन/NP ,/PUNC सांख्यम्/NS नाम/NP '/PUNC इमे/SNV सत्त्वरजस्तमांसि/NV गुणाः/NP मया/SN दृश्याः/NP अहम्/SN तेभ्यः/SN अन्यः/SN तद्व्यापारसाक्षिभूतः/KN नित्यः/NV गुणविलक्षणः/NV आत्मा/NP '/PUNC इति/AUD चिन्तनम्/NP एषः/SNV सांख्यः/NS योगः/NP ,/PUNC तेन/SN '/PUNC पश्यन्ति/KP आत्मानम्/NP आत्मना/NP '/PUNC इति/AUD वर्तते/KP ।/PUNC कर्मयोगेन/NP ,/PUNC कर्म/NP एव/INTF योगः/NP ,/PUNC ईश्वरार्पणबुद्ध्या/NP अनुष्ठीयमानम्/KN घटनरूपम्/ASD योगार्थत्वात्/NP योगः/NP उच्यते/KP गुणतः/KN ;/PUNC तेन/SN सत्त्वशुद्धिज्ञानोत्पत्तिद्वारेण/NP च/AVK अपरे/SN ।।/PUNC
अन्ये/SN तु/A एवम्/AUD अजानन्तः/KN श्रुत्वा/KKS अन्येभ्यः/SN उपासते/KP ।/PUNC
ते/SN अपि/AVK च/AVK अतितरन्ति/KP एव/INTF मृत्युम्/NP श्रुतिपरायणाः/NV ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अन्ये/SN तु/A एतेषु/SNV विकल्पेषु/NP अन्यतरेण/SN अपि/A एवम्/AUD यथोक्तम्/KN आत्मानम्/NP अजानन्तः/KN अन्येभ्यः/SNV आचार्येभ्यः/NP श्रुत्वा/KKS '/PUNC इदम्/SN एव/INTF चिन्तयत/KN '/PUNC इति/AUD उक्ताः/KN उपासते/KP श्रद्दधानाः/NV सन्तः/KN चिन्तयन्ति/KP ।/PUNC ते/SN अपि/AVK च/AVK अतितरन्ति/KP एव/INTF अति/NV क्रामन्ति/KP एव/INTF मृत्युम्/NP ,/PUNC मृत्युयुक्तम्/KN संसारम्/NP इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC श्रुतिपरायणाः/NP श्रुतिः/NP श्रवणम्/NP परम्/NV अयनम्/NP गमनम्/NP मोक्षमार्गप्रवृत्तौ/KN परम्/NV साधनम्/NP येषाम्/SN ते/SN श्रुतिपरायणाः/NV ;/PUNC केवलपरोपदेशप्रमाणाः/NP स्वयम्/SN विवेकरहिताः/KN इति/AUD अभिप्रायः/NP ।/PUNC किमु/SN वक्तव्यम्/KN प्रमाणम्/NP प्रति/AUP स्वतन्त्राः/NV विवेकिनः/NP मृत्युम्/NP अतितरन्ति/KP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।।/PUNC
क्षेत्रज्ञेश्वरैकत्वविषयम्/NP ज्ञानम्/NP मोक्षसाधनम्/NP '/PUNC यत्/SSN ज्ञात्वा/KKS अमृतम्/NP अश्नुते/KP '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ,/PUNC तत्/SSN कस्मात्/SN हेतोः/NP इति/AUD ,/PUNC तद्धेतुप्रदर्शनार्थम्/NP श्लोकः/NP आरभ्यते/KP -/PUNC
यावत्/A सञ्जायते/KP किञ्चित्/A सत्त्वम्/NP स्थावरजङ्गमम्/NV ।/PUNC
क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्/NP तत्/SN विद्धि/KP भरतर्षभ/NV ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यावत्/A यत्/SSN किञ्चित्/A संजायते/KP समुत्पद्यते/KP सत्त्वम्/NV वस्तु/NP ;/PUNC किम्/SN अविशेषेण/NP ?/PUNC न/AN इति/AUD आह/KP -/PUNC स्थावरजङ्गमम्/NP स्थावरम्/NV जङ्गमम्/NV च/APY क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्/NP तत्/SSN जायते/KP इति/AUD एवम्/AUD विद्धि/KP जानीहि/KP भरतर्षभ/NV ।।/PUNC 
कः/SN पुनः/A अयम्/SNV क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP संयोगः/NP अभिप्रेतः/KN ?/PUNC न/AN तावत्/A रज्ज्वा/NP इव/ASD घटस्य/NP अवयवसंश्लेषद्वारकः/NP संबन्धविशेषः/NV संयोगः/NP क्षेत्रेण/NP क्षेत्रज्ञस्य/NP संभवति/KP ,/PUNC आकाशवत्/ASD निरवयवत्वात्/NP ।/PUNC न/AN अपि/A समवायलक्षणः/NP तन्तुपटयोः/NP इव/ASD क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP इतरेतरकार्यकारणभावानभ्युपगमात्/NP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP विषयविषयिणोः/NP भिन्नस्वभावयोः/NP इतरेतरतद्धर्माध्यासलक्षणः/NP संयोगः/NP क्षेत्रक्षेत्रज्ञस्वरूपविवेकाभावनिबन्धनः/NP ,/PUNC रज्जुशुक्तिकादीनाम्/NP तत्/SN विवेकज्ञानाभावात्/NP अध्यारोपितसर्परजतादिसंयोगवत्/ASD ।/ASD सः/SN अयम्/SNV अध्यासस्वरूपः/ASD क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगः/NP मिथ्याज्ञानलक्षणः/NP ।/PUNC यथाशास्त्रम्/NP क्षेत्रक्षेत्रज्ञलक्षणभेदपरिज्ञानपूर्वकम्/NP प्राक्/A दर्शितरूपात्/NV क्षेत्रात्/NP मुञ्जात्/NP इव/ASD इषीकाम्/SNV यथोक्तलक्षणम्/NV क्षेत्रज्ञम्/NP प्रविभज्य/KKS '/PUNC न/AN सत्/NP तत्/SN न/AN असत्/NP उच्यते/KP '/PUNC इति/AUD अनेन/SN निरस्तसर्वोपाधिविशेषम्/NV ज्ञेयम्/NP  ब्रह्मस्वरूपेण/ASD यः/SN पश्यति/KP ,/PUNC क्षेत्रम्/NP च/AVK मायानिर्मितहस्तिस्वप्नदृष्टवस्तुगन्धर्वनगरादिवत्/ASD '/PUNC असत्/NP एव/INTF सत्/NP इव/ASD अवभासते/KP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD निश्चित/NV विज्ञानः/NP यः/SN ,/PUNC तस्य/SN यथोक्तसम्यग्दर्शनविरोधात्/NP अपगच्छति/KP मिथ्याज्ञानम्/NP ।/PUNC तस्य/SN जन्महेतोः/NP अपगमात्/NP '/PUNC यः/SN एवम्/AUD वेत्ति/KP पुरुषम्/NP प्रकृतिम्/NP च/APY गुणैः/NP सह/AUP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 23/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD अनेन/SN '/PUNC विद्वान्/NP भूयः/A न/AN अभि/AUP जायते/KP '/PUNC इति/AUD यत्/SSN उक्तम्/KN ,/PUNC तत्/SSN उपपन्नम्/KN उक्तम्/KN ।।/PUNC
'/PUNC न/AN सः/SN भूयः/A अभि/AUP जायते/KP '/PUNC इति/AUD सम्यग्दर्शनफलम्/NP अविद्यादिसंसारबीजनिवृत्तिद्वारेण/NP जन्माभावः/NP उक्तः/KN ।/PUNC जन्मकारणम्/NP च/AVK अविद्यानिमित्तकः/NP क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगः/NP उक्तः/KN ;/PUNC अतः/A तस्याः/SNV अविद्यायाः/NP निवर्तकम्/NP  सम्यग्दर्शनम्/NP उक्तम्/KN अपि/A पुनः/A शब्दान्तरेण/NP उच्यते/KP -/PUNC 
समम्/AUP सर्वेषु/SNV भूतेषु/NP तिष्ठन्तम्/KN परम्/NV ईश्वरम्/NP ।/PUNC
विनश्यत्सु/KP अविनश्यन्तम्/KN यः/SSN पश्यति/KP सः/SSN पश्यति/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC -/PUNC समम्/AUP निर्विशेषम्/KV  तिष्ठन्तम्/KNV  स्थितिम्/NP कुर्वन्तम्/KNV ;/PUNC क्व/AP ?/PUNC सर्वेषु/SNV समस्तेषु/SNV भूतेषु/NP ब्रह्मादिस्थावरान्तेषु/NV प्राणिषु/NP ;/PUNC कम्/SN ?/PUNC परमेश्वरम्/NV  देहेन्द्रियमनोबुद्ध्यव्यक्तात्मनः/NP अपेक्ष्य/KKS परमेश्वरः/NV ,/PUNC तम्/SN सर्वेषु/SNV भूतेषु/NP समम्/AUP  तिष्ठन्तम्/KN ।/PUNC तानि/SN विशिनष्टि/NP विनश्यत्सु/KP इति/AUD ,/PUNC तम्/SN  च/AVK परमेश्वरम्/NP अविनश्यन्तम्/KN इति/AUD ,/PUNC भूतानाम्/NP परमेश्वरस्य/NP च/AVK अत्यन्तवैलक्षण्यप्रदर्शनार्थम्/NP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC सर्वेषाम्/SN हि/A भावविकाराणाम्/NP  जनिलक्षणः/NV भावविकारः/NP मूलम्/NP ;/PUNC जन्मोत्तरकालभाविनः/NP अन्ये/SNV सर्वे/SN भावविकाराः/NP विनाशान्ताः/KN ;/PUNC विनाशात्/NP परः/SN  न/AN कश्चित्/SN अस्ति/KP भावविकारः/NP ,/PUNC भावाभावात्/NP ।/PUNC सति/A हि/A धर्मिणि/NP धर्माः/NP भवन्ति/KP ।/PUNC अतः/A अन्त्यभावविकाराभावानुवादेन/NP पूर्वभाविनः/NP सर्वे/SNV भावविकाराः/NP प्रतिषिद्धाः/KN भवन्ति/KP सह/AUP कार्यैः/NP ।/PUNC तस्मात्/SN सर्वभूतैः/NP वैलक्षण्यम्/NV अत्यन्तम्/NV एव/INTF परमेश्वरस्य/NP सिद्धम्/KN ,/PUNC निर्विशेषत्वम्/NP एकत्वम्/NP च/APY ।/PUNC यः/SSN एवम्/AUD  यथोक्तम्/KN  परमेश्वरम्/NV पश्यति/KP ,/PUNC सः/SSN पश्यति/KP ।।/PUNC 
ननु/A सर्वः/SNV अपि/A लोकः/NP पश्यति/KP ,/PUNC किम्/SN विशेषणेन/NP इति/AUD ।/PUNC सत्यम्/NP पश्यति/KP ;/PUNC किन्तु/AVK विपरीतम्/NP पश्यति/KP ।/PUNC अतः/A विशिनष्टि/NP -/PUNC सः/SN एव/INTF पश्यति/KP इति/AUD ।/PUNC यथा/ASD तिमिरदृष्टिः/NP अनेकम्/SNV  चन्द्रम्/NP पश्यति/KP ,/PUNC तम्/SN अपेक्ष्य/KKS एकचन्द्रदर्शी/NV विशिष्यते/KP -/PUNC सः/SN एव/INTF पश्यति/KP इति/AUD ;/PUNC तथा/AVK इह/A अपि/A एकम्/NV अविभक्तम्/NV यथोक्तम्/NV  आत्मानम्/NP यः/SSN पश्यति/KP ,/PUNC सः/SSN विभक्तानेकात्मविपरीतदर्शिभ्यः/NP विशिष्यते/KP -/PUNC सः/SN एव/INTF पश्यति/KP इति/AUD ।/PUNC इतरे/SN पश्यन्तः/KN अपि/A न/AN पश्यन्ति/KP ,/PUNC विपरीतदर्शित्वात्/NP अनेकचन्द्रदर्शिवत्/ASD इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
यथोक्तस्य/NP सम्यग्दर्शनस्य/NP फलवचनेन/NP स्तुतिः/NP कर्तव्या/KN इति/AUD श्लोकः/NP आरभ्यते/KP -/PUNC
समम्/AUP पश्यन्/KNV हि/A सर्वत्र/A समवस्थितम्/NV ईश्वरम्/NP ।/PUNC
न/AN हिनस्ति/KP आत्मना/NP आत्मानम्/NP ततः/A याति/KP पराम्/NV गतिम्/NP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।PUNC -/PUNC समम्/AUP पश्यन्/KNV उपलभमानः/KN हि/A यस्मात्/SN सर्वत्र/A सर्वभूतेषु/NP समवस्थितम्/KN तुल्यतया/NP अवस्थितम्/KN ईश्वरम्/NP अतीतानन्तरश्लोकोक्तलक्षणम्/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC समम्/AUP पश्यन्/KNV किम्/SN ?/PUNC न/AN हिनस्ति/KP हिंसाम्/NP न/AN करोति/KP आत्मना/NP स्वेन/SN एव/INTF स्वम्/SN आत्मानम्/NP ।/PUNC ततः/A तदहिंसनात्/NP याति/KP पराम्/NV प्रकृष्टाम्/NV गतिम्/NP मोक्षाख्याम्/NP ।।/PUNC 
ननु/A न/AN एव/INTF कश्चित्/SNV प्राणी/NP स्वयम्/SN स्वम्/SN आत्मानम्/NP हिनस्ति/KP ।/PUNC कथम्/AP उच्यते/KP अप्राप्तम्/KN '/PUNC न/AN हिनस्ति/KP '/PUNC इति/AUD ?/PUNC यथा/ASD '/PUNC न/AN पृथिव्याम्/NP अग्निः/NP चेतव्यः/KN न/AN अन्तरिक्षे/NP '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ,/PUNC अज्ञानाम्/NP आत्मतिरस्करणोपपत्तेः/NP ।/PUNC सर्वः/SN हि/A अज्ञः/NP अत्यन्त/NV प्रसिद्धम्/KN साक्षात्/NV अपरोक्षात्/NV आत्मानम्/NP तिरस्कृत्य/KKS अनात्मानम्/NP आत्मत्वेन/NP परिगृह्य/KKS ,/PUNC तम्/SN अपि/A धर्माधर्मौ/NP कृत्वा/KKS उपात्तम्/NV आत्मानम्/NP हत्वा/KKS अन्यम्/SNV आत्मानम्/NP उपादत्ते/KP नवम्/SMKY तम्/SN च/AVK एवम्/AUD हत्वा/KKS अन्यम्/SN एवम्/AUD  तम्/SN अपि/A हत्वा/KKS अन्यम्/SN इति/AUD एवम्/AUD उपात्तम्/NV उपात्तम्/DV आत्मानम्/NP हन्ति/KP ,/PUNC इति/AUD आत्मा/NP सर्वः/SN अज्ञः/NP ।/PUNC यः/SN तु/A परमार्थात्मा/NP ,/PUNC असौ/SN अपि/A सर्वदा/A अविद्यया/NP हतः/KN  इव/ASD ,/PUNC विद्यमानफलाभावात्/NP ,/PUNC इति/AUD सर्वे/SNV आत्महनः/NP एव/INTF अविद्वांसः/NV ।/PUNC यः/SSN तु/A इतरः/SNV यथोक्तात्मदर्शी/NP ,/PUNC सः/SSN उभयथा/SN अपि/A आत्मना/NP आत्मानम्/NP न/AN हिनस्ति/KP न/AN हन्ति/KP ।/PUNC ततः/A याति/KP पराम्/NV गतिम्/NP यथोक्तम्/KN फलम्/NP तस्य/SN भवति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
सर्वभूतस्थम्/NV ईश्वरम्/NP समम्/AUP पश्यन्/KP न/AN हिनस्ति/KP आत्मना/NP आत्मानम्/NP '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC तत्/SNV अनुपपन्नम्/NP
स्वगुणकर्मवैलक्षण्यभेदभिन्नेषु/NV आत्मसु/NP ,/PUNC इति/AUD एतत्/SN आशङ्क्य/KKS आह/KP -/PUNC
प्रकृत्या/NP एव/INTF च/AVK कर्माणि/NP क्रियमाणानि/NP सर्वशः/SN ।/PUNC
यः/SSN पश्यति/KP तथा/AVK आत्मानम्/NP अकर्तारम्/NP सः/SSN पश्यति/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रकृत्या/NP प्रकृतिः/NP भगवतः/NP माया/NP त्रिगुणात्मिका/NV ,/PUNC '/PUNC मायाम्/NP तु/A प्रकृतिम्/NP विद्यात्/NP (/PUNC श्वे0/PUNC उ0/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 10/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD मन्त्रवर्णात्/NP ,/PUNC तया/SN प्रकृत्या/NP एव/INTF च/AVK न/AN अन्येन/SN महदादिकार्यकरणाकारपरिणतया/NP कर्माणि/NP वाङ्मनःकायारभ्याणि/NV क्रियमाणानि/NP निर्वर्त्यमानानि/NP सर्वशः/SN सर्वप्रकारैः/NP यः/SSN पश्यति/KP उप/AUP लभते/KP ,/PUNC तथा/AVK आत्मानम्/NP  क्षेत्रज्ञम्/NP अकर्तारम्/NP सर्वोपाधिविवर्जितम्/KN सः/SSN पश्यति/KP ,/PUNC सः/SSN परमार्थदर्शी/NV इति/AUD अभिप्रायः/NP ;/PUNC निर्गुणस्य/NP अकर्तुः/NP निर्विशेषस्य/NV आकाशस्य/NP इव/ASD भेदे/NP प्रमाणानुपपत्तिः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
पुनः/A अपि/A तत्/SN एव/INTF सम्यक्/NV दर्शनम्/NP शब्दान्तरेण/NP प्रपञ्चयति/KP -/PUNC
यदा/AVK भूतपृथग्भावम्/NP एकस्थम्/KV अनुपश्यति/KP ।/PUNC
ततः/A एव/INTF च/AVK विस्तारम्/KV ब्रह्म/NS सम्पद्यते/KP तदा/AVK ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 30/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 30/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यदा/AVK यस्मिन्/SNV काले/NP भूतपृथग्भावम्/NV  भूतानाम्/NP पृथग्भावम्/NP पृथक्त्वम्/NP कस्मिन्/SNV आत्मनि/NP स्थितम्/KN एकस्थम्/KV अनु/AUP पश्यति/KP शास्त्राचार्योपदेशम्/NP ,/PUNC अनु/AUP आत्मानम्/NP  प्रति/AUP अक्षत्वेन/NP पश्यति/KP '/PUNC आत्मा/NP एव/INTF इदम्/SNV सर्वम्/SN (/PUNC छा0/PUNC उ0/PUNC 7/PUNC ।/PUNC 25/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ,/PUNC ततः/A एव/INTF च/AVK तस्मात्/SN एव/INTF च/AVK विस्तारम्/NV उत्पत्तिम्/NP  विकासम्/NP '/PUNC आत्मतः/NP प्राणः/NP आत्मतः/NP आशा/NP आत्मतः/NP स्मर/NP आत्मतः/NP आकाशः/NP आत्मतः/NP तेजः/NP आत्मतः/NP आपः/NP आत्मतः/NP आविर्भावतिरोभावौ/NP आत्मतः/NP अन्नम्/NP (/PUNC छा0/PUNC उ0/PUNC 7/PUNC ।/PUNC 26/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD आदिप्रकारैः/NP विस्तारम्/NP यदा/AVK पश्यति/KP ,/PUNC ब्रह्म/NS संपद्यते/KP भवति/KP तदा/AVK तस्मिन्/SNV काले/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
एकस्य/SMKY आत्मानः/NP सर्व/SNV देहात्मत्वे/NP तत्/SNV दोषसंबन्धे/NP प्राप्ते/KN ,/PUNC इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
अनादित्वात्/NV निर्गुणत्वात्/NV परमात्मा/NP अयम्/SNV अव्ययः/NP ।/PUNC
शरीरस्थः/NP अपि/A कौन्तेय/NV न/AN करोति/KP न/AN लिप्यते/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 31/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 31/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अनादित्वात्/NP अनादेः/NV भावः/NP अनादित्वम्/NP ,/PUNC आदिः/NV कारणम्/NP ,/PUNC तत्/SN यस्य/SN न/AN अस्ति/KP तत्/SN अनादि/NV ।/PUNC यत्/SSN हि/A आदिमत्/NP तत्/SSN स्वेन/SN आत्मना/NP व्येति/KP ;/PUNC अयम्/SN तु/A अनादित्वात्/NP निरवयवः/NV इति/AUD कृत्वा/KKS न/AN व्येति/KP ।/PUNC तथा/AVK निर्गुणत्वात्/NP ।/PUNC सगुणः/NP हि/A गुणव्ययात्/NP व्येति/KP ;/PUNC अयम्/SN तु/A निर्गुणत्वात्/NP च/AVK न/AN व्येति/KP ;/PUNC इति/AUD परमात्मा/NP अयम्/SN अव्ययः/NV ;/PUNC न/AN अस्य/SN व्ययः/NP विद्यते/KP इति/AUD अव्ययः/NP ।/PUNC यतः/A शरीरस्थः/NP अपि/A ,/PUNC शरीरेषु/NP आत्मनः/NP एवम्/AUD अतः/A उपलब्धिः/NP भवति/KP इति/AUD शरीरस्थः/NP उच्यते/KP ;/PUNC तथा/AVK अपि/A न/AN करोति/KP ।/PUNC तत्/SNV करणात्/NP एव/INTF तत्/SNV फलेन/NP न/AN लिप्यते/KP ।/PUNC यः/SSN हि/A कर्ता/NP ,/PUNC सः/SSN कर्मफलेन/NP लिप्यते/KP ।/PUNC अयम्/SN तु/A अकर्ता/NP ,/PUNC अतः/A न/AN फलेन/NP लिप्यते/KP इति/AUD अर्थः/NP ।।/PUNC कः/SN पुनः/A देहेषु/NP करोति/KP लिप्यते/KP च/APY ?/PUNC यदि/AVK तावत्/A अन्यः/SNV परमात्मनः/NP देही/NP करोति/KP लिप्यते/KP च/APY ,/PUNC ततः/A इदम्/SN अनुपपन्नम्/NV उक्तम्/KN क्षेत्रज्ञेश्वरैकत्वम्/NP '/PUNC क्षेत्रज्ञम्/NP च/AVK अपि/A माम्/SN विद्धि/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC अथ/A न/AN अस्ति/KP ईश्वरात्/NP अन्यः/SNV देही/NP ,/PUNC कः/SN करोति/KP लिप्यते/KP च/APY ?/PUNC इति/AUD वाच्यम्/NP ;/PUNC परः/SN वा/AVK न/AN अस्ति/KP इति/AUD सर्वथा/NV दुर्विज्ञेयम्/NP दुर्वाच्यम्/NP च/APY इति/AUD भगवत्प्रोक्तम्/KN औपनिषदम्/NS दर्शनम्/NP परित्यक्तम्/KN वैशेषिकैः/NS सांख्यार्हतबौद्धैः/NS च/APY ।/PUNC तत्र/A अयम्/SN परिहारः/NP भगवता/NP स्वेन/SN एव/INTF उक्तः/KN '/PUNC स्वभावः/NP तु/A प्रवर्तते/KP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 14/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC अविद्यामात्रस्वभावः/NP हि/A करोति/KP लिप्यते/KP इति/AUD व्यवहारः/NP भवति/KP ,/PUNC न/AN तु/A परमार्थतः/KN  कस्मिन्/SNV परमात्मनि/NP तत्/SN अस्ति/KP ।/PUNC अतः/A तस्मिन्/SNV परमार्थसांख्यदर्शने/NP स्थितानाम्/NP ज्ञाननिष्ठानाम्/NP परमहंसपरिव्राजकानाम्/NP  तिरस्कृताविद्याव्यवहाराणाम्/NP कर्माधिकारः/NP न/AN अस्ति/KP इति/AUD तत्र/A तत्र/DV दर्शितम्/KN  भगवता/NP ।।/PUNC
किम्/SN इव/INTF न/AN करोति/KP न/AN लिप्यते/KP इति/AUD अत्र/A दृष्टान्तम्/KN आह/KP -/PUNC
यथा/AVK सर्वगतम्/KN सौक्ष्म्यात्/NP आकाशम्/NP न/AN उपलिप्यते/KP ।/PUNC
सर्वत्र/A अवस्थितः/KN देहे/NP तथा/AVK आत्मा/NP न/AN उप/AUP लिप्यते/KP ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 32/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 32/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यथा/AVK सर्वगतम्/KN व्यापि/NP अपि/AVK सत्/NP सौक्ष्म्यात्/NP सूक्ष्मभावात्/NP आकाशम्/NP खम्/NP न/AN उप/AUP लिप्यते/KP न/AN संबध्यते/KP ,/PUNC सर्वत्र/A अवस्थितः/KN देहे/NP तथा/AVK आत्मा/NP न/AN उप/AUP लिप्यते/KP ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
यथा/AVK प्रकाशयति/KP एकः/SMKY कृत्स्नम्/NV लोकम्/NP इमम्/SNV रविः/NS ।/PUNC
क्षेत्रम्/NP क्षेत्री/NP तथा/AVK कृत्स्नम्/NV प्रकाशयति/KP भारत/NS ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 33/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 33/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यथा/AVK प्रकाशयति/KP अवभासयति/KP एकः/SMKY कृत्स्नम्/NV लोकम्/NP इमम्/SNV रविः/NS सविता/NS आदित्यः/NS ,/PUNC तथा/AVK तत्/SN वत्/ASD महाभूतादि/NP धृत्यन्तम्/KNV क्षेत्रम्/NP एकः/SMK सन्/A प्रकाशयति/KP ।/PUNC कः/SN ?/PUNC क्षेत्री/NP परमात्मा/NV इत्यर्थः/NP ।/PUNC रविदृष्टान्तः/KN अत्र/A आत्मनः/NP उभयार्थः/NP अपि/A भवति/KP -/PUNC रविवत्/ASD सर्व/SNV क्षेत्रेषु/NP एकः/SMKY एव/INTF आत्मा/NP ,/PUNC अलेपकः/NP च/AVK इति/AUD ।।/PUNC समस्ताध्यायार्थोपसंहारार्थः/NP अयम्/SNV श्लोकः/NP -/PUNC 
क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP एवम्/AUD अन्तरम्/NP ज्ञानचक्षुषा/NP ।/NP
भूतप्रकृतिमोक्षम्/NP च/AVK ये/SSN विदुः/KP यान्ति/KP ते/SSN परम्/NV ।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 34/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासु/NS उपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NS योगशास्त्रे/NS श्रीकृष्णार्जुनसंवादे/NP प्रकृतिपुरुषविवेकयोगः/NS नाम/NP त्रयोदशः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 13/PUNC ./PUNC 34/PUNC ।।/PUNC -/PUNC क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP यथाव्याख्यातयोः/NP एवम्/AUD यथाप्रदर्शितप्रकारेण/NP अन्तरम्/NP इतरेतरवैलक्षण्यविशेषम्/NV ज्ञानचक्षुषा/NP शास्त्राचार्यप्रसादोपदेशजनितम्/KN आत्मप्रत्ययिकम्/NV ज्ञानम्/NP चक्षुः/NP ,/PUNC तेन/SNV ज्ञानचक्षुषा/NP ,/PUNC भूतप्रकृतिमोक्षम्/NP च/APY ,/PUNC भूतानाम्/NP प्रकृतिः/NP अविद्यालक्षणा/NV अव्यक्ताख्या/NV ,/PUNC तस्याः/SN भूतप्रकृतेः/NP मोक्षणम्/NP अभावगमनम्/NP च/APY ये/SSN विदुः/KP विजानन्ति/KP ,/PUNC यान्ति/KP गच्छन्ति/KP ते/SSN परम्/NV परमात्मतत्त्वम्/NV ब्रह्म/NS ,/PUNC न/AN पुनः/A देहम्/NP आददते/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NV श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NV श्रीमच्छङ्करभगवतः/NP कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NP त्रयोदशः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
सर्वम्/SN उत्पद्यमानम्/KN क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्/NP उत्पद्यते/KP इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC तत्/SNV कथम्/NP इति/AUD ,/PUNC तत्/SN प्रदर्शनार्थम्/NP ,/PUNC '/PUNC परम्/NV भूयः/A '/PUNC इत्यादिः/A अध्यायः/NP आरभ्यते/KP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC ईश्वरपरतन्त्रयोः/NP क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोः/NP जगत्कारणत्वम्/NP न/AN तु/A साङ्ख्यानाम्/NS इव/ASD स्वतन्त्रयोः/NP इति/AUD एवम्/AUD अर्थम्/NP ।/PUNC प्रकृतिस्थत्वम्/NV गुणेषु/NP च/AVK सङ्गः/NP संसारकारणम्/NP इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC कस्मिन्/SNV गुणे/NP कथम्/SN  सङ्गः/NP ?/PUNC के/SSN वा/AVK गुणाः/NP कथम्/SN वा/AVK ते/SSN बध्नन्ति/KP इति/AUD ?/PUNC गुणेभ्यः/NP च/AVK मोक्षणम्/NP कथम्/SN स्यात्/KP ?/PUNC मुक्तस्य/KN च/AVK लक्षणम्/NP वक्तव्यम्/KN ,/PUNC इति/AUD एवम्/AUD अर्थम्/NP च/AVK 
श्रीभगवान्/NV उवाच/KP -/PUNC
परम्/NV भूयः/A प्रवक्ष्यामि/KP ज्ञानानाम्/NP ज्ञानम्/NP उत्तमम्/NV ।/PUNC
यत्/SN ज्ञात्वा/KKS मुनयः/NP सर्वे/SN पराम्/NV सिद्धिम्/NP इतः/A गताः/KN ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC परम्/NV ज्ञानम्/NP इति/AUD व्यवहितेन/NP संबन्धः/NP ,/PUNC भूयः/A पुनः/A पूर्वेषु/SNV सर्वेषु/SNV अध्यायेषु/NP असकृत्/NV उक्तम्/KN अपि/A प्रवक्ष्यामि/KP ।/PUNC तत्/SN च/AVK परम्/NV परवस्तुविषयत्वात्/NP ।/PUNC किम्/SN तत्/SN ?/PUNC ज्ञानम्/NP  सर्वेषाम्/SNV ज्ञानानाम्/NP उत्तमम्/NV ,/PUNC उत्तम/NV फलत्वात्/NP ।/PUNC ज्ञानानाम्/NP इति/AUD न/AN अमानित्वादीनाम्/NP ;/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC यज्ञादिज्ञेयवस्तुविषयाणाम्/NP इति/AUD ।/PUNC तानि/SN न/AN मोक्षाय/NP ,/PUNC इदम्/SN तु/A मोक्षाय/NP इति/AUD परोत्तम/NV शब्दाभ्याम्/NP स्तौति/KP श्रोतृबुद्धिरुच्युत्पादनार्थम्/NP ।/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS यत्/SN ज्ञानम्/NP ज्ञात्वा/KKS प्राप्य/KKS मुनयः/NP संन्यासिनः/NP मननशीलाः/NP सर्वे/SN पराम्/NV सिद्धिम्/NP मोक्षाख्याम्/NP इतः/A अस्मात्/SNV देहबन्धनात्/NP ऊर्ध्वम्/AUP गताः/KN प्राप्ताः/KN ।।/PUNC
अस्याः/SN च/AVK सिद्धेः/KN ऐकान्तिकत्वम्/NP दर्शयति/KP -/PUNC
इदम्/SNV ज्ञानम्/NP उप/AUP आश्रित्य/KKS मम/SN साधर्म्यम्/AUP आगताः/KN ।/PUNC
सर्गः/NP अपि/A न/AN उप/AUP जायन्ते/KP प्रलये/NP न/AN व्यथन्ति/KP च/AVK ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इदम्/SNV ज्ञानम्/NP यथोक्तम्/KN उप/AUP आश्रित्य/KKS ,/PUNC ज्ञानसाधनम्/NP अनुष्ठाय/KKS इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC मम/SN परमेश्वरस्य/NP साधर्म्यम्/AUP मत्स्वरूपताम्/NP आगताः/KN प्राप्ताः/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC न/AN तु/A समानधर्मता/NP साधर्म्यम्/AUP ,/PUNC क्षेत्रज्ञेश्वरयोः/NP भेदानभ्युपगमात्/NP गीताशास्त्रे/NP ।/PUNC फलवादः/NP च/AVK अयम्/SN स्तुत्यर्थम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC सर्गे/NP अपि/A सृष्टिकाले/NP अपि/A न/AN उप/AUP जायन्ते/KP ।/PUNC न/AN उत्पद्यन्ते/KP ।/PUNC प्रलये/NP ब्रह्मणः/NS अपि/A विनाशकाले/NP न/AN व्यथन्ति/KP च/AVK व्यथाम्/NP न/AN आपद्यन्ते/KP ,/PUNC न/AN च्यवन्ति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगः/NP ईदृशः/ASD भूतकारणम्/NP इति/AUD आह/KP -/PUNC
मम/SN योनिः/NP महद्ब्रह्म/NS तस्मिन्/SNV गर्भम्/NP दधामि/KP अहम्/SN ।/PUNC
संभवः/NP सर्व/SN भूतानाम्/NP ततः/A भवति/KP भारत/NS ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मम/SN स्वभूता/KN मदीया/SNV माया/NP त्रिगुणात्मिका/NV प्रकृतिः/NP योनिः/NP सर्वभूतानाम्/NP कारणम्/NP ।/PUNC सर्व/SNV कार्येभ्यः/NP महत्त्वात्/NP भरणात्/NP च/AVK स्व/SN विकाराणाम्/NP महत्/NV ब्रह्म/NS इति/AUD योनिः/NP एव/INTF विशिष्यते/KP ।/PUNC तस्मिन्/SNV महति/NV ब्रह्मणि/NS योनौ/NP गर्भम्/NP  हिरण्यगर्भस्य/NS जन्मनः/NP बीजम्/NP  सर्वभूतजन्मकारणम्/NV बीजम्/NP दधामि/KP निक्षिपामि/KP क्षेत्रक्षेत्रज्ञप्रकृतिद्वयशक्तिमान्/NV ईश्वरः/NP अहम्/SN ,/PUNC अविद्याकामकर्मोपाधिस्वरूपानुविधायिनम्/NV  क्षेत्रज्ञम्/NP  क्षेत्रेण/NP संयोजयामि/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC संभवः/NP उत्पत्तिः/NP सर्व/SNV भूतानाम्/NP  हिरण्यगर्भोत्पत्तिद्वारेण/NP ततः/A तस्मात्/SNV गर्भाधानात्/NP भवति/KP हे/ASMB भारत/NS ।।/PUNC
सर्वयोनिषु/NP कौन्तेय/NV मूर्तयः/NP सम्भवन्ति/KP याः/SN ।/PUNC
तासाम्/SNV ब्रह्म/NS महद्योनिः/NP अहम्/SN बीजप्रदः/NV पिता/NP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC देवपितृमनुष्यपशुमृगादिसर्वयोनिषु/NP कौन्तेय/NV ,/PUNC मूर्तयः/NP देहसंस्थानलक्षणाः/NV मूर्छिताङ्गावयवाः/NV मूर्तयः/NP संभवन्ति/KP याः/SN ,/PUNC तासाम्/SNV मूर्तीनाम्/NP ब्रह्म/NS महत्/NV सर्वावस्थम्/NV योनिः/NP कारणम्/NP अहम्/SNV ईश्वरः/NP बीजप्रदः/NV गर्भाधानस्य/NP कर्ता/NV पिता/NP ।।/PUNC
के/SNV गुणाः/NP कथम्/A बध्नन्ति/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
सत्त्वम्/NS रजः/NS तमः/NS इति/AUD गुणाः/NP प्रकृतिसंभवाः/NV ।/PUNC
निबध्नन्ति/KP महाबाहः/NP देहे/NP देहिनम्/NP अव्ययम्/NP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सत्त्वम्/NS रजः/NS तमः/NS इति/AUD एवंनामानः/NP ।/PUNC गुणाः/NP इति/AUD पारिभाषिकः/NV शब्दः/NP ,/PUNC न/AN रूपादिवत्/ASD द्रव्याश्रिताः/NV गुणाः/NP ।/PUNC न/AN च/AVK गुणगुणिनोः/NP अन्यत्वम्/SN अत्र/A विवक्षितम्/KN ।/PUNC तस्मात्/SN गुणाः/NP इव/ASD नित्यपरतन्त्राः/NV क्षेत्रज्ञम्/NP प्रति/AUP अविद्यात्मकत्वात्/NP क्षेत्रज्ञम्/NP निबध्नन्ति/KP इव/ASD ।/PUNC तम्/SN आस्पदीकृत्य/KKS आत्मानम्/NP प्रति/AUP लभन्ते/KP इति/AUD निबध्नन्ति/KP इति/AUD उच्यते/KP ।/PUNC ते/SN च/AVK प्रकृतिसंभवाः/NP भगवन्मायासंभवाः/NP निबध्नन्ति/KP इव/ASD हे/ASMB महाबाहो/NV ,/PUNC महान्तौ/NV समर्थतरौ/NV आजानुप्रलम्बौ/NV बाहू/NP यस्य/SN सः/SNV महाबाहुः/NP ,/PUNC हे/ASMB महाबाहो/NP देहे/NP शरीरे/NP देहिनम्/NP देहवन्तम्/NP अव्ययम्/NP ,/PUNC अव्ययत्वम्/NP च/AVK उक्तम्/KN '/PUNC अनादित्वात्/NP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ./PUNC 31/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A श्लोकेन/NP ।/PUNC ननु/A '/PUNC देही/NP न/AN लिप्यते/KP '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC तत्/SNV कथम्/NP इह/A निबध्नन्ति/KP इति/AUD अन्यथा/A उच्यते/KP ?/PUNC परिहृतम्/KN अस्माभिः/SN इव/ASD शब्देन/NP निबध्नन्ति/KP इव/ASD इति/AUD ।।/PUNC
तत्र/A सत्त्वादीनाम्/NP सत्त्वस्य/NP एव/INTF तावत्/A लक्षणम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
तत्र/A सत्त्वम्/NP निर्मलत्वात्/NV प्रकाशकम्/NV अनामयम्/NV ।/PUNC
सुखसङ्गेन/NP बध्नाति/KP ज्ञानसङ्गेन/NP च/AVK अनघ/NV ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC निर्मलत्वात्/NP स्फटिकमणिः/NP इव/ASD प्रकाशकम्/NV अनामयम्/NV निरुपद्रवम्/NV सत्त्वम्/NP तत्/SN निबध्नाति/KP ।/PUNC कथम्/AP ?/PUNC सुखसङ्गेन/NP '/PUNC सुखी/NP अहम्/SN '/PUNC इति/AUD विषयभूतस्य/NV सुखस्य/NP विषयिणि/NV आत्मनि/NP संश्लेषापादनम्/NP मृषा/NP एव/INTF सुखे/NP सञ्जनम्/NP इति/AUD ।/PUNC सा/SN एषा/SNV अविद्या/NP ।/PUNC न/AN हि/A विषयधर्मः/NP विषयिणः/NV भवति/KP ।/PUNC इच्छादि/A च/AVK धृत्यन्तम्/KNV क्षेत्रस्य/NP एव/INTF विषयस्य/NP धर्मः/NP इति/AUD उक्तम्/KN भगवता/NP ।/PUNC अतः/A अविद्यया/NP एव/INTF स्वकीय/SNV धर्मभूतया/NP विषयविषय्यविवेकलक्षणया/NP अस्वात्मभूते/NV सुखे/NP सञ्जयति/KP इव/ASD ,/PUNC आसक्तम्/KN इव/ASD करोति/KP ,/PUNC असङ्गम्/NP सक्तम्/KN इव/ASD करोति/KP ,/PUNC असुखिनम्/NP  सुखिनम्/NP इव/ASD ।/PUNC तथा/AVK ज्ञानसङ्गेन/NP च/AVK ,/PUNC ज्ञानम्/NP इति/AUD सुखसाहचर्यात्/NP क्षेत्रस्य/NP एव/INTF विषयस्य/NP अन्तःकरणस्य/NP धर्मः/NP ,/PUNC न/AN आत्मनः/NP ;/PUNC आत्मधर्मत्वे/NP सङ्गानुपपत्तेः/NP ,/PUNC बन्धानुपपत्तेः/NP च/APY ।/PUNC सुखे/NP इव/ASD ज्ञानादौ/NP सङ्गः/NP मन्तव्यः/KN ।/PUNC हे/ASMB अनघ/NV अव्यसन/NV ।।/PUNC
रजः/NS रागात्मकम्/NV विद्धि/KP तृष्णासङ्गसमुद्भवम्/NP ।/PUNC
तत्/SN निबध्नाति/KP कौन्तेय/NS कर्मसङ्गेन/NP देहिनम्/NP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC रजः/NS रागात्मकम्/NV रञ्जनात्/NP रागः/NP गैरिकादिवत्/ASD रागात्मकम्/NV विद्धि/KP जानीहि/KP ।/PUNC तृष्णासङ्गसमुद्भवम्/NP तृष्णा/NP अप्राप्ताभिलाषः/NP ,/PUNC आसङ्गः/NP प्राप्ते/KN विषये/NP मनसः/NP प्रीतिलक्षणः/NP संश्लेषः/NP ,/PUNC तृष्णासङ्गयोः/NP समुद्भवम्/NP तृष्णासङ्गसमुद्भवम्/NP ।/PUNC तत्/SN निबध्नाति/KP तत्/SN रजः/NP निबध्नाति/KP कौन्तेय/NV कर्मसङ्गेन/NP ,/PUNC दृष्टादृष्टार्थेषु/NV कर्मसु/NP सञ्जनम्/NP तत्परता/KN कर्मसङ्गः/NP ,/PUNC तेन/SN निबध्नाति/KP रजः/NP देहिनम्/NP ।।/PUNC 
तमः/NP तु/A अज्ञानजम्/NV विद्धि/KP मोहनम्/NP सर्वदेहिनाम्/NP ।/PUNC
प्रमादालस्यनिद्राभिः/NP तत्/SN निबध्नाति/KP भारत/NS ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तमः/NS तृतीयः/SMKP गुणः/NP अज्ञानजम्/NV अज्ञानात्/NP जातम्/KN अज्ञानजम्/NV विद्धि/KP मोहनम्/NV मोहकरम्/NV अविवेककरम्/NV  सर्वदेहिनाम्/NP सर्वेषाम्/SNV देहवताम्/NP ।/PUNC प्रमादालस्यनिद्राभिः/NP प्रमादः/NP च/APY आलस्यम्/NP  च/APY निद्रा/NP च/APY प्रमादालस्यनिद्राः/NP ताभिः/SNV प्रमादालस्यनिद्राभिः/NP तत्/SN तमः/NP निबध्नाति/KP भारत/NS ।।/PUNC
पुनः/A गुणानाम्/NP व्यापारः/NP संक्षेपतः/KV उच्यते/KP -/PUNC
सत्त्वम्/NP सुखे/NP सञ्जयति/KP रजः/NS कर्मणि/NP भारत/NS ।/PUNC
ज्ञानम्/NP आवृत्य/KKS तु/A तमः/NS प्रमादे/NP सञ्जयति/KP उत/AVK ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सत्त्वम्/NP सुखे/NP सञ्जयति/KP संश्लेषयति/KP ,/PUNC रजः/NS कर्मणि/NP हे/ASMB भारत/NS सञ्जयति/KP इति/AUD अनुवर्तते/KP ।/PUNC ज्ञानम्/NP सत्त्वकृतम्/KN विवेकम्/NP आवृत्य/KKS आच्छाद्य/KKS तु/A तमः/NS स्वेन/SNV आवरणात्मना/NP प्रमादे/NP सञ्जयति/KP उत/AVK प्रमादः/NP नाम/NP प्राप्तकर्तव्याकरणम्/NP ।।/NP
उक्तम्/KN कार्यम्/NP कदा/A कुर्वन्ति/KP गुणाः/NP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC 
रजः/NS तमः/NS च/APY अभिभूय/KKS सत्त्वम्/NP भवति/KP भारत/NS ।/PUNC
रजः/NS सत्त्वम्/NS तमः/NS च/APY एव/INTF तमः/NS सत्त्वम्/NS रजः/NS तथा/AVK ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC रजः/NS तमः/NS च/APY उभौ/SN अपि/A अभिभूय/KKS सत्त्वम्/NS भवति/KP उद्भवति/KP वर्धते/KP यदा/AVK ,/PUNC तदा/AVK लब्धात्मकम्/NV सत्त्वम्/NP  स्वकार्यम्/NP ज्ञानसुखादि/A आरभते/KP हे/ASMB भारत/NS ।/PUNC तथा/AVK रजोगुणः/NP सत्त्वम्/NS तमः/NS च/APY एव/INTF उभौ/SN अपि/A अभिभूय/KKS वर्धते/KP यदा/AVK ,/PUNC तदा/AVK कर्म/NP तृष्णादि/A स्व/SNV कार्यम्/NP आरभते/KP ।/PUNC तमः/NS आख्यः/NV गुणः/NP सत्त्वम्/NS  रजः/NS च/APY उभौ/SN अपि/A अभिभूय/KKS तथा/AVK एव/INTF वर्धते/KP यदा/AVK ,/PUNC तदा/AVK ज्ञानावरणादि/A स्व/SNV कार्यम्/NP आरभते/KP ।।/PUNC
यदा/AVK यः/SNV गुणः/NP उद्भूतः/KN भवति/KP ,/PUNC तदा/AVK तस्य/SN किम्/SN लिङ्गम्/NP इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
सर्वद्वारेषु/NP देहे/NP अस्मिन्/SNV प्रकाशः/NP उप/AUP जायते/KP ।/PUNC 
ज्ञानम्/NP यदा/AVK तदा/AVK विद्यात्/NP विवृद्धम्/KN सत्त्वम्/NP इति/AUD उत/AVK ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वद्वारेषु/NP ,/PUNC आत्मनः/NP उपलब्धिद्वाराणि/NP श्रोत्रादीनि/NP सर्वाणि/SNV करणानि/NP ,/NP तेषु/SNV सर्वद्वारेषु/NP अन्तःकरणस्य/NP बुद्धेः/NP वृत्तिः/NP प्रकाशः/NP देहे/NP अस्मिन्/SN उप/AUP जायते/KP ।/PUNC तत्/SN एव/INTF ज्ञानम्/NP ।/PUNC यदा/AVK एवम्/AUD प्रकाशः/NP ज्ञानाख्यः/NP उप/AUP जायते/KP ,/PUNC तदा/AVK ज्ञानप्रकाशेन/NP लिङ्गेन/NP विद्यात्/NP विवृद्धम्/KN उद्भूतम्/KN सत्त्वम्/NP इति/AUD उत/AVK अपि/AVK ।।/PUNC
रजसः/NP उद्भूतस्य/NP इदम्/SNV चिह्नम्/NP -/PUNC 
लोभः/NP प्रवृत्तिः/NP आरम्भः/NP कर्मणाम्/NP अशमः/NP स्पृहा/NP ।/PUNC
रजसि/NP एतानि/SN जायन्ते/KP विवृद्धे/KN भरतर्षभ/NV ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC लोभः/NP परद्रव्यादित्सा/NP ,/PUNC प्रवृत्तिः/NP प्रवर्तनम्/NP सामान्य/NV चेष्टा/NP ,/PUNC आरम्भः/NP ;/PUNC कस्य/SN ?/PUNC कर्मणाम्/NP ।/PUNC अशमः/NP अनुपशमः/NP ,/PUNC हर्षरागादिप्रवृत्तिः/NP स्पृहा/NP सर्वसामान्यवस्तुविषया/NP तृष्णा/NP -/PUNC रजसि/NP गुणे/NP विवृद्धे/KN तानि/SNV लिङ्गानि/NP जायन्ते/KP हे/ASMB भरतर्षभ/NV ।।/PUNC
अप्रकाशः/NP अप्रवृत्तिः/NP च/APY प्रमादः/NP मोहः/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC
तमसि/NS एतानि/SN जायन्ते/KP विवृद्धे/KN कुरुनन्दन/NV ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अप्रकाशः/NP अविवेकः/NP ,/PUNC अत्यन्तम्/NV अप्रवृत्तिः/NP च/AVK प्रवृत्त्यभावः/NP तत्/SNV कार्यम्/NP प्रमादः/NP मोहः/NP एव/INTF च/AVK अविवेकः/NP मूढता/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC तमसि/NV गुणे/NP विवृद्धे/KN तानि/SNV लिङ्गानि/NP जायन्ते/KP हे/ASMB कुरुनन्दन/NV ।।/PUNC मरणद्वारेण/NP अपि/AVK यत्/SSN फलम्/NP प्राप्यते/KP ,/PUNC तत्/SSN अपि/AVK सङ्गरागहेतुकम्/NP सर्वम्/SNV गौणम्/NP एव/INTF इति/AUD दर्शयन्/KNV आह/KP -/PUNC
यदा/AVK सत्त्वे/NP प्रवृद्धे/KN तु/A प्रलयम्/NP याति/KP देहभृत्/NP ।/PUNC
तदा/AVK उत्तमविदाम्/NV लोकान्/NP अमलान्/KV प्रतिपद्यते/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यदा/AVK सत्त्वे/NP प्रवृद्धे/KN उद्भूते/KN तु/A प्रलयम्/NV मरणम्/NP याति/KP प्रतिपद्यते/KP देहभृत्/NV आत्मा/NP ,/PUNC तदा/AVK उत्तमविदाम्/NV  महदादितत्त्वविदाम्/NV इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC लोकान्/NP अमलान्/KV मलरहितान्/KV प्रतिपद्यते/KP प्राप्नोति/KP इति/AUD एतत्/SN ।।/PUNC 
रजसि/NS प्रलयम्/NP गत्वा/KKS कर्मसङ्गिषु/NP जायते/KP ।/PUNC
तथा/AVK प्रलीनः/KN तमसि/NS मूढयोनिषु/NP जायते/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC रजसि/NV गुणे/NP विवृद्धे/KN प्रलयम्/NP मरणम्/NP  गत्वा/KKS प्राप्य/KKS कर्मसङ्गिषु/NV कर्मासक्तियुक्तेषु/NV मनुष्येषु/NP जायते/KP ।/PUNC तथा/AVK तद्वत्/ASD एव/INTF प्रलीनः/KN मृतः/KN तमसि/NS विवृद्धे/KN मूढयोनिषु/NP पश्वादियोनिषु/NP जायते/KP ।।/PUNC
अतीतश्लोकार्थस्य/NP एव/INTF संक्षेपः/KV उच्यते/KP -/PUNC 
कर्मणः/NP सुकृतस्य/NP आहुः/KP सात्त्विकम्/NV निर्मलम्/NV फलम्/NP ।/PUNC
रजसः/NS तु/A फलम्/NP दुःखम्/NP अज्ञानम्/NP तमसः/NS फलम्/NP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कर्मणः/NP सुकृतस्य/NP सात्त्विकस्य/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC आहुः/KP शिष्टाः/NP सात्त्विकम्/NP एव/INTF निर्मलम्/NV फलम्/NP इति/AUD ।/PUNC रजसः/NP तु/A फलम्/NP  दुःखम्/NP राजसस्य/NP कर्मणः/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC कर्माधिकारात्/NP फलम्/NP अपि/AVK दुःखम्/NP एव/INTF ,/PUNC कारणानुरूप्यात्/NP राजसम्/NP एव/INTF ।/PUNC तथा/AVK अज्ञानम्/NP  तमसः/NS तामसस्य/NP कर्मणः/NP अधर्मस्य/NP पूर्ववत्/ASD ।।/PUNC
किञ्च/AVK गुणेभ्यः/NP भवति/KP -/PUNC
सत्त्वात्/NP सञ्जायते/KP ज्ञानम्/NP रजसः/NS लोभः/NP एव/INTF च/AVK ।/PUNC
प्रमादमोहौ/NP तमसः/NS भवतः/KN अज्ञानम्/NP एव/INTF च/AVK ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सत्त्वात्/NP लब्धात्मकात्/NP संजायते/KP समुत्पद्यते/KP ज्ञानम्/NP ,/PUNC रजसः/NS लोभः/NP एव/INTF च,/AVK प्रमादमोहौ/NP च/AVK उभौ/SN तमसः/NS भवतः/KN ,/PUNC अज्ञानम्/NP एव/INTF च/AVK भवति/KP ।।/PUNC 
किञ्च/AVK -/PUNC
ऊर्ध्वम्/AUP गच्छन्ति/KP सत्त्वस्था/NP मध्ये/NP तिष्ठन्ति/KP राजसाः/NS ।/PUNC
जघन्यगुणवृत्तस्थाः/NP अधः/AUP गच्छन्ति/KP तामसाः/NS ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ऊर्ध्वम्/AUP गच्छन्ति/KP देवलोकादिषु/NP उत्पद्यन्ते/KP सत्त्वस्थाः/NP सत्त्वगुणवृत्तस्थाः/NP ।/PUNC मध्ये/NP तिष्ठन्ति/KP मनुष्येषु/NP उत्पद्यन्ते/KP राजसाः/NS ।/PUNC जघन्यगुणवृत्तस्थाः/NP जघन्यश्च/AVK असौ/SNV गुणः/NP च/AVK जघन्यगुणः/NP तमः/NP ,/PUNC तस्य/SN वृत्तम्/NP निद्रालस्यादि/NP ,/PUNC तस्मिन्/SN स्थिताः/KN जघन्यगुणवृत्तस्थाः/NV मूढाः/NP अधः/AUP गच्छन्ति/KP पश्वादिषु/NP उत्पद्यन्ते/KP तामसाः/NS ।।/PUNC
पुरुषस्य/NP प्रकृतिस्थत्वरूपेण/ASD मिथ्याज्ञानेन/NP युक्तस्य/NP भोग्येषु/NV गुणेषु/NP सुखदुःखमोहात्मकेषु/NP '/PUNC सुखी/NV दुःखी/NV मूढः/NP अहम्/SN अस्मि/KP '/PUNC इति/AUD एवंरूपः/ASD यः/SN सङ्गः/NP तत्/SNV कारणम्/NP पुरुषस्य/NP सदसद्योनिजन्मप्राप्तिलक्षणस्य/NV संसारस्य/NP इति/AUD समासेन/NP पूर्वाध्याये/NP यत्/SSN उक्तम्/KN ,/PUNC तत्/SSN इह/A '/PUNC सत्त्वम्/NV रजः/NS तमः/NS इति/AUD गुणाः/NP प्रकृतिसंभवाः/NP (/PUNC गीता/NS 14/PUNC ।/PUNC 5/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD आरभ्य/KKS गुणस्वरूपम्/ASD ,/PUNC गुणवृत्तम्/NP ,/PUNC स्ववृत्तेन/NP च/AVK गुणानाम्/NP  बन्धकत्वम्/NP ,/PUNC गुणवृत्तनिबद्धस्य/NP च/AVK पुरुषस्य/NP या/SNV गतिः/NP ,/PUNC इति/AUD एतत्/SNV सर्वम्/SNV मिथ्याज्ञानमूलम्/NV बन्धकारणम्/NP विस्तरेणKV उक्त्वा/KKS ,/PUNC अधुना/A सम्यग्दर्शनात्/NP मोक्षः/NP वक्तव्यः/KN इत्यतः/KN आह/KP भगवान्/NP -/PUNC
न/AN अन्यम्/SNV गुणेभ्यः/NP कर्तारम्/NP यदा/AVK द्रष्टा/NP अनु/AUP पश्यति/KP ।/PUNC
गुणेभ्यः/NP च/AVK परम्/NV वेत्ति/KP मद्भावम्/NP सः/SN अधि/AUP गच्छति/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN अन्यम्/SNV  कार्यकरणविषयाकारपरिणतेभ्यः/NV गुणेभ्यः/NP कर्तारम्/NP अन्यम्/SN यदा/AVK द्रष्टा/NV विद्वान्/NP सन्/A न/AN अनु/AUP पश्यति/KP ,/PUNC गुणाः/NP एव/INTF सर्व/SNV अवस्थाः/NP सर्व/SNV कर्मणाम्/NP कर्तारः/NP इति/AUD एवम्/AUD पश्यति/KP ,/PUNC गुणेभ्यः/NP च/AVK परम्/NV  गुणव्यापारसाक्षिभूतम्/NP वेत्ति/KP ,/PUNC मद्भावम्/NP मम/SN भावम्/NP सः/SNV द्रष्टा/NP अधि/AUP गच्छति/KP ।।/PUNC
कथम्/A अधि/AUP गच्छति/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
गुणान्/NP एतान्/SN अतीत्य/KKS त्रीन्/SMKY देही/NP देहसमुद्भवान्NP ।/PUNC
जन्ममृत्युजरादुःखैः/NP विमुक्तः/KN अमृतम्/NP अश्नुते/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC गुणान्/NP तान्/SNV यथोक्तान्/NP अतीत्य/KKS जीवन्/NP एव/INTF अतिक्रम्य/KKS मायोपाधिभूतान्/NP त्रीन्/SMKY देही/NP देहसमुद्भवान्/NP देहोत्पत्तिबीजभूतान्/NP जन्ममृत्युजरादुःखैः/NP जन्म/NP च/APY मृत्युः/NP च/APY जरा/NP च/APY दुःखानि/NP च/APY जन्ममृत्युजरादुःखानि/NP तैः/SN जीवन्/NP एव/INTF विमुक्तः/KN सन्/A विद्वान्/NP अमृतम्/NP अश्नुते/KP ,/PUNC एवम्/AUD मद्भावम्/NP अधि/AUP गच्छति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
जीवन्/NP एव/INTF गुणान्/NP अतीत्य/KKS अमृतम्/NP अश्नुते/KP इति/AUD प्रश्नबीजम्/NP प्रतिलभ्य/KKS ,/PUNC अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC
अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC
कैः/SNV लिङ्गैः/NP त्रीन्/SMKY गुणान्/NP एतान्/SN अतीतः/KN भवति/KP प्रभो/NV ।/PUNC
किमाचारः/NP कथम्/A च/AVK एतान्/SNV त्रीन्/SMKY गुणान्/NP अति/KV वर्तते/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कैः/SNV लिङ्गैः/NP चिह्नैः/NP त्रीन्/SMK तान्/SMKY व्याख्यातान्/NP गुणान्/NP अतीतः/KN अतिक्रान्तः/KN भवति/KP प्रभो/NV ,/PUNC किमाचारः/NP कः/SN अस्य/SN आचारः/NP इति/AUD किमाचारः/NP कथम्/A केन/SN च/APY प्रकारेण/NP तान्/SNV त्रीन्/SMKY गुणान्/NP अति/KV वर्तते/KP अतीत्य/KKS वर्तते/KP ।।/PUNC
गुणातीतस्य/NP लक्षणम्/NP गुणातीतत्वोपायम्/NP च/AVK अर्जुनेन/NS पृष्टः/KN अस्मिन्/SNV श्लोके/NP प्रश्नद्वयार्थम्/NP प्रति/AUP वचनम्/NP श्रीभगवान्/NP उवाच/KP ।/PUNC यत्/SSN तावत्/A '/PUNC कैः/SNV लिङ्गैः/NP युक्तः/KN गुणातीतः/KN  भवति/KP '/PUNC इति/AUD ,/PUNC तत्/SN शृणु/KP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
प्रकाशम्/NP च/AVK प्रवृत्तिम्/NP च/APY मोहम्/NP एव/INTF च/APY पाण्डव/NV ।/PUNC
न/AN द्वेष्टि/NP सम्प्रवृत्तानि/NP न/AN निवृत्तानि/NP काङ्क्षति/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रकाशम्/NP च/AVK सत्त्वकार्यम्/NP प्रवृत्तिम्/NP च/APY रजःकार्यम्/NP मोहम्/NP एव/INTF च/APY तमःकार्यम्/NP इति/AUD एतानि/SN न/AN द्वेष्टि/NP संप्रवृत्तानि/NP सम्यग्विषयभावेन/NP उद्भूतानि/NP -/PUNC '/PUNC मम/SN तामसः/NP प्रत्ययः/NP जातः/KN ,/PUNC तेन/SN अहम्/SN मूढः/NV ;/PUNC तथा/AVK राजसी/NV प्रवृत्तिः/NP मम/SN उत्पन्ना/KN दुःखात्मिका/NP ,/PUNC तेन/SN अहम्/SN रजसा/NP प्रवर्तितः/KN प्रचलितः/KN स्वरूपात्/NP ;/PUNC कष्टम्/NP मम/SN वर्तते/KP यः/SNV अयम्/SN मत्स्वरूपावस्थानात्/NP भ्रंशः/NP ;/PUNC तथा/AVK सात्त्विकः/NV गुणः/NP प्रकाशात्मा/NP माम्/SN विवेकित्वम्/NP आपादयन्/KNV सुखे/NP च/AVK सञ्जयन्/KP बध्नाति/KP '/PUNC इति/AUD तानि/SN द्वेष्टि/NP असम्यग्दर्शित्वेन/NP ।/PUNC तत्/SN एवम्/AUD गुणातीतः/KN  न/AN द्वेष्टि/NP संप्रवृत्तानि/NP ।/PUNC यथा/AVK च/AVK सात्त्विकादि/NV पुरुषः/NP सत्त्वादि/NV कार्याणि/NP आत्मानम्/NP प्रति/AUP प्रकाश्य/KKS निवृत्तानि/NP काङ्क्षति/KP ,/PUNC न/AN तथा/AVK गुणातीतः/KN निवृत्तानि/NP काङ्क्षति/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC तत्/SN न/AN परप्रत्यक्षम्/NV लिङ्गम्/NP ।/PUNC किम्/SN तर्हि/A ?/PUNC स्वात्मप्रत्यक्षत्वात्/NP आत्मार्थम्/NP एव/INTF तत्/SNV लक्षणम्/NP ।/PUNC न/AN हि/A स्वात्मविषयम्/NP द्वेषम्/NP आकाङ्क्षाम्/NP वा/APY परः/SN पश्यति/KP ।।/PUNC
अथ/A इदानीम्/A '/PUNC गुणातीतः/KN किमाचारः/NP ?/PUNC '/PUNC इति/KN प्रश्नस्य/NP प्रति/AUP वचनम्/NP आह/KP -/PUNC
उदासीनवत्/ASD आसीनः/KN गुणैः/NP यः/SN न/AN विचाल्यते/KP ।/PUNC
गुणाः/NP वर्तन्ते/KP इति/AUD एव/INTF यः/SN अवतिष्ठति/KP न/AN इङ्गते/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC -/PUNC उदासीनवत्/ASD यथा/AVK उदासीनः/NP न/AN कस्यचित्/SNV पक्षम्/NP भजते/KP ,/PUNC तथा/AVK अयम्/SNV गुणातीतत्वोपायमार्गे/NP अवस्थितः/KN आसीनः/KN आत्मवित्/ASD गुणैः/NP यः/SN संन्यासी/NP न/AN विचाल्यते/KP विवेकदर्शनावस्थातः/KN ।/PUNC तत्/SN एतत्/SN स्फुटीकरोति/KP -/PUNC गुणाः/NP कार्यकरणविषयाकारपरिणताः/KN अन्योन्यस्मिन्/SN वर्तन्ते/KP इति/AUD यः/SN अवतिष्ठति/KP ।/PUNC छन्दोभङ्गभयात्/NP परस्मैपदप्रयोगः/NP ।/PUNC यः/SN अनु/AUP तिष्ठति/KP इति/AUD वा/AVK पाठान्तरम्/NP ।/PUNC न/AN इङ्गते/KP न/AN चलति/KP ,/PUNC स्वरूपावस्थः/NP एव/INTF भवति/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
समदुःखसुखः/NP स्वस्थः/NP समलोष्टाश्मकाञ्चनः/NP ।/PUNC
तुल्यप्रियाप्रियः/NP धीरः/NP तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः/NP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC -/PUNC समदुःखसुखः/NP समे/AUP दुःखसुखे/NP यस्य/SN सः/SN समदुःखसुखः/NP ,/PUNC स्वस्थः/NP स्वे/SNV आत्मनि/NP स्थितः/KN प्रसन्नः/NP ,/PUNC समलोष्टाश्मकाञ्चनः/NP लोष्टम्/NP च/APY अश्मा/NP च/APY काञ्चनम्/NP च/APY लोष्टाश्मकाञ्चनानि/NP समानि/AUP यस्य/SN सः/SN समलोष्टाश्मकाञ्चनः/NP ,/PUNC तुल्यप्रियाप्रियः/NP प्रियम्/NP च/APY अप्रियम्/NP च/APY प्रियाप्रिये/NP तुल्ये/NP समे/NP यस्य/SN सः/SN अयम्/SN  तुल्यप्रियाप्रियः/NP ,/PUNC धीरः/NP धीमान्/NP,/PUNC तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः/NP निन्दा/NP च/APY आत्मसंस्तुतिः/NP च/APY निन्दात्मसंस्तुती/NP ,/PUNC तुल्ये/NP निन्दात्मसंस्तुती/NP यस्य/SN यतेः/NP सः/SN तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः/NP ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
मानापमानयोः/NP तुल्यः/NP तुल्यः/DV मित्रारिपक्षयोः/NP ।/PUNC
सर्वारम्भपरित्यागी/NV गुणातीतः/NV सः/SN उच्यते/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मानापमानयोः/NP तुल्यः/NP समः/NP निर्विकारः/NV ;/PUNC तुल्यः/NP मित्रारिपक्षयोः/NP ,/PUNC यद्यपि/AVK उदासीनाः/NP भवन्ति/KP केचित्/A स्वाभिप्रायेण/NP ,/PUNC तथापि/AVK पराभिप्रायेण/NP मित्रारिपक्षयोः/NP इव/ASD भवन्ति/KP इति/AUD तुल्यः/NP मित्रारिपक्षयोः/NP इति/AUD आह/KP ।/PUNC सर्वारम्भपरित्यागी/NV ,/PUNC दृष्टादृष्टार्थानि/NV कर्माणि/NP आरभ्यन्ते/KP इति/AUD आरम्भाः/NP ,/PUNC सर्वान्/SNV आरम्भान्/NP परित्यक्तुम्/KKS शीलम्/NP अस्य/SN इति/AUD सर्वारम्भपरित्यागी/NV ,/PUNC देहधारणमात्रनिमित्तव्यतिरेकेण/NP सर्वकर्मपरित्यागी/NV इत्यर्थः/NP ।/PUNC गुणातीतः/NV सः/SN उच्यते/KP ।।/PUNC
'/PUNC उदासीनवत्/ASD (/PUNC गीता/NS 14/PUNC ।/PUNC 23/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A '/PUNC गुणातीतः/NV सः/SN उच्यते/KP (/PUNC गीता/NS 14/PUNC ।/PUNC 25/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD एतदन्तम्/KN उक्तम्/KN यावत्/AVK यत्नसाध्यम्/NP तावत्/AVK संन्यासिनः/NP अनुष्ठेयम्/NP गुणातीतत्वसाधनम्/NP मुमुक्षोः/NP ;/PUNC स्थिरीभूतम्/KN तु/A स्वसंवेद्यम्/NP सत्/NP गुणातीतस्य/KN यतेः/SNV लक्षणम्/NP भवति/KP इति/AUD ।/PUNC अधुना/A '/PUNC कथम्/AP च/AVK त्रीन्/SMKY गुणान्/NP अति/KV वर्तते/KP ?/PUNC '/PUNC इति/AUD अस्य/SNV प्रश्नस्य/NP प्रति/AUP वचनम्/NP आह/KP -/PUNC
माम्/SN च/AVK यः/SSN अव्यभिचारेण/NP भक्तियोगेन/NP सेवते/KP ।/PUNC
सः/SSN गुणान्/NP समतीत्य/KKS एतान्/SN ब्रह्मभूयाय/NP कल्पते/KP ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC -/PUNC माम्/SN च/AVK ईश्वरम्/NP  नारायणम्/NS सर्वभूतहृदयाश्रितम्/KN यः/SSN यतिः/NP कर्मी/NP वा/APY अव्यभिचारेण/NP न/AN कदाचित्/A यः/SN  व्यभिचरति/KP भक्तियोगेन/NP भजनम्/NP भक्तिः/NP सा/SSN एव/INTF योगः/NP तेन/SNV भक्तियोगेन/NP सेवते/KP ,/PUNC सः/SSN गुणान्/NP समतीत्य/KKS तान्/SN यथोक्तान्/KN ब्रह्मभूयाय/NP ,/PUNC भवनम्/NP भूयः/A ,/PUNC ब्रह्मभूयाय/NP ब्रह्मभवनाय/NP मोक्षाय/NP कल्पते/KP समर्थः/NP भवति/KP इत्यर्थः/KP ।।/PUNC
कुतः/A एतत्/SN इति/AUD उच्यते/KP -/PUNC
ब्रह्मणः/NS हि/A प्रतिष्ठा/NP अहम्/SN अमृतस्य/NV अव्ययस्य/NV च/APY ।/PUNC
शाश्वतस्य/NV च/APY धर्मस्य/NV सुखस्य/NV एकान्तिकस्य/NV च/APY ।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासु/NS उपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NS योगशास्त्रे/NS श्रीकृष्णार्जुनसंवादे/NP गुणत्रयविभागयोगः/NS नाम/NP चतुर्दशः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 14/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ब्रह्मणः/NS परमात्मनः/NP हि/A यस्मात्/SN प्रतिष्ठा/NP अहम्/SN प्रति/AUP तिष्ठति/KP अस्मिन्/SN इति/AUD प्रतिष्ठा/NP अहम्/SN  प्रत्यगात्मा/NP ।/PUNC कीदृशस्य/AP ब्रह्मणः/NS ?/PUNC अमृतस्य/NV अविनाशिनः/NV अव्ययस्य/NV अविकारिणः/NV शाश्वतस्य/NV च/APY नित्यस्य/NV धर्मस्य/NV धर्मज्ञानस्य/NV ज्ञानयोगधर्मप्राप्यस्य/NV सुखस्य/NV आनन्दरूपस्य/NV ऐकान्तिकस्य /NV अव्यभिचारिणः/NV अमृतादिस्वभावस्य/NV परमानन्दरूपस्य/NV परमात्मनः/NP प्रत्यगात्मा/NP प्रतिष्ठा/NP ,/PUNC सम्यक्/NV ज्ञानेन/NP परमात्मतया/NP निश्चीयते/KP ।/PUNC तत्/SN एतत्/SN '/PUNC ब्रह्मभूयाय/NP कल्पते/KP (/PUNC गीता/NS 14/PUNC ।/PUNC 26/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC यया/SN च/AVK ईश्वरशक्त्या/NP भक्तानुग्रहादिप्रयोजनाय/NP ब्रह्म/NS प्रतिष्ठते/KP प्रवर्तते/KP ,/PUNC सा/SNV शक्तिः/NP ब्रह्म/NS एव/INTF अहम्/SN ,/PUNC शक्तिशक्तिमतोः/NP अनन्यत्वात्/NP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC ब्रह्मशब्दवाच्यत्वात्/NP सविकल्पकम्/NV ब्रह्म/NS ।/PUNC तस्य/SNV ब्रह्मणः/NS निर्विकल्पकः/NV अहम्/SN एव/INTF न/AN अन्यः/SNV प्रतिष्ठा/NP आश्रयः/NP ।/PUNC किंविशिष्टस्य/SN ?/PUNC अमृतस्य/NV अमरणधर्मकस्य/NV अव्ययस्य/NV व्ययरहितस्य/NV ।/PUNC किञ्च/AVK ,/PUNC शाश्वतस्य/NV च/APY नित्यस्य/NV धर्मस्य/NV ज्ञाननिष्ठालक्षणस्य/NV सुखस्य/NV तत्/SN जनितस्य/NV ऐकान्तिकस्य/NV एकान्तनियतस्य/NV च/APY ,/PUNC '/PUNC प्रतिष्ठा/NP अहम्/SN '/PUNC इति/AUD  वर्तते/KP ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NV श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NV श्रीमच्छङ्करभगवतः/NP कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NP चतुर्दशः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
यस्मात्/SN मदधीनम्/NP कर्मिणाम्/NP कर्मफलम्/NP ज्ञानिनाम्/NP च/AVK ज्ञानफलम्NP ,/PUNC अतः/A भक्तियोगेन/NP माम्/SN ये/SSN सेवन्ते/KP ते/SSN मम/SN प्रसादात्/NP ज्ञानप्राप्तिक्रमेण/NP गुणातीताः/KN मोक्षम्/NP गच्छन्ति/KP ।/PUNC किमु/SN वक्तव्यम्/KN आत्मनः/NP तत्त्वम्/NP एव/INTF सम्यक्/NV विजानन्तः/KN इति/AUD अतः/A भगवान्/NP अर्जुनेन/NS अपृष्टः/KN अपि/A आत्मनः/NP तत्त्वम्/NP विवक्षुः/NP उवाच/KP '/PUNC ऊर्ध्व/AUP मूलम्/NP '/PUNC इत्यादिना/A ।/PUNC तत्र/A तावत्/A वृक्षरूपककल्पनया/NP वैराग्यहेतोः/NP संसारस्वरूपम्/NP वर्णयति/KP -/PUNC विरक्तस्य/NP हि/A संसारात्/NP भगवत्तत्त्वज्ञाने/NP अधिकारः/NP ,/PUNC न/AN अन्यस्य/SN इति/AUD ।।/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP 
ऊर्ध्व/AUP मूलम्/NP अधः/AUP शाखम्/NP अश्वत्थम्/NV प्राहुः/KP अव्ययम्/NP ।/PUNC 
छन्दांसि/NP यस्य/SN पर्णानि/NP यः/SSN तम्/SN वेदः/NS सः/SSN वेदवित्/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ऊर्ध्व/AUP मूलम्/NP कालतः/KN सूक्ष्मत्वात्/NV कारणत्वात्/NV नित्यत्वात्/NV महत्त्वात्/NV च/APY ऊर्ध्वम्/NP ;/PUNC उच्यते/KP ब्रह्म/NS अव्यक्तम्/NV  मायाशक्तिमत्/NP ,/PUNC तत्/SNV मूलम्/NP अस्य/SN इति/AUD सः/SN अयम्/SNV संसारवृक्षः/NP ऊर्ध्वमूलः/NP ।/PUNC श्रुतेः/NS च/AVK -/PUNC '/PUNC ऊर्ध्व/AUP मूलः/NP अर्वाक्शाखः/NP एषः/SN अश्वत्थः/NV सनातनः/NV (/PUNC क0/PUNC उ0/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 6/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC पुराणे/NS च/AVK -/PUNC '/PUNC अव्यक्तमूलप्रभवः/NP तस्य/SN एव/INTF अनुग्रहोच्छ्रितः/KN ।/PUNC बुद्धिस्कन्धमयः/NV च/AVK एव/INTF इन्द्रियान्तरकोटरः/NV ।।/PUNC महाभूतविशाखः/NP च/AVK विषयैः/NP पत्रवान्/NP तथा/AVK ।/PUNC धर्माधर्मसुपुष्पः/NP च/AVK सुखदुःखफलोदयः/NP ।।/PUNC आजीव्यः/NP सर्वभूतानाम्/NP ब्रह्मवृक्षः/NP सनातनः/NV ।/PUNC एतत्/SNV  ब्रह्मवचनम्/NP च/AVK एव/INTF ब्रह्म/NS आचरति/KP नित्यशः/KV ।।/PUNC
एतत्/SN छित्त्वा/KKS च/AVK भित्त्वा/KKS च/APY ज्ञानेन/NP परमासिना/NP ।/PUNC ततः/A च /AVK आत्मरतिम्/NP  प्राप्य/KKS तस्मात्/SN न/AN आवर्तते/KP पुनः/A ।।/PUNC '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC तम्/SNV ऊर्ध्वमूलम्/NV संसारम्/NP मायामयम्/NV वृक्षम्/NP अधः/AUP शाखम्/NP  महदहंकारतन्मात्रादयः/NV शाखाः/NP इव/ASD अस्य/SN अधः/AUP भवन्ति/KP इति/AUD सः/SN अयम्/SNV अधः/AUP शाखः/NP ,/PUNC तम्/SNV अधःशाखम्/NP ।/PUNC न/AN श्वः/NP अपि/A स्थाता/KN इति/AUD अश्वत्थः/KN तम्/SN क्षणप्रध्वंसिनम्/NP अश्वत्थम्/NV प्राहुः/KP कथयन्ति/KP अव्ययम्/NP संसारमायायाः/NP अनादिकालप्रवृत्तत्वात्/NP सः/SN अयम्/SNV संसारवृक्षः/NP अव्ययः/NP ,/PUNC अनाद्यन्तदेहादिसंतानाश्रयः/NP हि/A सुप्रसिद्धः/KN ,/PUNC तम्/SNV अव्ययम्/NP ।/PUNC तस्य/SN एव/INTF संसारवृक्षस्य/NP इदम्/SN अन्यत्/SNV विशेषणम्/NP -/PUNC छन्दांसि/NP यस्य/SN पर्णानि/NP ,/PUNC छन्दांसि/NP च्छादनात्/NP ऋग्यजुःसामलक्षणानि/NP यस्य/SNV संसारवृक्षस्य/NP पर्णानि/NP इव/ASD पर्णानि/NP ।/PUNC यथा/AVK वृक्षस्य/NP परिरक्षणार्थानि/NV पर्णानि/NP ,/PUNC तथा/AVK वेदाः/NS संसारवृक्षपरिरक्षणार्थाः/NP ,/PUNC धर्माधर्मतद्धेतुफलप्रदर्शनार्थत्वात्/NP ।/PUNC यथाव्याख्यातम्/KN संसारवृक्षम्/NP समूलम्/NV यः/SSN तम्/SN  वेदः/NS सः/SSN वेदवित्/NP ,/PUNC वेदार्थवित्/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC न/AN हि/A समूलात्/NV संसारवृक्षात्/NP अस्मात्/SN ज्ञेयः/NP अन्यः/SN अणुमात्रः/NP अपि/A अवशिष्टः/KN अस्ति/KP इति/AUD  अतः/A सर्वज्ञः/NV सर्ववेदार्थवित्/NV इति/AUD समूलसंसारवृक्षज्ञानम्/NP स्तौति/KP ।।/PUNC
तस्य/SN एतस्य/SNV संसारवृक्षस्य/NP अपरा/A अवयवकल्पना/NP उच्यते/KP -/PUNC
अधः/AUP च/AVK उर्ध्वम्/AUP प्रसृताः/KN तस्य/SN शाखाः/NP गुणप्रवृद्धाः/NV विषयप्रवालाः/NV ।/PUNC 
अधः/AUP च/AVK मूलानि/NP अनुसन्ततानि/NV कर्मानुबन्धीनि/NP मनुष्यलोके/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/pUNC 15/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अधः/AUP मनुष्यादिभ्यः/NP यावत्/AVK स्थावरम्/NP ऊर्ध्वम्/NP च/APY यावत्/A ब्रह्मणः/NS विश्वसृजः/NS धामः/NP  इति/AUD एतदन्तम्/KN यथाकर्म/NP यथाश्रुतम्/KN ज्ञानकर्मफलानि/NP ,/PUNC तस्य/SNV वृक्षस्य/NP शाखाः/NP इव/ASD शाखाः/NP प्रसृताः/KN प्रगताः/KN ,/PUNC गुणप्रवृद्धाः/KN गुणैः/NP सत्त्वरजस्तमोभिः/NP प्रवृद्धाः/KN स्थूलीकृताः/KN उपादानभूतैः/NP ,/PUNC विषयप्रवालाः/NV विषयाः/NP शब्दादयः/NP प्रवालाः/NP इव/ASD देहादिकर्मफलेभ्यः/NV शाखाभ्यः/NP अङ्कुरी/NP भवन्ति/KP इव/ASD ,/PUNC तेन/SN विषयप्रवालाः/NV शाखाः/NP ।/PUNC संसारवृक्षस्य/NP परममूलम्/NV उपादानकारणम्/NP पूर्वम्/A उक्तम्/KN ।/PUNC अथ/A इदानीम्/A कर्मफलजनितरागद्वेषादिवासनाः/NP मूलानि/NP इव/ASD धर्माधर्मप्रवृत्तिकारणानि/NP अवान्तरभावीनि/NP तानि/SN अधः/AUP च/AVK देवादि/NP  अपेक्षया/NP मूलानि/NP अनुसंततानि/NV अनुप्रविष्टानि/NV कर्मानुबन्धीनि/NV कर्म/NP धर्माधर्मलक्षणम्/NP अनुबन्धः/NP पश्चाद्भावि/NP ,/PUNC येषाम्/SN उद्भूतिम्/KN अनु/A उद्भवति/KP ,/PUNC तानि/SNV कर्मानुबन्धीनि/NP मनुष्यलोके/NP विशेषतः/KN ।/PUNC अत्र/A हि/A मनुष्याणाम्/NP कर्माधिकारः/NP प्रसिद्धः/KN ।।/PUNC
यः/SN तु/A अयम्/SN वर्णितः/KN संसारवृक्षः/NP -/PUNC
न/AN रूपम्/NP अस्य/SN इह/A तथा/AVK उपलभ्यते/KP न/AN अन्तः/NP न/AN च/APY आदिः/NP न/AN च/APY संप्रतिष्ठा/NP ।/PUNC 
अश्वत्थम्/NV एनम्/SN सुविरूढमूलम्/NV असङ्गशस्त्रेण/NP दृढेन/NP छित्त्वा/KKS ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN रूपम्/NP अस्य/SN इह/A यथा/AVK उप/AUP वर्णितम्/KN  तथा/AVK न/AN एव/INTF उप/AUP लभ्यते/KP ,/PUNC स्वप्नमरीच्युदकमायागन्धर्वनगरसमत्वात्/NP ;/PUNC दृष्टनष्टस्वरूपः/NP हि/A सः/SN इति/AUD अतः/A एव/INTF न/AN अन्तः/NP न/AN पर्यन्तः/KN निष्ठा/NP परसमाप्तिः/NP वा/AVK विद्यते/KP ।/PUNC तथा/AVK न/AN च/APY आदिः/NP ,/PUNC '/PUNC इतः/A आरभ्य/KKS अयम्/SN प्रवृत्तः/KN '/PUNC इति/AUD न/AN केनचित्/A गम्यते/KP ।/PUNC न/AN च/AVK संप्रतिष्ठा/NV स्थितिः/NP मध्यम्/NP अस्य/SN न/AN केनचित्/A उप/AUP लभ्यते/KP ।/PUNC अश्वत्थम्/NV एनम्/SN यथोक्तम्/KN सुविरूढमूलम्/NV सुष्ठु/NV विरूढानि/KP विरोहम्/NP गतानि/KP सुदृढानि/NV मूलानि/NP यस्य/SN तम्/SN एनम्/SN  सुविरूढमूलम्/NP ,/PUNC असङ्गशस्त्रेण/NP असङ्गः/NP पुत्रवित्तलोकैषणादिभ्यः/NP व्युत्थानम्/NP तेन/SN असङ्गशस्त्रेण/NP दृढेन/NP परमात्माभिमुख्यनिश्चयदृढीकृतेन/NP पुनः/A पुनः/DV विवेकाभ्यासाश्मनिशितेन/NP च्छित्वा/KKS संसारवृक्षम्/NP  सबीजम्/NP उद्धृत्य/KKS ।।/PUNC
ततः/A पदम्/NP तत्/SN परिमार्गितव्यम्/KN यस्मिन्/SN गता/KN न/AN निवर्तन्ति/KP भूयः/A ।/PUNC 
तम्/SN एव/INTF च/AVK आद्यम्/NV पुरुषम्/NP प्रपद्ये/KP यतः/A प्रवृत्तिः/NP प्रसृता/KN पुराणी/NV ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ततः/A पश्चात्/NP यत्/SNV पदम्/NP वैष्णवम्/NV  तत्/SN परिमार्गितव्यम्/KN ,/PUNC परिमार्गणम्/NP अन्वेषणम्/NP ज्ञातव्यम्/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC यस्मिन्/SNV पदे/NP गताः/KN प्रविष्टाः/KN न/AN निवर्तन्ति/KP न/AN आवर्तन्ते/KP भूयः/A पुनः/A संसाराय/NP ।/PUNC कथम्/A परिमार्गितव्यम्/KN इति/AUD आह/KP -/PUNC तम्/SN एव/INTF च/AVK यः/SNV पदशब्देन/NP उक्तः/KN आद्यम्/A आदौ/NP भवम्/KP आद्यम्/A पुरुषम्/NP प्रपद्ये/KP इति/AUD एवम्/AUD परिमार्गितव्यम्/KN तच्छरणतया/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC कः/SN असौ/SNV पुरुषः/NP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC यतः/A यस्मात्/SNV पुरुषात्/NP संसारमायावृक्षप्रवृत्तिः/NP प्रसृता/KN निःसृता/KN ,/PUNC ऐन्द्रजालिकात्/NP इव/ASD माया/NP ,/PUNC पुराणी/NV चिरंतनी/NV ।।/NV 
कथंभूताः/KN तत्/SNV पदम्/NP गच्छन्ति/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
निर्मानमोहाः/NV जितसङ्गदोषाः/NV अध्यात्मनित्याः/NV विनिवृत्तकामाः/NV ।/PUNC 
द्वन्द्वैः/NP विमुक्ताः/KN सुखदुःखसञ्ज्ञैः/NP गच्छन्ति/KP अमूढाः/NV पदम्/NP अव्ययम्/NP तत्/SN ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC निर्मानमोहाः/NP मानः/NP च/APY मोहः/NP च/APY मानमोहौ/NP ,/PUNC तौ/SN निर्गतौ/KN येभ्यः/SN ते/SN निर्मानमोहाः/NV मानमोहवर्जिताः/KN ।/PUNC जितसङ्गदोषाः/NV सङ्गः/NP एव/INTF दोषः/NP सङ्गदोषः/NP ,/PUNC जितः/KN सङ्गदोषः/NP यैः/SSN ते/SSN जितसङ्गदोषाः/NP ।/PUNC अध्यात्मनित्याः/NV परमात्मस्वरूपालोचननित्याः/NV तत्पराः/NV ।/PUNC विनिवृत्तकामाः/NP विशेषतः/KN निर्लेपेन/NP निवृत्ताः/KN कामाः/NP येषाम्/SN ते/SN विनिवृत्तकामाः/NP यतयः/SN संन्यासिनः/NP द्वन्द्वैः/NP प्रियाप्रियादिभिः/NP विमुक्ताः/KN सुखदुःखसंज्ञैः/NP परित्यक्ताः/KN गच्छन्ति/KP अमूढाः/NV मोहवर्जिताः/KN पदम्/NP अव्ययम्/NP तत्/SN यथोक्तम्/KN ।।/PUNC
तत्/SN एव/INTF पदम्/NP पुनः/A विशेष्यते/KP -/PUNC
न/AN तद्भासयते/KP सूर्यः/NS न/AN शशाङ्कः/NS न/AN पावकः/NP ।/PUNC 
यत्/SN गत्वा/KKS न/AN निवर्तन्ते/KP तत्/SNV धाम/NP परमम्/NV मम/SN ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तत्/SN धाम/NP इति/AUD व्यवहितेन/NP धाम्ना/NP संबध्यते/KP ।/PUNC तत्/SN धाम/NP तेजोरूपम्/ASD पदम्/NP न/AN भासयते/KP सूर्यः/NS आदित्यः/NS सर्वावभासनशक्तिमत्त्वे/NP अपि/A सति/A ।/PUNC तथा/AVK न/AN शशाङ्कः/NS चन्द्रः/NS ,/PUNC न/AN पावकः/NP न/AN अग्निः/NP अपि/A ।/PUNC यत्/SNV धाम/NP वैष्णवम्/NV पदम्/NP गत्वा/KKS प्राप्य/KKS न/AN निवर्तन्ते/KP ,/PUNC यत्/SN च/A सूर्यादिः/NP न/AN भासयते/KP ,/PUNC तत्/SNV धाम/NP पदम्/NP परमम्/NV विष्णोः/NS मम/SNV पदम्/NP ,/PUNC यत्/SN गत्वा/KKS न/AN निवर्तन्ते/KP (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 6/PUNC )/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ।।/PUNC
ननु/A सर्वा/SN हि/A गतिः/NP आगत्यन्ता/KN ,/PUNC '/PUNC संयोगाः/NP विप्रयोगान्ताः/KN '/PUNC इति/AUD प्रसिद्धम्/KN ।/PUNC कथम्/A उच्यते/KP '/PUNC तत्/SNV धाम/NP गतानाम्/NP न/AN अस्ति/KP निवृत्तिः/NP '/PUNC इति/AUD ?/PUNC शृणु/KP तत्र/A कारणम्/NP -/PUNC 
मम/SN एव/INTF अंशः/NP जीवलोके/NP जीवभूतः/KN सनातनः/NV ।/PUNC 
मनः/NP षष्ठानि/SMKY इन्द्रियाणि/NP प्रकृतिस्थानि/NP कर्षति/KP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मम/SN एव/INTF परमात्मनः/NV नारायणस्य/NS ,/PUNC अंशः/NP भागः/NP अवयवः/NP एकदेशः/NP इति/AUD अनर्थान्तरम्/NP  जीवलोके/NP जीवानाम्/NP लोके/NP संसारे/NP जीवभूतः/KN कर्ता/NP भोक्ता/NP इति/AUD प्रसिद्धः/KN सनातनः/NV चिरंतनः/NV ;/PUNC यथा/AVK जलसूर्यकः/NP सूर्यांशः/NP जलनिमित्तापाये/NP सूर्यम्/NP एव/INTF गत्वा/KKS न/AN निवर्तते/KP च/AVK तेन/SN एव/INTF आत्मना/NP गच्छति/KP ,/PUNC एवम्/AUD एव/INTF ;/PUNC यथा/AVK घटाद्युपाधिपरिच्छिन्नः/KN घटाद्याकाशः/NP आकाशांशः/NP सन्/A घटादिनिमित्तापाये/NP आकाशम्/NP प्राप्य/KKS न/AN निवर्तते/KP ।/PUNC अतः/A उपपन्नम्/KN उक्तम्/KN '/PUNC यत्/SN गत्वा/KKS न/AN निवर्तन्ते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC ननु/A निरवयवस्य/NV परमात्मनः/NP कुतः/AP अवयवः/NP एकदेशः/NV अंशः/NP इति/AUD ?/PUNC सावयवत्वे/NP च/AVK विनाशप्रसङ्गः/NP अवयवविभागात्/NP ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ,/PUNC अविद्याकृतोपाधिपरिच्छिन्नः/KN एकदेशः/NV अंशः/NP इव/ASD कल्पितः/KN यतः/A ।/PUNC दर्शितः/KN च/AVK अयम्/SNV अर्थः/NP क्षेत्राध्याये/NP विस्तरशः/NP ।/PUNC सः/SN च/AVK जीवः/NP मदंशत्वेन/NP कल्पितः/KN कथम्/A  संसरति/KP उत्क्रामति/KP च/APY इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC मनः/NP षष्ठानि/SMKY इन्द्रियाणि/NP श्रोत्रादीनि/NP प्रकृतिस्थानि/NP स्वस्थाने/NP कर्णशष्कुल्यादौ/NV प्रकृतौ/NP स्थितानि/NP कर्षति/KP आकर्षति/KP ।।/PUNC
कस्मिन्/SN काले/NP ?/PUNC -/PUNC 
शरीरम्/NP यत्/SN अवाप्नोति/KP यत्/SN च/AVK अपि/A उत्क्रामति/KP ईश्वरः/NP ।/PUNC 
गृहीत्वा/KKS एतानि/SNV संयाति/KP वायुः/NP गन्धान्/NP इव/ASD आशयात्/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/AVK च/AVK अपि/A यदा/AVK च/A अपि/A उत्क्रामति/KP ईश्वरः/NP देहादिसंघातस्वामी/NV जीवः/NP ,/PUNC तदा/AVK '/PUNC कर्षति/KP '/PUNC इति/AUD श्लोकस्य/NP द्वितीय/SMKP पादः/NP अर्थवशात्/NP प्राथम्येन/NP संबध्यते/KP ।/PUNC यदा/AVK च/AVK पूर्वस्मात्/NV शरीरात्/NP शरीरान्तरम्/NP अवाप्नोति/KP तदा/AVK गृहीत्वा/KKS तानि/SNV मनःषष्ठानि/SMKY इन्द्रियाणि/NP संयाति/KP सम्यक्/NV याति/KP गच्छति/KP ।/PUNC किम्/SN इव/ASD इति/AUD ,/PUNC आह/KP -/PUNC वायुः/NP पवनः/NP गन्धान्/NP इव/ASD आशयात्/NP पुष्पादेः/NP ।।/PUNC
कानि/SSN पुनः/A तानि/SSN -/PUNC
श्रोत्रम्/NP चक्षुः/NP स्पर्शनम्/NP च/APY रसनम्/NP घ्राणम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC 
अधिष्ठाय/NP मनः/NP च/APY अयम्/SNV विषयान्/NP उप/AUP सेवते/KP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC श्रोत्रम्/NP चक्षुः/NP स्पर्शनम्/NP  च/APY त्वगिन्द्रियम्/NP  रसनम्/NP घ्राणम्/NP एव/INTF च/APY मनः/NP च/APY षष्ठम्/SMKP प्रति/AUP एकम्/SMK इन्द्रियेण/NP सह/AUP ,/PUNC अधिष्ठाय/NP देहस्थः/NP विषयान्/NP शब्दादीन्/NP उप/AUP सेवते/KP ।।/PUNC एवम्/AUD देहगतम्/KN देहात्/NP -/PUNC
उत्क्रामन्तम्/KN स्थितम्/KN वा/AVK अपि/A भुञ्जानम्/NP वा/AVK गुणान्वितम्/KN ।/PUNC 
विमूढा/NP न/AN अनु/AUP पश्यन्ति/KP पश्यन्ति/DV ज्ञानचक्षुषः/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC उत्क्रामन्तम्/KN देहम्/NP  पूर्वोपात्तम्/NP परित्यजन्तम्/KN स्थितम्/KN वा/APY अपि/AVK देहे/NP तिष्ठन्तम्/KN भुञ्जानम्/NP वा/APY शब्दादीन्/NP च/AVK उप/AUP लभमानम्/KN गुणान्वितम्/KN सुखदुःखमोहाद्यैः/NV गुणैः/NP अन्वितम्/KN अनुगतम्/KN  संयुक्तम्/KN इत्यर्थः/NP ।/PUNC एवंभूतम्/ASD अपि/AVK एनम्/SN अत्यन्त/NV दर्शनगोचरप्राप्तम्/KN विमूढाः/NP दृष्टादृष्टविषयभोगबलाकृष्टचेतस्तया/NP अनेकधा/NV मूढाः/NP न/AN अनु/AUP पश्यन्ति/KP -/PUNC अहो/ASMB कष्टम्/NP वर्तते/KP इति/AUD अनु/AUP क्रोशति/KP च/AVK भगवान्/NP -/PUNC ये/SSN तु/A पुनः/A प्रमाणजनितज्ञानचक्षुषः/NP ते/SSN एनम्/SN पश्यन्ति/KP ज्ञानचक्षुषः/NP विविक्तदृष्टयः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
यतन्तः/KN योगिनः/NP च/AVK एनम्/SN पश्यन्ति/KP आत्मनि/NP अवस्थितम्/KN ।/PUNC 
यतन्तः/KN अपि/AVK अकृतात्मानः/NP न/AN एनम्/SN पश्यन्ति/KP अचेतसः/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यतन्तः/KN प्रयत्नम्/NP कुर्वन्तः/KNV योगिनः/NP च/AVK समाहित/KN चित्ताः/NP एनम्/SNV प्रकृतम्/NP आत्मानम्/NP पश्यन्ति/KP '/PUNC अयम्/SNV अहम्/SN अस्मि/KP '/PUNC इति/AUD उप/AUP लभन्ते/KP आत्मनि/SN स्वस्याम्/SN बुद्धौ/NP अवस्थितम्/KN ।/PUNC यतन्तः/KN अपि/AVK शास्त्रादिप्रमाणैः/NP ,/PUNC अकृतात्मानः/KN असंस्कृतात्मानः/KN तपसा/NP इन्द्रियजयेन/NP च/AVK ,/PUNC दुश्चरितात्/NP अनुपरताः/KN ,/PUNC अशान्त/NV दर्पाः/NP ,/PUNC प्रयत्नम्/NP कुर्वन्तः/KNV अपि/AVK न/AN एनम्/SN पश्यन्ति/KP अचेतसः/NP अविवेकिनः/NP ।।/PUNC 
यत्/SNV पदम्/NP सर्वस्य/SN अवभासकम्/NP अपि/A अग्न्यादित्यादिकम्/NP ज्योतिः/NP न/AN अवभासयते/KP ,/PUNC यत्/SN प्राप्ताः/KN च/AVK मुमुक्षवः/NP पुनः/A संसाराभिमुखाः/NP न/AN निवर्तन्ते/KP ,/PUNC यस्य/SSN च/AVK पदस्य/NP उपाधिभेदम्/NP अनुविधीयमानाः/KN जीवाः/NP -/PUNC घटाकाशादयः/A इव/ASD आकाशस्य/NP -/PUNC अंशाः/NP ,/PUNC तस्य/SSN पदस्य/NP सर्वात्मत्वम्/NP सर्वव्यवहारास्पदत्वम्/NP च/AVK विवक्षुः/NP चतुर्भिः/SMKY श्लोकैः/NP विभूतिसंक्षेपम्/KV आह/KP भगवान्/NP -/PUNC
यत्/SN आदित्यगतम्/KN तेजः/NP जगद्भासयते/KP अखिलम्/NP ।/PUNC 
यत्/SSN चन्द्रमसि/NP यत्/SSN च/AVK अग्नौ/NP तत्/SSN तेजः/NP विद्धि/KP मामकम्/SN ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SN आदित्यगतम्/KN आदित्याश्रयम्/NP ।/PUNC किम्/SN तत्/SN ?/PUNC तेजः/NP दीप्तिः/NP प्रकाशः/NP जगत्/NP भासयते/KP प्रकाशयति/KP अखिलम्/NP समस्तम्/KN ;/PUNC यत्/SN चन्द्रमसि/NP शशभृति/NP तेजः/NP अवभासकम्/NP वर्तते/KP ,/PUNC यत्/SSN च/AVK अग्नौ/NP हुतवहे/KP ,/PUNC तत्/SSN तेजः/NP विद्धि/KP विजानीहि/KP मामकम्/SN मदीयम्/SN मम/SNV विष्णोः/NS तत्/SSN ज्योतिः/NP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC आदित्यगतम्/NV तेजः/NP चैतन्यात्मकम्/NV ज्योतिः/NP ,/PUNC यत्/SSN चन्द्रमसि/NP ,/PUNC यत्/SSN च/AVK अग्नौ/NP वर्तते/KP तत्/SSN तेजः/NP विद्धि/KP मामकम्/SN मदीयम्/SN मम/SNV विष्णोः/NS तत्/SN ज्योतिः/NP ।।/PUNC
ननु/A स्थावरेषु/NP जङ्गमेषु/NP च/APY तत्/SN समानम्/NP चैतन्यात्मकम्/NV ज्योतिः/NP ।/PUNC तत्र/A कथम्/A इदम्/SNV विशेषणम्/NP -/PUNC '/PUNC यत्/SNV आदित्यगतम्/KN '/PUNC इत्यादि/A ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ,/PUNC सत्त्वाधिक्यात्/NP आविस्तरत्वोपपत्तेः/NP ।/PUNC आदित्यादिषु/NP हि/A सत्त्वम्/NP अत्यन्त/NV प्रकाशम्/NP अत्यन्त/NV भास्वरम्/NP ;/PUNC अतः/A तत्र/A एव/INTF आविस्तरम्/NV ज्योतिः/NP इति/AUD तत्/SN विशिष्यते/KP ,/PUNC न/AN तु/A तत्र/A एव/INTF तत्/SN अधिकम्/NP इति/AUD ।/PUNC यथा/AVK हि/A श्लोके/NP तुल्ये/NP अपि/A मुखसंस्थाने/NP न/AN काष्ठकुड्यादौ/NP मुखम्/NP आविर्भवति/KP ,/PUNC आदर्शादौ/NP तु/A स्वच्छे/KV च/APY तारतम्येन/KV आविर्भवति/KP ;/PUNC तद्वत्/ASD ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
गाम्/NP आविश्य/KKS च/AVK भूतानि/NP धारयामि/KP अहम्/SN ओजसा/NP ।/PUNC 
पुष्णामि/NP च/AVK ओषधीः/NP सर्वाः/SNV सोमः/NP भूत्वा/KKS रसात्मकः/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC गाम्/NP पृथिवीम्/NP आविश्य/KKS प्रविश्य/KKS धारयामि/KP भूतानि/NP जगत्/NP अहम्/SN ओजसा/NS बलेन/NP ;/PUNC यत्/SNV बलम्/NP कामरागविवर्जितम्/KN ऐश्वरम्/NP रूपम्/NP जगद्विधारणाय/NP पृथिव्याम्/NP आविष्टम्/KN  येन/SN पृथिवी/NP गुर्वी/NP न/AN अधः/AUP पतति/KP न/AN विदीर्यते/KP चAVK ।/PUNC तथा/AVK च/AVK मन्त्रवर्णः/NP -/PUNC '/PUNC येन/SNV द्यौरुग्रा/NV पृथिवी/NP च/AVK दृढा/NP (/PUNC तै0/NS सं0/NS 4/PUNC ।/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 8/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ,/PUNC '/PUNC सः/SN दाधार/KP पृथिवीम्/NP (/PUNC तै0/PUNC सं0/PUNC 4/PUNC ।/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 8/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिः/NP च/AVK ।/PUNC अतः/A गाम्/NP आविश्य/KKS च/AVK भूतानि/NP चराचराणि/NP धारयामि/KP इति/AUD युक्तम्/KN उक्तम्/KN ।/PUNC किञ्च/AVK ,/PUNC पृथिव्याम्/NP जाताः/KN ओषधीः/NP सर्वाः/SNV व्रीहियवाद्याः/NP पुष्णामि/KP पुष्टिमतीः/NP रसस्वादुमतीः/NP च/AVK करोमि/KP सोमः/NP भूत्वा/KKS रसात्मकः/NV सोमः/NP सन्/A रसात्मकः/NP रसस्वभावः/NP ।/PUNC सर्वरसानाम्/NP आकरः/NV सोमः/NP ।/PUNC सः/SN हि/A सर्वरसात्मकः/NV सर्वाः/SNV ओषधीः/NP स्वात्मरसान्/NP अनु/AUP प्रवेशयन्/KNV पुष्णाति/KP ।।/PUNC 
किञ्च/AVK -/PUNC
अहम्/SN वैश्वानरः/NS भूत्वा/KKS प्राणिनाम्/NP देहम्/NP आश्रितः/KN ।/PUNC 
प्राणापानसमायुक्तः/KN पचामि/KP अन्नम्/NP चतुर्विधम्/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अहम्/SN एव/INTF वैश्वानरः/NS उदरस्थः/NV अग्निः/NP भूत्वा/KKS -/PUNC '/PUNC अयम्/SNV अग्निः/NP वैश्वानरः/NS यः/SN अयम्/SN अन्तः/KN पुरुषे/NP येन/SN इदम्/SNV अन्नम्/NP पच्यते/KP (/PUNC बृ0/PUNC उ0/PUNC 5/PUNC ।/PUNC 9/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/A श्रुतेः/NS ;/PUNC वैश्वानरः/NS सन्/A प्राणिनाम्/NP प्राणवताम्/NV देहम्/NP आश्रितः/KN प्रविष्टः/KN प्राणापानसमायुक्तः/KN प्राणापानाभ्याम्/NP समायुक्तः/KN संयुक्तः/KN पचामि/KP पक्तिम्/NP करोमि/KP अन्नम्/NP अशनम्/NP चतुर्विधम्/NV चतुष्प्रकारम्/NV भोज्यम्/NP भक्ष्यम्/NP चोष्यम्/KP लेह्यम्/KP च/APY ।/PUNC '/PUNC भोक्ता/NV वैश्वानरः/NS अग्निः/NP ,/PUNC अग्नेः/NP भोज्यम्/NP अन्नम्/NP सोमः/NS ,/PUNc तत्/SN एतत्/SNV उभयम्/SN अग्नीषोमौ/NS सर्वम्/SN '/PUNC इति/AUD पश्यतः/KN अन्नदोषलेपः/NP न/AN भवति/KP ।।/PUNC
किञ्च/AVK -/PUNC
सर्वस्य/SN च/AVK अहम्/SN हृदि/NP सन्निविष्टः/KN मत्तः/NP स्मृतिः/NP ज्ञानम्/NP अपोहनम्/NP च/APY ।/PUNC 
वेदैः/NS च/AVK सर्वैः/SN अहम्/SN एव/INTF वेद्यः/KP वेदान्तकृत्/NP वेदवित्‌/NP एव/INTF च/AVK अहम्/SN ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वस्य/SN च/AVK प्राणिजातस्य/NP अहम्/SN आत्मा/NP सन्/A हृदि/NP बुद्धौ/NP संनिविष्टः/KN ।/PUNC अतः/A मत्तः/NP आत्मनः/NP सर्वप्राणिनाम्/NP स्मृतिः/NP ज्ञानम्/NP तदपोहनम्/NP च/AVK अपगमनम्/NP च/APY ;/PUNC येषाम्/SN यथा/AVK पुण्यकर्मणाम्/NP पुण्यकर्मानुरोधेन/NP ज्ञानस्मृती/NP भवतः/KN ,/PUNC तथा/AVK पापकर्मणाम्/NP  पापकर्मानुरूपेण/ASD स्मृतिज्ञानयोः/NP अपोहनम्/NP च/APY अपायनम्/NP अपगमनम्/NP च/APY ।/PUNC वेदैः/NS च/AVK सर्वैः/SNV अहम्/SN एव/INTF परमात्मा/NP वेद्यः/KP वेदितव्यः/KN ।/PUNC वेदान्तकृत्/NP वेदान्तार्थसंप्रदायकृत्/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC वेदवित्/NP वेदार्थवित्/NP एव/INTF च/AVK अहम्/SN ।।/PUNC
भगवतः/NV ईश्वरस्य/NV नारायणाख्यस्य/NP विभूतिसंक्षेपः/KV उक्तः/KN विशिष्टोपाधिकृतः/KN '/PUNC यत्/SN आदित्यगतम्/KN तेजः/NP (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिना/A ।/PUNC अथ/A अधुना/A तस्य/SN एव/INTF क्षराक्षरोपाधिप्रविभक्ततया/NP निरुपाधिकस्य/NP केवलस्य/NP स्वरूपनिर्दिधारयिषया/NP उत्तरे/NV श्लोकाः/NP आरभ्यन्ते/KP ।/PUNC तत्र/A सर्वम्/SN एव/INTF अतीतानागतानन्तराध्यायार्थजातम्/KN त्रिधा/SMKY राशीकृत्य/KKS आह/KP -/PUNC
द्वौ/SMKY इमौ/SNV पुरुषौ/NP लोके/NP क्षरः/NP च/AVK अक्षरः/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC          
क्षरः/NP सर्वाणि/SNV भूतानि/NP कूटस्थः/NV अक्षरः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC  
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC द्वौ/SMKY इमौ/SNV पृथग्राशीकृतौ/NV पुरुषौ/NP इति/AUD उच्यते/KP लोके/NP संसारे/NP -/PUNC क्षरः/NP च/AVK क्षरति/KP इति/AUD क्षरः/NP विनाशी/NP इति/AUD एकः/SMKY राशिः/NP ;/PUNC अपरः/SNV पुरुषः/NP अक्षरः/NP तत्/SN विपरीतः/NP ,/PUNC भगवतः/NP मायाशक्तिः/NP ,/PUNC क्षराख्यस्य/NV पुरुषस्य/NP उत्पत्तिबीजम्/NP अनेकसंसारिजन्तुकामकर्मादिसंस्काराश्रयः/NP ,/PUNC अक्षरः/NV पुरुषः/NP उच्यते/KP ।/PUNC कौ/SN तौ/SNV पुरुषौ/NP इति/AUD ?/PUNC आह/ABS स्वयम्/SN एव/INTF भगवान्/NP -/PUNC क्षरः/NP सर्वाणि/SNV भूतानि/NP ,/PUNC समस्तम्/SNV विकारजातम्/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC कूटस्थः/KN कूटः/NV राशी/NP राशिः/NP इव/ASD स्थितः/KN ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC कूटः/NP माया/NP वञ्चना/NP जिह्मता/NP कुटिलता/NP इति/AUD पर्यायाः/NP ,/PUNC अनेकमायावञ्चनादिप्रकारेण/NP स्थितः/KN कूटस्थः/NP ,/PUNC संसारबीजानन्त्यात्/NP न/AN क्षरति/KP इति/AUD अक्षरः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC
आभ्याम्/SNV क्षराक्षराभ्याम्/NP अन्यः/SNV विलक्षणः/NP क्षराक्षरोपाधिद्वयदोषेण/NP अस्पृष्टः/KN नित्यशुद्धबुद्धमुक्तस्वभावः/NP -/PUNC
उत्तमः/NV पुरुषः/NP तु/A अन्यः/SNV परमात्मा/NP इति/AUD उदाहृतः/KN ।/PUNC 
यः/SN लोकत्रयम्/SMK आविश्य/KKS बिभर्ति/KP अव्ययः/NV ईश्वरः/NP ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC उत्तमः/NV उत्कृष्टतमः/NV पुरुषः/NP तु/A अन्यः/SN अत्यन्तविलक्षणः/NV आभ्याम्/SNV परमात्मा/NP इति/AUD परमः/NV च/AVK असौ/SN देहाद्यविद्याकृतात्मभ्यः/NP ,/PUNC आत्मा/NP च/AVK सर्वभूतानाम्/NP प्रत्यक्चेतनः/NP ,/PUNC इत्यतः/A परमात्मा/NP इति/AUD उदाहृतः/KN उक्तः/KN वेदान्तेषु/NP ।/PUNC सः/SN एव/INTF विशिष्यते/KP यः/SN लोकत्रयम्/NP  भूर्भुवःस्वराख्यम्/NP स्वकीयया/SN चैतन्यबलशक्त्या/NP आविश्य/KKS प्रविश्य/KKS बिभर्ति/KP स्वरूपसद्भावमात्रेण/NP बिभर्ति/KP धारयति/KP ;/PUNC अव्ययः/NP न/AN अस्य/SN व्ययः/NP विद्यते/KP इति/AUD अव्ययः/NP ।/PUNC कः/SN ?/PUNC ईश्वरः/NP सर्वज्ञः/NV नारायणाख्यः/NP ईशनशीलः/NV ।।/PUNC
यथाव्याख्यातस्य/NV ईश्वरस्य/NP '/PUNC पुरुषोत्तमः/NV '/PUNC इति/AUD एतत्/SNV नाम/NP प्रसिद्धम्/KN ।/PUNC तस्य/SN नामनिर्वचनप्रसिद्ध्या/NP अर्थवत्त्वम्/NP नाम्नः/NP दर्शयन्/KNV '/PUNC निरतिशयः/NP अहम्/SNV ईश्वरः/NP '/PUNC इति/AUD आत्मानम्/NP दर्शयति/KP भगवान्/NP -/PUNC 
यस्मात्/SN क्षरम्/NP अतीतः/KN अहम्/SN अक्षरात्/NP अपि/AVK च/AVK उत्तमः/NV ।/PUNC 
अतः/A अस्मि/KP लोके/NP वेदे/NS च/APY प्रथितः/KN पुरुषोत्तमः/NV ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यस्मात्/SN क्षरम्/NP अतीतः/KN अहम्/SN  संसारमायावृक्षम्/NP अश्वत्थाख्यम्/NP अतिक्रान्तः/KN अहम्/SN अक्षरात्/NP अपि/AVK संसारमायारूपवृक्षबीजभूतात्/NP अपि/AVK च/AVK उत्तमः/NV उत्कृष्टतमः/NV ऊर्ध्वतमः/NV वा/APY ,/PUNC अतः/A ताभ्याम्/SNV क्षराक्षराभ्याम्/NP उत्तमत्वात्/NV अस्मि/KP लोके/NP वेदे/NS च/APY प्रथितः/KN प्रख्यातः/KN ।/PUNC पुरुषोत्तमः/NV इति/AUD एवम्/AUD माम्/SN  भक्तजनाः/NP विदुः/KP ।/PUNC कवयः/NP काव्यादिषु/NP च/AVK इदम्/SN नाम/NP निबध्नन्ति/KP ।/PUNC पुरुषोत्तमः/NV इति/AUD अनेन/SN अभिधानेन/NP अभि/AUP गृणन्ति/KP ।।/PUNC
अथ/A इदानीम्/A यथानिरुक्तम्/NS आत्मानम्/NP यः/SNV वेदः/NS ,/PUNC तस्य/SN इदम्/SN फलम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
यः/SSN माम्/SN एवम्/AUD असम्मूढः/NV जानाति/KP पुरुषोत्तमम्/NV ।/PUNC 
सः/SSN सर्वविद्/NP भजति/KP माम्/SN सर्वभावेन/NP भारत/NS ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SSN माम्/SNV ईश्वरम्/NP  यथोक्तविशेषणम्/NP एवम्/AUD यथोक्तेन/NV प्रकारेण/NP असंमूढः/NV संमोहवर्जितः/KN सन्/A जानाति/KP '/PUNC अयम्/SNV अहम्/SN अस्मि/KP '/PUNC इति/AUD पुरुषोत्तमम्/NV सः/SSN सर्ववित्/SSN सर्वात्मना/NV सर्वम्/SN वेत्ति/KP इति/AUD सर्वज्ञः/NV सर्वभूतस्थम्/NP भजति/KP माम्/SN सर्वभावेन/NP सर्वात्मतया/NP हे/ASMB भारत/NS ।।/PUNC
अस्मिन्/SNV अध्याये/NP भगवत्तत्त्वज्ञानम्/NP मोक्षफलम्/NP उक्त्वा/KKS ,/PUNC अथ/A इदानीम्/A  तत्/SN स्तौति/KP -/PUNC
इति/AUD गुह्यतमम्/NV शास्त्रम्/NP इदम्/SN उक्तम्/KN मया/SN अनघ/NV ।/PUNC 
एतत्/SN बुद्ध्वा/KKS बुद्धिमान्/NP स्यात्/KP कृतकृत्यः/NP च/AVK भारत/NS ।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासु/NS उपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NS योगशास्त्रे/NS श्रीकृष्णार्जुन/NS संवादे/NP पुरुषोत्तमयोगः/NS नाम/NP पञ्चदशः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 15/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इति/AUD एतत्/SN गुह्यतमम्/NV  गोप्यतमम्/NV ,/PUNC अत्यन्तरहस्यम्/NV इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC किम्/SN तत्/SN ?/PUNC शास्त्रम्/NP ।/PUNC यद्यपि/AVK गीताख्यम्/NP समस्तम्/SNV '/PUNC शास्त्रम्/NP '/PUNC उच्यते/KP ,/PUNC तथापि/AVK अयम्/SN एव/INTF अध्यायः/NP इह/A '/PUNC शास्त्रम्/NP '/PUNC इति/AUD उच्यते/KP स्तुत्यर्थम्/NP प्रकरणात्/NP ।/PUNC सर्वः/SN हि/A गीताशास्त्रार्थः/NP अस्मिन्/SNV अध्याये/NP समासेन/NP उक्तः/KN ।/PUNC न/AN केवलम्/A गीताशास्त्रार्थः/NP एव/INTF ,/PUNC किन्तु/AVK सर्वः/SN च/AVK वेदार्थः/NP इह/A परिसमाप्तः/KN ।/PUNC '/PUNC यः/SSN तम्/SN  वेदः/KP सः/SSN वेदवित्/NV (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC वेदैः/NS च/AVK सर्वैः/SN अहम्/SN एव/INTF वेद्यः/KP (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 15/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK उक्तम्/KN ।/PUNC इदम्/SN उक्तम्/KN कथितम्/KN मया/SN हे/ASMB अनघ/NV अपाप/NV ।/PUNC तत्/SNV शास्त्रम्/NP  यथादर्शितार्थम्/NP बुद्ध्वा/KKS बुद्धिमान्/NP स्यात्/KP भवेत्/KP न/AN अन्यथा/A कृतकृत्यः/NP च/AVK भारत/NS कृतम्/KN कृत्यम्/NP कर्तव्यम्/KN येन/SN सः/SN कृतकृत्यः/NP ;/PUNC विशिष्टजन्मप्रसूतेन/NV ब्राह्मणेन/NS यत्/SSN कर्तव्यम्/KN तत्/SSN सर्वम्/SN भगवत्तत्त्वे/NP विदिते/KN कृतम्/KN भवेत्/KP इत्यर्थः/NP ;/PUNC न/AN च/AVK अन्यथा/SNV कर्तव्यम्/KN  परिसमाप्यते/KP कस्यचित्/SN इति/AUD अभिप्रायः/NP ।/PUNC '/PUNC सर्वम्/SNV कर्माखिलम्/NP  पार्थ/NS ज्ञाने/NP परिसमाप्यते/KP (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ।/PUNC 33/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK उक्तम्/KN ।/PUNC '/PUNC एतद्धि/SN जन्मसामग्र्यम्/NP ब्राह्मणस्य/NS विशेषतः/NP ।/PUNC प्राप्य/KKS एतत्/SN कृतकृत्यः/NP हि/A द्विजः/NS  भवति/KP न/AN अन्यथा/A (/PUNC मनुस्मृति/NS 12/PUNC ।/PUNC 93/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK मानवम्/NV वचनम्/NP ।/PUNC यतः/A तत्/SN परमार्थतत्त्वम्/NP मत्तः/NP श्रुतवान्/KN असि/KP ,/PUNC अतः/A कृतार्थः/NP त्वम्/SNV  भारत/NS इति/AUD ।।/PUNC 
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NV श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NV श्रीमच्छङ्करभगवतः/NP कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NP पञ्चदशः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC 
