﻿
दैवी/NP आसुरी/NP राक्षसी/NP इति/AUD प्राणिनाम्/NP प्रकृतयः/NP नवमे/SMKY अध्याये/NP सूचिताः/KN ।/PUNC तासाम्/SN विस्तरेण/NV प्रदर्शनाय/NP '/PUNC अभयम्/NS सत्त्वसंशुद्धिः/NS '/PUNC इत्यादिः/NV अध्यायः/NP आरभ्यते/KP ।/PUNC तत्र/A संसारमोक्षाय/NP दैवी/NV प्रकृतिः/NP ,/PUNC निबन्धाय/NP आसुरी/NP राक्षसी/NP च/APY इति/AUD दैव्याः/NP आदानाय/NP प्रदर्शनम्/NP क्रियते/KP ,/PUNC इतरयोः/SN परिवर्जनाय/NP च/AVK ।/PUNC श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
अभयम्/NS सत्त्वसंशुद्धिः/NS ज्ञानयोगव्यवस्थितिः/NP ।/PUNC
दानम्/NP दमः/NP च/APY यज्ञः/NP च/APY स्वाध्यायः/NP तपः/NP आर्जवम्/NP
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अभयम्/NS अभीरुता/NV ।/PUNC सत्त्वसंशुद्धिः/NS सत्त्वस्य/NP अन्तःकरणस्य/NP संशुद्धिः/NP संव्यवहारेषु/NP परवञ्चनामायानृतादिपरिवर्जनम्/NV शुद्धसत्त्वभावेन/NV व्यवहारः/KN इत्यर्थः/NP ।।/PUNC ज्ञानयोगव्यवस्थितिः/NS ज्ञानम्/NP शास्त्रतः/A आचार्यतः/A च/APY आत्मादिपदार्थानाम्/NP अवगमः/NP ,/PUNC अवगतानाम्/KNV इन्द्रियाद्युपसंहारेण/NP एकाग्रतया/NV स्वात्मसंवेद्यतापादनम्/NP योगः/NP ,/PUNC तयोः/SNV ज्ञानयोगयोः/NP व्यवस्थितिः/NP व्यावस्थानम्/NP तन्निष्ठता/NP ।/PUNC एषा/SNV प्रधाना/NV दैवी/NP सात्त्विकी/NP संपत्/NP ।/PUNC यत्र/A येषाम्/SNV अधिकृतानाम्/KN या/SSN प्रकृतिः/NP संभवति/KP ,/PUNC सात्त्विकी/NP सा/SSN उच्यते/KP ।/PUNC दानम्/NP यथाशक्ति/NP संविभागः/NP अन्नादीनाम्/NP ।/PUNC दमः/NP च/APY बाह्यकरणानाम्/NP उपशमः/NP ;/PUNC अन्तःकरणस्य/NP उपशमम्/NP शान्तिम्/NP वक्ष्यति/KP ।/PUNC यज्ञः/NP च/APY श्रौतः/NP अग्निहोत्रादिः/NP ।/PUNC स्मार्तः/NP च/APY देवयज्ञादिः/NP ,/PUNC स्वाध्यायः/NP ऋग्वेदाद्यध्ययनम्/NS अदृष्टार्थम्/NV ।/PUNC तपः/NP वक्ष्यमाणम्/NP शारीरादि/NP ।/PUNC आर्जवम्/NP ऋजुत्वम्/NP सर्वदा/A ।।/PUNC
किञ्च/SN -/PUNC
अहिंसा/NP सत्यम्/NP अक्रोधः/NP त्यागः/NP शान्तिः/NP अपैशुनम्/NV ।/PUNC
दया/NP भूतेषु/NP अलोलुप्त्वम्/NP मार्दवम्/NP ह्रीः/NP अचापलम्/NV
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अहिंसा/NP अहिंसनम्/NP प्राणिनाम्/NP पीडावर्जनम्/NP ।/PUNC सत्यम्/NP अप्रियानृतवर्जितम्/KN यथाभूतार्थवचनम्/NP ।/PUNC अक्रोधः/NP परैः/SN आक्रुष्टस्य/NP अभिहतस्य/NP वा/APY प्राप्तस्य/NP क्रोधस्य/NP उपशमनम्/NP ।/PUNC त्यागः/NP संन्यासः/NP ,/PUNC पूर्वम्/SN दानस्य/NP उक्तत्वात्/KN ।/PUNC शान्तिः/NP अन्तःकरणस्य/NP उप/AUP शमः/NP ।/PUNC अपैशुनम्/NP अपिशुनता/NP ;/PUNC परस्मै/SN पररन्ध्रप्रकटीकरणम्/NV पैशुनम्/NP ,/PUNC तदभावः/NP अपैशुनम्/NP ।/PUNC दया/NP कृपा/NP भूतेषु/KN दुःखितेषु/NV ।/PUNC अलोलुप्त्वम्/NV इन्द्रियाणाम्/NP विषयसंनिधौ/NP अविक्रिया/NP ।/PUNC मार्दवम्/NP मृदुता/NP अक्रौर्यम्/NP ।/PUNC ह्रीः/NP लज्जा/NP ।/PUNC अचापलम्/NP असति/NP प्रयोजने/NP वाक्पाणिपादादीनाम्/NP अव्यापारयितृत्वम्/NP ।।/PUNC
किञ्च/SN -/PUNC
तेजः/NP क्षमा/NP धृतिः/NP शौचम्/NP अद्रोहः/NP न/AN अतिमानिता/KN ।/PUNC
भवन्ति/KP सम्पदम्/NP दैवीम्/NP अभिजातस्य/NP भारत/NS ।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तेजः/NP प्रागल्भ्यम्/NP न/AN त्वग्गता/NP दीप्तिः/NP ।/PUNC क्षमा/NP आक्रुष्टस्य/NP ताडितस्य/NP वा/APY अन्तर्विक्रियानुत्पत्तिः/NP ,/PUNC उत्पन्नायाम्/NV विक्रियायाम्/NP उपशमनम्/NP अक्रोधः/NP इति/AUD अवोचाम/KP ।/PUNC इत्थम्/SN क्षमायाः/NP अक्रोधस्य/NP च/AVK विशेषः/NP ।/PUNC धृतिः/NP देहेन्द्रियेषु/NP अवसादम्/NP प्राप्तेषु/NP तस्य/SN प्रतिषेधकः/NP अन्तःकरणवृत्तिविशेषः/NP ,/PUNC येन/SN उत्तम्भितानि/NV करणानि/NP देहः/NP च/APY न/AN अवसीदन्ति/KP ।/PUNC शौचम्/NP द्विविधम्/NV मृज्जलकृतम्/KN बाह्यम्/NP आभ्यन्तरम्/NP च/APY मनोबुद्ध्योः/NP नैर्मल्यम्/NP मायारागादिकालुष्याभावः/NP ;/PUNC एवम्/AUD द्विविधम्/NV शौचम्/NP ।/PUNC अद्रोहः/NP परजिघांसाभावः/NP अहिंसनम्/NP ।/PUNC न/AN अतिमानिता/KN अत्यर्थम्/NP मानः/NP अतिमानः/NP ,/PUNC सः/SN यस्य/SN विद्यते/KP सः/SN अतिमानी/NV ,/PUNC तद्भावः/NP अतिमानिता/KN ,/PUNC तदभावः/NP न/AN अतिमानिता/KN आत्मनः/NP पूज्यतातिशयभावनाभावः/NV इत्यर्थः/NP ।/PUNC भवन्ति/KP अभयादीनि/NS तदन्तानि/NP संपदम्/NP अभिजातस्य/NP ।/PUNC किम्/AP विशिष्टाम्/NV संपदम्/NP ?/PUNC दैवीम्/NP देवानाम्/NP या/SN संपत्/NP ताम्/SN अभिलक्ष्य/KKS जातस्य/NP देवविभूत्यर्हस्य/NP भाविकल्याणस्य/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC हे/ASMB भारत/NS ।।/PUNC
अथ/AVK इदानीम्/A आसुरी/NP संपत्/NP उच्यते/KP -/PUNC
दम्भः/NP दर्पः/NP अभिमानः/NP च/APY क्रोधः/NP पारुष्यम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC
अज्ञानम्/NP च/AVK अभिजातस्य/NP पार्थ/NS सम्पदम्/NP आसुरीम्/NP
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC दम्भः/NP धर्मध्वजित्वम्/NV ।/PUNC दर्पः/NP विद्याधनस्वजनादिनिमित्तः/NP उत्सेकः/NP ।/PUNC अतिमानः/NP पूर्वम्/A उक्तः/KN ।/PUNC क्रोधः/NP च/APY ।/PUNC पारुष्यम्/NP एव/INTF च/APY परुषवचनम्/NP -/PUNC यथा/AVK काणम्/NP '/PUNC चक्षुष्मान्/KN '/PUNC विरूपम्/NP '/PUNC रूपवान्/KN '/PUNC हीनाभिजनम्/NP '/PUNC उत्तमाभिजनः/NP  '/PUNC इत्यादि/NV ।/PUNC अज्ञानम्/NP च/APY अविवेकज्ञानम्/NP कर्तव्याकर्तव्यादिविषयमिथ्याप्रत्ययः/NV ।/PUNC अभिजातस्य/NP पार्थ/NS ।/PUNC किम्/AP अभिजातस्य/NP इति/AUD ,/PUNC आह/KP -/PUNC संपदम्/NP आसुरीम्/NP असुराणाम्/NP संपत्/NP आसुरी/NP ताम्/SN अभिजातस्य/NP  इत्यर्थः/NP ।।/PUNC
अनयोः/SNV संपदोः/NP कार्यम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
दैवी/NP सम्पद्विमोक्षाय/NP निबन्धाय/KKS आसुरी/NP मता/KN ।/PUNC
मा/AP शुचः/KN सम्पदम्/NP दैवीम्/NP अभिजातः/KN असि/KP पाण्डव/NP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC दैवी/NP संपत्/NP या/SSN ,/PUNC सा/SSN विमोक्षाय/KKS संसारबन्धनात्/NP ।/PUNC निबन्धाय/KKS नियतः/NV बन्धः/NP निबन्धः/NP तदर्थम्/NP आसुरी/NV संपत्/NP मता/KN अभिप्रेता/KN ।/PUNC तथा/AVK राक्षसी/NP च/APY ।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD उक्ते/KN सति/A अर्जुनस्य/NS अन्तर्गतम्/NV भावम्/NP '/PUNC किम्/AP अहम्/SN आसुरसंपत्/NP उक्तः/KN ?/PUNC किम्/AP वा/APY दैवसंपत्/NP उक्तः/KN ?/PUNC '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD आलोचनारूपम्/NP आलक्ष्य/KKS आह/KP भगवान्/NP -/PUNC मा/AP शुचः/KN शोकम्/NP मा/AP कार्षीः/NP ।/PUNC संपदम्/NP दैवीम्/NP अभिजातः/KN असि/KP अभिलक्ष्य/KKS जातः/KN असि/KP ,/PUNC भाविकल्याणः/NP त्वम्/SN असि/KP इत्यर्थः/NP ,/PUNC हे/ASMB पाण्डव/NP ।।/PUNC द्वौ/SMKY भूतसर्गौ/NP लोके/NP अस्मिन्/SN दैवः/NP आसुरः/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC दैवः/NP विस्तरशः/NP प्रोक्तः/KN आसुरम्/NP पार्थ/NS मे/SN शृणु/KP ।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC द्वौ/SMKY द्विसंख्याकौ/NV भूतसर्गौ/NP भूतानाम्/NP मनुष्याणाम्/NP सर्गौ/NP सृष्टी/KN भूतसर्गौ/NP सृज्येत/KP इति/AUD सर्गौ/NP भूतानि/KN एव/INTF सृज्यमानानि/NP दैवासुरसंपद्द्वययुक्तानि/NP इति/AUD द्वौ/SMKY भूतसर्गौ/NP इति/AUD उच्येते/KP ,/PUNC '/PUNC द्वया/NP ह/A वै/SN प्राजापत्या/NP देवाः/NP च/APY असुराः/NP च/APY (/PUNC बृह0/NS उ0/NS 1 ।/PUNC 3 ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC  '/PUNC इति/AUD श्रुतेः/KP ।/PUNC लोके/NP अस्मिन्/SN ,/PUNC संसारे/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC सर्वेषाम्/SNV द्वैविध्योपपत्तेः/NP ।/PUNC कौ/SNV तौ/SN भूतसर्गौ/NP इति/AUD ,/PUNC उच्येते/KP -/PUNC प्रकृतौ/NP एव/INTF दैवः/NP आसुरः/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC उक्तयोः/KN एव/INTF पुनः/A अनुवादे/NP प्रयोजनम्/NP आह/KP -/PUNC दैवः/NP भूतसर्गः/NP '/PUNC अभयम्/NS सत्त्वसंशुद्धिः/NS (/PUNC गीता/NS 16/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिना/NV विस्तरशः/NP विस्तरप्रकारैः/NV प्रोक्तः/KN कथितः/KN ,/PUNC न/AN तु/A आसुरः/NP विस्तरशः/NP ;/PUNC अतः/AVK तत्परिवर्जनार्थम्/NP आसुरम्/NP पार्थ/NS ,/PUNC मे/SN मम/SN वचनात्/NP उच्यमानम्/NV विस्तरशः/NP शृणु/KP अवधारय/KKS ।।/PUNC आ/A अध्यायपरिसमाप्तेः/NP आसुरी/NP संपत्/NP प्राणिविशेषणत्वेन/NP प्रदर्श्यते/KP ,/PUNC प्रत्यक्षीकरणेन/NP च/APY शक्यते/KP तस्याः/SN परिवर्जनम्/NP कर्तुम्/KKS इति/AUD -/PUNC
प्रवृत्तिम्/NP च/APY निवृत्तिम्/NP च/APY जनाः/NP न/AN विदुः/NP आसुराः/NP ।/PUNC
न/AN शौचम्/NP न/AN अपि/APY च/APY आचारः/NP न/AN सत्यम्/NP तेषु/SN विद्यते/KP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रवृत्तिम्/NP च/APY प्रवर्तनम्/NP यस्मिन्/SN पुरुषार्थसाधने/NP कर्तव्ये/KN प्रवृत्तिः/NP ताम्/SN ,/PUNC निवृत्तिम्/NP च/APY तद्विपरीताम्/NP यस्मात्/SN अनर्थहेतोः/NP निवर्तितव्यम्/KN सा/SN निवृत्तिः/NP ताम्/SN च/APY ,/PUNC जनाः/NP आसुराः/NP न/AN विदुः/NP न/AN जानन्ति/KP ।/PUNC न/AN केवलम्/NP प्रवृत्तिनिवृत्ती/NP एव/INTF ते/SN न/AN विदुः/NP ,/PUNC न/AN शौचम्/NP न/AN अपि/APY च/APY आचारः/NP न/AN सत्यम्/NP तेषु/SN विद्यते/KP ;/PUNC अशौचाः/NP अनाचाराः/NP मायाविनः/NP अनृतवादिनः/NP हि/A आसुराः/NP ।।/PUNC
किञ्च/SN -/PUNC
असत्यम्/NP अप्रतिष्ठम्/NP ते/SN जगत्/NP आहुः/KP अनीश्वरम्/NP ।/PUNC
अपरस्परसम्भूतम्/NP किम्/AP अन्यत्कामहैतुकम्/NP ।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC असत्यम्/NP यथा/AVK वयम्/SN अनृतप्रायाः/NP तथा/AVK इदम्/SN जगत्/NP सर्वम्/SN असत्यम्/NP ,/PUNC अप्रतिष्ठम्/NP च/APY न/AN अस्य/SN धर्माधर्मौ/NP प्रतिष्ठा/NP अतः/AVK अप्रतिष्ठम्/NP च/APY ,/PUNC इति/AUD ते/SN आसुराः/NV जनाः/NP जगत्/NP आहुः/KP ,/PUNC अनीश्वरम्/NP न/AN च/AVK धर्माधर्मसव्यपेक्षकः/NP अस्य/SN शासिता/KN ईश्वरः/NP विद्यते/KP इति/AUD अतः/AVK अनीश्वरम्/NV जगत्/NP आहुः/KP ।/PUNC किञ्च/SN ,/PUNC अपरस्परसंभूतम्/NP कामप्रयुक्तयोः/NV स्त्रीपुरुषयोः/NP अन्योन्यसंयोगात्/NV जगत्/NP सर्वम्/SNV संभूतम्/KN ।/PUNC किम्/AP अन्यत्/SN कामहैतुकम्/NP कामहेतुकम्/NP एव/INTF कामहैतुकम्/NP ।/PUNC किम्/AP अन्यत्/SN जगतः/NP कारणम्/NP ?/PUNC न/AN किञ्चित्/SN अदृष्टम्/NP धर्माधर्मादि/NP कारणान्तरम्/AVK विद्यते/KP जगतः/NP '/PUNC कामः/NP एव/INTF प्राणिनाम्/NP कारणम्/NP  '/PUNC इति/AUD लोकायतिकदृष्टिः/NP इयम्/SN ।।/PUNC
एताम्/SNV दृष्टिम्/NP अवष्टभ्य/NP नष्टात्मानः/NP अल्पबुद्धयः/NP ।/PUNC
प्रभवन्ति/KP उग्रकर्माणः/NP क्षयाय/KKS जगतः/NP अहिताः/KN ।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एताम्/SNV दृष्टिम्/NP अवष्टभ्य/NP आश्रित्य/KKS नष्टात्मानः/NP नष्टस्वभावाः/NP विभ्रष्टपरलोकसाधनाः/NP अल्पबुद्धयः/NP विषयविषयाः/NP अल्पा/NP एव/INTF बुद्धिः/NP येषाम्/SNV ते/SN अल्पबुद्धयः/NP प्रभवन्ति/KP उद्भवन्ति/KP उग्रकर्माणः/NP क्रूरकर्माणः/NP हिंसात्मकाः/NP ।/PUNC क्षयाय/KKS जगतः/NP प्रभवन्ति/KP इति/AUD संबन्धः/NP ।/PUNC जगतः/NP अहिताः/KN ,/PUNC शत्रवः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
ते/SN च/APY -/PUNC
कामम्/NP आश्रित्य/KKS दुष्पूरम्/NP दम्भमानमदान्विताः/KN ।/PUNC
मोहात्/NP गृहीत्वा/KKS असद्ग्राहान्/NP प्रवर्तन्ते/KP अशुचिव्रताः/KN 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कामम्/NV इच्छाविशेषम्/NP आश्रित्य/KKS अवष्टभ्य/NP दुष्पूरम्/NP अशक्यपूरणम्/NP दम्भमानमदान्विताः/NP दम्भः/NP च/APY मानः/NP च/APY मदः/NP च/APY दम्भमानमदाः/NP तैः/SN अन्विताः/KN  दम्भमानमदान्विताः/NP मोहात्/NP अविवेकतः/NP गृहीत्वा/KKS उपादाय/KKS असद्ग्राहान्/NP अशुभनिश्चयान्/NP प्रवर्तन्ते/KP लोके/NP अशुचिव्रताः/KN अशुचीनि/NP व्रतानि/KNV येषाम्/SN ते/SN अशुचिव्रताः/KN ।।/PUNC
किञ्च/SN -/PUNC
चिन्ताम्/NP अपरिमेयाम्/NV च/APY प्रलयान्ताम्/NP उपाश्रिताः/KN ।/PUNC
कामोपभोगपरमाः/NP एतावत्/SN इति/AUD निश्चिताः/KN
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC चिन्ताम्/NP अपरिमेयाम्/NV च/APY ,/PUNC न/AN परिमातुम्/KKS शक्यते/KP यस्याः/SN चिन्तायाः/NP इयत्ता/KN सा/SN अपरिमेया/NP ,/PUNC ताम्/SNV अपरिमेयाम्/NP ,/PUNC प्रलयान्ताम्/NP मरणान्ताम्/NP उपाश्रिताः/KN ,/PUNC सदा/A चिन्तापराः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC कामोपभोगपरमाः/NP ,/PUNC काम्यन्ते/KP इति/AUD कामाः/NV विषयाः/NP शब्दादयः/NP तदुपभोगपरमाः/NP '/PUNC अयम्/SN एव/INTF परमः/NV पुरुषार्थः/NP यः/SN कामोपभोगः/NP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD निश्चितात्मानः/NP ,/PUNC एतावत्/SN इति/AUD निश्चिताः/KN ।।/PUNC 
आशापाशशतैः/NP बद्धाः/KN कामक्रोधपरायणाः/NP ।/PUNC
ईहन्ते/KP कामभोगार्थम्/NP अन्यायेन/SN अर्थसञ्चयान्/NP
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आशापाशशतैः/NP आशाः/NP एव/INTF पाशाः/NP तच्छतैः/SN बद्धाः/KN नियन्त्रिताः/KN सन्तः/KP सर्वतः/A आकृष्यमाणाः/NP ,/PUNC कामक्रोधपरायणाः/NP कामक्रोधौ/NP परम्/SN अयनम्/NP आश्रयः/NP येषाम्/SNV ते/SN कामक्रोधपरायणाः/NP ,/PUNC ईहन्ते/KP चेष्टन्ते/KP कामभोगार्थम्/NP कामभोगप्रयोजनाय/NP न/AN धर्मार्थम्/NP ,/PUNC अन्यायेन/SN परस्वापहरणादिना/NP इत्यर्थः/NP ;/PUNC किम्/AP ?/PUNC अर्थसंचयान्/NP अर्थप्रचयान्/NP ।।/PUNC
ईदृशः/SNV च/AVK तेषाम्/SN अभिप्रायः/NP -/PUNC
इदम्/SN अद्य/A मया/SN लब्धम्/KN इमम्/SN प्राप्स्ये/NP मनोरथम्/NP ।/PUNC
इदम्/SN अस्ति/KP इदम्/SN अपि/APY मे/SN भविष्यति/KP पुनः/A धनम्/NP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इदम्/SNV द्रव्यम्/NP अद्य/A इदानीम्/A मया/SN लब्धम्/KN ।/PUNC इदम्/SN च/APY अन्यत्/SN प्राप्स्ये/NP मनोरथम्/NP मनस्तुष्टिकरम्/NP ।/PUNC इदम्/SN च/APY अस्ति/KP इदम्/SN अपि/APY मे/SN भविष्यति/KP आगामिनि/NP संवत्सरे/NP पुनः/A धनम्/NP तेन/SN अहम्/SN धनी/NP विख्यातः/KN भविष्यामि/KP इति/AUD ।।/PUNC
असौ/SN मया/SN हतः/KN शत्रुः/NP हनिष्ये/NP  च/APY अपरान्/NP अपि/APY ।/PUNC
ईश्वरः/NP अहम्/SN अहम्/DV भोगी/NP सिद्धः/KN अहम्/SN बलवान्सुखी/NP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC असौ/SN देवदत्तनामा/NP मया/SN हतः/KN दुर्जयः/NV शत्रुः/NP ।/PUNC हनिष्ये/NP च/APY अपरान्/NP अन्यान्/SN वराकान्/NP अपि/APY ।/PUNC किम्/AP एते/SN करिष्यन्ति/KP तपस्विनः/NP ;/PUNC सर्वथा/A अपि/AVK न/AN अस्ति/KP मत्तुल्यः/KKS ।/PUNC कथम्/NP ?/PUNC ईश्वरः/NP अहम्/SN ,/PUNC अहम्/SN भोगी/NP ।/PUNC सर्वप्रकारेण/NP च/AVK सिद्धः/KN अहम्/SN संपन्नः/NV पुत्रैः/NP नप्तृभिः/NP ,/PUNC न/AN केवलम्/NP मानुषः/NP ,/PUNC बलवान्/KN सुखी/NP च/APY अहम्/SN एव/INTF ;/PUNC अन्ये/SN तु/A भूमिभाराया/NP वितीर्णाः/KN ।।/PUNC
आढ्यः/KKS अभिजनवान्/KN अस्मि/KP कः/SN अन्यः/SN अस्ति/KP सदृशः/ASD मया/SN ।/PUNC
यक्ष्ये/NP दास्यामि/KP मोदिष्ये/NP इति/AUD अज्ञानविमोहिताः/KN 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आढ्यः/KKS धनेन/NP ,/PUNC अभिजनवान्/KN सप्तपुरुषम्/NP श्रोत्रियत्वादिसंपन्नः/NP -/PUNC तेन/SN अपि/AVK न/AN मम/SN तुल्यः/NP अस्ति/KP कश्चित्/SN ।/PUNC कः/SN अन्यः/SN अस्ति/KP सदृशः/ASD तुल्यः/NP मया/SN ?/PUNC किञ्च/SN ,/PUNC यक्ष्ये/NP यागेन/NP अपि/APY अन्यान्/SN अभि/AUP भविष्यामि/KP ,/PUNC दास्यामि/KP नटादिभ्यः/NP ,/PUNC मोदिष्ये/NP हर्षम्/NP च/APY अतिशयम्/NV प्राप्स्यामि/KP ,/PUNC इति/AUD एवम्/AUD अज्ञानविमोहिताः/KN अज्ञानेन/NP विमोहिताः/KN विविधम्/NV अविवेकभावम्/NP आपन्नाः/NP ।।/PUNC अनेकचित्तविभ्रान्ताः/NP मोहजालसमावृताः/KN ।/PUNC प्रसक्ताः/KN कामभोगेषु/NP पतन्ति/KP नरके/NP अशुचौ/NP ।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अनेकचित्तविभ्रान्ताः/NP उक्तप्रकारैः/NP अनेकैः/SNV चित्तैः/NP विविधम्/NV भ्रान्ताः/NP अनेकचित्तविभ्रान्ताः/NP ,/PUNC मोहजालसमावृताः/KN मोहः/NP अविवेकः/NP अज्ञानम्/NP तत्/SN एव/INTF जालम्/NP इव/ASD आवरणात्मकत्वात्/NP ,/PUNC तेन/SN समावृताः/KN ।/PUNC प्रसक्ताः/KN कामभोगेषु/NP तत्र/A एव/INTF निषण्णाः/NP सन्तः/KP तेन/SN उपचितकल्मषाः/NP पतन्ति/KP नरके/NP अशुचौ/NP वैतरण्यादौ/NP ।।/PUNC आत्मसम्भाविताः/NP स्तब्धाः/KN धनमानमदान्विताः/NP ।/PUNC
यजन्ते/KP नामयज्ञैः/NP ते/SN दम्भेन/NP अविधिपूर्वकम्/NP
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आत्मसंभाविताः/NP सर्वगुणविशिष्टतया/NP आत्मना/NP एव/INTF संभाविताः/NP आत्मसंभाविताः/NP ,/PUNC न/AN साधुभिः/NP ।/PUNC स्तब्धाः/KN अप्रणतात्मानः/NP ।/PUNC धनमानमदान्विताः/NP धननिमित्तः/NP मानः/NP मदः/NP च/APY ,/PUNC ताभ्याम्/NP धनमानमदाभ्याम्/NP अन्विताः/KN ।/PUNC यजन्ते/KP नामयज्ञैः/NP नाममात्रैः/NV यज्ञैः/NP ते/SN दम्भेन/NP धर्मध्वजितया/NP अविधिपूर्वकम्/NP विधिविहिताङ्गेतिकर्तव्यतारहितम्/NP ।।/PUNC
अहङ्कारम्/NP बलम्/NP दर्पम्/NP कामम्/NP क्रोधम्/NP च/APY संश्रिताः/KN ।/PUNC
माम्/SN आत्मपरदेहेषु/NP प्रद्विषन्तः/KP अभ्यसूयकाः/NP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अहंकारम्/NP अहंकरणम्/NP अहंकारः/NP ,/PUNC विद्यमानैः/NP अविद्यमानैः/NP च/APY गुणैः/NP आत्मनि/NP अध्यारोपितैः/NP '/PUNC विशिष्टम्/NV आत्मानम्/NP अहम्/SN इति/AUD मन्यते/KP '/PUNC ,/PUNC सः/SN अहंकारः/NP अविद्याख्यः/NP कष्टतमः/NV ,/PUNC सर्वदोषाणाम्/NP मूलम्/NP सर्वानर्थप्रवृत्तीनाम्/NP च/AVK ,/PUNC तम्/SN ।/PUNC तथा/AVK बलम्/NP  पराभिभवनिमित्तम्/NP कामरागान्वितम्/NP ।/PUNC दर्पम्/NP दर्पः/NP नाम/NP यस्य/SN उद्भवे/KNV धर्मम्/NP अतिक्रामति/KP सः/SN अयम्/SN अन्तःकरणाश्रयः/NP दोषविशेषः/NP ।/PUNC कामम्/NP स्त्र्यादिविषयम्/NP ।/PUNC क्रोधम्/NP अनिष्टविषयम्/NP ।/PUNC एतान्/SNV अन्यान्/SN च/APY महतः/NV दोषान्/NP संश्रिताः/KN ।/PUNC किञ्च/SN ते/SN माम्/SN ईश्वरम्/NP आत्मपरदेहेषु/NP स्वदेहे/NP परदेहेषु/NP च/APY तद्बुद्धिकर्मसाक्षिभूतम्/NP माम्/SN प्रद्विषन्तः/KP ,/PUNC मच्छासनातिवर्तित्वम्/NP प्रद्वेषः/NP ,/PUNC तम्/SN कुर्वन्तः/KP अभ्यसूयकाः/NP सन्मार्गस्थानाम्/NP गुणेषु/NP असहमानाः/NP ।।/PUNC तान्/SN अहम्/SN द्विषतः/NP क्रूरान्संसारेषु/NP नराधमान्/KN ।/PUNC क्षिपामि/KP अजस्रम्/NP अशुभान्/NV आसुरीषु/NP एव/INTF योनिषु/NP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तान्/SN अहम्/SN सन्मार्गप्रतिपक्षभूतान्/NP साधुद्वेषिणः/NP द्विषतः/NP च/APY माम्/SN क्रूरान्/NP संसारेषु/NP एव/INTF अनेकनरकसंसरणमार्गेषु/NP नराधमान्/NP अधर्मदोषवत्त्वात्/NP क्षिपामि/KP प्रक्षिपामि/KP अजस्रम्/NV संततम्/NP अशुभान्/NP अशुभकर्मकारिणः/NP आसुरीषु/NP एव/INTF क्रूरकर्मप्रायासु/NP व्याघ्रसिंहादियोनिषु/NP '/PUNC क्षिपामि/KP '/PUNC इति/AUD अनेन/SN संबन्धः/NP ।।/PUNC आसुरीम्/NP योनिम्/NP आपन्नाः/NP मूढाः/KN जन्मनि/NP जन्मनि/DV ।/PUNC माम्/SN अप्राप्य/KKS एव/INTF कौन्तेय/NP ततः/AVK यान्ति/KP अधमाम्/NV गतिम्/NP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC ।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आसुरीम्/NP योनिम्/NP आपन्नाः/NP प्रतिपन्नाः/NP मूढाः/KN अविवेकिनः/NP जन्मनि/NP जन्मनि/DV प्रतिजन्म/NP तमोबहुलासु/NP एव/INTF योनिषु/NP जायमानाः/NP अधः/A गच्छन्तः/KP मूढाः/KN माम्/SN ईश्वरम्/NP अप्राप्य/KKS अनासाद्य/NP एव/INTF हे/ASMB कौन्तेय/NP ,/PUNC ततः/AVK तस्मात्/SN अपि/AVK यान्ति/KP अध/A माम्/SN गतिम्/NP निकृष्टतमाम्/NV गतिम्/NP ।/PUNC '/PUNC माम्/SN अप्राप्य/KKS एव/INTF '/PUNC इति/AUD न/AN मत्प्राप्तौ/KN काचित्/A अपि/APY आशङ्का/NP अस्ति/KP ,/PUNC अतः/AVK मच्छिष्टसाधुमार्गम्/NP अप्राप्य/KKS इत्यर्थः/NP ।।/PUNC सर्वस्याः/SN आसुर्याः/NP संपदः/NP संक्षेपः/NP अयम्/SN उच्यते/KP ,/PUNC यस्मिन्/SN त्रिविधे/NP सर्वः/SNV आसुरीसंपद्भेदः/NP अनन्तः/NP अपि/AVK अन्तर्भवति/KP ।/PUNC यत्/SN परिहारेण/NP परिहृतः/NP च/APY भवति/KP ,/PUNC यत्/SSN मूलम्/NP सर्वस्य/SNV अनर्थस्य/NP ,/PUNC तत्/SSN एतत्/SN उच्यते/KP -/PUNC
त्रिविधम्/NP नरकस्य/NP इदम्/SNV द्वारम्/NP नाशनम्/NP आत्मनः/NP ।/PUNC
कामः/NP क्रोधः/NP तथा/APY लोभः/NP तस्मात्/SN एतत्/SN त्रयम्/SMKY त्यजेत्/KP
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC ।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC -/PUNC त्रिविधम्/NP त्रिप्रकारम्/NP नरकस्य/NP प्राप्तौ/KN इदम्/SNV द्वारम्/NP नाशनम्/NP आत्मनः/NP ,/PUNC यत्/SN द्वारम्/NP प्रविशन्/KNV एव/INTF नश्यति/KP आत्मा/NP ;/PUNC कस्मैचित्/SN पुरुषार्थाय/NP योग्यः/NP न/AN भवति/KP इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC अतः/AVK उच्यते/KP '/PUNC द्वारम्/NP नाशनम्/NP आत्मनः/NP  '/PUNC इति/AUD ।/PUNC किम्/AP तत्/SN ?/PUNC कामः/NP क्रोधः/NP तथा/AVK लोभः/NP ।/PUNC तस्मात्/SN एतत्/SNV त्रयम्/SMKY त्यजेत्/KP ।/PUNC यतः/AVK एतत्/SNV द्वारम्/NP नाशनम्/NP आत्मनः/NP तस्मात्/SN कामादि/NP त्रयम्/SMKY एतत्/SNV त्यजेत्/KP ।।/PUNC त्यागस्तुतिः/NP इयम्/SN -/PUNC एतैः/SNV विमुक्तः/KN कौन्तेय/NP तमोद्वारैः/NP त्रिभिः/SMKY नरः/NP ।/PUNC आचरति/KP आत्मनः/NP श्रेयः/NP ततः/AVK याति/KP पराम्/NV गतिम्/NP
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एतैः/SNV विमुक्तः/KN कौन्तेय/NP तमोद्वारैः/NP तमसः/NP नरकस्य/NP दुःखमोहात्मकस्य/NP द्वाराणि/NP कामादयः/NP तैः/SN ,/PUNC एतैः/SNV त्रिभिः/SMKY विमुक्तः/KN नरः/NP आचरति/KP अनुतिष्ठति/KP ।/PUNC किम्/AP ?/PUNC आत्मनः/NP श्रेयः/NV ।/PUNC यत्/SN प्रतिबद्धः/KN पूर्वम्/SN न/AN आचचार/NP ,/PUNC तदपगमात्/NP आचरति/KP ।/PUNC ततः/AVK तदाचरणात्/NP याति/KP पराम्/NV गतिम्/NP मोक्षम्/NP अपि/APY इति/AUD ।।/PUNC सर्वस्य/SNV तस्य/SN आसुरीसंपत्परिवर्जनस्य/NP श्रेय/NV आचरणस्य/NP च/APY शास्त्रम्/NP कारणम्/NP ।/PUNC शास्त्रप्रमाणात्/NP उभयम्/NP शक्यम्/NP कर्तुम्/KKS ,/PUNC न/AN अन्यथा/AVK ।/PUNC अतः/AVK -/PUNC
यः/SN शास्त्रविधिम्/NP उत्सृज्य/KKS वर्तते/KP कामकारतः/KN ।/PUNC
न/AN सः/SN सिद्धिम्/NP अवाप्नोति/KP न/AN सुखम्/NP न/AN पराम्/NV गतिम्/NP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SN शास्त्रविधिम्/NP शास्त्रम्/NP वेदः/NS तस्य/SN विधिम्/NP कर्तव्याकर्तव्यज्ञानकारणम्/NP विधिप्रतिषेधाख्यम्/NS उत्सृज्य/KKS त्यक्त्वा/KKS वर्तते/KP कामकारतः/KN कामप्रयुक्तः/KN सन्/KKS ,/PUNC न/AN सः/SN सिद्धिम्/NP पुरुषार्थयोग्यताम्/NP अवाप्नोति/KP ,/PUNC न/AN अपि/AVK अस्मिन्/SN लोके/NP सुखम्/NP न/AN अपि/APY पराम्/NV प्रकृष्टाम्/NV गतिम्/NP स्वर्गम्/NP मोक्षम्/NP वा/AVK ।।/PUNC
प्रमाणम्/NP ते/SN कार्याकार्यव्यवस्थितौ/NP ।/PUNC
ज्ञात्वा/KKS शास्त्रविधानोक्तम्/NP कर्म/NP कर्तुम्/KKS इह/A अर्हसि/KP 
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासु/NS उपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NP योगशास्त्रे/NP श्रीकृष्णार्जुनसंवादे/NS दैवासुरसम्पद्विभागयोगः/NP नाम/NP षोडशः/SMKP अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 16/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तस्मात्/SN शास्त्रम्/NP प्रमाणम्/NP ज्ञानसाधनम्/NP ते/SN तव/SN कार्याकार्यव्यवस्थितौ/NP कर्तव्याकर्तव्यव्यवस्थायाम्/NP ।/PUNC अतः/AVK ज्ञात्वा/KKS बुद्ध्वा/KKS शास्त्रविधानोक्तम्/NP विधिः/NP विधानम्/NP शास्त्रेण/NP विधानम्/NP शास्त्रविधानम्/NP '/PUNC कुर्यात्/KP ,/PUNC न/AN कुर्यात्/KP '/PUNC इत्येवंलक्षणम्/NP ,/PUNC तेन/SN उक्तम्/KN स्वकर्म/NP यत्/SN तत्/SN कर्तुम्/KKS इह/A अर्हसि/KP ,/PUNC इह/A इति/AUD कर्माधिकारभूमिप्रदर्शनार्थम्/NP इति/AUD ।।/PUNC इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NV श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NV श्रीमच्छङ्करभगवतः/NS कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NS षोडशः/SMKY अध्यायः/NP ।।/PUNC  '/PUNC तस्मात्/SN शास्त्रम्/NP प्रमाणम्/NP ते/SN '/PUNC इति/AUD भगवद्वाक्यात्/NP लब्धप्रश्नबीजः/NP
अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC
ये/SN शास्त्रविधिम्/NP उत्सृज्य/KKS यजन्ते/KP श्रद्धया/NP अन्विताः/KN ।/PUNC
तेषाम्/SNV निष्ठा/NP तु/A का/SN कृष्ण/NS सत्त्वम्/NP आहः/KP रजः/NP तमः/NP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ये/SN केचित्/SN अविशेषिताः/KN शास्त्रविधिम्/NP शास्त्रविधानम्/NP श्रुतिस्मृतिशास्त्रचोदनाम्/NP उत्सृज्य/KKS परित्यज्य/KKS यजन्ते/KP देवादीन्/NP पूजयन्ति/KP श्रद्धया/NP अन्विताः/KN श्रद्धया/NP आस्तिक्यबुद्ध्या/NP अन्विताः/KN संयुक्ताः/KN सन्तः/KP -/PUNC श्रुतिलक्षणम्/NP स्मृतिलक्षणम्/NP वा/APY कञ्चित्/SN शास्त्रविधिम्/NP अपश्यन्तः/KP वृद्धव्यवहारदर्शनात्/NP एव/INTF श्रद्दधानतया/NP ये/SN देवादीन्/NP पूजयन्ति/KP ,/PUNC ते/SSN इह/A '/PUNC ये/SSN शास्त्रविधिम्/NP उत्सृज्य/KKS यजन्ते/KP श्रद्धयान्विताः/KN  '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD गृह्यन्ते/KP ।/PUNC ये/SN पुनः/A कञ्चित्/SN शास्त्रविधिम्/NP उपलभमानाः/NP एव/INTF तम्/SN उत्सृज्य/KKS अयथाविधि/NP देवादीन्/NP पूजयन्ति/KP ,/PUNC ते/SN इह/A '/PUNC ये/SN शास्त्रविधिम्/NP उत्सृज्य/KKS यजन्ते/KP  '/PUNC इति/AUD न/AN परिगृह्यन्ते/KP ।/PUNC कस्मात्/SNV ?/PUNC श्रद्धया/NP अन्वितत्वविशेषणात्/NP ।/PUNC देवादिपूजाविधिपरम्/NP किञ्चित्/SN शास्त्रम्/NP पश्यन्तः/KP एव/INTF तत्/SN उत्सृज्य/KKS अश्रद्दधानतया/NP तद्विहितायाम्/NP देवादिपूजायाम्/NP श्रद्धया/NP अन्विताः/KN प्रवर्तन्ते/KP इति/AUD न/AN शक्यम्/NP कल्पयितुम्/KKS यस्मात्/SSN ,/PUNC तस्मात्/SSN पूर्वोक्ताः/KN एव/INTF '/PUNC ये/SN शास्त्रविधिम्/NP उत्सृज्य/KKS यजन्ते/KP श्रद्धयान्विताः/NP '/PUNC इति/AUD यत्र/A गृह्यन्ते/KP ।/PUNC तेषाम्/SNV एवम्/AUD भूतानाम्/NP निष्ठा/NP तु/A का/SN कृष्ण/NS सत्त्वम्/NP आहः/KP रजः/NP तमः/NP ,/PUNC किम्/AP सत्त्वम्/NP निष्ठा/NP अवस्थानम्/NP ,/PUNC आहोस्वित्/NP रजः/NP ,/PUNC अथवा/AVK तमः/NP इति/AUD ।/PUNC तत्/SN उक्तम्/KN भवति/KP -/PUNC या/SN तेषाम्/SNV देवादिविषया/NP पूजा/NP ,/PUNC सा/SN किम्/AP सात्त्विकी/NP ,/PUNC आहोस्वित्/NP राजसी/NP ,/PUNC उत/APY तामसी/NP इति/AUD ।।/PUNC सामान्यविषयः/NP अयम्/SN प्रश्नः/NP न/AN अप्रविभज्य/KKS प्रतिवचनम्/NP अर्हति/KP इति/AUD श्रीभगवान्/NP उवाच/KP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
त्रिविधा/NP भवति/KP श्रद्धा/NP देहिनाम्/NP सा/SN स्वभावजा/NP ।/PUNC
सात्त्विकी/NP राजसी/NP च/APY एव/INTF तामसी/NP च/APY इति/AUD ताम्/SN शृणु/KP ।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC -/PUNC त्रिविधा/NP त्रिप्रकारा/NP भवति/KP श्रद्धा/NP ,/PUNC यस्याम्/SNV निष्ठायाम्/NP त्वम्/SN पृच्छसि/KP ,/PUNC देहिनाम्/NP शरीरिणाम्/NP सा/SN स्वभावजा/NP ;/PUNC जन्मान्तरकृतः/KN धर्मादिसंस्कारः/NP मरणकाले/NP अभिव्यक्तः/KN स्वभावः/NP उच्यते/KP ,/PUNC ततः/A जाता/KN स्वभावजा/NP ।/PUNC सात्त्विकी/NP सत्त्वनिर्वृत्ता/KN देवपूजादिविषया/NP ;/PUNC राजसी/NP रजोनिर्वृत्ता/KN यक्षरक्षःपूजादिविषया/NP ;/PUNC तामसी/NP तमोनिर्वृत्ता/KN प्रेतपिशाचादिपूजाविषया/NP ;/PUNC एवम्/AUD त्रिविधाम्/NP ताम्/SN उच्यमानाम्/NV श्रद्धाम्/NP शृणु/KP अवधारय/KKS ।।/PUNC 
सा/SN इयम्/SN त्रिविधा/NP भवति/KP -/PUNC
सत्त्वानुरूपा/NP सर्वस्य/SN श्रद्धा/NP भवति/KP भारत/NS ।/PUNC
श्रद्धामयः/NP अयम्/SN पुरुषः/NP यः/SN यच्छ्रद्धःNP सः/SN एव/INTF सः/SN 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सत्त्वानुरूपा/NP विशिष्टसंस्कारोपेतान्तःकरणानुरूपा/NP सर्वस्य/SNV प्राणिजातस्य/NP श्रद्धा/NP भवति/KP भारत/NS ।/PUNC यदि/AVK एवम्/AUD ततः/A किम्/AP स्यात्/KP इति/AUD ,/PUNC ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC श्रद्धामयः/NP अयम्/SN श्रद्धाप्रायः/NP पुरुषः/NP संसारी/NV जीवः/NP ।/PUNC कथम्/NP ?/PUNC यः/SN यच्छ्रद्धः/NP या/SN श्रद्धा/NP यस्य/SN जीवस्य/NP सः/SN यच्छ्रद्धः/NP सः/SN एव/INTF तच्छ्रद्धानुरूपः/NP  एव/INTF सः/SN जीवः/NP ।।/PUNC
ततः/A च/AVK कार्येण/NP लिङ्गेन/NP देवादिपूजया/NP सत्त्वादिनिष्ठा/NP अनुमेया/NP इति/AUD आह/KP -/PUNC
यजन्ते/KP  सात्त्विकाः/NP देवान्यक्षरक्षांसि/NP राजसाः/NP ।/PUNC
प्रेतान्भूतगणान्‌/NP च/APY अन्ये/SN यजन्ते/KP तामसाः/NP जनाः/NP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यजन्ते/KP पूजयन्ति/KP सात्त्विकाः/NP सत्त्वनिष्ठाः/NP देवान्/NP ,/PUNC यक्षरक्षांसि/NP राजसाः/NP ,/PUNC प्रेतान्/NP भूतगणान्/NP च/APY सप्तमातृकादीन्/NP च/APY अन्ये/SN यजन्ते/KP तामसाः/NP जनाः/NP ।।/PUNC एवम्/AUD कार्यतः/NP निर्णीताः/KN सत्त्वादिनिष्ठाः/NP शास्त्रविध्युत्सर्गे/NP ।/PUNC तत्र/A कश्चित्/SN एव/INTF सहस्रेषु/SMKY देवपूजादिपरः/NP सत्त्वनिष्ठः/NP भवति/KP ,/PUNC बाहुल्येन/NP तु/A रजोनिष्ठाः/NP तमोनिष्ठाः/NP च/APY एव/INTF प्राणिनः/NP भवन्ति/KP ।/PUNC कथम्/NP ?/PUNC -/PUNC अशास्त्रविहितम्/NP घोरम्/NV तप्यन्ते/KP ये/SN तपः/NP जनाः/NP ।/PUNC दम्भाहङ्कारसंयुक्ताः/KN कामरागबलान्विताः/KN 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अशास्त्रविहितम्/NP न/AN शास्त्रविहितम्/NP अशास्त्रविहितम्/NP घोरम्/NV पीडाकरम्/NP प्राणिनाम्/NP आत्मनः/NP च/APY तपः/NP तप्यन्ते/KP निर्वर्तयन्ति/KP ये/SN तपः/NP जनाः/NP ते/SN च/APY दम्भाहंकारसंयुक्ताः/KN ,/PUNC दम्भः/NP च/APY अहंकारः/NP च/APY दम्भाहंकारौ/NP ,/PUNC ताभ्याम्/SN संयुक्ताः/KN दम्भाहंकारसंयुक्ताः/KN ,/PUNC कामरागबलान्विताः/NP कामः/NP च/APY रागः/NP च/APY कामरागौ/NP तत्/SN कृतम्/KN बलम्/NP कामरागबलम्/NP तेन/SN अन्विताः/KN कामरागबलान्विताः/NP ।।/PUNC कर्शयन्तः/KP शरीरस्थम्/NP भूतग्रामम्/NP अचेतसः/NP ।/PUNC
माम्/SN च/APY एव/INTF अन्तःशरीरस्थम्/NP तान्विद्धि/NP आसुरनिश्चयान्/NP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कर्शयन्तः/KP कृशीकुर्वन्तः/KP शरीरस्थम्/NP भूतग्रामम्/NP करणसमुदायम्/NP अचेतसः/NP अविवेकिनः/NP माम्/SN च/AVK एव/INTF तत्कर्मबुद्धिसाक्षिभूतम्/NP अन्तःशरीरस्थम्/NP नारायणम्/NS कर्शयन्तः/KP ,/PUNC मदनुशासनाकरणम्/NP एव/INTF मत्कर्शनम्/NP ,/PUNC तान्/SN विद्धि/NP आसुरनिश्चयान्/NP आसुरः/NP निश्चयः/NP येषाम्/SNV ते/SN आसुरनिश्चयाः/NP तान्/SN परिहरणार्थम्/NP विद्धि/NP इति/AUD उपदेशः/NP ।।/PUNC आहाराणाम्/NP च/APY रस्यस्निग्धादिवर्गत्रयरूपेण/NP भिन्नानाम्/NP यथाक्रमम्/NP सात्त्विकराजसतामसपुरुषप्रियत्वदर्शनम्/NP इह/A क्रियते/KP रस्यस्निग्धादिषु/NP आहारविशेषेषु/NP आत्मनः/NP प्रीत्यतिरेकेण/NP लिङ्गेन/NP सात्त्विकत्वम्/NP राजसत्वम्/NP तामसत्वम्/NP च/APY बुद्ध्वा/KKS रजस्तमोलिङ्गानाम्/NP आहाराणाम्/NP परिवर्जनार्थम्/NP सत्त्वलिङ्गानाम्/NP च/APY उपादानार्थम्/NP ।/PUNC तथा/AVK यज्ञादीनाम्/NP अपि/APY सत्त्वादिगुणभेदेन/NP त्रिविधत्वप्रतिपादनम्/NP इह/A  '/PUNC राजसतामसान्/NP बुद्ध्वा/KKS कथम्/NP नु/A नाम/NP परित्यजेत्/KP ,/PUNC सात्त्विकान्/NP एव/INTF अनुतिष्ठेत्/KP '/PUNC इति/AUD एव/INTF अर्थम्/NP ।/PUNC आह/KP -/PUNC
आहारः/NP तु/A अपि/APY सर्वस्य/SNV त्रिविधः/NP भवति/KP प्रियः/NV ।/PUNC
यज्ञः/NP तपः/NP तथा/AVK दानम्/NP तेषाम्/SNV भेदम्/NP इमम्/SN शृणु/KP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आहारः/NP तु/A अपि/APY सर्वस्य/SNV भोक्तुः/KP प्राणिनः/NP त्रिविधः/NP भवति/KP प्रियः/NV इष्टः/KN ,/PUNC तथा/AVK यज्ञः/NP तथा/AVK तपः/NP ,/PUNC तथा/AVK दानम्/NP ।/PUNC तेषाम्/SNV आहारादीनाम्/NP भेदम्/NP इमम्/SN वक्ष्यमाणम्/NP शृणु/KP ।।/PUNC 
आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः/NP ।/PUNC
रस्याः/NP स्निग्धाः/NP स्थिराः/NP हृद्याः/NP आहाराः/NP सात्त्विकप्रियाः/NV
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC आयुः/NP च/APY सत्त्वम्/NP च/APY बलम्/NP च/APY आरोग्यम्/NP च/APY सुखम्/NP च/APY प्रीतिः/NP च/APY आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतयः/NP तासाम्/SN विवर्धनाः/NP आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः/NP ,/PUNC ते/SN च/APY रस्याः/NP रसोपेताः/NP ,/PUNC स्निग्धाः/NP स्नेहवन्तः/KN ,/PUNC स्थिराः/NP चिरकालस्थायिनः/NP देहे/NP ,/PUNC हृद्याः/NP हृदयप्रियाः/NV आहाराः/NP सात्त्विकप्रियाः/NP सात्त्विकस्य/NP इष्टाः/KN ।।/PUNC
कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः/NP ।/PUNC
आहाराः/NP राजसस्य/NP इष्टाः/KN दुःखशोकामयप्रदाः/NV
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः/NP इति/AUD यत्र/A अतिशब्दः/NP कट्वादिषु/NP सर्वत्र/A योज्यः/NP ,/PUNC अतिकटुः/NP अतितीक्ष्णः/NP इति/AUD एवम्/AUD ।/PUNC कटुः/NP च/APY अम्लः/NP च/APY लवणः/NP च/APY अत्युष्णः/NP च/APY तीक्ष्णः/NP च/APY रूक्षः/NP च/APY विदाही/NP च/APY ते/SN आहाराः/NP राजसस्य/NP इष्टाः/KN ,/PUNC दुःखशोकामयप्रदाः/NP दुःखम्/NP च/APY शोकम्/NP च/APY आमयम्/NP च/APY प्रयच्छन्ति/KP इति/AUD दुःखशोकामयप्रदाः/NP ।।/PUNC यातयामम्/NP गतरसम्/NP पूति/NP पर्युषितम्/KN च/APY यत्/SN ।/PUNC उच्छिष्टम्/KN अपि/APY च/APY अमेध्यम्/NV भोजनम्/NP तामसप्रियम्/NP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यातयामम्/NP मन्दपक्वम्/NP ,/PUNC निर्वीर्यस्य/NP गतरसशब्देन/NP उक्तत्वात्/NP ।/PUNC गतरसम्/NP रसवियुक्तम्/KN ,/PUNC पूति/NP दुर्गन्धि/NP ,/PUNC पर्युषितम्/KN च/APY पक्वम्/NP सत्/SSN रात्र्यन्तरितम्/NP च/APY यत्/SSN ,/PUNC उच्छिष्टम्/KN अपि/APY च/APY भुक्तशिष्टम्/KN उच्छिष्टम्/KN ,/PUNC अमेध्यम्/NP अयज्ञार्हम्/NP ,/PUNC भोजनम्/NP ईदृशम्/SNV तामसप्रियम्/NV ।।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A यज्ञः/NP त्रिविधः/NP उच्यते/KP -/PUNC
अफलाकाङ्क्षिभिः/NP यज्ञः/NP विधिदृष्टः/KN यः/SN इज्यते/KP ।/PUNC
यष्टव्यम्/KN एव/INTF इति/AUD मनः/NP समाधाय/NP सः/SN सात्त्विकः/NP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अफलाकाङ्क्षिभिः/NP अफलार्थिभिः/NP यज्ञः/NP विधिदृष्टः/KN शास्त्रचोदनादृष्टः/KN यः/SN यज्ञः/NP इज्यते/KP निर्वर्त्यते/KP ,/PUNC यष्टव्यम्/KN एव/INTF इति/AUD यज्ञस्वरूपनिर्वर्तनम्/NP एव/INTF कार्यम्/NP इति/AUD मनः/NP समाधाय/KKS ,/PUNC न/AN अनेन/SN पुरुषार्थः/NP मम/SN कर्तव्यः/KN इति/AUD एवम्/AUD निश्चित्य/NP ,/PUNC सः/SN सात्त्विकः/NV यज्ञः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC
अभिसंधाय/KKS तु/A फलम्/NP दम्भार्थम्/NP अपि/AVK च/AVK एव/INTF यत्/SN ।/PUNC
इज्यते/KP भरतश्रेष्ठ/NV तम्/SN यज्ञम्/NP विद्धि/NP राजसम्/NP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अभिसंधाय/KKS तु/A उद्दिश्य/KKS फलम्/NP दम्भार्थम्/NP अपि/APY च/APY एव/INTF यत्/SN इज्यते/KP भरतश्रेष्ठ/NV तम्/SN यज्ञम्/NP विद्धि/NP राजसम्/NP  ।।/PUNC 
विधिहीनम्/NP असृष्टान्नम्/NP मन्त्रहीनम्/NP अदक्षिणम्/NP ।/PUNC
श्रद्धाविरहितम्/NP यज्ञम्/NP तामसम्/NP परिचक्षते/KP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC विधिहीनम्/NP यथाचोदितविपरीतम्/NP ,/PUNC असृष्टान्नम्/NP ब्राह्मणेभ्यः/NP न/AN सृष्टम्/KN न/AN दत्तम्/KN अन्नम्/NP यस्मिन्/SNV यज्ञे/NP सः/SN असृष्टान्नः/NP तम्/SN असृष्टान्नम्/NP ,/PUNC मन्त्रहीनम्/NP मन्त्रतः/NP स्वरतः/NP वर्णतः/NP वा/APY वियुक्तम्/KNV मन्त्रहीनम्/NP ,/PUNC अदक्षिणम्/NP उक्तदक्षिणारहितम्/NP ,/PUNC श्रद्धाविरहितम्/NP यज्ञम्/NP तामसम्/NP परिचक्षते/KP तमोनिर्वृत्तम्/KN कथयन्ति/KP ।।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A तपः/NP त्रिविधम्/NP उच्यते/KP -/PUNC 
देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनम्/NP शौचम्/NP आर्जवम्/NP ।/PUNC
ब्रह्मचर्यम्/NP अहिंसा/NP च/APY शारीरम्/NP तपः/NP उच्यते/KP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC देवाः/NP च/APY द्विजाः/NP च/APY गुरवः/NP च/APY प्राज्ञाः/NP च/APY देवद्विजगुरुप्राज्ञाः/NP तेषाम्/SNV पूजनम्/NP देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनम्/NP ,/PUNC शौचम्/NP ,/PUNC आर्जवम्/NP ऋजुत्वम्/NP ,/PUNC ब्रह्मचर्यम्/NP अहिंसा/NP च/APY शरीरनिर्वर्त्यम्/NP शारीरम्/NP शरीरप्रधानैः/NP सर्वैः/SNV एव/INTF कार्यकरणैः/NP कर्त्रादिभिः/NP साध्यम्/NV शारीरम्/NP तपः/NP उच्यते/KP ।/PUNC '/PUNC पञ्च/SMKY एते/SNV तस्य/SN हेतवः/NP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 15/PUNC )/PUNC  '/PUNC इति/AUD हि/A वक्ष्यति/KP ।।/PUNC
अनुद्वेगकरम्/NP वाक्यम्/NP सत्यम्/NP प्रियहितम्/KN च/APY यत्/SN ।/PUNC
स्वाध्यायाभ्यसनम्/NP च/AVK एव/INTF वाङ्मयम्/NP तपः/NP उच्यते/KP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अनुद्वेगकरम्/NP प्राणिनाम्/NP अदुःखकरम्/NV वाक्यम्/NP सत्यम्/NP प्रियहितम्/KN च/APY यत्/SN प्रियहिते/KN दृष्टादृष्टार्थे/NP ।/PUNC अनुद्वेगकरत्वादिभिः/NP धर्मैः/NP वाक्यम्/NP विशेष्यते/KP ।/PUNC विशेषणधर्मसमुच्चयार्थः/NP च/APY -/PUNC शब्दः/NP ।/PUNC परप्रत्ययार्थम्/NP प्रयुक्तस्य/NV वाक्यस्य/NP सत्यप्रियहितानुद्वेगकरत्वानाम्/NP अन्यतमेन/NP द्वाभ्याम्/SMKY त्रिभिः/SMKY वा/APY हीनता/NP स्यात्यदि/NP ,/PUNC न/AN तद्वाङ्मयम्/NP तपः/NP ।/PUNC तथा/AVK सत्यवाक्यस्य/NP इतरेषाम्/NP अन्यतमेन/SN द्वाभ्याम्/SMKY त्रिभिः/SMKY वा/APY विहीनतायाम्/NP न/AN वाङ्मयतपस्त्वम्/NP ।/PUNC तथा/AVK प्रियवाक्यस्य/NP अपि/AVK इतरेषाम्/NP अन्यतमेन/NP द्वाभ्याम्/SMKY त्रिभिः/SMKY वा/APY विहीनस्य/NP न/AN वाङ्मयतपस्त्वम्/NP ।/PUNC तथा/AVK हितवाक्यस्य/NP अपि/AVK इतरेषाम्/NP अन्यतमेन/SN द्वाभ्याम्/SMKY त्रिभिः/SMKY वा/APY विहीनस्य/NP न/AN वाङ्मयतपस्त्वम्/NP ।/PUNC किम्/AP पुनः/A तत्/SN तपः/NP ?/PUNC यत्/SN सत्यम्/NV वाक्यम्/NP अनुद्वेगकरम्/NP प्रियम्/NP हितम्/KN च/APY ,/PUNC तत्/SN तपः/NP वाङ्मयम्/NP ;/PUNC यथा/AVK  '/PUNC शान्तः/NP भव/KP वत्स/NP ,/PUNC स्वाध्यायम्/NP योगम्/NP च/APY अनुतिष्ठ/KN ,/PUNC तथा/AVK ते/SN श्रेयः/NP भविष्यति/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC स्वाध्यायाभ्यसनम्/NP च/APY एव/INTF यथाविधि/NP वाङ्मयम्/NP तपः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 
मनःप्रसादः/NP सौम्यत्वम्/NP मौनम्/NP आत्मविनिग्रहः/NP ।/PUNC
भावसंशुद्धिः/NP इति/AUD एतत्/SNV तपः/NP मानसम्/NP उच्यते/KP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मनःप्रसादः/NP मनसः/NP प्रशान्तिः/NP ,/PUNC स्वच्छतापादनम्/NP मनसः/NP प्रसादः/NP ,/PUNC सौम्यत्वम्/NP यत्/SN सौमनस्यम्/NP आहुः/KP -/PUNC मुखादिप्रसादादिकार्योन्नेया/NP अन्तःकरणस्य/NP वृत्तिः/KN ।/PUNC मौनम्/NP वाङ्नियमः/NP अपि/AVK मनःसंयमपूर्वकः/NP भवति/KP इति/AUD कार्येण/NP कारणम्/NP उच्यते/KP मनःसंयमः/NP मौनम्/NP इति/AUD ।/PUNC आत्मविनिग्रहः/NP मनोनिरोधः/NP सर्वतः/A सामान्यरूपः/NP आत्मविनिग्रहः/NP ,/PUNC वाग्विषयस्य/NP एव/INTF मनसः/NP संयमः/NP मौनम्/NP इति/AUD विशेषः/NP ।/PUNC भावसंशुद्धिः/NP परैः/SN व्यवहारकाले/NP अमायावित्वम्/NP भावसंशुद्धिः/NP ।/PUNC इति/AUD एतत्/SNV तपः/NP मानसम्/NP उच्यते/KP ।।/PUNC यथा/AVK उक्तम्/KN कायिकम्/NP वाचिकम्/NP मानसम्/NP च/APY तपः/NP तप्तम्/NP नरैः/NP सत्त्वादिगुणभेदेन/NP कथम्/NP त्रिविधम्/NP भवति/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
श्रद्धया/NP परया/NP तप्तम्/NP तपः/NP तत्/SN त्रिविधम्/NP नरैः/NP ।/PUNC
अफलाकाङ्क्षिभिः/NP युक्तैः/KN सात्त्विकम्/NP परिचक्षते/KP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC श्रद्धया/NP आस्तिक्य/KKS बुद्ध्या/NP परया/NP प्रकृष्टया/NP तप्तम्/NP अनुष्ठितम्/KN तपः/NP तत्/SN प्रकृतम्/NP त्रिविधम्/NP त्रिप्रकारम्/NP त्र्यधिष्ठानम्/NP नरैः/NP अनुष्ठातृभिः/NP अफलाकाङ्क्षिभिः/NP फलाकाङ्क्षारहितैः/NP युक्तैः/KN समाहितैः/KN यत्/SN ईदृशम्/SNV तपः/NP ,/PUNC तत्/SN सात्त्विकम्/NP सत्त्वनिर्वृत्तम्/NP परिचक्षते/KP कथयन्ति/KP शिष्टाः/KN ।।/PUNC
सत्कारमानपूजार्थम्/NP तपः/NP दम्भेन/NP च/APY एव/INTF यत्/SN ।/PUNC
क्रियते/KP तत्/SN इह/A प्रोक्तम्/KN राजसम्/NP चलम्/NP अध्रुवम्/KP
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सत्कारः/NP साधुकारः/NP '/PUNC साधुः/NP अयम्/SN तपस्वी/NV ब्राह्मणः/NP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD अर्थम्/NP ,/PUNC मानः/NP माननम्/NP प्रत्युत्थानाभिवादनादिः/NP तदर्थम्/NP ,/PUNC पूजा/NP पादप्रक्षालनार्चनाशयितृत्वादिः/NP तदर्थम्/NP च/AVK तपः/NP सत्कारमानपूजार्थम्/NP ,/PUNC दम्भेन/NP च/AVK एव/INTF यत्/SN क्रियते/KP तपः/NP तत्/SN इह/A प्रोक्तम्/KN कथितम्/KN राजसम्/NP चलम्/NP कादाचित्कफलत्वेन/NP अध्रुवम्/NP ।।/PUNC
मूढग्राहेण/NP आत्मनः/NP यत्/SN पीडया/NP क्रियते/KP तपः/NP ।/PUNC
परस्योत्सादनार्थम्/NP वा/AVK तत्तामसम्/NP उदाहृतम्/KN
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मूढग्राहेण/NP अविवेकनिश्चयेन/NP आत्मनः/NP पीडया/NP यत्/SN क्रियते/KP तपः/NP परस्य/SN उत्सादनार्थम्/NP विनाशार्थम्/NP वा/AVK ,/PUNC तत्/SN तामसम्/NP तपः/NP उदाहृतम्/KN ।।/PUNC इदानीम्/A दानत्रैविध्यम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
दातव्यम्/KN इति/AUD यत्/SSN दानम्/NP दीयते/KP अनुपकारिणे/NP ।/PUNC
देशे/NP काले/NP च/APY पात्रे/NP च/APY तत्/SSN दानम्/NP सात्त्विकम्/NP स्मृतम्/KN  
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC दातव्यम्/KN इति/AUD एवम्/AUD मनः/NP कृत्वा/KKS यत्/SN दानम्/NP दीयते/KP अनुपकारिणे/NP प्रत्युपकारासमर्थाय/NP ,/PUNC समर्थाय/NP अपि/AVK निरपेक्षम्/NP दीयते/KP ,/PUNC देशे/NP पुण्ये/NP कुरुक्षेत्रादौ/NP ,/PUNC काले/NP संक्रान्त्यादौ/NP ,/PUNC पात्रे/NP च/AVK षडङ्गविद्वेदपारगः/NP इत्यादौ/AUD ,/PUNC तत्/SN दानम्/NP सात्त्विकम्/NP स्मृतम्/KN ।।/PUNC
यत्/SN तु/A प्रत्युपकारार्थम्/NP फलम्/NP उद्दिश्य/KKS वा/AVK पुनः/A ।/PUNC
दीयते/KP च/AVK परिक्लिष्टम्/KN तत्/SN दानम्/NP राजसम्/NP स्मृतम्/KN 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SN तु/A दानम्/NP प्रत्युपकारार्थम्/NP काले/NP तु/A अयम्/SN माम्/SN प्रत्युपकरिष्यति/KP इति/AUD एवम्/AUD अर्थम्/NP ,/PUNC फलम्/NP वा/APY अस्य/SN दानस्य/NP मे/SN भविष्यति/KP अदृष्टम्/NP इति/AUD ,/PUNC तत्/SN उद्दिश्य/KKS पुनः/A दीयते/KP च/AVK परिक्लिष्टम्/KN खेदसंयुक्तम्/KN ,/PUNC तत्/SN दानम्/NP राजसम्/NP स्मृतम्/KN ।।/PUNC
अदेशकाले/NP यत्/SN दानम्/NP अपात्रेभ्यः/NP च/APY दीयते/KP ।/PUNC
असत्कृतम्/KN अवज्ञातम्/KN  तत्/SN तामसम्/NP उदाहृतम्/KN 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अदेशकाले/NP अदेशे/NP अपुण्यदेशे/NP   म्लेच्छाशुच्यादिसंकीर्णे/NP अकाले/NP पुण्यहेतुत्वेन/NP अप्रख्याते/NP संक्रान्त्यादिविशेषरहिते/NP अपात्रेभ्यः/NP च/APY मूर्खतस्करादिभ्यः/NP ,/PUNC देशादिसंपत्तौ/NP वा/AVK असत्कृतम्/KN च/APY प्रियवचनपादप्रक्षालनपूजादिरहितम्/NP अवज्ञातम्/KN पात्रपरिभव/NP युक्तम्/KN च/APY यत्/SN दानम्/NP ,/PUNC तत्/SN तामसम्/NP उदाहृतम्/KN ।।/PUNC
यज्ञदानतपः/NP प्रभृतीनाम्/NP साद्गुण्यकरणाय/NP अयम्/SN उपदेशः/NP उच्यते/KP -/PUNC
ॐ/A तत्/SN सत्/SN इति/AUD निर्देशः/NP ब्रह्मणः/NS त्रिविधः/NP स्मृतः/KN ।/PUNC
ब्राह्मणाः/NP तेन/SN वेदाः/NS च/APY यज्ञाः/NP च/APY विहिताः/KN पुरा/A 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ॐ/A तत्/SN सत्/NP इति/AUD एवम्/AUD निर्देशः/NP ,/PUNC निर्दिश्यते/KP अनेन/SN इति/AUD निर्देशः/NP ,/PUNC त्रिविधो/NP नामनिर्देशः/NP ब्रह्मणः/NP स्मृतः/KN चिन्तितः/NP वेदान्तेषु/NP ब्रह्मविद्भिः/NP ।/PUNC ब्राह्मणाः/NP तेन/NP निर्देशेन/NP त्रिविधेन/NP वेदाः/NS च/APY यज्ञाः/NP च/APY विहिताः/KN निर्मिताः/KN पुरा/A पूर्वम्/SN इति/AUD निर्देशस्तुत्यर्थम्/NP उच्यते/KP ।।/PUNC
तस्मात्/SN ओम्/A इति/AUD उदाहृत्य/KKS यज्ञदानतपः/NP क्रियाः/NP ।/PUNC
प्रवर्तन्ते/KP विधानोक्ताः/KN सततम्/NV ब्रह्मवादिनाम्/NP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तस्मात्/SN '/PUNC ओम्/A '/PUNC  इति/AUD उदाहृत्य/KKS उच्चार्य/NP यज्ञदानतपः/NP क्रियाः/NP यज्ञादिस्वरूपाः/NV क्रियाः/NP प्रवर्तन्ते/KP विधानोक्ताः/KN शास्त्रचोदिताः/KN सततम्/NV सर्वदा/NP ब्रह्मवादिनाम्/NP ब्रह्मवदनशीलानाम्/NP ।।/PUNC
तत्/SN इति/AUD अनभिसन्धाय/NP फलम्/NP यज्ञतपः/NP क्रियाः/NP ।/PUNC
दानक्रियाः/NP च/APY विविधाः/NP क्रियन्ते/KP मोक्षकाङ्क्षिभिः/NP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तत्/SN इति/AUD अनभिसंधाय/NP ,/PUNC '/PUNC तत्/SN '/PUNC इति/AUD ब्रह्माभिधानम्/NP उच्चार्य/NP अनभिसंधाय/NP च/APY यज्ञादिकर्मणः/NP फलम्/NP यज्ञतपः/NP क्रियाः/NP यज्ञक्रियाः/NP च/APY तपः/NP क्रियाः/NP च/APY यज्ञतपः/NP क्रियाः/NP दानक्रियाः/NP च/APY विविधाः/NP क्षेत्रहिरण्यप्रदानादिलक्षणाः/NP क्रियन्ते/KP निर्वर्त्यन्ते/KP मोक्षकाङ्क्षिभिः/NP मोक्षार्थिभिः/NP मुमुक्षुभिः/NP  ।।/PUNC ओंतच्छब्दयोः/NP विनियोगः/NP उक्तः/KN ।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A सत्/NP शब्दस्य/NP विनियोगः/NP कथ्यते/KP -/PUNC सद्भावे/NP साधुभावे/NP च/APY सत्/NP इति/AUD एतत्/SN प्रयुज्यते/KP ।।/PUNC प्रशस्ते/NP कर्मणि/NP तथा/AVK सत्/NP शब्दः/NP पार्थ/NS युज्यते/KP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सद्भावे/NP ,/PUNC असतः/NP सद्भावे/NP यथा/AVK अविद्यमानस्य/NV पुत्रस्य/NP जन्मनि/NP ,/PUNC तथा/AVK साधुभावे/NP च/APY असद्वृत्तस्य/NP असाधोः/NP सद्वृत्तता/KN साधुभावः/NP तस्मिन्/SN साधुभावे/NP च/APY सत्/NP इति/AUD एतत्/SN अभिधानम्/NP ब्रह्मणः/NP प्रयुज्यते/KP अभिधीयते/KP ।/PUNC प्रशस्ते/NP कर्मणि/NP विवाहादौ/NP च/APY तथा/AVK सच्छब्दः/NP पार्थ/NS ,/PUNC युज्यते/KP प्रयुज्यते/KP इति/AUD एतत्/SN ।।/PUNC
यज्ञे/NP तपसि/NP दाने/NP च/APY स्थितिः/NP सत्/NP इति/AUD च/APY उच्यते/KP ।/PUNC
कर्म/NP च/APY एव/INTF तदर्थीयम्/NP सत्/NP इति/AUD एव/INTF अभिधीयते/KP 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यज्ञे/NP यज्ञकर्मणि/NP या/SN स्थितिः/NP ,/PUNC तपसि/NP च/APY या/SN स्थितिः/NP ,/PUNC दाने/NP च/APY या/SSN स्थितिः/NP ,/PUNC सा/SSN सत्/NP इति/AUD च/APY उच्यते/KP विद्वद्भिः/NP ।/PUNC कर्म/NP च/APY एव/INTF तदर्थीयम्/NP यज्ञदानतपः/NP अर्थीयम्/NP ;/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC यस्य/SN अभिधानत्रयम्/NP प्रकृतम्/NP तदर्थीयम्/NP यज्ञदानतपः/NP अर्थीयम्/NP ईश्वरार्थीयम्/NP इति/AUD एतत्/SN ;/PUNC सत्/NP इति/AUD एव/INTF अभिधीयते/KP ।/PUNC तत्/SN एतत्/SN यज्ञदानतप/NP आदि/NV कर्म/NP असात्त्विकम्/NP विगुणम्/NP अपि/APY श्रद्धापूर्वकम्/NP ब्रह्मणः/NP अभिधानत्रयप्रयोगेण/NP सगुणम्/NP सात्त्विकम्/NV संपादितम्/KN भवति/KP ।।/PUNC
तत्र/A च/AVK सर्वत्र/A श्रद्धाप्रधानतया/NP सर्वम्/SN संपाद्यते/KP यस्मात्/SSN ,/PUNC तस्मात्/SSN -/PUNC
अश्रद्धया/NP हुतम्/KN दत्तम्/KN तपः/NP तप्तम्/NP कृतम्/KN च/APY यत्/SN ।/PUNC
असत्/NP इति/AUD उच्यते/KP पार्थ/NS न/AN च/AVK तत्/SN प्रेत्य/KKS नः/AN इह/A 
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासु/NS उपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NP योगशास्त्रे/NP श्रीकृष्णार्जुनसंवादे/NS श्रद्धात्रयविभागयोगः/NS नाम/NP सप्तदशः/SMKY अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 17/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अश्रद्धया/NP हुतम्/KN हवनम्/NP कृतम्/KN ,/PUNC अश्रद्धया/NP दत्तम्/KN ब्राह्मणेभ्यः/NP ,/PUNC अश्रद्धया/NP तपः/NP तप्तम्/NP अनुष्ठितम्/KN ,/PUNC तथा/AVK अश्रद्धया/NP एव/INTF कृतम्/KN यत्/SN स्तुतिनमस्कारादि/NP ,/PUNC तत्/SN सर्वम्/SN असत्/NP इति/AUD उच्यते/KP ,/PUNC मत्प्राप्तिसाधनमार्गबाह्यत्वात्/NP पार्थ/NS ।/PUNC न/AN च/APY तत्/SN बहुलायासमपि/NP प्रेत्य/KKS फलाय/NP नः/AN अपि/AVK इह/A अर्थम्/NP ,/PUNC साधुभिः/NP निन्दितत्वात्/NP इति/AUD ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NV श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NV श्रीमच्छङ्करभगवतः/NS कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NS सप्तदशः/SMKY अध्यायः/NP ।।/PUNC सर्वस्य/SN एव/INTF गीताशास्त्रस्य/NP अर्थः/NP अस्मिन्/SNV अध्याये/NP उपसंहृत्य/KKS सर्वः/SN च/APY वेदार्थः/NP वक्तव्यः/KN इति/AUD एवम्/AUD अर्थः/NP अयम्/SN अध्यायः/NP आरभ्यते/KP ।/PUNC सर्वेषु/SN हि/A अतीतेषु/NV अध्यायेषु/NP उक्तः/KN अर्थः/NP अस्मिन्/SN अध्याये/NP अवगम्यते/KP ।/PUNC अर्जुनः/NS तु/A संन्यासत्यागशब्दार्थयोः/NP एव/INTF विशेषबुभुत्सुः/NP उवाच/KP -/PUNC
अर्जुनः/NS उवाच/KP
संन्यासस्य/NP महाबाहो/NP तत्त्वम्/NP इच्छामि/KP वेदितुम्/KKS ।/PUNC
त्यागस्य/NP च/APY हृषीकेश/NS पृथक/A केशिनिषूदन/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 1/PUNC ।।/PUNC -/PUNC संन्यासस्य/NP संन्यासशब्दार्थस्य/NP इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC हे/ASMB महाबाहो/NP ,/PUNC तत्त्वम्/NP तस्य/SN भावः/NP तत्त्वम्/NP ,/PUNC याथात्म्यम्/NP इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC इच्छामि/KP वेदितुम्/KKS ज्ञातुम्/KKS ,/PUNC त्यागस्य/NP च/APY त्यागशब्दार्थस्य/NP इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC हृषीकेश/NS ,/PUNC पृथक्/A इतरेतरविभागतः/NP केशिनिषूदन/NP केशिनामा/NP हयच्छद्मा/NP कश्चित्/SN असुरः/NP तम्/SN निषूदितवान्/KN भगवान्/NV वासुदेवः/NS ,/PUNC तेन/SN तत्/SN नाम्ना/NP संबोध्यते/KP अर्जुनेन/NS ।।/PUNC संन्यासत्यागशब्दौ/NP तत्र/A निर्दिष्टौ/NP ,/PUNC न/AN निर्लुठितार्थौ/NP पूर्वेषु/NV अध्यायेषु/NP ।/PUNC अतः/AVK अर्जुनाय/NS पृष्टवते/KN तत्/SN निर्णयाय/KKS भगवान्/NP उवाच/KP -/PUNC
श्रीभगवान्/NP उवाच/KP
काम्यानाम्/NP कर्मणाम्/NP न्यासम्/NP संन्यासम्/NP कवयः/NP विदुः/NP ।/PUNC
सर्वकर्मफलत्यागम्/NP प्राहुः/KP त्यागम्/NP विचक्षणाः/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 2/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 2/PUNC  ।।/PUNC -/PUNC काम्यानाम्/NP अश्वमेधादीनाम्/NP कर्मणाम्/NP न्यासम्/NP संन्यासशब्दार्थम्/NP ,/PUNC अनुष्ठेयत्वेन/NP प्राप्तस्य/NP अनुष्ठानम्/NP ,/PUNC कवयः/NP पण्डिताः/NP केचित्/SN विदुः/NP विजानन्ति/KP ।/PUNC नित्यनैमित्तिकानाम्/NP अनुष्ठीयमानानाम्/NP सर्वकर्मणाम्/NP आत्मसंबन्धितया/NP प्राप्तस्य/NP फलस्य/NP परित्यागः/NP सर्वकर्मफलत्यागः/NP तम्/SN प्राहुः/KP कथयन्ति/KP त्यागम्/NP त्यागशब्दार्थम्/NP विचक्षणाः/NV पण्डिताः/NP ।/PUNC यदि/AVK काम्यकर्मपरित्यागः/NP फलपरित्यागः/NP वा/AVK अर्थः/NP वक्तव्यः/KN ,/PUNC सर्वथा/A परित्यागमात्रम्/NP संन्यासत्यागशब्दयोः/NP एकः/SMKY अर्थः/NP स्यात्/KP ,/PUNC न/AN घटपटशब्दौ/NP इव/ASD जात्यन्तरभूतार्थौ/NP ।।/PUNC ननु/AP नित्यनैमित्तिकानाम्/NP कर्मणाम्/NP फलम्/NP एव/INTF न/AN अस्ति/KP इति/AUD आहुः/KP ।/PUNC कथम्/NP उच्यते/KP तेषाम्/SN फलत्यागः/NP ,/PUNC यथा/AVK वन्ध्यायाः/NP पुत्रत्यागः/NP ?/PUNC न/AN एष/SNV दोषः/NP ,/PUNC नित्यानाम्/NP अपि/AVK कर्मणाम्/NP भगवता/NP फलवत्त्वस्य/NP इष्टत्वात्/NP ।/PUNC वक्ष्यति/KP हि/A भगवान्/NP '/PUNC अनिष्टम्/NP इष्टम्/KN मिश्रम्/NP च/APY (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD '/PUNC न/AN तु/A संन्यासिनाम्/NP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC  '/PUNC इति/AUD च/APY ।/PUNC संन्यासिनाम्/NP एव/INTF हि/A केवलम्/NP कर्मफलासंबन्धम्/NP दर्शयन्/KNV असंन्यासिनाम्/NP नित्यकर्मफलप्राप्तिम्/NP '/PUNC भवति/KP अत्यागिनाम्/NP प्रेत्य/KKS (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC  '/PUNC इति/AUD दर्शयति/KP ।।/PUNC
त्याज्यम्/NP दोषवत्/KN इति/AUD एके/SMKY कर्म/NP प्राहुः/KP मनीषिणः/NP ।/PUNC
यज्ञदानतपः/NP कर्म/NP न/AN त्याज्यम्/NP इति/AUD च/APY अपरे/SN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 3/PUNC ।।/PUNC -/PUNC त्याज्यम्/NP त्यक्तव्यम्/KN दोषवत्/KN दोषः/NP अस्य/SN अस्ति/KP इति/AUD दोषवत्/KN ।/PUNC किम्/AP तत्/SN ?/PUNC कर्म/NP बन्धहेतुत्वात्/NP सर्वम्/SN एव/INTF ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC दोषः/NP यथा/AVK रागादिः/NP त्यज्यते/KP ,/PUNC तथा/AVK त्याज्यम्/NP इति/AUD एके/SMKY कर्म/NP प्राहुः/KP मनीषिणः/NP पण्डिताः/NP सांख्यादिदृष्टिम्/NP आश्रिताः/KN ,/PUNC अधिकृतानाम्/NP कर्मिणाम्/NP अपि/APY इति/AUD ।/PUNC तत्र/A एव/INTF यज्ञदानतपः/NP कर्म/NP न/AN ?/PUNC त्याज्यम्/NP इति/AUD च/APY अपरे/SN ।।/PUNC कर्मिणः/NP एव/INTF अधिकृताः/KN ,/PUNC तान्/SN अपेक्ष्य/NP एते/SN विकल्पाः/NP ,/PUNC न/AN तु/A ज्ञाननिष्ठान्/NP व्युत्थायिनः/NP संन्यासिनः/NP अपेक्ष्य/NP ।/PUNC '/PUNC ज्ञानयोगेन/NP सांख्यानाम्/NP निष्ठा/NP मया/SN पुरा/A प्रोक्ता/KN '/PUNC इति/AUD कर्माधिकारात्/NP अपोद्धृताः/KN ये/SN ,/PUNC न/AN तान्/SN प्रति/AUP चिन्ता/NP ।।/PUNC ननु/AP '/PUNC कर्मयोगेन/NP योगिनाम्/NP (/PUNC गीता/NS 3/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD अधिकृताः/KN पूर्वम्/SN विभक्तनिष्ठाः/NP अपि/AVK इह/A सर्वशास्त्रार्थोपसंहारप्रकरणे/NP यथा/AVK विचार्यन्ते/KP ,/PUNC तथा/AVK सांख्याः/NP अपि/AVK ज्ञाननिष्ठाः/NP विचार्यन्ताम्/KP इति/AUD ।/PUNC न/AN ,/PUNC तेषाम्/SN मोहदुःखनिमित्तत्यागानुपपत्तेः/NP ।/PUNC न/AN कायक्लेशनिमित्तम्/NP दुःखम्/NP सांख्याः/NP आत्मनि/NP पश्यन्ति/KP ,/PUNC इच्छादीनाम्/NP क्षेत्रधर्मत्वेन/NP एव/INTF दर्शितत्वात्/NP ।/PUNC अतः/AVK ते/SN न/AN कायक्लेशदुःखभयात्/NP कर्म/NP परित्यजन्ति/KP ।/PUNC न/AN अपि/AVK ते/SN कर्माणि/NP आत्मनि/NP पश्यन्ति/KP ,/PUNC येन/SN नियतम्/KN  कर्म/NP मोहात्/NP परित्यजेयुः/KP ।/PUNC गुणानाम्/NP कर्म/NP '/PUNC न/AN एव/INTF किञ्चित्/SN करोमि/KP '/PUNC इति/AUD हि/A ते/SN संन्यस्यन्ति/KP ।/PUNC '/PUNC सर्वकर्माणि/NP मनसा/NP संन्यस्य/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 13/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिभिः/NV तत्त्वविदः/NP संन्यासप्रकारः/NP उक्तः/KN ।/PUNC तस्मात्/SN ये/SN अन्ये/SN अधिकृताः/KN कर्मणि/NP अनात्मविदः/NP ,/PUNC येषाम्/SNV च/AVK मोहनिमित्तः/NP त्यागः/NP संभवति/KP कायक्लेशभयात्/NP च/APY ,/PUNC ते/SN एव/INTF तामसाः/NP त्यागिनः/NP राजसाः/NP च/APY इति/AUD निन्द्यन्ते/KP कर्मिणाम्/NP अनात्मज्ञानाम्/NP कर्मफलत्यागस्तुत्यर्थम्/NP ;/PUNC '/PUNC सर्वारम्भपरित्यागी/NP (/PUNC गीता/NS 14/PUNC ।/PUNC 25/PUNC )/PUNC '/PUNC मौनी/NP संतुष्टः/KN येन/SN केनचित्/SN (/PUNC गीता/NS 12/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC ।/PUNC अनिकेतः/NP स्थिरमतिः/NP (/PUNC गीता/NS 12/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD गुणातीतलक्षणे/NP च/APY परमार्थसंन्यासिनः/NP विशेषितत्वात्/NP ।/PUNC वक्ष्यति/KP च/AVK '/PUNC निष्ठा/NP ज्ञानस्य/NP या/SN परा/SN (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 50/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC तस्मात्/SN ज्ञाननिष्ठाः/NP संन्यासिनः/NP न/AN इह/A विवक्षिताः/KN ।/PUNC कर्मफलत्यागः/NP एव/INTF सात्त्विकत्वेन/NP गुणेन/NP तामसत्वाद्यपेक्षया/NP संन्यासः/NP उच्यते/KP ,/PUNC न/AN मुख्यः/NP सर्वकर्मसंन्यासः/NP ।।/PUNC
सर्वकर्मसंन्यासासंभवे/NP च/AVK  '/PUNC न/AN हि/A देहभृता/KN '/PUNC इति/AUD हेतुवचनात्/NP मुख्यः/NP एव/INTF इति/AUD चेत्/SN ,/PUNC न/AN ;/PUNC हेतुवचनस्य/NP स्तुत्यर्थत्वात्/NP ।/PUNC यथा/AVK त्यागात्शान्तिः/NP अनन्तरम्/AVK (/PUNC गीता/NS 12/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD कर्मफलत्यागस्तुतिः/NP एव/INTF यथोक्तानेकपक्षानुष्ठानाशक्तिमन्तम्/NV अर्जुनम्/NS अज्ञम्/NP प्रति/AUP विधानात्/NP ;/PUNC तथा/AVK इदम्/SN अपि/AVK '/PUNC न/AN हि/A देहभृता/KN शक्यम्/NP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 11/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD कर्मफलत्यागस्तुत्यर्थम्/NP ;/PUNC न/AN '/PUNC सर्वकर्माणि/NP मनसा/NP संन्यस्य/NP न/AN एव/INTF कुर्वन्न/KP कारयन्/KNV आस्ते/KP '/PUNC इति/AUD अस्य/SN पक्षस्य/NP अपवादः/NP केनचित्/SN दर्शयितुम्/KKS शक्यः/KKS ।/PUNC तस्मात्/SN कर्मणि/NP अधिकृतान्/KNV प्रति/AUP एव/INTF एषः/SNV संन्यासत्यागविकल्पः/NP ।/PUNC ये/SN तु/A परमार्थदर्शिनः/NV सांख्याः/NP ,/PUNC तेषाम्/SNV ज्ञाननिष्ठायाम्/NP एव/INTF सर्वकर्मसंन्यासलक्षणायाम्/NP अधिकारः/NP ,/PUNC न/AN अन्यत्र/SN,/PUNC इति/AUD न/AN ते/SN विकल्पार्हाः/NP ।/PUNC तत्/SN च/AVK उपपादितम्/KN अस्माभिः/SN '/PUNC वेदाविनाशिनम्/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 21/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD अस्मिन्/SNV प्रदेशे/NP ,/PUNC तृतीयादौ/SMKY च/APY ।।/PUNC
तत्र/A एतेषु/SNV विकल्पभेदेषु/NP  -/PUNC
निश्चयम्/NP शृणु/KP मे/SN तत्र/A त्यागे/NP भरतसत्तम/NP ।/PUNC
त्यागः/NP हि/A पुरुषव्याघ्र/NP त्रिविधः/NP संप्रकीर्तितः/KN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 4/PUNC ।।/PUNC -/PUNC निश्चयम्/NP शृणु/KP अवधारय/KKS मे/SN मम/SN वचनात्/NP ;/PUNC तत्र/A त्यागे/NP त्यागसंन्यासविकल्पे/NP यथा/AVK दर्शिते/KP भरतसत्तम/NP भरतानाम्/NP साधुतम/NP ।/PUNC त्यागः/NP हि/A ,/PUNC त्यागसंन्यासशब्दवाच्यः/NP हि/A यः/SSN अर्थः/NP सः/SSN एकः/SMKY एव/INTF इति/AUD अभिप्रेत्य/KKS आह/KP -/PUNC त्यागः/NP हि/A इति/AUD ।/PUNC पुरुषव्याघ्र/NP ,/PUNC त्रिविधः/NP त्रिप्रकारः/NP तामसादिप्रकारैः/NP संप्रकीर्तितः/KN शास्त्रेषु/NP सम्यक्/NV कथितः/KN यस्मात्/SN तामसादिभेदेन/NP त्यागसंन्यासशब्दवाच्यः/NP अर्थः/NP अधिकृतस्य/KN कर्मिणः/NP अनात्मज्ञस्य/NP त्रिविधः/NP संभवति/KP ,/PUNC न/AN परमार्थदर्शिनः/NP ,/PUNC इति/AUD अयम्/SN अर्थः/NP दुर्ज्ञानः/NP ,/PUNC तस्मात्/SN अत्र/A तत्त्वम्/NP न/AN अन्यः/SN वक्तुम्/KKS समर्थः/NP ।/PUNC तस्मात्/SN निश्चयम्/NP परमार्थशास्त्रार्थविषयम्/NP अध्यवसायम्/NP ऐश्वरम्/NP मे/SN मत्तः/KN शृणु/KP ।।/PUNC
कः/SN पुनः/A असौ/SN निश्चयः/NP इति/AUD ,/PUNC आह/KP -/PUNC
यज्ञदानतपः/NP कर्म/NP न/AN त्याज्यम्/NP कार्यम्/NP एव/INTF तत्/SN ।/PUNC
यज्ञः/NP दानम्/NP तपः/NP च/APY एव/INTF पावनानि/NP मनीषिणाम्/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 5/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यज्ञः/NP दानम्/NP तपः/NP इति/AUD एतत्/SNV त्रिविधम्/NP कर्म/NP न/AN त्याज्य/KKS न/AN त्यक्तव्यम्/KN ,/PUNC कार्यम्/NP करणीयम्/KN एव/INTF तत्/SN  ।/PUNC कस्मात्/SN ?/PUNC यज्ञः/NP दानम्/NP तपः/NP च/APY एव/INTF पावनानि/NP विशुद्धिकराणि/NP मनीषिणाम्/NP फलानभिसंधीनाम्/NP इति/AUD एतत्/SNV ।।/PUNC
एतानि/SNV अपि/AVK तु/A कर्माणि/NP सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS फलानि/NP च/APY ।/PUNC
कर्तव्यानि/KN इति/AUD मे/SN पार्थ/NS निश्चितम्/KN मतम्/NP उत्तमम्/NV
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 6/PUNC ।।/PUNC -/PUNC एतानि/SNV अपि/AVK तु/A कर्माणि/NP यज्ञदानतपांसि/NP पावनानि/NP उक्तानि/KNV सङ्गम्/NP आसक्तिम्/NP तेषु/SN त्यक्त्वा/KKS फलानि/NP च/AVK तेषाम्/SN परित्यज्य/KKS कर्तव्यानि/KN इति/AUD अनुष्ठेयानि/NP इति/AUD मे/SN मम/SN निश्चितम्/KN मतम्/NP उत्तमम्/NV ।।/PUNC  '/PUNC निश्चयम्/NP शृणु/KP मे/SN तत्र/A (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 4/PUNC )/PUNC  '/PUNC  इति/AUD प्रतिज्ञाय/NP ,/PUNC पावनत्वम्/NP च/APY हेतुम्/NP उक्त्वा/KKS ,/PUNC '/PUNC एतानि/SN अपि/AVK कर्माणि/NP कर्तव्यानि/KN '/PUNC इति/AUD एतत्/SNV '/PUNC निश्चितम्/KN मतम्/NP उत्तमम्/NV '/PUNC इति/AUD प्रतिज्ञातार्थोपसंहारः/NP एव/INTF ,/PUNC न/AN अपूर्वार्थम्/NP वचनम्/NP ,/PUNC '/PUNC एतानि/SN अपि/AVK '/PUNC इति/AUD प्रकृतसंनिकृष्टार्थत्वोपपत्तेः/NP ।/PUNC सासङ्गस्य/NP फलार्थिनः/NP बन्धहेतवः/NP तानि/SN अपि/APY कर्माणि/NP मुमुक्षोः/NP कर्तव्यानि/KN इति/AUD अपि/AVK शब्दस्य/NP अर्थः/NP ।/PUNC न/AN तु/A अन्यानि/SN कर्माणि/NP अपेक्ष्य/NP '/PUNC एतानि/SN अपि/AVK '/PUNC इति/AUD उच्यते/KP  ।।/PUNC अन्ये/SN तु/A वर्णयन्ति/KP -/PUNC नित्यानाम्/NV कर्मणाम्/NP फलाभावात्/NP  '/PUNC सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS फलानि/NP च/AVK '/PUNC इति/AUD न/AN उपपद्यते/KP ।/PUNC अतः/AVK '/PUNC एतानि/SN अपि/AVK '/PUNC इति/AUD यानि/SN काम्यानि/NP कर्माणि/NP नित्येभ्यः/NP अन्यानि/SN ,/PUNC एतानि/SN अपि/APY कर्तव्यानि/KN ,/PUNC किमुत/AP यज्ञदानतपांसि/NP नित्यानि/NP इति/AUD ।/PUNC तत्/SN असत्/NP ,/PUNC नित्यानाम्/NP अपि/APY कर्मणाम्/NP इह/A फलवत्त्वस्य/NP उपपादितत्वात्/NP  '/PUNC यज्ञः/NP दानम्/NP तपः/NP च/APY एव/INTF पावनानि/NP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 5/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिना/AUD वचनेन/NP ।/PUNC नित्यानि/NP अपि/APY कर्माणि/NP बन्धहेतुत्वाशङ्कया/NP जिहासोः/NP मुमुक्षोः/NP कुतः/A काम्येषु/NP प्रसङ्गः/NP ?/PUNC '/PUNC दूरेण/NP हि/A अवरम्/NP कर्म/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 49/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK निन्दितत्वात्/NP ,/PUNC '/PUNC यज्ञार्थात्/NP कर्मणः/NP अन्यत्र/NP (/PUNC गीता/NS 3/PUNC ।/PUNC 9/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK काम्यकर्मणाम्/NP बन्धहेतुत्वस्य/NP निश्चितत्वात्/NP ,/PUNC '/PUNC त्रैगुण्यविषयाः/NP वेदाः/NS (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 45/PUNC )/PUNC '/PUNC त्रैविद्या/NP माम्/SN सोमपाः/NP (/PUNC गीता/NS 9/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC क्षीणे/NP पुण्ये/NP मर्त्यलोकम्/NP विशन्ति/KP (/PUNC गीता/NS 9/PUNC ।/PUNC 21/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK ,/PUNC दूरव्यवहितत्वात्/NP च/AVK ,/PUNC न/AN काम्येषु/NP '/PUNC एतानि/SN अपि/AVK '/PUNC इति/AUD व्यपदेशः/NP ।।/PUNC तस्मात्/SN अज्ञस्य/NP अधिकृतस्य/NP मुमुक्षोः/NP -/PUNC
नियतस्य/NP तु/A संन्यासः/NP कर्मणः/NP न/AN उपपद्यते/KP ।/PUNC
मोहात्तस्य/NP परित्यागः/NP तामसः/NP परिकीर्तितः/KN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 7/PUNC ।।/PUNC -/PUNC नियतस्य/NP तु/A नित्यस्य/NP संन्यासः/NP परित्यागः/NP कर्मणः/NP न/AN उपपद्यते/KP ,/PUNC अज्ञस्य/NP पावनत्वस्य/NP इष्टत्वात्/NP ।/PUNC मोहात्/NP अज्ञानात्/NP तस्य/SN नियतस्य/NP परित्यागः/NP -/PUNC नियतम्/KN च/APY अवश्यम्/NV कर्तव्यम्/KN ,/PUNC त्यज्यते/KP च/APY ,/PUNC इति/AUD विप्रतिषिद्धम्/KN ;/PUNC अतः/AVK मोहनिमित्तः/NP परित्यागः/NP तामसः/NP परिकीर्तितः/NP मोहः/NP च/APY तमः/NP इति/AUD ।।/PUNC दुःखम्/NP इति/AUD एव/INTF यत्/SN कर्म/NP कायक्लेशभयात्/NP त्यजेत्/KP ।/PUNC सः/SN कृत्वा/KKS राजसम्/NP त्यागम्/NP न/AN एव/INTF त्यागफलम्/NP लभेत्/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 8/PUNC ।।/PUNC -/PUNC दुःखम्/NP इति/AUD एव/INTF यत्/SN कर्म/NP कायक्लेशभयात्/NP शरीरदुःखभयात्/NP त्यजेत्/KP ,/PUNC सः/SN कृत्वा/KKS राजसम्/NP रजोनिर्वर्त्यम्/NP त्यागम्/NP न/AN एव/INTF त्यागफलम्/NP ज्ञानपूर्वकस्य/NP सर्वकर्मत्यागस्य/NP फलम्/NP मोक्षाख्यम्/NP न/AN लभेत्/KP न/AN एव/INTF लभेत/KP ।।/PUNC कः/SN पुनः/A सात्त्विकः/NP त्यागः/NP इति/AUD ,/PUNC आह/KP -/PUNC
कार्यम्/NP इति/AUD एव/INTF यत्/SN कर्म/NP नियतम्/KN क्रियते/KP अर्जुन/NS ।/PUNC
सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS फलम्/NP च/APY एव/INTF सः/SN त्यागः/NP सात्त्विकः/NV मतः/KN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 9/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कार्यम्/NP कर्तव्यम्/KN इति/AUD एव/INTF यत्/SN कर्म/NP नियतम्/KN नित्यम्/NP क्रियते/KP निर्वर्त्यते/KP हे/ASMB अर्जुन/NS ,/PUNC सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS फलम्/NP च/APY एव/INTF ।/PUNC एतत्/SN नित्यानाम्/NP कर्मणाम्/NP फलवत्त्वे/NP भगवद्वचनम्/NP प्रमाणम्/NP अवोचाम/KP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC यद्यपि/AVK फलम्/NP न/AN श्रूयते/KP नित्यस्य/NP कर्मणः/NP ,/PUNC तथा/AVK अपि/AVK नित्यम्/NP कर्म/NP कृतम्/KN आत्मसंस्कारम्/NP प्रत्यवायपरिहारम्/NP वा/AVK फलम्/NP करोति/KP आत्मनः/NP इति/AUD कल्पयति/KP एव/INTF अज्ञः/NP ।/PUNC तत्र/A ताम्/SN अपि/AVK कल्पनाम्/NP निवारयति/KP '/PUNC फलम्/NP त्यक्त्वा/KKS '/PUNC इति/AUD अनेन/SN ।/PUNC अतः/AVK साधु/NP उक्तम्/KN '/PUNC सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS फलम्/NP च/APY '/PUNC इति/AUD ।/PUNC सः/SN त्यागः/NP नित्यकर्मसु/NP सङ्गफलपरित्यागः/NP सात्त्विकः/NP सत्त्वनिर्वृत्तः/KN मतः/KN अभिप्रेतः/KN ।।/PUNC ननु/AP कर्मपरित्यागः/NP त्रिविधः/NP संन्यासः/NP इति/AUD च/APY प्रकृतः/NP ।/PUNC तत्र/A तामसः/NP राजसः/NP च/APY उक्तः/KN त्यागः/NP ।/PUNC कथम्/NP इह/A सङ्गफलत्यागः/NP तृतीयत्वेन/SMKY उच्यते/KP ?/PUNC यथा/AVK त्रयः/SMKY ब्राह्मणाः/NP आगताः/KN ,/PUNC तत्र/A षडङ्गविदौ/NP द्वौ/SMKY ,/PUNC क्षत्रियः/NP तृतीयः/SMKY इति/AUD तद्वत्/KN ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP त्यागसामान्येन/NP स्तुत्यर्थत्वात्/NP ।/PUNC अस्ति/KP हि/A कर्मसंन्यासस्य/NP फलाभिसन्धित्यागस्य/NP च/APY त्यागत्वसामान्यम्/NP ।/PUNC तत्र/A राजसतामसत्वेन/NP कर्मत्यागनिन्दया/NP कर्मफलाभिसन्धित्यागः/NP सात्त्विकत्वेन/NP स्तूयते/KP '/PUNC सः/SN त्यागः/NP सात्त्विकः/NP मतः/KN (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 9/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।।/PUNC यः/SN तु/A अधिकृतः/KN सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS फलाभिसन्धिम्/NP च/APY नित्यम्/NP कर्म/NP करोति/KP ,/PUNC तस्य/SN फलरागादिनाम्/NP अकलुषीक्रियमाणम्/NP अन्तःकरणम्/NP नित्यैः/NP च/AVK कर्मभिः/NP संस्क्रियमाणम्/NP विशुध्यति/KP ।/PUNC तत्/SN विशुद्धम्/NP प्रसन्नम्/NP आत्मालोचनक्षमम्/NP भवति/KP ।/PUNC तस्य/SN एव/INTF नित्यकर्मानुष्ठानेन/NP विशुद्धान्तःकरणस्य/NP आत्मज्ञानाभिमुखस्य/NP क्रमेण/NP यथा/AVK तन्निष्ठा/NP स्यात्/KP ,/PUNC तत्/SN वक्तव्यम्/KN इति/AUD आह/KP -/PUNC
न/AN द्वेष्टि/NP अकुशलम्/NV कर्म/NP कुशले/NP न/AN अनुषज्जते/KP ।/PUNC
त्यागी/NP सत्त्वसमाविष्टः/KN मेधावी/NP छिन्नसंशयः/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 10/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN द्वेष्टि/KN अकुशलम्/NP अशोभनम्/NP काम्यम्/NP कर्म/NP ,/PUNC शरीरारम्भद्वारेण/NP संसारकारणम्/NP ,/PUNC '/PUNC किम्/AP अनेन/SN ?/PUNC '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD ।/PUNC कुशले/NP शोभने/NP नित्ये/NP कर्मणि/NP सत्त्वशुद्धिज्ञानोत्पत्तितन्निष्ठाहेतुत्वेन/NP '/PUNC मोक्षकारणम्/NP इदम्/SN '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD न/AN अनुषज्जते/KP अनुषङ्गम्/NP प्रीतिम्/NP न/AN करोति/KP इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC कः/SN पुनः/A असौ/SN ?/PUNC त्यागी/NP पूर्वोक्तेन/KN सङ्गफलत्यागेन/NP तद्वान्/NP त्यागी/NP ,/PUNC यः/SN कर्मणि/NP सङ्गम्/NP त्यक्त्वा/KKS तत्/SN फलम्/NP च/AVK नित्यकर्मानुष्ठायी/NP सः/SN त्यागी/NP ।/PUNC कदा/A पुनः/A असौ/SN अकुशलम्/NV कर्म/NP न/AN द्वेष्टि/KN ,/PUNC कुशले/NP च/APY न/AN अनुषज्जते/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC सत्त्वसमाविष्टः/KN यदा/A सत्त्वे/NP न/AN आत्मानात्मविवेकविज्ञानहेतुना/NP समाविष्टः/KN संव्याप्तः/KN ,/PUNC संयुक्तः/KN इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC अतः/SN एव/INTF च/APY मेधावी/NP मेधया/NP आत्मज्ञानलक्षणया/NP प्रज्ञया/NP संयुक्तः/KN तद्वान्/NP मेधावी/NP ।/PUNC मेधावित्वादेव/NP च्छिन्नसंशयः/NP छिन्नः/NP अविद्याकृतः/KN संशयः/NP यस्य/SN '/PUNC आत्मस्वरूपावस्थानम्/NP एव/INTF परम्/SN निःश्रेयससाधनम्/NP ,/PUNC न/AN अन्यत्/SN किञ्चित्/SN '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD निश्चयेन/NP च्छिन्नसंशयः/NP ।।/PUNC 
यः/SN अधिकृतः/KN पुरुषः/NP पूर्वोक्तेन/KN प्रकारेण/NP कर्मयोगानुष्ठानेन/NP क्रमेण/NP संस्कृतात्मा/NP सन्/KKS जन्मादिविक्रियारहितत्वेन/NP निष्क्रियम्/NP आत्मानम्/NP आत्मत्वेन/NP संबुद्धः/KN ,/PUNC सः/SN '/PUNC सर्वकर्माणि/NP मनसा/NP संन्यस्य/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 13/PUNC )/PUNC  '/PUNC न/AN एव/INTF कुर्वन्/KNV न/AN कारयन्/KNV आसीनः/KP नैष्कर्म्यलक्षणाम्/NP ज्ञाननिष्ठाम्/NP अश्नुते/KP इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC पूर्वोक्तस्य/NP कर्मयोगस्य/NP प्रयोजनम्/NP अनेन/SN एव/INTF श्लोकेन/NP उक्तम्/KN ।।/PUNC 
यः/SN पुनः/A अधिकृतः/KN सन्/KKS देहात्माभिमानित्वेन/NP देहभृत्/KN अज्ञः/NP अबाधितात्मकर्तृत्वविज्ञानतया/NP '/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP '/PUNC इति/AUD निश्चितबुद्धिः/NP तस्य/SN अशेषकर्मपरित्यागस्य/NP अशक्यत्वात्/NP कर्मफलत्यागेन/NP चोदितकर्मानुष्ठाने/NP एव/INTF अधिकारः/NP ,/PUNC न/AN तत्त्यागे/NP इति/AUD एतम्/SN ,/PUNC अर्थम्/NP दर्शयितुम्/KKS आह/KP -/PUNC
न/AN हि/A देहभृता/KN शक्यम्/NP त्यक्तुम्/KKS कर्माणि/NP अशेषतः/NP ।/PUNC
यः/SSN तु/A कर्मफलत्यागी/NP सः/SSN त्यागी/NP इति/AUD अभिधीयते/KP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 11/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN हि/A यस्मात्/SN देहभृता/KN ,/PUNC देहम्/NP बिभर्ति/KP इति/AUD देहभृत्/KN ,/PUNC देहात्माभिमानवान्/NP देहभृत्/KN उच्यते/KP ,/PUNC न/AN विवेकी/NP ;/PUNC सः/SN हि/A '/PUNC वेदाविनाशिनम्/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 21/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिना/NV कर्तृत्वाधिकारात्/NP निवर्तितः/KN ।/PUNC अतः/AVK तेन/SN देहभृता/KN अज्ञेन/NP न/AN शक्यम्/NP त्यक्तुम्/KKS संन्यसितुम्/KKS कर्माणि/NP अशेषतः/NP निःशेषेण/NP ।/PUNC तस्मात्/SN यः/SN तु/A अज्ञः/NP अधिकृतः/KN नित्यानि/NP कर्माणि/NP कुर्वन्/KNV कर्मफलत्यागी/NP कर्मफलाभिसन्धिमात्रसंन्यासी/NP सः/SN त्यागी/NP इति/AUD अभिधीयते/KP कर्मी/NP अपि/AVK सन्/KKS इति/AUD स्तुत्यभिप्रायेण/NP ।/PUNC तस्मात्/SN परमार्थदर्शिना/NP एव/INTF अदेहभृता/KN देहात्मभावरहितेन/NP अशेषकर्मसंन्यासः/NP शक्यते/KP कर्तुम्/KKS ।।/PUNC 
किम्/AP पुनः/A तत्/SN प्रयोजनम्/NP ,/PUNC यत्/SN सर्वकर्मसंन्यासात्/NP स्यात्/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
अनिष्टम्/KN इष्टम्/KN मिश्रम्/NP च/APY त्रिविधम्/NP कर्मणः/NP फलम्/NP ।/PUNC
भवति/KP अत्यागिनाम्/NP प्रेत्य/KKS न/AN तु/A संन्यासिनाम्/NP क्वचित्/A 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 12/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अनिष्टम्/KN नरकतिर्यगादिलक्षणम्/NV ,/PUNC इष्टम्/KN देवादिलक्षणम्/NV ,/PUNC मिश्रम्/NP इष्टानिष्टसंयुक्तम्/KN मनुष्यलक्षणम्/NP च/APY ,/PUNC तत्/SN त्रिविधम्/NP त्रिप्रकारम्/NP कर्मणः/NP धर्माधर्मलक्षणस्य/NP फलम्/NP बाह्यानेककारकव्यापारनिष्पन्नम्/NP सत्/NP अविद्याकृतम्/KN इन्द्रजालमायोपमम्/NP महामोहकरम्/NP प्रत्यगात्मोपसर्पि/NP इव/ASD -/PUNC फल्गुतया/NP लयम्/NP अदर्शनम्/NP गच्छति/KP इति/AUD फलनिर्वचनम्/NP -/PUNC तत्/SN एतत्/SNV एवम्/AUD लक्षणम्/NP फलम्/NP भवति/KP अत्यागिनाम्/NP अज्ञानाम्/NP कर्मिणाम्/NP अपरमार्थसंन्यासिनाम्/NP प्रेत्य/KKS शरीरपातात्/NP ऊर्ध्वम्/A ।/PUNC न/AN तु/A संन्यासिनाम्/NP परमार्थसंन्यासिनाम्/NP परमहंसपरिव्राजकानाम्/NP केवलज्ञाननिष्ठानाम्/NP क्वचित्/A ।/PUNC न/AN हि/A केवलसम्यग्दर्शननिष्ठा/NP  अविद्यादिसंसारबीजम्/NP न/AN उन्मूलयन्ति/KP कदाचित्/A इत्यर्थः/NP ।/PUNC अतः/AVK परमार्थदर्शिनः/NP एव/INTF अशेषकर्मसंन्यासित्वम्/NP संभवति/KP ,/PUNC अविद्याध्यारोपितत्वात्/NP आत्मनि/NP क्रियाकारकफलानाम्/NP ;/PUNC न/AN तु/A अज्ञस्य/NP अधिष्ठानादीनि/NP क्रियाकर्तृकारकाणि/NP आत्मत्वेन/NP एव/INTF पश्यतः/KP अशेषकर्मसंन्यासः/NP संभवति/KP ।।/PUNC तत्/SN एतत्/SNV उत्तरैः/NP श्लोकैः/NP दर्शयति/KP -/PUNC पञ्च/SMKY एतानि/SN महाबाहो/NP कारणानि/NP निबोध/NP मे/SN ।/PUNC
साङ्ख्ये/NP कृतान्ते/KP प्रोक्तानि/KN सिद्धये/NP सर्वकर्मणाम्/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 13/PUNC ।।/PUNC -/PUNC पञ्च/SMKY एतानि/SMKY वक्ष्यमाणानि/NP हे/ASMB महाबाहो/NP ,/PUNC कारणानि/NP निर्वर्तकानि/NP निबोध/NP मे/SN मम/SN इति/AUD ।/PUNC उत्तरत्र/NP चेतः/A  समाधानार्थम्/NP ,/PUNC वस्तुवैषम्यप्रदर्शनार्थम्/NP च/APY ।/PUNC तानि/SN च/APY कारणानि/NP ज्ञातव्य/KN तया/SN  स्तौति/KP -/PUNC सांख्ये/NP ज्ञातव्याः/KN पदार्थाः/NP संख्यायन्ते/KP यस्मिन्/SNV शास्त्रे/NP तत्/SN सांख्यम्/NP वेदान्तः/NP ।/PUNC कृतान्ते/NP इति/AUD तस्य/SN एव/INTF विशेषणम्/NP ।/PUNC कृतम्/KN इति/AUD कर्म/NP उच्यते/KP ,/PUNC तस्य/SN अन्तः/NP परिसमाप्तिः/NP यत्र/A सः/SN कृतान्तः/NP ,/PUNC कर्मान्तः/NP इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC '/PUNC यावान्/NP अर्थः/NP उदपाने/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 46/PUNC )/PUNC '/PUNC सर्वम्/SN कर्म/NP अखिलम्/NV पार्थ/NS ज्ञाने/NP परिसमाप्यते/KP (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ।/PUNC 33/PUNC )/PUNC  '/PUNC इति/AUD आत्मज्ञाने/NP सञ्जाते/KN सर्वकर्मणाम्/NP निवृत्तिम्/KN दर्शयति/KP ।/PUNC अतः/AVK तस्मिन्/SN आत्मज्ञानार्थे/NP सांख्ये/NP कृतान्ते/NP वेदान्ते/NP प्रोक्तानि/KN कथितानि/KP सिद्धये/NP निष्पत्त्यर्थम्/NP सर्वकर्मणाम्/NP ।।/PUNC
कानि/SN तानि/SN इति/AUD ,/PUNC ?/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
अधिष्ठानम्/NP तथा/AVK कर्ता/NP करणम्/NP च/APY पृथग्विधम्/NP ।/PUNC
विविधाः/NP च/APY पृथक्चेष्टाः/NP दैवम्/NP च/APY एव/INTF अत्र/A पञ्चमम्/SMKP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 14/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अधिष्ठानम्/NP इच्छाद्वेषसुखदुःखज्ञानादीनाम्/NP अभिव्यक्तेः/KN आश्रयः/NP अधिष्ठानम्/NP शरीरम्/NP ,/PUNC तथा/AVK कर्ता/NP उपाधिलक्षणः/NP भोक्ता/KN ,/PUNC करणम्/NP च/AVK श्रोत्रादिशब्दाद्युपलब्धये/NP पृथग्विधम्/NP नानाप्रकारम्/NP तत्/SN द्वादशसंख्यम्/SMKY विविधाः/NP च/APY पृथक्चेष्टाः/NP वायवीयाः/NP प्राणापानाद्याः/NP दैवम्/NP च/APY एव/INTF दैवम्/NP एव/INTF च/APY अत्र/A एतेषु/SNV चतुर्षु/SMKY पञ्चमम्/SMKY पञ्चानाम्/NP पूरणम्/NP आदित्यादि/NP चक्षुराद्यनुग्राहकम्/NP ।।/PUNC
शरीरवाङ्मनोभिः/NP यत्/SN कर्म/NP प्रारभते/KP नरः/NP ।/PUNC
न्याय्यम्/NP वा/APY विपरीतम्/NP वा/APY पञ्च/SMKY एते/SN तस्य/SN हेतवः/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 15/PUNC ।।/PUNC -/PUNC शरीरवाङ्मनोभिः/NP यत्/SN कर्म/NP त्रिभिः/SMKY एतैः/SN प्रारभते/KP निर्वर्तयति/KP नरः/NP ,/PUNC न्याय्यम्/NP वा/APY धर्म्यम्/NP शास्त्रीयम्/NP ,/PUNC विपरीतम्/NP वा/APY अशास्त्रीयम्/NP अधर्म्यम्/NP यत्/SN च/APY अपि/APY निमिषित/NP चेष्टितादि/NP जीवनहेतुः/NP तत्/SN अपि/APY पूर्वकृतधर्माधर्मयोः/NP एव/INTF कार्यम्/NP इति/AUD न्याय्यविपरीतयोः/NP एव/INTF ग्रहणेन/NP गृहीतम्/KN ,/PUNC पञ्च/SMKY एते/SN यथोक्ताः/KN तस्य/SN सर्वस्य/SN एव/INTF कर्मणः/NP हेतवः/NP कारणानि/NP ।।/PUNC ननु/AP एतानि/SNV अधिष्ठानादीनि/NP सर्वकर्मणाम्/NP निर्वर्तकानि/KP कथम्/NP उच्यते/KP '/PUNC  शरीरवाङ्मनोभिः/NP यत्/SN कर्म/NP प्रारभते/KP '/PUNC इति/AUD ?/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ;/PUNC विधिप्रतिषेधलक्षणम्/NP सर्वम्/SN कर्म/NP शरीरादित्रयप्रधानम्/NP ;/PUNC तदङ्गतया/NP दर्शनश्रवणादि/NP च/APY जीवनलक्षणम्/NP त्रिधा/SMKY एव/INTF राशीकृतम्/KN उच्यते/KP शरीरादिभिः/NP आरभते/KP इति/AUD ।/PUNC फलकाले/NP अपि/APY तत्/SN प्रधानैः/NV साधनैः/NP भुज्यते/KP इति/AUD पञ्चानाम्/NP एव/INTF हेतुत्वम्/NP न/AN विरुध्यते/KP इति/AUD ।।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD सति/A कर्तारम्/NP आत्मानम्/NP केवलम्/NP तु/A यः/SN ।/PUNC
पश्यति/KP अकृत/KN बुद्धित्वात्न/NP सः/SN पश्यति/KP दुर्मतिः/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 16/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तत्र/A इति/AUD प्रकृतेन/NP संबध्यते/KP ।/PUNC एवम्/AUD सति/A एवम्/AUD यथोक्तैः/NP पञ्चभिः/SMKY हेतुभिः/NP निर्वर्त्ये/NP सति/A कर्मणि/NP ।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD सति/A इति/AUD दुर्मतित्वस्य/NP हेतुत्वेन/NP संबध्यते/KP ।/PUNC तत्र/A एतेषु/SN आत्मानन्यत्वेन/NP अविद्यया/NP परिकल्पितैः/NP क्रियमाणस्य/NP कर्मणः/NP '/PUNC अहम्/SN एव/INTF कर्ता/NP '/PUNC इति/AUD कर्तारम्/NP आत्मानम्/NP केवलम्/NP शुद्धम्/NP तु/A यः/SN पश्यति/KP अविद्वान्/NP ;/PUNC कस्मात्/SN ?/PUNC वेदान्ताचार्योपदेशन्यायैः/NP अकृतबुद्धित्वात्/NP असंस्कृतबुद्धित्वात्/NP ;/PUNC यः/SN अपि/APY देहादिव्यतिरिक्तात्मवादी/NP आत्मानम्/NP एव/INTF केवलम्/NP कर्तारम्/NP पश्यति/KP ,/PUNC असौ/SN अपि/APY अकृतबुद्धिः/NP ;/PUNC अतः/AVK अकृतबुद्धित्वात्/NP न/AN सः/SN पश्यति/KP आत्मनः/NP तत्त्वम्/NP कर्मणः/NP वा/APY इत्यर्थः/NP ।/PUNC अतः/AVK दुर्मतिः/NP ,/PUNC कुत्सिता/KN विपरीता/NP दुष्टा/KN अजस्रम्/NP जननमरणप्रतिपत्तिहेतुभूता/NP मतिः/KN अस्य/SN इति/AUD दुर्मतिः/NP ।/PUNC सः/SN पश्यन्/KNV अपि/APY न/AN पश्यति/KP ,/PUNC यथा/AVK तैमिरिकः/NP अनेकम्/NV चन्द्रम्/NP ,/PUNC यथा/AVK वा/APY अभ्रेषु/NP धावत्सु/NP चन्द्रम्/NP धावन्तम्/KP ,/PUNC यथा/AVK वा/AVK वाहने/NP उपविष्टः/KN अन्येषु/SN धावत्सु/NP आत्मानम्/NP धावन्तम्/KP ।।/PUNC कः/SN पुनः/A सुमतिः/NP यः/SN सम्यक्/NV पश्यति/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
यस्य/SN न/AN अहंकृतः/KN भावः/NP बुद्धिः/NP यस्य/SN न/AN लिप्यते/KP ।/PUNC
हत्वा/KKS अपि/APY सः/SN इमान्लोकान्न/NP हन्ति/KP न/AN निबध्यते/KP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 17/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यस्य/SN शास्त्राचार्योपदेशन्यायसंस्कृतात्मनः/NP न/AN भवति/KP अहंकृतः/KN '/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD लक्षणः/NP भावः/NP भावना/NP प्रत्ययः/NP -/PUNC एते/SN एव/INTF पञ्च/SMKY अधिष्ठानादयः/NP अविद्यया/NP आत्मनि/NP कल्पिताः/KN सर्वकर्मणाम्/NP कर्तारः/NP ,/PUNC न/AN अहम्/SN ,/PUNC अहम्/SN तु/A तद्व्यापाराणाम्/NP साक्षिभूतः/KN '/PUNC अप्राणः/NP हि/A अमनाः/NP शुभ्रः/NP हि/A अक्षरात्परतः/NP परः/NP (/PUNC मु0/NS उ0/NS 2/PUNC ।/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC केवलः/NP अविक्रियः/KKS इति/AUD एवम्/AUD पश्यति/KP इति/AUD तत्/SN -/PUNC बुद्धिः/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN आत्मनः/NP उपाधिभूताः/KN न/AN लिप्यते/KP न/AN अनुशयिनी/NP भवति/KP -/PUNC '/PUNC इदम्/SN अहम्/SN अकार्षम्/NP ,/PUNC तेन/SN अहम्/SN नरकम्/NP गमिष्यामि/KP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD यस्य/SN बुद्धिः/NP न/AN लिप्यते/KP -/PUNC सः/SN सुमतिः/NP ,/PUNC सः/SN पश्यति/KP ।/PUNC हत्वा/KKS अपि/APY सः/SN इमान्/SNV लोकान्/NP ,/PUNC सर्वान्/SN इमान्/SNV प्राणिनः/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC न/AN हन्ति/KP हननक्रियाम्/NP न/AN करोति/KP ,/PUNC न/AN निबध्यते/KP न/AN अपि/APY तत्/SN कार्येण/NP अधर्मफलेन/NP संबध्यते/KP ।।/PUNC
ननु/AP हत्वा/KKS अपि/APY न/A हन्ति/KP इति/AUD विप्रतिषिद्धम्/NP उच्यते/KP यद्यपि/AVK स्तुतिः/KP ।/PUNC न/AN एष/SNV दोषः/NP ,/PUNC लौकिकपारमार्थिकदृष्ट्यपेक्षया/NP तदुपपत्तेः/NP ।/PUNC देहाद्यात्मबुद्ध्या/NP '/PUNC हन्ता/KP अहम्/SN '/PUNC इति/AUD लौकिकीम्/NP दृष्टिम्/KN आश्रित्य/KKS '/PUNC हत्वा/NP अपि/AVK '/PUNC इति/AUD आह/KP ।/PUNC यथा/AVK दर्शिताम्/NP पारमार्थिकीम्/NP दृष्टिम्/KN आश्रित्य/KKS '/PUNC न/AN हन्ति/KKS न/AN निबध्यते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC एतत्/SNV उभयम्/NP उपपद्यते/KP एव/INTF ।।/PUNC
ननु/AP अधिष्ठानादिभिः/NP संभूय/KKS करोति/KP एव/INTF आत्मा/NP ,/PUNC '/PUNC कर्तारम्/NP आत्मानम्/NP केवलम्/NP तु/A (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 16/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD केवलशब्दप्रयोगात्/NP ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ,/PUNC आत्मनः/NP अविक्रिय/KKS स्वभावत्वे/NP अधिष्ठानादिभिः/NP संहतत्वानुपपत्तेः/KN ।/PUNC विक्रियावतः/KN हि/A अन्यैः/SN संहननम्/NP संभवति/KP ,/PUNC संहत्य/KKS वा/AVK कर्तृत्वम्/NP स्यात्/KP ।/PUNC न/AN तु/A अविक्रियस्य/NP आत्मनः/NP केनचित्/SN संहननम्/NP अस्ति/KP इति/AUD न/AN संभूय/KKS कर्तृत्वम्/NP उपपद्यते/KP ।/PUNC अतः/AVK केवलत्वम्/NP आत्मनः/NP स्वाभाविकम्/NP इति/AUD केवलशब्दः/NP अनुवादमात्रम्/NP ।/PUNC अविक्रियत्वम्/NP च/APY आत्मनः/NP श्रुतिस्मृतिन्यायप्रसिद्धम्/KN ।/PUNC '/PUNC अविकार्यः/NP अयम्/SN उच्यते/KP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 25/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC गुणैः/NP एव/INTF कर्माणि/NP क्रियन्ते/KP '/PUNC '/PUNC शरीरस्थः/NP अपि/AVK न/AN करोति/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 31/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/AUD असकृत्/NP उपपादितम्/KN गीतासु/NP एव/INTF तावत्/SN ।/PUNC श्रुतिषु/NP च/AVK ध्यायति/KP इव/ASD लेलायति/KP इव/ASD इति/AUD एवम्/AUD आद्यासु/NP ।/PUNC न्यायतः/NP च/AVK -/PUNC निरवयवम्/NP अपरतन्त्रम्/NP अविक्रियम्/NP आत्मतत्त्वम्/NP इति/AUD राजमार्गः/NP ।/PUNC विक्रियावत्त्वाभ्युपगमे/NP अपि/APY आत्मनः/NP स्वकीया/NP एव/INTF विक्रिया/NP स्वस्य/SN भवितुम्/KKS अर्हति/KP ,/PUNC न/AN अधिष्ठानादीनाम्/NP कर्माणि/NP आत्मकर्तृकाणि/NP स्युः/KP ।/PUNC न/AN हि/A परस्य/SN कर्म/NP परेण/NP अकृतम्/KN आगन्तुम्/KKS अर्हति/KP ।/PUNC यत्/SN तु/A अविद्यया/NP गमितम्/KP ,/PUNC न/AN तत्/SN तस्य/SN ।/PUNC यथा/AVK रजतत्वम्/NP न/AN शुक्तिकायाः/NP ;/PUNC यथा/AVK वा/AVK तलमलिनत्वम्/NP बालैः/NP गमितम्/KP अविद्यया/NP ,/PUNC न/AN आकाशस्य/NP ,/PUNC तथा/AVK अधिष्ठानादिविक्रिया/NP अपि/AVK तेषाम्/SNV एव/INTF ,/PUNC न/AN आत्मनः/NP ।/PUNC तस्मात्/SN युक्तम्/KN उक्तम्/KN '/PUNC अहंकृतत्वबुद्धिलेपाभावात्/NP विद्वान्/NP न/AN हन्ति/KP न/AN निबध्यते/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC '/PUNC न/AN अयम्/SN हन्ति/KP न/AN हन्यते/KP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD प्रतिज्ञाय/NP '/PUNC न/AN जायते/KP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 20/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/AUD हेतुवचनेन/NP अविक्रियत्वम्/NP आत्मनः/NP उक्त्वा/KKS ,/PUNC '/PUNC वेदाविनाशिनम्/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 21/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD विदुषः/NP कर्माधिकारनिवृत्तिम्/NP शास्त्रादौ/NP संक्षेपतः/NP उक्त्वा/KKS ,/PUNC मध्ये/NP प्रसारिताम्/KP तत्र/A तत्र/A प्रसङ्गम्/NP कृत्वा/KKS इह/A उपसंहरति/KP शास्त्रार्थपिण्डीकरणाय/NP विद्वान्/NP न/AN हन्ति/KP न/AN निबध्यते/KP इति/AUD ।/PUNC एवम्/AUD च/AVK सति/A देहभृत्त्वाभिमानानुपपत्तौ/NP अविद्याकृताशेषकर्मसंन्यासोपपत्तेः/NP संन्यासिनाम्/NP अनिष्टादि/NP त्रिविधम्/NP कर्मणः/NP फलम्/NP न/AN भवति/KP इति/AUD उपपन्नम्/NP ;/PUNC तद्विपर्ययात्/NP च/APY इतरेषाम्/NP भवति/KP इति/AUD एतत्/SN च/AVK अपरिहार्यम्/NP इति/AUD एषः/SN गीताशास्त्रार्थः/NP उपसंहृतः/KN ।/PUNC सः/SN एषः/SNV सर्ववेदार्थसारः/NP निपुणमतिभिः/NP पण्डितैः/NP विचार्य/NP प्रतिपत्तव्यः/KN इति/AUD तत्र/A प्रकरणविभागेन/NP दर्शितः/KN अस्माभिः/SN शास्त्रन्यायानुसारेण/NP ।।/PUNC
अथ/AVK इदानीम्/A कर्मणाम्/NP प्रवर्तकम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
ज्ञानम्/NP ज्ञेयम्/NP परिज्ञाता/NP त्रिविधा/NP कर्मचोदना/NP ।/PUNC
करणम्/NP कर्म/NP कर्ता/NP इति/AUD त्रिविधः/NP कर्मसंग्रहः/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 18/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ज्ञानम्/NP ज्ञायते/KP अनेन/SN इति/AUD सर्व/SN विषयम्/NP अविशेषेण/NP उच्यते/KP ।/PUNC तथा/AVK ज्ञेयम्/NP ज्ञातव्यम्/KN ,/PUNC तत्/SN अपि/AVK सामान्येन/NP एव/INTF सर्वम्/SN उच्यते/KP ।/PUNC तथा/AVK परिज्ञाता/NP उपाधिलक्षणः/NP अविद्याकल्पितः/KN भोक्ता/KN ।/PUNC इति/AUD एतत्/SNV त्रयम्/SMKY अविशेषेण/NP सर्वकर्मणाम्/NP प्रवर्तिका/NP त्रिविधा/NP त्रिप्रकारा/NP कर्मचोदना/NP ।/PUNC ज्ञानादीनाम्/NP हि/A त्रयाणाम्/SMKY संनिपाते/NP हानोपादानादिप्रयोजनः/NP सर्वकर्मारम्भः/NP स्यात्/KP ।/PUNC ततः/SN पञ्चभिः/SMKY अधिष्ठानादिभिः/NP आरब्धम्/KN वाङ्मनः/NP कायाश्रयभेदेन/NP त्रिधा/SMKY राशीभूतम्/KN त्रिषु/SMKY करणादिषु/NP संगृह्यते/KP इति/AUD एतत्/SN उच्यते/KP  करणम्/NP क्रियते/KP अनेन/SN इति/AUD बाह्यम्/NP श्रोत्रादि/NP ,/PUNC अन्तःस्थम्/NP बुद्ध्यादि/NP ,/PUNC कर्म/NP ईप्सिततमम्/NV कर्तुः/KP क्रियया/NP व्याप्यमानम्/NP ,/PUNC कर्ता/NP करणानाम्/NP व्यापारयिता/NP उपाधिलक्षणः/NP ,/PUNC इति/AUD त्रिविधः/NP त्रिप्रकारः/NP कर्मसंग्रहः/NP ,/PUNC संगृह्यते/KP अस्मिन्/SN इति/AUD संग्रहः/NP ,/PUNC कर्मणः/NP संग्रहः/NP कर्मसंग्रहः/NP ,/PUNC कर्म/NP एषु/SNV हि/A त्रिषु/SMKY समवैति/KP ,/PUNC तेन/SN अयम्/SN त्रिविधः/NP कर्मसंग्रहः/NP ।।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A क्रियाकारकफलानाम्/NP सर्वेषाम्/SN गुणात्मकत्वात्/NP सत्त्वरजस्तमोगुणभेदतः/NP त्रिविधः/NP भेदः/NP वक्तव्यः/KN इति/AUD आरभ्यते/KP -/PUNC
ज्ञानम्/NP कर्म/NP च/APY कर्ता/NP च/APY त्रिधा/SMKY एव/INTF गुणभेदतः/NP ।/PUNC प्रोच्यते/KP गुणसङ्ख्याने/NP यथावत्/ASD शृणु/KP तानि/SN अपि/AVK
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 19/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ज्ञानम्/NP कर्म/NP च/APY ,/PUNC कर्म/NP क्रिया/NP ,/PUNC न/AN कारकम्/NP पारिभाषिकम्/NP ईप्सिततमम्/NV कर्म/NP ,/PUNC कर्ता/NP च/APY निर्वर्तकः/NP क्रियाणाम्/NP त्रिधा/SMKY एव/INTF ,/PUNC अवधारणम्/NP गुणव्यतिरिक्तजात्यन्तराभावप्रदर्शनार्थम्/NP गुणभेदतः/NP सत्त्वादिभेदेन/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC प्रोच्यते/KP कथ्यते/KP गुणसंख्याने/NP कापिले/NP शास्त्रे/NP तत्/SN अपि/AVK गुणसंख्यानशास्त्रम्/NP गुणभोक्तृविषये/NP प्रमाणम्/NP एव/INTF ।/PUNC परमार्थब्रह्मैकत्वविषये/NP यद्यपि/AVK विरुध्यते/KP ,/PUNC तथा/AVK अपि/AVK ते/SN हि/A कापिलाः/NP गुणगौणव्यापारनिरूपणे/NP अभियुक्ताः/KN इति/AUD तच्छास्त्रम्/NP अपि/AVK वक्ष्यमाणार्थस्तुत्यर्थत्वेन/NP उपादीयते/KP इति/AUD न/AN विरोधः/NP ।/PUNC यथावत्/ASD यथान्यायम्/NP यथाशास्त्रम्/NP शृणु/KP तानि/SN अपि/AVK ज्ञानादीनि/NP तद्भेदजातानि/NP गुणभेदकृतानि/KN शृणु/KP ,/PUNC वक्ष्यमाणे/NP अर्थे/NP मनःसमाधिम्/NP कुरु/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
ज्ञानस्य/NP तु/A तावत्/SN त्रिविधत्वम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
सर्वभूतेषु/SN येन/SN एकम्/NV भावम्/NP अव्ययम्/NP ईक्षते/KP ।/PUNC
अविभक्तम्/NP विभक्तेषु/NP तज्ज्ञानम्/NP विद्धि/NP सात्त्विकम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 20/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वभूतेषु/SN अव्यक्तादिस्थावरान्तेषु/NP भूतेषु/NP येन/SN ज्ञानेन/NP एकम्/NV भावम्/NP वस्तु/NP -/PUNC भावशब्दः/NP वस्तुवाची/NV ,/PUNC एकम्/SMK आत्मवस्तु/NP इत्यर्थः/NP ;/PUNC अव्ययम्/NP न/AN व्येति/KP स्वात्मना/NP स्वधर्मेण/NP वा/AVK ,/PUNC कूटस्थम्/NP इत्यर्थः/NP ;/PUNC ईक्षते/KP पश्यति/KP येन/SN ज्ञानेन/NP ,/PUNC तम्/SN च/AVK भावम्/NP अविभक्तम्/NP प्रतिदेहम्/NP विभक्तेषु/NP देहभेदेषु/NP न/AN विभक्तम्/NP तत्/SN आत्मवस्तु/NP ,/PUNC व्योमवत्/ASD निरन्तरम्/AVK इत्यर्थः/NP ;/PUNC तत्/SN ज्ञानम्/NP साक्षात्/NV सम्यग्दर्शनम्/NP अद्वैतात्मविषयम्/NP सात्त्विकम्/NP विद्धि/NP इति/AUD ।।/PUNC यानि/SN द्वैतदर्शनानि/NP तानि/SN असम्यग्भूतानि/KN राजसानि/NP तामसानि/NP च/APY इति/AUD न/AN साक्षात्/NV संसारोच्छित्तये/NP भवन्ति/KP -/PUNC
पृथक्त्वेन/NP तु/A यज्ज्ञानम्/NP नानाभावान्पृथग्विधान्/NP ।/PUNC
वेत्ति/KP सर्वेषु/SNV भूतेषु/NP तज्ज्ञानम्/NP विद्धि/NP राजसम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 21/PUNC ।।/PUNC -/PUNC पृथक्त्वेन/NP तु/A भेदेन/NP प्रतिशरीरम्/NP अन्यत्वेन/NP यत्/SN ज्ञानम्/NP नानाभावान्/NP भिन्नान्/NP आत्मनः/NP पृथग्विधान्/NP पृथक्प्रकारान्/NP भिन्नलक्षणान्/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC वेत्ति/KP विजानाति/KP यत्/SN ज्ञानम्/NP सर्वेषु/SNV भूतेषु/KN ,/PUNC ज्ञानस्य/NP कर्तृत्वासंभवात्/NP येन/SN ज्ञानेन/NP वेत्ति/KP इत्यर्थः/NP ,/PUNC तत्/SN ज्ञानम्/NP विद्धि/NP राजसम्/NP रजोगुणनिर्वृत्तम्/KN ।।/PUNC 
यत्/SN तु/A कृत्स्नवत्/A एकस्मिन्/SMKY कार्ये/NP सक्तम्/KN अहैतुकम्/NP ।/PUNC
अतत्त्वार्थवत्/A अल्पम्/NV च/APY तत्/SN तामसम्/NP उदाहृतम्/KN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 22/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SN (/PUNC तु/A गी0/NS में/AB )/PUNC ज्ञानम्/NP कृत्स्नवत्/A समस्तवत्/A सर्वविषयम्/NP इव/ASD कस्मिन्/SN कार्ये/NP देहे/NP बहिः/A वा/AVK प्रतिमादौ/NP सक्तम्/KN '/PUNC एतावान्/KN एव/INTF आत्मा/NP ईश्वरो/NP वा/AVK ,/PUNC न/AN अतः/AVK परम्/SN अस्ति/KP '/PUNC इति/AUD ,/PUNC यथा/AVK नग्नक्षपणकादीनाम्/NP शरीरान्तर्वर्ती/NP देहपरिमाणः/NP जीवः/NP ,/PUNC ईश्वरः/NP वा/APY पाषाणदार्वादिमात्रम्/NP ,/PUNC इति/AUD एवम्/AUD कस्मिन्/SN कार्ये/NP सक्तम्/KN ,/PUNC अहैतुकम्/NP हेतुवर्जितम्/NP निर्युक्तिकम्/NP ,/PUNC अतत्त्वार्थवत्/A अयथाभूतार्थवत्/A ,/PUNC यथाभूतः/KN अर्थः/NP तत्त्वार्थः/A ,/PUNC सः/SN अस्य/SN ज्ञेयभूतः/KN अस्ति/KP इति/AUD तत्त्वार्थवत्/A ,/PUNC न/AN तत्त्वार्थवत्/A अतत्त्वार्थवत्/A ;/PUNC अहैतुकत्वात्/NP एव/INTF अल्पम्/NP च/APY ,/PUNC अल्पविषयत्वात्/NP अल्पफलत्वात्/NP वा/AVK ।/PUNC तत्/SN तामसम्/NP उदाहृतम्/KN ।/PUNC तामसानाम्/NP हि/A प्राणिनाम्/NP अविवेकिनाम्/NV ईदृशम्/SNV ज्ञानम्/NP दृश्यते/KP ।।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A कर्मणः/NP त्रैविध्यम्/NP उच्यते/KP -/PUNC
नियतम्/KN सङ्गरहितम्/KN अरागद्वेषतः/NP कृतम्/KN ।/PUNC
अफलप्रेप्सुना/NP कर्म/NP यत्/SSN तत्/SSN सात्त्विकम्/NP उच्यते/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 23/PUNC ।।/PUNC -/PUNC नियतम्/KN नित्यम्/NP सङ्गरहितम्/KN आसक्तिवर्जितम्/KN अरागद्वेषतः/NP कृतम्/KN रागप्रयुक्तेन/NP द्वेषप्रयुक्तेन/NP च/APY कृतम्/KN रागद्वेषतः/NP कृतम्/KN ,/PUNC तद्विपरीतम्/NP अरागद्वेषतः/NP कृतम्/KN ,/PUNC अफलप्रेप्सुना/NP फलम्/NP प्रेप्सति/KP इति/AUD फलप्रेप्सुः/NP फलतृष्णः/NP तद्विपरीतेन/NP अफलप्रेप्सुना/NP कर्त्रा/NP कृतम्/KN कर्म/NP यत्/SSN ,/PUNC तत्/SSN सात्त्विकम्/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 
यत्/SN तु/A कामेप्सुना/NP कर्म/NP साहङ्कारेण/NP वा/AVK पुनः/A ।/PUNC
क्रियते/KP बहुलायासम्/NP तत्र/A राजसम्/NP उदाहृतम्/KN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 24/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SN तु/A कामेप्सुना/NP कर्मफलप्रेप्सुना/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC कर्म/NP साहंकारेण/NP (/PUNC '/PUNC वा/NS '/PUNC गी0/NS )/PUNC इति/AUD न/AN तत्त्वज्ञानापेक्षया/NP ।/PUNC किम्/AP तर्हि/AVK ?/PUNC लौकिकश्रोत्रियनिरहंकारापेक्षया/NP ।/PUNC यः/SN हि/A परमार्थनिरहंकारः/NP आत्मवित्/A ,/PUNC न/AN तस्य/SN कामेप्सुत्वबहुलायासकर्तृत्वप्राप्तिः/NP अस्ति/KP ।/PUNC सात्त्विकस्य/NP अपि/AVK कर्मणः/NP अनात्मवित्/A साहंकारः/NP कर्ता/NP ,/PUNC किमुत/AP राजसतामसयोः/NP  ।/PUNC लोके/NP अनात्मवित्/A अपि/AVK श्रोत्रियः/NP निरहंकारः/NP उच्यते/KP  '/PUNC निरहंकारः/NP अयम्/SN ब्राह्मणः/NP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC तस्मात्/SN तदपेक्षया/NP एव/INTF  '/PUNC साहंकारेण/NP वा/AVK '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC पुनः/A शब्दः/NP पादपूरणार्थः/NP ।/PUNC क्रियते/KP बहुलायासम्/NP कर्त्रा/NP महता/NV आयासेन/NP निर्वर्त्यते/KP ,/PUNC तत्/SN कर्म/NP राजसम्/NP उदाहृतम्/KN ।।/PUNC 
अनुबन्धम्/NP क्षयम्/NP हिंसाम्/NP अनवेक्ष्य/KKS च/APY पौरुषम्/NP ।/PUNC
मोहादारभ्यते कर्म यत्/SSN तत्/SSN तामसम्/NP उच्यते/KP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 25/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अनुबन्धम्/NP पश्चाद्भावि/NP यत्/SN वस्तु/NP सः/SN अनुबन्धः/NP उच्यते/KP तम्/SN च/APY अनुबन्धम्/NP ,/PUNC क्षयम्/NP यस्मिन्/SN कर्मणि/NP क्रियमाणे/NP शक्तिक्षयः/NP अर्थक्षयः/NP वा/APY स्यात्/KP तम्/SN क्षयम्/NP ,/PUNC हिंसाम्/NP प्राणिबाधाम्/NP च/APY ;/PUNC अनपेक्ष्य/NP च/AVK पौरुषम्/NP पुरुषकारम्/NP '/PUNC शक्नोमि/KP इदम्/SN कर्म/NP समापयितुम्/KKS '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD आत्मसामर्थ्यम्/NP ,/PUNC इति/AUD एतानि/SNV अनुबन्धादीनि/NP अनपेक्ष्य/NP पौरुषान्तानि/NP मोहात्/NV अविवेकतः/NP आरभ्यते/KP कर्म/NP यत्/SSN ,/PUNC तत्/SSN तामसम्/NP तमोनिर्वृत्तम्/KN उच्यते/KP ।।/PUNC
इदानीम्/A कर्तृभेदः/NP उच्यते/KP -/PUNC
मुक्तसङ्गः/NP अनहंवादी/NP धृत्युत्साहसमन्वितः/NP ।/PUNC
सिद्ध्यसिद्ध्योः/NP निर्विकारः/NP कर्ता/NP सात्त्विक/NP उच्यते/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 26/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मुक्तसङ्गः/NP मुक्तः/KN परित्यक्तः/KN सङ्गः/NP येन/SN सः/SN मुक्तसङ्गः/NP ,/PUNC अनहंवादी/NP न/AN अहंवदनशीलः/NP ,/PUNC धृत्युत्साहसमन्वितः/NP धृतिः/KN धारणम्/NP उत्साहः/NP उद्यमः/NP ताभ्याम्/SN समन्वितः/KN संयुक्तः/KN धृत्युत्साहसमन्वितः/NP ,/PUNC सिद्ध्यसिद्ध्योः/NP क्रियमाणस्य/NP कर्मणः/NP फलसिद्धौ/NP असिद्धौ/NP च/APY सिद्ध्यसिद्ध्योः/NP निर्विकारः/NV ,/PUNC केवलम्/NP शास्त्रप्रमाणेन/NP प्रयुक्तः/KN न/AN फलरागादिना/NP यः/SSN सः/SSN निर्विकारः/NP उच्यते/KP ।/PUNC एवम्/AUD भूतः/KN कर्ता/NP यः/SN सः/SN सात्त्विकः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC
रागी/NP कर्मफलप्रेप्सुः/NP लुब्धः/KN हिंसात्मकः/NP अशुचिः/NP ।/PUNC
हर्षशोकान्वितः/NP कर्ता/NP राजसः/NP परिकीर्तितः/KN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 27/PUNC ।।/PUNC -/PUNC रागी/NP रागः/NP अस्य/SN अस्ति/KP इति/AUD रागी/NP ,/PUNC कर्मफलप्रेप्सुः/NP कर्मफलार्थी/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC लुब्धः/KN परद्रव्येषु/NP संजाततृष्णः/NP ,/PUNC तीर्थादौ/NP च/AVK स्वद्रव्यापरित्यागी/NP वा/AVK ,/PUNC हिंसात्मकः/NP परपीडाकरस्वभावः/NP ,/PUNC अशुचिः/NP बाह्याभ्यन्तरशौचवर्जितः/NP ,/PUNC हर्षशोकान्वितः/NP इष्टप्राप्तौ/KN हर्षः/NP अनिष्टप्राप्तौ/KN इष्टवियोगे/NP च/APY शोकः/NP ताभ्याम्/SN हर्षशोकाभ्याम्/NP अन्वितः/KN संयुक्तः/KN ,/PUNC तस्य/SN एव/INTF च/AVK कर्मणः/NP संपत्तिविपत्तिभ्याम्/NP हर्षशोकौ/NP स्याताम्/KP ,/PUNC ताभ्याम्/SN संयुक्तः/KN यः/SN कर्ता/NP सः/SN राजसः/NP परिकीर्तितः/KN ।।/PUNC
अयुक्तः/KN प्राकृतः/NP स्तब्धः/NP शठः/NP नैष्कृतिकः/NP अलसः/NP ।/PUNC
विषादी/NP दीर्घसूत्री/NP च/APY कर्ता/NP तामसः/NP उच्यते/KP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 28/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अयुक्तः/KN न/AN युक्तः/KN असमाहितः/KN ,/PUNC प्राकृतः/NP अत्यन्तासंस्कृतबुद्धिः/NP बालसमः/NP ,/PUNC स्तब्धः/KN दण्डवत्/KV न/AN नमति/KP कस्मैचित्/SN ,/PUNC शठः/NP मायावी/NP शक्तिगूहनकारी/NP ,/PUNC नैष्कृतिकः/NP परविभेदनपरः/NP ,/PUNC अलसः/NP अप्रवृत्तिशीलः/NP कर्तव्येषु/KN अपि/AVK ,/PUNC विषादी/NP विषादवान्/KN सर्वदा/A अवसन्नस्वभावः/NP ,/PUNC दीर्घसूत्री/NP च/APY कर्तव्यानाम्/NP दीर्घप्रसारणः/NP ,/PUNC सर्वदा/A मन्दस्वभावः/NP ,/PUNC यत्/SN अद्य/A श्वः/A वा/AVK कर्तव्यम्/KN तत्/SN मासेन/NP अपि/APY न/AN करोति/KP ,/PUNC यः/SN च/APY एवम्/AUD भूतः/KN ,/PUNC सः/SN कर्ता/NP तामसः/NP उच्यते/KP ।।/PUNC 
बुद्धेः/NP भेदम्/NP धृतेः/NP च/APY एव/INTF गुणतः/NP त्रिविधम्/NP शृणु/KP ।/PUNC
प्रोच्यमानम्/NP अशेषेण/NP पृथक्त्वेन/NP धनञ्जय/NS 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 29/PUNC ।।/PUNC -/PUNC बुद्धेः/NP भेदम्/NP धृतेः/NP च/APY एव/INTF भेदम्/NP गुणतः/NP सत्त्वादिगुणतः/NP त्रिविधम्/NP शृणु/KP इति/AUD सूत्रोपन्यासः/NP ।/PUNC प्रोच्यमानम्/NP कथ्यमानम्/NP अशेषेण/NP निरवशेषतः/NP यथावत्/ASD पृथक्त्वेन/NP विवेकतः/NP धनञ्जय/NS ,/PUNC दिग्विजये/NP मानुषम्/NP दैवम्/NP च/APY प्रभूतम्/KN धनम्/NP जितवान्/KN ,/PUNC तेन/SN असौ/SN धनञ्जयः/NV अर्जुनः/NS  ।।/PUNC
प्रवृत्तिम्/NP च/APY निवृत्तिम्/NP च/APY कार्याकार्ये/NP भयाभये/NP ।/PUNC
बन्धम्/NP मोक्षम्/NP च/APY या/SN वेत्ति/KP बुद्धिः/NP सा/SN पार्थ/NS सात्त्विकी/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 30/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 30/PUNC ।।/PUNC -/PUNC प्रवृत्तिम्/NP च/APY प्रवृत्तिः/NP प्रवर्तनम्/NP बन्धहेतुः/NP कर्ममार्गः/NP शास्त्रविहितविषयः/NP ,/PUNC निवृत्तिम्/NP च/APY निर्वृत्तिः/NP मोक्षहेतुः/NP संन्यासमार्गः/NP -/PUNC बन्धमोक्षसमानवाक्यत्वात्/NP प्रवृत्तिनिवृत्ती/NP कर्मसंन्यासमार्गौ/NP इति/AUD अवगम्यते/KP -/PUNC कार्याकार्ये/NP विहितप्रतिषिद्धे/NP लौकिके/NP वैदिके/NP वा/APY शास्त्रबुद्धेः/NP कर्तव्याकर्तव्ये/KN करणाकरणे/NP इति/AUD एतत्/SN ;/PUNC कस्य/SN ?/PUNC देशकालाद्यपेक्षया/NP दृष्टादृष्टार्थानाम्/NP कर्मणाम्/NP ।/PUNC भयाभये/NP बिभेति/KP अस्मात्/SN इति/AUD भयम्/NP चोरव्याघ्रादि/NP ,/PUNC न/AN भयम्/NP अभयम्/NP ,/PUNC भयम्/NP च/APY अभयम्/NP च/APY भयाभये/NP ,/PUNC दृष्टादृष्टविषययोः/NP भयाभययोः/NP कारणे/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC बन्धम्/NP सहेतुकम्/NP मोक्षम्/NP च/APY सहेतुकम्/NP या/SN वेत्ति/KP विजानाति/KP बुद्धिः/NP ,/PUNC सा/SN पार्थ/NS सात्त्विकी/NP ।/PUNC तत्र/A ज्ञानम्/NP बुद्धेः/NP वृत्तिः/KN ;/PUNC बुद्धिः/NP तु/A वृत्तिमती/KN ।/PUNC धृतिः/NP अपि/APY वृत्तिविशेषः/NP एव/INTF बुद्धेः/NP ।।/PUNC 
यया/SN धर्मम्/NP अधर्मम्/NP च/APY कार्यम्/NP च/APY अकार्यम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC
अयथावत्/ASD प्रजानाति/NP बुद्धिः/NP सा/SN पार्थ/NS राजसी/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 31/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 31/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यया/SN धर्मम्/NP शास्त्रचोदितम्/NP अधर्मम्/NP च/APY तत्प्रतिषिद्धम्/NP कार्यम्/NP च/APY अकार्यम्/NP एव/INTF च/APY पूर्वोक्ते/KN एव/INTF कार्याकार्ये/NP अयथावत्/ASD न/AN यथावत्/ASD सर्वतः/A निर्णयेन/NP न/AN प्रजानाति/NP ,/PUNC बुद्धिः/NP सा/SN पार्थ/NS ,/PUNC राजसी/NP ।।/PUNC
अधर्मम्/NP धर्मम्/NP इति/AUD या/SN मन्यते/KP तमसा/NP आवृता/KN ।/PUNC
सर्वार्थान्विपरीतान्/NP च/APY बुद्धिः/NP सा/SN पार्थ/NS तामसी/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 32/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 32/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अधर्मम्/NP प्रतिषिद्धम्/NP धर्मम्/NP विहितम्/KN इति/AUD या/SN मन्यते/KP जानाति/KP तमसा/NP आवृता/KN सती/KKS ,/PUNC सर्वार्थान्/SN सर्वान्/SN एव/INTF ज्ञेयपदार्थान्/NP विपरीतान्/NP च/APY विपरीतान्/NP एव/INTF विजानाति/KP ,/PUNC बुद्धिः/NP सा/SN पार्थ/NS ,/PUNC तामसी/NP ।।/PUNC 
धृत्या/NP यया/SN धारयते/KP मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः/NP ।/PUNC
योगेन/NP अव्यभिचारिण्या/NP धृतिः/NP सा/SN पार्थ/NS सात्त्विकी/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 33/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 33/PUNC ।।/PUNC -/PUNC धृत्या/KKS यया/SN -/PUNC अव्यभिचारिण्या/NP इति/AUD व्यवहितेन/NP संबन्धः/NP ,/PUNC धारयते/KP ;/PUNC किम्/AP ?/PUNC मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः/NP मनः/NP च/APY प्राणाः/NP च/APY इन्द्रियाणि/NP च/APY मनःप्राणेन्द्रियाणि/NP ,/PUNC तेषाम्/SN क्रियाः/NP चेष्टाः/NP ,/PUNC ताः/SN उच्छास्त्रमार्गप्रवृत्तेः/KN धारयते/KP धारयति/KP -/PUNC धृत्या/KKS हि/A धार्यमाणाः/NP उच्छास्त्रमार्गविषयाः/NP न/AN भवन्ति/KP -/PUNC योगेन/NP समाधिना/NP ,/PUNC अव्यभिचारिण्या/NP ,/PUNC नित्यसमाध्यनुगतया/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC तत्/SN उक्तम्/KN भवति/KP -/PUNC अव्यभिचारिण्या/NP धृत्या/KKS मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः/NP धार्यमाणाः/NP योगेन/NP धारयति/KP इति/AUD ।/PUNC या/SSN एवम्/AUD लक्षणा/NP धृतिः/NP ,/PUNC सा/SSN पार्थ/NS ,/PUNC सात्त्विकी/NP ।।/PUNC
यया/SN तु/A धर्मकामार्थान्/NP धृत्या/KKS धारयते/KP अर्जुन/NS ।/PUNC
प्रसङ्गेन/NP फलाकाङ्क्षी/NP धृतिः/NP सा/SN पार्थ/NS राजसी/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 34/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 34/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यया/SN तु/A धर्मकामार्थान्/NP धर्मः/NP च/APY कामः/NP च/APY अर्थः/NP च/APY धर्मकामार्थाः/NP तान्/SN धर्मकामार्थान्/NP धृत्या/KKS यया/SN धारयते/KP मनसि/NP नित्यम्/NP एव/INTF कर्तव्यरूपान्/NP अवधारयति/KP हे/ASMB अर्जुन/NS ,/PUNC प्रसङ्गेन/NP यस्य/SN यस्य/DV धर्मादेः/NP धारणप्रसङ्गः/NP तेन/SN तेन/DV प्रसङ्गेन/NP फलाकाङ्क्षी/NP च/APY भवति/KP यः/SNV पुरुषः/NP ,/PUNC तस्य/SN धृतिः/NP या/SSN ,/PUNC सा/SSN पार्थ/NS ,/PUNC राजसी/NP ।।/PUNC
यया/SN स्वप्नम्/NP भयम्/NP शोकम्/NP विषादम्/NP मदम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC
न/AN विमुञ्चति/KP दुर्मेधाः/NP धृतिः/NP सा/SN पार्थ/NS तामसी/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 35/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 35/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यया/SN स्वप्नम्/NP निद्राम्/NP भयम्/NP त्रासम्/NP शोकम्/NP विषादम्/NP विषण्णताम्/KP मदम्/NP विषयसेवाम्/NP आत्मनः/NP बहुमन्यमानः/NP मत्तः/KN इव/ASD मदम्/NP एव/INTF च/APY मनसि/NP नित्यम्/NP एव/INTF कर्तव्यरूपतया/NP कुर्वन्/KNV न/AN विमुञ्चति/KP धारयति/KP एव/INTF दुर्मेधाः/NP कुत्सितमेधाः/NP पुरुषः/NP यः/SN ,/PUNC तस्य/SN धृतिः/NP या/SSN ,/PUNC सा/SSN तामसी/NP मता/KN ।।/PUNC गुणभेदेन/NP क्रियाणाम्/NP कारकाणाम्/NP च/APY त्रिविधः/NP भेदः/NP उक्तः/KN ।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A फलस्य/NP सुखस्य/NP त्रिविधः/NP भेदः/NP उच्यते/KP -/PUNC सुखम्/NP तु/A इदानीम्/A त्रिविधम्/NP शृणु/KP मे/SN भरतर्षभ/NP ।/PUNC
अभ्यासात्रमते/NP यत्र/A दुःखान्तम्/NP च/APY निगच्छति/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 36/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 36/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सुखम्/NP तु/A इदानीम्/A त्रिविधम्/NP शृणु/KP ,/PUNC समाधानम्/NP कुरु/KP इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC मे/SN मम/SN भरतर्षभ/NP ।/PUNC अभ्यासात्/NP परिचयात्/NP आवृत्तेः/KN रमते/KP रतिम्/NP प्रतिपद्यते/KP यत्र/A यस्मिन्/SN सुखानुभवे/NP दुःखान्तम्/NP च/APY दुःखावसानम्/NP दुःखोपशमम्/NP च/APY निगच्छति/KP निश्चयेन/NP प्राप्नोति/KP ।।/PUNC
यत्/SSN तत्/SSN अग्रे/A विषम्/NP इव/ASD परिणामे/NP अमृतोपमम्/NV ।/PUNC
तत्/SN सुखम्/NP सात्त्विकम्/NP प्रोक्तम्/KN आत्मबुद्धिप्रसादजम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 37/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 37/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SSN तत्/SSN सुखम्/NP अग्रे/A पूर्वम्/SN प्रथमसंनिपाते/NP ज्ञानवैराग्यध्यानसमाध्यारम्भे/NP अत्यन्तायासपूर्वकत्वात्/NP विषम्/NP इव/ASD दुःखात्मकम्/NP भवति/KP ,/PUNC परिणामे/NP ज्ञानवैराग्यादिपरिपाकजम्/NP सुखम्/NP अमृतोपमम्/NV ,/PUNC तत्/SN सुखम्/NP सात्त्विकम्/NP प्रोक्तम्/KN विद्वद्भिः/NP ,/PUNC आत्मनः/NP बुद्धिः/NP आत्मबुद्धिः/NP ,/PUNC आत्मबुद्धेः/NP प्रसादः/NP नैर्मल्यम्/NP सलिलस्य/NP इव/ASD स्वच्छता/NP ,/PUNC ततः/SN जातम्/KN आत्मबुद्धिप्रसादजम्/NP ।/PUNC आत्मविषया/NP वा/AVK आत्मावलम्बना/NP वा/AVK बुद्धिः/NP आत्मबुद्धिः/NP ,/PUNC तत्/SN प्रसादप्रकर्षात्वा/NP जातम्/KN इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC तस्मात्/SN सात्त्विकम्/NP तत्/SN ।।/PUNC
विषयेन्द्रियसंयोगात्/NP यत्/SSN तत्/SSN अग्रे/A अमृतोपमम्/NP ।/PUNC
परिणामे/NP विषम्/NV इव/ASD तत्/SN सुखम्/NP राजसम्/NP स्मृतम्/KN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 38/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 38/PUNC ।।/PUNC -/PUNC विषयेन्द्रियसंयोगात्/NP जायते/KP यत्/SSN सुखम्/NP तत्/SSN सुखम्/NP अग्रे/A प्रथमक्षणे/NP अमृतोपमम्/NP अमृतसमम्/NP ,/PUNC परिणामे/NP विषम्/NV इव/ASD ,/PUNC बलवीर्यरूपप्रज्ञामेधाधनोत्साहहानिहेतुत्वात्/NP अधर्मतज्जनितनरकादिहेतुत्वात्/NP च/AVK परिणामे/NP तदुपभोगपरिणामान्ते/NP विषम्/NV इव/ASD ,/PUNC तत्/SN सुखम्/NP राजसम्/NP स्मृतम्/KN ।।/PUNC 
यत्/SN अग्रे/A च/APY अनुबन्धे/NP च/APY स/NP मोहनम्/NP आत्मनः/NP ।/PUNC
निद्रालस्यप्रमादोत्थम्/NP तत्/SN तामसम्/NP उदाहृतम्/KN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 39/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 39/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्/SN अग्रे/A च/APY अनुबन्धे/NP च/APY अवसानोत्तरकाले/NP च/APY सुखम्/NP मोहनम्/NP मोहकरम्/NP आत्मनः/NP निद्रालस्यप्रमादोत्थम्/NP निद्रा/NP च/APY आलस्यम्/NP च/APY प्रमादः/NP च/APY तेभ्यः/SN समुत्तिष्ठति/KP इति/AUD निद्रालस्यप्रमादोत्थम्/NP ,/PUNC तत्/SN तामसम्/NP उदाहृतम्/KN ।।/PUNC
अथ/AVK इदानीम्/A प्रकरणोपसंहारार्थः/NP श्लोकः/NP आरभ्यते/KP -/PUNC
न/AN तत्/SN अस्ति/KP पृथिव्याम्/NP वा/APY दिवि/NP देवेषु/NP वा/APY पुनः/A ।/PUNC
सत्त्वम्/NP प्रकृतिजैः/NP मुक्तम्/KN यत्/SN एभिः/SNV स्यात्/KP त्रिभिः/SMKY गुणैः/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 40/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 40/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN तत्/SN अस्ति/KP तत्/SN न/AN अस्ति/KP पृथिव्याम्/NP वा/APY मनुष्यादिषु/NP सत्त्वम्/NP प्राणिजातम्/NP अन्यत्वा/KKS अप्राणि/NP ,/PUNC दिवि/NP देवेषु/NP वा/APY पुनः/A सत्त्वम्/NP ,/PUNC प्रकृतिजैः/NP प्रकृतितः/NP जातैः/KN एभिः/SNV त्रिभिः/SMKY गुणैः/NP सत्त्वादिभिः/NP मुक्तम्/KN परित्यक्तम्/KN यत्/SN स्यात्/KP ,/PUNC न/AN तत्/SN अस्ति/KP इति/AUD पूर्वेण/NP संबन्धः/NP ।।/PUNC सर्वः/SNV संसारः/NP क्रियाकारकफललक्षणः/NP सत्त्वरजस्तमोगुणात्मकः/NP अविद्यापरिकल्पितः/NP समूलः/NP अनर्थः/NP उक्तः/KN ,/PUNC वृक्षरूपकल्पनया/NP च/APY '/PUNC ऊर्ध्वमूलम्/NP (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादिना/AUD ,/PUNC '/PUNC तम्/SN च/APY असङ्गशस्त्रेण/NP दृढेन/NV च्छित्त्वा/KKS (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC ततः/SN पदम्/NP तत्/SN परिमार्गितव्यम्/KN (/PUNC गीता/NS 15/PUNC ।/PUNC 4/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK उक्तम्/KN ।/PUNC तत्र/A च/AVK सर्वस्य/SN त्रिगुणात्मकत्वात्/NP संसारकारणनिवृत्त्यनुपपत्तौ/NP प्राप्तायाम्/NP ,/PUNC यथा/AVK तन्निवृत्तिः/NP स्यात्/KP तथा/AVK वक्तव्यम्/KN ,/PUNC सर्वः/SN च/APY गीताशास्त्रार्थः/NP उपसंहर्तव्यः/KN ,/PUNC तावान्/SN एव/INTF च/AVK सर्ववेदस्मृत्यर्थः/NP पुरुषार्थम्/NP इच्छद्भिः/NP अनुष्ठेयः/KKS इति/AUD एवम्/AUD अर्थम्/NP '/PUNC ब्राह्मणक्षत्रियविशाम्/NP '/PUNC इत्यादिः/AUD आरभ्यते/KP -/PUNC
ब्राह्मणक्षत्रियविशाम्/NP शूद्राणाम्/NP च/APY परंतप/NP ।/PUNC
कर्माणि/NP प्रविभक्तानि/KN स्वभावप्रभवैः/NP गुणैः/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 41/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 41/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ब्राह्मणाः/NP च/APY क्षत्रियाः/NP च/APY विशः/NP च/APY ब्राह्मणक्षत्रियविशः/NP ,/PUNC तेषाम्/SN ब्राह्मणक्षत्रियविशाम्/NP शूद्राणाम्/NP च/APY -/PUNC शूद्राणाम्/NP असमासकरणम्/NP एकजातित्वे/NP सति/A वेदानधिकारात्/NP -/PUNC हे/ASMB परंतप/NP ,/PUNC कर्माणि/NP प्रविभक्तानि/KN इतरेतरविभागेन/NP व्यवस्थापितानि/KP ।/PUNC केन/SN ?/PUNC स्वभावप्रभवैः/NP गुणैः/NP ,/PUNC स्वभावः/NP ईश्वरस्य/NP प्रकृतिः/NP त्रिगुणात्मिका/NP माया/NP सा/SN प्रभवः/NP येषाम्/SNV गुणानाम्/NP ते/SN स्वभावप्रभवाः/NP ,/PUNC तैः/SN ,/PUNC शमादीनि/NP कर्माणि/NP प्रविभक्तानि/KN ब्राह्मणादीनाम्/NP ।/PUNC अथवा/AVK ब्राह्मणस्वभावस्य/NP सत्त्वगुणः/NP प्रभवः/NP कारणम्/NP ,/PUNC तथा/AVK क्षत्रियस्वभावस्य/NP सत्त्वोपसर्जनम्/NP रजः/NP प्रभवः/NP ,/PUNC वैश्यस्वभावस्य/NP तमउपसर्जनम्/NP रजः/NP प्रभवः/NP ,/PUNC शूद्रस्वभावस्य/NP रजउपसर्जनम्/NP तमः/NP प्रभवः/NP ,/PUNC प्रशान्त्यैश्वर्येहामूढतास्वभावदर्शनात्/NP चतुर्णाम्/NP ।/PUNC अथवा/AVK ,/PUNC जन्मान्तरकृतसंस्कारः/NP प्राणिनाम्/NP वर्तमानजन्मनि/NP स्वकार्याभिमुखत्वेन/NP अभिव्यक्तः/KN स्वभावः/NP ,/PUNC सः/SN प्रभवः/NP येषाम्/SNV गुणानाम्/NP ते/SN स्वभावप्रभवाः/NP गुणाः/NP ;/PUNC गुणप्रादुर्भावस्य/NP निष्कारणत्वानुपपत्तेः/NP ।/PUNC '/PUNC स्वभावः/NP कारणम्/NP '/PUNC इति/AUD च/APY कारणविशेषोपादानम्/NP ।/PUNC एवम्/AUD स्वभावप्रभवैः/NP प्रकृतिभवैः/NP सत्त्वरजस्तमोभिः/NP गुणैः/NP स्वकार्यानुरूपेण/NP शमादीनि/NP कर्माणि/NP प्रविभक्तानि/KN ।।/PUNC ननु/AP शास्त्रप्रविभक्तानि/KN शास्त्रेण/NP विहितानि/KN ब्राह्मणादीनाम्/NP शमादीनि/NP कर्माणि/NP ;/PUNC कथम्/NP उच्यते/KP सत्त्वादिगुणप्रविभक्तानि/KN इति/AUD ?/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ;/PUNC शास्त्रेण/NP अपि/AVK ब्राह्मणादीनाम्/NP सत्त्वादिगुणविशेषापेक्षया/NP एव/INTF शमादीनि/NP कर्माणि/NP प्रविभक्तानि/KN ,/PUNC न/AN गुणानपेक्षया/NP ,/PUNC इति/AUD शास्त्रप्रविभक्तानि/KN अपि/AVK कर्माणि/NP गुण/NP प्रविभक्तानि/KN इति/AUD उच्यते/KP ।।/PUNC
कानि/SN पुनः/A तानि/SN कर्माणि/NP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC
शमः/NP दमः/NP तपः/NP शौचम्/NP क्षान्तिः/NP आर्जवम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC
ज्ञानम्/NP विज्ञानम्/NP आस्तिक्यम्/NP ब्रह्मकर्म/NP स्वभावजम्/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 42/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 42/PUNC ।।/PUNC -/PUNC शमः/NP दमः/NP च/APY यथाव्याख्यातार्थौ/NP ,/PUNC तपः/NP यथोक्तम्/KN शारीरादि/NP ,/PUNC शौचम्/NP व्याख्यातम्/NP ,/PUNC क्षान्तिः/NP क्षमा/NP ,/PUNC आर्जवम्/NP ऋजुता/NP एव/INTF च/APY ज्ञानम्/NP विज्ञानम्/NP ,/PUNC आस्तिक्यम्/NP आस्तिकभावः/NP श्रद्दधानता/NP आगमार्थेषु/NP ,/PUNC ब्रह्मकर्म/NP ब्राह्मणजातेः/NP कर्म/NP स्वभावजम्/NP -/PUNC यत्/SN उक्तम्/KN स्वभावप्रभवैः/NP गुणैः/NP प्रविभक्तानि/KN इति/AUD तत्/SN एव/INTF उक्तम्/KN स्वभावजम्/NP इति/AUD ।।/PUNC
शौर्यम्/NP तेजः/NP धृतिः/NP दाक्ष्यम्/NP युद्धे/NP च/APY अपि/APY अपलायनम्/NP ।/PUNC
दानम्/NP ईश्वरभावः/NP च/APY क्षात्रम्/NP कर्म/NP स्वभावजम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 43/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 43/PUNC ।।/PUNC -/PUNC शौर्यम्/NP शूरस्य/NP भावः/NP ,/PUNC तेजः/NP प्रागल्भ्यम्/NP ,/PUNC धृतिः/NP धारणम्/NP ,/PUNC सर्वावस्थासु/NP अनवसादः/NP भवति/KP यया/SN धृत्या/KKS उत्तम्भितस्य/NP ,/PUNC दाक्ष्यम्/NP दक्षस्य/NP भावः/NP ,/PUNC सहसा/NV प्रत्युत्पन्नेषु/NP कार्येषु/NP अव्यामोहेन/NP प्रवृत्तिः/KN ,/PUNC युद्धे/NP च/APY अपि/AVK अपलायनम्/NP अपराङ्मुखीभावः/NP शत्रुभ्यः/NP ,/PUNC दानम्/NP देयद्रव्येषु/NP मुक्तहस्तता/NP ,/PUNC ईश्वरभावः/NP च/APY ईश्वरस्य/NP भावः/NP ,/PUNC प्रभुशक्तिप्रकटीकरणम्/NP ईशितव्यान्/KN प्रति/AUP ,/PUNC क्षात्रम्/NP कर्म/NP क्षत्रियजातेः/NP विहितम्/KN कर्म/NP क्षात्रम्/NP कर्म/NP स्वभावजम्/NP ।।/PUNC
कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यम्/NP वैश्यकर्म/NP स्वभावजम्/NP ।/PUNC
परिचर्यात्मकम्/NP कर्म/NP शूद्रस्य/NP अपि/AVK स्वभावजम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 44/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 44/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यम्/NP कृषिः/NP च/APY गौरक्ष्यम्/NP च/APY वाणिज्यम्/NP च/APY कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यम्/NP ,/PUNC कृषिः/NP भूमेः/NP विलेखनम्/KP ,/PUNC गौरक्ष्यम्/NP गाः/NP रक्षति/KP इति/AUD गोरक्षः/NP तस्य/SN भावः/NP गौरक्ष्यम्/NP ,/PUNC पाशुपाल्यम्/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC वाणिज्यम्/NP वणिक्कर्म/NP क्रयविक्रयादिलक्षणम्/NP वैश्यकर्म/NP वैश्यजातेः/NP कर्म/NP वैश्यकर्म/NP स्वभावजम्/NP ।/PUNC परिचर्यात्मकम्/NP शुश्रूषास्वभावम्/NP कर्म/NP शूद्रस्य/NP अपि/AVK स्वभावजम् ।।/PUNC तेषाम्/SNV जातिविहितानाम्/NP कर्मणाम्/NP सम्यगनुष्ठितानाम्/NP स्वर्गप्राप्तिः/NP फलम्/NP स्वभावतः/KN ,/PUNC '/PUNC वर्णाः/NP आश्रमाः/NP च/APY स्वकर्मनिष्ठाः/NP प्रेत्य/KKS कर्मफलम्/NP अनुभूय/KKS ततः/A शेषेण/NP विशिष्टदेशजातिकुलधर्मायुःश्रुतवृत्तवित्तसुखमेधसः/NP जन्म/NP प्रतिपद्यन्ते/KP '/PUNC इत्यादि/AUD स्मृतिभ्यः/NP (/PUNC आ/NS ./PUNC स्मृ/NS ./PUNC 2/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC ;/PUNC पुराणे/NP च/APY वर्णिनाम्/NP आश्रमिणाम्/NP च/APY लोकफलभेदविशेषस्मरणात्/NP ।/PUNC कारणान्तरात्/NP तु/A इदम्/SN वक्ष्यमाणम्/NP फलम्/NP -/PUNC
स्वे/SNV स्वे/DV कर्मणि/NP अभिरतः/KN संसिद्धिम्/NP लभते/KP नरः/NP ।/PUNC
स्वकर्मनिरतः/NP सिद्धिम्/NP यथा/AVK विन्दति/KP तत्/SN शृणु/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 45/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 45/PUNC ।।/PUNC -/PUNC स्वे/SNV स्वे/DV यथोक्तलक्षणभेदे/NP कर्मणि/NP अभिरतः/KN तत्परः/NP संसिद्धिम्/NP स्वकर्मानुष्ठानात्/NP अशुद्धिक्षये/NP सति/A कायेन्द्रियाणाम्/NP ज्ञाननिष्ठायोग्यतालक्षणाम्/NP संसिद्धिम्/NP लभते/KP प्राप्नोति/KP नरः/NP अधिकृतः/KN पुरुषः/NP ;/PUNC किम्/AP स्वकर्मानुष्ठानतः/NP एव/INTF साक्षात्/NV संसिद्धिः/NP ?/PUNC न/AN ;/PUNC कथम्/NP तर्हि/AVK ?/PUNC स्वकर्मनिरतः/NP सिद्धिम्/NP यथा/AVK येन/SN प्रकारेण/NP विन्दति/KP ,/PUNC तत्/SN शृणु/KP ।।/PUNC
यतः/A प्रवृत्तिः/KN भूतानाम्/NP येन/SN सर्वम्/SNV इदम्/SN ततम्/SN ।/PUNC स्वकर्मणा/NP तम्/SN अभ्यर्च्य/NP सिद्धिम्/NP विन्दति/KP मानवः/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 46/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 46/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यतः/A यस्मात्/SN प्रवृत्तिः/KN उत्पत्तिः/KN चेष्टा/NP वा/APY यस्मात्/SN अन्तर्यामिणः/NP ईश्वरात्/NP भूतानाम्/NP प्राणिनाम्/NP स्यात्/KP ,/PUNC येन/SN ईश्वरेण/NP सर्वम्/SNV इदम्/SN ततम्/SN जगत्/NP व्याप्तम्/KN स्वकर्मणा/NP पूर्वोक्तेन/KN प्रतिवर्णम्/NP तम्/SN ईश्वरम्/NP अभ्यर्च्य/NP पूजयित्वा/KKS आराध्य/KKS केवलम्/NP ज्ञाननिष्ठायोग्यतालक्षणाम्/NP सिद्धिम्/NP विन्दति/KP मानवः/NP मनुष्यः/NP ।।/PUNC यतः/A एवम्/AUD ,/PUNC अतः/AVK -/PUNC
श्रेयान्स्वधर्मः/NP विगुणः/NP परधर्मात्स्वनुष्ठितात्/NP ।/PUNC
स्वभावनियतम्/NP कर्म/NP कुर्वन्/KNV न/AN आप्नोति/KP किल्बिषम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 47/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 47/PUNC ।।/PUNC -/PUNC श्रेयान्/NP प्रशस्यतरः/NP स्वः/SNV धर्मः/NP स्वधर्मः/NP ,/PUNC विगुणः/NP अपि/APY इति/AUD अपिशब्दः/NP द्रष्टव्यः/KN ,/PUNC परधर्मात्/NP ।/PUNC स्वभावनियतम्/NP स्वभावेन/NP नियतम्/KN ,/PUNC यत्/SN उक्तम्/KN स्वभावजम्/NP इति/AUD ,/PUNC तत्/SN एव/INTF उक्तम्/KN स्वभावनियतम्/NP इति/AUD ;/PUNC यथा/AVK विषजातस्य/NP कृमेः/NP विषम्/NP न/AN दोषकरम्/NP ,/PUNC तथा/AVK स्वभावनियतम्/NP कर्म/NP कुर्वन्/KNV न/AN आप्नोति/KP किल्बिषम्/NP पापम्/NP ।।/PUNC स्वभावनियतम्/NP कर्म/NP कुर्वाणः/KP विषजः/NP इव/ASD कृमिः/NP किल्बिषम्/NP न/AN आप्नोति/KP इति/AUD उक्तम्/KN ;/PUNC परधर्मः/NP च/APY भयावहः/NP इति/AUD ,/PUNC अनात्मज्ञः/NP च/APY '/PUNC न/AN हि/A कश्चित्/SN क्षणम्/NP अपि/APY अकर्मकृत्/KN तिष्ठति/KP (/PUNC गीता/NS 3/PUNC ।/PUNC 5/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC अतः/AVK -/PUNC सहजम्/NP कर्म/NP कौन्तेय/NP सदोषम्/NP अपि/AVK न/AN त्यजेत्/KP ।/PUNC सर्वारम्भाः/NP हि/A दोषेण/NP धूमेन/NP अग्निः/NP इव/ASD आवृताः/KN ।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 48/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 48/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सहजम्/NP सह/AUP जन्मना/NP एव/INTF उत्पन्नम्/NP ।/PUNC किम्/AP तत्/SN ?/PUNC कर्म/NP कौन्तेय/NP सदोषम्/NP अपि/AVK त्रिगुणात्मकत्वात्/NP न/AN त्यजेत्/KP ।/PUNC सर्वारम्भाः/NP आरभ्यन्ते/KP इति/AUD आरम्भाः/NP ,/PUNC सर्वकर्माणि/NP इति/AUD एतत्/SN ;/PUNC प्रकरणात्/NP ये/SN केचित्/SN आरम्भाः/NP स्वधर्माः/NP परधर्माः/NP च/APY ,/PUNC ते/SN सर्वे/SN हि/A यस्मात्/SN -/PUNC त्रिगुणात्मकत्वम्/NP अत्र/A हेतुः/NP -/PUNC त्रिगुणात्मकत्वात्/NP दोषेण/NP धूमेन/NP सहजेन/NP अग्निः/NP इव/ASD ,/PUNC आवृताः/KN ।/PUNC सहजस्य/NP कर्मणः/NP स्वधर्माख्यस्य/NP परित्यागेन/NP परधर्मानुष्ठाने/NP अपि/AVK दोषात्/NP न/AN एव/INTF मुच्यते/KP ;/PUNC भयावहः/NP च/APY परधर्मः/NP ।/PUNC न/AN च/APY शक्यते/KP अशेषतः/NP त्यक्तुम्/KN अज्ञेन/NP कर्म/NP यतः/A ,/PUNC तस्मात्/SNV न/AN त्यजेत्/KP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC किम्/AP अशेषतः/NP त्यक्तुम्/KN अशक्यम्/NP कर्म/NP इति/AUD न/AN त्यजेत्/KP ?/PUNC किम्/AP वा/AVK सहजस्य/NP कर्मणः/NP त्यागे/NP दोषः/NP भवति/KP इति/AUD ?/PUNC किञ्च/SN अतः/AVK ?/PUNC यदि/AVK तावत्/SN अशेषतः/NP त्यक्तुम्/KN अशक्यम्/NP इति/AUD न/AN त्याज्यम्/NP सहजम्/NP कर्म/NP ,/PUNC एवम्/AUD तर्हि/AVK अशेषतः/NP त्यागे/NP गुणः/NP एव/INTF स्यात्/KP इति/AUD सिद्धम्/NP भवति/KP ।/PUNC सत्यम्/NP एवम्/AUD ;/PUNC अशेषतः/NP त्यागः/NP एव/INTF न/AN उपपद्यते/KP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC किम्/AP नित्यप्रचलितात्मकः/NP पुरुषः/NP ,/PUNC यथा/AVK सांख्यानाम्/NP गुणाः/NP ?/PUNC किम्/AP वा/AVK क्रिया/NP एव/INTF कारकम्/NP ,/PUNC यथा/AVK बौद्धानाम्/NP स्कन्धाः/NP क्षणप्रध्वंसिनः/NP ?/PUNC उभयथा/NP अपि/AVK कर्मणः/NP अशेषतः/NP त्यागः/NP न/AN संभवति/KP ।/PUNC अथ/AVK तृतीयः/SMKY अपि/AVK पक्षः/NP -/PUNC यदा/A करोति/KP तदा/A सक्रियम्/NP वस्तु/NP ।/PUNC यदा/A न/AN करोति/KP ,/PUNC तदा/A निष्क्रियम्/NP तत्/SN एव/INTF ।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD सति/A शक्यम्/NP कर्म/NP अशेषतः/NP त्यक्तुम्/KN ।/PUNC अयम्/SN तु/A अस्मिन्/SNV तृतीये/NV पक्षे/NP विशेषः/NP -/PUNC न/AN नित्य/NP प्रचलितम्/KN वस्तु/NP ,/PUNC न/AN अपि/AVK क्रिया/NP एव/INTF कारकम्/NP ।/PUNC किम्/AP तर्हि/AVK ?/PUNC व्यवस्थिते/KN द्रव्ये/NP अविद्यमाना/NP क्रिया/NP उत्पद्यते/KP ,/PUNC विद्यमाना/NP च/AVK विनश्यति/KP ।/PUNC शुद्धम्/NP तत्/SN द्रव्यम्/NP शक्तिमत्/KN अवतिष्ठते/KP ।/PUNC इति/AUD एवम्/AUD आहुः/KP काणादाः/NP ।/PUNC तत्/SN एव/INTF च/APY कारकम्/NP इति/AUD ।/PUNC अस्मिन्/SNV पक्षे/NP कः/SNV दोषः/NP इति/AUD ।/PUNC अयम्/SN एव/INTF तु/A दोषः/NP -/PUNC यतः/A तु/A अभागवतम्/NV मतम्/NP इदम्/SN ।/PUNC कथम्/NP ज्ञायते/KP ?/PUNC यतः/A आह/KP भगवान्/NP '/PUNC न/AN असतः/NP विद्यते/KP भावः/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 16/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/AUD ।/PUNC काणादानाम्/NP हि/A असतः/NP भावः/NP ,/PUNC सतः/NP च/APY अभावः/NP ,/PUNC इति/AUD इदम्/SNV मतम्/NP अभागवतम्/KN ।/PUNC अभागवतम्/KN अपि/AVK न्यायवत्/A चेत्/AVK कः/SNV दोषः/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC दोषवत्/KN तु/A इदम्/SN ,/PUNC सर्वप्रमाणविरोधात्/NP ।/PUNC कथम्/NP ?/PUNC यदि/AVK तावत्/SN द्व्यणुकादि/NP द्रव्यम्/NP प्राक्/A उत्पत्तेः/KP अत्यन्तम्/NV एव/INTF असत्/NP ,/PUNC उत्पन्नम्/NP च/AVK स्थितम्/KN कञ्चित्/SN कालम्/NP पुनः/A अत्यन्तम्/NV एव/INTF असत्त्वम्/NP आपद्यते/KP ,/PUNC तथा/AVK च/AVK सति/A असत्/NP एव/INTF सत्/NP जायते/KP ,/PUNC सत्/NP एव/INTF असत्त्वम्/NP ,/PUNC आपद्यते/KP ,/PUNC अभावः/NP भावः/NP भवति/KP ,/PUNC भावः/NP च/APY अभावः/NP भवति/KP ;/PUNC तत्र/A अभावः/NP जायमानः/KN प्राक्/A उत्पत्तेः/NP शशविषाणकल्पः/NP समवाय्यसमवायिनिमित्ताख्यम्/NP कारणम्/NP अपेक्ष्य/NP जायते/KP इति/AUD ।/PUNC न/AN च/APY एवम्/AUD ,/PUNC अभावः/NP उत्पद्यते/KP ,/PUNC कारणम्/NP च/APY अपेक्षते/KP इति/AUD  शक्यम्/NP वक्तुम्/KN ,/PUNC असताम्/KP शशविषाणादीनाम्/NP अदर्शनात्/NP ।/PUNC भावात्मकाः/NP चेत्/AVK घटादयः/NP उत्पद्यमानाः/KN ,/PUNC किञ्चित्/SN अभिव्यक्तिमात्रे/NP कारणम्/NP अपेक्ष्य/NP उत्पद्यन्ते/KP इति/AUD शक्यम्/NP प्रतिपत्तुम्/KKS ।/PUNC किञ्च/SN ,/PUNC असतः/NP च/APY सतः/NP च/APY सद्भावे/NP असद्भावे/NP न/AN क्वचित्/SN प्रमाणप्रमेयव्यवहारेषु/NP विश्वासः/NP कस्यचित्/SN स्यात्/KP ,/PUNC '/PUNC सत्/NP सत्/DV एव/INTF असत्/NP असत्/DV एव/INTF '/PUNC इति/AUD निश्चयानुपपत्तेः/NP ।।/PUNC किञ्च/SN ,/PUNC उत्पद्यते/KP इति/AUD द्व्यणुकादेः/NP द्रव्यस्य/NP स्वकारणसत्तासंबन्धम्/NP आहुः/KP ।/PUNC प्राक्/A उत्पत्तेः/KN च/APY असत्/NP ,/PUNC पश्चात्/A कारणव्यापारम्/NP अपेक्ष्य/NP स्वकारणैः/NP परमाणुभिः/NP सत्तया/NP च/APY समवायलक्षणेन/NP संबन्धेन/NP संबध्यते/KP ।/PUNC संबद्धम्/KN सत्/NP कारणसमवेतम्/NP सत्/NP भवति/KP ।/PUNC तत्र/A वक्तव्यम्/KN कथम्/KN असतः/NP स्वम्/SNV कारणम्/NP भवेत्/NP संबन्धः/NP वा/AVK केनचित्/SN स्यात्/KP ?/PUNC न/AN हि/A वन्ध्यापुत्रस्य/NP स्वम्/SNV कारणम्/NP संबन्धः/NP वा/AVK केनचित्/SN प्रमाणतः/NP कल्पयितुम्/KKS शक्यते/KP ।।/PUNC ननु/AP न/AN एवम्/AUD वैशेषिकैः/NP अभावस्य/NP संबन्धः/NP कल्प्यते/KP ।/PUNC द्व्यणुकादीनाम्/NP हि/A द्रव्याणाम्/NP स्वकारणसमवायलक्षणः/NP संबन्धः/NP सताम्/NP एव/INTF उच्यते/KP इति/AUD ।/PUNC न/AN ;/PUNC संबन्धात्/NP प्राक्/A सत्त्वानभ्युपगमात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A वैशेषिकैः/NP कुलालदण्डचक्रादिव्यापारात्/NP प्राक्/A घटादीनाम्/NP अस्तित्वम्/NP इष्यते/KP ।/PUNC न/AN च/APY मृदः/KN एव/INTF घटाद्याकारप्राप्तिम्/NP इच्छन्ति/KP ।/PUNC ततः/A च/APY असतः/NP एव/INTF संबन्धः/NP पारिशेष्यात्/NP इष्टः/KN भवति/KP ।।/PUNC ननु/AP असतः/NP अपि/APY समवायलक्षणः/NP संबन्धः/NP न/AN विरुद्धः/NP ।/PUNC न/AN ;/PUNC वन्ध्यापुत्रादीनाम्/NP अदर्शनात्/NP ।/PUNC घटादेः/NP एव/INTF प्रागभावस्य/NP स्वकारणसंबन्धः/NP भवति/KP न/AN वन्ध्यापुत्रादेः/NP ,/PUNC अभावस्य/NP तुल्यत्वे/NP अपि/AVK इति/AUD विशेषः/NP अभावस्य/NP वक्तव्यः/KN ।/PUNC कस्य/SN अभावः/NP ,/PUNC द्वयोः/SMKY अभावः/NP ,/PUNC सर्वस्य/SN अभावः/NP ,/PUNC प्रागभावः/NP ,/PUNC प्रध्वंसाभावः/NP ,/PUNC इतरेतराभावः/NP ,/PUNC अत्यन्ताभावः/NP इति/AUD लक्षणतः/NP न/AN केनचित्/SN विशेषः/NP दर्शयितुम्/KKS शक्यः/KP ।/PUNC असति/NP च/APY विशेषे/NP घटस्य/NP प्रागभावः/NP एव/INTF कुलालादिभिः/NP घटभावम्/NP आपद्यते/KP संबध्यते/KP च/APY भावेन/NP कपालाख्येन/NP ,/PUNC संबद्धः/NP च/APY सर्वव्यवहारयोग्यः/NP च/APY भवति/KP ,/PUNC न/AN तु/A घटस्य/NP एव/INTF प्रध्वंसाभावः/NP अभावत्वे/NP सत्यपि/NP ,/PUNC इति/AUD प्रध्वंसाद्यभावानाम्/NP न/AN क्वचित्/SN व्यवहारयोग्यत्वम्/NP ,/PUNC प्रागभावस्य/NP एव/INTF द्व्यणुकादिद्रव्याख्यस्य/NP उत्पत्त्यादिव्यवहारार्हत्वम्/NP ,/PUNC इति/AUD एतत्/SN असमञ्जसम्/NP ;/PUNC अभावत्वाविशेषात्/NP अत्यन्तप्रध्वंसाभावयोः/NP इव/ASD ।।/PUNC ननु/AP न/AN एव/INTF अस्माभिः/SN प्रागभावस्य/NP भावापत्तिः/NP उच्यते/KP ।/PUNC भावस्य/NP एव/INTF तर्हि/AVK भावापत्तिः/NP ;/PUNC यथा/AVK घटस्य/NP घटापत्तिः/KN ,/PUNC पटस्य/NP वा/APY पटापत्तिः/KN ।/PUNC तत्/SN अपि/AVK अभावस्य/NP भावापत्तिवत्/ASD एव/INTF प्रमाणविरुद्धम्/NP ।/PUNC सांख्यस्य/NP अपि/AVK यः/SSN परिणामपक्षः/NP सः/SSN अपि/AVK अपूर्वधर्मोत्पत्तिविनाशाङ्गीकरणात्/NP वैशेषिकपक्षात्/NP न/AN विशिष्यते/KP ।/PUNC अभिव्यक्तितिरोभावाङ्गीकरणे/NP अपि/AVK अभिव्यक्तितिरोभावयोः/NP विद्यमानत्वाविद्यमानत्वनिरूपणे/NP पूर्ववत्/ASD एव/INTF प्रमाणविरोधः/NP ।/PUNC तेन/SN कारणस्य/NP एव/INTF संस्थानम्/NP उत्पत्त्यादि/NP इति/AUD एतत्/SN अपि/AVK प्रत्युक्तम्/KN ।।/PUNC पारिशेष्यात्/NP सत्/SN एकम्/SMK एव/INTF वस्तु/NP अविद्यया/NP उत्पत्तिविनाशादिधर्मैः/NP अनेकधा/SN नटवत्/ASD विकल्प्यते/KP इति/AUD ।/PUNC इदम्/SN भागवतम्/NP मतम्/NP उक्तम्/KN '/PUNC न/AN असतः/NP विद्यते/KP भावः/NP (/PUNC गीता/NS 3/PUNC ।/PUNC 16/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD अस्मिन्/SN श्लोके/NP ,/PUNC सत्प्रत्ययस्य/NP अव्यभिचारात्/NP ,/PUNC व्यभिचारात्/NP च/APY इतरेषाम्/NP इति/AUD ।।/PUNC कथम्/NP तर्हि/AVK आत्मनः/NP अविक्रियत्वे/NP अशेषतः/NP कर्मणः/NP त्यागः/NP न/AN उपपद्यते/KP इति/AUD ?/PUNC यदि/AVK वस्तुभूताः/KN गुणाः/NP ,/PUNC यदि/AVK वा/AVK अविद्याकल्पिताः/KN ,/PUNC तद्धर्मः/NP कर्म/NP ,/PUNC तदा/AVK आत्मनि/NP अविद्याध्यारोपितम्/KN एव/INTF इति/AUD अविद्वान्/NP '/PUNC न/AN हि/A कश्चित्/SN क्षणम्/NP अपि/AVK अशेषतः/NP त्यक्तुम्/KN शक्नोति/KP '/PUNC इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC विद्वान्/NP तु/A पुनः/A विद्यया/NP अविद्यायाम्/NP निवृत्तायाम्/NP शक्नोति/KP एव/INTF अशेषतः/NP कर्म/NP परित्यक्तुम्/KKS ,/PUNC अविद्याध्यारोपितस्य/NP शेषानुपपत्तेः/NP ।/PUNC न/AN हि/A तैमिरिकदृष्ट्या/KKS अध्यारोपितस्य/NP द्विचन्द्रादेः/NP तिमिरापगमे/NP अपि/AVK शेषः/NP अवतिष्ठते/KP ।/PUNC एवम्/AUD च/AVK सति/A इदम्/SN वचनम्/NP उपपन्नम्/KN '/PUNC सर्वकर्माणि/NP मनसा/NP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 13/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/AUD ,/PUNC '/PUNC स्वे/SNV स्वे/DV कर्मणि/NP अभिरतः/NP संसिद्धिम्/NP लभते/KP नरः/NP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 45/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC स्वकर्मणा/NP तम्/SN अभ्यर्च्य/NP सिद्धिम्/NP विन्दति/KP मानवः/NP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 46/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/APY ।।/PUNC
या/SN कर्मजा/NP सिद्धिः/NP उक्ता/KN ज्ञाननिष्ठायोग्यतालक्षणा/NP ,/PUNC तस्याः/SN फलभूता/KN नैष्कर्म्यसिद्धिः/NP ज्ञाननिष्ठालक्षणा/NP च/APY वक्तव्या/KN इति/AUD श्लोकः/NP आरभ्यते/KP -/PUNC असक्तबुद्धिः/NP सर्वत्र/SN जितात्मा/NP विगतस्पृहः/NP ।/PUNC नैष्कर्म्यसिद्धिम्/NP परमाम्/SN संन्यासेन/NP अधिगच्छति/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 49/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 49/PUNC ।।/PUNC -/PUNC असक्तबुद्धिः/NP असक्ता/KN सङ्गरहिता/KN बुद्धिः/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN सः/SN असक्तबुद्धिः/NP सर्वत्र/A पुत्रदारादिषु/NP आसक्तिनिमित्तेषु/NP ,/PUNC जितात्मा/NP जितः/KN वशीकृतः/KN आत्मा/NP अन्तःकरणम्/NP यस्य/SN सः/SN जितात्मा/NP ,/PUNC विगतस्पृहः/NP विगता/KN स्पृहा/NP तृष्णा/NP देहजीवितभोगेषु/NP यस्मात्/SN सः/SN विगतस्पृहः/NP ,/PUNC यः/SSN एवंभूतः/KN आत्मज्ञः/NP सः/SSN नैष्कर्म्यसिद्धिम्/NP निर्गतानि/KN कर्माणि/NP यस्मात्/SNV निष्क्रियब्रह्मात्मसंबोधात्/NP सः/SN निष्कर्मा/NP तस्य/SN भावः/NP नैष्कर्म्यम्/NP ,/PUNC नैष्कर्म्यम्/NP च/APY तत्/SN सिद्धिः/NP च/APY सा/SN नैष्कर्म्यसिद्धिः/NP ,/PUNC निष्कर्मत्वस्य/NP वा/AVK निष्क्रियात्मरूपावस्थानलक्षणस्य/NP सिद्धिः/NP निष्पत्तिः/KN ,/PUNC ताम्/SN नैष्कर्म्यसिद्धिम्/NP परमाम्/SNV प्रकृष्टाम्/KN कर्मजसिद्धिविलक्षणाम्/NP सद्योमुक्त्यवस्थानरूपाम्/NP संन्यासेन/NP सम्यग्दर्शनेन/NP तत्पूर्वकेण/NP वा/AVK सर्वकर्मसंन्यासेन/NP अधिगच्छति/KP प्राप्नोति/KP ।/PUNC तथा/AVK च/AVK उक्तम्/KN -/PUNC '/PUNC सर्वकर्माणि/NP मनसा/NP संन्यस्य/NP न/AN एव/INTF कुर्वन्/KNV न/AN कारयन्/KNV आस्ते/KP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 13/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।।/PUNC
पूर्वोक्तेन/KN स्वकर्मानुष्ठानेन/NP ईश्वराभ्यर्चनरूपेण/NP जनिताम्/KP प्रागुक्तलक्षणाम्/NP सिद्धिम्/NP प्राप्तस्य/NP उत्पन्नात्मविवेकज्ञानस्य/NP केवलात्मज्ञाननिष्ठारूपा/NP नैष्कर्म्यलक्षणा/NP सिद्धिः/NP येन/SN क्रमेण/NP भवति/KP ,/PUNC तत्/SN वक्तव्यम्/KN इति/AUD आह/KP -/PUNC 
सिद्धिम्/NP प्राप्तः/KN यथा/AVK ब्रह्म/NP तथा/AVK आप्नोति/KP निबोध/NP मे/SN ।/PUNC
समासेन/NP एव/INTF कौन्तेय/NP निष्ठा/NP ज्ञानस्य/NP या/SN परा/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 50/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 50/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सिद्धिम्/NP प्राप्तः/KN स्वकर्मणा/NP ईश्वरम्/NP समभ्यर्च्य/NP तत्/SN प्रसादजाम्/NP कायेन्द्रियाणाम्/NP ज्ञाननिष्ठायोग्यतालक्षणाम्/NP सिद्धिम्/NP प्राप्तः/KN -/PUNC सिद्धिम्/NP प्राप्तः/KN इति/AUD तदनुवादः/NP उत्तरार्थः/NP ।/PUNC किम्/AP तत्/SN उत्तरम्/NP ,/PUNC यदर्थः/NP अनुवादः/NP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC यथा/AVK येन/SN प्रकारेण/NP ज्ञाननिष्ठारूपेण/NP ब्रह्म/NP परमात्मानम्/NP आप्नोति/KP ,/PUNC तथा/AVK तम्/SN प्रकारम्/NP ज्ञाननिष्ठाप्राप्तिक्रमम्/NP मे/SN मम/SN वचनात्/NP निबोध/NP त्वम्/SN निश्चयेन/NP अवधारय/KKS इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC किम्/AP विस्तरेण/NP ?/PUNC न/AN इति/AUD आह/KP -/PUNC समासेन/NP एव/INTF संक्षेपेण/NP एव/INTF हे/ASMB कौन्तेय/NP ,/PUNC यथा/AVK ब्रह्म/NP प्राप्नोति/KP तथा/AVK निबोध/NP इति/AUD ।/PUNC अनेन/SN या/SN प्रतिज्ञाता/NP ब्रह्मप्राप्तिः/KN ,/PUNC ताम्/SN इदम्/SN तया/SN दर्शयितुम्/KKS आह/KP -/PUNC निष्ठा/NP ज्ञानस्य/NP या/SN परा/NP इति/AUD ।/PUNC निष्ठा/NP पर्यवसानम्/NP परिसमाप्तिः/KN इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC कस्य/SN ?/PUNC ब्रह्मज्ञानस्य/NP या/SN परा/NP ।/PUNC कीदृशी/SNV सा/SN ?/PUNC यादृशम्/SNV आत्मज्ञानम्/NP ।/PUNC कीदृक्/SNV तत्/SN ?/PUNC यादृशः/SNV आत्मा/NP ।/PUNC कीदृशः/SNV सः/SN ?/PUNC यादृशः/SNV भगवता/NP उक्तः/KN ,/PUNC उपनिषद्वाक्यैः/NP च/APY न्यायतः/NP च/APY ।।/PUNC ननु/AP विषयाकारम्/NP ज्ञानम्/NP ।/PUNC न/AN ज्ञानविषयः/NP ,/PUNC न/AN अपि/APY आकारवान्/KN आत्मा/NP इष्यते/KP क्वचित्/SN ।/PUNC ननु/AP  '/PUNC आदित्यवर्णम्/NP '/PUNC '/PUNC भारूपः/NP '/PUNC '/PUNC स्वयंज्योतिः/NP '/PUNC इति/AUD आकारवत्त्वम्/NP आत्मनः/NP श्रूयते/KP ।/PUNC न/AN ;/PUNC तमोरूपत्वप्रतिषेधार्थत्वात्/NP तेषाम्/SNV वाक्यानाम्/NP -/PUNC द्रव्यगुणाद्याकारप्रतिषेधे/NP आत्मनः/NP तमोरूपत्वे/NP  प्राप्ते/KN तत्/SN प्रतिषेधार्थानि/NP '/PUNC आदित्यवर्णम्/NP (/PUNC गीता/NS 8/PUNC ।/PUNC 9/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादीनि/NV वाक्यानि/NP ।/PUNC '/PUNC  अरूपम्/NP '/PUNC इति/AUD च/AVK विशेषतः/NP रूपप्रतिषेधात्/NP ।/PUNC अविषयत्वात्/NP च/APY -/PUNC '/PUNC न/AN संदृशे/NP तिष्ठति/KP रूपम्/NP अस्य/SN न/AN चक्षुषा/NP पश्यति/KP कश्चन/SN एनम्/SN (/PUNC श्वे0/NS उ0/NS 4/PUNC ।/PUNC 20/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC अशब्दम्/NP अस्पर्शम्/NP (/PUNC क0/NS उ0/NS 1/PUNC ।/PUNC 3/PUNC ।/PUNC 15/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादैः/AUD ।/PUNC तस्मात्/SN आत्माकारम्/NV ज्ञानम्/NP इति/AUD अनुपपन्नम्/NP ।।/PUNC कथम्/NP तर्हि/AVK आत्मनः/NP ज्ञानम्/NP ?/PUNC सर्वम्/SN हि/A यद्विषयम्/NP यत्/SN ज्ञानम्/NP ,/PUNC तत्/SN तदाकारम्/NP भवति/KP ।/PUNC निराकारः/NP च/APY आत्मा/NP इति/AUD उक्तम्/KN ।/PUNC ज्ञानात्मनोः/NP च/APY उभयोः/NP निराकारत्वे/NP कथम्/NP तद्भावनानिष्ठा/NP इति/AUD ?/PUNC न/AN ;/PUNC अत्यन्तनिर्मलत्वातिस्वच्छत्वातिसूक्ष्मत्वोपपत्तेः/NP आत्मनः/NP ।/PUNC बुद्धेः/NP च/APY आत्मवत्/ASD नैर्मल्याद्युपपत्तेः/NP आत्मचैतन्याकाराभासत्वोपपत्तिः/NP ।/PUNC बुद्ध्याभासम्/NP मनः/NP ,/PUNC तदाभासानि/NP इन्द्रियाणि/NP ,/PUNC इन्द्रियाभासः/NP च/APY देहः/NP ।/PUNC अतः/AVK लौकिकैः/NP देहमात्रे/NP एव/INTF आत्मदृष्टिः/KN क्रियते/KP ।।/PUNC देहचैतन्यवादिनः/NP च/APY लोकायतिकाः/NP '/PUNC चैतन्यविशिष्टः/NV कायः/NP पुरुषः/NP  '/PUNC इति/AUD आहुः/KP ।/PUNC तथा/AVK अन्ये/SN इन्द्रियचैतन्यवादिनः/NP ,/PUNC अन्ये/SN मनश्चैतन्यवादिनः/NP ,/PUNC अन्ये/SN बुद्धिचैतन्यवादिनः/NP ।/PUNC ततः/AVK अपि/AVK आन्तरम्/NP अव्यक्तम्/KN अव्याकृताख्यम्/NP अविद्यावस्थम्/NP आत्मत्वेन/NP प्रतिपन्नाः/NP केचित्/SN ।/PUNC सर्वत्र/A बुद्ध्यादिदेहान्ते/NP आत्मचैतन्याभासता/NP आत्मभ्रान्तिकारणम्/NP इति/AUD अतः/AVK च/AVK आत्मविषयम्/NP ज्ञानम्/NP न/AN विधातव्यम्/KN ।/PUNC किम्/AP तर्हि/AVK ?/PUNC नामरूपाद्यनात्माध्यारोपणनिवृत्तिः/NP एव/INTF कार्या/NP ,/PUNC आत्मचैतन्यविज्ञानम्/NV कार्यम्/NP ,/PUNC अविद्याध्यारोपितसर्वपदार्थाकारैः/NP एव/INTF विशिष्टतया/NP दृश्यमानत्वात्/NP इति/AUD ।/PUNC अतः/AVK एव/INTF हि/A विज्ञानवादिनः/NP बौद्धाः/NP विज्ञानव्यतिरेकेण/NP वस्तु/NP एव/INTF न/AN अस्ति/KP इति/AUD प्रतिपन्नाः/NP ,/PUNC प्रमाणान्तरनिरपेक्षताम्/NP च/APY स्वसंविदि/NP तत्त्वाभ्युपगमेन/NP ।/PUNC तस्मात्/SN  अविद्याध्यारोपितनिराकरणमात्रम्/NP ब्रह्मणि/NP कर्तव्यम्/KN ,/PUNC न/AN तु/A ब्रह्मविज्ञाने/NP यत्नः/NP ,/PUNC अत्यन्तप्रसिद्धत्वात्/NP ।/PUNC अविद्याकल्पितनामरूपविशेषाकारापहृतबुद्धीनाम्/NP अत्यन्त/NV प्रसिद्धम्/NP सुविज्ञेयम्/NP आसन्नतरम्/NP आत्मभूतम्/KN अपि/APY ,/PUNC अप्रसिद्धम्/NV दुर्विज्ञेयम्/NP अतिदूरम्/NP अन्यत्/SN इव/ASD च/APY प्रतिभाति/KP अविवेकिनाम्/NP ।/PUNC बाह्याकारनिवृत्तबुद्धीनाम्/NP तु/A लब्धगुर्वात्मप्रसादानाम्/NP न/AN अतः/AVK परम्/NV सुखम्/NP सुप्रसिद्धम्/NV सुविज्ञेयम्/NV स्वासन्नतरम्/NP अस्ति/KP ।/PUNC तथा/AVK च/AVK उक्तम्/KN -/PUNC '/PUNC प्रत्यक्षावगमम्/NP धर्म्यम्/NP (/PUNC गीता/NS 9/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/AUD ।।/PUNC केचित्/SN तु/A पण्डितंमन्याः/NP '/PUNC निराकारत्वात्/NP आत्मवस्तु/NP न/AN उपैति/KP बुद्धिः/NP ।/PUNC अतः/AVK दुःसाध्या/NP सम्यग्ज्ञाननिष्ठा/NP '/PUNC इति/AUD आहुः/KP ।/PUNC सत्यम्/NP ;/PUNC एवम्/AUD गुरुसंप्रदायरहितानाम्/NP अश्रुतवेदान्तानाम्/NP अत्यन्तबहिर्विषयासक्तबुद्धीनाम्/NP सम्यक्प्रमाणेषु/NP अकृतश्रमाणाम्/NP ।/PUNC तद्विपरीतानाम्/NP तु/A लौकिकग्राह्यग्राहकद्वैतवस्तुनि/NP सद्बुद्धिः/NP नितराम्/NV दुःसंपादा/NP ,/PUNC आत्मचैतन्यव्यतिरेकेण/NP वस्त्वन्तरस्य/NP अनुपलब्धेः/NP ,/PUNC यथा/AVK च/AVK '/PUNC एतत्/SN एवम्/AUD एव/INTF ,/PUNC न/AN अन्यथा/AVK '/PUNC इति/AUD अवोचाम/KP  ;/PUNC उक्तम्/KN च/APY भगवता/NP '/PUNC यस्याम्/SN जाग्रति/NP भूतानि/KN सा/SN निशा/NP पश्यतः/KP मुनेः/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 69/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC तस्मात्/SN बाह्याकारभेदबुद्धिनिवृत्तिः/NP एव/INTF आत्मस्वरूपावलम्बनकारणम्/NP ।/PUNC न/AN हि/A आत्मा/NP नाम/NP कस्यचित्/SN कदाचित्/SN अप्रसिद्धः/NV प्राप्यः/KKS हेयः/NP उपादेयः/NV वा/APY ;/PUNC अप्रसिद्धे/KN हि/A तस्मिन्/SN आत्मनि/NP स्वार्थाः/NP सर्वाः/SNV प्रवृत्तयः/NP व्यर्थाः/NV प्रसज्येरन्/KP ।/PUNC न/AN च/APY देहाद्यचेतनार्थत्वम्/NP शक्यम्/NP कल्पयितुम्/KKS ।/PUNC न/AN च/APY सुखार्थम्/NP सुखम्/NP ,/PUNC दुःखार्थम्/NP दुःखम्/NP ।/PUNC आत्मावगत्यवसानार्थत्वात्/NP च/AVK सर्वव्यवहारस्य/NP ।/PUNC तस्मात्/SN यथा/AVK स्वदेहस्य/NP परिच्छेदाय/KKS न/AN प्रमाणान्तरापेक्षा/NP ,/PUNC ततः/AVK अपि/APY आत्मनः/NP अन्तरतमत्वात्/NP तदवगतिम्/NP प्रति/AUP न/AN प्रमाणान्तरापेक्षा/NP ;/PUNC इति/AUD आत्मज्ञाननिष्ठा/NP विवेकिनाम्/NP सुप्रसिद्धा/NV इति/AUD सिद्धम्/KN ।।/PUNC येषाम्/SSN अपि/AVK निराकारम्/NV ज्ञानम्/NP अप्रत्यक्षम्/NP ,/PUNC तेषाम्/SSN अपि/AVK ज्ञानवशेन/NP एव/INTF ज्ञेयावगतिः/NP इति/AUD ज्ञानम्/NP अत्यन्तप्रसिद्धम्/NV सुखादिवत्/ASD एव/INTF इति/AUD अभ्युपगन्तव्यम्/KN ।/PUNC जिज्ञासानुपपत्तेः/NP च/APY -/PUNC अप्रसिद्धम्/NV चेत्/AVK ज्ञानम्/NP ,/PUNC ज्ञेयवत्/ASD जिज्ञास्येत/KP ।/PUNC यथा/AVK ज्ञेयम्/NP घटादिलक्षणम्/NP ज्ञानेन/NP ज्ञाता/NP व्याप्तुम्/KKS इच्छति/KP ,/PUNC तथा/AVK ज्ञानम्/NP अपि/AVK ज्ञानान्तरेण/NP ज्ञातव्यम्/KN आप्तुम्/KKS इच्छेत्/KP ।/PUNC न/AN तत्/SN अस्ति/KP ।/PUNC अतः/AVK अत्यन्तप्रसिद्धम्/NV ज्ञानम्/NP ,/PUNC ज्ञाता/KN अपि/AVK अतः/AVK एव/INTF प्रसिद्धः/NV इति/AUD ।/PUNC तस्मात्/SN ज्ञाने/NP यत्नो/NP न/AN कर्तव्यः/KN ,/PUNC किन्तु/AVK अनात्मनि/NP आत्मबुद्धिनिवृत्तौ/NP एव/INTF ।/PUNC तस्मात्/SN ज्ञाननिष्ठा/NP सुसंपाद्या/KP ।।/PUNC सा/SN इयम्/SN ज्ञानस्य/NP परा/NP निष्ठा/NP उच्यते/KP ,/PUNC कथम्/NP कार्या/NP इति/AUD ?/PUNC -/PUNC बुद्ध्या/NP विशुद्धया/NV युक्तः/KN धृत्या/KKS आत्मानम्/NP नियम्य/KKS च/APY ।/PUNC
शब्दादीन्/NP विषयान्त्यक्त्वा/NP रागद्वेषौ/NP व्युदस्य/NP च/APY 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 51/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 51/PUNC ।।/PUNC -/PUNC बुद्ध्या/NP अध्यवसायलक्षणया/NP विशुद्धया/NP मायारहितया/NP युक्तः/KN संपन्नः/NP ,/PUNC धृत्या/KKS धैर्येण/NP आत्मानम्/NP कार्यकरणसंघातम्/NP नियम्य/KKS च/APY नियमनम्/NP कृत्वा/KKS वशीकृत्य/KKS ,/PUNC शब्दादीन्/NP शब्दः/NP आदिः/NP येषाम्/SNV तान्/SN विषयान्/NP त्यक्त्वा/KKS ,/PUNC सामर्थ्यात्/NP शरीरस्थितिमात्रहेतु/NP भूतान्/KN केवलान्/NP मुक्त्वा/KKS ततः/A अधिकान्/NV सुखार्थान्/NP त्यक्त्वा/KKS इत्यर्थः/NP ,/PUNC शरीरस्थित्यर्थत्वेन/NP प्राप्तेषु/KN रागद्वेषौ/NP व्युदस्य/NP च/APY परित्यज्य/KKS च/APY ।।/PUNC
ततः/A -/PUNC
विविक्तसेवी/NP लघ्वाशी/NP यतवाक्कायमानसः/NP ।/PUNC
ध्यानयोगपरः/NP नित्यम्/NP वैराग्यम्/NP समुपाश्रितः/KN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 52/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 52/PUNC ।।/PUNC -/PUNC विविक्तसेवी/NP अरण्यनदीपुलिनगिरिगुहादीन्/NP विविक्तान्/NV देशान्/NP सेवितुम्/KKS शीलम्/NP अस्य/SN इति/AUD विविक्तसेवी/NP ,/PUNC लघ्वाशी/NP लघ्वशनशीलः/NP -/PUNC विविक्तसेवालघ्वशनयोः/NP निद्रादिदोषनिवर्तकत्वेन/NP चित्तप्रसादहेतुत्वात्/NP ग्रहणम्/NP ;/PUNC यतवाक्कायमानसः/NP वाक्/NP च/APY कायः/NP च/APY मानसम्/NP च/APY यतानि/SNV संयतानि/KN यस्य/SN ज्ञाननिष्ठस्य/NP सः/SN ज्ञाननिष्ठः/NP यतिः/KP यतवाक्कायमानसः/NP स्यात्/KP ।/PUNC एवम्/AUD उपरतसर्वकरणः/NP सन्/KKS ध्यानयोगपरः/NP ध्यानम्/NP आत्मस्वरूपचिन्तनम्/NP ,/PUNC योगः/NP आत्मविषये/NP एकाग्रीकरणम्/NP तौ/SN परत्वेन/NP कर्तव्यौ/KN यस्य/SN सः/SN ध्यानयोगपरः/NP नित्यम्/NP नित्यग्रहणम्/NP मन्त्रजपाद्यन्यकर्तव्याभावप्रदर्शनार्थम्/NP ,/PUNC वैराग्यम्/NP विरागस्य/NP भावः/NP दृष्टादृष्टेषु/NP विषयेषु/NP वैतृष्ण्यम्/NP समुपाश्रितः/KN सम्यक्/NV उपाश्रितः/KN नित्यम्/NP एव/INTF इत्यर्थः/NP ।।/PUNC 
किञ्च/SN -/PUNC
अहङ्कारम्/NP बलम्/NP दर्पम्/NP कामम्/NP क्रोधम्/NP परिग्रहम्/NP ।/PUNC
विमुच्य/KKS निर्ममः/NP शान्तः/KN ब्रह्मभूयाय/KKS कल्पते/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 53/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 53/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अहंकारम्/NP अहंकरणम्/NP अहंकारः/NP देहादिषु/NP तम्/SN ,/PUNC बलम्/NP सामर्थ्यम्/NP कामराग/NP संयुक्तम्/KN -/PUNC न/AN इतरत्/NP शरीरादिसामर्थ्यम्/NP स्वाभाविकत्वेन/NP तत्त्यागस्य/NP अशक्यत्वात्/NP  -/PUNC दर्पम्/NP दर्पः/NP नाम/NP हर्षानन्तरभावी/NP धर्मातिक्रमहेतुः/NP '/PUNC हृष्टः/KN दृप्यति/KP दृप्तः/KN धर्मम्/NP अतिक्रामति/KP '/PUNC इति/AUD स्मरणात्/NP ;/PUNC तम्/SN च/APY ,/PUNC कामम्/NP इच्छाम्/NP क्रोधम्/NP द्वेषम्/NP परिग्रहम्/NP इन्द्रियमनोगतदोषपरित्यागे/NP अपि/AVK शरीरधारणप्रसङ्गेन/NP धर्मानुष्ठाननिमित्तेन/NP वा/AVK बाह्यः/NP परिग्रहः/NP ,/PUNC प्राप्तः/KN तम्/SN च/APY विमुच्य/KKS परित्यज्य/KKS ,/PUNC परमहंसपरिव्राजकः/NP भूत्वा/KKS ,/PUNC देहजीवनमात्रे/NP अपि/AVK निर्गतममभावः/NP निर्ममः/NP ,/PUNC अतः/AVK एव/INTF शान्तः/NP उपरतः/NP ,/PUNC यः/SN संहृतहर्षायासः/NP यतिः/SN ज्ञाननिष्ठः/NP ब्रह्मभूयाय/NP ब्रह्मभवनाय/NP कल्पते/KP समर्थः/NP भवति/KP ।।/PUNC
अनेन/SN क्रमेण/NP -/PUNC
ब्रह्मभूतः/KN प्रसन्नात्मा/NP न/AN शोचति/KP न/AN काङ्क्षति/KP ।/PUNC
समः/NP सर्वेषु/SNV भूतेषु/KN मद्भक्तिम्/KN लभते/KP पराम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 54/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 54/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ब्रह्मभूतः/KN ब्रह्मप्राप्तः/KN प्रसन्नात्मा/NP लब्धाध्यात्मप्रसादस्वभावः/NP न/AN शोचति/KP ,/PUNC किञ्चित्/SN अर्थवैकल्यम्/NP ,/PUNC आत्मनः/NP वैगुण्यम्/NP वा/AVK उद्दिश्य/KKS न/AN शोचति/KP न/AN संतप्यते/KP ;/PUNC न/AN काङ्क्षति/KP ,/PUNC न/AN हि/A अप्राप्तविषयाकाङ्क्षा/NP ब्रह्मविदः/NP उपपद्यते/KP ;/PUNC अतः/AVK ब्रह्मभूतस्य/KN अयम्/SN स्वभावः/NP अनूद्यते/KP -/PUNC न/AN शोचति/KP न/AN काङ्क्षति/KP इति/AUD ।/PUNC '/PUNC न/AN हृष्यति/KP '/PUNC इति/AUD वा/AVK पाठान्तरम्/NP ।/PUNC समः/SN सर्वेषु/SNV भूतेषु/KN ,/PUNC आत्मौपम्येन/NP सर्वभूतेषु/NP सुखम्/NP दुःखम्/NP वा/APY समम्/NP एव/INTF पश्यति/KP इत्यर्थः/NP ।/PUNC न/AN आत्मसमदर्शनम्/NP इह/A ,/PUNC तस्य/SN वक्ष्यमाणत्वात्/NP '/PUNC भक्त्या/KKS माम्/SN अभिजानाति/KP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 55/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC एवंभूतः/KN ज्ञाननिष्ठः/NP ,/PUNC मद्भक्तिम्/KN मयि/SN परमेश्वरे/NP भक्तिम्/KN भजनम्/NP पराम्/NV उत्तमाम्/NV ज्ञानलक्षणाम्/NP चतुर्थीम्/NP लभते/KP ,/PUNC '/PUNC चतुर्विधाः/NP  भजन्ते/KP माम्/SN (/PUNC गीता/NS 7/PUNC ।/PUNC 16/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD हि/A उक्तम्/KN ।।/PUNC 
ततः/A ज्ञानलक्षणया/NP -/PUNC
भक्त्या/KKS माम्/SN अभिजानाति/KP यावान्यः/NP च/APY अस्मि/SN तत्त्वतः/NP ।/PUNC
ततः/A माम्/SN तत्त्वतः/NP ज्ञात्वा/KKS विशते/KP तदनन्तरम्/AVK 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 55/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 55/PUNC ।।/PUNC -/PUNC भक्त्या/KKS माम्/SN अभिजानाति/KP यावान्/NP अहम्/SN उपाधिकृतविस्तरभेदः/NP ,/PUNC यः/SN च/AVK अहम्/SN अस्मि/KP विध्वस्तसर्वोपाधिभेदः/NP उत्तमः/NV पुरुषः/NP आकाशकल्पः/NP ,/PUNC तम्/SN माम्/SNV अद्वैतम्/NP चैतन्यमात्रैकरसम्/NP अजरम्/NP अभयम्/NP अनिधनम्/NP तत्त्वतः/NP अभिजानाति/KP ।/PUNC ततः/A माम्/SN एवम्/AUD तत्त्वतः/NP ज्ञात्वा/KKS विशते/KP तदनन्तरम्/AVK माम्/SN एव/INTF ज्ञानानन्तरम्/NP ।/PUNC न/AN अत्र/A ज्ञानप्रवेशक्रिये/NP भिन्ने/NP विवक्षिते/KP '/PUNC ज्ञात्वा/KKS विशते/KP तदनन्तरम्/AVK '/PUNC इति/AUD ।/PUNC किम्/AP तर्हि/AVK ?/PUNC फलान्तराभावात्/NP ज्ञानमात्रम्/NP एव/INTF ,/PUNC '/PUNC क्षेत्रज्ञम्/NP च/APY अपि/AVK माम्/SN विद्धि/NP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 2/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD उक्तत्वात्/NP ।।/PUNC
ननु/AP विरुद्धम्/NP इदम्/SN उक्तम्/KN '/PUNC ज्ञानस्य/NP या/SN परा/NP निष्ठा/NP तया/SN माम्/SN अभिजानाति/KP (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 50/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC कथम्/NP विरुद्धम्/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC यदा/AVK एव/INTF यस्मिन्/SN विषये/NP ज्ञानम्/NP उत्पद्यते/KP ज्ञातुः/KP ,/PUNC तदा/AVK एव/INTF तम्/SN विषयम्/NP अभिजानाति/KP ज्ञाता/KN इति/AUD न/AN ज्ञाननिष्ठाम्/NP ज्ञानावृत्तिलक्षणाम्/NP अपेक्षते/KP इति/AUD ;/PUNC अतः/AVK च/AVK ज्ञानेन/NP न/AN अभिजानाति/KP ,/PUNC ज्ञानावृत्त्या/KKS तु/A ज्ञाननिष्ठया/NP अभिजानाति/KP इति/AUD ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ;/PUNC ज्ञानस्य/NP स्वात्मोत्पत्तिपरिपाकहेतुयुक्तस्य/NP प्रतिपक्षविहीनस्य/NP यत्/SN आत्मानुभवनिश्चयावसानत्वम्/NP तस्य/SN निष्ठाशब्दाभिलापात्/NP ।/PUNC शास्त्राचार्योपदेशेन/NP ज्ञानोत्पत्तिहेतुम्/NP सहकारिकारणम्/NP बुद्धिविशुद्धत्वादि/NP अमानित्वादिगुणम्/NP च/AVK अपेक्ष्य/NP जनितस्य/NP क्षेत्रज्ञपरमात्मैकत्वज्ञानस्य/NP कर्तृत्वादिकारकभेदबुद्धिनिबन्धनसर्वकर्मसंन्याससहितस्य/NP स्वात्मानुभवनिश्चयरूपेण/NP यत्/SN अवस्थानम्/NP ,/PUNC सा/SN परा/NP ज्ञाननिष्ठा/NP इति/AUD उच्यते/KP ।/PUNC सा/SN इयम्/SN ज्ञाननिष्ठा/NP आर्तादिभक्तित्रयापेक्षया/NP परा/NP चतुर्थी/NS भक्तिः/KN इति/AUD उक्ता/KN ।/PUNC तया/SN परया/NP भक्त्या/KKS भगवन्तम्/NP तत्त्वतः/NP अभिजानाति/KP ,/PUNC यदनन्तरम्/AVK एव/INTF ईश्वरक्षेत्रज्ञभेदबुद्धिः/NP अशेषतः/NP निवर्तते/KP ।/PUNC अतः/AVK ज्ञाननिष्ठालक्षणतया/NP भक्त्या/KKS माम्/SN अभिजानाति/KP इति/AUD वचनम्/NP न/AN विरुध्यते/KP ।/PUNC अत्र/A च/AVK सर्वम्/SN निवृत्तिविधायि/NP शास्त्रम्/NP वेदान्तेतिहासपुराणस्मृतिलक्षणम्/NP न्यायप्रसिद्धम्/NP अर्थवत्/ASD भवति/KP -/PUNC '/PUNC विदित्वा/KKS ..../PUNC व्युत्थाय/KKS अथ/AVK भिक्षाचर्यम्/NP चरन्ति/KP (/PUNC बृह0/NS उ0/NS 3/PUNC ।/PUNC 5/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC तस्मान्न्यासमेषाम्/NP तपसामतिरिक्तम्/NP आहुः/KP (/PUNC ना0/NS उ0/NS 2/PUNC ।/PUNC 79/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC न्यास/NP एवात्यरेचयत्/KP (/PUNC ना0/NS उ0/NS 2/PUNC ।/PUNC 78/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC '/PUNC संन्यासः/NP कर्मणाम्/NP न्यासः/NP '/PUNC '/PUNC वेदान्/NP इमम्/SN च/AVK लोकम्/NP अमुम्/NP च/APY परित्यज्य/KKS (/PUNC आप0/NS ध0/NS 1/PUNC ।/PUNC 23/PUNC ।/PUNC 13/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC त्यज/NP धर्मम्/NP अधर्मम्/NP च/APY (/PUNC महा0/NS शा0/NS 329/PUNC ।/PUNC 40/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/AUD ।/PUNC इह/A च/APY प्रदर्शितानि/KNV वाक्यानि/NP ।/PUNC न/AN च/APY तेषाम्/SN वाक्यानाम्/NP आनर्थक्यम्/NP युक्तम्/KN ;/PUNC न/AN च/APY अर्थवादत्वम्/NP स्वप्रकरणस्थत्वात्/NP ,/PUNC प्रत्यगात्माविक्रियस्वरूपनिष्ठत्वात्/NP च/APY मोक्षस्य/NP ।/PUNC न/AN हि/A पूर्वसमुद्रम्/NP जिगमिषोः/NP प्रातिलोम्येन/NP प्रत्यक्समुद्रजिगमिषुणा/NP समानमार्गत्वम्/NP संभवति/KP ।/PUNC प्रत्यगात्मविषयप्रत्ययसन्तानकरणाभिनिवेशः/NP च/APY ज्ञाननिष्ठा/NP ;/PUNC सा/SN च/APY प्रत्यक्समुद्रगमनवत्/ASD कर्मणा/NP सहभावित्वेन/NP विरुध्यते/KP ।/PUNC पर्वतसर्षपयोः/NP इव/ASD अन्तरवान्/KN विरोधः/NP प्रमाणविदाम्/NP निश्चितः/KN ।/PUNC तस्मात्/SN सर्वकर्मसंन्यासेन/NP एव/INTF ज्ञाननिष्ठा/NP कार्या/NP इति/AUD सिद्धम्/KN ।।/PUNC
स्वकर्मणा/NP भगवतः/NP अभ्यर्चनभक्तियोगस्य/NP सिद्धिप्राप्तिः/KN फलम्/NP ज्ञाननिष्ठायोग्यता/NP ,/PUNC यन्निमित्ता/NP ज्ञाननिष्ठा/NP मोक्षफलावसाना/NP सः/SN भगवद्भक्तियोगः/NP अधुना/A स्तूयते/KP शास्त्रार्थोपसंहारप्रकरणे/NP शास्त्रार्थनिश्चयदार्ढ्याय/NP -/PUNC सर्वकर्माणि/NP अपि/APY सदा/A कुर्वाणः/KP मद्व्यपाश्रयः/NP ।/PUNC
मत्प्रसादात्/NP अवाप्नोति/KP शाश्वतम्/NV पदम्/NP अव्ययम्/NS 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 56/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 56/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वकर्माणि/NP अपि/APY प्रतिषिद्धानि/KN अपि/APY सदा/A कुर्वाणः/KP अनुतिष्ठन्/KNV मद्व्यपाश्रयः/NP अहम्/SN वासुदेवः/NS ईश्वरः/NP व्यपाश्रयणम्/NP यस्य/SN सः/SN मद्व्यपाश्रयः/NP मय्यर्पितसर्वभावः/NP इत्यर्थः/NP ।/PUNC सः/SN अपि/AVK मत्प्रसादात्/NP मम/SN ईश्वरस्य/NP प्रसादात्/NP अवाप्नोति/KP शाश्वतम्/NV नित्यम्/NP वैष्णवम्/NP पदम्/NP अव्ययम्/NS ।।/PUNC 
यस्मात्/SNV एवम्/AUD -/PUNC 
चेतसा/AVK सर्वकर्माणि/NP मयि/SN संन्यस्य/NP मत्परः/NP ।/PUNC
बुद्धियोगम्/NP उपाश्रित्य/KKS मच्चित्तः/KN सततम्/NP भव/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 57/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 57/PUNC ।।/PUNC -/PUNC चेतसा/AVK विवेकबुद्ध्या/NP सर्वकर्माणि/NP दृष्टादृष्टार्थानि/NP मयि/SN ईश्वरे/NP संन्यस्य/NP '/PUNC यत्/SN करोषि/KP यत्/SN अश्नासि/KP (/PUNC गीता/NS 9/PUNC ।/PUNC 27/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD उक्तन्यायेन/NP ,/PUNC मत्परः/NP अहम्/SN वासुदेवः/NS परः/NP यस्य/SN तव/SN सः/SN त्वम्/SN मत्परः/NP सन्/KKS मय्यर्पितसर्वात्मभावः/NP बुद्धियोगम्/NP समाहितबुद्धित्वम्/NP बुद्धियोगः/NP तम्/SN बुद्धियोगम्/NP उपाश्रित्य/KKS आश्रयः/NP अनन्यशरणत्वम्/NP मच्चित्तः/KN मयि/SN एव/INTF चित्तम्/KN यस्य/SN तव/SN सः/SN त्वम्/SN मच्चित्तः/KN सततम्/NV सर्वदा/A भव/KP ।।/PUNC 
मच्चित्तः/KN सर्वदुर्गाणि/NP मत्प्रसादात्तरिष्यसि/KP ।/PUNC
अथ/AVK चेत्त्वम्/NP अहङ्कारात्न/NP श्रोष्यसि/KP विनङ्क्ष्यसि/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 58/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 58/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मच्चितः/KN सर्वदुर्गाणि/NP सर्वाणि/SNV दुस्तराणि/NP संसारहेतु/NP जातानि/KN मत्प्रसादात्/NP तरिष्यसि/KP अतिक्रमिष्यसि/KP ।/PUNC अथ/AVK चेत्/AVK यदि/AVK त्वम्/SN मदुक्तम्/KN अहंकारात्/NP '/PUNC पण्डितः/NP अहम्/SN '/PUNC इति/AUD न/AN श्रोष्यसि/KP न/AN ग्रहीष्यसि/KP ,/PUNC ततः/A त्वम्/SN विनङ्क्ष्यसि/KP विनाशम्/NP गमिष्यसि/KP ।।/PUNC इदम्/SN च/APY त्वया/SN न/AN मन्तव्यम्/KN '/PUNC स्वतन्त्रः/NP अहम्/SN ,/PUNC किमर्थम्/NP परोक्तम्/KN करिष्यामि/KP ?/PUNC '/PUNC इति/AUD -/PUNC
यदहङ्कारम्/NP आश्रित्य/KKS न/AN योत्स्ये/NP इति/AUD मन्यसे/NP ।/PUNC
मिथ्या/NP एषः/SNV व्यवसायः/NP ते/SN प्रकृतिः/NP त्वाम्/SN नियोक्ष्यति/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 59/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 59/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यदि/AVK चेत्/SN त्वम्/SN अहंकारम्/NP आश्रित्य/KKS न/AN योत्स्ये/NP इति/AUD न/AN युद्धम्/NP करिष्यामि/KP इति/AUD मन्यसे/NP चिन्तयसि/NP निश्चयम्/NP करोषि/KP ,/PUNC मिथ्या/NP एषः/SNV व्यवसायः/NP निश्चयः/NP ते/SN तव/SN ;/PUNC यस्मात्/SN प्रकृतिः/NP क्षत्रियस्वभावः/NP त्वाम्/SN नियोक्ष्यति/KP ।।/PUNC
यस्मात्/SN च/APY -/PUNC
स्वभावजेन/NP कौन्तेय/NP निबद्धः/KN स्वेन/SNV कर्मणा/NP ।/PUNC
कर्तुम्/KKS न/AN इच्छसि/KP यत्/SN मोहात्/NP करिष्यसि/KP अवशः/NP अपि/APY तत्/SN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 60/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 60/PUNC ।।/PUNC -/PUNC स्वभावजेन/NP शौर्यादिना/NP यथोक्तेन/KN कौन्तेय/NP निबद्धः/KN निश्चयेन/NP बद्धः/KN स्वेन/SNV आत्मीयेन/NP कर्मणा/NP कर्तुम्/KKS न/AN इच्छसि/KP यत्/SN कर्म/NP ,/PUNC मोहात्/NP अविवेकतः/NP करिष्यसि/KP अवशः/NP अपि/APY परवशः/NP एव/INTF तत्/SN कर्म/NP ।।/PUNC 
यस्मात्/SN -/PUNC ईश्वरः/NP सर्वभूतानाम्/KN हृद्देशे/NP अर्जुन/NS तिष्ठति/KP ।/PUNC
भ्रामयन्/KNV सर्वभूतानि/KN यन्त्रारूढानि/KN मायया/SN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 61/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 61/PUNC ।।/PUNC -/PUNC ईश्वरः/NP ईशनशीलः/NP नारायणः/NP सर्वभूतानाम्/KN सर्वप्राणिनाम्/KN हृद्देशे/NP हृदयदेशे/NP अर्जुन/NS शुक्लान्तरात्मस्वभावः/NP विशुद्धान्तःकरणः/NP -/PUNC '/PUNC अहः/A च/APY कृष्णम्/NP अहः/A अर्जुनम्/NS च/APY (/PUNC ./PUNC सं/NS ./PUNC 6/PUNC ।/PUNC 9/PUNC ।/PUNC 1/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD दर्शनात्/NP -/PUNC तिष्ठति/KP स्थितिम्/KN लभते/KP ।/PUNC तेषु/SN सः/SN कथम्/NP तिष्ठति/KP इति/AUD ,/PUNC आह/KP -/PUNC भ्रामयन्/KNV भ्रमणम्/NP कारयन्/KNV सर्वभूतानि/KN यन्त्रारूढानि/KN यन्त्राणि/NP आरूढानि/KN अधिष्ठितानि/KP इव/ASD -/PUNC इति/AUD इव/ASD शब्दः/NP अत्र/A द्रष्टव्यः/KN -/PUNC यथा/AVK दारुकृतपुरुषादीनि/NP यन्त्रारूढानि/KN ।/PUNC मायया/SN च्छद्मना/NP भ्रामयन्/KNV तिष्ठति/KP इति/AUD संबन्धः/NP ।।/PUNC 
तम्/SN एव/INTF शरणम्/NP गच्छ/KP सर्वभावेन/NP भारत/NS ।/PUNC
तत्प्रसादात्/NP पराम्/NV शान्तिम्/NP स्थानम्/NP प्राप्स्यसि/KP शाश्वतम्/KN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 62/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 62/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तम्/SN एव/INTF ईश्वरम्/NP शरणम्/NP आश्रयम्/NP संसारार्तिहरणार्थम्/NP गच्छ/KP आश्रय/NP सर्वभावेन/NP सर्वात्मना/NP हे/ASMB भारत/NS ।/PUNC ततः/A तत्प्रसादात्/NP ईश्वरानुग्रहात्/NP पराम्/NV प्रकृष्टाम्/KN शान्तिम्/NP उपरतिम्/KN स्थानम्/NP च/APY मम/SN विष्णोः/NS परमम्/NV पदम्/NP प्राप्स्यसि/KP शाश्वतम्/KN नित्यम्/NP ।।/PUNC 
इति/AUD ते/SN ज्ञानम्/NP आख्यातम्/KN गुह्यात्/NP गुह्यतरम्/NP मया/SN ।/PUNC
विमृश्य/KKS एतत्/SN अशेषेण/NP यथा/AVK इच्छसि/KP तथा/AVK कुरु/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 63/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 63/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इति/AUD एतत्/SN ते/SN तुभ्यम्/SN ज्ञानम्/NP आख्यातम्/KN कथितम्/KN गुह्यात्/NP गोप्यात्/NP गुह्यतरम्/NP अतिशयेन/NV गुह्यम्/NP रहस्यम्/NP इत्यर्थः/NP ,/PUNC मया/SN सर्वज्ञेन/NP ईश्वरेण/NP ।/PUNC विमृश्य/KKS विमर्शनम्/NP आलोचनम्/NP कृत्वा/KKS एतत्/SN यथोक्तम्/KN शास्त्रम्/NP अशेषेण/NP समस्तम्/NP यथोक्तम्/KN च/APY अर्थजातम्/NP यथा/AVK इच्छसि/KP तथा/AVK कुरु/KP ।।/PUNC भूयः/NP अपि/APY मया/SN उच्यमानम्/NP शृणु/KP -/PUNC
सर्वगुह्यतमम्/NP भूयः/NP शृणु/KP मे/SN परमम्/SNV वचः/KP ।/PUNC
इष्टः/KN असि/KP मे/SN दृढम्/KN इति/AUD ततः/SN वक्ष्यामि/KP ते/SN हितम्/KN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 64/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 64/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वगुह्यतमम्/NP सर्वेभ्यः/SNV गुह्येभ्यः/NP अत्यन्तगुह्यतमम्/NP अत्यन्तरहस्यम्/NP ,/PUNC उक्तम्/KN अपि/AVK असकृत्/KN भूयः/NP पुनः/A शृणु/KP मे/SN मम/SN परमम्/NV प्रकृष्टम्/KN वचः/KP वाक्यम्/NP ।/PUNC न/AN भयात्/NP न/AN अपि/AVK अर्थकारणात्वा/NP वक्ष्यामि/KP ;/PUNC किम्/AP तर्हि/AVK ?/PUNC इष्टः/KN प्रियः/NP असि/KP मे/SN मम/SN दृढम्/KN अव्यभिचारेण/NP इति/AUD कृत्वा/KKS ततः/A तेन/SN कारणेन/NP वक्ष्यामि/KP कथयिष्यामि/KP ते/SN तव/SN हितम्/KN परमम्/NV ज्ञानप्राप्तिसाधनम्/NP ,/PUNC तत्/SN हि/A सर्वहितानाम्/NP हिततमम्/NP ।।/PUNC
किम्/AP तत्/SN इति/AUD ,/PUNC आह/KP -/PUNC
मन्मनाः/NP भव/KP मद्भक्तः/KN मद्याजी/NP माम्/SN नमः/NP कुरु/KP ।/PUNC
माम्/SN एव/INTF एष्यसि/KP सत्यम्/NP ते/SN प्रतिजाने/NP प्रियः/NP असि/KP मे/SN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 65/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 65/PUNC ।।/PUNC -/PUNC मन्मनाः/NP भव/KP मच्चित्तः/KN भव/KP ।/PUNC मद्भक्तः/KN भव/KP मद्भजनः/NP भव/KP ।/PUNC मद्याजी/NP मद्यजनशीलः/NP भव/KP ।/PUNC माम्/SN नमः/NP कुरु/KP नमस्कारम्/NP अपि/APY मम/SN एव/INTF कुरु/KP ।/PUNC तत्र/A एवम्/AUD वर्तमानः/NP वासुदेवे/NS एव/INTF समर्पितसाध्यसाधनप्रयोजनः/NP माम्/SN एव/INTF एष्यसि/KP आगमिष्यसि/KP ।/PUNC सत्यम्/NP ते/SN तव/SN प्रतिजाने/NP ,/PUNC सत्याम्/NP प्रतिज्ञाम्/NP करोमि/KP एतस्मिन्/SN वस्तुनि/NP इत्यर्थः/NP ;/PUNC यतः/A प्रियः/NP असि/KP मे/SN ।/PUNC एवम्/AUD भगवतः/NP सत्यप्रतिज्ञत्वम्/NP बुद्ध्वा/NP भगवद्भक्तेः/NP अवश्यंभावि/NP मोक्षफलम्/NP अवधार्य/KKS भगवच्छरणैकपरायणः/NP भवेत्/KP इति/AUD वाक्यार्थः/NP ।।/PUNC
कर्मयोगनिष्ठायाः/NP परमरहस्यम्/NP ईश्वरशरणताम्/NP उपसंहृत्य/KKS ,/PUNC अथ/AVK इदानीम्/NP कर्मयोगनिष्ठाफलम्/NP सम्यग्दर्शनम्/NP सर्ववेदान्तसारविहितम्/NP वक्तव्यम्/KN इति/AUD आह/KP -/PUNC
सर्वधर्मान्/NP परित्यज्य/KKS माम्/SN एकम्/SMK शरणम्/NP व्रज/NP ।/PUNC
अहम्/SN त्वा/SN सर्वपापेभ्यः/NP मोक्षयिष्यामि/KP मा/AN शुचः/KP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 66/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 66/PUNC ।।/PUNC -/PUNC सर्वधर्मान्/NP सर्वे/SN च/APY ते/SN धर्माः/NP च/APY सर्वधर्माः/NP तान्/SN -/PUNC धर्मशब्देन/NP अत्र/A अधर्मः/NP अपि/APY गृह्यते/KP ,/PUNC नैष्कर्म्यस्य/NP विवक्षितत्वात्/NP ,/PUNC '/PUNC नाविरतो/NP दुश्चरितात्/NP (/PUNC क0/NS उ0/NS 1/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 24/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC त्यज/NP धर्मम्/NP अधर्मम्/NP च/APY (/PUNC महा0/NS शान्ति0/NS 329/PUNC ।/PUNC 40/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/AUD श्रुतिस्मृतिभ्यः/NP -/PUNC सर्वधर्मान्/NP परित्यज्य/KKS संन्यस्य/NP सर्वकर्माणि/NP इति/AUD एतत्/SN ।/PUNC माम्/SN एकम्/SMK सर्वात्मानम्/NP समम्/NP सर्वभूत/KN स्थितम्/KN ईश्वरम्/NP अच्युतम्/KP गर्भजन्मजरामरणवर्जितम्/NP '/PUNC अहम्/SN एव/INTF '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD शरणम्/NP व्रज/NP ,/PUNC न/AN मत्तः/KN अन्यत्/SN अस्ति/KP इति/AUD अवधारय/KKS इत्यर्थः/NP ।/PUNC अहम्/SN त्वा/SN त्वाम्/SN एवम्/AUD निश्चित/NP बुद्धिम्/NP सर्वपापेभ्यः/NP सर्वधर्माधर्मबन्धनरूपेभ्यः/NP मोक्षयिष्यामि/KP स्वात्मभावप्रकाशीकरणेन/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY '/PUNC नाशयामि/KP आत्मभावस्थः/NP ज्ञानदीपेन/NP भास्वता/NP (/PUNC गीता/NS 10/PUNC ।/PUNC 11/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ।/PUNC अतः/AVK मा/AN शुचः/KP शोकम्/NP मा/AN कार्षीः/NP इत्यर्थः/NP ।।/PUNC अस्मिन्/SN गीताशास्त्रे/NS परमनिःश्रेयससाधनम्/NP निश्चितम्/KN किम्/AP ज्ञानम्/NP ,/PUNC कर्म/NP वा/AVK ,/PUNC आहोस्वित्/NP उभयम्/NP ?/PUNC इति/AUD ।/PUNC कुतः/SN संशयः/NP ?/PUNC '/PUNC यत्/SN ज्ञात्वा/KKS अमृतम्/NP अश्नुते/KP (/PUNC गीता/NS 13/PUNC ।/PUNC 12/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC ततः/A माम्/SN तत्त्वतः/NP ज्ञात्वा/KKS विशते/KP तदनन्तरम्/AVK (/PUNC गीता/NS 18/PUNC ।/PUNC 55/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादीनि/NV वाक्यानि/NP केवलात्/NP ज्ञानात्/NP निःश्रेयस/NP प्राप्तिम्/NP दर्शयन्ति/KP ।/PUNC '/PUNC कर्मणि/NP एव/INTF अधिकारः/NP ते/SN (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 47/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC कुरु/KP कर्म/NP एव/INTF (/PUNC गीता/NS 4/PUNC ।/PUNC 15/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्येवमादीनि/NP कर्मणाम्/NP अवश्यकर्तव्यताम्/KN दर्शयन्ति/KP ।/PUNC एवम्/AUD ज्ञानकर्मणोः/NP कर्तव्यत्वोपदेशात्/NP समुच्चितयोः/NP अपि/AVK निःश्रेयसहेतुत्वम्/NP स्यात्/KP इति/AUD भवेत्/SN संशयः/NP ।/PUNC किम्/AP पुनः/A अत्र/A मीमांसाफलम्/NP ?/PUNC ननु/AP एतत्/SN एव/INTF -/PUNC एषाम्/SN अन्यतमस्य/NP परमनिःश्रेयससाधनत्वावधारणम्/NP ;/PUNC अतः/AVK विस्तीर्णतरम्/NP मीमांस्यम्/NP एतत्/SN ।।/PUNC
आत्मज्ञानस्य/NP तु/A केवलस्य/NP निःश्रेयसहेतुत्वम्/NP ,/PUNC भेदप्रत्ययनिवर्तकत्वेन/NP कैवल्यफलावसानत्वात्/NP ।/PUNC क्रियाकारकफलभेदबुद्धिः/NP अविद्यया/NP आत्मनि/NP नित्यप्रवृत्ता/KN -/PUNC '/PUNC मम/SN कर्म/NP ,/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP अमुष्मै/NP फलाय/KKS इदम्/SN कर्म/NP करिष्यामि/KP '/PUNC इति/AUD इयम्/SN अविद्या/NP अनादिकाल/NP प्रवृत्ता/KN ।/PUNC अस्याः/SN अविद्यायाः/NP निवर्तकम्/KN ,/PUNC '/PUNC अयम्/SN अहम्/SN अस्मि/KP केवलः/NP अकर्ता/NP अक्रियः/NP अफलः/NP ;/PUNC न/AN मत्तः/KN अन्यः/SN अस्ति/KP कश्चित्/SN '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD रूपम्/NP आत्मविषयम्/NP ज्ञानम्/NP उत्पद्यमानम्/NP ,/PUNC कर्मप्रवृत्तिहेतुभूतायाः/NP भेदबुद्धेः/NP निवर्तकत्वात्/NP ।/PUNC तु/A शब्दः/NP पक्षव्यावृत्त्यर्थः/NP -/PUNC न/AN केवलेभ्यः/NP कर्मभ्यः/NP ,/PUNC न/AN च/APY ज्ञानकर्मभ्याम्/NP समुच्चिताभ्याम्/NP निःश्रेयसप्राप्तिः/NP इति/AUD पक्षद्वयम्/NP निवर्तयति/KP ।/PUNC अकार्यत्वात्/NP च/AVK निःश्रेयसस्य/NP कर्मसाधनत्वानुपपत्तिः/NP ।/PUNC न/AN हि/A नित्यम्/NP वस्तु/NP कर्मणा/NP ज्ञानेन/NP वा/APY क्रियते/KP ।/PUNC केवलम्/NP ज्ञानम्/NP अपि/APY अनर्थकम्/NP तर्हि/AVK ?/PUNC न/AN ,/PUNC अविद्यानिवर्तकत्वे/NP सति/A दृष्टकैवल्यफलावसानत्वात्/NP ।/PUNC अविद्यातमोनिवर्तकस्य/NP ज्ञानस्य/NP दृष्टम्/KN कैवल्यफलावसानत्वम्/NP ।/PUNC रज्ज्वादिविषये/NP तमोनिवर्तकप्रदीपप्रकाशफलवत्/A ।/PUNC विनिवृत्तसर्पादिविकल्परज्जुकैवल्यावसानम्/NP हि/A प्रकाशफलम्/NP ;/PUNC तथा/AVK ज्ञानम्/NP ।/PUNC दृष्टार्थानाम्/NP च/AVK च्छिदिक्रियाग्निमन्थनादीनाम्/NP व्यापृतकर्त्रादिकारकाणाम्/NP द्वैधीभावाग्निदर्शनादिफलात्/NP अन्यफले/NP कर्मान्तरे/NP वा/AVK व्यापारानुपपत्तिः/NP यथा/AVK ,/PUNC तथा/AVK दृष्टार्थायाम्/NP ज्ञाननिष्ठाक्रियायाम्/NP व्यापृतस्य/NP ज्ञात्रादिकारकस्य/NP आत्मकैवल्यफलात्/NP कर्मान्तरे/NP प्रवृत्तिः/KN अनुपपन्ना/NP इति/AUD न/AN ज्ञाननिष्ठा/NP कर्मसहिता/KN उपपद्यते/KP ।/PUNC भुज्यग्निहोत्रादिक्रियावत्स्यात्/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC कैवल्यफले/NP ज्ञाने/NP क्रियाफलार्थित्वानुपपत्तेः/NP ।/PUNC कैवल्यफले/NP हि/A ज्ञाने/NP प्राप्ते/KN ,/PUNC सर्वतः/A संप्लुतोदकफले/NP कूपतटाकादिक्रियाफलार्थित्वाभाववत्/NP ,/PUNC फलान्तरे/NP तत्साधनभूतायाम्/NP वा/AVK क्रियायाम्/NP अर्थित्वानुपपत्तिः/NP ।/PUNC न/AN हि/A राज्यप्राप्तिफले/NP कर्मणि/NP व्यापृतस्य/NP क्षेत्रमात्रप्राप्तिफले/NP व्यापारः/NP उपपद्यते/KP ,/PUNC तद्विषयम्/NP वा/AVK अर्थित्वम्/NP ।/PUNC तस्मात्/SN न/AN कर्मणः/NP अस्ति/KP निःश्रेयससाधनत्वम्/NP ।/PUNC न/AN च/APY ज्ञानकर्मणोः/NP समुच्चितयोः/NP ।/PUNC न/AN अपि/AVK ज्ञानस्य/NP कैवल्यफलस्य/NP कर्मसाहाय्यापेक्षा/NP ,/PUNC अविद्यानिवर्तकत्वेन/NP विरोधात्/NP ।/PUNC न/AN हि/A तमः/SN तमसः/NP निवर्तकम्/NP ।/PUNC अतः/AVK केवलम्/NP एव/INTF ज्ञानम्/NP निःश्रेयससाधनम्/NP इति/AUD ।/PUNC न/AN ;/PUNC नित्याकरणे/NP प्रत्यवायप्राप्तेः/KN ,/PUNC कैवल्यस्य/NP च/APY नित्यत्वात्/NP ।/PUNC यत्/SN तावत्/SNV केवलाज्ज्ञानात्/NP कैवल्यप्राप्तिः/KN इति/AUD एतत्/SN ,/PUNC तत्/SN असत्/NP ;/PUNC यतः/A नित्यानाम्/NP कर्मणाम्/NP श्रुत्युक्तानाम्/NP अकरणे/NP प्रत्यवायः/NP नरकादिप्राप्तिलक्षणः/NP स्यात्/KP ।/PUNC ननु/AP एवम्/AUD तर्हि/AVK कर्मभ्यः/NP मोक्षः/NP न/AN अस्ति/KP इति/AUD अनिर्मोक्षः/NP एव/INTF ।/PUNC न/AN एषः/SNV दोषः/NP ;/PUNC नित्यत्वात्/NP मोक्षस्य/NP ।/PUNC नित्यानाम्/NP कर्मणाम्/NP अनुष्ठानात्/NP प्रत्यवायस्य/NP अप्राप्तिः/NP ,/PUNC प्रतिषिद्धस्य/NP च/AVK अकरणात्/NP अनिष्टशरीरानुपपत्तिः/NP ,/PUNC काम्यानाम्/NP च/AVK वर्जनात्/NP इष्टशरीरानुपपत्तिः/NP ,/PUNC वर्तमानशरीरारम्भकस्य/NP च/AVK कर्मणः/NP फलोपभोगक्षये/NP पतिते/KN अस्मिन्/SN शरीरे/NP देहान्तरोत्पत्तौ/NP च/AVK कारणाभावात्/NP आत्मनः/NP रागादीनाम्/NP च/APY अकरणे/NP स्वरूपावस्थानम्/NP एव/INTF कैवल्यम्/NP इति/AUD अयत्नसिद्धम्/NP कैवल्यम्/NP इति/AUD ।/PUNC अतिक्रान्तानेकजन्मान्तरकृतस्य/NP स्वर्गनरकादिप्राप्तिफलस्य/NP अनारब्धकार्यस्य/NP उपभोगानुपपत्तेः/NP क्षयाभावः/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखोपभोगस्य/NP तत्फलोपभोगत्वोपपत्तेः/NP ।/PUNC प्रायश्चित्तवत्वा/NP पूर्वोपात्तदुरितक्षयार्थम्/NP नित्यम्/NP कर्म/NP ।/PUNC आरब्धानाम्/NP च/AVK कर्मणाम्/NP उपभोगेन/NP एव/INTF क्षीणत्वात्/NP अपूर्वाणाम्/NP च/APY कर्मणाम्/NP अनारम्भे/NP अयत्नसिद्धम्/NP कैवल्यम्/NP इति/AUD ।/PUNC न/AN ;/PUNC '/PUNC तम/SN एव/INTF विदित्वातिमृत्युमेति/NP नान्यः/NP पन्था/NP विद्यतेऽयनाय/KP (/PUNC श्वे0/NS उ0/NS 3/PUNC ।/PUNC 8/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD विद्यायाः/NP अन्यः/SN पन्थाः/NP मोक्षाय/KKS न/AN विद्यते/KP इति/AUD श्रुतेः/KN ,/PUNC चर्मवत्/ASD आकाशवेष्टनासंभववत्/A अविदुषः/NP मोक्षासंभव/NP श्रुतेः/KN ,/PUNC '/PUNC ज्ञानात्कैवल्यम्/NP आप्नोति/KP '/PUNC इति/AUD च/APY पुराणस्मृतेः/NS ;/PUNC अनारब्धफलानाम्/NP पुण्यानाम्/NP कर्मणाम्/NP क्षयानुपपत्तेः/NP च/APY ।/PUNC यथा/AVK पूर्वोपात्तानाम्/NP दुरितानाम्/NP अनारब्धफलानाम्/NP संभवः/NP ,/PUNC तथा/AVK पुण्यानाम्/NP अनारब्धफलानाम्/NP स्यात्/KP संभवः/NP ।।/PUNC तेषाम्/SN च/APY देहान्तरम्/NP अकृत्वा/KKS क्षयानुपपत्तौ/NP मोक्षानुपपत्तिः/NP ।/PUNC धर्माधर्महेतूनाम्/NP  च/APY रागद्वेषमोहानाम्/NP अन्यत्र/AVK आत्मज्ञानात्/NP उच्छेदानुपपत्तेः/NP धर्माधर्मोच्छेदानुपपत्तिः/NP ।/PUNC नित्यानाम्/NP च/APY कर्मणाम्/NP पुण्यफलत्व/NP श्रुतेः/KN ,/PUNC '/PUNC वर्णाः/NP आश्रमाः/NP च/APY स्वकर्मनिष्ठाः/NP (/PUNC आ0/NS स्मृ0/NS 2/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC '/PUNC इत्यादि/NV स्मृतेः/NS च/APY कर्मक्षयानुपपत्तिः/NP ।।/PUNC ये/SN तु/A आहुः/KP -/PUNC नित्यानि/NP कर्माणि/NP दुःखरूपत्वात्/NP पूर्वकृतदुरितकर्मणाम्/NP फलम्/NP एव/INTF ,/PUNC न/AN तु/A तेषाम्/SN स्वरूपव्यतिरेकेण/NP अन्यत्/SNV फलम्/NP अस्ति/KP ,/PUNC अश्रुतत्वात्/NP ,/PUNC जीवनादिनिमित्ते/NP च/APY विधानात्/NP इति/AUD ।/PUNC न/AN ,/PUNC अप्रवृत्तानाम्/NP कर्मणाम्/NP फलदानासंभवात्/NP ;/PUNC दुःखफलविशेषानुपपत्तिः/NP च/APY स्यात्/KP ।/PUNC यत्/SN उक्तम्/KN पूर्वजन्मकृतदुरितानाम्/NP कर्मणाम्/NP फलम्/NP नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखम्/NP भुज्यते/KP इति/AUD ,/PUNC तत्/SN असत्/NP ।/PUNC न/AN हि/A मरणकाले/NP फलदानाय/NP अनङ्कुरीभूतस्य/NP कर्मणः/NP फलम्/NP अन्यकर्मारब्धे/NP जन्मनि/NP उपभुज्यते/KP इति/AUD उपपत्तिः/NP ।/PUNC अन्यथा/AVK स्वर्गफलोपभोगाय/NP अग्निहोत्रादिकर्मारब्धे/NP जन्मनि/NP नरककर्मफलोपभोगानुपपत्तिः/NP न/AN स्यात्/KP ।/PUNC तस्य/SN दुरितस्य/NP दुःखविशेषफलत्वानुपपत्तेः/NP च/AVK -/PUNC अनेकेषु/SN हि/A दुरितेषु/NP संभवत्सु/NP भिन्नदुःखसाधनफलेषु/NP नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखमात्रफलेषु/NP कल्प्यमानेषु/NP द्वन्द्वरोगादिबाधनम्/NP निर्निमित्तम्/NP न/AN हि/A शक्यते/KP कल्पयितुम्/KKS ,/PUNC नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखम्/NP एव/INTF पूर्वोपात्तदुरितफलम्/NP न/AN शिरसा/NP पाषाणवहनादिदुःखम्/NP इति/AUD ।/PUNC अप्रकृतम्/NP च/APY इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखम्/NP पूर्वकृतदुरितकर्मफलम्/NP इति/AUD ।/PUNC कथम्/NP ?/PUNC अप्रसूतफलस्य/NP हि/A पूर्वकृतदुरितस्य/NP क्षयः/NP न/AN उपपद्यते/KP इति/AUD प्रकृतम्/NP ।/PUNC तत्र/A प्रसूतफलस्य/NP कर्मणः/NP फलम्/NP नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखम्/NP आह/KP भवान्/SN ,/PUNC न/AN अप्रसूतफलस्य/NP इति/AUD ।/PUNC अथ/AVK सर्वम्/SN एव/INTF पूर्वकृतम्/KN दुरितम्/KN प्रसूतफलम्/NP एव/INTF इति/AUD मन्यते/KP भवान्/SN ,/PUNC ततः/A नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखम्/NP एव/INTF फलम्/NP इति/AUD विशेषणम्/NP अयुक्तम्/KN ।/PUNC नित्यकर्मविध्यानर्थक्यप्रसङ्गः/NP च/APY ,/PUNC उपभोगेन/NP एव/INTF प्रसूतफलस्य/NP दुरितकर्मणः/NP क्षयोपपत्तेः/NP ।/PUNC किञ्च/SN ,/PUNC श्रुतस्य/NP नित्यस्य/NP कर्मणः/NP दुःखम्/NP चेत्/AVK फलम्/NP ,/PUNC नित्यकर्मानुष्ठानायासात्/NP एव/INTF तत्/SN दृश्यते/KP व्यायामादिवत्/A ;/PUNC तत्/SN अन्यस्य/SN इति/AUD कल्पनानुपपत्तिः/NP ।/PUNC जीवनादिनिमित्ते/NP च/APY विधानात्/NP ,/PUNC नित्यानाम्/NP कर्मणाम्/NP प्रायश्चित्तवत्/A ,/PUNC पूर्वकृतदुरितफलत्वानुपपत्तिः/NP ।/PUNC यस्मिन्/SN पापकर्मणि/NP निमित्ते/NP यत्/SN विहितम्/KN प्रायश्चित्तम्/NP न/AN तु/A तस्य/SN पापस्य/NP तत्/SN फलम्/NP ।/PUNC अथ/AVK तस्य/SN एव/INTF पापस्य/NP निमित्तस्य/NP प्रायश्चित्तदुःखम्/NP फलम्/NP ,/PUNC जीवनादिनिमित्ते/NP अपि/AVK नित्यकर्मानुष्ठानायासदुःखम्/NP जीवनादिनिमित्तस्य/NP एव/INTF फलम्/NP प्रसज्येत/NP ,/PUNC नित्यप्रायश्चित्तयोः/NP नैमित्तिकत्वाविशेषात्/NP ।/PUNC किञ्च/SN अन्यत्/SN -/PUNC नित्यस्य/NP काम्यस्य/NP च/APY अग्निहोत्रादेः/NP अनुष्ठानायासदुःखस्य/NP तुल्यत्वात्/NP नित्यानुष्ठानायासदुःखम्/NP एव/INTF पूर्वकृतदुरितस्य/NP फलम्/NP ,/PUNC न/AN तु/A काम्यानुष्ठानायासदुःखम्/NP इति/AUD विशेषः/NP न/AN अस्ति/KP इति/AUD तत्/SN अपि/AVK पूर्वकृतदुरितफलम्/NP प्रसज्येत/NP ।/PUNC तथा/AVK च/AVK सति/A नित्यानाम्/NP फलाश्रवणात्/NP तद्विधानान्यथानुपपत्तेः/NP च/AVK नित्यानुष्ठानायासदुःखम्/NP पूर्वकृतदुरितफलम्/NP इति/AUD अर्थापत्तिकल्पना/NP च/AVK अनुपपन्ना/NP ,/PUNC एवम्/AUD विधानान्यथानुपपत्तेः/NP अनुष्ठानायासदुःखव्यतिरिक्तफलत्वानुमानात्/NP च/APY नित्यानाम्/NP ।/PUNC विरोधात्/NP च/APY ;/PUNC विरुद्धम्/NP च/APY इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC नित्यकर्मणि/NP अनुष्ठीयमाने/NP अन्यस्य/SN कर्मणः/NP फलम्/NP भुज्यते/KP इति/AUD अभ्युपगम्यमाने/NP सः/SN एव/INTF उपभोगः/NP नित्यस्य/NP कर्मणः/NP फलम्/NP इति/AUD ,/PUNC नित्यस्य/NP कर्मणः/NP फलाभावः/NP इति/AUD च/AVK विरुद्धम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC किञ्च/SN ,/PUNC काम्याग्निहोत्रादौ/NP अनुष्ठीयमाने/NP नित्यम्/NP अपि/AVK अग्निहोत्रादि/NP तन्त्रेण/NP एव/INTF अनुष्ठितम्/KN भवति/KP इति/AUD तदायासदुःखेन/NP एव/INTF काम्याग्निहोत्रादिफलम्/NP उपक्षीणम्/NP स्यात्/KP ,/PUNC तत्/SN तन्त्रत्वात्/NP ।/PUNC अथ/AVK काम्याग्निहोत्रादिफलम्/NP अन्यत्/SN एव/INTF स्वर्गादि/NP ,/PUNC तदनुष्ठानायासदुःखम्/NP अपि/AVK भिन्नम्/NP प्रसज्येत/NP ।/PUNC न/AN च/APY तत्/SN अस्ति/KP ,/PUNC दृष्टविरोधात्/NP ;/PUNC न/AN हि/A काम्यानुष्ठानायासदुःखात्/NP केवलनित्यानुष्ठानायासदुःखम्/NP भिन्नम्/NP दृश्यते/KP ।/PUNC किञ्च/SN अन्यत्/SN -/PUNC अविहितम्/KN अप्रतिषिद्धम्/NP च/APY कर्म/NP तत्कालफलम्/NP ,/PUNC न/AN तु/A शास्त्रचोदितम्/KN प्रतिषिद्धम्/NP वा/AVK तत्कालफलम्/NP भवेत्/KP ।/PUNC तदा/A स्वर्गादिषु/NP अपि/AVK अदृष्टफलाशासने/NP उद्यमः/NP न/AN स्यात्/KP -/PUNC अग्निहोत्रादीनाम्/NP एव/INTF कर्मस्वरूपाविशेषे/NP अनुष्ठानायासदुःखमात्रेण/NP उपक्षयः/NP नित्यानाम्/NP ;/PUNC स्वर्गादिमहाफलत्वम्/NP काम्यानाम्/NP ,/PUNC अङ्गेतिकर्तव्यताद्याधिक्ये/NP तु/A असति/A ,/PUNC फलकामित्वमात्रेण/NP इति/AUD न/AN शक्यम्/NP कल्पयितुम्/KKS ।/PUNC तस्मात्/SN च/AVK न/AN नित्यानाम्/NP कर्मणाम्/NP अदृष्टफलाभावः/NP कदाचित्/A अपि/APY उपपद्यते/KP ।/PUNC अतः/AVK च/AVK अविद्यापूर्वकस्य/NP कर्मणः/NP विद्या/NP एव/INTF शुभस्य/NP अशुभस्य/NP वा/APY क्षयकारणम्/NP अशेषतः/NP ,/PUNC न/AN नित्यकर्मानुष्ठानम्/NP ।/PUNC अविद्याकामबीजम्/NP हि/A सर्वम्/SN एव/INTF कर्म/NP ।/PUNC तथा/AVK च/AVK उपपादितम्/NP अविद्वद्विषयम्/NP कर्म/NP ,/PUNC विद्वद्विषया/NP च/AVK सर्वकर्मसंन्यासपूर्विका/NP ज्ञाननिष्ठा/NP -/PUNC '/PUNC उभौ/NV तौ/SN न/AN विजानीतः/KN (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 19/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC वेदाविनाशिनम्/NP नित्यम्/NP (/PUNC गीता/NS 2/PUNC ।/PUNC 21/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC ज्ञानयोगेन/NP सांख्यानाम्/NP कर्मयोगेन/NP योगिनाम्/NP (/PUNC गीता/NS 3/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC अज्ञानाम्/NP कर्मसङ्गिनाम्/NP (/PUNC गीता/NS 3/PUNC ।/PUNC 26/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC तत्त्ववित्/KN तु/A महाबाहो/NP ..../PUNC गुणाः/NP गुणेषु/NP वर्तन्ते/KP इति/AUD मत्वा/KKS न/AN सज्जते/KP (/PUNC गीता/NS 3/PUNC ।/PUNC 28/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC सर्वकर्माणि/NP मनसा/NP संन्यस्य/NP आस्ते/KP (/PUNC गीता/NS 5/PUNC ।/PUNC 13/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC न/AN एव/INTF किञ्चित्/SN करोमि/KP इति/AUD युक्तः/KN मन्येत/KP तत्त्ववित्/KN '/PUNC ,/PUNC अर्थात्/AVK अज्ञः/NP करोमि/KP इति/AUD ;/PUNC आरुरुक्षोः/NP कर्म/NP कारणम्/NP ,/PUNC आरूढस्य/KKS योगस्थस्य/NP शमः/NP एव/INTF कारणम्/NP ;/PUNC उदाराः/NP त्रयः/SMKY अपि/APY अज्ञाः/NP ,/PUNC '/PUNC ज्ञानी/NP तु/A आत्मा/NP एव/INTF मे/SN मतम्/NP (/PUNC गीता/NS 7/PUNC ।/PUNC 18/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC अज्ञाः/NP कर्मिणः/NP गतागतम्/KN कामकामाः/NP लभन्ते/KP '/PUNC ;/PUNC अनन्याः/NP चिन्तयन्तः/KP माम्/SN नित्ययुक्ताः/KN यथोक्तम्/KN आत्मानम्/NP आकाशकल्पम्/NP उपासते/KP ;/PUNC '/PUNC ददामि/KP बुद्धियोगम्/NP तम्/SN येन/SN माम्/SN उपयान्ति/KP ते/SN (/PUNC गीता/NS 10/PUNC ।/PUNC 10/PUNC )/PUNC '/PUNC ,/PUNC अर्थात्/AVK न/AN कर्मिणः/NP अज्ञाः/NP उपयान्ति/KP ।/PUNC भगवत्कर्मकारिणः/NP ये/SN युक्ततमाः/NP अपि/APY कर्मिणः/NP अज्ञाः/NP ,/PUNC ते/SN उत्तरोत्तरहीनफलत्यागावसानसाधनाः/NP ;/PUNC अनिर्देश्याक्षरोपासकाः/NP तु/A '/PUNC अद्वेष्टा/NP सर्वभूतानाम्/NP (/PUNC गीता/NS 12/PUNC ।/PUNC 13/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD आध्यायपरिसमाप्ति/NP उक्तसाधनाः/NP क्षेत्राध्यायाद्यध्यायत्रयोक्तज्ञानसाधनाः/NP च/AVK ।/PUNC अधिष्ठानादिपञ्चकहेतुकसर्वकर्मसंन्यासिनाम्/NP आत्मैकत्वाकर्तृत्वज्ञानवताम्/NP परस्याम्/NP ज्ञाननिष्ठायाम्/NP वर्तमानानाम्/NP भगवत्तत्त्वविदाम्/NP अनिष्टादिकर्मफलत्रयम्/NP परमहंसपरिव्राजकानाम्/NP एव/INTF लब्धभगवत्स्वरूपात्मैकत्वशरणानाम्/NP न/AN भवति/KP ;/PUNC भवति/KP एव/INTF अन्येषाम्/SNV अज्ञानाम्/NP कर्मिणाम्/NP असंन्यासिनाम्/NP इति/AUD एषः/SNV गीता/NS शास्त्रोक्तकर्तव्यार्थस्य/NP विभागः/NP ।।/PUNC अविद्यापूर्वकत्वम्/NP सर्वस्य/SN कर्मणः/NP असिद्धम्/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC ब्रह्महत्यादिवत्/A ।/PUNC यद्यपि/AVK शास्त्रावगतम्/NP नित्यम्/NP कर्म/NP ,/PUNC तथा/AVK अपि/AVK अविद्यावतः/KN एव/INTF भवति/KP ।/PUNC यथा/AVK प्रतिषेधशास्त्रावगतम्/NP अपि/AVK ब्रह्महत्यादिलक्षणम्/NP कर्म/NP अनर्थकारणम्/NP अविद्याकामादिदोषवतः/KN भवति/KP ,/PUNC अन्यथा/AVK प्रवृत्त्यनुपपत्तेः/NP ,/PUNC तथा/AVK नित्यनैमित्तिककाम्यानि/NP अपि/AVK इति/AUD ।/PUNC देहव्यतिरिक्तात्मनि/NP अज्ञाते/NP प्रवृत्तिः/NP नित्यादिकर्मसु/NP अनुपपन्ना/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC चलनात्मकस्य/NP कर्मणः/NP अनात्मकर्तृकस्य/NP '/PUNC अहम्/SN करोमि/KP '/PUNC इति/AUD प्रवृत्तिदर्शनात्/NP ।/PUNC देहादिसंघाते/NP अहंप्रत्ययः/NP गौणः/NP ,/PUNC न/AN मिथ्या/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC तत्कार्येषु/NP अपि/AVK गौणत्वोपपत्तेः/NP ।/PUNC आत्मीये/NP देहादिसंघाते/NP अहंप्रत्ययः/NP गौणः/NV ;/PUNC यथा/AVK आत्मीये/NP पुत्रे/NP '/PUNC आत्मा/NP वै/SN पुत्रनामा/NP असि/KP (/PUNC तै0/NS सं0/NS 2/PUNC ।/PUNC 11/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD ,/PUNC लोके/NP च/APY '/PUNC मम/SN प्राणः/NP एव/INTF अयम्/SN गौः/NP '/PUNC इति/AUD ,/PUNC तद्वत्/KN ।/PUNC न/AN एव/INTF अयम्/SN मिथ्याप्रत्ययः/NP ।/PUNC मिथ्याप्रत्ययः/NP तु/A स्थाणुपुरुषयोः/NP अगृह्यमाणविशेषयोः/NP ।/PUNC न/AN गौणप्रत्ययस्य/NP मुख्यकार्यार्थता/NP ,/PUNC अधिकरणस्तुत्यर्थत्वात्/NP लुप्तोपमाशब्देन/NP ।/PUNC यथा/AVK '/PUNC सिंहः/NV देवदत्तः/NS '/PUNC '/PUNC अग्निः/NV माणवकः/NS '/PUNC इति/AUD सिंहः/NP इव/ASD अग्निः/NP इव/ASD क्रौर्यपैङ्गल्यादिसामान्यवत्त्वात्/NP देवदत्तमाणवकाधिकरणस्तुत्यर्थम्/NP एव/INTF ,/PUNC न/AN तु/A सिंहकार्यम्/NP अग्निकार्यम्/NP वा/AVK गौणशब्दप्रत्ययनिमित्तम्/NP किञ्चित्/SN साध्यते/KP ;/PUNC मिथ्याप्रत्ययकार्यम्/NP तु/A अनर्थम्/NP अनुभवति/KP इति/AUD ।/PUNC गौणप्रत्ययविषयम्/NP जानाति/KP '/PUNC न/AN एषः/SNV सिंहः/NP देवदत्तः/NS '/PUNC ,/PUNC तथा/AVK '/PUNC न/AN अयम्/SN अग्निः/NP माणवकः/NS '/PUNC इति/AUD ।/PUNC तथा/AVK गौणेन/NP देहादिसंघातेन/NP आत्मना/NP कृतम्/KN कर्म/NP न/AN मुख्येन/NP अहंप्रत्ययविषयेण/NP आत्मना/NP कृतम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC न/AN हि/A गौणसिंहाग्निभ्याम्/NP कृतम्/KN कर्म/NP मुख्यसिंहाग्निभ्याम्/NP कृतम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC न/AN च/AVK क्रौर्येण/NP पैङ्गल्येन/NP वा/APY मुख्यसिंहाग्न्योः/NP कार्यम्/NP किञ्चित्/SN क्रियते/KP ,/PUNC स्तुत्यर्थत्वेन/NP उपक्षीणत्वात्/NP ।/PUNC स्तूयमानौ/NP च/APY जानीतः/KN '/PUNC न/AN अहम्/SN सिंहः/NP '/PUNC '/PUNC न/AN अहम्/SN अग्निः/NP '/PUNC इति/AUD ;/PUNC न/AN हि/A '/PUNC सिंहस्य/NP कर्म/NP मम/NP अग्नेः/NP च/APY '/PUNC इति/AUD ।/PUNC तथा/AVK '/PUNC न/AN संघातस्य/NP कर्म/NP मम/SN मुख्यस्य/NP आत्मनः/NP '/PUNC इति/AUD प्रत्ययः/NP युक्ततरः/NP स्यात्/KP ;/PUNC न/AN पुनः/A '/PUNC अहम्/SN कर्ता/NP मम/SN कर्म/NP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC यत्/SN च/APY आहुः/KP '/PUNC आत्मीयैः/NP स्मृतीच्छाप्रयत्नैः/NP कर्महेतुभिः/NP आत्मा/NP कर्म/NP करोति/KP '/PUNC इति/AUD ,/PUNC न/AN ;/PUNC तेषाम्/SN मिथ्याप्रत्ययपूर्वकत्वात्/NP ।/PUNC मिथ्याप्रत्ययनिमित्तेष्टानिष्टानुभूतक्रियाफलजनितसंस्कारपूर्वकाः/NP हि/A स्मृतीच्छाप्रयत्नादयः/NP ।/PUNC यथा/AVK अस्मिन्/SN जन्मनि/NP देहादिसंघाताभिमानरागद्वेषादिकृतौ/NP धर्माधर्मौ/NP तत्/SN फलानुभवः/NP च/AVK ,/PUNC तथा/AVK अतीते/NP अतीततरे/NP अपि/AVK जन्मनि/NP इति/AUD अनादिः/NP अविद्याकृतः/KN संसारः/NP अतीतः/NP अनागतः/KN च/APY अनुमेयः/NP ।/PUNC ततः/A च/AVK सर्वकर्मसंन्याससहितज्ञाननिष्ठायाम्/NP आत्यन्तिकः/NP संसारोपरमः/NP इति/AUD सिद्धम्/KN ।/PUNC अविद्यात्मकत्वात्/NP च/AVK देहाभिमानस्य/NP ,/PUNC तन्निवृत्तौ/KN देहानुपपत्तेः/NP संसारानुपपत्तिः/NP ।/PUNC देहादिसंघाते/NP आत्माभिमानः/NP अविद्यात्मकः/NP ।/PUNC न/AN हि/A लोके/NP '/PUNC गवादिभ्यः/NP अन्यः/SN अहम्/SN ,/PUNC मत्तः/KN च/APY अन्ये/SN गवादयः/NP '/PUNC इति/AUD जानन्/NP तान्/SN '/PUNC अहम्/SN '/PUNC इति/AUD मन्यते/KP कश्चित्/SN ।/PUNC अजानन्तु/KP स्थाणौ/NP पुरुषविज्ञानवत्/A अविवेकतः/NP देहादिसंघाते/NP कुर्यात्/KP '/PUNC अहम्/SN '/PUNC इति/AUD प्रत्ययम्/NP ,/PUNC न/AN विवेकतः/NP जानन्/NP ।/PUNC यः/SN तु/A '/PUNC आत्मा/NP वै/SNV पुत्र/NP नामा/NP असि/KP (/PUNC तै/NS ./PUNC सं/NS ./PUNC ।/PUNC 11/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD पुत्रे/NP अहंप्रत्ययः/NP ,/PUNC सः/SN तु/A जन्यजनकसंबन्धनिमित्तः/NP गौणः/NP ।/PUNC गौणेन/NP च/APY आत्मना/NP भोजनादिवत्/ASD परमार्थकार्यम्/NP न/AN शक्यते/KP कर्तुम्/KKS ,/PUNC गौणसिंहाग्निभ्याम्/NP मुख्यसिंहाग्निकार्यवत्/A ।।/PUNC अदृष्टविषयचोदनाप्रामाण्यात्/NP आत्मकर्तव्यम्/KN गौणैः/NP देहेन्द्रियात्मभिः/NP क्रियते/KP एव/INTF इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC अविद्याकृतात्मत्वात्तेषाम्/NP ।/PUNC न/AN च/APY गौणाः/NP आत्मानः/NP देहेन्द्रियादयः/NP  ;/PUNC किम्/AP तर्हि/AVK ?/PUNC मिथ्या/NP प्रत्ययेन/NP एव/INTF अनात्मानः/NP सन्तः/KP आत्मत्वम्/NP आपाद्यन्ते/KP ,/PUNC तद्भावे/NP भावात्/NP ,/PUNC तदभावे/NP च/APY अभावात्/NP ।/PUNC अविवेकिनाम्/NP हि/A अज्ञानकाले/NP बालानाम्/NP दृश्यते/KP '/PUNC दीर्घः/NV अहम्/SN '/PUNC '/PUNC गौरः/NV अहम्/SN '/PUNC इति/AUD देहादिसंघाते/NP अहंप्रत्ययः/NP ।/PUNC न/AN तु/A विवेकिनाम्/NP '/PUNC अन्यःअहम्/NP देहादिसंघातात्/NP '/PUNC इति/AUD जानताम्/KP तत्काले/NP देहादिसंघाते/NP अहंप्रत्ययः/NP भवति/KP ।/PUNC तस्मात्/SN मिथ्याप्रत्ययाभावे/NP अभावात्/NP तत्कृतः/KN एव/INTF ,/PUNC न/AN गौणः/NP ।/PUNC पृथग्गृह्यमाणविशेषसामान्ययोः/NP हि/A सिंहदेवदत्तयोः/NP अग्निमाणवकयोः/NP वा/AVK गौणः/NP प्रत्ययः/NP शब्दप्रयोगो/NP वा/AVK स्यात्/KP ,/PUNC न/AN अगृह्यमाणविशेषसामान्ययोः/NP ।/PUNC यत्/SN तु/A उक्तम्/KN '/PUNC श्रुतिप्रामाण्यात्/NP '/PUNC इति/AUD ,/PUNC तत्/SN न/AN ;/PUNC तत्प्रामाण्यस्य/NP अदृष्टविषयत्वात्/NP ।/PUNC प्रत्यक्षादिप्रमाणानुपलब्धे/NP हि/A विषये/NP अग्निहोत्रादिसाध्यसाधनसंबन्धे/NP श्रुतेः/KP प्रामाण्यम्/NP ,/PUNC न/AN प्रत्यक्षादिविषये/NP ,/PUNC अदृष्टदर्शनार्थविषयत्वात्/NP प्रामाण्यस्य/NP ।/PUNC तस्मात्/SN न/AN दृष्टमिथ्याज्ञाननिमित्तस्य/NP अहंप्रत्ययस्य/NP देहादिसंघाते/NP गौणत्वम्/NP कल्पयितुम्/KKS शक्यम्/NP ।/PUNC न/AN हि/A श्रुति/NP शतम्/SMKY अपि/APY '/PUNC शीतः/NP अग्निः/NP अप्रकाशः/NV वा/APY '/PUNC इति/AUD ब्रुवत्/KP प्रामाण्यम्/NP उपैति/KP ।/PUNC यदि/AVK ब्रूयात्/KP '/PUNC शीतः/NP अग्निः/NP अप्रकाशः/NV वा/APY '/PUNC इति/AUD ,/PUNC तथा/AVK अपि/AVK अर्थान्तरम्/NP श्रुतेः/KP विवक्षितम्/KN कल्प्यम्/NP ,/PUNC प्रामाण्यान्यथानुपपत्तेः/NP ,/PUNC न/AN तु/A प्रमाणान्तरविरुद्धम्/NP स्ववचनविरुद्धम्/NP वा/AVK ।/PUNC कर्मणः/NP मिथ्याप्रत्ययवत्कर्तृकत्वात्/NP कर्तुः/KP अभावे/NP श्रुतेः/KP अप्रामाण्यम्/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC ब्रह्मविद्यायाम्अर्थवत्त्वोपपत्तेः/NP ।।/PUNC कर्मविधिश्रुतिवत्/NP ब्रह्मविद्याविधिश्रुतेः/NP अपि/AVK अप्रामाण्यप्रसङ्गः/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC बाधकप्रत्ययानुपपत्तेः/NP ।/PUNC यथा/AVK ब्रह्मविद्याविधिश्रुत्या/NP आत्मनि/NP अवगते/KN देहादिसंघाते/NP अहंप्रत्ययः/NP बाध्यते/KP ,/PUNC तथा/AVK आत्मनि/NP एव/INTF आत्मावगतिः/NP न/AN कदाचित्/A केनचित्/SN कथञ्चित्/SN अपि/APY बाधितुम्/KKS शक्या/NP ,/PUNC फलाव्यतिरेकात्/NP अवगतेः/KN ,/PUNC यथा/AVK अग्निः/NP उष्णः/NP प्रकाशः/NV च/APY इति/AUD ।/PUNC न/AN च/AVK एवम्/AUD कर्मविधि/NP श्रुतेः/KP अप्रामाण्यम्/NP ,/PUNC पूर्वपूर्वप्रवृत्तिनिरोधेन/NP उत्तरोत्तरापूर्वप्रवृत्तिजननस्य/NP प्रत्यगात्माभिमुख्येन/NP प्रवृत्त्युत्पादनार्थत्वात्/NP ।/PUNC मिथ्यात्वे/NP अपि/AVK उपायस्य/NP उपेयसत्यतया/NP सत्यत्वम्/NP एव/INTF स्यात्/KP ,/PUNC यथा/AVK अर्थवादानाम्/NP विधिशेषाणाम्/NP ;/PUNC लोके/NP अपि/AVK बालोन्मत्तादीनाम्/NP पय/NP आदौ/NP पाययितव्ये/KN चूडावर्धनादिवचनम्/NP ।/PUNC प्रकारान्तरस्थानाम्/NP च/AVK साक्षात्/NP एव/INTF वा/AVK प्रामाण्यम्/NP सिद्धम्/KN ,/PUNC प्रागात्मज्ञानात्/NP देहाभिमाननिमित्तप्रत्यक्षादिप्रामाण्यवत्/NP ।/PUNC यत्/SN तु/A मन्यसे/KP -/PUNC स्वयम्/SN अव्याप्रियमाणः/NP अपि/APY आत्मा/NP संनिधिमात्रेण/NP करोति/KP ,/PUNC तत्/SN एव/INTF मुख्यम्/NP कर्तृत्वम्/NP आत्मनः/NP ;/PUNC यथा/AVK राजा/NP युध्यमानेषु/NP योधेषु/NP युध्यते/KP इति/AUD प्रसिद्धम्/KN स्वयम्/SN अयुध्यमानः/NP अपि/AVK संनिधानात्/NP एव/INTF जितः/KN पराजितः/KN च/APY इति/AUD ,/PUNC तथा/AVK सेनापतिः/NP वाचा/KP एव/INTF करोति/KP ;/PUNC क्रियाफलसंबन्धः/NP च/AVK राज्ञः/NP सेनापतेः/NP च/APY दृष्टः/KN ।/PUNC यथा/AVK च/AVK ऋत्विक्कर्म/NP यजमानस्य/NP ,/PUNC तथा/AVK देहादीनाम्/NP कर्म/NP आत्मकृतम्/KN स्यात्/KP ,/PUNC फलस्य/NP आत्मगामित्वात्/NP ।/PUNC यथा/AVK च/AVK भ्रामकस्य/NP लोहभ्रामयितृत्वात्/NP  अव्यापृतस्य/NP एव/INTF मुख्यम्/NP एव/INTF कर्तृत्वम्/NP ,/PUNC तथा/AVK च/AVK आत्मनः/NP इति/AUD ।/PUNC तत्/SN असत्/NP ;/PUNC अकुर्वतः/KP कारकत्वप्रसङ्गात्/NP ।/PUNC कारकम्/NP अनेकप्रकारम्/NP इति/AUD चेत्/AVK ,/PUNC न/AN ;/PUNC राजप्रभृतीनाम्/NP मुख्यस्य/NP अपि/AVK कर्तृत्वस्य/NP दर्शनात्/NP ।/PUNC राजा/NP तावत्/SN स्वव्यापारेण/NP अपि/AVK युध्यते/KP ;/PUNC योधानाम्/NP च/AVK योधयितृत्वे/NP धनदाने/NP च/AVK मुख्यम्/NP एव/INTF कर्तृत्वम्/NP ,/PUNC तथा/AVK जयपराजयफलोपभोगे/NP ।/PUNC यजमानस्य/NP अपि/AVK प्रधानत्यागे/NP दक्षिणादाने/NP च/AVK मुख्यम्/NP एव/INTF कर्तृत्वम्/KN ।/PUNC तस्मात्/SN अव्यापृतस्य/NP कर्तृत्वोपचारो/NP यः/SSN ,/PUNC सः/SSN गौणः/NP इति/AUD अवगम्यते/KP ।/PUNC यदि/AVK मुख्यम्/NV कर्तृत्वम्/NP स्वव्यापारलक्षणम्/NP न/AN उपलभ्यते/KP राजयजमान/NP प्रभृतीनाम्/NP ,/PUNC तदा/A संनिधिमात्रेण/NP अपि/AVK कर्तृत्वम्/NP मुख्यम्/NV परिकल्प्येत/KP ;/PUNC यथा/AVK भ्रामकस्य/NP लोहभ्रामणेन/NP ,/PUNC न/AN तथा/AVK राजयजमानादीनाम्/NP स्वव्यापारः/NP न/AN उपलभ्यते/KP ।/PUNC तस्मात्/SN संनिधिमात्रेण/NP कर्तृत्वम्/NP गौणम्/NV एव/INTF ।/PUNC तथा/AVK च/AVK सति/A तत्फलसंबन्धः/NP अपि/AVK गौणः/NP एव/INTF स्यात्/KP ।/PUNC न/AN गौणेन/NP मुख्यम्/NV कार्यम्/NP निर्वर्त्यते/KP ।/PUNC तस्मात्/SN असत्/NP एव/INTF तत्/SN गीयते/KP '/PUNC देहादीनाम्/NP व्यापारेण/NP अव्यापृतः/NP आत्मा/NP कर्ता/NP भोक्ता/KN च/APY स्यात्/KP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC भ्रान्तिनिमित्तम्/NP तु/A सर्वम्/SN उपपद्यते/KP ,/PUNC यथा/AVK स्वप्ने/NP ;/PUNC मायायाम्/NP च/AVK एवम्/AUD ।/PUNC न/AN च/AVK देहाद्यात्मप्रत्ययभ्रान्तिसंतानविच्छेदेषु/NP सुषुप्तिसमाध्यादिषु/NP कर्तृत्वभोक्तृत्वाद्यनर्थः/NP उपलभ्यते/KP ।/PUNC तस्मात्/SN भ्रान्तिप्रत्ययनिमित्तः/NP एव/INTF अयम्/SN संसारभ्रमः/NP ,/PUNC न/AN तु/A परमार्थः/NP ;/PUNC इति/AUD सम्यग्दर्शनात्/NP अत्यन्तः/NP एव/INTF उपरमः/NP इति/AUD सिद्धम्/KN ।।/PUNC सर्वम्/SN गीताशास्त्रार्थम्/NP उपसंहृत्य/KKS अस्मिन्/SN अध्याये/NP ,/PUNC विशेषतः/NP च/APY अन्ते/NP ,/PUNC इह/A शास्त्रार्थदार्ढ्याय/KKS संक्षेपतः/NP उपसंहारम्/NP कृत्वा/KKS ,/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A शास्त्रसंप्रदायविधिम्/NP आह/KP -/PUNC
इदम्/SN ते/SN न/AN अतपस्काय/NP न/AN अभक्ताय/KKS कदाचन/A ।/PUNC
न/AN च/APY अशुश्रूषवे/NP वाच्यम्/NP न/AN च/AVK माम्/SN यः/SN अभ्यसूयति/KP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 67/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 67/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इदम्/SNV शास्त्रम्/NP ते/SN तव/SN हिताय/KKS मया/SN उक्तम्/KN संसारविच्छित्तये/NP अतपस्काय/NP तपोरहिताय/NP न/AN वाच्यम्/NP इति/AUD व्यवहितेन/NP संबध्यते/KP ।/PUNC तपस्विने/NP अपि/AVK अभक्ताय/KN गुरौ/NP देवे/NP च/APY भक्तिरहिताय/NP कदाचन/SN कस्यांचित्/SN अपि/AVK अवस्थायाम्/NP न/AN वाच्यम्/NP ।/PUNC भक्तः/KN तपस्वी/NP अपि/APY सन्/KKS अशुश्रूषुः/NP यः/SN भवति/KP तस्मै/SN अपि/AVK न/AN वाच्यम्/NP ।/PUNC न/AN च/APY यः/SN माम्/SN वासुदेवम्/NS प्राकृतम्/NP मनुष्यम्/NP मत्वा/KKS अभ्यसूयति/KP आत्मप्रशंसादिदोषाध्यारोपणेन/NP ईश्वरत्वम्/NP मम/SN अजानन्/NP न/AN सहते/KP ,/PUNC असौ/SN अपि/AVK अयोग्यः/NP ,/PUNC तस्मै/SN अपि/AVK न/AN वाच्यम्/NP ।/PUNC भगवति/NP अनसूयायुक्ताय/KN तपस्विने/NP भक्ताय/KKS शुश्रूषवे/NP वाच्यम्/NP शास्त्रम्/NP इति/AUD सामर्थ्यात्/NP गम्यते/KP ।/PUNC तत्र/A '/PUNC मेधाविने/NV तपस्विने/NP वा/APY '/PUNC इति/AUD अनयोः/SN विकल्पदर्शनात्/NP शुश्रूषाभक्तियुक्ताय/NP तपस्विने/NP तद्युक्ताय/KKS मेधाविने/NP वा/AVK वाच्यम्/NP ।/PUNC शुश्रूषाभक्तिवियुक्ताय/NP न/AN तपस्विने/NP न/AN अपि/AVK मेधाविने/NP वाच्यम्/NP ।/PUNC भगवति/NP असूयायुक्ताय/KN समस्तगुणवते/KN अपि/AVK न/AN वाच्यम्/NP ।/PUNC गुरुशुश्रूषाभक्तिमते/NP च/AVK वाच्यम्/NP इति/AUD एषः/SNV शास्त्रसंप्रदायविधिः/NP ।।/PUNC
संप्रदायस्य/NP कर्तुः/KP फलम्/NP इदानीम्/A आह/KP -/PUNC
यः/SN इमम्/SN परमम्/SNV गुह्यम्/NP मद्भक्तेषु/KN अभिधास्यति/KP ।/PUNC
भक्तिम्/KN मयि/SN पराम्/SN कृत्वा/KKS माम्/SN एव/INTF एष्यति/KP असंशयः/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 68/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 68/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यः/SN इमम्/SN यथोक्तम्/KN परमम्/SN परमनिः/NP श्रेयसार्थम्/NP केशवार्जुनयोः/NS संवादरूपम्/NP ग्रन्थम्/NP गुह्यम्/NP गोप्यत/KP मम्/SN मद्भक्तेषु/KN मयि/SN भक्तिमत्सु/KN अभिधास्यति/KP वक्ष्यति/KP ,/PUNC ग्रन्थतः/NP अर्थतः/NP च/APY स्थापयिष्यति/KP इत्यर्थः/NP ,/PUNC यथा/AVK त्वयि/SN मया/SN ।/PUNC भक्तेः/KN पुनः/A ग्रहणात्/NP भक्तिमात्रेण/NP केवलेन/NP शास्त्रसंप्रदाने/NP पात्रम्/NP भवति/KP इति/AUD गम्यते/KP ।/PUNC कथम्/NP अभिधास्यति/KP इति/AUD ,/PUNC उच्यते/KP -/PUNC भक्तिम्/KN मयि/SN पराम्/SN कृत्वा/KKS '/PUNC भगवतः/NP परमगुरोः/NV अच्युतस्य/NP शुश्रूषा/NP मया/SN क्रियते/KP '/PUNC इति/AUD एवम्/AUD कृत्वा/KKS इत्यर्थः/NP ।/PUNC तस्य/SN इदम्/SNV फलम्/NP -/PUNC माम्/SN एव/INTF एष्यति/KP मुच्यते/KP एव/INTF ।/PUNC असंशयः/NP अत्र/A संशयः/NP न/AN कर्तव्यः/KN ।।/PUNC
किञ्च/SN -/PUNC
न/AN च/AVK तस्मात्मनुष्येषु/NP कश्चित्मे/SN प्रियकृत्तमः/KN ।/PUNC
भविता/KP न/AN च/APY मे/SN तस्मात्/SN अन्यः/SNV प्रियतरः/NP भुवि/KP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 69/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 69/PUNC ।।/PUNC -/PUNC न/AN च/AVK तस्मात्/SN शास्त्रसंप्रदायकृतः/KN मनुष्येषु/NP मनुष्याणाम्/NP मध्ये/NP कश्चित्/SN मे/SN मम/SN प्रियकृत्तमः/KN अतिशयेन/NV प्रियकरः/NP ,/PUNC अन्यः/SNV प्रियकृत्तमः/NP ,/PUNC न/AN अस्ति/KP एव/INTF इत्यर्थः/NP वर्तमानेषु/NP ।/PUNC न/AN च/APY भविता/KP भविष्यति/KP अपि/AVK काले/NP तस्मात्/SN द्वितीयः/SMKY अन्यः/SNV प्रियतरः/NP प्रियकृत्तरः/NP भुवि/KP लोके/NP अस्मिन्/SN न/AN भविता/KP ।।/PUNC
यः/SN अपि/APY -/PUNC
अध्येष्यते/KP च/AVK यः/SN इमम्/SNV धर्म्यम्/NP संवादम्/NP आवयोः/KP ।/PUNC
ज्ञानयज्ञेन/NP तेन/SN अहम्/SN इष्टः/KN स्याम्/KP इति/AUD मे/SN मतिः/NP
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 70/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 70/PUNC ।।/PUNC -/PUNC अध्येष्यते/KP च/APY पठिष्यति/KP यः/SN इमम्/SNV धर्म्यम्/NP धर्मादनपेतम्/NP संवादरूपम्/NP ग्रन्थम्/NP आवयोः/KP ,/PUNC तेन/SN इदम्/SNV कृतम्/KN स्यात्/KP ।/PUNC ज्ञानयज्ञेन/NP -/PUNC विधिजपोपांशुमानसानाम्/NP यज्ञानाम्/NP ज्ञानयज्ञः/NP मानसत्वात्/NP विशिष्टतमः/NV इति/AUD यतः/A तेन/SN ज्ञानयज्ञेन/NP गीताशास्त्रस्य/NS अध्ययनम्/NP स्तूयते/KP ;/PUNC फलविधिः/NP एव/INTF वा/AVK ,/PUNC देवतादिविषयज्ञानयज्ञफलतुल्यम्/NP अस्य/SN फलम्/NP भवति/KP इति/AUD -/PUNC तेन/SN अध्ययनेन/NP अहम्/SN इष्टः/KN पूजितः/KN स्याम्/KP भवेयम्/KP इति/AUD मे/SN मम/SN मतिः/NP निश्चयः/NP ।।/PUNC
अथ/AVK श्रोतुः/KP इदम्/SNV फलम्/NP -/PUNC
श्रद्धावान्/KN अनसूयः/NP च/APY शृणुयात्/KP अपि/APY यः/SNV नरः/NP ।/PUNC
सः/SN अपि/APY मुक्तः/KN शुभान्/NV लोकान्/NP प्राप्नुयात्/KP पुण्यकर्मणाम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 71/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 71/PUNC ।।/PUNC -/PUNC श्रद्धावान्/KN श्रद्दधानः/NP अनसूयः/NP च/APY असूयावर्जितः/KN सन्/KKS इमम्/SNV ग्रन्थम्/NP शृणुयात्/KP अपि/AVK यः/SNV नरः/NP ,/PUNC अपि/APY शब्दात्/NP किमुत/AP अर्थज्ञानवान्/KN ,/PUNC सः/SN अपि/AVK पापात्/NP मुक्तः/KN शुभान्/NV प्रशस्तान्/NV लोकान्/NP प्राप्नुयात्/KP पुण्यकर्मणाम्/NP अग्निहोत्रादिकर्मवताम्/NP ।।/PUNC शिष्यस्य/NP शास्त्रार्थग्रहणाग्रहणविवेकबुभुत्सया/NP पृच्छति/KP ।/PUNC तदग्रहणे/NP ज्ञाते/NP पुनः/A ग्राहयिष्यामि/KP उपायान्तरेण/NP अपि/AVK इति/AUD प्रष्टुः/KNV अभिप्रायः/NP ।/PUNC यत्नान्तरम्/NP च/APY आस्थाय/KKS शिष्यस्य/NP कृतार्थता/NP कर्तव्या/KN इति/AUD आचार्यधर्मः/NP प्रदर्शितः/KN भवति/KP -/PUNC
कच्चित्/SN एतत्/SN श्रुतम्/KN पार्थ/NS त्वयाएकाग्रेण/NP चेतसा/AVK ।/PUNC
कच्चित्/SN अज्ञानसंमोहः/NP प्रनष्टः/KN ते/SN धनञ्जय/NS
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 72/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 72/PUNC ।।/PUNC -/PUNC कच्चित्/SN किम्/AP तत्/SN मया/SN उक्तम्/KN श्रुतम्/KN श्रवणेन/NP अवधारितम्/KN पार्थ/NS ,/PUNC त्वया/SN एकाग्रेण/NP चेतसा/AVK चित्तेन/NP ?/PUNC किम्/AP वा/AVK अप्रमादतः/NP ?/PUNC कच्चित्/SN अज्ञानसंमोहः/NP अज्ञाननिमित्तः/NP संमोहः/NP अविविक्तभावः/NP अविवेकः/NP स्वाभाविकः/NP किम्/AP प्रणष्टः/KN ?/PUNC यदर्थः/NP अयम्/SN शास्त्रश्रवणायासः/NP तव/SN ,/PUNC मम/SN च/AVK उपदेष्टृत्वायासः/NP प्रवृत्तः/KN ,/PUNC ते/SN तुभ्यम्/SN हे/ASMB धनञ्जय/NS ।।/PUNC
अर्जुनः/NS उवाच/KP -/PUNC 
नष्टः/KN मोहः/NP स्मृतिः/NP लब्धा/KKS त्वत्प्रसादात्/NP मया/SN अच्युत/KP ।/PUNC
स्थितः/KN अस्मि/NP गतसन्देहः/NP करिष्ये/KP वचनम्/NP तव/SN
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 73/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 73/PUNC ।।/PUNC -/PUNC नष्टः/KN मोहः/NP अज्ञानजः/NP समस्तसंसारानर्थहेतुः/NP ,/PUNC सागरः/NP इव/ASD दुरुत्तरः/NP ।/PUNC स्मृतिः/NP च/APY आत्मतत्त्वविषया/NP लब्धा/KKS ,/PUNC यस्याः/SN लाभात्/NP सर्वहृदयग्रन्थीनाम्/NP विप्रमोक्षः/NP ;/PUNC त्वत्प्रसादात्/NP तव/SN प्रसादात्/NP मया/SN त्वत्प्रसादम्/NP आश्रितेन/NP अच्युत/KP ।/PUNC अनेन/SN मोहनाशप्रश्नप्रतिवचनेन/NP सर्वशास्त्रार्थज्ञानफलम्/NP तावत्/SN एव/INTF इति/AUD निश्चितम्/NP दर्शितम्/KN भवति/KP ,/PUNC यतः/A ज्ञानात्/NP मोहनाशः/NP आत्मस्मृतिलाभः/NP च/APY इति/AUD ।/PUNC तथा/AVK च/AVK श्रुतौ/KN '/PUNC अनात्मवित्/NP शोचामि/KP (/PUNC छा0/NS उ0/NS 7/PUNC ।/PUNC 1/PUNC ।/PUNC 3/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD उपन्यस्य/NP आत्मज्ञानेन/NP सर्वग्रन्थीनाम्/NP विप्रमोक्षः/NP उक्तः/KN ;/PUNC '/PUNC भिद्यते/KP हृदयग्रन्थिः/NP (/PUNC मु0/NS उ0/NS 2/PUNC ।/PUNC 2/PUNC ।/PUNC 8/PUNC )/PUNC '/PUNC '/PUNC तत्र/A कः/SN मोहः/NP कः/SN शोकः/NP एकत्वम्/NP अनुपश्यतः/KP (/PUNC ई0/NS उ0/NS 7/PUNC )/PUNC '/PUNC इति/AUD च/AVK मन्त्रवर्णः/NP ।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A त्वच्छासने/NP स्थितः/KN अस्मि/KP गतसंदेहः/NP मुक्तसंशयः/NP ।/PUNC करिष्ये/KP वचनम्/NP तव/SN ।/PUNC अहम्/SN त्वत्प्रसादात्/NP कृतार्थः/NP ,/PUNC न/AN मे/SN कर्तव्यम्/KN अस्ति/KP इति/AUD अभिप्रायः/NP ।।/PUNC परिसमाप्तः/NP शास्त्रार्थः/NP ।/PUNC अथ/AVK इदानीम्/A कथासंबन्धप्रदर्शनार्थम्/NP संजयः/NS उवाच/KP -/PUNC
सञ्जयः/NS उवाच/KP -/PUNC
इति/AUD अहम्/SN वासुदेवस्य/NS पार्थस्य/NS च/APY महात्मनः/NP ।/PUNC
संवादम्/NP इमम्/SN अश्रौषम्/NP अद्भुतम्/KN रोमहर्षणम्/NP 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 74/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 74/PUNC ।।/PUNC -/PUNC इति/AUD एवम्/AUD अहम्/SN वासुदेवस्य/SN पार्थस्य/SN च/APY महात्मनः/NP संवादम्/NP इमम्/SNV यथोक्तम्/KN अश्रौषम्/NP श्रुतवान्/KN अस्मि/KP अद्भुतम्/KN अत्यन्तविस्मयकरम्/NV रोमहर्षणम्/NV रोमाञ्चकरम्/NV ।।/PUNC
तम्/SN च/APY इमम्/SN -/PUNC
व्यासप्रसादात्/NP श्रुतवान्/KN एतत्/SNV गुह्यम्/NP अहम्/SN परम्/SN ।/PUNC
योगम्/NP योगेश्वरात्/NP कृष्णात्/NS साक्षात्/NV कथयतः/KP स्वयम्/SN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 75/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 75/PUNC ।।/PUNC -/PUNC व्यासप्रसादात्/NP ततः/A दिव्यचक्षुः/NP लाभात्/KP श्रुतवान्/KN इमम्/SNV संवादम्/NP गुह्यतमम्/NP परम्/NV योगम्/NP ,/PUNC योगार्थत्वात्/NP ग्रन्थः/NP अपि/AVK योगः/NP ,/PUNC संवादम्/NP इमम्/SNV योगम्/NP एव/INTF वा/AVK योगेश्वरात्/NP कृष्णात्/NS साक्षात्/NV कथयतः/KP स्वयम्/SN ,/PUNC न/AN परम्परया/NP ।।/PUNC
राजन्/NP संस्मृत्य/KKS संस्मृत्य/DV संवादम्/NP इमम्/SN अद्भुतम्/KN ।।/PUNC
केशवार्जुनयोः/NS पुण्यम्/NP हृष्यामि/KP च/AVK मुहुः/NP मुहुः/DV 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 76/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 76/PUNC ।।/PUNC -/PUNC हे/ASMB राजन्/NP धृतराष्ट्र/NS ,/PUNC संस्मृत्य/KKS संस्मृत्य/DV प्रतिक्षणम्/NP संवादम्/NP इमम्/SNV अद्भुतम्/KN केशवार्जुनयोः/NS पुण्यम्/NP इमम्/SN श्रवणेन/NP अपि/APY पापहरम्/NP श्रुत्वा/KKS हृष्यामि/KP च/APY मुहुः/NP मुहुः/DV प्रतिक्षणम्/NP ।।/PUNC
तत्/SN च/AVK संस्मृत्य/KKS संस्मृत्य/DV रूपम्/NP अत्यद्भुतम्/KN हरेः/NP ।/PUNC
विस्मयः/NP मे/SN महान्/NV राजन्/NP हृष्यामि/KP च/APY पुनः/A 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 77/PUNC ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 77/PUNC ।।/PUNC -/PUNC तत्/SN च/AVK संस्मृत्य/KKS संस्मृत्य/DV रूपम्/NP अत्यद्भुतम्/KN हरेः/NP विश्वरूपम्/NP विस्मयः/NP मे/SN महान्/NV राजन्/NP ,/PUNC हृष्यामि/KP च/APY पुनः/A ।।/PUNC किम्/AP बहुना/NP -/PUNC 
यत्र/A योगेश्वरः/NV कृष्णः/NS यत्र/A पार्थः/NS धनुर्धरः/NV ।/PUNC
तत्र/A श्रीः/NV विजयः/NP भूतिः/KN ध्रुवा/NV नीतिः/NP मतिः/NP मम/SN 
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 78/PUNC ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमद्भगवद्गीतासुउपनिषत्सु/NS ब्रह्मविद्यायाम्/NP योगशास्त्रे/NP श्रीकृष्णार्जुनसंवादे/NS मोक्षयोगः/NP नाम/NP अष्टादशः/SMKY  अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC 18/PUNC ./PUNC 78/PUNC ।।/PUNC -/PUNC यत्र/A यस्मिन्/SN पक्षे/NP योगेश्वरः/NP सर्वयोगानाम्/NP ईश्वरः/NP ,/PUNC तत्प्रभवत्वात्/NP सर्वयोगबीजस्य/NP ,/PUNC कृष्णः/NS ,/PUNC यत्र/A पार्थः/NS यस्मिन्/SNV पक्षे/NP धनुर्धरः/NV गाण्डीवधन्वा/NS ,/PUNC तत्र/A श्रीः/NP तस्मिन्/SN पाण्डवानाम्/NP पक्षे/NP श्रीः/NV विजयः/NP ,/PUNC तत्र/A एव/INTF भूतिः/KN श्रियः/KKS विशेषः/NV विस्तारः/NP भूतिः/KN ,/PUNC ध्रुवा/NV अव्यभिचारिणी/NP नीतिः/NP नयः/NP ,/PUNC इति/AUD एवम्/AUD मतिः/NP मम/SN इति/AUD ।।/PUNC
इति/AUD श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य/NV श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य/NV श्रीमच्छङ्करभगवतः/NS कृतौ/KN श्रीमद्भगवद्गीताभाष्ये/NS अष्टादशः/SMKY अध्यायः/NP ।।/PUNC
।।/PUNC श्रीमद्भगवद्गीताशास्त्रम्/NS सम्पूर्णम्/NP ।।/PUNC
