﻿महर्षिः/NV अगस्त्यः/NS 1/PUNC 
अहाहा/ABS !/PUNC अगणिततारकाभिः/NP मण्डितम्/NV आकाशम्/NP अहो/ABS शोभनीयं/KNV विलोभनीयं/KNV च/APY ।/PUNC 
तारकासु/NP कांश्चन/SNV तारकापुञ्जान्/NP वयं/SN जानीमः/KP ,/PUNC यथा/AUD सप्तर्षयः/NP ,/PUNC ध्रुवः/NS ,/PUNC कृत्तिका/NS ।/PUNC 
गगने/NP प्रकाशमानाः/NV एताः/SNV तारकाः/NP यदा/SSN वयम्/SN एकदृष्ट्या/NP पश्यामः/KP तदा/SSN अलौकिकीम्/NP अनुभूतिं/NP प्राप्नुमः/KP ।/PUNC 
ताः/SNV तारकाः/NP स्वजीवनरहस्यं/NP कथयन्ति/KP इति/AUD भासते/KP ।/PUNC 
यथा/AUD आकाशे/NP उत्तरस्यां/NS दिशि/NP सप्तर्षयः/NP दृश्यन्ते/KP तथा/AUD दक्षिणाकाशे/NP एका/SMKY देदीप्यमाना/NV तारका/NP दृश्यते/KP ।/PUNC 
सा/SNV तारका/NP अगस्त्यः/NS इति/AUD नाम्ना/NP प्रसिद्धा/NV ।/PUNC 
लोकोत्तराणि/NV कार्याणि/NP कुर्वतां/KNV जनानां/NP स्थानम्/NP आकाशे/NP अस्ति/KP ।/PUNC 
अगस्त्यस्य/NS एतत्/SNV उच्चस्थानम्/NP एव/INTF तस्य/SN माहात्म्यं/NP प्रकटयति/KP ।/PUNC 

पुराणेषु/NP अगस्त्यसम्बन्धिन्यः/NP न/AN एकाः/SMKY कथाः/NP सन्ति/KP ।/PUNC 
ताभिः/SN अगस्त्यः/NS ,/PUNC धैर्यशीलः/NV ,/PUNC जनहितकर्ता/NV ,/PUNC दयालुः/NV ,/PUNC ऋषिः/NP आसीत्/KP इति/AUD 
ज्ञायते/KP ।/PUNC 
लघुमूर्तिः/NV बहुकीर्तिः/NV एषः/SNV ऋषिः/NP ।/PUNC 
स्वकर्तृत्वेन/NP अखिलमानवानां/NP कल्याणं/NP साधितं/KN तेन/SN ।/PUNC 

अग्निः/NP एव/INTF अगस्त्यः/NS 
देवदानवयोः/NP सनातनं/NP वैरं/NP तु/AUD सुप्रसिद्धम्/NP एव/INTF ।/PUNC 
तेषां/SN मध्ये/NP वारं/A वारं/DV युद्धानि/NP अभवन्/KP ।/PUNC 
क्वचित्/A देवानां/NP जयः/NP भवति/KP ,/PUNC क्वचित्/A असुराणाम्/NP ।/PUNC 
तेन/SNV त्रासितः/KN देवानाम्/NP अधिपतिः/NP इन्द्रः/NS एकदा/A अग्निदेवम्/NP आज्ञापयत्/KP –/PUNC हे/ASMB अग्ने/NS !/PUNC गच्छ/KP ,/PUNC दैत्यान्/NP अनुगम्य/KKS सर्वान्/SN निःशेषं/NP नाशय/KP इति/AUD ।/PUNC 
एवं/A प्राप्ते/KN आदेशे/NP वायुना/NP सह/A अग्निः/NP दैत्यान्/NP अन्वसरत्/KP ।/PUNC 
तयोः/SN दैत्यैः/NP सह/A तुमुलं/NV युद्धम्/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
बहूनां/SNV राक्षसाणां/NP संहारः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
तथा/A अपि/A केचन/SNV राक्षसाः/NP स्वप्राणान्/NP रक्षितुं/KKS समुद्रे/NP तिरोहिताः/KN अभवन्/KP ।/PUNC 
भीरवः/NV ते/SNV पलायिताः/KP ,/PUNC तिरोहिताः/NV च/A ।/PUNC 
अतः/A ते/SN पुनः/A देवान्/NP न/AN पीडयिष्यन्ति/KP इति/AUD मत्वा/KKS अग्निः/NP वायुः/NP च/A स्वगृहं/NP प्रत्यागतौ/KN ।/PUNC 

केचन/SN राक्षसाः/NP समुद्रे/NP आश्रयं/NP प्राप्तवन्तः/KN ,/PUNC तेषां/SN निःशेषनाशः/NP न/AN अभवत्/KP इति/AUD यदा/AVK देवराजः/NV इन्द्रः/NS ज्ञातवान्/KN तदा/AVK सः/SNV विषण्णः/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
सः/SN अग्निं/NP वायुं/NP च/A आहूतवान्/KN ।/PUNC 
कोपेन/NP अवदत्/KP च/AVK स्वीकृतं/KN दायित्वम्/NP अर्धं/NP त्यक्त्वा/KKS भवन्तौ/NP कथं/A प्रत्यागतवन्तौ/KN ।/PUNC 
गच्छताम्/KP इदानीम्/A एव/A ।/PUNC 
यदि/A आवश्यकं/NP भवेत्/KP समुद्रमन्थनम्/NP अपि/A कुरुताम्/KP ।/PUNC 
किन्तु/A समूलं/NP राक्षसान्/NP नष्टान्/KN कुरुताम्/KP ।/PUNC 
तेषां/SN नाम/NP अपि/A मा/AN तिष्ठतु/KP अस्मिन्/SN जगति/NP ।/PUNC 
एवं/AUD यदि/AVK समुद्रः/NP नामशेषः/NP भविष्यति/KP ,/PUNC भवतु/KP नाम/A इति/AUD ।/PUNC 

इन्द्रस्य/NS विचारशून्यं/NV वचनं/NP श्रुत्वा/KKS अग्निः/NP वायुः/NP च/APY सम्भ्रान्तौ/KN ।/PUNC 
तथापि/A धार्ष्ट्येन/NP तौ/SNV उक्तवन्तौ/KKS -/PUNC भगवन्/NP ,/PUNC सागरे/NP बहवः/SNV निष्पापाः/NV जीवाः/NP निवसन्ति/KP ।/PUNC 
समुद्रमन्थनेन/NP तेषाम्/SN अपि/A नाशः/NP भविष्यति/KP ।/PUNC 
एतत्/SN योग्यं/NP भवेत्/KP वा/AP ।/PUNC 
एतत्/SN श्रुत्वा/KKS अधिकं/NP कुपितः/KN इन्द्रः/NS तौ/SNV द्वौ/SMKY शप्तवान्/KN –/PUNC कर्तव्यपराङ्मुखौ/NV भवन्तौ/SN माम्/SN एव/A धर्माधर्मं/NP शिक्षयतः/KP ।/PUNC 
मम/SN शापात्/NP भवन्तौ/SN पृथिव्यां/NP जन्म/NP लप्स्येते/KP ।/PUNC 
हे/ASMB अग्ने/NP गच्छ/KP ,/PUNC पृथिवीं/NP गत्वा/KKS समुद्रं/NP प्राशय/KP इति/AUD ।/PUNC 
एवम्/AUD अग्निः/NP अगस्त्यरूपेण/NP तथा/AVK वायुः/NP वसिष्ठरूपेण/NP भूमौ/NP जन्म/NP लब्धवन्तौ/KN ।/PUNC 
तयोः/SN पिता/NP मित्रावरुणः/NS ,/PUNC माता/NP उर्वशी/NS च/AVK आसीत्/KP ।/PUNC 
आगामिकाले/NP एषः/SN अगस्त्यः/NS महान्/NV द्रष्टा/NP ,/PUNC शक्तिसम्पन्नः/NV पुरुषः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
अस्य/SN जन्म/NP कुम्भे/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
अतः/A तस्य/SN नाम/NP कुम्भोद्भवः/NS ,/PUNC कलशोद्भवः/NS अभवत्/KP इति/AUD आख्यायिका/NP अस्ति/KP ।/PUNC 

अत्र/A हिमालये/NS उमामहेश्वरयोः/NS विवाहः/NP निर्विघ्नः/NV सम्पन्नः/KN ।/PUNC 
सर्वे/SN आनन्दिताः/KN ।/PUNC 
विवाहसमये/NP उद्भूतः/KNV उत्पातः/KN अगस्त्यस्य/NS सामर्थ्येन/NP एव/INTF निराकृतः/KN ।/PUNC 

गजेन्द्रमोक्षः/NP 
पुरा/A किल/A इन्द्रद्युम्नः/NS पाण्ड्यः/NS इति/AUD राजा/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
सः/SN विष्णोः/NS परमः/NV भक्तः/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
प्रतिदिनं/NP विष्णुपूजनानन्तरम्/A एव/INTF तस्य/SN दिनचर्या/NP प्रारभते/KP स्म/A ।/PUNC 
एकदा/A सः/SN राजा/NP प्रातःकाले/NV विष्णुपूजायां/NP मग्नः/KN आसीत्/KP ।/PUNC 
तदानीम्/A एव/INTF अगस्त्यऋषिः/NS तस्य/SN प्रासादं/NP आगतवान्/KN ।/PUNC 
स्वस्य/SN आगमनस्य/KN वार्तां/NP राज्ञे/NP कथयितुं/KKS सः/SN द्वारपालं/NP प्रेषितवान्/KN ।/PUNC 
पूजां/NP त्यक्त्वा/KKS राज्ञः/NP तस्य/SN स्वागताय/NP तत्र/A गमनम्/KN अशक्यम्/KN आसीत्/KP ।/PUNC 
अतः/AVK राजा/NP द्वारपालम्/NP उक्तवान्/KN मुनिवर्याणां/NP यथोचितं/A स्वागतं/NP कुरुत/KP ।/PUNC 
सत्कारपूर्वकम्/NP आसने/NP उपवेशयत/KP ।/PUNC 
पूजां/NP समाप्य/KKS अचिरात्/NP एव/INTF अहम्/A आगमिष्यामि/KP इति/AUD ।/PUNC 

नृपेण/NP विना/A द्वारपालः/NP एकाकी/NP प्रत्यागतः/KN इति/AUD दृष्ट्वा/KKS अगस्त्यमुनिः/NP तत्/SN स्वस्य/SN अपमानं/NP मत्वा/KKS क्रोधाविष्टः/KN अभवत्/KP ।/PUNC 
राजा/NP गर्विष्ठः/KN अभवत्/KP इति/AUD अमन्यत/KP ।/PUNC 
कोपावेशात्/NP सः/SN –/PUNC हे/ASMB राजन्/NP ,/PUNC त्वं/SN मदान्धः/NV असि/KP ।/PUNC 
अतः/A अग्रिमे/NP जन्मनि/NP मदोन्मत्तः/NV त्वं/SN गजयोनिं/NP प्राप्यसि/KP इति/AUD शापं/NP दत्तवान्/KN ।/PUNC 
अनन्तरं/A सः/SN ऋषिः/NP यावत्/AVK निवर्तितुम्/KKS उद्युक्तः/KN तावत्/AVK एव/INTF पूजां/NP समाप्य/KKS इन्द्रद्युम्नः/NS कारणं/NP निवेद्य/KKS क्षमाम्/NP अयाचत/KP ।/PUNC 
वास्तवं/NP ज्ञात्वा/KKS मुनिः/NP दुःखी/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
किन्तु/A निरुपायः/NP ।/PUNC 

शापस्य/NP प्रत्यावर्तनं/NP तु/A अशक्यम्/NP एव/INTF ।/PUNC 
तथापि/A दयालुः/NV मुनिः/NP अवदत्/KP –/PUNC हे/ASMB इन्द्रद्युम्न/NS ,/PUNC भगवतः/NP विष्णोः/NS चक्रस्य/NP यदा/SSN स्पर्शः/NP भविष्यति/KP तदा/SSN त्वं/SN शापात्/NP मोक्ष्यसे/KP इति/AUD ।/PUNC 

कालान्तरेण/NP राजा/NP इन्द्रद्युम्नः/NS गजयोनिमध्ये/NP जन्म/NP अलभत/KP ।/PUNC 
यथाकालं/A सः/SN तरुणः/NV भूत्वा/KKS यूथपतिः/NV गजेन्द्रः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
एकस्मिन्/SNV दिने/NP यदा/SSN सर्वे/SNV गजाः/NP जलं/NP पातुं/KKS जले/NP अवातरन्/KN ,/PUNC तदा/SSN अकस्मात्/A एकः/SMKY नक्रः/NP तत्र/A आगत्य/KKS गजेन्द्रस्य/NP चरणं/NP गृहीत्वा/KKS तं/SN जले/NP आकर्षितुं/KKS प्रारभत/KP ।/PUNC 
गजेन्द्रः/NP अपि/APY स्वं/SN मोचयितुं/KKS प्रायतत/KP ।/PUNC 
अन्ये/SNV गजाः/NP अपि/APY तस्य/SN साहाय्यार्थम्/NP आगताः/KKS ,/PUNC किन्तु/AVK असफलाः/NP अभवन्/KP ।/PUNC 
अन्ते/NP सः/SN परमेश्वरस्य/NP स्मरणं/KN कृत्वा/KKS तं/SN प्रार्थयत/KP ।/PUNC 

सङ्कटग्रस्तं/KN भक्तं/NP दृष्ट्वा/KKS ईश्वरः/NP कथं/A स्वस्थः/NV स्यात्/KP ।/PUNC 
सपदि/A भगवान्/NP विष्णुः/NS गरुडम्/NP आरुह्य/KKS तं/SNV जलाशयम्/NP आगच्छत्/KP ।/PUNC 
कोटिसूर्यसमप्रभं/NV सुदर्शनचक्रं/NP नक्रं/NP प्रति/AUP क्षिप्तम्/KN ।/PUNC 
नक्रस्य/NP वधं/NP कृत्वा/KKS गजेन्द्रं/NP जलात्/NP बहिः/A उद्धृतवान्/KN ।/PUNC 
गजेन्द्रेण/NP एकं/SMK कमलं/NP विष्णोः/NS चरणयुगले/NP अर्पितम्/KN ।/PUNC 
सुदर्शनचक्रस्य/NP स्पर्शेन/KN गजेन्द्ररूपः/NP इन्द्रद्युम्नः/NS शापमुक्तः/KN अभवत्/KP ।/PUNC 

सर्पः/NP भव/KP 
चन्द्रवंशीयः/NP नहुषः/NS नाम/NP कश्चित्/SN सच्चरित्रः/NV ,/PUNC शुद्धहृदयः/NV राजा/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
तेन/SN शतम्/SMK अश्वमेधयज्ञान्/NP कृत्वा/KKS इन्द्रपदं/NP प्राप्तम्/KN ।/PUNC 
अनेन/SNV यशसा/NP सः/SN अहङ्कारी/NV ,/PUNC उन्मत्तः/NV च/A अभवत्/KP ।/PUNC 
सः/SN मनसि/NP अचिन्तयत्/KP इदानीम्/A अहम्/SN इन्द्रः/NS ।/PUNC 
देवानाम्/NP अधिपतिः/NV ।/PUNC किं/AP न/AN पूर्वतनः/NP इन्द्रः/NS ,/PUNC तस्य/SN पत्नी/NP शची/NS च/APY मम/SN सेवां/NP कुर्याताम्/KP ।/PUNC 
सपदि/A नहुषेण/NS शचीन्द्रौ/NS सेवार्थम्/A आज्ञापितौ/KN ।/PUNC शचीन्द्रयोः/NS कृते/KN एतत्/SN अवमानकारकम्/NP ।/PUNC 
तथापि/A इन्द्रस्य/NS अवज्ञा/NP शक्या/NP न/AN आसीत्/KP ।/PUNC 
किं/AP करणीयम्/KN ।/PUNC 
अन्ते/NP ताभ्याम्/SN एका/SMKY योजना/NP निश्चिता/KN ।/PUNC 
शच्या/NS नहुषं/NS प्रति/AUP सन्देशः/NP प्रेषितः/KN ।/PUNC 
अहं/SN भवतां/SN दासी/NP भूत्वा/KKS सेवां/NP कर्तुं/KKS सिद्धा/KN अस्मि/SN ।/PUNC 
किन्तु/AVK एकः/SMKY मम/SN समयः/NP अस्ति/KP ।/PUNC 
भवान्/SN शिबिकया/NP मत्सकाशम्/NP आगच्छतु/KP ।/PUNC 
तस्याः/SNV शिबिकायाः/NP वाहकाः/NP ऋषयः/NP सन्तु/KP इति/AUD ।/PUNC 
गुरुतुल्याः/NV ऋषयः/NP शिबिकायाः/NP वाहकाः/NP इति/AUD ऋषीणाम्/NP अपमानास्पदं/NP ,/PUNC नहुषस्य/NS कृते/KN च/APY लज्जास्पदम्/NP ।/PUNC 
किन्तु/AVK मदान्धः/NV नहुषः/NS बुद्धिभ्रष्टः/NV ,/PUNC विवेकहीनः/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
ऋषीणां/NP गौरवं/NP ,/PUNC तेषां/SN विद्याप्रभावः/NV ,/PUNC तपःप्रभावः/NV ,/PUNC तेषां/SN मननचिन्तनसामर्थ्यम्/NP इति/AUD सर्वं/SN सः/SN व्यस्मरत्/KP ।/PUNC 
विनाशकाले/NP विपरीतबुद्धिः/KN इव/AUD सः/SN ऋषीन्/NP आहूतवान्/KN ।/PUNC 
शिबिकावाहनाय/NP आज्ञां/NP दत्तवान्/KN च/AVK ।/PUNC 
इन्द्रस्य/NS आज्ञा/NP अनुल्लङ्घनीया/KN ।/PUNC 
अतः/A निरुपायाः/NV सर्वे/SN ऋषयः/NP सिद्धाः/KN अभवन्/KP ।/PUNC 
तेषु/SN अगस्त्यः/NS ऋषिः/NP अपि/A एकः/SMK आसीत्/KP ।/PUNC 
अन्येषां/SN वाहकऋषीणाम्/NP अपेक्षया/NP अगस्त्यः/NS किञ्चित्/SNV वामनः/NV ।/PUNC 
अतः/A अगस्त्यस्य/NS स्कन्धे/NP न्यस्तः/KN शिबिकायाः/NP भागः/NP नतः/KN अभवत्/KP ।/PUNC 
तेन/SN नहुषः/NS कुपितः/KN अभवत्/KP ।/PUNC 
पादं/NP प्रसार्य/KKS अगस्त्यं/NS "/PUNC सर्प/KP सर्प/DV "/PUNC ,/PUNC चल/DV ,/PUNC शीघ्रं/KV चल/KP इति/AUD अवदत्/KP ।/PUNC 
प्रसारितेन/KN पादेन/NP अगस्त्यं/NS स्कन्धे/NP अताडयत्/KP च/AVK ।/PUNC 
तम्/SNV अपमानम्/NP असहमानः/KNV अगस्त्यः/NS -/PUNC हे/ASMB राजन्/NP ,/PUNC '/PUNC सर्प/KP ,/PUNC सर्प/DV इति/AUD भाषमाणः/KNV मदान्धः/NV त्वं/SN सर्पः/NP भूत्वा/KKS पृथिव्यां/NP पतिष्यसि/KP इति/AUD मम/SN शापवाणी/NP '/PUNC इति/AUD अवदत्/KP ।/PUNC 

शापवाणीं/NP श्रुत्वा/KN तस्य/SN मदः/NP सहसा/KV एव/INTF गलितः/KN ।/PUNC 
अहो/ABS मम/SN उन्मादः/NP इति/AUD चिन्तयित्वा/KKS सः/SNV पश्चात्तापदग्धः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
शिबिकायाः/NP अवतीर्य/KKS वेगेन/KV सः/SN लज्जया/NP ,/PUNC पश्चात्तापेन/NP ,/PUNC दुःखेन/NP आतुरः/NP अश्रूणि/NP मुञ्चन्/KNV अगस्त्यमुनेः/NP पादयोः/NP दण्डवत्/KN अपतत्/KP ।/PUNC 
अवदत्/KP च/APY ।/PUNC 
मुने/NP ,/PUNC पापः/NV अहं/SN ,/PUNC पापकर्मा/NP अहम्/SN ।/PUNC 
हे/ASMB करुणाधन/NP ,/PUNC त्राहि/KP मां/SN ,/PUNC कृपया/NP त्राहि/KP माम्/SN इति/AUD ।/PUNC 

अगस्त्यस्य/NS शापेन/NP राजा/NP नहुषः/NS महासर्पः/NV भूत्वा/KKS धरण्यां/NP पतितः/KN ।/PUNC 
बहूनि/NP वर्षाणि/NP अतीतानि/KN ।/PUNC 
गिरिकन्दरेषु/NP एषः/SNV महासर्पः/NV भ्रमति/KP स्म/A ।/PUNC 
गच्छता/KKS कालेन/NP पाण्डवाः/NS वनवासं/NP यापयितुं/KKS 
ध/NP तत्र/A आगच्छन्/KNV ।/PUNC 
एकदा/A द्रौपद्याः/NS मनसि/NP सौगन्धिकनाम्नः/NP पुष्पस्य/NP इच्छा/NP उद्भूता/KN ।/PUNC 
तानि/SNV पुष्पाणि/NP अन्वेष्टुं/KKS भीमः/NS अत्र/A तत्र/A भ्रमणं/NP कृतवान्/KN ।/PUNC 
तदा/A महासर्परूपेण/NV नहुषेण/NS भीमः/NS गृहीतः/KN ।/PUNC 
भीमं/NS मोचयितुं/KKS युधिष्ठिरः/NS तत्र/A आगच्छत्/KNV ।/PUNC 
युधिष्ठिरः/NS चन्द्रवंशीयः/NP नहुषस्य/NS वंशजः/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
नहुषः/NS युधिष्ठिरं/NS कांश्चन/SN प्रश्नान्/NP अपृच्छत्/KP ।/PUNC 
तेन/SN भीमः/NS सर्पस्य/NP पाशात्/NP विमुक्तः/KN ,/PUNC नहुषः/NS च/AVK शापस्य/NP पाशात्/NP विमुक्तः/KN ।/PUNC 
एवम्/A अगस्त्येन/NS उच्छृङ्खलवृत्तिः/NV नहुषः/NS शापेन/NP दण्डितः/KN ।/PUNC 
किन्तु/A यदा/AVK सः/SN स्वम्/SN अपराधं/NP ज्ञात्वा/KKS पश्चात्तापदग्धेन/NV मनसा/NP क्षमां/NP याचितवान्/KN तदा/AVK परिहारः/NP अपि/A दत्तः/KN ।/PUNC 

लोपामुद्रायाः/NS अलङ्काराभिलाषः/NP 
अगस्त्यस्य/NS पत्नी/NP लोपामुद्रा/NS नाम्नी/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
सा/SN विदर्भराजस्य/NP कन्या/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
सा/SNV सच्छीला/NV ,/PUNC पतिपरायणा/NV च/APY गृहिणी/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
भर्तुः/NP आज्ञाकारिणी/NV ,/PUNC सहमता/NV ,/PUNC कार्यदक्षा/NV पत्नी/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
अतः/AVK उभयोः/SN दाम्पत्यजीवनं/NP सुखपूर्णम्/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
किन्तु/AVK एकदा/A विपरीतम्/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
जन्मना/NP राजकन्या/NP ,/PUNC राजवैभवम्/NP आस्वादितवती/KN एषा/SN इदानीं/A वनचरमहर्षेः/NP पत्नी/NP ।/PUNC 
तस्याः/SN मनसि/NP दुकूलानाम्/NP अलङ्काराणां/NP च/A अभिलाषा/NP प्रादुर्भूता/KN ।/PUNC 
ताम्/SNV इच्छां/NP दमयितुं/KKS तया/SN प्रयत्नः/NP कृतः/KN ।/PUNC 
किन्तु/AVK असफला/NV सा/SNV लज्जितमनसा/NV स्वाभिलाषं/NP पतिम्/NP उक्तवती/KKS ।/PUNC 

राजकन्यायाः/NP कृते/A एषा/SNV स्वाभाविकी/NV इच्छा/NP ।/PUNC 
तथा/AVK च/A एतावत्कालपर्यन्तं/A लोपामुद्रया/NS कदा/A अपि/A किम्/SN अपि/A न/AN याचितम्/KN ।/PUNC 
अतः/AVK तस्याः/SN ईप्सितं/NP पूरणीयम्/KN एव/INTF ।/PUNC 
अतः/AVK अगस्त्यः/NS कांश्चन/SN नृपान्/NP प्रति/AUP गतवान्/KN ।/PUNC 
तैः/SN अगस्त्यमुनेः/NP सत्कारं/NP कृत्वा/KKS वस्त्रालङ्काराः/NP दत्ताः/KN ।/PUNC 
तैः/SN कथितं/KN च/APY बदामीनरेशौ/NP वातापिः/NS इल्वलः/NS च/A धनवन्तौ/NP ।/PUNC 
तेभ्यः/SN अपि/A वस्त्रालङ्काराः/NP प्राप्तुं/KKS शक्यन्ते/KP इति/AUD ।/PUNC 

जनहिताय/NP एव/INTF गृहीतव्रतः/NV अगस्त्यः/NS वातापि-इल्वलयोः/NS कपटाचरणं/NP ज्ञातवान्/KN आसीत्/KP ।/PUNC 
सः/SN मनसि/NP चिन्तयति/KP ,/PUNC तयोः/SN निपातस्य/NP समयः/NP आगतः/KN ।/PUNC 
वस्त्रालङ्काराः/NP तु/A निमित्तमात्रम्/NP ।/PUNC 

वातापि-इल्वलयोः/NS कथा/NP 
वातापि-इल्वलयोः/NS कथा/NP रहस्यमयी/NP अस्ति/KP ।/PUNC 
एतौ/SNV मायाविनौ/NV राक्षसौ/NP आस्ताम्/KP ।/PUNC 
ऋषिमुनीनां/NP द्वेषिभ्यां/NV ताभ्यां/SN परिसरे/NP स्थितानां/NV साधुजनानां/NP नाशः/KN कृतः/KN आसीत्/KP ।/PUNC 
ऋषीन्/NP नाशयितुं/KKS तयोः/SN एका/SMKY कपटनीतिः/NP प्रयुक्ता/KN ।/PUNC 
महामार्गस्य/NP पार्श्वे/A ,/PUNC तयोः/SN एकः/SMKY आश्रमः/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
तत्र/A तौ/SN साधुवेषेण/NP न्यवसताम्/KP ।/PUNC 
यदा/APY कदा/A पान्थः/NV ऋषिः/NP तेन/SNV मार्गेण/NP आगच्छति/KP तदा/APY तौ/SNV द्वौ/SMKY तम्/SN आहूय/KKS कृतकप्रेमादरेण/NP तस्य/SN आतिथ्यं/NP कृत्वा/KKS आग्रहेण/NP भोजनार्थं/A प्रार्थयेते/KP स्म/A ।/PUNC 
अनन्तरं/A वातापिः/NS अजरूपं/NP धारयति/KP स्म/A ।/PUNC 
इल्वलः/NS तम्/SNV अजं/NP व्यापाद्य/KKS ,/PUNC तस्य/SN मांसं/NP पाचयित्वा/KKS ऋषिं/NP भोजयते/KP स्म/A ।/PUNC 
भोजनानन्तरं/A इल्वलः/NS –/PUNC '/PUNC वातापे/NS ,/PUNC बहिः/A आगच्छ/KP '/PUNC इति/AUD आह्वयति/KP स्म/A ।/PUNC 
तदा/AVK वातापिः/NS स्वमायया/NP पुनः/A राक्षसरूपं/NP स्वीकृत्य/KKS ,/PUNC ऋषेः/NP उदरं/NP विदीर्य/KKS बहिः/A आगच्छति/KP स्म/A ।/PUNC 
एवं/AVK मृतं/NV ऋषिं/NP तौ/SNV भक्षयतः/KP स्म/A ।/PUNC 

ईदृशीं/SNV वातापि-इल्वलयोः/NS कुख्यातिम्/NP अगस्त्यः/NS जानाति/KP स्म/A ।/PUNC 
अतः/AVK तयोः/SN नाशं/NP कर्तुम्/KKS अगस्त्यः/NS स्वयं/SN तेन/SNV मार्गेण/NP गतः/KN ।/PUNC 
तं/SN दृष्ट्वा/KKS हर्षितौ/NP तौ/SN अगस्त्यस्य/NS स्वागतम्/KN अकुरुताम्/KP ।/PUNC 

भोजनसमये/NP अगस्त्यः/NS पृष्टवान्/KN वातापिः/NS न/AN दृश्यते/KP ।/PUNC 
इल्वलः/NS अवदत्/KP अचिरात्/NP आगमिष्यति/KP ।/PUNC 
तव/SN उदरं/NP विदीर्य/KKS चिरात्/NP आगमिष्यति/KP इति/AUD तस्य/SN भावः/NP ।/PUNC 
अगस्त्येन/NS तस्य/SN इङ्गितार्थः/NP ज्ञातः/KN ।/PUNC 
विहस्य/KKS अगस्त्यः/NS अवदत्/KP आम्/A अचिरात्/NP आगमिष्यति/KP इति/AUD ।/PUNC 
प्रसन्नचित्तेन/NV ऋषिणा/NP भोजनं/NP कृतम्/KN ।/PUNC 
ईदृशं/SNV स्वादिष्टं/NV भोजनम्/NP इतः/A पूर्वं/SN मया/SN कदा/A अपि/A न/AN आस्वादितम्/KN ।/PUNC 
सन्तुष्टः/NV अहम्/SN ।/PUNC 
अतीव/A सन्तुष्टः/KN अस्मि/KP ।/PUNC 
मया/SN वातापिः/NS पाचितः/KN इति/AUD उक्त्वा/KKS ततः/A उत्थितः/KN ।/PUNC 

यथानित्यम्/A इल्वलः/NS वातापे/NS ,/PUNC बहिः/A आगच्छ/KP इति/AUD आह्वयत्/KP ।/PUNC 
किन्तु/A प्रत्युत्तरं/NP न/AN ।/PUNC 
सः/SN वारं/A वारम्/DV आह्वयन्/KN आसीत्/KP ।/PUNC 
किन्तु/AVK अगस्त्यस्य/NS उदरे/NP जीर्णः/KN वातापिः/NS कथम्/AP आगच्छेत्/KP ।/PUNC 
क्रोधेन/NP इल्वलः/NS अगस्त्यम्/NS अभ्यधावत्/KP ।/PUNC 
स्वयोगबलेन/NV अगस्त्येन/NS सः/SN अपि/A नाशितः/KN ।/PUNC 

एवम्/AVK अगस्त्येन/NS दुष्टयोः/NV राक्षसयोः/NP विनाशं/NP कृत्वा/KKS ऋषीणां/NP जीवनं/NP भयमुक्तं/NV कृतम्/KN ।/PUNC 

एकेन/SMKY आचमनेन/NP समुद्रस्य/NP प्राशनम्/NP 
जनकल्याणाय/NP कटिबद्धस्य/NP कृते/A विश्रामः/NP न/AN भवति/KP ।/PUNC 
तथा/AVK स्थिरता/NP अपि/A न/AN अस्ति/KP ।/PUNC 
दक्षिणदिशि/NP राक्षसानां/NP लोकः/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
ते/SN सर्वदा/A न/AN केवलं/NP ऋषिमुनीन्/NP देवान्/NP अपि/A त्रासयन्ति/KP स्म/A ।/PUNC 
तेषु/SN कालकेशः/NS नाम/NP एकः/SMKY राक्षसः/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
देवाः/NP रात्रौ/NP युद्धं/NP न/AN कुर्वन्ति/KP इति/AUD विज्ञाय/KKS सः/SN रात्रौ/NP एव/INTF देवेषु/NP आक्रमणं/NP करोति/KP स्म/A ।/PUNC 
दिवा/NP च/A स्वसैनिकैः/NP सह/A सागरस्य/NP उदरम्/NP आश्रयते/KP स्म/A ।/PUNC 
त्रासिताः/KN देवाः/NP अगस्त्यं/NS प्रति/AUP आगताः/KN ।/PUNC 
तेषां/SN सर्वाः/SN समस्याः/NP श्रुत्वा/KKS अगस्त्यः/NS तान्/SN आश्वास्य/KKS उक्तवान्/KN गच्छन्तु/KP सर्वे/SN युद्धाय/NP सिद्धतां/NP कुर्वन्तु/KP ।/PUNC 
अहं/SN सर्वं/SNV सागरजलं/NP पिबामि/KP ।/PUNC 
तर्हि/AVK कथं/AP ते/SNV राक्षसाः/NP आत्मानम्/NP उपगूहितुं/KKS शक्नुयुः/KP ।/PUNC 
एवं/AVK यदा/A ते/SN दृष्टिपथम्/NP आगच्छेयुः/KP तावत्/A तान्/SN नाशयन्तु/KP इति/AUD ।/PUNC 

यदा/AVK देवानां/NP युद्धार्थं/A सिद्धता/NP अभवत्/KP तदा/AVK अगस्त्येन/NS सम्पूर्णः/NV सागरः/NP पीतः/KN ।/PUNC 
यदा/AVK समुद्रः/NP जलशून्यः/NP अभवत्/KP तदा/AVK समुद्रे/NP निगूढाः/KN राक्षसाः/NP दृष्टिगोचराः/NV अभवन्/KP ।/PUNC 
झटिति/KV देवैः/NP तेषां/SN नाशः/NP कृतः/KN ।/PUNC 
एवं/A देवाः/NP राक्षसत्रासात्/NP मुक्ताः/NP अभवन्/KP ।/PUNC 
अतः/A ते/SN अगस्त्यं/NP प्राशंसन्/KN ।/PUNC 
स्वतपोबलेन/NV अगस्त्येन/NS पुनः/A समुद्रः/NP जलेन/NP पूरितः/KN ।/PUNC 

महामाता/NP कावेरी/NS 
सह्यपर्वतस्य/NP ब्रह्मगिरिः/NS नाम/NP एकः/SMKY प्रदेशः/NP ।/PUNC 
तत्र/A कवेरः/NS नाम/NP एकः/SMKY सत्यशीलः/NV राजा/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
मानवकल्याणम्/NP इति/AUD तस्य/SN जीवनध्येयम्/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
मानवकल्याणार्थं/A घोरां/NV तपश्चर्यां/NP कृत्वा/KKS तेन/SN ऋषिपदं/NP प्राप्तम्/KN ।/PUNC 
तस्य/SN तपश्चर्यया/NP भगवान्/NV शङ्करः/NS प्रसन्नः/NP भूत्वा/KKS तस्मै/SN एकां/SMKY कन्यां/NP प्रायच्छत्/KP ।/PUNC 
एषा/SNV कन्या/NP तव/SN जनकल्याणस्य/NP कामनां/NP पूरयिष्यति/KP इति/AUD आशीर्वादं/NP च/A अयच्छत्/KP ।/PUNC 
कवेरस्य/NS कन्या/NP अतः/APY कावेरी/NS इति/AUD तस्याः/SN नाम/NP ।/PUNC 
यथाकालं/NP सा/SNV कावेरी/NS तरुणा/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
कवेरः/NS स्वकन्यायै/NP तस्य/SNV मानवकल्याणस्य/NP इच्छां/NP कथितवान्/KN ।/PUNC 
कन्या/NP अपि/AVK मानवस्य/NP कल्याणाय/NP यदि/A मम/SN जीवनं/NP समर्पितं/NV भवेत्/KP तर्हि/APY अहम्/SN आत्मानं/NP धन्यां/NV मन्येयम्/KP इति/AUD उक्तवती/KN ।/PUNC 

अस्मिन्/SNV एव/INTF काले/NP अगस्त्यमुनिः/NS ब्रह्मगिरिं/NP प्राप्तः/KN ।/PUNC 
सर्वैः/SNV मुनिभिः/NP तस्य/SN स्वागतं/NP कृतम्/KN ।/PUNC 
कवेरेण/NS अपि/A सः/SN सत्कारार्थं/A स्वगृहे/NP निमन्त्रितः/KN ।/PUNC 
अगस्त्यं/NS दृष्ट्वा/KKS ,/PUNC तस्य/SN कार्यं/NP ज्ञात्वा/KKS कवेरः/NS मनसि/NP अचिन्तयत्/KP किं/AP न/AN अनेन/SNV सह/A कावेर्याः/NS विवाहः/NP भूयात्/KP ।/PUNC 
अस्य/SNV विश्वकल्याणस्य/NP कार्ये/NP एषा/SNV मम/SN कन्या/NP सहभागिनी/NV स्यात्/KP ।/PUNC 
रत्नं/NP समागच्छतु/KP काञ्चनेन/NP ।/PUNC 
कवेरः/NS कावेरीम्/NS अपृच्छत्/KP ।/PUNC 
सा/SN अगस्त्यस्य/NS श्रेष्ठतां/NV जानाति/KP स्म/A ।/PUNC 
अतः/AVK तत्/SN आत्मनः/NP परमं/NV भाग्यं/NP मत्वा/KKS तया/SN अनुमतिः/KNV दत्ता/KN ।/PUNC 

अगस्त्येन/NS सह/A कावेर्याः/NS विवाहः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
ब्रह्मगिरौ/NP आश्रमं/NP कृत्वा/KKS अगस्त्यः/NS तत्र/A स्थिरं/NV वासं/NP कृतवान्/KN ।/PUNC 
तत्र/A तपश्चर्यायां/NP मग्नः/KN अभवत्/KP ।/PUNC 
कावेर्याः/NS मनसि/NP विश्वकल्याणस्य/NP तीव्रा/NV इच्छा/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
एकदा/A सा/SN अगस्त्याय/NS स्वस्य/SN इच्छां/NP निवेदितवती/KN ।/PUNC 
उपायं/NP च/APY अपृच्छत्/KP ।/PUNC 
तदा/AVK अगस्त्यः/NS अवदत्/KP कस्याः/SNV अपि/A घटनायाः/NP कृते/A उचितः/NV कालः/NP अपेक्षितः/KN ।/PUNC 
उचिते/NV काले/NP अनायासेन/NP त्वं/SN मार्गं/NP द्रक्ष्यसि/KP इति/AUD ।/PUNC 

अस्मिन्/SNV एव/INTF काले/NP दक्षिणदिशि/NP शूरपद्यः/NS नाम/NP एकः/SMKY महाशक्तिशाली/NV क्रूरः/NV राक्षसः/NP निवसति/KP स्म/A ।/PUNC 
इन्द्रस्य/NS द्वेष्टा/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
देवपूजकानां/NP द्वेष्टा/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
मानवसंहारार्थं/A प्रयत्नशीलः/NV सः/SNV मायावी/NV राक्षसः/NP ।/PUNC 
सः/SN स्वमायया/NP मेघस्य/NP अवरोधं/KN कुरुते/KP स्म/A ।/PUNC 
भूमिः/NP शुष्का/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
अवर्षणात्/NP जलाभावः/NP ,/PUNC जलाभावेन/NP सस्याभावः/NP ।/PUNC 
भूमिः/NP शुष्का/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
जनाः/NP पशुपक्षिणः/NP च/APY व्याकुलाः/NV अभवन्/KP ।/PUNC 
तेषां/SN तादृशीम्/SNV अवस्थां/NP दृष्ट्वा/KKS कावेरी/NS पर्याकुला/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
सा/SN देवान्/NP प्रार्थयत/KP हे/ASMB देवाः/NP अवसरः/NP सन्निहितः/KN ।/PUNC 
कृपया/NP जनकल्याणार्थं/A मां/SN योजयत/KP ।/PUNC कावेर्याः/NS प्रार्थना/NP सफला/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
अन्येद्युः/A प्रभाते/NP अगस्त्यमुनिः/NP स्नानार्थं/A जलाशयं/NP प्रति/AUP गन्तुम्/KKS उत्सुकः/NP ।/PUNC 
किन्तु/AVK कावेरी/NS अस्वस्था/NV आसीत्/KP ।/PUNC 
अतः/AVK तेन/SN सह/A गन्तुं/KKS न/AN अशक्नोत्/KP ।/PUNC 
किन्तु/AVK अस्वस्थां/NP ताम्/SNV एकाकिनीम्/NV आश्रमे/NP त्यक्त्वा/KKS ऋषिः/NP अपि/APY गन्तुम्/KKS अनुत्सुकः/NP ।/PUNC 
किं/AP करणीयम्/KN ?/PUNC अतः/AVK तेन/SN एका/SMKY योजना/NP निश्चिता/KN ।/PUNC 
सः/SN कावेर्यै/NS जलरूपं/NP दत्त्वा/KKS कमण्डलुमध्ये/NP एकस्मिन्/SNV शिलाखण्डे/NP संस्थाप्य/KKS सः/SN स्नानार्थं/A जलाशये/NP अवातरत्/KP ।/PUNC 
देवाः/NP एतस्मै/SNV अवसराय/NP एव/INTF प्रतीक्षन्ते/KP स्म/A ।/PUNC 
देवेन्द्रेण/NP एतत्कार्यार्थं/A विनायकः/NS आज्ञापितः/KN ।/PUNC 
सपदि/A विनायकेन/NS काकरूपं/NP धृत्वा/KKS कमण्डलुः/NP नोदितः/KN ।/PUNC 
कमण्डलुतः/KN जलम्/NP अवहत्/KP ।/PUNC 
जनकल्याणार्थं/A प्रफुल्लिता/NV कावेरी/NS वेगेन/KV प्रावहत्/KP ,/PUNC चिरात्/A पिपासितां/NV भूमिं/NP तृप्ताम्/NP अकरोत्/KP ।/PUNC 

एतत्/SNV सर्वं/SN अजानन्/KP अगस्त्यः/NS यदा/AVK सरोवरात्/NP बहिः/AUP आगतः/KN तदा/AVK कमण्डुलुतः/KN निर्गतां/KN कल्लोलिनीं/NV कावेरीम्/NS अपश्यत्/KP ।/PUNC 
तस्याः/SN तत्/SNV फेनधवलं/NV रूपं/NP जलतुषारसेकं/NV दृष्ट्वा/KKS अगस्त्यः/NS प्रथमं/SMK हतबुद्धः/KN अनन्तरं/A शोकाकुलः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
सः/SN कावेरीं/NS प्रत्यागन्तुं/KKS प्रार्थयत/KP ।/PUNC 
तां/SN गृहीतुं/KKS प्रायतत/KP ।/PUNC 
किन्तु/AVK जनसेवाव्रतं/NP स्वीकुर्वती/KNV सा/SN बहुदूरं/NP गता/KN आसीत्/KP ।/PUNC 
तदा/AVK सर्वैः/SNV देवैः/NP सह/A विनायकः/NS अगस्त्यस्य/NS सान्त्वनं/NP कृतवान्/KN ।/PUNC 
सः/SN अवदत्/KP ,/PUNC हे/ASMB ऋषे/NP ,/PUNC भवतः/SN कृपया/NP एव/INTF कावेरी/NS जलरूपं/NP प्राप्ता/KN ।/PUNC 
जनकल्याणम्/NP एव/INTF तस्याः/SN ,/PUNC तस्याः/SNV पितुः/NP च/APY जीवनध्येयम्/NP ।/PUNC 
एतत्/SNV नदीरूपं/NP तयोः/SN इच्छापूर्तिः/NP एव/INTF ।/PUNC 
यावत्/AVK पृथिव्यां/NP जीवसृष्टिः/NP तिष्ठति/KP तावत्/AVK एषा/SNV कावेरी/NS नदीरूपेण/NP कोटिकोटिजनेभ्यः/NP जलम्/NP अन्नं/NP च/APY दास्यति/KP ।/PUNC 
आगामिकाले/NP सा/SNV प्रसिद्धा/NV पवित्रा/NV च/APY नदी/NP भविष्यति/KP इति/AUD ।/PUNC 

अगस्त्यस्य/NS समीपम्/NP आगत्य/KKS अनुमतिं/NP विना/A अहम्/SN अवहम्/KP ।/PUNC 
तदर्थं/AVK क्षम्यताम्/KP इति/AUD कावेरी/NS वदति/KP इति/AUD अगस्त्यम्/NS अभासत/KP ।/PUNC 
अगस्त्यः/NS अचिन्तयत्/KP ,/PUNC सत्यम्/AVK अगणितानां/NV जनानां/NP प्राणरक्षणं/NP तया/SN कृतम्/KN ।/PUNC 
सा/SNV प्राणिमात्रस्य/NP माता/NP अस्ति/KP ।/PUNC 
तस्यै/SN आशीर्वादान्/NP दत्त्वा/KKS अगस्त्यः/NS तस्मात्/SN स्थानात्/NP प्रतिनिवृत्तः/KN ।/PUNC 
एवंरूपेण/NP कावेरी/NS दक्षिणगङ्गा/NS इति/AUD प्रसिद्धा/NP अभवत्/KP ।/PUNC 

विन्ध्यः/NS नतमस्तकः/NP 
मेरुपर्वतः/NP सर्वोच्चपर्वतः/NV ।/PUNC 
प्रतिदिनं/A सूर्यः/NP मेरुपर्वतं/NP परितः/A भ्रमति/KP स्म/A ।/PUNC 
अनेन/SNV कारणेन/NP मेरोः/NS विन्ध्यपर्वतस्य/NP च/APY मध्ये/NP विवादः/NP उत्पन्नः/KN ।/PUNC 
सूर्यः/NS विन्ध्यं/NS परितः/A प्रदक्षिणं/NP न/AN करोति/KP ।/PUNC 
अतः/AVK विन्ध्यः/NS रुष्टः/KN ,/PUNC मत्सरग्रस्तः/KN क्रोधेन/NP सः/SN सूर्यम्/NS आज्ञापयत्/KP अद्यप्रभृति/AUD मां/SN परितः/A अपि/APY प्रदक्षिणं/NP कुरु/KP ।/PUNC 
किन्तु/AVK सूर्यः/NS तत्र/A अवधानं/NP न/AN दत्तवान्/KN ।/PUNC 
तेन/SN अग्नौ/NP घृतम्/NP इव/AUD अधिकं/NP क्रोधाविष्टः/KN सः/SN रे/ASMB गर्विष्ठ/NP ,/PUNC अहं/SN तव/SN गर्वापहारं/NP करोमि/KP इति/AUD प्रतिज्ञाम्/NP अकरोत्/KP ।/PUNC 

मेरुपर्वतात्/NP अपि/A उत्तुङ्गः/NP भवामि/KP इति/AUD विचिन्त्य/KKS विन्ध्यः/NS वर्धितुं/KKS प्रारभत/KP ।/PUNC 
कतिपयदिवसैः/NP विन्ध्यस्य/NS शिखराणि/NP अत्युत्तुङ्गानि/NV अभवन्/KP ।/PUNC 
सूर्यस्य/NS मार्गः/NP अवरुद्धः/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
विश्वम्/NP अन्धकारमयम्/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
सूर्यः/NS विन्ध्यम्/NS एतत्/SN तव/SN जगद्विध्वंसककार्यम्/NP ।/PUNC 
तत्/AVK अयोग्यम्/NP इति/AUD बोधयितुं/KKS प्राययत/KP ।/PUNC 
सर्वे/SNV देवाः/NP अपि/APY विन्ध्यपर्वतं/NP प्रार्थितवन्तः/KN ।/PUNC 
किन्तु/AVK मत्सराभिभूतः/NP सः/SNV कस्य/SN अपि/APY न/AN शृणोति/KP एव/INTF ।/PUNC 
सम्भ्रमिताः/KNV देवाः/NP धावन्तः/KNV ब्रह्मदेवं/NS प्रति/AUP गताः/KN ।/PUNC 
ब्रह्मदेवः/NS उक्तवान्/KN अगस्त्यं/NS ऋषिं/NV गच्छत/KP ।/PUNC 
सः/SN भवतां/SN साहाय्यं/NP करिष्यति/KP इति/AUD ।/PUNC 
सर्वे/SNV देवाः/NP अगस्त्यं/NS प्रति/AUP आगत्य/KKS समस्यायाः/NP निराकरणं/NP कर्तुं/KKS प्रार्थितवन्तः/KN ।/PUNC 
अगस्त्यः/NS अपि/A तेभ्यः/SN अभयं/NP दत्त्वा/KKS विन्ध्यं/NS प्रति/AUP प्रस्थितः/KN ।/PUNC 

अगस्त्यः/NS विन्ध्यस्य/NS समीपम्/NP आगतवान्/KN ।/PUNC 
हर्षितः/NV विन्ध्यः/NS तस्य/SN उचितं/NV सत्कारम्/NP अकरोत्/KP ।/PUNC 
उत्तुङ्गः/NV विन्ध्यः/NS अगस्त्यस्य/NS चरणयोः/NP नतमस्तकः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
तदा/AVK अगस्त्यः/NS अवदत्/KP ,/PUNC हे/ASMB विन्ध्याद्रे/NP तव/SN आतिथ्येन/NP सन्तुष्टः/NP अस्मि/KP ।/PUNC 
किन्तु/AVK अत्र/A दक्षिणदिशि/NP बहूनि/NV कार्याणि/NP मां/SN प्रतीक्षन्ते/KP ।/PUNC 
अतः/AVK अहं/SN त्वरया/KV गच्छामि/KP ।/PUNC 
मम/SN प्रत्यागमनपर्यन्तं/A भवान्/SN अत्र/A एवम्/A एव/INTF नतमस्तकः/NP तिष्ठतु/KP इति/AUD उक्त्वा/KKS त्वरया/NP सः/SN निरगच्छत्/KP ।/PUNC 
पुनः/AVK कदा/A अपि/APY न/AN प्रत्यावर्तत/KP ।/PUNC 
ऋषेः/NP अवज्ञां/NP कर्तुं/KKS विन्ध्यस्य/NS धैर्यं/NP न/AN आसीत्/KP ।/PUNC 
अतः/AVK सः/SN अद्यपर्यन्तम्/A ईदृशः/SN नतमस्तकः/NP एव/INTF तिष्ठति/KP ।/PUNC 
सूर्यस्य/NS मार्गः/NP निरवरोधः/NV जातः/KN ।/PUNC 
अन्धकारः/NP निरस्तः/NV ।/PUNC 
जगत्/NP हर्षमयम्/NV अभवत्/KP ।/PUNC 

जनहितकर्ता/NV अगस्त्यः/NS 
अगस्त्यसम्बन्धिन्यः/NV कथाः/NP महाभारते/NS ,/PUNC रामायणे/NS च/APY सन्ति/KP ।/PUNC 
अखिले/NV भारते/NS अगस्त्यस्य/NS भ्रमणम्/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
अतः/AVK हिमालये/NS ,/PUNC प्रयागक्षेत्रे/NP ,/PUNC कालिन्दीतीरे/NP ,/PUNC पञ्चवट्याम्/NS ,/PUNC अगस्त्यकूटपर्वते/NP इति/AUD विविधेषु/NV स्थानेषु/NP तस्य/SN आश्रमाः/NP आसन्/KP ।/PUNC 
तथापि/AVK दक्षिणदिशि/NP तस्य/SN कार्यं/NP प्रसिद्धम्/KN ।/PUNC 
विन्ध्यपर्वतस्य/NP दक्षिणभागे/NV महाभयङ्करं/NV दण्डकारण्यम्/NP आसीत्/KP ।/PUNC 
विन्ध्यपर्वतम्/NP उल्लङ्घ्य/KKS दक्षिणदिशि/NP प्रविष्टः/KN अगस्त्यः/NS पुरातनऋषिः/NV ।/PUNC 
विन्ध्याचलस्य/NP अन्तरायम्/NP अविगणय्य/NV तेन/SN मार्गः/NP अन्विष्टः/KN ।/PUNC 
अतः/AVK सः/SNV अगस्त्यः/NS इति/AUD नाम/NP प्राप्तवान्/KN ।/PUNC 

दशरथपुत्रः/NS यदा/APY वनवासार्थं/A दण्डकारण्यम्/NP आगतः/KN तदा/APY अगस्त्यस्य/NS दर्शनार्थं/A तस्य/SN आश्रमं/NP गतः/KN ।/PUNC 
तदा/AVK अगस्त्येन/NS श्रीरामाय/NS वैष्णवं/NS नाम/A धनुः/NP ,/PUNC अक्षयः/NV तूणीरः/NP कानिचन/SNV अस्त्राणि/NP च/APY दत्तानि/KN ।/PUNC 
रामरावणयोः/NS युद्धसमये/NP अपि/APY अगस्त्यः/NS तत्र/A गत्वा/KKS श्रीरामाय/NS आदित्यहृदयम्/NS नाम/A मन्त्रं/NP दत्तवान्/KN ।/PUNC 
तेन/SN मन्त्रेण/NP श्रीरामः/NS रावणं/NS हन्तुं/KKS समर्थः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 
वनवासात्/NP प्रतिनिवृत्तः/KNV रामः/NS राजा/NV अभवत्/KP ।/PUNC 
तथापि/AVK तस्य/SN मनः/NP शान्तं/NP न/AN आसीत्/KP ।/PUNC 
तद्/AVK ज्ञात्वा/KKS अगस्त्यः/NS अयोध्याम्/NS आगत्य/KKS रामम्/NS अश्वमेधार्थम्/A उपादिशत्/KP ।/PUNC 
एवं/AVK जनकल्याणम्/NP इति/AUD एव/INTF तस्य/SN जीवनध्येयम्/NP आसीत्/KP ।/PUNC 

साहित्यकलाकुशलः/NV मुनिः/NP 
तमिल्भाषिणः/NV जनाः/NP अगस्त्यं/NS तमिल्भाषायाः/NP जनकं/NP मन्यन्ते/KP ।/PUNC 
अनेन/SNV अगस्त्येन/NS एव/INTF तमिल्भाषा/NP जनप्रिया/NV कारिता/KN ।/PUNC 
अगस्त्यः/NS सङ्गीतकलायाम्/NP अपि/APY प्रवीणः/NV ।/PUNC 
वीणावादनस्पर्धायां/NP तेन/SN रावणः/NS पराजितः/KN इति/AUD कथा/NP अस्ति/KP ।/PUNC 
सः/SN शिल्पकालायाम्/NP अपि/APY प्रवीणः/NP आसीत्/KP इति/AUD कथ्यते/KP ।/PUNC 

चतुर्वर्णानां/NP पालयिता/NP 
अगस्त्येन/NS वैदिकमन्त्राः/NP अपि/A रचिताः/KN ।/PUNC 
गृह्यसूत्राणाम्/NP अपि/A रचना/NP कृता/KN ।/PUNC 
तेन/SN लिखितं/KN ललितादेव्याः/NP स्तोत्रं/NP ललितासहस्रनाम/NS इति/AUD नाम्ना/NP प्रसिद्धम्/NP ।/PUNC 
सः/SNV ग्रन्थः/NP अगस्त्यस्य/NS प्रयत्नात्/NP एव/INTF लोकप्रियः/NP अभवत्/KP ।/PUNC 

एषः/SNV महामुनिः/NP विद्वान्/NV मन्त्रद्रष्टा/NV ,/PUNC जनहितकर्ता/NV च/APY आसीत्/KP ।/PUNC 
निरङ्कुशा/NV इच्छाशक्तिः/NP तस्य/SN स्फूर्तिस्थानम्/NP ।/PUNC 
समुद्रं/NP जेतुं/KKS पर्वतं/NP च/APY नमयितुं/KKS समर्थं/NV तस्य/SN मनोबलम्/NP ।/PUNC 
अगस्त्यस्य/NS चरित्रं/NP '/PUNC धैर्येण/NP विघ्नान्/NP निराकुर्यात्/KP '/PUNC इति/AUD अस्मान्/SN प्रेरयति/KP ।/PUNC 
दुष्टजनानां/NP निर्दलनम्/NP अवश्यं/A करणीयम्/A इति/AUD तस्य/SN धारणा/NP ।/PUNC 
अगस्त्येन/NS मन्त्राः/NP रचिताः/KN ।/PUNC 
अतः/AVK ब्राह्मणवर्णस्य/NP ,/PUNC दुष्टानां/NP निर्दलनं/KNV कृतम्/KN ।/PUNC 
अतः/AVK क्षत्रियवर्णस्य/NP ,/PUNC कृषिकार्यं/NP कृतम्/KN अतः/APY वैश्यवर्णस्य/NP तथा/APY श्रमप्रतिष्ठा/NP स्थापिता/KN अतः/APY शूद्रवर्णस्य/NP अपि/A पालनं/NP कृतम्/KN ।/PUNC 
एवं/AVK चतुर्वर्णानाम्/NP एकसमये/NP एव/INTF पालकः/NP एषः/SN महान्/NV ऋषिः/NP इति/AUD विनोबाभावे/NS महोदयः/NV वर्णयति/KP ।/PUNC 

इदानीं/A सः/SNV ऋषिः/NP तारकारूपेण/NP आकाशे/NP स्थित्वा/KKS तेन/SN स्थिरीकृतं/KNV रक्षितं/KNV ,/PUNC विकासितं/KNV जगत्/NP नित्यं/A पश्यति/KP ।/PUNC 
सः/SN नित्यं/A तत्सदृशं/SNV कार्यं/NP कर्तुम्/KKS अस्मभ्यं/SN प्रेरणां/NP दद्यात्/KP इति/AUD वयं/SNV प्रार्थयामहे/KP ।/PUNC 


