॥/PUNC श्रीः/NS ॥/PUNC
		पञ्चतन्त्रम्/NS	
		[/PUNC कथामुखम्/NS ]/PUNC 
	ब्रह्मा/NS रुद्रः/NS कुमारः/NS हरिवरुणयमा/NS वह्निः/NS इन्द्रः/NS कुबेरः/NS -/PUNC 
चन्द्रादित्यौ/NS सरस्वत्युदधियुगनगाः/NS वायुरुर्वी/NS भुजङ्गाः/NP ॥/PUNC 
	सिद्धा/NP नद्यः/NP अश्विनौ/NS श्रीर्दितिरदितिसुता/NS मातरः/NP चण्डिकाद्याः/NS
	वेदाः/NP तीर्थानि/NP यज्ञाः/NP गणवसुमुनयः/NP पान्तु/KP नित्यग्रहाः/NP च/AVK ॥/PUNC 1/PUNC ॥/PUNC 
	मनवे/NS वाचस्पतये/NS शुक्राय/NS पराशराय/NS ससुताय/NS ॥/PUNC 
	चाणक्याय/NS च/AVK विदुषे/NV नमः/KP अस्तु/KP नयशास्त्रकर्तृभ्यः/KN ॥/PUNC 2/PUNC ॥/PUNC 
	सकलार्थशास्त्रसारम्/NP जगति/NP समालोक्य/KKS विष्णुशर्मा/NS इदम्/SN ॥/PUNC 
	तन्त्रैः/NS पञ्चभिः/SMKP एतत्/SN चकार/KP सुमनोहरम्/NV शास्त्रम्/NS ॥/PUNC 3/PUNC ॥/PUNC 
	तत्/SN यथा/ASD अनुश्रूयते/KP -/PUNC अस्ति/KP दाक्षिणात्ये/NV जनपदेNP महिलारोप्यम्/NS नाम/NV नगरम्/NP ॥/PUNC 
तत्र/A सकलार्थिकल्पद्रुमः/NV प्रवरमुकुटमणिमरीचिमञ्जरीचयचर्चितचरणयुगलः/NV सकलकलापारंगतः/NV अमरशक्तिःNS नाम/NV राजा/NP बभूव/KP ॥/PUNC 
तस्य/SN त्रयः/SMKY पुत्राः/NP परमदुर्मेधसः/NV बहुशक्तिः/NS उग्रशक्तिः/NS अनन्तशक्तिः/NS च/APY इति/AUD नामानः/NP बभूवुः/KP ॥/PUNC 
  अथ/A राजा/NP तान्/SN शास्त्रविमुखान्/SNV आलोक्य/KKS सचिवान्/KN आहूय/KKS प्रोवाच/KP -/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB !/PUNC ज्ञातम्/KP एतत्/SN भवद्भिः/SN यत्/SN मम/SN एते/SNV पुत्राः/NP शास्त्रविमुखाः/NV ,/PUNC विवेकरहिताः/NV च/APY ॥/PUNC तत्/SN एतान्/SN पश्यतः/KP मे/SN महत्/NV अपि/A राज्यम्/NP न/AN सौख्यम्/NP आवहति/KP ॥/PUNC 
	अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	अजातमृतमूर्खेभ्यः/NV मृत/NV अजातौ/NV सुतौ/NP वरम्/NV ॥/PUNC 
	यतः/A तौ/SN स्वल्पदुःखाय/NP यावत्/A जीवम्/NP जडः/KV दहेत्/KP ॥/PUNC 4/PUNC ॥/PUNC 
	वरम्/KV गर्भस्रावः/KP वरम्/KV ऋतुषु/NP न/AN एव/A अभिगमनम्/KP
		वरम्/KV जातः/KP प्रेतः/NP वरम्/KV अपि/A च/AVK कन्या/NP एव/A जनिता/KP ॥/PUNC 
	वरम्/NV वन्ध्या/NV भार्या/NP वरम्/KV अपि/A च/AVK गर्भेषु/NP वसति/KP
	न/AN च/AVK अविद्वान्/NV रुपद्रविणगुणयुक्तः/NV अपि/A तनयः/NP ॥/PUNC 5/PUNC ॥/PUNC 
	किम्/AP  तया/SN क्रियते/KP धेन्वा/KP या/SN न/AN सूते/KP न/AN दुग्धदा/NV ॥/PUNC 
	कः/P अर्थः/NP पुत्रेण/NP जातेन/KP यः/SN न/AN विद्वान्/SNV न/AN भक्तिमान्/SNV ॥/PUNC 6/PUNC ॥/PUNC 
	वरम्/KV इह/SN वा/A सुतमरणम्/KN मा/AN मूर्खत्वम्/NV कुलप्रसूतस्य/NP ॥/PUNC 
	येन/SN विबुधजनमध्ये/NP जारज/NP इव/ASD लज्जते/KP मनुजः/NP ॥/PUNC 7/PUNC ॥/PUNC 
	गुणिगणगणनारम्भे/KN न/AN पतति/KP कठिनी/KV ससंभ्रमा/KV यस्य/SN ॥/PUNC 
	तेन/SN अम्बा/NP यदि/AVK सुतिनी/NV वद/KP वन्ध्या/NP कीदृशी/P भवति/KP ॥/PUNC 8/PUNC ॥/PUNC 
	तत्/SN एतेषाम्/SN यथा/ASD बुद्धिप्रकाशः/NP भवति/KP तथा/ASD कः/SN अपि/A उपायः/NP अनुष्ठीयताम्/KP ॥/PUNC 
	अत्र/A च/AVK मद्दत्ताम्/KN  वृत्तिम्/NP भुञ्जानानाम्/NV पण्डितानाम्/NP पञ्चशती/NP तिष्ठति/KP ॥/PUNC 
	ततः/A  यथा/ASD मम/SN मनोरथाः/NP सिद्धिम्/NP यान्ति/KP तथा/ASD अनुष्ठीयताम्/KP “/PUNC इति/AUD ॥/PUNC 
	तत्र/A एकः/SMKPY प्रोवाच/KP -/PUNC ”/PUNC  देव/NP !/PUNC द्वादशभिः/SMKPY वर्षैः/NP व्याकरणम्/NP  श्रूयते/KP ,/PUNC ततः/A धर्मशास्त्राणि/NP मनु/NS आदीनि/SN ,/PUNC अर्थशास्त्राणि/NS चाणक्य/NS आदीनि/SN ,/PUNC कामशास्त्राणि/NS वात्स्यायन/NS आदीनि/SN ॥/PUNC 
	एवम्/SN  च/AVK ततः/A धर्मार्थकामशास्त्राणि/NP ज्ञायन्ते/KP ॥/PUNC 
	ततः/A प्रतिबोधनम्/NP  भवति/KP ॥/PUNC “/PUNC 
	अथ/A तन्मध्यतः/NP  सुमतिः/NS नाम/NV सचिवः/NP प्राह/KP -/PUNC  ”/PUNC अशाश्वतः/NV अयम्/SN  जीवितव्यविषयः/NP ॥/PUNC 
	प्रभूतकालज्ञेयानि/NV शब्दशास्त्राणि/NP ॥/PUNC 
	तत्/SN संक्षेपमात्र/NV शास्त्रम्/NP किंचित्/SN एतेषाम्/SN प्रबोधनार्थम्/KP  चिन्त्यताम्/KP इति/AUD ॥/PUNC उक्तम्/KP च/AVK यतः/SN-/PUNC 
	अनन्तपारम्/NV किल/A शब्दशास्त्रम्/NP स्वल्पम्/NV तथा/A आयुः/NS बहवः/SN  च/AVK विघ्नाः/NS ॥/PUNC 
	सारम्/NP ततः/A ग्राह्यम्/KP अपास्य/NP फल्गु/NV हंसैः/NP यथा/ASD क्षीरम्/NS इव/ASD अम्बुमध्यात्/NP ॥/PUNC 9/PUNC ॥/PUNC 
	तत्/SN अत्र/SN अस्ति/KP विष्णुशर्मा/NS नाम/NV ब्राह्मणः/NV सकलशास्त्रपारंगमः/NV ,/PUNC छात्रसंसदि/NP लब्धकीर्तिः/NV ॥/PUNC 
	तस्मै/SN समर्पयतु/KP एतान्/SN ॥/PUNC 
	नूनम्/A  सः/SN  एतान्/SN द्राक्/A प्रबुद्धान्/NP करिष्यति/KP “/PUNC  इति/AUD ॥/PUNC 
	सः/SN  राजा/NP तदा/A आकर्ण्य/KKS विष्मुशर्माणम्/NS आहूय/KKS प्रोवाच/KP -/PUNC 
	”/PUNC भो/ भगवन्/NP !/PUNC मदनुग्रहार्थम्/KP एतान्SN अर्थशास्त्रम्/NP  प्रति/AUP द्राक्/A यथा/A अनन्यसदृशान्/ASD विदधासि/KP तथा/A कुरु/KP ,/PUNC 
	तदा/A अहम्/SN त्वाम्/SN शासनशतेन/SMKPY योजयिष्यामि/KP ॥/PUNC “/PUNC
  अथ/A विष्णुशर्मा/NS तम्/SN राजानम्/NP ऊचे/KP -/PUNC ”/PUNC देव/NP !/PUNC श्रूयताम्/KP मे/SN तथ्यवचनम्/KP  ,/PUNC 
	न/AN अहम्/SN विद्याविक्रयम्/KP शासनशतेन/SMKY अपि/A करोमि/KP ।/PUNC 
	पुनः/A एतान्/A तव/SN पुत्रान्/NP मासषट्केन/SMKY यदि/A नीतिशास्त्रज्ञान्/NP न/AN करोमि/KP ,/PUNC ततः/A स्वनामत्यागम्/KP  करोमि/KP ।/PUNC 
	किम्/SN बहुना/SN ,/PUNC श्रूयताम्/KP  मम/SN एष/SN सिंहनादः/KP ।/PUNC 
	न/AN अहम्/SN अर्थलिप्सुः/ ब्रवीमि/KP ।/PUNC 
	मम/SN अशीतिवर्षस्य/SMKY व्यावृत्तसर्वेन्द्रियार्थस्य/NP न/AN किंचित्/SN अर्थेन/NP प्रयोजनम्/NP ।/PUNC 
	किन्तु/AVK त्वत्प्रार्थनासिद्ध्यर्थम्/KV सरस्वतीविनोदम्/KP करिष्यामि/KP ।/PUNC 
	तत्/SN लिख्यताम्/KP अद्यतनः/NV दिवसः/NP ।/PUNC 
	यदि/A अहम्/SN षड्मासाभ्यन्तरे/SMKY तव/SN पुत्रान्/NP नयशास्त्रम्/NP  प्रति/AUP अनन्यसदृशान्/ASD न/AN करिष्यामि/KP ,/PUNC ततः/A न/AN अर्हति/KP देवः/NP देवमार्गम्/NP संदर्शयितुम्/KKS ।/PUNC “/PUNC
	अथ/A असौ/SN राजा/NP ताम्/SN ब्राह्मणस्य/NP असंभाव्याम्/NV प्रतिज्ञाम्/NP श्रुत्वा/KKS ससचिवः/NV प्रहृष्टः/KN ,/PUNC विस्मयान्वितः/KN तस्मै/SN सादरम्/KV तान्/SN कुमारान्/NP समर्प्य/KKS पराम्/KV निवृत्तिम्/KP आजगाम/KP ।/PUNC 
विष्णुशर्मा/NS अपि/A तान्/SN आदाय/KKS तदर्थम्/KV मित्रभेदमित्रप्राप्तिकाकोलूकीय/NS लब्धप्रणाशापरीक्षितकारकाणि/NS च/AVK इति/AUD पञ्चतन्त्राणि/SMKY रचयित्वा/KKS पाठिताः/KN ते/SN राजपुत्राः/NP ।/PUNC 
ते/SN अपि/A तानि/SN अधीत्य/KKS मासषट्केन/SMKY यथा/AVK उक्ताः/KN संवृत्ताः/KN ।/PUNC 
ततः/A प्रभृति/A एतत्/SN पञ्चतन्त्रकम्/SMKY नाम/NP नीतिशास्त्रम्/NP बालवबोधनार्थम्/KV भूतले/NP प्रवृत्तम्/KN ।/PUNC 
	किम्/SN बहुना/SN -/PUNC 
	अधीते/KP यः/SN इदम्/SN नित्यम्/KV नीतिशास्त्रम्/NP श्रृणोति/KP च/AVK ।/PUNC 
	न/AN पराभवम्/NP आप्नोति/KP शक्रात्/NS अपि/A कदाचन/A ॥/PUNC 10/PUNC ॥/PUNC 
		॥/PUNC इति/AUD कथामुखम्/NS ॥/PUNC 

अथ/A मित्रभेदः/NS		 	
		॥/PUNC प्रथमम्/SMKP तन्त्रम्/NP ॥/PUNC 
 [/PUNC प्रस्तावनाकथा/NP]/PUNC 
	अथ/A अतः/AVK प्रारभ्यते/KP मित्रभेदः/NS नाम/A प्रथमम्/SMKP तन्त्रम्/NP ,/PUNC यस्य/SN अयम्/SN आदिमः/NV श्लोकः/NP-/PUNC 
	वर्धमानः/NP महान्/NV स्नेहः/NP सिंहगोवृषयोः/NP वने/NP।/PUNC 
	पिशुनेन/NP अतिलुब्धेन/NV जम्बुकेन/NP विनाशितः/KN ॥/PUNC 1/PUNC ॥/PUNC 
	तत्/SN यथा/ASD अनुश्रूयते/KP अस्ति/KP दाक्षिणात्ये/NV जनपदे/NP महिलारोप्यम्/NS नाम/A नगरम्/NP ।/PUNC 
तत्र/A धर्मोपार्जितभूरिविभवः/NV वर्धमानकः/NS नाम/A वणिक्पुत्रः/NV बभूव/KP ।/PUNC 
तस्य/SN कदाचित्/SN रात्रौ/NP शय्यारूढस्य/NV चिन्ता/NP समुत्पन्ना/KN,/PUNC यत्/SN प्रभूते/NV अपि/A वित्ते/NP अर्थोपायाः/NP चिन्तनीयाः/KN ,/PUNC कर्तव्याः/KN च/AVK इति/AUD ।/PUNC 
	यतः/A उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
	न/AN हि/A तत्/SSN विद्यते/KP किंचित्/SN यत्/SSN अर्थेन/NP न/AN सिद्ध्यति/KP ।/PUNC 
	यत्नेन/NP मतिमान्/NP तस्मात्/SN अर्थम्/NP एकम्/SMK प्रसाधयेत्/KP॥/PUNC 2/PUNC ॥/PUNC 
	यस्य/SSN अर्थाः/NP तस्य/SSN मित्राणि/NP,/PUNC यस्य/SSN अर्थाः/NP तस्य/SSN बान्धवाः/NP ।/PUNC 
	यस्य/SN अर्थाः/NP सः/SN पुमान्/NV लोके/NP,/PUNC यस्य/SN अर्थाः/NP सः/SN च/AVK पण्डितः/NP ॥/PUNC 3/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN सा/SN विद्या/NP न/AN तत्/SN दानम्/NP न/AN तत्/SN शिल्पम्/NP न/AN सा/SN कला/NP ।/PUNC 
	न/AN तत्/SN स्थैर्यम्/NP हि/A धनिनाम्/NP याचकैः/NP यत्/SN न/AN गीयते/KP ॥/PUNC 4/PUNC ॥/PUNC 
	इह/A लोके/NP हि/A धनिनाम्/NP परः/NP अपि/A सुजनायते/KP ।/PUNC 
	स्वजनः/NP अपि/A दरिद्राणाम्/NP सर्वदा/A दुर्जनायते/KP ॥/PUNC 5/PUNC ॥/PUNC 
	अर्थेभ्यः/NP अतिप्रवृद्धेभ्यः/NV संवृत्तेभ्यः/NV ततः/A ततः/DV ।/PUNC 
	प्रवर्तन्ते/KP क्रियाः/NP सर्वाः/SNV पर्वतेभ्यः/NP इव/ASD अपगाः/NP ॥/PUNC 6/PUNC ॥/PUNC 
	पूज्यते/KP यत्/SN अपूज्यः/NP अपि/NP यत्/SN अगम्यः/NP अपिA गम्यते/KP ।/PUNC 
	वन्द्यते/KP यत्/SSN अवन्द्यः/NP अपि/A सः/SSN प्रभावः/NP धनस्य/NP च/AVK ॥/PUNC 7/PUNC ॥/PUNC 
	अशनात्/NP इन्द्रियाणि/NP इव/ASD स्युः/KP कार्याणि/NP अखिलानि/NV अपि/A ।/PUNC 
	एतस्मात्/SNV कारणात्/NP वित्तम्/NP सर्वसाधनम्/NV उच्यते/KP ॥/PUNC 8/PUNC ॥/PUNC 
	अर्थार्थी/NV जीवलोकः/NP अयम्/SN श्मशानम्/NP अपि/A सेवते/KP ।/PUNC 
	त्यक्त्वाKKS जनयितारम्/NP स्वम्/SN निःस्वम्/NP गच्छति/KP दूरतः/AUP ॥/PUNC 9/PUNC ॥/PUNC 
	गतवयसाम्/NV अपि/A पुंसाम्/NP येषाम्/SNV अर्थाः/NP भवन्ति/KP ते/SN तरुणाः/NP ।/PUNC 
	अर्थे/NP तु/A ये/SSN हीनाः/NV वृद्धाः/NP ते/SSN यौवने/NP अपि/A स्युः/KP ॥/PUNC 10/PUNC ॥/PUNC 
	सः/SNV च/AVK अर्थः/NP पुरुषाणाम्/NP षड्भिः/SMKY उपायैः/NP भवति/KP –/PUNC भिक्षया/NP,/PUNC नृपसेवया/NP,/PUNC कृषिकर्मणा/NP ,/PUNC विद्योपार्जनेन/NP ,/PUNC व्यवहारेण/NP ,/PUNC वणिक्कर्मणा/NP वा/A ।/PUNC सर्वेषाम्/SN अपि/A तेषाम्/SN वाणिज्येन/NP अतिरस्कृतः/KN अर्थलाभः/NP स्यात्/KP ।/PUNC 
	उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	हता/KN भिक्षा/NP भेकैः/NP वितरति/KP नृपः/NP न/AN उचितम्/NP अहो/ABS 
	कृषिः/NP क्लिष्टा/NV ,/PUNC विद्या/NP गुरुविनयवृत्त्या/NP अतिविषमा/NV ।/PUNC 
	कुसीदात्/KP दारिद्र्यम्/NP परकरगतग्रन्थिशमनात्/NV न/AN मन्ये/KP वाणिज्यात्/NP किम्/A अपि/A परमम्/NV वर्त्तनम्/NP इह/A ॥/PUNC 11/PUNC ॥/PUNC 
	उपायानाम्/NP च/AVK सर्वेषाम्/SNV उपायः/NP पण्यसंग्रहः/NP ।/PUNC 
	धनार्थम्/NP शस्यते/KP हि/A एकः/SMKP तदन्यः/SN संशयात्मकः/NP ॥/PUNC 12/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SNV च/AVK वाणिज्यम्/NP सप्तविधम्/SMKP अर्थागमाय/NP स्यात्/KP ।/PUNC तत्/SNV यथा/A -/PUNC गान्धिकव्यवहारः/NP,/PUNC निक्षेपप्रवेशः/NP,/PUNC गौष्ठिककर्म/NP,/PUNC परिचितग्राहकागमः/NP ,/PUNC 
मिथ्याक्रयकथनम्/NP ,/PUNC कूटतुलामानम्/NP,/PUNC देशान्तरात्/NP भाण्डनयनम्/NP च/APY इति/AUD ।/PUNC 
	उक्तम्/KN च/PUNC 
	पण्यानाम्/NP गान्धिकम्/NP पण्यम्/KP किम्/A अन्यैः/A काञ्चनादिभिः/NP ।/PUNC 
	यत्र/A एकेन/SMKP च/A यत्/A क्रीतम्/KN तत्/SNV शतेन/SMKY प्रदीयते/KP ॥/PUNC 13/PUNC ॥/PUNC 
	निक्षेपे/NP पतिते/KN हर्म्ये/NP श्रेष्ठी/NV स्तौति/KP स्वदेवताम्/NP ।/PUNC 
	निक्षेपी/NP म्रियते/KP तुभ्यम्/SN प्रदास्यामि/KP उपयाचितम्/NP ॥/PUNC 14/PUNC ॥/PUNC 
	गोष्ठिककर्मनियुक्तः/KN श्रेष्ठी/NP चिन्तयति/KP चेतसा/NP हृष्टः/KN ।/PUNC 
	वसुधा/NP वसुसंपूर्णा/NV मया/SN अद्य/A लब्धा/KN किम्/SN अन्येन/A ॥/PUNC 15/PUNC ॥/PUNC 
	परिचितम्/KN आगच्छन्तम्/KNV ग्राहकम्/NP उत्कण्ठया/NP विलोक्य/KKS असौ/SN ।/PUNC 
	हृष्यति/KP तत्/SN धनलुब्धः/KN यद्वत्/A पुत्रेण/NP जातेन/KN ॥/PUNC 16/PUNC ॥/PUNC 
	अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC 
	पूर्णापूर्णैः/AN मानैः/NP परिचितजनवञ्चनम्/NP तथा/AVK नित्यम्/A ।/PUNC 
	मिथ्याक्रयस्य/NP कथनम्/NP प्रकृतिः/NP इयम्/SN स्यात्/KP किराटानाम्/NP 
 अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC 
	द्विगुणम्/SMKY त्रिगुणम्/SMKY वित्तम्/NP भाण्डक्रयविचक्षणाः/NP ।/PUNC 
	प्राप्नुवन्ति/KP उद्यमात्/NP लोकाः/NP दूरदेशान्तरम्/NP गताः/KN ॥/PUNC 18/PUNC ॥/PUNC 
	इति/AUD एवम्/AUD सम्प्रधार्य/KKS मथुरागामीनि/NV भाण्डानि/NP आदाय/KKS शुभायाम्/NV तिथौ/NP गुरुजनानुज्ञातः/KN सुरथाधिरूढः/KN प्रस्थितः/KN ।/PUNC 
तस्य/SN च/AVK मङ्गलवृषभौ/NP संजीवकनन्दकनामानौ/NP गृहोत्पन्नौ/NV धूर्वोढारौ/KV स्थितौ/KN ।/PUNC 
तयोः/SN एकः/SN संजीवकाभिधानः/NP यमुनाकच्छम्/NP अवतीर्णः/KN सन्/KNV पङ्कपूरम्/NP आसाद्य/KKS कलितचरणः/NV युगभङ्गम्/NP विधाय/KKS निषसाद/KP ।/PUNC
अथ/A तम्/SN तदवस्थम्/NP आलोक्य/KKS वर्धमानः/KNV परम्/NV विषादम्/NP अगमत्/KP ।/PUNC 
तदर्थम्/NP च/AVK स्नेहार्द्रहृदयः/NP त्रिरात्रं/NP प्रयाणभङ्गम्/NP अकरोत्/KP ।/PUNC 
अथ/A तम्/SN विषण्णम्/NP आलोक्य/KKS सार्थिकौः/NP अभिहितम्/KN -/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB श्रेष्ठिन्/NP !/PUNC किम्/SN एवम्/ASD वृषभस्य/NP कृते/KN सिंहव्याघ्रसमाकुले/NP बह्वपाये/NV अस्मिन्/SN वने/NP समस्तसार्थः/NP त्वया/SN संदेहे/NP नियोजितः/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	न/AN स्वल्पस्य/A कृते/KN भूरि/A नाशयेत्/KP मतिमान्/NV नरः/NP ।/PUNC 
	एतत्/SN एव/INTF अत्र/A पाण्डित्यम्/NP यत्/SN स्वल्पाद्/A भूरिरक्षणम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 19/PUNC ॥/PUNC 
	अथ/A असौ/SN तत्/SN अवधार्यम्/KN संजीवकस्य/NS रक्षापुरुषान्/NP निरूप्य/KKS अशेषसार्थम्/NP नीत्वा/KKS प्रस्थितः/KN ।/PUNC 
अथ/A रक्षापुरुषाः/NP अपि/A बह्वपायम्/NV तत्/SNV वनम्/NP विदित्वा/KN सञ्जीवकम्/NS परित्यज्य/KKS पृष्ठतः/A गत्वा/KN अन्येद्युः/SN तम्/SN सार्थवाहम्/NP मिथ्या/NP आहुः/KP-/PUNC 
 ”/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC मृतः/KN असौ/SN संजीवकः/NS।/PUNC 
अस्माभिः/SN तु/A सार्थवाहस्य/NP अभीष्टः/KN इति/AUD मत्वा/KKS वह्निना/NP संस्कृतः/KN ”-/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KN सार्थवाहः/NP कृतज्ञतया/KV स्नेहार्द्रहृदयः/NV तस्य/SN उर्ध्वदैहिकक्रिया/NP वृषोत्सर्गादिकाः/NP सर्वाः/SN चकार/KP ।/PUNC 
संजीवकः/NS अपि/A आयुःशेषतया/NP यमुनासलिलमिश्रैः/NP शिशिरतरवातैः/NP आप्यायितशरीरः/NP कथञ्चित्/SN अपि/A उत्थाय/KKS यमुनातटम्/NP उपपदे/KP ।/PUNC 
तत्र/A मरकतसदृशानि/NV बालतृणाग्राणि/NP भक्षयन्/KNV कतिपयैः/A अहोभिः/NP हरवृषभः/NP इव/ASD पीनः/A ककुद्मान्/NV बलवान्/NV च/APY संवृत्तः/KN ,/PUNC प्रत्यहम्/NP वल्मीकशिखराग्राणि/NP श्रृङ्गाभ्याम्/NP विदारयन्/KNV प्रगर्जः/NV च/AVK आस्ते/KP ।/PUNC 
साधु/A इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	अरक्षितम्/KN तिष्ठति/KP दैवरक्षितम्/KN ,/PUNC सुरक्षितम्/KN दैवहतम्/KN विनश्यति/KP ।/PUNC 
	जीवति/KP अनाथः/NP अपि/A वने/NP विसर्जितः/KN ,/PUNC कृतप्रयत्नः/NP अपि/A गृहे/NP विनश्यति/KP ॥/PUNC 20/PUNC ॥/PUNC 
	अथ/A कदाचित्/SN पिङ्गलकः/NS नाम/NP सिंहः/NP सर्वमृगपरिवृतः/KN पिपासाकुलः/NV उदकपानार्थम्/NP यमुनातटम्/NP अवतीर्णः/KP संजीवकस्य/NS गम्भीरतररावम्/NP दूरात्/KV एव/INTF अश्रृणोत्/KP।/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS अतीव/A व्याकुलहृदयः/NP सः/SN साध्वसमाकारम्/NP प्रच्छाद्य/KKS वटतले/NP चतुःमण्डलावस्थानेन/NP अवस्थितः/KN ।/PUNC 
चतुर्मण्डलावस्थानम्/NP तु/A इदम्/SN -/PUNC सिंहः/NP,/PUNC सिंहानुयायिनः/NP ,/PUNC काकरवाः/NP,/PUNC किंवृत्ताः/NP च/APY इति/AUD ।/PUNC 
अथ/A तस्य/SN करटकदमनकनामानौ/NP द्वौ/SMKY श्रृगालौ/NP मन्त्रिपुत्रौ/NV भ्रष्टाधिकारौ/NV सदानुयायिनौ/KV आस्ताम्/KP ।/PUNC 
तौ/SN च/AVK परस्परम्/A मन्त्रयतः/KP ।/PUNC 
तत्र/A दमनकः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC ”/PUNC भद्र/NP करटक/NS !/PUNC अयम्/SN तावत्/A अस्मत्/SN स्वामी/NP उदकग्रहणार्थम् /NP यमुनाकच्छम्/NP अवतीर्य/KKS स्थितः/KN ।/PUNC 
सः/SN किम्/SN निमित्तम्/NP पिपासाकुलः/NP अपि/A निवृत्त्य/KKS व्यूहरचनाम्/NP विधाय/KP ,/PUNC दौर्मनस्येन/NP अभिभूतः/KN अत्र/SN वटतले/NP स्थितः/KN ?/PUNC ”/PUNC 
करटक/NS आह/KP-/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC किम्/AP आवयोः/SN अनेन/SN व्यापारेण/NP ?/PUNC ”/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/A -/PUNC 
	अव्यापारेषु/NP व्यापारम्/NP यः/SSN नरः/NP कर्तुम्/KKS इच्छति/KP ।/PUNC 
	सः/SSN एव/INTF निधनम्/NP याति/KP कीलोत्पाटि/NV इव/ASD वानरः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 21/PUNC ॥/PUNC 
	दमनकः/NS आह/KP –/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
 [/PUNC १/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC कीलोत्पाटि/NP -/PUNC वानरकथा/NS )/PUNC 
	कस्मिश्चित्/SN नगराभ्याशे/NP केन/SN अपि/A वणिक्पुत्रेण/NP तरुषण्डमध्ये/NP देवतायतनम्/NP कर्तुम्/KKS आरब्धम्/KN ।/PUNC 
तत्र/A च/AVK ये/SSN कर्मकराः/NP स्थापत्यादयाः/NP ते/SSN मध्याह्नवेलायाम्/NP आहारार्थम्/NP नगरमध्ये/NP गच्छन्ति/KP ।/PUNC 
अथ/A कदाचित्/SN आनुषङ्गिकम्/NV वानरयूथम्/NP इतः/A च/APY इतः/A च/APY परिभ्रमत्/KNV आगतम्/KN ।/PUNC 
तत्र/A एकस्य/SMKY कस्यचित्/SN शिल्पिनः/NP अर्धस्फाटितः/KN अशनवृक्षदारुमयः/NV स्तम्भः/NP खदिरकीलकेन/NP मध्यनिहितेन/NV तिष्ठति/KP ।/PUNC 
एतस्मिन्/SN अन्तरे/A ते/SN वानराः/NP तरुशिखरप्रासादश्रृङ्गदारुपर्यन्तेषु/NP यथेच्छया/NP क्रीडितुम्/KKS आरब्धाः/KN ।/PUNC 
एकः/SMK च/AVK तेषाम्/SN प्रत्यासन्नमृत्युः/NP चापल्यात्/NP तस्मिन्/SN अर्धस्फोटिते/NV स्तम्भे/NP उपविश्य/KKS पाणिभ्याम्/NP कीलकम्/NP संगृह्य/KKS यावत्/AVK उत्पाटयितुम्/KKS आरेभे/KP,/PUNC तावत्/AVK तस्य/SSN स्तम्भमध्यगतवृषणस्य/NP स्वस्थानात्/NP चलितकीलकेन/NP यत्/AVK वृत्तम्/NP तत्/AVK प्राक्/A एव/INTF निवेदितम्/KN ।/PUNC 
अतः/A अहम्/SN ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC अव्यापारेषु/NP “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
आवयोः/SN भक्षितशेषः/NV आहारः/NP अस्ति/KP एव/INTF तत्/SN किम्/AP अनेन/SN व्यापारेण/NP ?/PUNC ”/PUNC दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भवान्/SN आहारार्थी/NP केवलम्/A एव/INTF !/PUNC तत्/SN न/AN युक्तम्/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	सुहृदाम्/NP उपकारकारणाद्/NP,/PUNC द्विषताम्/NP अपि/A अपकारकारणात्/NP ।/PUNC 
	नृपसंश्रयः/NP इष्यते/KP बुधैः/NP जठरम्/NP कः/SN न/AN बिभर्ति/KP केवलम्/A ॥/PUNC 22/PUNC ॥/PUNC 
किम्/SN च/AVK –/PUNC 
 यस्मिन्/SN जीवति/KP जीवन्ति/KP बहवः/NP सः/SN अत्र/A जीवतु/KP ।/PUNC 
	वयांसि/NP किम्/AP न/AN कुर्वन्ति/KP चञ्च्वा/NP स्वोदरपूरणम्/NP ?/PUNC ॥/PUNC 23/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/AVK-/PUNC 
 यत्/AVK जीव्यते/KP क्षणम्/NP अपि/A प्रथितम्/KN मनुष्यैः/NP
	 विज्ञानशौर्यविभवार्यगुणैः/NP समेतम्/NP ।/PUNC 
	तत्/SN नाम/NP जीवितम्/NP इह/A प्रवदन्ति/KP तज्ज्ञा/NP,/PUNC 
	 काकः/NP अपि/A जीवति/KP चिरः/A च/AVK बलिम्/NP च/AVK भुङ्क्ते/KP ॥/PUNC 24/PUNC ॥/PUNC 
	यः/SN न/AN आत्मना/SN न/AN च/AVK परेण/SN च/A बन्धुवर्गे/NP ,/PUNC 
	 दीने/NP दयाम्/NP न/AN कुरुते/KP न/AN च/AVK मर्त्यवर्गे/NP ।/PUNC 
 किम्/AP तस्य/SN जीवितफलम्/NP हि/A मनुष्यलोके/NP,/PUNC 
	 काकः/NP अपि/A जीवति/KP चिरम्/A च/AVK बलिम्/NP च/AVK भुङ्क्ते/KP ॥/PUNC 25/PUNC ॥/PUNC 
	सुपूरा/NV स्यात्/KP कुनदिका/NP,/PUNC सुपूरः/NV मूषिकाञ्जलिः/NP ।/PUNC 
	सुसंतुष्टः/NV कापुरुषः/NP स्वल्पकेन/NP अपि/A तुष्यति/KP ॥/PUNC 26/PUNC ॥/PUNC 
किम्/A च/A-/PUNC 
 किम्/AP तेन/SN जातु/A जातेन/KN मातुः/NP यौवनहारिणा/NP ?/PUNC ।/PUNC 
	आरोहति/KP न/PUNC यः/SN स्वस्य/NP वंशस्य/NP अग्रे/NP ध्वजः/NP यथा/AVK ॥/PUNC 27/PUNC ॥/PUNC 
	परिवर्तिनि/NV संसारे/NP मृतः/KN कः/SN वा/A न/AN जायते/KP ?/PUNC ।/PUNC 
	जातः/KN तु/A गण्यते/KP सः/SSN अत्र/A यः/SSN स्फुरेत्/KP च/AVK श्रियाधिकः/NP ॥/PUNC 28/PUNC ॥/PUNC 
किम्/A च/A-/PUNC 
	जातस्य/NP नदीतीरे/NP तस्य/SN अपि/A तृणस्य/NP जन्मसाफल्यम्/NP ।/PUNC 
 यत्/A सलिलमज्जनाकुलजनहस्तालम्बनम्/NP भवति/KP ॥/PUNC 29/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/AVK -/PUNC 
 स्तिमितोन्नतसञ्चाराः/NV जनसंतापहारिणः/NV ।/PUNC 
	जायन्ते/KP विरलाः/NP लोके/NP जलदा/NP इव/ASD सज्जनाः/NP ॥/PUNC 30/PUNC ॥/PUNC 
	निरतिशयम्/NV गरिमाणम्/NP तेन/SN जनन्याः/NP स्मरन्ति/KP विद्वांसः/NP ।/PUNC 
	यत्/SN कम्/A अपि/A वहति/KP गर्भम्/NP महताम्/NP अपि/A यः/SN गुरुः/NP भवति/KP ॥/PUNC 31/PUNC ॥/PUNC 
	अप्रकटीकृतशक्तिः/NV शक्तः/KN अपि/A जनः/NP तिरस्क्रियाम्/NP लभते/KP ।/PUNC 
	निवसन्/KNV अन्तर्दारुणि/NV लंघ्यः/KN वह्निः/NP न/AN तु/A ज्वलितः/KN ॥/PUNC 32/PUNC ॥/PUNC 
	करटकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC आवाम्/SN तावत्/A अप्रधानौ/NP,/PUNC तत्/SN किम्/AP आवयोः/SN अनेन/SN व्यापारेण/NP ?/PUNC 
उक्तम्/KN च/A-/PUNC 
	अपृष्टः/KN अत्र/A अप्रधानः/NP यः/SN ब्रूते/KP राज्ञः/NP पुरः/NP कुधीः/NP ।/PUNC 
	न/AN केवलम्/NP असम्मानम्/NP लभते/KP च/AVK विडम्बनम्/NP ॥/PUNC 33/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/AVK -/PUNC 
 वचः/NP तत्र/AVK प्रयोक्तव्यम्/KP यत्र/AVK उक्तम्/KN लभते/KP फलम्/NP ।/PUNC 
	स्थायी/NP भवति/KP च/AVK अत्यन्तम्/NP रागः/NP शुक्लपटे/NP यथा/A ”/PUNC ॥/PUNC 34/PUNC ॥/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC मा/AN मा/DV एवम्/A वद/KP ।/PUNC 
	अप्रधानः/NP प्रधानः/NP स्यात्/KP सेवते/KP यदि/A पार्थिवम्/NP ।/PUNC 
	प्रधानः/NP अपि/A अप्रधानः/NP स्यात्/KP यदि/A सेवाविवर्जितः/KN ॥/PUNC 35/PUNC ॥/PUNC 
यतः/A उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 	
आसन्नम्KN एव/INTF नृपतिः/NP भजते/KP मनुष्यम्/NP 
	 विद्याविहीनम्/NP अकुलीनम्/NP असंस्कृतम्/NP वा/A ।/PUNC 
	प्रायेण/NP भूमिपतयः/NP प्रमदा/NP लताः/NP च/APY
 यत्/SSN पार्श्वतः/NP भवति/KP तत्/SSN परिवेष्टयन्ति/KP ॥/PUNC 36/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/A-/PUNC 
 कोपप्रसादवस्तूनि/NP ये/SN विचिन्वन्ति/KP सेवकाः/NP ।/PUNC 
	आरोहन्ति/KP शनैः/KV पश्चात्/A धुन्वन्तम्/KNV अपि/A पार्थिवम्/NP ॥/PUNC 37/PUNC ॥/PUNC 
	विद्यावताम्/NP महेच्छानाम्/NP शिल्पविक्रमशालिनाम्/NP ।/PUNC 
	सेवावृत्तिविदाम्/NP च/AVK एव/INTF न/AN आश्रयः/NP पार्थिवम्/NP विना/AUP ॥/PUNC 38/PUNC ॥/PUNC 
	ये/SN जात्यादिमहोत्साहात्/NP नरेन्द्रान्/NP न/AN उपयान्ति/KP च/AVK ।/PUNC 
	तेषाम्/SN आमरणम्/NP भिक्षा/NP प्रायश्चित्तम्/NP विनिर्मितम्/KN ॥/PUNC 39/PUNC ॥/PUNC 
	ये/SN च/A प्राहुः/KP दुरात्मानः/NP दुराराध्याः/NP महीभुजः/NP ।/PUNC 
	प्रमादालस्यजाड्यानि/NP ख्यापितानि/KP निजानि/NP तैः/SN ॥/PUNC 40/PUNC ॥/PUNC 
	सर्पान्/NP व्याघ्रान्/NP गजान्/NP सिंहान्/NP दृष्टवा/KKS उपायैः/NP वशीकृतान्/KN ।/PUNC 
	राजा/NP इति/AUD कियती/NV मात्रा/NP धीमताम्/NP अप्रमादिनाम्/NP ॥/PUNC 41/PUNC ॥/PUNC 
	राजानम्/NP एव/INTF संश्रित्य/KKS विद्वान्/NP याति/KP पराम्/NV गतिम्/NP ।/PUNC 
	विना/AUP मलयम्/NP अन्यत्र/A चन्दनम्/NP न/AN प्ररोहति/KP ॥/PUNC 42/PUNC ॥/PUNC 
	धवलानि/NV आतपत्राणि/NP वाजिनः/NP च/AVK मनोरमाः/NV ।/PUNC 
	सदा/A मत्ताः/NV च/AVK मातङ्गाः/NP प्रसन्ने/NP सति/KP भूपतौ/NP ॥/PUNC 43/PUNC ॥/PUNC 
करटकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC अथ/A भवान्/SN किम्/AP कर्तुमनाः/KKS ?/PUNC “/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP-/PUNC “/PUNC अद्य/A अस्मत्/SN स्वामी/NP पिङ्गलकः/NS भीतः/KN भीतपरिवारः/NV च/APY वर्तते/KP ।/PUNC 
तत्/SN एनम्/SN गत्वा/KKS भयकारणम्/NP विज्ञाय/KKS ,/PUNC “/PUNC सन्धिविग्रहयानासनसंश्रयद्वैधीभावानाम्/NP एकतमेन/NP संविधास्ये/KP ।/PUNC ”/PUNC 
करटकः/NS आह/PUNC -/PUNC “/PUNC अथ/A कथम्/SN वेत्ति/KP भवान्/SN ,/PUNC यत्/A भयाविष्टः/KN अयम्/SN स्वामी/NP ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC ज्ञेयम्/KN किम्/AP अत्र/A ?/PUNC यतः/A उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	उदीरितः/KN अर्थः/NP पशुना/NP अपि/A गृह्यते/KP ,/PUNC हयाः/NP च/APY नागाः/NP च/PUNC वहन्ति/KP चोदिताः/KN ।/PUNC 
	अनुक्तम्/KN अपि/A ऊहति/KP पण्डितः/NP जनः/NP,/PUNC परेङ्गितज्ञानफला/NP हि/A बुद्धयः/NP ॥/PUNC 44/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/AVK-/PUNC 
 आकारैः/NP इङ्गितैः/NP गत्या/KKS चेष्टया/NP भाषणेन/NP च/AVK ।/PUNC 
 नेत्रवक्त्रविकारैः/NP च/AVK लक्ष्यन्ते/KP अन्तर्गतम्/KN मनः/NP ॥/PUNC 45/PUNC ॥/PUNC 
	तत्/SN अद्य/A एनम्/SN भयाकुलम्/NP प्राप्य/KKS स्वबुद्धिप्रभावेण/NP निर्भयम्/NP कृत्वा/KKS ,/PUNC वशीकृत्य/KKS च/AVK निजाम्/NP साचिव्यपदवीम्/NP समासादयिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
करटकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC अनभिज्ञः/NV भवान्/SN सेवाधर्मस्य/NP ।/PUNC तत्/SN कथम्/AP एनम्/SN वशीकरिष्यसि/KP ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/AP अहम्/SN सेवानभिज्ञः/NP ?/PUNC मया/SN हि/A तातोत्सङ्गे/NP क्रीडता/KN अभ्यागतसाधूनाम्/NP नीतिशास्त्रम्/NP पठताम्/KNV यत्/AVK श्रुतम्/KN सेवाधर्मस्य/NP सारभूतम्/NP तद्/AVK हृदि/NP स्थापितम्/KN ।/PUNC श्रूयताम्/KP तत्/SN च/AVK इदम्/SN -/PUNC 
	सुवर्णपुष्पिताम्/NP पृथ्वीम्/NP विचिन्वन्ति/KP त्रयः/SMKP जनाः/NP ।/PUNC 
	शूरः/NP च/APY कृतविद्यः/NP च/APY यः/SN च/AVK जानाति/KP सेवितुम्/KKS ॥/PUNC 46/PUNC ॥/PUNC 
	सा/SSN सेवा/NP या/SSN प्रभुहिता/KN ग्राह्यवाक्यविशेषतः/NP ।/PUNC 
	आश्रयेत्/KP पार्थिवम्/NP विद्वान्/NP तद्द्वारेण/NP एव/INTF न/AN अन्यथा/A ॥/PUNC 47/PUNC ॥/PUNC 
	यः/SN न/AN वेत्ति/KP गुणान्यस्य/NP न/AN तम्/SN सेवेत/KP पण्डितः/NP ।/PUNC 
	न/AN हि/A तस्मात्/SN फलम्/NP किंचित्/SN सुकृष्टात्/KKS ऊषरात्/NP इव/ASD ॥/PUNC 48/PUNC ॥/PUNC 
	द्रव्यप्रकृतिहीनः/NP अपि/A सेव्यः/KN सेव्यगुणान्वितः/KN ।/PUNC 
	भवति/KP आजीवनम्/NP तस्मात्/SN फलम्/NP कालान्तरात्/NP अपि/A ॥/PUNC 49/PUNC ॥/PUNC 
	अपि/A स्थाणुवत्/KV आसीनः/KV शुष्यन्/KNV परिगतः/KN क्षुधा/NP ।/PUNC 
	न/AN तु/A एव/INTF न/AN आत्मसम्पन्नात्/NP वृत्तिम्/NP ईहेत/KP पण्डितः/NP ॥/PUNC 50/PUNC ॥/PUNC 
	सेवकः/NP स्वामिनम्/NP द्वेष्टि/KP कृपणम्/NV परुषाक्षरम्/NV ।/PUNC 
	आत्मानम्/NP किम्/A सः/SN न/AN द्वेष्टि/KP सेव्यासेव्यम्/NP न/AN वेत्ति/KP यः/SN ॥/PUNC 51/PUNC ॥/PUNC 
	यम्/SN आश्रित्य/KKS न/AN विश्रामम्/NP क्षुधार्ताः/KN यान्ति/KP सेवकाः/NP ।/PUNC 
	सः/SN अर्कवत्/NP नृपतिः/NP त्याज्यः/KKS सदा/A पुष्पफलः/NP अपि/A सन्/KNV ॥/PUNC 52/PUNC ॥/PUNC 
	राजमातरि/NP देव्यान्/NP च/AVK कुमारे/NP मुख्यमन्त्रिणि/NP ।/PUNC 
	पुरोहिते/NP प्रतीहारे/NP सदा/A वर्तेत्/KP राजवत्/NP ॥/PUNC 53/PUNC ॥/PUNC 
	जीव/KP इति/KV प्रब्रुवन्/KNV प्रोक्तः/KN कृत्याकृत्यविचक्षणः/NP ।/PUNC 
	करोति/KP निर्विकल्पम्/NP यः/SSN सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 54/PUNC ॥/PUNC 
	प्रभुप्रसादजम्/NV वित्तम्/NP सुप्राप्तम्/KN यः/SSN निवेदयेत्/KP ।/PUNC 
	वस्त्राद्यम्/NP च/AVK दधाति/KP अङ्गे/NP सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 55/PUNC ॥/PUNC 
	अन्तःपुरचरैः/NP सार्धम्/AUP यः/SSN न/AN मन्त्रम्/NP समाचरेत्/KP ।/PUNC 
	न/AN कलत्रैः/NP नरेन्द्रस्य/NP सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 56/PUNC ॥/PUNC 
	द्यूतम्/NP यः/SSN यमदूताभम्/NP हालाम्/NP हालाहलोपमाम्/NP ।/PUNC 
	पश्येत्/KP दारान्/NP वृथाकारान्/NP सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 57/PUNC ॥/PUNC 
	युद्धकाले/NP अग्रगः/NP यः/SSN स्यात्/KP सदा/A पृष्ठानुगः/NP पुरे/NP ।/PUNC 
	प्रभोः/NP द्वाराश्रितः/KN हर्म्ये/NP सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 58/PUNC ॥/PUNC 
	सम्मतः/KN अहम्/SN विभोः/NP नित्यम्/NP इति/AUD मत्वा/KKS व्यतिक्रमेत्/KP ।/PUNC 
	कृच्छ्रेषु/NP अपि/A न/AN मर्यादाम्/NP सः/SN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 59/PUNC ॥/PUNC 
	द्वेषिद्वेषपरः/NP नित्यम्/NP इष्टानाम्/NP इष्टकर्मकृत्/KP ।/PUNC 
	यः/SSN नरः/NP नरनाथस्य/NP सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 60/PUNC ॥/PUNC 
	प्रोक्तः/KN प्रत्युत्तरम्/NP न/AN आह/KP विरुद्धम्/NP प्रभुणा/NP न/AN यः/SSN ।/PUNC 
	न/AN समीपे/A हसति/KP उच्चैः/A सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 61/PUNC ॥/PUNC 
	यः/SSN रणम्/NP शरणम्/NP तद्वत्/A मन्यते/KP भयवर्जितः/NP ।/PUNC 
	प्रवासम्/NP स्वपुरावासम्/NP सः/SSN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 62/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN कुर्यात्/KP नरनाथस्य/NP योषिद्भिः/NP सह/A संगतिम्/NP ।/PUNC 
	न/AN निन्दाम्/NP न/AN विवादम्/NP च/AVK सः/SN भवेत्/KP राजवल्लभः/NP ॥/PUNC 63/PUNC ॥/PUNC 
करटकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC अथ/A भवान्/SN तत्र/A गत्वा/KKS किम्/A तावत्/A प्रथमम्/SMKP वक्ष्यति/KP ,/PUNC तत्/SN तावत्/A उच्यताम्/KP ।/PUNC ”/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP-/PUNC 
	उत्तरात्/NP उत्तरम्/NV वाक्यम्/NP वदताम्/NP सम्प्रजायते/KP ।/PUNC 
	सुवृष्टिगुणसम्पन्नात्/NV बीजात्/NP बीजम्/NP इव/ASD अपरम्/SN ॥/PUNC 64/PUNC ॥/PUNC 
	अपायसन्दर्शनजाम्/NV विपत्तिम्/NP उपायसन्दर्शनजान्/NV च/AVK सिद्धिम्/NP ।/PUNC 
	मेधाविनः/NP नीतिगुणप्रयुक्ताम्/NP पुरः/A स्फुरन्तीम्/KNV इव/ASD वर्णयन्ति/KP ॥/PUNC 65/PUNC ॥/PUNC 
	एकेषाम्/SN वाचि/NP शुकवत्/ASD अन्येषाम्/SN हृदि/NP मूकवत्/ASD ।/PUNC 
	हृदि/NP वाचि/NP तथा/A अन्येषम्/SN वल्गुः/NP वल्गन्ति/KP सूक्तयः/NP ॥/PUNC 66/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN च/AVK अहम्/SN अप्राप्तकालम्/NP वक्ष्ये/KP ।/PUNC आकर्णितम्/KN मया/SN नीतिसारम्/NP पितुः/NP पूर्वम्/A उत्सङ्गम्/NP हि/A निषेवता/KNV -/PUNC 
 अप्राप्तकालम्/NV वचनम्/NP बृहस्पतिः/NP अपि/A ब्रुवन्/KNV ।/PUNC 
	लभते/KP बह्ववज्ञानम्/NP अपमानम्/NP च/AVK पुष्कलम्/NP ॥/PUNC 67/PUNC ॥/PUNC 
करटकः/NS आह/KP-/PUNC 
	“/PUNC दुराराधया/NV हि/A राजानः/NP पर्वताः/NP इव/ASD सर्वदा/A ।/PUNC
	व्यालाकीर्णाः/NV सुविषमाः/NV कठिनाः/NV दुष्टसेविताः/NV ॥/PUNC 68/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/A-/PUNC 
	भोगिनः/NV कञ्चुकाविष्टाः/KN कुटिलाः/NV क्रूरचेष्टिताः/KN ।/PUNC 
सुदुष्टाः/NP मन्त्रसाध्याः/NV च/AVK राजानः/NP पन्नगा/NP इव/ASD ॥/PUNC 69/PUNC ॥/PUNC 
	द्विजिह्वाः/NV क्रूरकर्माणः/NV अनिष्टाः/KN छिद्रानुसारिणः/NV ।/PUNC 
	दूरतः/NP अपि/A हि/A पश्यन्ति/KP राजानः/NP ,/PUNC भुजगा/NP इव/ASD ॥/PUNC 70/PUNC ॥/PUNC 
	स्वल्पम्/NP अपि/A अपकुर्वन्ति/KP ये/SSN अभीष्टाः/NP हि/A महीपतेः/NP ।/PUNC 
	ते/SSN वह्नौ/NP इव/ASD दह्यन्ते/KP पतङ्गाः/NP पापचेतसः/NP ॥/PUNC 71/PUNC ॥/PUNC 
	दुरारोहम्/NP पदम्/NP राज्ञाम्/NP सर्वलोकनमस्कृतम्/KN ।/PUNC 
	स्वल्पेन/NP अपि/A अपकारेण/NP ब्राह्मण्यम्/NP इव/ASD दुष्यति/KP ॥/PUNC 72/PUNC ॥/PUNC 
	दुराराध्याः/NV श्रियः/NP राज्ञाम्/NP दुरापा/NV दुष्परिग्रहाः/NV ।/PUNC 
	तिष्ठन्ति/KP आपः/NP इव/ASD आधारे/NP चिरम्/A आत्मनि/NP संस्थिताः/KP ॥/PUNC 73/PUNC ॥/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC सत्यम्/NP एतत्/SN परम्/NP।/PUNC किन्तु/AVK -/PUNC 
	यस्य/SN यस्य/DV हि/A यः/SNV भावः/NP तेन/SN तेन/DV समाचरेत्/KP ।/PUNC 
	अनुप्रविश्य/KKS मेधावी/NV क्षिप्रम्/KV आत्मवशम्/NP नयेत्/KP ॥/PUNC 74/PUNC ॥/PUNC 
	भर्त्तुः/NP चित्तानुवर्तित्वम्/NP सुवृत्तम्/NP च/AVK अनुजीविनाम्/NP ।/PUNC 
	राक्षसाः/NP च/AVK अपि/AVK गृह्यन्ते/KP नित्यम्/NP छन्दानुवर्तिभिः/NP ॥/PUNC 75/PUNC ॥/PUNC 
	सरुषि/NV नृपे/NP स्तुतिवचनम्/NP तत्/SN अभिमते/NP प्रेम/NP तत्/SN द्विषि/NP द्वेषः/NP ।/PUNC 
	तत्/SN दानस्य/NP च/AVK शंसा/NP अमन्त्रतन्त्रम्/NV वशीकरणम्/NP ॥/PUNC 76/PUNC ॥/PUNC ”/PUNC 
करटकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC यदि/AVK एवम्/A अभिमतम्/NP तर्हि/AVK शिवाः/NP ते/SN पन्थानः/NP सन्तु/KP ।/PUNC 
यथाभिलषितम्/NP अनुष्ठीयताम्/KP ।/PUNC 
तत्र/ च/AVK -/PUNC 
 अप्रमादः/NP च/AVK कर्तव्यः/KN त्वया/SN राज्ञः/NP समाश्रये/KP ।/PUNC 
 त्वदीयस्य/NP शरीरस्य/NP वयं/SN भाग्योपजीविनः/NP ॥/PUNC 
सः/SN अपि/A तम्/SN प्रणम्य/KKS पिङ्गलकाभिमुखम्/NP प्रतस्थे/KP ।/PUNC 
	अथ/A आगच्छन्तम्/KNV दमनकम्/NS आलोक्य/KKS पिङ्गलकः/NS द्वाःस्थम्/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC अपसार्यताम्/KP वेत्रलता/NP,/PUNC अयम्/SN अस्माकम्/SN चिरन्तनः/NP मन्त्रिपुत्रः/NP दमनकः/NS अव्याहतप्रवेशः/KP ,/PUNC तत्/SN प्रवेश्यताम्/KP द्वितीयमण्डलभागी/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC यथा/A अवादीत्/KP भवान्/SN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
अथ/A प्रविश्य/KKS दमनकः/NS निर्दिष्टे/KN आसने/NP पिङ्गलकम्/NS प्रणम्य/KKS प्राप्तानुज्ञः/KN उपविष्टः/KN ।/PUNC 
सः/SN तु/A तस्य/SN नखकुलिशालङ्कृतम्/KN दक्षिणपाणिम्/NP उपरि/A दत्त्वा/KKS मानपुरःसरम्/NP उवाच/KP -/PUNC “/PUNC अपि/A शिवम्/NP भवतः/SN ?/PUNC कस्मात्/SN चिराद्/A दृष्टः/NP असि/KP ?/PUNC ”/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC यद्यपि/AVK न/AN किंचित्/SN देवपादानाम्/NP अस्माभिः/SN प्रयोजनम्/NP ,/PUNC तथापि/AVK भवताम्/SN प्राप्तकालम्/NP वक्तव्यम्/KN,/PUNC यत्/A उत्तममध्यमाधमैः/NP सर्वैः/SN अपि/A राज्ञाम्/NP प्रयोजनम्/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	दन्तस्य/NP निष्कोषणकेन/NP नित्यम्/NP कर्णस्य/NP कण्डूयनकेन/NP वा/A अपि/A ।/PUNC 
	तृणेन/NP कार्यम्/KN भवतीश्वराणाम्/NP किम्/A अङ्ग/NP वाग्घस्तवता/NV नरेण/NP ॥/PUNC 77/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A वयम्/SN देवपादानाम्/NP अन्वयागताः/NV भृत्या/NP आपत्सु/NP अपि/A पृष्ठगामिनः/NP यद्यपि/AVK स्वम्/NP अधिकारम्/NP न/AN लभामहे/KP ,/PUNC 
तथापि/AVK देवपादानाम्/NP एतत्/SN युक्तम्/KN न/AN भवति/KP।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	स्थानेषु/NP एव/INTF नियोक्तव्याः/KN भृत्याः/NP च/APY आभराणानि/NP च/APY ।/PUNC 
	न/AN हि/A चूडामणिः/NP पादे/NP प्रभवामि/NP इति/AUD बध्यते/KP ॥/PUNC 78/PUNC ॥/PUNC 
 यतः/A –/PUNC अनभिज्ञः/NP गुणानाम्/NP यः/SN न/AN भृत्यैः/NP अनुगम्यते/KN ।/PUNC 
	धनाढ्यः/NP अपि/A कुलीनः/NP अपि/A क्रमायातः/NP अपि/A भूपतिः/NP ॥/PUNC 79/PUNC ॥/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC असमैः/NP समीयमानः/NP समैः/NP च/AVK परिहीयमाणसत्कारः/KP ।/PUNC 
	धुरि/NP च/AVK अनियुज्यमानः/KNV त्रिभिः/SMKY अर्थपतिम्/NP त्यजति/KP भृत्यः/NP ॥/PUNC 80/PUNC ॥/PUNC 
	यत्/SN च/AVK अविवेकितया/NV राजा/NP भृत्यान्/NP उत्तमपदयोग्यान्/NP हीनाधमस्थाने/NP नियोजयति/KP न/AN ते/SN तत्र/ एव/INTF तिष्ठन्ति/KP,/PUNC सः/SN भूपतेः/NP दोषः/NP न/AN तेषाम्/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	कनकभूषणसंग्रहणोचितः/NP यदि/A मणिः/NP त्रपुणि/NP प्रतिबध्यते/KP ।/PUNC 
	न/AN सः/SN विरौति/KP न/AN च/AVK अपि/A सः/SN शोभते/KP भवति/KP योजयितुः/NP वचनीयता/NP ॥/PUNC 81/PUNC ॥/PUNC 
यत्/A च/AVK स्वामि/NP एवम्/A वदति/KP -/PUNC “/PUNC चिराद्/A दृश्यते/KP ’’/PUNC ,/PUNC तत्/SN अपि/A श्रूयताम्/KP -/PUNC 
	सव्यदक्षिणयोः/NP यत्र/A विशेषः/NP न/AN अस्ति/KP हस्तयोः/NP ।/PUNC 
	कः/SN तत्र/SN क्षणम्/NP अपि/A आर्यः/NP विद्यमानगतिः/NP भवेत्/KP ॥/PUNC 82/PUNC ॥/PUNC 
	काचे/NP मणिः/NP मणौ/NP काचः/NP येषाम्/SSN बुद्धिः/NP विकल्पते/KP ।/PUNC 
	न/AN तेषाम्/SSN संनिधौ/NP भृत्यः/NP नाममात्रः/NP अपि/A तिष्ठति/KP ॥/PUNC 83/PUNC ॥/PUNC 
	परीक्षकाः/NP यत्र/A न/AN सन्ति/KP देशे/NP ,C न/AN अर्घन्ति/KP रत्नानि/NP समुद्रजानि/NP ।/PUNC 
	आभीरदेशे/NP किल/A चन्द्रकान्तम्/NP त्रिभिः/SMKY वराटैः/NP विपणन्ति/KP गोपाः/NP ॥/PUNC 84/PUNC ॥/PUNC 
	लोहिताख्यस्य/NP च/APY मणेः/NP पद्मरागस्य/NP च/APY अन्तरम्/NP ।/PUNC 
	यत्र/A न/AN अस्ति/KP कथम्/AP तत्र/A क्रियते/KP रत्नविक्रयः/NP ?/PUNC ॥/PUNC 85/PUNC ॥/PUNC 
	निर्विशेषम्/KV यदा/A स्वामी/NP समम्/AUP भृत्येषु/NP वर्तते/KP ।/PUNC 
	तत्र/A उद्यमसमर्थानाम्/NP उत्साहः/NP परिहीयते/KP ॥/PUNC 86/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN विना/AUP पार्थिवः/NP भृत्यैः/NP न/AN भृत्याः/NP पार्थिवम्/NP विना/AUP ।/PUNC 
	तेषाम्/SN च/AVK व्यवहारः/NP अयम्/SN परस्परनिबन्धनम्/NP ॥/PUNC 87/PUNC ॥/PUNC 
	भृत्यैः/NP विना/AUP स्वयम्/SN राजा/NP लोकानुग्रहकारिभिः/NP ।/PUNC 
	मयूखैः/NP इव/ASD दीप्तांशुः/NP तेजसु/NP अपि/A न/AN शोभते/KP ॥/PUNC 88/PUNC ॥/PUNC 
	अरैः/NP सन्धार्यते/KP नाभिः/NP नाभौ/NP च/AVK अराः/NP प्रतिष्ठिताः/KN ।/PUNC 
	स्वामिसेवकयोः/NP एवम्/ASD वृत्तिचक्रम्/NP प्रवर्तते/KP ॥/PUNC 89/PUNC ॥/PUNC 
	शिरसा/NP विधृता/KN नित्यम्/NP स्नेहेन/NP परिपालिताः/KN ।/PUNC 
	केशाः/NP अपि/A विरज्यन्ते/KP निःस्नेहाः/NV किम्/AP न/AN सेवकाः/NP ?/PUNC ॥/PUNC 90/PUNC ॥/PUNC 
	राजा/NP तुष्टः/KN हि/A भृत्यानाम्/NP अर्थमात्रम्/NP प्रयच्छति/KP ।/PUNC 
	ते/SN तु/A सम्मानमात्रेण/NP प्राणैः/NP अपि/A उपकुर्वते/KP ॥/PUNC 91/PUNC  ॥/PUNC
	एवम्/A ज्ञात्वा/KKS नरेन्द्रेण/NP भृत्याः/NP कार्या/KN विचक्षणाः/NP ।/PUNC 
	कुलीनाः/NP शौर्यसंयुक्ताः/NP शक्ताः/NP भक्ताः/NP क्रमागताः/KN ॥/PUNC 92/PUNC ॥/PUNC 
	यः/SN कृत्वा/KKS सुकृतम्/NP राज्ञः/NP दुष्करम्/NV हितम्/NV उत्तमम्/NV ।/PUNC 
	लज्जया/NP वक्ति/KP नो/AN किञ्चित्/SN तेन/SN राजा/NP सहायवान्/KN ॥/PUNC 93 ॥/PUNC
	यस्मिन्/SN कृत्यम्/KN समावेश्य/KKS निर्विशङ्केन/NV चेतसा/NP ।/PUNC 
	आस्यते/KP सेवकः/NP सः/SNV स्यात्/KP कलत्रम्/NP इव/ASD च/A अपरम्/SN ॥/PUNC 94/PUNC ॥/PUNC 
	यः/SN अनाहूतः/KN समभ्येति/KP द्वारि/NP तिष्ठति/KP सर्वदा/A ।/PUNC 
	पृष्टः/KN सत्यम्/NP मितम्/KV ब्रूते/KP सः/SN भृत्यः/NP अर्हः/NV महीभुजाम्/NP ॥/PUNC 95/PUNC ॥/PUNC 
	अनादिष्टः/KN अपि/A भूतस्य/KN दृष्ट्वा/KKS हानिकरम्/NP च/APY यः/SSN ।/PUNC 
	यतते/KP तस्य/SN नाशाय/NP ,/PUNC सः/SSN भृत्यः/NP अर्हः/NV महीभुजाम्/NP ॥/PUNC 96/PUNC ॥/PUNC 
	ताडितः/KN अपि/A दुरुक्तः/KN अपि/A दण्डितः/KN अपि/A महीभुजाम्/NP ।/PUNC 	
	यः/SSN न/AN चिन्तयते/KP पापम्/NP सः/SSN भृत्यः/NP अर्हः/NV महीभुजाम्/NP ॥/PUNC 97/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN गर्वम्/NP कुरुते/KP माने/NP न/AN अपमाने/NP च/APY तप्यते/KP ।/PUNC 
	स्वाकारम्/NP रक्षयेत्/KP यः/SSN तु/A सः/SSN भृत्यः/NP अर्हः/NV महीभुजाम्/NP ॥/PUNC 98/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN क्षुधा/NP पीड्यते/KP यः/SSN तु/A निद्रया/NP न/AN कदाचन/A ।/PUNC 
	न/AN च/AVK शीतातपाद्यैः/NP च/APY ,/PUNC सः/SSN भृत्यः/NP अर्हः/NV महीभुजाम्/NP ॥/PUNC 99/PUNC ॥/PUNC 
	श्रुत्वा/KKS साङ्ग्रामिकीम्/NV वार्ताम्/NP भविष्याम्/NV स्वामिनम्/NP प्रति/AUP ।/PUNC 
	प्रसन्नास्यो/NP भवेत्/KP यः/SSN तु/A सः/SSN भृत्यः/NP अर्हः/NV महीभुजाम्/NP ॥/PUNC 100/PUNC ॥/PUNC 
	सीमावृद्धिम्/NP समायाति/KP शुक्लपक्षः/NP इव/ASD उडुराट्/NP ।/PUNC 
	नियोगसंस्थिते/KN यस्मिन्/SN स/SN भृत्यः/NP अर्हः/NP महीभुजाम्/NP ॥/PUNC 101/PUNC ॥/PUNC 
	सीमा/NP संङ्कोचम्/NP आयाति/KP वह्नौ/NP चर्मः/NP इव/ASD आहितम्/KN ।/PUNC 
	स्थिते/KN तस्मिन्/SN सः/SN तु/A त्याज्यः/KN भृत्यः/NP राज्यम्/NP समीहता/KNV ॥/PUNC 102/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A “/PUNC शृगालः/NP अयम्/SN ”/PUNC इति/AUD मन्यमानेन/KNV मम/SN उपरि/A स्वामिना/NP यदि/A अवज्ञा/NP क्रियते/KP ,/PUNC तत्/SN अपि/A अयुक्तम्/KN ।/PUNC 
	उक्तम्/KN च/AVK ,/PUNC यतः/A -/PUNC 
	कौशेयम्/NP कृमिजम्/NV सुवर्णम्/NP उपलाद्/NP दूर्वा/NP अपि/A गोरोमत्तः/NP ,/PUNC 
	 पङ्कात्/NP तामरसम्/NP शशाङ्कः/NP उदधेः/NP इन्दीवरम्/NP गोमयात्/NP ।/PUNC 
	काष्ठात्/NP अग्निः/NP अहेः/NP फणात्/NP अपि/A मणिः/NP गोपित्ततः/NP रोचना/NP ,/PUNC 
	 प्राकाश्यम्/KN स्वगुणोदयेन/NP गुणिनः/NP गच्छन्ति/KP ,/PUNC किम्/SN जन्मना/NP ?/PUNC ॥/PUNC 103/PUNC ॥/PUNC 
	मूषिका/NP गृहजाता/NV अपि/A हन्तव्या/KN स्वापकारिणी/NP ।/PUNC 
	भक्ष्यप्रदानैः/NP मार्जारः/NP हितकृत्/NV प्रार्थ्यतः/KN अन्यतः/SN ॥/PUNC 104/PUNC ॥/PUNC 
	एरण्डभिण्डार्कनडैः/NP प्रभूतैः/KN अपि/A सञ्चितैः/KN ।/PUNC 
	दारुकृत्यम्/NP यथा/AVK न/AN अस्ति/KP तथैव/AVK अज्ञैः/NP प्रयोजनम्/NP ॥/PUNC 105/PUNC ॥/PUNC 
	किम्/SN भक्तेन/NP असमर्थेन/NV किम्/AP शक्तेन/KN अपकारिणा/NV ।/PUNC 
	भक्तम्/KN शक्तम्/KN च/APY माम्/SN राजन्/NP !/PUNC न/AN अवज्ञातुम्/KKS त्वम्/SN अर्हसि/KP ॥/PUNC 106/PUNC ॥/PUNC 
पिङ्गलकः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भवतु/KP एवम्/AUD तावत्/A ।/PUNC असमर्थः/NP समर्थः/NP वा/APY ,/PUNC चिरंतनः/NP त्वम्/SN अस्माकम्/SN मन्त्रिपुत्रः/NP ,/PUNC तत्/SN विश्रब्धम्/KN ब्रूहि/KP -/PUNC यत्/SN किंचित्/SN वक्तुकामः/NP ।/PUNC ”/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC विज्ञाप्यम्/KN किंचित्/SN अस्ति/KP ।/PUNC ”/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC तत्/SN निवेदय/KP अभिप्रेतम्/KN ।/PUNC ”/PUNC
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
	“/PUNC अपि/A स्वल्पतरम्/NV कार्यम्/KN यत्/SN भवेत्/KP पृथिवीपतेः/NP ।/PUNC 
	तत्/SN न/AN वाच्यम्/KN सभामध्ये/NP प्रोवाच/KP इदम्/SN बृहस्पतिः/NS ॥/PUNC 107/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN एकान्तिके/NP मत्/SN विज्ञाप्यम्/KN अवधारयन्तु/KP देवपादाः/NP ।/PUNC यतः/AVK -/PUNC 
	षटकर्णः/NV भिद्यते/KP मन्त्रः/NP चतुष्कर्णः/NV स्थिरः/NP भवेत्/KP ।/PUNC 
	तस्मात्/SN सर्वप्रयत्नेन/NP षट्कर्णम्/NP वर्जयेत्/KP सुधीः/NP ॥/PUNC 108/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A पिङ्गलकाभिप्रायज्ञाः/NV व्याघ्रद्वीपिवृकपुरःसराः/NP सर्वे/SN अपिः/A तद्वचः/NP समाकर्ण्य/KKS संसदि/NP तत्क्षणात्/NP एव/INTF दूरीभूताः/KN ।/PUNC 
ततः/A च/A दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC उदकग्रहणार्थम्/NP प्रवृत्तस्य/KN स्वामिनः/NP किम्/SN इह/A निवृत्ति/NP अवस्थानम्/NP ?/PUNC ”/PUNC पिङ्गलकः/NS सविलक्षस्मितम्/NV आह/KP -/PUNC “/PUNC न/AN किंचित्/SN अपि/A ।/PUNC ”/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC देव/NP !/PUNC यदि/AVK अनाख्या/KN इयम्/SN तत्/SN तिष्ठतु/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/PUNC -/PUNC 
	दारेषु/NP किञ्चित्/SN स्वजनेषु/NP किञ्चित्/SN गोप्यम्/KN वयस्येषु/NP सुतेषु/NP किञ्चित्/KN ।/PUNC 
	युक्तम्/KN न/AN वा/A युक्तम्/KN इदम्/SN विचिन्त्य/KKS ,/PUNC वदेत्/KP विपश्चित्/NP महतः/NV अनुरोधात्/NP ॥/PUNC 109/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS पिङ्गलकः/NS चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC योग्यः/NP अयम्/SN दृश्यते/KP ,/PUNC तत्/SN कथयामि/KP एतस्य/SN अग्रे/A आत्मनः/SN अभिप्रायम्/NP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	सुहृदि/NP निरन्तरचित्ते/NV गुणवते/NV भृत्ये/NP अनुवर्तिनि/NV कलत्रे/NP ।/PUNC 
	स्वामिनि/NP सौहृदयुक्ते/KN निवेद्य/KKS दुःखम्/NP सुखी/NP भवति/KP ॥/PUNC 110/PUNC ॥/PUNC 
भो/ASMB दमनक/NS !/PUNC शृणोषि/KP शब्दम्/NP दूरात्/KV महान्तम्/NP ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC शृणोमि/KP ,/PUNC ततः/A किम्/SN ?/PUNC ”/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC अहम्/SN अस्मात्/SN वनाद्/NP गन्तुम्/KKS इच्छामि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC कस्मात्/SN !/PUNC “/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC यतः/A अद्य/A अस्मत्/SN वने/NP किम्/SN अपि/A अपूर्वम्/NV सत्त्वम्/NP प्रविष्टम्/KN यस्य/SN अयम्/SN महान्/NV शब्दः/NP श्रूयते/KP ।/PUNC तस्य/SN च/AVK शब्दस्य/NP अनुरूपेण/NP सत्त्वेन/NP भाव्यम्/KN ,/PUNC सत्वानुरुपेण/NP च/APY पराक्रमेण/NP भाव्यम्/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC यत्/SN शब्दमात्रात्/NP अपि/A भयम्/NP उपगतः/KN स्वामी/NP ,/PUNC तत्/SN अपि/A अयुक्तम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
	अम्भसा/NP भिद्यते/KP सेतुः/NP तथा/A मन्त्रः/NP अपि/A अरक्षितः/KN ।/PUNC 
	पैशुन्यात्/NP भिद्यते/KP स्नेहः/NP भिद्यते/KP वाग्भिः/NP आतुरः/NP ॥/PUNC 111/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN न/AN युक्तम्/KN स्वामिनः/NP पूर्वपुरुषोपार्जितम्/KN कुलक्रमात्/NP आगतम्/KN वनम्/NP एकपदे/NP एव/INTF त्यक्तुम्/KKS ।/PUNC यतः/A भेरीवेणुवीणामृदङ्गतालपटहशङ्खकाहलादिभेदेन/NP शब्दाः/NP अनेकविधा/NV भवन्ति/KP ,/PUNC 
तत्/SN न/AN केवलात्/NP शब्दमात्रात्/NP अपि/A भेतव्यम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/PUNC -/PUNC 
 अति/A उत्कटे/NV च/APY रौद्रे/NV च/APY शत्रौ/NP प्राप्ते/KN न/AN हीयते/KP ।/PUNC 
 धैर्यम्/NP यस्य/SN महीनाथः/NP न/AN सः/SN याति/KP पराभवम्/NP ॥/PUNC 112/PUNC ॥/PUNC 
 दर्शितभये/NP अपि/A धातरि/NP धैर्यध्वंसः/NP भवेत्/KP न/AN धीराणाम्/NP ।/PUNC 
 शोषितसरसि/NP निदाघे/NP नितराम्/NV एव/INTF उद्धतः/KN सिन्धुः/NP ॥/PUNC 113/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/AVK -/PUNC 
 यस्य/SN न/AN विपदि/NP विषादः/NP सम्पदि/NP हर्षः/NP रणे/NP न/AN भीरुत्वम्/NP ।/PUNC 
	तम्/SN भुवनत्रयतिलकम्/NP जनयति/KP जननी/NP सुतम्/NP विरलम्/NV ॥/PUNC 114/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/AVK -/PUNC 
 शक्तिवैकल्यनम्रस्य/NP निःसारत्वात्/NP लघीयसः/NP ।/PUNC 
	जन्मिनः/NP मानहीनस्य/NP तृणस्य/NP च/APY समा/NV गतिः/NP ॥/PUNC 115/PUNC ॥/PUNC 
अपि/A च/PUNC -/PUNC 
 अन्यप्रतापम्/NP आसाद्य/KKS यः/SN दृढत्वम्/NP न/AN गच्छति/KP ।/PUNC 
	जतुजाभरणस्य/NP इव/ASD रूपेण/NP अपि/A हि/A तस्य/SN किम्/AP ?/PUNC ॥/PUNC 116/PUNC ॥/PUNC 
 तत्/SN एवम्/A ज्ञात्वा/KKS स्वामिना/NP धैर्यावष्टभः/NP कार्यः/NP ,/PUNC न/AN शब्दमात्राद्/NP भेतव्यम्/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 पूर्वम्/SN एव/INTF मया/SN ज्ञातः/KN पूर्णम्/NP एतत्/SN हि/A मेदसा/NP ।/PUNC 
	अनुप्रविश्य/KKS विज्ञातम्/KN यावत्/A चर्म/NP च/APY दारु/NP च/APY ॥/PUNC 117/PUNC ॥/PUNC “/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC कथम्/SN एतत्/SN ?/PUNC “/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
 २/PUNC 
 	(/PUNC शृगालदुन्दुभि/NP -/PUNC कथा/NP )/PUNC 
	कश्चित्/SN गोमायुः/NS नाम/A शृगालः/NP क्षुत्क्षामकण्ठः/NV इतः/A ततः/A आहारक्रियार्थम्/NP परिभ्रमन्/KNV वने/NP सैन्यद्वयसंग्रामभूमिम्/NP अपश्यत्/KP ।/PUNC 
 तस्याम्/SN च/PUNC दुन्दुभेः/NP पतितस्य/KN वायुवशात्/NP वल्लीशाखाग्रैः/NP हन्यमानस्य/KNV शब्दम्/NP अशृणोत्/KP ।/PUNC 
 अथ/A क्षुभितहृदयः/NP चिन्तयामास/KP -/PUNC अहो/ASMB ,/PUNC विनष्टः/KN अस्मि/KP ।/PUNC तत्/SN यावत्/AVK न/AN अस्य/SN प्रोच्चारितशब्दस्य/NP दृष्टिगोचरम्/NP गच्छामि/KP तावत्/AVK अन्यतः/SN व्रजामि/KP ।/PUNC अथवा/AVK न/AN एतत्/SN युज्यते/KP सहसा/KV एव/INTF पितृपैतामहम्/NV वनम्/NP त्यक्तुम्/KKS ।/PUNC उक्तम्/KN च/PUNC -/PUNC 
	भये/NP वा/A यदि/AVK वा/A हर्षे/NP सम्प्राप्ते/KN यः/SSN विमर्शयेत्/KP ।/PUNC 
	कृत्यम्/NP न/AN कुरुते/KP वेगात्/NP न/AN सः/SSN सन्तापम्/NP आप्नुयात्/KP ॥/PUNC 118/PUNC ॥/PUNC 
	तत्/SN तावत्/AVK जानामि/KP कस्य/SN अयम्/SN शब्दः/NP ।/PUNC इत्थम्/SN धैर्यम्/NP आलम्ब्य/KKS विमर्शयन्/KNV यावत्/AVK मन्दम्/KV -/PUNC मन्दम्/DV गच्छति/KP तावत्/AVK दुन्दुभिम्/NP अपश्यत्/KP ।/PUNC सः/SN च/AVK तम्/SN परिज्ञाय/KKS समीपम्/AUP गत्वा/KKS स्वयम्/SN एव/INTF कौतुकात्/NP अताडयत्/KP ।/PUNC भूतः/KN च/AVK हर्षात्/NP अचिन्तयत्/KP -/PUNC ”/PUNC अहो/ASMB  !/PUNC चिरात्/KV एतत्/SN अस्माकम्/SN महत्/NV भोजनम्/NP आपतितम्/KN ।/PUNC तत्/SN नूनम्/INTF प्रभूतमांसमेदः/NP असृग्भिः/NP परिपूरितम्/KN भविष्यति/KP ।/PUNC ”/PUNC 
	ततः/A परुषचर्मावगुण्ठितम्/NP तत्/SN कथम्/SN अपि/A विदार्य/KKS एकदेशे/NP छिद्रम्/NP कृत्वा/KKS संहृष्टमना/NP मध्ये/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC परम्/NV चर्मविदारणतः/NP दंष्ट्राभङ्गः/NP समजनि/KP ।/PUNC अथ/A निराशीभूतः/KN तत्/SN दारुशेषम्/NP अवलोक्य/KKS श्लोकम्/NP एनम्/SN अपठत्/KP -/PUNC ”/PUNC पूर्वम्/NP एव/INTF मया/SN ज्ञातम्/KN “/PUNC इति/AUD ।/PUNC अतः/AVK न/AN शब्दमात्रात्/NP भेतव्यम्/KN ।/PUNC 
पिंगलकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC पश्य/KP अयम्/SN मम/SN सर्वः/SN अपि/A परिग्रहः/NP भयव्याकुलितमनाः/NP पलायितुम्.KKS इच्छति/KP ,/PUNC तत्/SN कथम्/AP अहम्/SN धैर्यावष्टम्भम्/NP करोमि/KP ?/PUNC “/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC ”/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC न/AN एषाम्/SN एषः/SN दोषः/NP ।/PUNC यतः/A स्वामिसदृशा/NP एव/INTF भवन्ति/KP भृत्याः/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	अश्वः/NP शस्त्रम्/NP शास्त्रम्/NP वीणा/NP वाणी/NP नरः/NP च/APY नारी/NP च/APY ।/PUNC 
	पुरुषविशेषं/NP प्राप्ताः/KN भवन्ति/KP अयोग्याः/KN च/APY योग्याः/KN च/APY ॥/PUNC 119/PUNC ॥/PUNC 
	तत्/SN पौरुषावष्टम्भम्/NP कृत्वा/KKS त्वम्/SN तावत्/AVK अत्र/SN एव/INTF प्रतिपालय/KP ,/PUNC यावत्/AVK अहम्/SN एतत्/SN शब्दस्वरूपम्/NP ज्ञात्वा/KKS आगच्छामि/KP ।/PUNC ततः/A पश्चात्/A यथा/A उचितम्/NP कार्यम्/KN इति/AUD ।/PUNC “/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC किम्/AP तत्र/A भवान्/SN गन्तुम्/KKS उत्सहते/KP ?/PUNC “/PUNC 
सः/SN आह/KP -/PUNC ”/PUNC किम्/SN स्वाम्यादेशात्/NP सत्भृत्यस्य/NP कृत्याकृत्यम्/NP अस्ति/KP ?/PUNC “/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	स्वाम्यादेशात्/NP सुभृत्यस्य/NP न/AN भीः/NP सञ्जायते/KP क्वचित्/SN ।/PUNC 
	प्रविशेत्/KP मुखम्/NP आहेयम्/NV दुस्तरम्/NV वा/A महार्णवम्/NP ॥/PUNC 120/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 स्वाम्यादिष्टः/KN तु/A यः/SN भृत्यः/NP समम्/NP विषमम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC 
	मन्यते/KP न/AN सः/SN सन्धार्यः/KN भूभुजा/NP भूतिम्/NP इच्छताः/KN ॥/PUNC 121/PUNC ॥/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC भद्र/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A तत्/SN गच्छ/KP ।/PUNC शिवाः/NP ते/SN पन्थानः/NP सन्तु/KP “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
दमनकः/NS अपि/A तम्/SN प्रणम्य/KKS संजीवकशब्दानुसारी/NV प्रतस्थे/KP ।/PUNC 
	अथ/AVK दमनके/NS गते/KN ,/PUNC भयव्याकुलमनाः/NV पिङ्गलकः/NS चिन्तयामास/KP -/PUNC ”/PUNC अहो/ABS  न/AN शोभनम्/NP कृतम्/KN मया/SN यत्/SN तस्य/SN विश्वासम्/NP गत्वा/KKS आत्माभिप्रायः/NP निवेदितः/KN ।/PUNC कदाचित्/A दमनकः/NS अयम्/SN उभयवेतनत्वात्/NP मम/SN उपरि/A दुष्टबुद्धिः/NP स्याद्/KP ,/PUNC भ्रष्टाधिकारत्वात्/NP वा/A ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	ये/SN भवन्ति/KP महीपस्य/NP सम्मानितविमानिताः/KN ।/PUNC 
	यतन्ते/KP तस्य/SN नाशाय/NP कुलीनाः/NP अपि/A सर्वदा/A ॥/PUNC 122/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN तावत्/A अस्य/SN चिकीर्षितम्/KN वेत्तुम्/KP स्थानान्तरम्/NP गत्वा/KKS प्रतिपालयामि/KP ,/PUNC कदाचित्/A दमनकः/NS तम्/SN आदाय/KKS माम्/SN व्यापादयितुम्/KKS इच्छति/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	न/AN बध्यन्ते/KP हि/A अविश्वस्ताः/KN बलिभिः/NP दुर्बलाः/NP अपि/A ।/PUNC 
	विश्वस्ताः/KN तु/A एव/INTF बध्यन्ते/KP बलवन्तः/NP अपि/A दुर्बलैः/NP ॥/PUNC 123/PUNC ॥/PUNC 
	बृहस्पतेः/NS अपि/A प्राज्ञः/NP न/AN विश्वासम्/NP व्रजेत्/KP नरः/NP ।/PUNC 
	यः/SN इच्छेत्/KP आत्मनः/SN वृद्धिम्/NP आयुष्यम्/NP च/APY सुखानि/NP च/APY ॥/PUNC 124/PUNC ॥/PUNC 
	शपथैः/NP सन्धितस्य/KN अपि/A न/AN विश्वासम्/NP व्रजेत्/KP रिपोः/NP ।/PUNC 
	राज्यलाभोद्यतः/KN वृत्रः/NP शक्रेण/NP शपथैः/NP हतः/KN ॥/PUNC 125/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN विश्वासम्/NP विना/AUP शत्रुः/NP देवानाम्/NP अपि/A सिद्ध्यति/KP ।/PUNC 
	विश्वासात्/NP त्रिदशेन्द्रेण/NP दितेः/NP गर्भः/NP विदारितः/KN ॥/PUNC 126/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A सम्प्रधार्य/KKS ,/PUNC स्थानान्तरम्/NP गत्वा/KKS दमनकमार्गम्/NP अवलोकयन्/KNV एकाकी/NP तस्थौ/KP ।/PUNC दमनकः/NS अपि/A सञ्जीवकसकाशम्/NP गत्वा/KKS वृषभः/NP अयम्/SN इति/AUD परिज्ञाय/KKS हृष्टमना/NV व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC ”/PUNC अहो/ABS  ,/PUNC शोभनम्/NP आपतितम्/KN ।/PUNC अनेन/SN एतस्य/SN संन्धिविग्रहद्वारेण/NP मम/SN पिङ्गलकः/NS वश्यः/KN भविष्यति/KP “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
	न/AN कौलीन्यात्/NP न/AN सौहार्दात्/NP नृपः/NP वाक्ये/NP प्रवर्तते/KP ।/PUNC 
	मन्त्रिणाम्/NP यावत्/A अभ्येति/KP व्यसनम्/NP शोकम्/NP एव/INTF च/PUNC ॥/PUNC 127/PUNC ॥/PUNC 
	सदैव/A आपद्गतः/KN राजा/NP भोग्यः/KN भवति/KP मन्त्रिणाम्/NP ।/PUNC 
	अतः/A एव/INTF हि/A वाञ्छन्ति/KP मन्त्रिणः/NP सापदम्/NV नृपम्/NP ॥/PUNC 128/PUNC ॥/PUNC 
	यथा/A न/AN इच्छति/KP नीरोगः/NP कदाचित्/A न/AN सुचिकित्सकम्/NP ।/PUNC 
	तथा/A आपद्रहितः/KN राजा/NP सचिवम्/NP न/AN अभिवाञ्छति/KP “/PUNC ॥/PUNC 129/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A विचिन्तयतन्/KNV पिंगलकाभिमुखः/NP प्रतस्थे/KP ।/PUNC पिङ्गलकः/NS अपि/A तम्/SN आयान्तम्/KN प्रेक्ष्य/KKS ,/PUNC स्वाकारम्/NP रक्षयन्/KNV यथापूर्वम्/NV अवस्थितः/KN ।/PUNC 
 दमनकः/NS अपि/A पिङ्गलकसकाशम्/NP गत्वा/KKS प्रणम्य/KKS उपविष्टः/KN ।/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC किम्/SN दृष्टम्/KN भवता/SN तत्/SN सत्त्वम्/NP ?/PUNC “/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC दृष्टम्/KN स्वामिप्रसादात्/NP “/PUNC ।/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC अपि/A सत्यम्/NP ?/PUNC ”/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC किम्/SN स्वामिपादानाम्/NP अग्रे/A असत्यम्/NP विज्ञाप्यते/KP ?/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	अपि/A स्वल्पम्/NV असत्यम्/NP यः/SN पुरः/A वदति/KP भूभुजाम्/NP ।/PUNC 
	देवानाम्/NP च/APY विनश्येत्/KP सः/SN द्रुतम्/KV सुमहान्/NP अपि/A ॥/PUNC 130/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 सर्वदेवमयः/NP राजा/NP मनुना/NP सम्प्रकीर्तितः/KN ।/PUNC 
	तस्मात्/SN तम्/SN देववत्/KV पश्येत्/KP न/AN व्यलीकेन/NP कर्हिचित्/A ॥/PUNC 131/PUNC ॥/PUNC 
	सर्वदेवमयस्य/NP अपि/A विशेषः/NP नृपतेः/NP अयम्/SN ।/PUNC 
	शुभाशुभफलम्/NP सद्यः/NV नृपात्/NP देवात्/NP भवान्तरे/NP ॥/PUNC 132/PUNC ॥/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC सत्यम्/NP दृष्टम्/KN भविष्यति/KP भवता/SN ।/PUNC न/AN दीनोपरि/NP महान्तः/NP कुप्यन्ति/KP ;/PUNC अतः/A न/AN त्वम्/SN तेन/SN निपातितः/KN ।/PUNC 
यतः/A -/PUNC 
	तृणानि/NP न/AN उन्मूलयति/KP प्रभञ्जनः/NP ,/PUNC मृदूनि/NP नीचैः/NP प्रणतानि/KN सर्वतः/A ।/PUNC 
	स्वभावः/NP एव/INTF उन्नतचेतसाम्/NP अयम्/SN ,/PUNC महान्/NP महत्सु/NP एव/INTF करोति/KP विक्रमम्/NP ॥/PUNC 133/PUNC ॥/PUNC 
अपि/A च/AVK -/PUNC 
	गणस्थलेषु/NP मदवारिषु/NP बद्धरागमत्तभ्रमद्भ्रमरपादतलाहतः/KN अपि/A ।/PUNC 
	कोपम्/NP न/AN गच्छति/KP नितान्तबलः/NP अपि/A नागः/NP तुल्ये/NP बले/NP तु/A बलवान्/NP परिकोपम्/NP एति/KP ॥/PUNC 134/PUNC ॥/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC अस्तु/KP एवम्/A सः/SN महात्मा/NP ,/PUNC वयम्/SN कृपणाः/NP ,/PUNC तथापि/A स्वामीः/NP यदि/A कथयति/KP ततः/A भृत्यत्वेन/NP योजयामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
पिङ्गलकः/NS आह/KP सोच्छ्वासम्/KV -/PUNC ”/PUNC किम्/AP भवान्/SN शक्नोति/KP एवम्/A कर्तुम्/KP ?/PUNC “/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC किम्/KP असाध्यम्/KN बुद्धेः/NP अस्ति/KP ?/PUNC “/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	न/AN तत्/SN शस्त्रैः/NP न/AN नागेन्द्रैः/NP न/AN हयैः/NP न/AN पदातिभिः/NP ।/PUNC 
	कार्यम्/NP संसिद्धिम्/NP अभ्येति/KP यथा/A बुद्ध्या/NP प्रसाधितम्/KN ॥/PUNC 135/PUNC ॥/PUNC 
पिङ्गलक/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC यदि/A एवम्/A तर्हि/A अमात्यपदे/NP अध्यारोपितः/KN त्वम्/SN ।/PUNC अद्य/A प्रभृति/A प्रसादनिग्रहादिकम्/NP त्वया/SN एव/INTF कार्यम्/KN इति/AUD निश्चयः/NP ।/PUNC “/PUNC 
अथ/A दमनकः/NS सत्वरम्/KV गत्वा/KKS सञ्जीवकम्/NS साक्षेपम्/KV इदम्/SN आह/KP -/PUNC ”/PUNC एहि/KP एहि/DV इतः/A दुष्टवृषभ/NP !/PUNC स्वामी/NP पिङ्गलकः/NS त्वम्/SN आकारयति/KP ।/PUNC किम्/SN निःशङ्कः/NP भूत्वा/KKS मुहुः/KV मुहुः/DV नदसि/KP वृथा/KV “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS सञ्जीवकः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC ”/PUNC भद्र/NP !/PUNC कः/SN अयम्/SN पिङ्गलकः/NS ?/PUNC “/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC किम्/AP स्वामिनम्/NP पिङ्गलकम्/NS अपि/A न/AN जानासि/KP ?/PUNC ”/PUNC तत्/A क्षणम्/NP प्रतिपालय/KP ।/PUNC फलेन/NP एव/INTF ज्ञास्यसि/KP ।/PUNC न/AN अन्वयम्/NP सर्वमृगपरिवृतः/KN वटतले/NP स्वामी/NP पिङ्गलकनामा/NV सिंहः/NP तिष्ठति/KP ।/PUNC “/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS गतायुषम्/NP इव/ASD आत्मानम्/SN मन्यमानः/KNV सञ्जीवकः/NP परम्/NV विषादम्/NP अगमत्/KP ।/PUNC 
आह/KP च/AVK -/PUNC ”/PUNC भद्र/NP !/PUNC भवान्/SN साधुसमाचारः/NP वचनपटुः/NV च/APY दृश्यते/KP ।/PUNC तत्/A यदि/A माम्/SN अवश्यम्/A तत्र/A नयसि/KP तत्/A अभयप्रदानेन/NP स्वामिनः/NP सकाशात्/KV प्रसादः/NP कारयितव्यः/KN ।/PUNC “/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB !/PUNC सत्यम्/NP अभिहितम्/KN भवता/SN ,/PUNC नीतिः/NP एषा/SN ।/PUNC यतः/A -/PUNC 
	पर्यन्तः/NP लभ्यन्ते/KP भूमेः/NP समुद्रस्य/NP गिरेः/NP अपि/A ।/PUNC 
	न/AN कथञ्चित्/A महीपस्य/NP चित्तान्तः/NP केनचित्/SN क्वचित्/SN ॥/PUNC 136/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A त्वम्/SN अत्र/A एव/INTF तिष्ठ/KP ,/PUNC यावत्/A अहम्/SN तम्/SN समये/NP दृष्ट्वा/KKS ततः/A पश्चात्/A त्वाम्/SN आनयामि/KP “/PUNC इति/AUD ।/PUNC तथा/A अनुष्ठिते/KN दमनकः/NS पिङ्गलकसकाशम्/NP गत्वा/KKS इदम्/SN आह/KP -/PUNC ”/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC न/AN तत्/SN प्राकृतम्/NV सत्त्वम्/NP ।/PUNC सः/SN हि/A भगवतः/NP महेश्वरस्य/NS वाहनभूतः/KN वृषभः/NP ”/PUNC ,/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 मया/SN पृष्टः/KN इदम्/SN ऊचे/KP -/PUNC “/PUNC महेश्वरेण/NP परितुष्टेन/KN कालिन्दीपरिसरे/NP ,/PUNC शष्पाग्राणि/NP भक्षयितुम्/KKS समादिष्टः/KN ।/PUNC किम्/SN बहुना/NP ,/PUNC मम/SN प्रदत्तम्/KN भगवता/NP क्रीडार्थम्/NP वनम्/NP इदम्/SN ।/PUNC “/PUNC 
 पिङ्गलकः/NS आह/KP सभयम्/KV -/PUNC “/PUNC सत्यम्/NP ज्ञातम्/KN मया/SN अधुना/A ,/PUNC न/AN देवताप्रसादम्/NP विना/A शष्पभोजिनः/NP व्यालाकीर्णे/NV एवंविधे/SN वने/NP निःशङ्कः/NP नदन्तः/KNV भ्रमन्ति/KP ।/PUNC ततः/A त्वया/SN किम्/SN अभिहितम्/KN ?/PUNC “/PUNC 
दमनकः/NS आह/KP -/PUNC ”/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC एतत्/SN अभिहितम्/KN मया/SN -/PUNC यत्/SN एतत्/SNV वनम्/NP चण्डिकावाहनभूतस्य/KN मत्/SN स्वामिनः/NP पिङ्गलकनाम्नः/NP सिंहस्य/NP विषयीभूतम्/KN ।/PUNC तत्/SN भवान्/SN अभ्यागतः/KN प्रियः/NV अतिथिः/NP ।/PUNC तत्/A तस्य/SN सकाशम्/NP गत्वा/KKS ,/PUNC भातृस्नेहेन/NP एकत्र/A -/PUNC भक्षणपानविहरणक्रियाभिः/NP एकस्थानाश्रयेण/NP कालः/NP नेयः/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC ततः/A तेन/SN अपि/A सर्वम्/SN एतत्/SN प्रतिपन्नम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK सहर्षम्/KV -/PUNC ”/PUNC स्वामिनः/NP सकाशात्/NP अभयदक्षिणा/NP दापयितव्या/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC तत्/A अत्र/A स्वामी/NP प्रमाणम्/NP ।/PUNC ।/PUNC “/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS पिङ्गलकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC साधु/ABS  सुमते/NP !/PUNC साधुमन्त्रिश्रोत्रिय/NP !/PUNC साधु/NP ।/PUNC मम/SN हृदयेन/NP सह/AUP सम्मन्त्र्य/KKS भवता/SN इदम्/SN अभिहितम्/KN ।/PUNC 
तत्/A दत्ता/KN मया/SN तस्य/SN अभयदक्षिणा/NP ।/PUNC परम्/A सः/SN अपि/A मदर्थे/NP अभयदक्षिणाम्/NP याचयित्वा/KKS द्रुततरम्/KV आनीयताम्/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP च/AVK इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	अन्तःसारैः/NV अकुटिलैः/NV अच्छिद्रैः/NV सुपरीक्षितैः/NV ।/PUNC 
	मन्त्रिभिः/NP धार्यते/KP राज्यम्/NP सुस्तम्भैः/NP इव/ASD मन्दिरम्/NP ॥/PUNC 137/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 मन्त्रिणाम्/NP भिन्नसन्धाने/NP भिषजाम्/NP सन्निपातिके/NP ।/PUNC 
	कर्मणि/NP व्यज्यते/KP प्रज्ञा/NP स्वस्थे/NP कः/SN वा/A न/AN पण्डितः/NP ॥/PUNC 138/PUNC ॥/PUNC 
दमनकः/NS अपि/A तम्/SN प्रणम्य/KKS सञ्जीवकसकाशम्/NP प्रस्थितः/KN सहर्षम्/KV अचिन्तयत्/KP -/PUNC ”/PUNC अहो/ABS  !/PUNC प्रसादसंमुखीनः/NV स्वामीः/NP वचनवशगः/NP च/APY सवृत्तः/KN
 तत्/SN न/AN अस्ति/KP धन्यतरः/NP मम/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 अमृतम्/NP शिशिरे/NP वह्निः/NP अमृतम्/NP प्रियदर्शनम्/NP ।/PUNC 
	अमृतम्/NP राजसम्मानम्/NP अमृतम्/NP क्षीरभोजनम्/NP ॥/PUNC 139/PUNC ॥/PUNC 
अथ/AVK सञ्जीवकसकाशम्/NP आसाद्य/KKS सप्रश्रयम्/KV उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB मित्र/NP !/PUNC प्रार्थितः/KN असौ/SN मया/SN भवदर्थे/NP स्वाम्यभयप्रदानम्/NP ।/PUNC 
तत्/SN विश्रब्धम्/KN गम्यताम्/KP इति/AUD ।/PUNC परम्/A त्वया/SN राजप्रसादम्/NP आसाद्य/KKS मया/SN सह/AUP समयधर्मेण/NP वर्तितव्यम्/KN ।/PUNC न/AN गर्वम्/NP आसाद्य/KKS स्वप्रभृतया/NP विचरणीयम्/KN ।/PUNC अहम्/SN अपि/A तव/SN संकेतेन/NP सर्वाम्/SN राज्यधुरम्/NP अमात्यपदवीम्/NP आश्रित्य/KKS उद्धरिष्यामि/KP ।/PUNC एवम्/A कृते/KN द्वयोः/SN अपि/A आवयोः/SN राज्यलक्ष्मीः/NP भोग्या/KN भविष्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	आखेटकस्य/NP धर्मेण/NP विभवाः/NP स्युः/KP वशे/NP नृणाम्/NP ।/PUNC 
	नृपतीन्/NP प्रेरयति/KP एकः/SN हन्ति/KP अन्यः/SN अत्र/A मृगान्/NP इव/ASD ॥/PUNC 140/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK –/PUNC 
 यः/SN न/PUNC पूजयते/KP गर्वात्/NP उत्तमाधममध्यमान्/NP ।/PUNC 
	भूपसंमानमान्यः/KN अपि/A भ्रश्यते/KP दन्तिलः/NP यथा/A “/PUNC ॥/PUNC 141/PUNC ॥/PUNC 
संजीवकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
 ३/PUNC 	(/PUNC दन्तिलगोरम्भयोः/NS कथा/NP )/PUNC 	 
	“/PUNC अस्ति/KP अत्र/A धरातले/NP वर्धमानम्/NS नाम/A नगरम्/NP ।/PUNC तत्र/A दन्तिलः/NS नाम/A नानाभाण्डपतिः/NP सकलपुरनायकः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तेन/SN पुरकार्यम्/NP नृपकार्यम्/NP च/APY कुर्वता/KNV तुष्टिम्/NP नीताः/KN तत्/SN पुरवासिनः/NP लोकाः/NP नृपतिः/NP च/APY ।/PUNC किम्/SN बहुना/SN ,/PUNC न/AN कः/SN अपि/A तादृक्/SN केन/SN अपि/A चतुरः/NP दृष्टः/KN न/AN अपि/A श्रुतः/KN वा/A इति/AUD ।/PUNC अथवा/A साधु/NP च/A इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	नरपतिहितकर्ता/NP द्वेष्यताम्/NP याति/KP लोके/NP ,/PUNC 
	 जनपदहितकर्ता/NP त्यज्यते/KP पार्थिवेन्द्रैः/NP ।/PUNC 
	इति/AUD महति/NV विरोधे/NP वर्तमाने/KNV समाने/NV
	 नृपतिजनपदानाम्/NP दुर्लभः/NV कार्यकर्ता/NP ॥/PUNC 142/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A एवम्/A गच्छति/KP काले/NP दन्तिलस्य/NS कदाचित्/A कन्याविवाहः/NP संप्रवृत्तः/KN ।/PUNC तत्र/A तेन/SN सर्वे/SN पुरनिवासिनः/NP ,/PUNC राजसंनिधिलोकाः/NP च/APY सम्मानपुरःसरम्/KV आमन्त्र्य/KKS भोजिताः/KN वस्त्रादिभिः/NP सत्कृताः/KN च/AVK ।/PUNC ततः/A विवाहानन्तरम्/NP राजा/NP सान्तःपुरः/NV स्वगृहम्/NP आनीय/KKS अभ्यर्चितः/KN ।/PUNC 
अथ/A तस्य/SN नृपतेः/NP गृहसम्मार्जनकर्त्ता/NP गोरम्भः/NS नाम/A राजसेवकः/NP गृहायातः/KN अपि/A तेन/SN अनुचित/KN स्थाने/NP उपविष्टः/KN अवज्ञया/NP अर्धचन्द्रम्/NP दत्वा/KKS निःसारितः/KN ।/PUNC सः/SN अपि/A ततः/A प्रभृति/AUD निःश्वसन्/KNV अपमानात्/NP न/AN रात्रौ/NP अपि/A अधिशेते/KP ।/PUNC “/PUNC कथम्/AP मया/SN तस्य/SN भाण्डपतेः/NP राजप्रसादहानिः/NP कर्त्तव्या/KN इति/AUD “/PUNC चिन्तयन्/KNV आस्ते/KP ।/PUNC 
“/PUNC अथवा/A किम्/SN अनेन/SN वृथा/NV शरीरशोषणेन/NP ?/PUNC न/AN किञ्चित्/SN मया/SN तस्य/SN अपकर्त्तुम्/KKS शक्यम्/KN इति/AUD ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	यः/SN हि/A अपकर्तुम्/KKS अशक्तः/KN कुप्यति/KP किम्/SN असौ/SN नरः/NP अत्र/A निर्लज्जः/NP ।/PUNC 
	उत्पतितः/KN अपि/A हि/A चणकः/NP शक्तः/KN किम्/SN भ्राष्ट्राकम्/NP भङ्क्तुम्/KKS ॥/PUNC 143/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A कदाचित्/A प्रत्यूषे/NP योगनिद्राम्/NP गतस्य/KN राज्ञः/NP शय्यान्ते/NP मार्जनम्/NP कुर्वन्/KNV इदम्/SN आह/KP -/PUNC ”/PUNC अहो/ABS  ,/PUNC दन्तिलस्य/NS महत्/NV दृप्तत्वम्/NP यत्/SN राजमहिषीम्/NP आलिङ्गति/KP ।/PUNC “/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS राजा/NP ससम्भ्रमम्/KV उत्थाय/KKS तम्/SN उवाच/KP -/PUNC भो/ASMB भो/DV गोरम्भ/NS !/PUNC सत्यम्/NP एतत्/SNV यत्/SN त्वया/SN जल्पितम्/KN ?/PUNC ,/PUNC किम्/SN देवी/NP दन्तिलेन/NS समालिङ्गिता/KN ?/PUNC “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
गोरम्भः/NS प्राह/KP -/PUNC ”/PUNC देव/NP !/PUNC रात्रिजागरणेन/NP द्यूतासक्तस्य/KN मे/SN बलात्/KV निद्रा/NP समायाता/KN ,/PUNC तत्/A न/AN वेद्मि/KP किम्/SN मया/SN अभिहितम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
राजा/NP सेर्ष्यम्/NV स्वगतम्/KN -/PUNC “/PUNC एष/SN तावत्/A अस्मत्/SN गृहे/NP अप्रतिहतगतिः/NP तथा/A दन्तिलः/NS अपि/A ।/PUNC तत्/SN कदाचित्/A अनेन/SN देवी/NP समालिङ्ग्यमाना/KNV दृष्टा/KN भविष्यति/KP ।/PUNC तेन/SN इदम्/SN अभिहितम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
	यत्/SN वाञ्छति/KP दिवा/NP मर्त्यः/NP वीक्षते/KP वा/A अथ/A करोति/KP वा/A ।/PUNC 
	तत्/SN स्वप्ने/NP अपि/A तत्/A अभ्यासात्/NP ब्रूते/KP वा/A अथ/A करोति/KP वा/A ॥/PUNC 144/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 शुभम्/NP वा/A यदि/A पापम्/NP यत्/SN नृणाम्/NP हृदि/NP संस्थितम्/KN ।/PUNC 
	सुगूढम्/KN अपि/A तत्/SN ज्ञेयम्/KN स्वप्नवाक्यात्/NP तथा/A मदात्/NP ॥/PUNC 145/PUNC ॥/PUNC 
अथवा/A स्त्रीणाम्/NP विषये/NP कः/SN अत्र/A संदेहः/NP -/PUNC 
	जल्पन्ति/KP सार्धम्/AUP अन्येन/SN पश्यन्ति/KP अन्यम्/SN सविभ्रमाः/KV ।/PUNC 
	हृद्गतम्/KN चिन्तयन्ति/KP अन्यम्/SN प्रियः/NP कः/SN नाम/A योषिताम्/NP ॥/PUNC 146/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC 
	एकेन/SN स्मितपाटलाधररुचः/NP जल्पन्ति/KP अनल्पाक्षरम्/KV ,/PUNC 
	 वीक्षन्ते/KP अन्यम्/SN इतः/A स्फुटत्/KNV कुमुदिनीफुल्लोल्लसल्लोचनाः/NP ।/PUNC 
	दूरोदारचरित्रचित्रविभवम्/NP ध्यायन्ति/KP च/AVK अन्यम्/SN धिया/NP ,/PUNC 
	 केन/SN इत्थम्/A परमार्थतः/NP अर्थवत्/KV इव/ASD प्रेम/NP अस्ति/KP वामभ्रुवाम्/NP ॥/PUNC 147/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 न/AN अग्निः/KP तृप्यति/KP काष्ठानाम्/NP न/AN अपगानाम्/NP महोदधिः/NP ।/PUNC 
	न/AN अन्तकः/NP सर्वभूतानाम्/NP न/AN पुंसाम्/NP वामलोचना/NP ॥/PUNC 148/PUNC ॥/PUNC 
	रहः/NP न/AN अस्ति/KP क्षणः/NP न/AN अस्ति/KP न/AN अस्ति/KP प्रार्थयिता/NV नरः/NP ।/PUNC 
	तेन/SN नारद/NP !/PUNC नारीणाम्/NP सतीत्वम्/NP उपजायते/KP ॥/PUNC 149/KP ॥/PUNC 
	यः/SSN मोहात्/NP मन्यते/KP मूढः/NP रक्ता/KN इयम्/SNV मम/SN कामिनी/NP ।/PUNC 
	सः/SSN तस्याः/SN वशगः/NP नित्यम्/KV भवेत्/KP क्रीडाशकुन्तवत्/KV ॥/PUNC 150/PUNC ॥/PUNC 
	तासाम्/SN वाक्यानि/NP कृत्यानि/KP स्वल्पानि/NV सुगुरूणि/NV अपि/A ।/PUNC 
	करोति/KP यः/SN कृतैः/KN लोके/NP लघुत्वम्/NP याति/KP सर्वतः/SN ॥/PUNC 151/PUNC ॥/PUNC 
	स्त्रियम्/NP च/A यः/SN प्रार्थयते/KP सन्निकर्षम्/NP च/AVK गच्छति/KP ।/PUNC 
	ईषत्/A च/AVK कुरुते/KP सेवाम्/NP तम्/SN एव/INTF इच्छन्ति/KP योषितः/NP ॥/PUNC 152/PUNC ॥/PUNC 
	अनर्थित्वात्/NP मनुष्याणाम्/NP भयात्/NP परिजनस्य/NP च/APY ।/PUNC 
	मर्यादायाम्/NP अमर्यादाः/NP स्त्रियः/NP तिष्ठन्ति/KP सर्वदा/A ॥/PUNC 153/PUNC ॥/PUNC 
	न/AN आसाम्/SN कश्चित्/SN अगम्यः/KN अस्ति/KP न/AN आसाम्/SN च/A वयसि/NP स्थितिः/NP ।/PUNC 
	विरूपम्/NV रूपवन्तम्/NV वा/A पुमानि/NP इति/AUD एव/INTF भुञ्जते/KP ॥/PUNC 154/PUNC ॥/PUNC 
	रक्तः/KN हि/A जायते/KP भोग्यः/KN नारीणाम्/NP शाटकः/NP यथा/ASD ।/PUNC 
	घृष्यते/KP यः/SN दशालम्बी/NP नितम्बे/NP विनिवेशितः/KN ॥/PUNC 155/PUNC ॥/PUNC 
	अलक्तकः/NP यथा/ASD रक्तः/KN निष्पीड्य/KKS पुरुषः/NP तथा/ASD ।/PUNC 
	अबलाभिः/NP बलात्/KV रक्तः/KN पादमूले/NP निपात्यते/KP ॥/PUNC 156/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A सः/SN राजा/NP बहुविधम्/KV विलप्य/KKS ,/PUNC तत्/SN प्रभृति/A दन्तिलस्य/NS प्रसादपराङ्मुखः/NP संजातः/KN ।/PUNC किम्/SN बहुना/SN ,/PUNC राजद्वारप्रवेशः/NP अपि/A तस्य/SN निवारितः/KN ।/PUNC दन्तिलः/NS अपि/A अकस्मात्/A एव/INTF प्रसादपराङ्मुखम्/NV अवनिपतिम्/NP अवलोक्य/KKS चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS  ,/PUNC साधु/NP च/AVK इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	कः/SN अर्थान्/NP प्राप्य/KKS न/AN गर्वितः/KN विषयिणः/NP कस्य/SN आपदः/NP अस्तम्/NP गताः/KN
	 स्त्रीभिः/NP कस्य/SN न/AN खण्डितम्/KN भुवि/NP मनः/NP कः/SN नाम/A राज्ञाम्/NP प्रियः/NP ।/PUNC 
	कः/SN कालस्य/NP न/AN गोचरान्तरगतः/KN कः/SN अर्थी/NP गतः/KN गौरवम्/NP 
	 कः/SN वा/A दुर्जनवागुरासु/NP पतितः/KN क्षेमेण/KV यातः/KN पुमान्/NP ॥/PUNC 157/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 काके/NP शौचम्/NP द्यूतकारे/NP च/APY सत्यम्/NP 
	 सर्पे/NP क्षान्तिः/NP स्त्रीषु/NP कामोपशान्तिः/NP ।/PUNC 
	 क्लीबे/NP धैर्यम्/NP मद्यपे/NP तत्त्वचिन्ता/NP
	 राजा/NP मित्रम्/NP केन/SN दृष्टम्/KN श्रुतम्/KN वा/A ॥/PUNC 158/PUNC ॥/PUNC 
अपरम्/SN मया/SN अस्य/SN भूपतेः/NP अथवा/A अन्यस्य/SN अपि/A कस्यचित्/SN राजसंबन्धिनः/NP स्वप्ने/NP अपि/A न/AN अनिष्टम्/NP कृतम्/KN तत्/A किम्/AP एवम्/A पराङ्मुखः/NP माम्/SN प्रति/AUP भूपतिः/NP ?/PUNC “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
एवम्/A तम्/SN दन्तिलम्/NS कदाचित्/A राजद्वारे/NP विष्कम्भितम्/KN विलोक्य/KKS ,/PUNC संमार्जनकर्ता/NP गोरम्भः/NS विहस्य/KKS द्वारपालान्/NP इदम्/SN ऊचे/KP —/PUNC 
“/PUNC भो/ASMB भो/DV द्वारपालाः/NP !/PUNC राजप्रसादाधिष्ठितः/KN अयम्/SN दन्तिलः/NS ,/PUNC स्वयम्/SN निग्रहानुग्रहकर्ता/NP च/AVK ।/PUNC 
 तत्/SN अनेन/SN निवारितेन/KN यथा/A अहम्/SN तथा/A यूयम्/SN अपि/A अर्धचन्द्रभागिनः//NP भविष्यथ/KP ।/PUNC ”/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS दन्तिलः/NS चिन्तयामास/KP —/PUNC “/PUNC नूनम्/INTF इदम्/SN अस्य/SN गोरम्भस्य/NS चेष्टितम्/KN ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	अकुलीनः/NV अपि/A मूर्खः/NP अपि/A भूपालम्/NP यः/SSN अत्र/A सेवते/KP ।/PUNC 
	अपि/A सम्मानहीनः/NP अपि/A सः/SSN सर्वत्र/A प्रपूज्यते/KP ॥/PUNC 159/PUNC ॥/PUNC 
	अपि/A कापुरुषः/NP भीरुः/NP स्यात्/KP चेत्/A नृपतिसेवकः/NP ।/PUNC 
	तथापि/A न/AN पराभूतिम्/NP जनात्/NP आप्नोति/KP मानवः/NP ॥/PUNC 160/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A सः/SN बहुविधम्/KV विलप्य/KKS विलक्षमनाः/NV सोद्वेगः/NV गतप्रभावः/NV स्वगृहम्/NP गत्वा/KKS ,/PUNC निशामुखे/NP गोरम्भम्/NS आहूय/KKS वस्त्रयुगलेन/NP सम्मान्य/KKS इदम्/SN उवाच/KP -/PUNC भद्र/NP !/PUNC मया/SN न/AN तदा/A त्वम्/SN रागवशात्/NP निःसारितः/KN ।/PUNC यतः/A त्वम्/SN ब्राह्मणानाम्/NP अग्रतः/A अनुचितस्थाने/NP समुपविष्टः/KN दृष्ट/KN इति/AUD अपमानितः/KN ,/PUNC तत्/SN क्षम्यताम्/KP “/PUNC ।/PUNC 
सः/SN अपि/A स्वर्गराज्योपमम्/NV तत्/SN वस्त्रयुगलम्/NP आसाद्य/KKS परम्/A परितोषम्/NP गत्वा/KKS ,/PUNC तम्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB श्रेष्ठिन्/NP !/PUNC क्षान्तम्/KN मया/SN ते/SN तत्/SN ,/PUNC तत्/A अस्य/SN सम्मानस्य/NP कृते/A पश्य/KP मे/SN बुद्धिप्रभावम्/NP राजप्रसादम्/NP च/AVK ।/PUNC “/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS सपरितोषम्/KV निष्क्रान्तः/KN ।/PUNC साधु/NP च/A इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
	स्तोकेन/NP उन्नतिम्/NP आयाति/KP स्तोकेन/NP आयाति/KP अधोगतिम्/NP ।/PUNC 
	अहो/ABS  !/PUNC सुसदृशी/NV चेष्टा/NP तुलायष्टेः/NP खलस्य/NP च/APY ॥/PUNC 161/PUNC ॥/PUNC 
ततः/A च/A अन्येद्युः/NP सः/SN गोरम्भः/NS राजकुले/NP गत्वा/KKS योगनिद्राम्/NP गतस्य/KN भूपतेः/NP सम्मार्जनक्रियाम्/NP कुर्वन्/KNV इदम्/SN आह/KP -/PUNC ”/PUNC अहो/ABS  ,/PUNC अविवेकः/NP अस्मत्/SN भूपतेः/NP ,/PUNC यत्/SN पुरीषोत्सर्गम्/NP आचरन्/KNV चिर्भटीभक्षणम्/NP करोति/KP ।/PUNC “/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS राजा/NP सविस्मयम्/KV तम्/SN उवाच/KP -/PUNC ”/PUNC रे/ASMB रे/DV गोरम्भ/NS !/PUNC किम्/SN अप्रस्तुतम्/NP लपसि/KP ?/PUNC गृहकर्मकरम्/NP मत्वा/KKS त्वाम्/SN न/AN व्यापादयामि/KP ।/PUNC किम्/SN त्वया/SN कदाचित्/A अहम्/SN एवंविधम्/SN कर्म/NP समाचरन्/KNV दृष्टः/KN ?/PUNC “/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC द्यूतासक्तस्य/KN रात्रिजागरणेन/NP सम्मार्जनम्/NP कुर्वाणस्य/KNV मम/SN बलात्/NP निद्रा/NP समायाता/KN ।/PUNC तया/SN अधिष्ठितेन/KN मया/SN किंचित्/SN जल्पितम्/KN ,/PUNC तत्/SN न/AN वेद्मि/KP ।/PUNC तत्/SN प्रसादम्/NP करोतु/KP स्वामी/NP निद्रापरवशस्य/NP “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
एवम्/A श्रुत्वा/KKS राजा/NP चिन्तितवान्/KN -/PUNC “/PUNC यत्/SN मया/SN जन्मान्तरे/NP पुरीषोत्सर्गम्/NP कुर्वता/KN कदा/A अपि/A चिर्भटिका/NP न/AN भक्षिता/KN ।/PUNC तत्/SN यथा/A अयम्/SN व्यतिकरः/NP असंभाव्यः/KN मम/SN अनेन/SN मूढेन/NP व्याहृतः/KN ,/PUNC तथा/A दन्तिलस्य/NS अपि/A इति/AUD निश्चयः/NP ।/PUNC तत्/SN मया/SN न/AN युक्तम्/KN कृतम्/KN यत्/SN सः/SN वराकः/NP सम्मानेन/NP वियोजितः/KN ।/PUNC न/AN तादृक्/SN पुरुषाणाम्/NP एवंविधम्/SN चेष्टितम्/KN संभाव्यते/KP ।/PUNC तत्/SN अभावेन/NP राजकृत्यानि/NP ,/PUNC पौरकृत्यानि/NP च/APY सर्वाणि/NP शिथिलताम्/NP व्रजन्ति/KP ।/PUNC “/PUNC एवम्/AUD अनेकधा/A विमृश्य/KKS दन्तिलम्/NS समाहूय/KKS निजाङ्गवस्त्राभरणादिभिः/NP संयोज्य/KKS स्वाधिकारे/NP नियोजयामास/KP ।/PUNC 
“/PUNC अतः/A अहम्/SN ब्रवीमि/KP -/PUNC यः/SN न/AN पूज्यते/KP गर्वात्/KP “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
सञ्जीवकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC एवम्/A एव/INTF एतत्/SN ,/PUNC यत्/SN भवता/SN अभिहितम्/KN तत्/SN एव/INTF मया/SN कर्त्तव्यम्/KN “/PUNC इति/AUD ।/PUNC एवम्/A अभिहिते/KN दमनकः/NS तम्/SN आदाय/KKS पिङ्गलकसकाशम्/NP अगमत्/KP ।/PUNC आह/KP च/AVK –/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC मया/SN आनीतः/KN सः/SN संजीवकः/NS ,/PUNC अधुना/A देवः/NP प्रमाणम्/NP ।/PUNC “/PUNC 
सञ्जीवकः/NS अपि/A तम्/SN सादरम्/KV प्रणम्य/KKS अग्रतः/A सविनयम्/KV स्थितः/KN ।/PUNC 
पिङ्गलकः/NS अपि/A तस्य/SN पीनायतककुद्मतः/NP नखकुलिशालङ्कृतम्/NV दक्षिणपाणिम्/NP उपरि/NP दत्त्वा/KKS मानपुरःसरम्/KV उवाच/KP -/PUNC “/PUNC अपि/A शिवम्/NP भवतः/SN ?/PUNC कुतः/AP त्वम्/SN अस्मिन्/SN वने/NP विजने/NV समायातः/KN असि/KP ”/PUNC ?/PUNC 
तेन/SN अपि/A आत्मवृत्तान्तः/NP कथितः/KN ,/PUNC यथा/A सार्थवाहेन/NP वर्धमानेन/NS सह/AUP वियोगः/NP सञ्जातः/KN तथा/A सर्वम्/SN निवेदितम्/KN ।/PUNC 
एतत्/SN श्रुत्वा/KKS पिङ्गलकः/NS सादरतरम्/KV तम्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC वयस्य/NP !/PUNC न/AN भेतव्यम्/KN ,/PUNC मद्भुजपञ्जरपरिरक्षिते/KN अस्मिन्/SN वने/NP यथेच्छम्/KV त्वया/SN अधुना/A वर्त्तितव्यम्/KN ।/PUNC अन्यत्/SN च/A नित्यम्/NP मत्समीपवर्तिना/NV भाव्यम्/KN ।/PUNC यतः/A कारणात्/NP बहु/SN उपायम्/NP रौद्रसत्त्वनिषेवितम्/KN वनम्/NP गुरूणाम्/NP अपि/A सत्त्वानाम्/NP असेव्यम्/KN ,/PUNC कुतः/A शष्पभोजिनाम्/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS सकलमृगपरिवृतः/KN यमुनाकच्छम्/NP अवतीर्य/KKS उदकग्रहणम्/NP कृत्वा/KKS स्वेच्छया/NP तत्/SN एव/INTF वनम्/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
ततः/A च/A करटकदमनकनिक्षिप्तराज्यभारः/NP सञ्जीवकेन/NS सह/AUP सुभाषितगोष्ठीसुखम्/NP अनुभवन्/KNV आस्ते/KP ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
		यदृच्छया/NP अपि/A उपनतम्/KN सकृत्/A सज्जनसंगतम्/KN ।/PUNC 
		भवति/KP अजरम्/NV अत्यन्तम्/NV न/AN अभ्यासक्रमम्/NP ईक्षते/KP ॥/PUNC 162/PUNC ॥/PUNC 
संजीवकेन/NS अपि/A अनेकशास्त्रावगाहनात्/NP उत्पन्नबुद्धिप्रागल्भ्येन/NP स्तोकैः/NP एव/INTF अहोभिः/NP मूढमतिः/NV पिङ्गलकः/NS धीमान्/NP तथा/A कृतः/KN ,/PUNC यथा/A अरण्यधर्मात्/NP वियोज्य/KKS ग्राम्यधर्मेषु/NP नियोजितः/KN ।/PUNC किम्/AP बहुना/SN ,/PUNC प्रत्यहम्/NP पिङ्गलकसञ्जीवकौ/NS एव/INTF केवलम्/A रहसि/NP मन्त्रयतः/KP ,/PUNC शेषः/NP सर्वः/SN अपि/A मृगजनः/NP दूरीभूतः/KN तिष्ठति/KP ।/PUNC करटकदमनकौ/NS अपि/A प्रवेशम्/NP न/AN लभेते/KP ।/PUNC अन्यत्/SN च/AVK ,/PUNC सिंहपराक्रमाभावात्/NP सर्वः/SN अपि/A मृगजनः/NP तौ/SN च/APY शृगालौ/NP क्षुधाव्याधिबाधिताः/KN एकाम्/SN दिशम्/NP आश्रित्य/KKS स्थिताः/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/A-/PUNC 
	फलहीनम्/NV नृपम्/NP भृत्याः/NP कुलीनम्/NV अपि/A च/APY उन्नतम्/NV ।/PUNC 
	सन्त्यज्य/KKS अन्यत्र/A गच्छन्ति/KP ,/PUNC शुष्कम्/NV वृक्षम्/NP इव/ASD अण्डजाः/NP ॥/PUNC 163/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 	अपि/A सम्मानसंयुक्ताः/KN कुलीनाः/NV भक्तितत्पराः/NV ।/PUNC 
	वृत्तिभङ्गात्/NP महीपालम्/NP त्यजन्ति/KP एव/INTF हि/A सेवकाः/NP ॥/PUNC 164/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC 


	
॥/PUNC श्रीः/NP ॥/PUNC/PUNC 
पञ्चतन्त्रे/NS
अथ/A मित्रसम्प्राप्तिः/NS
(/PUNC द्वितीयम्/SMKP  तन्त्रम्/NP )/PUNC 
अथ/A इदम्/ आरभ्यते/KP मित्रसम्प्राप्तिः/NS नाम/A द्वितीयम्/SMKP  तन्त्रम्/NP ,/PUNC यस्य/SN अयम्/SN आद्यः/NV श्लोकः/NP -
  असाधना/NV अपि/A प्राज्ञा/NP बुद्धिमन्तः/NP  बहुश्रुताः/NP ।/PUNC 
  साधयन्ति/KP आशु/KV कार्याणि/NP काकाखुमृगकूर्मवत्/KV ॥/PUNC  1/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN यथा/A अनुश्रूयते/KP -/PUNC 
अस्ति/KP दाक्षिणात्ये/NV जनपदे/NP महिलारोप्यम्/NS  नाम/A नगरम्/NP ।/PUNC तस्य/SN न/AN अतिदूरस्थः/NV  महोच्छ्रायवान्/NV नानाविहङ्गोपभुक्तफलः/NV कीटैः/NP आवृतकोटरः/NV छायाश्वासितपथिकजनसमूहः/NV  न्यग्रोधपादपः/NP  महान्/NV ।/PUNC अथवा/A युक्तम्/KN उक्तम्/KN -/PUNC 
  छायासुप्तमृगः/NV शकुन्तनिवहैः/NP विष्वक्विलुप्तच्छदः/NV,/PUNC 
  कीटैः/NP आवृतकोटरः/NV कपिकुलैः/NP स्कन्धे/NP कृतप्रश्रयः/NV ।/PUNC 
  विश्रब्धम्/KNV  मधुपैः/NP निपीतकुसुमः/KNV श्लाघ्यः/NV सः/SN  एव/INTF द्रुमः/NP,/PUNC 
सर्वाङ्गैः/NP बहुसत्त्वसङ्गसुखदः/NV  भूभारभूतः/NV अपरः/SN ॥/PUNC  2/PUNC ॥/PUNC 
तत्र/A च/A लघुपतनकः/NS  नाम/A वायसः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  कदाचित्/A प्राणयात्रार्थम्/NP  पुरम्/NP उद्दिश्य/KKS प्रचलितः/KN  यावत्/A पश्यति/KP ,/PUNC तावत्/A जालहस्तः/NV अतिकृष्णतनुः/NV ,/PUNC स्फुटितचरणः/NV ,/PUNC ऊर्ध्वकेशः/NV  यमकिङ्कराकारः/NV नरः/NP संमुखः/KV  बभूव/KP ।/PUNC 
अथ/AVK तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS शङ्कितमना/NP व्यचिन्तयत्/KP —/PUNC यत्/AVK -/PUNC “/PUNC अयम्/SNV  दुरात्मा/NP अद्य/A मम/SN आश्रयवटपादपसंमुखः/KV अभ्येति/KP ,/PUNC तत्/SN न/AN ज्ञायते/KP किम्/AP अद्य/A वटवासिनाम्/NP  विहङ्गमानाम्/NP  सङ्क्षयः/NP  भविष्यति/KP ,/PUNC न/AN वा/A ?/PUNC ”/PUNC  
एवम्/A  बहुविधम्/KV  विचिन्त्य/KKS तत्क्षणात्/KV निवृत्य/KKS तम्/SN एव/INTF वटपादपम्/NP गत्वा/KKS सर्वान्/SNV विहङ्गमान्/NP प्रोवाच/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC अयम्/SNV  दुरात्मा/NV लुब्धकः/NP  जालतण्डुलहस्तः/NV समभ्येति/KP ,/PUNC तत्सर्वथा/A तस्य/SN न/AN विश्वसनीयम्/KN ।/PUNC एषSN जालम्/NP  प्रसार्य/KKS तण्डुलान्/NP प्रक्षेप्स्यति/KP ।/PUNC ते/SN तण्डुला/NP भवद्भिः/SN सर्वैः/SN अपि/A कालकूटसदृशा/KV द्रष्टव्याः/KN ।/PUNC ”/PUNC 
  एवम्/A  वदतः/KNV तस्य/SN सः/SNV  लुब्धकः/NP तत्र/A वटतले/NP आगत्य/KKS ,/PUNC जालम्/NP  प्रसार्य/KKS सिन्दुवारसदृशान्/NV तण्डुलान्/NP प्रक्षिप्य/KKS ,/PUNC न/AN अतिदूरम्/A गत्वा/KKS निभृतः/KN स्थितः/KN ।/PUNC अथ/AVK ये/SSN पक्षिणः/NP तत्र/A स्थिताः/KN ते/SSN लघुपतनकवाक्यार्गलया/NP निवारितान्/KN तान्/SN तण्डुलान्/NP हालाहलाङ्कुरान्/NP इव/ASD वीक्षमाणा/KNV निभृताः/KN तस्थुः/KP ।/PUNC 
  अत्रA अन्तरे/A चित्रग्रीवः/NS  नाम/A कपोतराजः/NP सहस्रपरिवारः/NV प्राणयात्रार्थम्/NP  परिभ्रमन्/KNV तान्/SN तण्डुलान्/NP दूरतः/KV अपि/A पश्यन्/KNV लघुपतनकेन/NS निवार्यमाणः/KNV अपि/A जिह्वालौल्यात्/NP भक्षणार्थम्/NP अपतत्/KP ,/PUNC सपरिवारः/NV  निबद्धः/KN च/APY ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
जिह्वालौल्यप्रसक्तानाम्/NV  जलमध्यनिवासिनाम्/NV ।/PUNC 
अचिन्तितः/KNV  वधः/NP अज्ञानाम्/NP  मीनानाम्/NP इव/ASD जायते/KP ॥/PUNC  3/PUNC ॥/PUNC 
अथवा/A दैवप्रतिकूलतया/NP भवति/KP एवम्/A ।/PUNC न/AN तस्य/SN दोषः/NP अस्ति/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
पौलस्त्यः/NS कथम्/AP अन्यदारहरणे/NP दोषम्/NP  न/AN विज्ञातवान्/KN ,/PUNC 
रामेण/NS अपि/A कथम्/AP  न/AN हेमहरिणस्य/NP असम्भवः/NV  लक्षितः/KN ।/PUNC  
अक्षैः/NP च/APY अपि/A युधिष्ठिरेण/NS सहसा/AUP प्राप्तः/KN  हि/A अनर्थः/NP कथम्/AP ,/PUNC 
प्रत्यासन्नविपत्तिमूढमनसाम्/NP  प्रायः/A  मतिः/NP क्षीयते/KP ॥/PUNC  4/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
		 कृतान्तपाशबद्धानाम्/NV  दैवोपहतचेतसाम्/NV ।/PUNC  
		 बुद्धयः/NP कुब्जगामिन्यः/NV  भवन्ति/KP महताम्/NP अपि/A ॥/PUNC 5/PUNC ॥/PUNC 
अत्र/A अन्तरे/A लुब्धकः/NP तान्/SN बद्धान्/KN विज्ञाय/KKS प्रहृष्टमनाः/NV प्रोद्यतयष्टिः/NV तद्वधार्थम्/NP  प्रधावितः/KN ।/PUNC चित्रग्रीवः/NS अपि/A आत्मानम्/SN  सपरिवारम्/NV  बद्धम्/KN  मत्वा/KKS लुब्धकम्/NP आयान्तम्/NV  दृष्ट्वा/KKS तान्/SN कपोतान्/NP ऊचे/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC न/AN भेतव्यम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  व्यसनेषु/NP एव/INTF सर्वेषु/SN यस्य/SN बुद्धिः/NP न/AN हीयते/KP ।/PUNC 
  सः/SN  तेषाम्/SN  पारम्/A अभ्येति/KP तत्प्रभावात्/NP असंशयम्/NP ॥/PUNC  6/PUNC ॥/PUNC 
 सम्पत्तौ/NP च/APY विपत्तौ/NP च/APY महताम्/NP एकरूपता/NP ।/PUNC 
 उदये/NP सविता/NP रक्तः/NP  रक्तः/NP च/APY अस्तमये/NP तथा/A ॥/PUNC  7/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK सर्वे/SN वयम्/SN  हेलया/NP उड्डीय/KKS सपाशजालाः/NV अस्य/SN अदर्शनम्/NP गत्वा/KKS मुक्तिम्/NP  प्राप्नुमः/KP ।/PUNC अथ/AVK चेत्/A भयविक्लवाः/NP सन्तः/KN  हेलया/NP समुत्पातम्/NP  न/AN करिष्यथ/KP ,/PUNC ततः/A  मृत्युम्/NP अवाप्स्यथ/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  तनवः/NV अपि/A आयता/KN नित्यम्/A  तन्तवः/NP  बहुलाः/SN समाः/NP ।/PUNC 
  बहून्/SN बहुत्वात्/NP आयासान्/NP सहन्ती/KNV इति/AUD उपमा/NP सताम्/NP ॥/PUNC  8/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK अनुष्ठिते/KN ,/PUNC लुब्धकः/NP  जालम्/NP आदाय/KKS आकाशे/NP गच्छताम्/KNV  तेषाम्/SN  पृष्ठतः/KV  भूमिस्थः/NV अपि/A पर्यधावत्/KP ।/PUNC ततः/AVK  ऊर्ध्वाननः/NP श्लोकम्/NP एनम्/SN अपठत्/KP -/PUNC 
   जालम्/NP आदाय/KKS गच्छन्ति/KP संहताः/NV पक्षिणः/NP अपि/A अमी/A ।/PUNC 
   यावत्/A च/A विवदिष्यन्ति/KP पतिष्यन्ति/KP न/AN संशयः/NP ॥/PUNC  9/PUNC ॥/PUNC 
  लघुपतनकः/NS अपि/A प्राणयात्राक्रियाम्/NP  त्यक्त्वा/KKS किम्/AP अत्र/A भविष्यति/KP इति/AUD कुतूहलात्/NP तत्पृष्ठतः/KV अनुसरति/KP ।/PUNC अथ/AVK दृष्टेः/NP अगोचरताम्/NP  गतान्/KN तान्/SN विज्ञाय/KKS लुब्धकः/NP  निराशः/NV श्लोकम्/NP अपठत्/KP ,/PUNC निवृत्तः/KN च/APY ।/PUNC 
“/PUNC उक्तम्/KN च/AVK —/PUNC 
  नहि/AN भवति/KP यत्/SN न/AN भाव्यम्/KN  भवति/KP च/APY भाव्यम्/KN  विना/A अपि/A यत्नेन/NP ।/PUNC 
   करतलगतम्/KN अपि/A नश्यति/KP यस्य/SN हि/A भवितव्यता/NP न/AN अस्ति/KP ॥/PUNC  10/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
पराङ्मुखे/NV विधौ/NP चेत्/A स्यात्/KP कथञ्चित्/A  द्रविणोदयः/NP ।/PUNC 
तत्/SN सः/SN अन्यत्/SN अपि/A संगृह्य/KKS याति/KP शङ्खनिधिः/NP यथा/A ॥/PUNC  11/PUNC ॥/PUNC 
तदा/A आस्ताम्/KP  तावत्/A विहङ्गामिषलाभा/NP यावत्/A कुटुम्बवर्त्तनोपायभूतम्/NV  जालम्/NP अपि/A मे/SN नष्टम्/KN ।/PUNC ”/PUNC 
चित्रग्रीवः/NS अपि/A लुब्धकम्/NP अदर्शनीभूतम्/KN  ज्ञात्वा/KKS तान्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC निवृत्तः/KN सः/SNV  दुरात्मा/NV लुब्धकः/NP ,/PUNC तत्/A सर्वैः/SN अपि/A स्वस्थैः/KV गम्यताम्/KP  महिलारोप्यस्य/NS प्रागुत्तरदिग्भागे/NP ।/PUNC तत्र/A मम/SN सुहृत्/NP हिरण्यकः/NS  नाम/A मूषकः/NP सर्वेषाम्/SN  पाशछेदम्/NP  करिष्यति/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
सर्वेषाम्/SN एव/INTF मर्त्यानाम्/NP  व्यसने/NP समुपस्थिते/KN ।/PUNC 
वाङमात्रेण/NP अपि/A साहाय्यम्/NP  मित्रात्/NP अन्यः/SN  न/AN संदधे/KP ॥/PUNC  12/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  ते/SN कपोताः/NP चित्रग्रीवेण/NS संबोधिता/KN महिलारोप्ये/NS नगरे/NP हिरण्यकबिलदुर्गम्/NP  प्रापुः/KP ।/PUNC 
हिरण्यकः/NS अपि/A सहस्रमुखबिलदुर्गम्/NP  प्रविष्टः/KN सन्/KNV अकुतोभयः/NP सुखेन/KV आस्ते/KP ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
   अनागतम्/NV  भयम्/NP  दृष्ट्वा/KKS नीतिशास्त्रविशारदः/NP ।/PUNC अवसन्/KP मूषकः/NP तत्र/A कृत्वा/KKS शतमुखम्/NV  बिलम्/NP ॥/PUNC )
   दंष्ट्राविरहितः/NV सर्पः/NP  मदहीनः/NV  यथा/A गजः/NP ।/PUNC 
  सर्वेषाम्/SN  जायते/KP वश्यः/NP  दुर्गहीनः/NV तथा/A नृपः/NP ॥/PUNC  13/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/A -/PUNC 
  न/AN गजानाम्/NP  सहस्रेण/NP न/AN च/APY लक्षेण/NV वाजिनाम्/NP ।/PUNC 
  तत्/SSN कर्म/NP साध्यते/KP राज्ञाम्/NP  दुर्गेण/NP एकेन/SN यत्/SSN रणे/NP ॥/PUNC  14/PUNC ॥/PUNC 
  शतम्/NP एकः/SN अपि/A संधत्ते/KP प्राकारस्थः/NV  धनुर्धरः/NP ।/PUNC 
   तस्मात्/AVK दुर्गम्/NP  प्रशंसन्ति/KP नीतिशास्त्रविदः/NV  जनाः/NP ॥/PUNC  15/PUNC ॥/PUNC 
 अथ/AVK चित्रग्रीवः/NS  बिलम्/NP आसाद्य/KKS तारस्वरेण/KV प्रोवाच/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB भोः/DV मित्र/NV हिरण्यकः/NV !/PUNC सत्वरम्/KV आगच्छ/KP ;/PUNC महती/NV मे/SN व्यसनावस्था/NP वर्तते/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  तत्/SN श्रुत्वा/KKS हिरण्यकः/NS अपि/A बिलदुर्गान्तर्गतः/KV सन्/KNV प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC कः/AP  भवान्/SN ?/PUNC किमर्थम्/AP आयातः/KN ?/PUNC किम्/AP  कारणम्/NP ?/PUNC कीदृक्/AP ते/SN व्यसनावस्थानम्/NP ?/PUNC तत्/SN कथय/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS चित्रग्रीवः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC चित्रग्रीवः/NS  नाम/A कपोतराजः/NP अहम्/SN  ते/SN सुहृत्/NP ।/PUNC तत्/SN सत्वरम्/KV आगच्छ/KP ।/PUNC गुरुतरम्/NV  प्रयोजनम्/NP अस्ति/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  तत्/SN आकर्ण्य/KKS पुलकिततनुः/NV प्रहृष्टात्मा/NV स्थिरमनाः/NP त्वरमाणः/KNV  निष्क्रान्तः/KN ।/PUNC 
 अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
   सुहृदः/NP स्नेहसम्पन्नाः/NP  लोचनानन्ददायिनः/NP ।/PUNC 
   गृहे/NP गृहवताम्/NV  नित्यम्/KV आगच्छन्ति/KP महात्मनाम्/NP ॥/PUNC  16/PUNC ॥/PUNC 
  आदित्यस्य/NP उदयः/NP तात/NP !/PUNC ताम्बूलम्/NP  भारतीकथा/NP ।/PUNC 
  इष्टा/NV भार्या/NP सुमित्रम्/NP च/APY अपूर्वाणि/NP दिने/NP दिने/NP/DV ॥/PUNC  17/PUNC ॥/PUNC 
 सुहृदः/NP  भवने/NP यस्य/SSN समागच्छन्ति/KP नित्यशः/KV ।/PUNC 
 चित्ते/NP च/APY तस्य/SSN सौख्यस्य/NP न/AN किञ्चित्/A प्रतिमम्/NV  सुखम्/NP ॥/PUNC  18/PUNC ॥/PUNC 
 अथ/AVK चित्रग्रीवम्/NS  सपरिवारम्/NV  पाशबद्धम्/NV आलोक्य/KKS हिरण्यकः/NS सविषादम्/KV इदम्/SN आह/KP -/PUNC  भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC 
   सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC जानन्/KNV अपि/A किम्/AP  पृच्छसि/KP ?/PUNC उक्तम्/KN च/A यतः/AVK -/PUNC 
यस्मात्/SN च/APY येन/SN च/APY यदा/A च/APY यथा/A च/APY यत्/SN च/APY ,/PUNC 
यावत्/A च/APY यत्र/A च/APY शुभाशुभम्/NV आत्मकर्म/NP ।/PUNC 
तस्मात्/SN च/APY तेन/SN च/APY तथा/A च/APY तथा/A च/APY तत्/SN च/APY ,/PUNC 
तावत्/A च/APY तत्र/A च/APY कृतान्तवशात्/NP उपैति/KP ॥/PUNC 19/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A प्राप्तम्/KN  मया/SN एतत्/ बन्धनम्/NP  जिह्वालौल्यात्/NP ।/PUNC साम्प्रतम्/A  त्वम्/SN  सत्वरम्/KN  पाशविमोक्षम्/NP  कुरु/KP ।/PUNC ”/PUNC  
तत्/SN आकर्ण्य/KKS हिरण्यकः/NS प्राह/KP -/PUNC 
 “/PUNC अर्धार्धात्/NP योजनशतात्/NP आमिषम्/NP  वीक्षते/KP खगः/NP ।/PUNC 
 सः/SN अपि/A पार्श्वस्थितम्/NV  दैवाद्/NP बन्धनम्/NP  न/AN च/A पश्यति/KP ॥/PUNC  20/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/A -/PUNC 
रविनिशाकरयोः/NS ग्रहपीडनम्/KN ,/PUNC गजभुजङ्गविहङ्गमबन्धनम्/NP ।/PUNC 
मतिमताम्/NP  च/APY निरीक्ष्य/KKS दरिद्रताम्/NP ,/PUNC 
विधिः/NP अहो/ABS बलवान्/NV इति/AUD मे/SN मतिः/NP ॥/PUNC  21/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/A -/PUNC 
व्योमैकान्तविहारिणः/NV अपि/A विहगाः/NP सम्प्राप्नुवन्ति/KP आपदम्/NP ,/PUNC 
 बध्यन्ते/KP निपुणैः/NP अगाधसलिलात्/NP मीनाः/NP समुद्रात्/NP अपि/A ।/PUNC 
दुर्नीतम्/NP  किम्/AP इह/A अस्ति/KP किम्/AP  च/APY सुकृतम्/NP  कः/AP स्थानलाभे/NP गुणः/NP ,/PUNC 
कालः/NP  हि/INTF व्यसने/NP प्रसारितकरः/NV  गृह्णाति/KP दूरात्/KV अपि/A ॥/PUNC 22/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS चित्रग्रीवस्य/NS पाशम्/AP  छेत्तुम्/KKS उद्यतम्/KN  सः/SN  तम्/SN आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC मा/AN  मा/DV एवम्/A  कुरु/KP ;/PUNC  प्रथमम्/SMKP  मम/SN भृत्यानाम्/NP  पाशच्छेदम्/NP  कुरु/KP ,/PUNC तदनु/A मम/SN अपि/A च/APY ।/PUNC ”/PUNC  
  तच्छ्रुत्वा/KKS कुपितः/NV  हिरण्यकः/NP प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC न/AN युक्तम्/KN उक्तम्/KN  भवता/SN ।/PUNC यतः/AVK  स्वामिनोऽनन्तरं/NV भृत्याः।/NP/PUNC ”/PUNC  सः/SN  आह/KP—/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC मा/AN मा/N/DV एवं/A वद/KP ।/PUNC मदाश्रयाः/NV सर्व/SN एते/SN वराकाः/NP ।/PUNC अपरम्/A  स्वकुटुम्बम्/NP  परित्यज्य/KKS समागताः/KN ।/PUNC तत्/A कथम्/AP एतावन्/A मात्रम्/A अपि/A संमानम्/NP  न/AN करोमि/KP !/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 यः/SN संमानम्/NP  सदा/A आधत्ते/KP भृत्यानाम्/NP  क्षितिपः/NP अधिकम्/KV ।/PUNC 
  वित्ताभावे/NP अपि/A तम्/SN  हृष्टाः/KN ते/SN त्यजन्ति/KP न/AN कर्हिचित्/A ॥/PUNC 23/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/A -/PUNC 
विश्वासः/NP सम्पदाम्/NP  मूलम्/NP  तेन/SN यूथपतिः/NV गजः/NP ।/PUNC 
सिंहः/NP  मृगाधिपत्ये/NP अपि/A न/AN मृगैः/NP परिवार्यते/KP ॥/PUNC  24/PUNC ॥/PUNC 
अपरम्/A  मम/SN कदाचित्/A पाशच्छेदम्/NP  कुर्वतः/KNV ते/SN दन्तभङ्गः/NP  भवति/KP ,/PUNC अथवा/A दुरात्मा/NV लुब्धकः/NP समभ्येति/KP ,/PUNC तत्/A नूनम्/INTF  मम/SN नरकपातः/NP  एव/INTF ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  सदाचारेषु/NV भृत्येषु/NP संसीदत्सु/NV च/APY यः/SN प्रभुः/NP ।/PUNC 
 सुखी/NP स्यात्/KP नरकम्/NP  याति/KP परत्रेहि/NP च/APY सीदति/KP ॥/PUNC 25/PUNC ॥/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS प्रहृष्टः/KNV  हिरण्यकः/NS प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC वेद्मि/KP अहम्/SN  राजधर्मम्/NP ,/PUNC परम्/A  मया/SN तव/SN परीक्षा/NP कृता/KN ।/PUNC तत्/A सर्वेषाम्/SN  पूर्वम्/KV  पाशच्छेदम्/NP  करिष्यामि/KP ।/PUNC भवान्/SN अपि/A अनेन/SN विधिना/NP बहुकपोतपरिवारः/NP  भविष्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 कारुण्यम्/NP  संविभागः/NP च/APY तस्य/SN भृत्येषु/NP सर्वदा/A ।/PUNC 
 संभवेत्/KP स:/SN  महीपालः/NP त्रैलोक्यस्य/NP अपि/A रक्षणे/NP ”/PUNC  ॥/PUNC  26/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS सर्वेषाम्/SN  पाशच्छेदम्/NP  कृत्वा/KKS/ हिरण्यकः/NS चित्रग्रीवम्/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC मित्र/NP !/PUNC गम्यताम्/KP अधुना/A स्वाश्रयम्/NP  प्रति/AUP ।/PUNC 
भूयः/A अपि/A व्यसने/NP प्राप्ते/NV समागन्तव्यम्/KN “/PUNC  इति/AUD तान्/SN संप्रेष्य/KKS पुनः/A अपि/A दुर्गम्/NP  प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
 चित्रग्रीवः/NS अपि/A सपरिवारः/NV स्वाश्रयम्/NP अगमत्/KP ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
मित्रवान्/NP साधयति/KP अर्थान्/NP दुःसाध्यान्/NV अपि/A वै/INTF यतः/SN ।/PUNC 
तस्मात्/AVK मित्राणि/NP कुर्वीत/KP समानानि/NV एव/INTF च/APY आत्मनः/SN ॥/PUNC  27/PUNC ॥/PUNC 
लघुपतनकः/NS अपि/A वायसः/NP सर्वम्/SN  तम्/SN  चित्रग्रीवबन्धमोक्षम्/NP अवलोक्य/KKS विस्मितमना/NV व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC  “/PUNC अहो/ABS !/PUNC बुद्धिः/NP अस्य/SNV हिरण्यकस्य/NP शक्तिः/NP च/APY दुर्गसामग्री/NP च/APY ।/PUNC तत्/A इदृक्/A एव/INTF विधिः/NP विहङ्गानाम्/NP  बन्धनमोक्षात्मकः/NV ।/PUNC यद्यपि/A अहम्/SN  न/AN कस्यचित्/SN विश्वसिमि/KP चलप्रकृतिः/NV च/APY ,/PUNC तथापि/A एनम्/SN  मित्रम्/NP  करोमि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
 अपि/A संपूर्णतायुक्तैः/NV कर्तव्याः/KN सुहृदः/NP  बुधैः/NP ।/PUNC 
  नदीशः/NP परिपूर्णः/NV अपि/A चन्द्रोदयम्/NP अपेक्षते/KP “/PUNC ॥/PUNC  28/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A सम्प्रधार्य/KKS पादपात्/NP अवतीर्य/KKS बिलद्वारम्/NP आश्रित्य/KKS चित्रग्रीववत्/NS शब्देन/NP हिरण्यकम्/NS समाहूतवान्/KN -/PUNC “/PUNC एहि/KP एहि/DV ,/PUNC भो/ASMB हिरण्यक/NS !/PUNC एहि/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN शब्दम्/NP श्रुत्वा/KKS हिरण्यकः/NS व्यचिन्तयत्/KP –/PUNC किम्/AP अन्यः/SN अपि/A कश्चित्/SN कपोतः/NP बन्धनशेषः/NV तिष्ठति/KP ,/PUNC येन/SN माम्/SN  व्याहरति/KP ।/PUNC ”/PUNC आह/KP च/APY -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC को/AP भवान्/SN ?/PUNC 
 सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC अहम्/SN  लघुपतनकः/NS  नाम/A वायसः/NP ।/PUNC ”/PUNC  
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS  विशेषात्/NV अन्तर्लीनः/NV  हिरण्यकः/NP  आह/KP —/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC द्रुतम्/KV  गम्यताम्/KP अस्मात्/SN स्थानात्/NP ।/PUNC ”/PUNC  
  वायसः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC अहम्/SN  तव/SN पार्श्वे/NV गुरुकार्येण/NP समागतः/KN ,/PUNC तत्/SN किम्/AP  न/AN क्रियते/KP मया/SN सह/AUP दर्शनम्/NP ?/PUNC ”/PUNC  
  हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC न/AN मे/SN अस्ति/KP त्वया/SN सह/AUP सङ्गमेन/NP प्रयोजनम्/NP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
 सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC चित्रग्रीवस्य/NS मया/SN तव/SN सकाशात्/A पाशमोक्षणम्/NP  दृष्टम्/KN  ,/PUNC तेन/SN मम/SN महती/NV प्रीतिः/NP सञ्जाता/KN ।/PUNC तत्/SN कदाचित्/A मम/SN अपि/A बन्धने/NP जाते/KN तव/SN पार्श्वात्/NP मुक्तिः/NP भविष्यति/KP ।/PUNC तत्/SN क्रियताम्/KP  मया/SN सह/AUP मैत्री/NP ।/PUNC ”/PUNC  
 हिरण्यकः/NS  आह/KP —/PUNC “/PUNC अहो/ABS !/PUNC त्वम्/SN  भोक्ता/NP ,/PUNC अहम्/SN  ते/SN भोज्यभूतः/KN ।/PUNC तत्/A का/SN त्वया/SN सह/AUP मम/SN मैत्री/NP ?/PUNC तद्/A गम्यताम्/KP ।/PUNC मैत्री/NP विरोधभावात्/NP कथम्/AP ?/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  ययोः/SSN एव/INTF समम्/NV  वित्तम्/NP  ययोः/SSN एव/INTF समम्/NV  कुलम्/NP ।/PUNC 
  तयोः/SSN मैत्री/NP विवादः/NP च/NP न/AN तु/A पुष्टविपुष्टयोः/NP ॥/PUNC 29/PUNC ॥/PUNC 
  तथा/AVK च/A—/PUNC 
    यः/SN  मित्रम्/NP  कुरुते/KP मूढात्मनः/NP असदृशम्/NV  कुधीः/NV ।/PUNC 
    हीनम्/NV  वा/A अपि/A अधिकम्/NV  वा/A अपि/A हास्यताम्/NP  याति/KP असौ/SN जनः/NP ॥/PUNC  30/PUNC ॥/PUNC 
तद्/A गम्यताम्/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
   वायसः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भो!/PUNC हिरण्यक/NS !/PUNC एषः/SN अहम्/SN  तव/SN दुर्गद्वारे/NP उपविष्टः/KN ।/PUNC यदि/A त्वम्/SN  मैत्रीम्/NP  न/AN करोषि/KP ,/PUNC ततः/A अहम्/SN  प्राणमोक्षणम्/NP  तव/SN अग्रे/KV करिष्यामि/KP ।/PUNC अथवा/A प्रायोपवेशनम्/NP  मे/SN स्यात्/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
 हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC त्वया/SN वैरिणा/NP सह/AUP कथम्/AP  मैत्रीम्/NP  करोमि/KP ?/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
  वैरिणा/NP नहि/AN संदध्यात्/KP सुश्लिष्टेन/NV अपि/A सन्धिना/NP ।/PUNC 
  सुतप्तम्/KN अपि/A पानीयम्/NP  शमयति/KP एव/INTF पावकम्/NP ॥/PUNC  31/PUNC ॥/PUNC 
 वायसः/NP  आह/KP —/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC त्वया/SN सह/AUP दर्शनम्/NP अपि/A न/AN अस्ति/KP ,/PUNC कुतः/AP  वैरम्/NP ?/PUNC तत्/SN किम्/AP अनुचितम्/KN  वदसि/KP ?/PUNC ”/PUNC  
   हिरण्यकः/NS  प्राह/KP -/PUNC “/PUNC द्विविधम्/NV  वैरम्/NP  भवति/KP ,/PUNC सहजम्/NV  कृत्रिमम्/NV  च/APY ।/PUNC तत्/SN सहजवैरी/NP त्वम्/SN अस्माकम्/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
    कृत्रिमम्/NV  नाशम्/NP अभ्येति/KP वैरम्/NP  द्राक्/KV कृत्रिमैः/NV गुणैः/NP ।/PUNC 
    प्राणदानम्/NP  विना/A वैरम्/NP  सहजम्/KV  याति/KP न/AN क्षयम्/NP ॥/PUNC  32/PUNC ॥/PUNC 
   वायसः/NP  आह/KP -/PUNC  भोः/ASMB !/PUNC द्विविधस्य/NV वैरस्य/NP लक्षणम्/NP  श्रोतुम्/KKS इच्छामि/KP ,/PUNC तत्/SN कथ्यताम्/KP ।/PUNC ”/PUNC  
   हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC कारणेन/NP निर्वृत्तम्/KN  कृत्रिमम्/NP ।/PUNC तत्/SN तदर्होपकारकरणात्/NP  गच्छति/KP ।/PUNC स्वाभाविकम्/NP  पुनः/A कथमपि/A न/AN गच्छति/KP ।/PUNC तद्यथा/A –/PUNC नकुलसर्पाणाम्/NP ।/PUNC शष्पभुङ्नखायुधानाम्/NP ।/PUNC जलवह्न्योः/NP ।/PUNC देवदैत्यानाम्/NP ।/PUNC सारमेयमार्जाराणाम्/NP ।/PUNC ईश्वरदरिद्राणाम्/NP ।/PUNC सपत्नीनाम्/NP ।/PUNC सिंहगजानाम्/NP ।/PUNC लुब्धकहरिणानाम्/NP ।/PUNC श्रोत्रियभ्रष्टक्रियाणाम्/NP ।/PUNC काकोलूकानम्/NP ।/PUNC मूर्खपण्डितानाम्/NP ,/PUNC पतिव्रताकुलटानाम्/NP ।/PUNC सज्जनदुर्जनानाम्/NP ।/PUNC न/AN कस्यचित्/SN केनापि//A कोऽपि/A व्यापादितः/KN ,/PUNC तथापि/A प्राणान्ताय/NP यतन्ते/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 वायसः/NP  आह/KP —/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC अकारणम्/NP एतत्/SN ।/PUNC श्रूयताम्/KP  मे/SN वचनम्/NP -/PUNC 
 कारणात्/NP मित्रताम्/NP  याति/KP कारणात्/NP इति/AUD शत्रुताम्/NP ।/PUNC 
 तस्मात्/AVK मित्रत्वम्/NP एव/INTF अत्र/A योज्यम्/KN  वैरम्/NP  न/AN धीमता/NP ॥/PUNC  33/PUNC ॥/PUNC 
तस्मात्/AVK कुरु/KP मया/SN सह/AUP समागमम्/NP  मित्रधर्मार्थम्/KKS ।/PUNC ”/PUNC 
हिरण्यकः/NS  आह/KP —/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC त्वया/SN सह/AUP मम/SN कः/AP समागमः/NP !/PUNC श्रूयताम्/KP  नीतिसर्वस्वम्/NP -/PUNC 
सकृत्/NV दुष्टम्/KN  च/APY यः/SSN  मित्रम्/NP  पुनः/A सन्धातुम्/KKS इच्छति/KP ।/PUNC 
सः/SSN  मृत्युम्/NP उपगृह्णाति/KP गर्भम्/NP अश्वतरी/NP यथा/ASD ॥/PUNC  34/PUNC ॥/PUNC 
 अथवा/A  ‘/PUNC गुणवान्/KN अहम्/SN ,/PUNC न/AN मे/SN कश्चित्/SN वैरनिर्यातनम्/NP  करिष्यति/KP ’/PUNC एतत्/SN अपि/A न/AN सम्भाव्यम्/KN ।/PUNC 0

उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
   सिंहः/NP  व्याकरणस्य/NP कर्तुः/NP अहरत्/KP प्राणान्/NP प्रियान्/NV पाणिनेः/NS 
   मीमांसाकृतम्/NV उन्ममाथ/KP सहसा/KV हस्ती/NP मुनिम्/NV  जैमिनिम्/NS ।/PUNC 
   छन्दःज्ञाननिधिम्/NV  जघान/KP मकरः/NP  वेलातटे/NP पिङ्गलम्/NS 
   अज्ञानावृतचेतसामतिरुषाम्/NV  कः/SN अर्थः/NP तिरंश्चाम्/NP  गुणैः/NP ?/PUNC ॥/PUNC  35/PUNC ॥/PUNC 
 वायसः/NP  आह/KP—/PUNC ”/PUNC अस्ति/KP एतत्/SN ,/PUNC तथापि/A श्रूयताम्/KP -/PUNC 
उपकारात्/NP च/APY लोकानाम्/NP  निमित्तात्/NP मृगपक्षिणाम्/NP ।/PUNC 
भयात्/NP लोभात्/NP च/APY मूर्खाणाम्/NP  मैत्री/NP स्याद्/KP दर्शनात्/NP सताम्/NP ॥/PUNC  36/PUNC ॥/PUNC 
मृद्घट/NP इव/ASD सुखभेद्यः/NV दुःसन्धानः/NV च/APY दुर्जनः/NP  भवति/KP ।/PUNC 
सुजनः/NP तु/A कनकघट/NP इव/ASD दुर्भेदः/NV सुकरसन्धिः/NV च/APY ॥/PUNC  37/PUNC ॥/PUNC 
इक्षोः/NP अग्रात्/NP क्रमशः/A पर्वणि/NP पर्वणि/NP/DV यथा/A रसविशेषः/NP ।/PUNC 
तद्वत्/ASD सज्जनमैत्री/NP विपरीतानाम्/NP तु/A विपरीता/NV ॥/PUNC 38/PUNC ॥/PUNC 
 तथा/AVK च/AVK—/PUNC 
    आरम्भगुर्वी/NV क्षयिणी/NV क्रमेण/NP,/PUNC 
   लघ्वी/NV पुरा/NV वृद्धिमती/NV च/APY पश्चात्/NV ।/PUNC 
   दिनस्य/NP पूर्वार्धपरार्धभिन्ना/NV ,/PUNC 
 छाया/NP इव/ASD मैत्री/NP खलसज्जनानाम्/NP ॥/PUNC 39/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK सर्वथा/A साधुः/NP एव/INTF अहम्/SN ।/PUNC अपरम्/SN  त्वाम्/SN  शपथादिभिः/NP निर्भयम्/NP  करिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
हिरण्यकः/NS  प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC न/AN मे/SN अस्ति/KP ते/SN शपथैः/NP प्रत्ययः/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
    शपथैः/NP सन्धितस्य/KN अपि/A न/AN विश्वासम्/NP  वज्रेत्/KP रिपोः/NP ।/PUNC 
    श्रूयते/KP शपथम्/NP  कृत्वा/KKS वृत्रः/NS शक्रेण/NS सूदितः/KN ॥/PUNC  40/PUNC ॥/PUNC 
     न/AN विश्वासम्/NP  विना/A शत्रुः/NP देवानाम्/NP अपि/A सिद्धयति/KP ।/PUNC 
     विश्वासात्/NP त्रिदशन्द्रेण/NP दितेः/NS गर्भः/NP  विदारितः/KN ॥/PUNC  41/PUNC ॥/PUNC 
  अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC 
    बृहस्पतेः/NS अपि/A प्राज्ञः/NP तस्मात्/SN एव/INTF अत्र/A विश्वसेत्/KP ।/PUNC 
    य/SN इच्छेत्/KP आत्मनः/SN  वृद्धिम्/NP आयुष्यम्/NP  च/APY सुखानि/NP च/APY ॥/PUNC  42/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/A —/PUNC 
सुसूक्ष्मेण/NV अपि/A रन्ध्रेण/NP प्रविश्य/KKS आभ्यन्तरम्/NP  रिपुः/NP ।/PUNC 
नाशयेत्/KP च/A शनैः/KV पश्चात्/A प्लवम्/NP सलिलपूरवत्/NP ॥/PUNC  43/PUNC ॥/PUNC 
न/AN विश्वसेत्/KP अविश्वस्तम्/NP  विश्वस्तम्/NP  न/AN अति/A विश्वसेत्/KP ।/PUNC 
विश्वासात्/NP भयम्/NP उत्पन्नम्/KN  मूलानि/NP अपि/A निकृन्तति/KP ॥/PUNC  44/PUNC ॥/PUNC 
न/AN वध्यते/KP हि/A अविश्वस्तः/NP  दुर्बलः/NV अपि/A मदोत्कटैः/NP ।/PUNC 
विश्वस्ताः/NP च/APY आशु/KV वध्यन्ते/KP बलवन्तः/NV अपि/A दुर्बलैः/NP ॥/PUNC  45/PUNC ॥/PUNC 
सुकृत्यम्/NP  विष्णुगुप्तस्य/NS मित्राप्तिः/NP भार्गवस्य/NS च/APY ।/PUNC 
बृहस्पतेः/NS अविश्वासः/NP  नीतिसन्धिः/NP त्रिधा/A स्थितः/KN ॥/PUNC  46/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 महता/NV अपि/A अर्थसारेण/NP यः/SN  विश्वसिति/KP शत्रुषु/NP ।/PUNC 
 भार्यासु/NP च/APY विरक्तासु/NV तत्/SN अन्तम्/NP  तस्य/SN जीवितम्/NP “/PUNC ॥/PUNC  47/PUNC ॥/PUNC 
  तत्/SN श्रुत्वा/KKS लघुपतनकः/NS अपि/A निरुत्तरः/NV चिन्तयामास/KP  -/PUNC  “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC बुद्धिप्रागल्भ्यम्/NP अस्य/SN नीतिविषये/NP ।/PUNC अथवा/A अतएव/A अस्य/SN उपरि/A मैत्रीपक्षपातः/NP ।/PUNC ”/PUNC  आह/KP च-/PUNC “/PUNC भो!/PUNC हिरण्यक/NS !/PUNC 
सख्यम्/NP  साप्तपदीनम्/NV  स्यात्/KP इति/AUD आहुः/KP विबुधा/NP
तस्मात्/SN त्वम्/SN  मित्रताम्/NP  प्राप्तः/KN  वचनम्/NP  मम/SN तत्/SN शृणु/KP ॥/PUNC  48/PUNC ॥/PUNC 
दुर्गस्थेन/NP अपि/A त्वया/SN मया/SN सह/AUP नित्यम्/KV एव/INTF आलापः/NP  गुणदोषसुभाषितगोष्ठीकथाः/NP सर्वदा/A कर्तव्याः/KN ,/PUNC यदि/A एवम्/A  न/AN विश्वसिषि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS हिरण्यकः/NS अपिA व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC  “/PUNC विदग्धवचनः/NV अयम्/SN  दृश्यते/KP लघुपतनकः/NS सत्यवाक्यः/NV च/APY ।/PUNC तत्/AVK युक्तम्/KN अनेन/SN मैत्रीकरणम्/NP ।/PUNC ”/PUNC  आह/KP च/AVK —/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC परम्/A कदाचित्/A मम/SN दुर्गे/NP चरणपातः/NP अपि/A न/AN कार्यः/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
   भीतभीतः/NV पुरा/A शत्रुः/NP मन्दम्/KV मन्दम्/DV  विसर्पति/KP ।/PUNC 
   भूमौ/NP प्रहेलया/NP पश्चात्/A जारहस्तः/NP अङ्गनासु/NP इव/ASD ”/PUNC  ॥/PUNC  49/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS वायसः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC एवम्/A  भवतु/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 ततः/AVK प्रभृति/A तौ/SN द्वौ/SMKY अपि/A सुभाषितगोष्ठीसुखम्/NP अनुभवन्तौ/KV तिष्ठतः/KP ।/PUNC परस्परम्/A  कृतोपकारौ/NP कालम्/NP  नयतः/KP ।/PUNC लघुपतनकः/NS अपि/A मांसशकलानि/NP ,/PUNC मेध्यानि/NV बलिशेषाणि/NP अन्यानि/SN वात्सल्यात्/NP आहृतानि/KN पक्वान्नविशेषाणि/NP हिरण्यार्थम्/KKS आनयति/KP ।/PUNC हिरण्यकः/NS अपि/A तण्डुलान्/NP अन्यान्/SN च/APY भक्ष्यविशेषान्/NP लघुपतनकार्थम्/KKS  रात्रौ/NP आहृत्य/KKS तत्काल/KV आयातस्य/NP अर्पयति/KP ।/PUNC अथवा/A युज्यते/KP द्वयोः/SN अपि/A एतत्/SN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
ददाति/KP प्रतिगृह्णाति/KP गुह्यम्/NP आख्याति/KP पृच्छति/KP ।/PUNC 
भुङ्क्ते/KP भोजयते/KP च/APY एव/INTF षड्विध/NV प्रीतिलक्षणम्/NP ॥/PUNC  50/PUNC ॥/PUNC 
न/AN उपकारम्/NP विना/AUP प्रीतिः/NP कथञ्चित्/SN कस्यचित्/SN भवेत्/KP ।/PUNC 
उपयाचितदानेन/NP यतः/A देवा/NP अभीष्टदाः/NV ॥/PUNC 51/PUNC ।/PUNC 
तावत्/SN प्रीतिः/NP भवेत्/KP लोके/NP यावत्/SN  दानम्/NP  प्रदीयते/KP ।/PUNC 
वत्सः/NP क्षीरक्षयम्/NP दृष्ट्वा/KKS परित्यजति/KP मातरम्/NP ॥/PUNC  52/PUNC ॥/PUNC 
पश्य/KP दानस्य/NP माहात्म्यम्/NP सद्यः/NV प्रत्ययकारकम्/NV ।/PUNC 
यत्/SN प्रभावात्/NP अपि/A द्वेषी/NP मित्रताम्/NP  याति/KP तत्/SN क्षणात्/NP ॥/PUNC  53/PUNC ॥/PUNC 
  पुत्रात्/NP अपि/A प्रियतर:/NP खलु/INTF तेन/SN दानम्/NP ,/PUNC 
  मन्ये/KP पशोः/NP अपि/A विवेकविवर्जितस्य/NV ।/PUNC 
 दत्ते/KN खलु/A नु/A निखिलम्/NV खलु/A येन/SN दुग्धम्/NP 
  नित्यम्/KV ददाति/KP महिषी/NP ससुता/NV अपि/A पश्य/KP ॥/PUNC  54/PUNC ॥/PUNC  
किम्/SN बहुना/NP -/PUNC 
 प्रीतिम्/NP निरन्तराम्/NV  कृत्वा/KKS दुर्भेद्याम्/NV नखमांसवत्/NP ।/PUNC 
 मूषकः/NP वायसः/NP च/APY एव/INTF गतौ/KN एकान्तमित्रताम्/NP ॥/PUNC  55/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  सः/SN  मूषकः/NP तत्/SN उपकाररञ्जितः/NV तथा/A विश्वस्तः/NV यथा/A तस्य/SN पक्षमध्ये/NP प्रविष्टः/KN तेन/SN सह/AUP सर्वदा/A एव/INTF गोष्ठीम्/NP  करोति/KP ।/PUNC 
अथ/A अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP वायसः/NP अश्रुपूर्णनयनः/NV समभ्येत्य/KKS सगद्गदम्/NV  तम्/SN उवाच/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP हिरण्यक/NS !/PUNC विरक्तिः/NP सञ्जाता/KN मे/SN साम्प्रतम्/A देशस्य/NP अस्य/SN उपरि/A ,/PUNC तत्/A अन्यत्र/A यास्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  हिरण्यक/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC किम्/AP  विरक्तेः/NP कारणम्/NP ?/PUNC ”/PUNC  
 सः/SN  आह/KP —/PUNC “/PUNC श्रूयताम्/KP !/PUNC अत्र/A देशे/NP महति/NV अनावृष्टया/NP दुर्भिक्षम्/NP  सञ्जातम्/KN ।/PUNC दुर्भिक्षत्वात्/NP जनः/NP बुभुक्षापीडितः/NV कोपि/SN बलिमात्रम्/NP अपि/A न/AN प्रयच्छति/KP ।/PUNC अपरम्/A ,/PUNC गृहे/NP-/PUNC गृहे/NP/DV बुभुक्षितजनैः/NP विहङ्गानाम्/NP  बन्धनाय/NP पाशाः/NP प्रगुणीकृताः/NV सन्ति/KP ।/PUNC अहम्/SN अपि/A आयुश्शेषतया/NP पाशेन/NP बद्ध/KN उद्धरितः/KN अस्मि/KP ।/PUNC एतत्/SN विरक्तेः/NP कारणम्/NP ।/PUNC तेन/SN अहम्/SN  विदेशम्/NP  चलित/KN इति/AUD बाष्पमोक्षम्/NP  करोमि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
हिरण्यकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC अथ/A भवान्/NP क्व/AP प्रस्थितः/KN ?/PUNC ”/PUNC  
सः/SN आह/KP -/PUNC  “/PUNC अस्ति/KP दक्षिणापथे/NP वनगहनमध्ये/NP महासरः/NP ।/PUNC तत्र/A त्वत्तः/SN अधिकः/NV परमसुहृत्/NV कूर्मः/NP मन्थरकः/NS नाम/A ।/PUNC सः/SN च/APY मे/SN मत्स्यमांसखण्डानि/NP दास्यति/KP ।/PUNC तत्/SN भक्षणात्/NP तेन/SN सह/AUP सुभाषितगोष्ठीसुखम्/NP अनुभवन्/KNV सुखेन/NP कालम्/NP नयिष्यामि/KP ।/PUNC न/AN अहम्/SN अत्र/A विहङ्गानाम्/NP  पाशबन्धनेन/NP क्षयम्/NP  द्रष्टुम्/KKS इच्छामि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
अनावृष्टिहते/NV देशे/NP सस्ये/NP च/APY प्रलयङ्गते/NV ।/PUNC 
धन्याः/NP तात/NP !/PUNC न/AN पश्यन्ति/KP देशभङ्गम्/NP  कुलक्षयम्/NP ॥/PUNC  56/PUNC ॥/PUNC 
  कः/AP अतिभारः/NP समर्थानाम्/NP किम्/AP दूरम्/NP  व्यवसायिनाम्/NP ?/PUNC ।/PUNC 
  कः/AP  विदेशः/NP सविद्यानाम्/NP  कः/AP परः/NP प्रियवादिनाम्/NP ?/PUNC ॥/PUNC  57/PUNC ॥/PUNC 
  विद्वत्त्वम्/NP च/APY नृपत्वम्/NP  च/APY न/AN एव/INTF तुल्यम्/NP  कदाचन/A ।/PUNC 
  स्वदेशे/NP पूज्यते/KP राजा/NP विद्वान्/NP सर्वत्र/A पूज्यते/KP ”/PUNC  ॥/PUNC  58/PUNC ॥/PUNC 
   हिरण्यकः/NS  आह/KP —/PUNC ‘/PUNC यदि/A एवम्/A  तत्/A अहम्/SN अपि/A त्वया/SN सह/AUP गमिष्यामि/KP ।/PUNC मम/SN अपि/A महद्/NV दुःखम्/NP  वर्तते/KP ।/PUNC ”/PUNC  
वायसः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC तव/SN किम्/AP  दुःखम्/NP ,/PUNC तत्/SN कथय/KP ?/PUNC ”/PUNC  
   हिरण्यकः/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC बहु/A वक्तव्यम्/KN अस्ति/KP अत्र/A विषये/NP ।/PUNC तत्/SN तत्र/SN एव/INTF गत्वा/KKS सर्वम्/SN सविस्तरम्/KV कथयिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
वायसः/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC अहम्/SN तावत्/A आकाशगतिः/NP ।/PUNC तत्/A कथम्/AP  भवतः/SN  मया/SN सह/AUP गमनम्/NP “/PUNC ?/PUNC 
सः/SN आह/KP —/PUNC “/PUNC यदि/A मे/SN प्राणान्/NP रक्षसि/KP ,/PUNC तदा/A स्वपृष्ठम्/NP आरोप्य/KKS माम्/SN  तत्र/A प्रापय/KP ,/PUNC न/AN अन्यथा/A मम/SN गतिः/NP अस्ति/KP ।/PUNC ”/PUNC  तत्/SN श्रुत्वा/KKS सानन्दं/KV वायसः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC यदि/A एवम्/A  तत्/SSN धन्यः/NP अहम्/SN  यत्/SSN भवता/SN अपि/A सह/AUP तत्र/A कालम्/NP  नयामि/KP ।/PUNC अहम्/SN  सम्पातादिकान्/NP अष्टौ/SMKY उड्डीनगतिविशेषान्/NP वेद्मि/KP ।/PUNC तत्/SN समारोहय/KP मम/SN पृष्ठम्/NP ,/PUNC येन/SN सुखेन/NP त्वाम्/SN  तत्/SN सरः/NP प्रापयामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC उड्डीनानाम्/NP  नामानि/NP श्रोतुम्/KKS इच्छामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 सः/SN आह/KP -/PUNC 
  “/PUNC सपातम्/NP च/APY विपातम्/NP च/APY महापातम्/NP  निपातनम्/NP ।/PUNC 
  वक्रम्/NP तिर्यक्/NP तथा/A च/APY उर्ध्वम्/NP अष्टमम्/SMKP लघुसंज्ञकम्/NP ॥/PUNC  59/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS हिरण्यकः/NS तत्/SN क्षणात्/NP एव/INTF तत्/SN उपरि/A समारूढः/KN ।/PUNC सः/SN अपि/A शनैः/KV शनैः/KV/DV तम्/SN आदाय/KKS सम्पातोड्डयनेन/NP प्रस्थितः/KN,/PUNC क्रमेण/NP तत्/SN सरः/NP प्राप्तः/KN ।/PUNC ततः/A  लघुपतनकम्/NS  मूषकाधिष्ठितम्/NV विलोक्य/KKS दूरतः/A अपि/A देशकालविद्/NV असामान्यकाकः/NP अयम्/SNV इति/AUD ज्ञात्वा/KKS,/PUNC सत्वरम्/KV  मन्थरकः/NP  जले/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
लघुपतनकः/NS अपि/A तीरस्थितरुकोटरे/NP हिरण्यकम्/NS  मुक्त्वा/KKS शाखाग्रम्/NP आरुह्य/KKS तारस्वरेण/KV प्रोवाच/KP -/PUNC 
“/PUNC भो/ASMB मन्थरक/NS !/PUNC आगच्छ/KP आगच्छ/KP/DV ,/PUNC तव/SN मित्रम्/NP अहम्/SN लघुपतनकः/NS  नाम/A वायसः/NP चिरात्/A सोत्कण्ठः/KV समायातः/KN ,/PUNC तत्/A आगत्य/KKS आलिङ्ग/KP माम्/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  किम्/AP  चन्दनैः/NP सकर्पूरैः/NV तुहिनैः/NP किम्/AP  च/APY शीतलैः/NV ?/PUNC ।/PUNC 
  सर्वे/SN ते/SN मित्रगात्रस्य/NP कलाम्/NP न/AN अर्हन्ति/KP षोडशीम्/NV ॥/PUNC 60/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/AVK -/PUNC 
 केन/SN अमृतम्/NP इदम्/SNV  सृष्टम्/KN  मित्रम्/NP इति/AUD अक्षरद्वयम्/NV ।/PUNC 
  आपदाम्/NP  च/APY परित्राणम्/NV  शोकसंतापभेषजम्/NV ”/PUNC  ॥/PUNC  61/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS निपुणतरम्//NP परिज्ञाय/KKS सत्वरम्/KV सलिलात्/NP निष्क्रम्य/KKS पुलकिततनुः/NV आनन्दाश्रुपूरितनयनः/NV  मन्थरकः/NS प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC एहि/KP एहि/KP/DV मित्र/NP !/PUNC आलिङ्ग/KP माम्/SN ।/PUNC चिरकालात्/NP मया/SN त्वम्/SN  न/AN सम्यक्/A परिज्ञातः/KN ।/PUNC तेन/SN अहम्/SN  सलिलान्तः/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 यस्य/SN न/AN ज्ञायते/KP वीर्यम्/NP  न/AN कुलम्/NP  न/AN विचेष्टितम्/NP ।/PUNC 
 न/AN तेन/SN सङ्गतिम्/NP कुर्यात्/KP इति/AUD उवाच/KP बृहस्पतिः/NS ”/PUNC  ॥/PUNC  62/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्ते/KN लघुपतनकः/NS वृक्षात्/NP अवतीर्य/KKS तम्/SN आलङ्गितवान्/KN ।/PUNC अथवा/A,/PUNC साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
  अमृतस्य/NP प्रवाहैः/NP किम्/AP कायक्षालनसम्भवैः/NV ।/PUNC 
  चिरात्/A मित्रपरिष्वङ्गः/NP  यः/SN असौ/SN मूल्यविवर्जितः/NV ॥/PUNC 63/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  द्वौ/SMKY अपि/A तौ/SN विहितआलिङ्गनौ/NV परस्परम्/SN पुलकितशरीरौ/NV वृक्षात्/NP अधः/A समुपविष्टौ/NV प्रोचतुः/KP आत्मचरित्रवृत्तान्तम्/NP ।/PUNC हिरण्यकः/NS अपि/A मन्थरकम्/NP  प्रणम्य/KKS वायसाभ्याशे/KV समुपविष्टः/KN ।/PUNC अथ/A तम्/SN  समालोक्य/KKS मन्थरकः/NS लघुपतनकम्/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC कः/AP अयम्/SNV  मूषकः/NP ?/PUNC कस्मात्/AP त्वया/SN भक्ष्यभूतः/NP अपि/A पृष्ठम्/NP आरोप्य/KKS आनीतः/KN ?/PUNC तत्/SN न/AN अत्र/A स्वल्पकारणेन/NP भाव्यम्/NP ।/PUNC ”/PUNC  
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS लघुपतनकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भो/ASMB !/PUNC हिरण्यकः/NS नाम/NP मूषकः/NP अयम्/SN  ।/PUNC मम/SN सुहृद्/NP द्वितीयम्/SMKP इव/ASD जीवितम्/NP ।/PUNC तत्/SN किम्/AP  बहुना/A -/PUNC 
पर्जन्यस्य/NP यथा/A धारा/NP यथा/A च/APY दिवि/NP तारकाः/NP ।/PUNC 
सिकतारेणवो/NP यद्वत्/A सङ्ख्यया/NP परिवर्जिताः/NP ॥/PUNC  64/PUNC ॥/PUNC 
गुणाः/NP संख्यापरित्यक्ताः/NV तद्वत्/A अस्य/SN महात्मनः/NP ।/PUNC 
परम्/A निर्वेदम्/NP आपन्नः/KN संप्राप्तः/KN अयम्/SN  तव/SN अन्तिकम्/A ”/PUNC  ॥/PUNC  65/PUNC ॥/PUNC 
मन्थरकः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC किम्/AP अस्य/SN वैराग्यकारणम्/NP ?/PUNC ”/PUNC  
 वायसः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC पृष्टः/KN  मया/SN तत्र/SN एव/INTF ,/PUNC परम्/A अनेन/SN अभिहितम्/KN  यद्/SN -/PUNC  बहु/A वक्तव्यम्/KN अस्ति/KP ,/PUNC  तत्/SN तत्र/A एव/INTF गत्वा/KKS कथयिष्यामि/KP इति/AUD मम/SN अपि/A न/AN निवेदितम्/KN ।/PUNC तद्/A भद्र/NP हिरण्यक/NS !/PUNC इदानीम्/A निवेद्यताम्/KP उभयोः/SN अपि/A आवयोः/SN तत्/SN आत्मनः/SN  वैराग्यकारणम्/NP ।/PUNC ”/PUNC  
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
1/PUNC :/PUNC हिरण्यकताम्रचूडकथा/NP
अस्ति/KP दाक्षिणात्ये/NV जनपदे/NP महिलारोप्यम्/NS  नाम/A नगरम्/NP ।/PUNC तस्य/SN न/AN अतिदूरे/A मठायतनम्/NP  भगवतः/NP श्रीमहादेवस्य/NP ।/PUNC तत्र/A च/A ताम्रचूडः/NS  नाम/A परिव्राजकः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN च/A नगरे/NP भिक्षाटनम्/NP  कृत्वा/KKS प्राणयात्राम्/NP समाचरति/KP ।/PUNC 
भिक्षाशेषम्/NP च/A तत्र/A एव/INTF भिक्षापात्रे/NP निधाय/KKS तत्/SN भिक्षापात्रम्/NP  नागदन्ते/NP अवलम्ब्य/KKS पश्चात्/A रात्रौ/NP स्वपिति/KP ।/PUNC प्रत्यूषे/NP च/A तद्/SN अन्नम्/NP  कर्मकराणाम्/NP  दत्त्वा/KKS सम्यक्/A तत्र/A एव/INTF देवतायतने/NP संमार्जनोपलेपनमण्डनादिकम्/NP  समाज्ञापयति/KP ।/PUNC 
  अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP मम/SN बान्धवैः/NP निवेदितम्/KN -/PUNC  “/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC मठायतने/NP सिद्धम्/NV अन्नम्/NP  मूषकभयात्/NP तत्र/A एव/INTF भिक्षापात्रे/NP निहितम्/KN  नागदन्ते/NP अवलम्बितम्/KN  तिष्ठति/KP सदा/A एव/INTF ।/PUNC तत्/SN वयम्/SN  भक्षयितुम्/KKS  न/AN शक्नुमः/KP ।/PUNC स्वामिनः/NP पुनः/A अगम्यम्/KN  किम्/AP अपि/A न/AN अस्ति/KP ।/PUNC तत्/SN किम्/AP  वृथा/NV अटनेन/NP अन्यत्र/A ।/PUNC अद्य/A तत्र/A गत्वा/KKS यथेच्छम्/KV  भुञ्जामहे/KP भवत्/SN प्रसादात्/NP “/PUNC  ।/PUNC 
 तत्/SN आकर्ण्य/KKS अहम्/SN सकलयूथपरिवृत्तः/NV तत्/SN क्षणात्/NP एव/INTF तत्र/A गतः/KN ।/PUNC उत्पत्य/KKS च/APY तस्मिन्/SN भिक्षापात्रे/NP समारूढः/KN ।/PUNC तत्र/A भक्ष्यविशेषाणि/NP सेवकानाम्/NP  दत्त्वा/KKS पश्चात्/A स्वयम्/SN एव/INTF भक्षयामि/KP ।/PUNC सर्वेषाम्/SN  तृप्तौ/NP जातायाम्/KN भूयः/A स्वगृहम्/NP गच्छामि/KP ।/PUNC एवम्/A नित्यम्/KV एव/INTF तत्/SN अन्नम्/NP  भक्षयामि/KP ।/PUNC परिव्राजकः/NP अपि/A यथाशक्ति/KV रक्षति/KP ,/PUNC परम्/A यदा/A एव/INTF निद्रान्तरितः/KN भवति/KP तदा/A अहम्/SN  तत्र/A आरुह्य/KKS आत्मकृत्यम्/NP  करोमि/KP ।/PUNC 
अथ/A कदाचित्/A तेन/SN मम/SN त्रासार्थम्/KKS  महान्/NV यत्नः/NP कृतः/KN ।/PUNC जर्जरवंशः/NP अपि/A समानीतः/KN ।/PUNC तेन/SN सुप्तः/KN अपि/A मम/SN भयात्/KV भिक्षापात्रम्/NP  ताडयति/KP ।/PUNC अहम्/SN अपि/A अभक्षिते/KN अपि/A अन्ने/NP प्रहारभयात्/NP अपसर्पामि/KP ।/PUNC एवम्/A  तेन/SN सह/AUP सकलाम्/NV  रात्रिम्/NP  विग्रहपरस्य/NP मे/SN कालः/NP  व्रजति/KP ।/PUNC 
  अथ/A अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP तस्मिन्/SN मठे/NP बृहत्स्फिङ्/NS नामा/A परिव्राजकः/NP तस्य/SN सुहृत्/NP तीर्थयात्राप्रसङ्गेन/NP प्राघुणिकः/NP समायातः/KN ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS प्रत्युत्थानविधिना/NP सम्भाव्य/KKS प्रपत्तिपूर्वकम्/KV अभ्यागतक्रियया/NP नियोजितवान्/KN ।/PUNC ततः/A च/A रात्रौ/NP एकत्र/A कुशसंस्तरे/NP द्वौ/SN अपि/A प्रसुप्तौ/KN धर्मकथाम्/NP कथयितुम्/KKS आरब्धौ/KN ।/PUNC 
  अथ/AVK बृहत्स्फिक्कथागोष्ठीषु/NP सः/SN  ताम्रचूडः/NS मूषकत्रासार्थम्/NP व्याक्षिप्तमना/NV जर्जरवंशेन/NP भिक्षापात्रम्/NP ताडयन्/KNV तस्य/SN शून्यम्/NV  प्रतिवचनम्/NP  प्रयच्छति/KP ।/PUNC तन्मयः/NP न/AN किञ्चित्/A उदाहरति/KP ।/PUNC 
अथ/A असौ/SN अभ्यागतः/NP परम्/NV  कोपम्/NP उपागतः/KN तम्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ताम्रचूड/NS !/PUNC परिज्ञातः/KN त्वम्/SN सम्यक्/NV न/AN सृहृत्/NP ।/PUNC तेन/SN मया/SN सह/AUP साह्लादम्/KV न/AN जल्पसि/KP ।/PUNC तत्/A रात्रौ/NP अपि/A त्वत्/SN इयम्/SN मठम्/NP त्यक्त्वा/KKS अन्यत्र/A मठे/NP यास्यामि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
एहि/SN आगच्छ/KP ,/PUNC समाश्रयासनम्/NP इदम्/SN ,/PUNC कस्मात्/SN चिरात्/A दृश्यसे/KP ?/PUNC 
का/SN वार्ता/NP ,/PUNC हि/A अतिदुर्बलः/NP असि/KP ,/PUNC कुशलम्/NP ,/PUNC प्रीतः/KN अस्मि/KP ते/SN दर्शनात्/NP ।/PUNC 
एवम्/ASD ये/SN समुपागतान्/KN प्राणयिनः/NP प्रह्लादयन्ति/KP आदरात्/KV 
तेषाम्/SN युक्तम्/KN अशङ्कितेन/NV मनसा/NP हर्म्याणि/NP गन्तुम्/KKS सदा/A ॥/PUNC  66/PUNC ॥/PUNC 
गृही/NP यत्र/A आगतम्/KN दृष्ट्वा/KKS दिशः/NP वीक्षते/KP वा/A अपि/A अधः/A ।/PUNC 
तत्र/A ये/SN सदने/NP यान्ति/KP ते/SN श्रृङ्गरहिता/NV वृषाः/NP ॥/PUNC  67/PUNC ॥/PUNC 
न/AN अभ्युत्थानक्रिया/NP यत्र/A न/AN अलापा/NP मधुराक्षराः/NV ।/PUNC 
गुणदोषकथा/NP न/AN एव/INTF तत्र/A हर्म्ये/NP न/AN गम्यते/KP ॥/PUNC 68/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN एकमठप्राप्त्या/NP अपि/A त्वम्/SN  गर्वितः/KN त्यक्तसुहृत्स्नेहः/NP  न/AN एतत्/SN वेत्सि/KP यत्/A त्वया/SN मठाश्रयव्याजेन/NP नरकोपार्जनम्/NP कृतम्/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
नरकाय/NP मतिः/NP ते/SN चेत्/A पौरोहित्यम्/NP  समाचर/KP ।/PUNC 
वर्षम्/NP यावत्/A किम्/NP अन्येन/SN मठचिन्ताम्/NP  दिनत्रयम्/NP ॥/PUNC  69/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN मूर्ख/NP !/PUNC शोचितव्ये/KN अपि/A अर्थे/NP त्वम्/SN  गर्वितः/KN ।/PUNC तत्/A अहम्/SN  त्वत्/SN इयम्/SN  मठम्/NP  परित्यज्य/KKS यास्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
अथ/A तत्/SN श्रुत्वा/KKS भयत्रस्तमनाः/NV ताम्रचूडः/NS तम्/SN उवाच/KP -/PUNC  भो/ASMB भगवन्/NP !/PUNC मा/AN एवम्/A  वद/KP ।/PUNC न/AN त्वत्/SN समः/NP अन्यः/SN  मम/SN सुहृत्/NP कश्चित्/SN अस्ति/KP ;/PUNC  परम्/A  तत्/SN श्रूयताम्/KP  गोष्ठीशैथिल्यकारणम्/NP ।/PUNC 
एष/SN दुरात्मा/NV मूषकः/NP प्रोन्नतस्थाने/NP धृतम्/NV अपि/A भिक्षापात्रम्/NP उत्प्लुत्य/KKS आरोहति/KP ,/PUNC भिक्षाशेषम्/NP  च/APY तत्रस्थम्/NV  भक्षयति/KP ।/PUNC तदभावात्/NP एव/INTF मठे/NP मार्जनक्रिया/NP अपि/A न/AN भवति/KP ।/PUNC तत्/SN मूषकत्रासार्थम्/NP एतेन/SN वंशेन/NP भिक्षापात्रम्/NP मुहुः/A मुहुः/DV ताडयामि/KP ,/PUNC न/AN अन्यत्/SN कारणम्/NP इति/AUD ।/PUNC 
अपरम्/A एतत्/SN कुतूहलम्/NP  पश्य/KP अस्य/SNV दुरात्मनः/NP  यत्/SN मार्जारमर्कटादयः/NP अपि/A तिरस्कृता/KN अस्य/SN उत्पतनेन/NP ।/PUNC ”/PUNC  बृहत्स्फिक्/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC अथ/A ज्ञायते/KP तस्य/SN बिलम्/NP  कस्मिंश्चित्/AP प्रदेशे/NP ?/PUNC ”/PUNC  
ताम्रचूडः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भगवन्/NP !/PUNC न/AN वेद्मि/KP सम्यक्/A ।/PUNC ”/PUNC  
सः/  आह/KP -/PUNC  “/PUNC नूनम्/INTF  निधानस्य/NP उपरि/A तस्य/SN बिलम्/NP ।/PUNC निधानोष्मणा/NP निश्चितम्/KN  प्रकूर्दते/KP असौ/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
   ऊष्मा/NP अपि/A वित्तजः/NV  वृद्धिम्/NP  तेजः/NP  नयति/KP देहिनाम्/NP ।/PUNC 
   किम्/AP  पुनः/A तस्य/SN सम्भोगः/NP त्यागकर्मसमन्वितः/NV ॥/PUNC 70/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
न/AN अकस्मात्/A शाण्डिली/NP मातः/NP विक्रीणाति/KP तिलैः/NP तिलान्/NP ।/PUNC 
लुञ्चितान्/NV इतरैः/SN येन/AN हेतुः/NP अत्र/A भविष्यति/KP ”/PUNC  ॥/PUNC  71/PUNC ॥/PUNC 
ताम्रचूड/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC  सः/SN  आह/KP -/PUNC 
2/PUNC :/PUNC तिलचूर्णविक्रयकथा/NP
एकदा/A अहम्/SN  कस्मिंश्चित्/SN स्थाने/NP प्रावृट्काले/NP व्रतग्रहणनिमित्तम्/NP  कञ्चिद्/SN ब्राह्मणम्/NP  वासार्थम्/NP  प्रार्थितवान्/KN ।/PUNC ततः/A च/A तत्/SN वचनात्/NP तेन/SN अपि/A शुश्रूषितः/KN सुखेन/NP देवार्चनपरः/KV तिष्ठामि/KP ।/PUNC 
अथ/A अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP प्रत्यूषे/NP प्रबुद्धः/KN अहम्/SN  ब्राह्मणब्राह्मणीसंवादे/NP दत्तावधानः/KV श्रृणोमि/KP ।/PUNC तत्र/A ब्राह्मणः/NP  आह/KP —/PUNC “/PUNC ब्राह्मणि/NP !/PUNC प्रभाते/NP दक्षिणायनसंक्रान्तिः/NP अनन्तदानफलदा/NV भविष्यति/KP ।/PUNC तत्/A अहम्/SN  प्रतिग्रहार्थम्/NP  ग्रामान्तरम्/NP  यास्यामि/KP ।/PUNC 
त्वया/SN ब्राह्मणस्य/NP एकस्य/SN भगवतः/NV सूर्यस्य/NP उद्देशेन/NP किञ्चित्/A भोजनम्/NP  दातव्यम्/KN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC अथ/A तत्/SN श्रुत्वा/KKS ब्राह्मणी/NP परुषतरवचनैः/NP तम्/SN  भर्त्सयमाना/KNV प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC कुतः/AP ते/SN दारिद्र्य/NP उपहतस्य/KN भोजनप्राप्तिः/NP ?/PUNC 
तत्/SN किम्/AP  न/AN लज्जसे/KP एवम्/A ब्रुवाणः/KNV ?/PUNC अपि/A च/A न/AN मया/SN तव/SN हस्तलग्नया/NP क्वचित्/A अपि/A लब्धम्/KN  सुखम्/NP ,/PUNC न/AN मिष्ठान्नस्य/NP आस्वादनम्/NP ,/PUNC न/AN च/APY हस्तपादकण्ठादिभूषणम्/NP ।/PUNC ”/PUNC  
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS भयत्रस्तः/NV अपि/A विप्रः/NP  मन्दम्/KV  मन्दम्/KV/DV  प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC ब्राह्मणि/NP !/PUNC न/AN एतत्/SN युज्यते/KP वक्तुम्/KKS ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  ग्रासात्/NP अपि/A तदर्धम्/NP  च/APY कस्मात्/AP न/AN  दीयते/KP अर्थिषु/NP ।/PUNC 
  इच्छानुरूपः/NV  विभवः/NP कदा/A कस्य/SN भविष्यति/KP ?/PUNC ॥/PUNC  72/PUNC ॥/PUNC 
  ईश्वरा/NP भूरि/NV दानेन/NP यत्/SSN लभन्ते/KP फलम्/NP  किल/INTF ।/PUNC 
  दरिद्रः/NP तत्/SSN च/APY काकिण्या/NP प्राप्नुयात्/KP इति/AUD नः/SN श्रुतम्/KN ॥/PUNC  73/PUNC ॥/PUNC 
  दाता/NP लघुः/NV अपि/A सेव्यः/NP  भवति/KP न/AN कृपणः/NP  महान्/NV अपि/A समृद्धया/NP ।/PUNC 
  कूपः/NP अन्तःस्वादुजलः/NV प्रीत्यै/NP लोकस्य/NP न/AN समुद्रः/NP ॥/PUNC  74/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
अकृतत्यागमहिम्ना/NP मिथ्या/NP किम्/AP  राजराजशब्देन/NP ?/PUNC ।/PUNC 
75/PUNC ॥/PUNC 
अपि/A च/AVK -/PUNC 
सदा/A दानपरिक्षीणः/NV शस्त/KN एव/INTF करीश्वरः/NP ।/PUNC 
अदानः/NV पीनगात्रः/NV अपि/A निन्द्य/NP एव/INTF हि/A गर्दभः/NP ॥/PUNC  76/PUNC ॥/PUNC 
सुशीतः/NV अपि/A सुवृत्तः/NV अपि/A याति/KP अदानात्/NP अधः/A  घटः/NP ।/PUNC 
पुनः/A कुब्जा/NV अपि/A काणा/NV अपि/A दानात्/NP उपरि/A कर्करी/NP ॥/PUNC  77/PUNC ॥/PUNC 
यच्छन्/KNV जलम्/NP अपि/A जलदः/NP  वल्लभताम्/NP एति/KP सकललोकस्य/NP ।/PUNC 
नित्यम्/A  प्रसारितकरः/NV  मित्रः/NP अपि/A न/AN वीक्षितुम्/KKS  शक्यः/KN ॥/PUNC  78/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  ज्ञात्वा/KKS दारिद्र्याभिभूतैः/NP अपि/A स्वल्पात्/NP स्वल्पतरम्/NP  काले/NP पात्रे/NP च/APY देयम्/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
सत्पात्रे/NP महती/NV श्रद्धा/NP देशे/NP काले/NP यथोचिते/KN ।/PUNC 
यत्/SN दीयते/KP विवेकज्ञैः/NP तत्/SN आनन्त्याय/NP कल्पते/KP ॥/PUNC  79/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
 अतितृष्णा/NP न/AN कर्तव्या/KN तृष्णाम्/NP  न/AN एव/INTF परित्यजेत्/KP ।/PUNC 
 अतितृष्णाभिभूतस्य/NP शिखा/NP भवति/KP मस्तके/NP ”/PUNC  ॥/PUNC 80/PUNC ॥/PUNC 
 ब्राह्मणि/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ”/PUNC  ?/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC 

            3/PUNC :/PUNC शबरशूकरकथा/NP

अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SN वनोद्देशे/NP कश्चित्/SN पुलिन्दः/NP ।/PUNC सः/SN  च/A पापर्द्धिं/NP कर्तुम्/KKS  वनम्/NP  प्रति/AUP प्रस्थितः/KN ।/PUNC अथ/A तेन/SN प्रसर्पता/KNV महान्/ अञ्जनपर्वतशिखराकारः/NV क्रोडः/NP समासादितः/KN ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS कर्णान्ताकृष्टनिशिताकृष्टसायकेन/NP समाहतः/KN ।/PUNC 
अथ/A शूकरेण/NP अपि/A कोपाविष्टेन/NV चेतसा/NP बालेन्दुद्यतिना/NV दंष्ट्राग्रेण/NP पाटितोदरः/NV पुलिन्दः/NP  गतासुः/NV भूतले/NP अपतत्/KP ।/PUNC 
अथ/A लुब्धकम्/NP  व्यापाद्य/KKS शूकरः/NP अपि/A शरप्रहारवेदनया/NP पञ्चत्वम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
एतस्मिन्/SN अन्तरे/A कश्चित्/SN आसन्नमृत्युः/NV शृगालः/NP  निराहारतया/NP पीडित/KN परिभ्रमन्/KNV तम्/SN  प्रदेशम्/NP आजगाम/KP ।/PUNC 
यावत्/A वराहपुलिन्दौ/NP द्वौ/SMKY अपि/A पश्यति/KP तावत्/A प्रहृष्टः/KN व्यचिन्तयत्/KP –/PUNC भोः/ASMB !/PUNC सानुकूलः/NP मे/SN विधिः,/PUNC  तेन/SN एव/INTF एतत्/SN अचिन्तितम्/A भोजनम्.NP उपस्थितम्/KN ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
  अकृते/NV अपि/A उद्यमे/NP पुंसाम्/NP अन्यजन्मकृतम्/NV  फलम्/NP ।/PUNC 
  शुभाशुभम्/NP  समभ्येति/KP विधिना/NP संनियोजितम्/KN ॥/PUNC  81/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
यस्मिन्/SN देशे/NP च/APY काले/NP च/APY वयसा/NP यादृशेन/A च/APY ।/PUNC 
कृतम्/KN  शुभाशुभम्/NP  कर्म/NP तत्/SN तथा/A तेन/SN भुज्यते/KP ॥/PUNC  82/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN अहम्/SN तथा/ASD भक्षयामि/KP यथा/ASD बहूनि/NV अहानि/NP मे/SN प्राणयात्रा/NP भवति/KP ।/PUNC तत्/SN तावत्/A एनम्/SN  स्नायुपाशम्/NP  धनुष्कोटिगतम्/NV  भक्षयामि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 शनैः/KV शनैः/KV/DV च/A भोक्तव्यम्/KN  स्वयम्/SN  वित्तम्/NP उपार्जितम्/KN ।/PUNC 
 रसायनम्/NP इव/ASD प्राज्ञैः/NP हेलया/NP न/AN कदाचन/A ॥/PUNC  83/PUNC ॥/PUNC 
इति/AUD एवम्/A  मनसा/NP निश्चित्य/KKS चापचटिताम्/NV  कोटिम्/NP  मुखमध्ये/NP प्रक्षिप्य/KKS स्नायुम्/NP  भक्षयितुम्/KKS  प्रवृत्तः/KN ।/PUNC ततः/A च/A त्रुटिते/KN पाशे/NP तालुदेशम्/NP  विदार्य/KKS चापकोटिः/NP मस्तकमध्येन/NP शिखावत्/NP निष्क्रान्ता/KN ।/PUNC सः/SN अपि/A तत्/SN वेदनया/NP तत्/SN क्षणात्/NP मृतः/KN ।/PUNC अतः/A अहम्/SN ब्रवीमि/KP -/PUNC  “/PUNC अतितृष्णा/NP न/AN कर्तव्या/KN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC -/PUNC 
            ब्राह्मण्यातिलदिक्रयकथा/NP 
   सः/SN  पुनः/A अपि/A आह/KP-/PUNC “/PUNC ब्राह्मणि/NP !/PUNC न/AN श्रुतम्/KN  भवत्या/SN -/PUNC 
   आयुः/NP कर्म/NP वित्तम्/NP  च/APY विद्या/NP निधनम्/NP एव/INTF च/APY ।/PUNC 
   पञ्च/SMKY एतानि/SN हि/A सृज्यन्ते/KP गर्भस्थस्य/NV एव/INTF  देहिनः/NP ॥/PUNC 84/PUNC ॥/PUNC 
अथ/AVK एवम्/A  सा/SN तेन/SN प्रबोधिता/KN ब्राह्मणि/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC यदि/A एवम्/A  तत्/SN अस्ति/KP मे/SN गृहे/NP स्तोकः/NV तिलराशिः/NP ।/PUNC ततः/A तिलात्/NP लुञ्चित्वा/KKS तिलचूर्णेन/NP ब्राह्मणम्/NP  भोजयिष्यामि/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
 ततः/AVK तत्/SN वचनम्/NP  श्रुत्वा/KKS ब्राह्मणः/NP  ग्रामम्/NP  गतः/KN ।/PUNC सा/SN अपि/A तान्/SN तिलान्/NP उष्णोदकेन/NP संमर्द्य/KKS लुञ्चित्वा/KKS सूर्यातपे/NP दत्तवती/KN ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/A तस्या/SN गृहकर्मव्यग्रायाः/NP तिलानाम्/NP  मध्ये/NP कश्चित्/SN सारमेयः/NP  मूत्रोत्सर्गम्/NP  चकार/KP ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS सा/SN चिन्तितवती/KN -/PUNC  “/PUNC अहो/ABS नैपुण्यम्/NP पश्य/KP पराङ्मुखीभूतस्य/NV विधेः/NP ,/PUNC यत्/SN एते/SN तिला/NP अभोज्याः/NV कृताः/KN ।/PUNC तत्/SN अहम्/SN एतान्/SN समादाय/KKS कस्यचित्/SN गृहम्/NP  गत्वा/KKS लुञ्चितैः/KN अलुञ्चितान्/KN आनयामि/KP ।/PUNC सर्वः/SN अपि/A जनः/SN अनेन/SN विधिना/NP प्रदास्यति/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
अथ/A यस्मिन्/SN गृहे/NP अहम्/SN  भिक्षार्थम्/KKS  प्रविष्टः/KN तत्र/A गृहे/NP सा/SN अपि/A तिलान्/NP आदाय/KKS प्रविष्टा/KN विक्रयम्/NP  कर्तुम्/KKS ।/PUNC आह/KP च/A -/PUNC  “/PUNC गृह्णातु/KP कश्चित्/SN लुञ्चितैः/KN लुञ्चितान्/KN तिलान्/NP ।/PUNC ”/PUNC  
 अथ/A तत्/SN गृहगृहिणी/NP प्रहृष्टा/KN यावत्/A अलुञ्चितैः/KN लुञ्चितान्/KN गृह्णाति/KP ,/PUNC तावत्/A अस्याः/SN पुत्रेण/NP कामन्दकीयशास्त्रम्/NP  दृष्ट्वा/KKS व्याहृतम्/KN -/PUNC  “/PUNC मातः/NP !/PUNC  अग्राह्याः/KN खलु/A इमे/SN तिलाः/NP ।/PUNC न/AN अस्याः/SN  अलुञ्चितैः/KN लुञ्चिताः/KN  ग्राह्याः/KN ।/PUNC कारणम्/NP  किञ्चित्/A  भविष्यति/KP ;/PUNC  येन/SN एष/SN अलुञ्चितैः/KN लुञ्चितान्/KN प्रयच्छति/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS तया/SN परित्यक्ताः/KN ते/SN तिलाः/NP ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP —/PUNC ”/PUNC न/AN अकस्मात्/A शाण्डिली/NP मातः/NP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
  एतत्/SN उक्त्वा/KKS सः/SN  भूयः/A अपि/A प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC अथ/A ज्ञायते/KP तस्य/SN क्रमणमार्गः/NP ?/PUNC ”/PUNC  
ताम्रचूड/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC भगवन्/NP !/PUNC ज्ञायते/KP ,/PUNC यत्/SN एकाकी/NP न/AN समागच्छति/NP ।/PUNC किन्तु/A असंख्ययूथपरिवृतः/NP पश्यतः/KNV  मे/SN परिभ्रमन्/KNV इतः/A ततः/A सर्वजनेन/NP सह/AUP आगच्छति/KP ,/PUNC याति/KP च/APY ।/PUNC ”/PUNC  
 अभ्यागतः/KN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC अस्ति/KP किञ्चित्/A खनित्रकम्/NP ?/PUNC ”/PUNC  
सः/SN  आह/KP -/PUNC  बाढम्/A ;/PUNC  अस्ति/KP एषा/SN सर्वलोहमयी/NV सुहस्तिका/NP ।/PUNC ”/PUNC  
  अभ्यागतः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC तर्हि/A प्रत्यूषे/NP त्वया/SN मया/SN सह/AUP स्थातव्यम्/KN ,/PUNC येन/SN द्वौ/SMKY अपि/A जनचरणामलिनायाम्/NV  भूमौ/NP तत्पदानुसारेण/KV गच्छावः/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  मया/SN अपि/A तत्/SN वचनम्/NP आकर्ण्य/KKS चिन्तितम्/KN -/PUNC  अहो/ABS ,/PUNC विनष्टः/KN अस्मि/KP ;/PUNC  यतः/A अस्य/SN साभिप्रायवचांसि/NP श्रूयन्ते/KP ।/PUNC नूनम्/INTF  यथा/A निधानम्/NP  ज्ञातम्/KN ,/PUNC तथा/A दुर्गम्/NP अपि/A अस्माकम्/SN  ज्ञास्यति/KP ।/PUNC एतत्/SN अस्य/SN अभिप्रायात्/NP एव/INTF ज्ञायते/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
सकृत्/KV अपि/A दृष्ट्वा/KKS पुरुषम्/NP  विबुधा/NP जानन्ति/KP सारताम्/NP  तस्य/SN ।/PUNC 
हस्ततुलया/NP अपि/A निपुणाः/NP पलप्रमाणम्/NP  विजानन्ति/KP ॥/PUNC  85/PUNC ॥/PUNC 
वाञ्छा/NP एव/INTF सूचयति/KP पूर्वतरम्/NP  भविष्यत्/NP ,/PUNC 
पुंसाम्/NP  यत्/SN अन्यतनुजम्/NP  तु/A अशुभम्/SN  शुभम्/NP  वा/A ।/PUNC 
विज्ञायते/KP शिशुः/NP अजातकलापचिह्नः/NV ,/PUNC 
प्रत्युद्गतैः/NP अपसरन्/KNV सरसः/NV कलापी/NP ।/PUNC 86/PUNC ॥/PUNC 
ततः/A अहम्/SN  भयत्रस्तमनाः/NV सपरिवारः/NV  दुर्गमार्गम्/NP  परित्यज्य/KKS अन्यमार्गेण/NP गन्तुम्/KKS  प्रवृत्तः/KN ।/PUNC ततः/A सपरिजनम्/NP  यावत्/A अग्रतः/A  गच्छामि/KP तावत्/A सम्मुखीनः/NV  बृहत्कायः/NV  मार्जारः/NP समायाति/KP ।/PUNC सः/SN  मूषकवृन्दम्/NP अवलोक्य/KKS तत्/SN मध्ये/NP सहसा/KV उत्पपात/KP ।/PUNC 
 अथ/A ते/SNV मूषका/NP माम्/SN  कुमार्गगामिनम्/NP अवलोक्य/KKS गर्हयन्तः/KNV ,/PUNC हतशेषारुधिरप्लावितवसुन्धराः/NV तम्/SN एव/INTF दुर्गं/NP प्रविष्टाः/KN ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
छित्त्वा/KKS पाशम्/NP अपास्य/ कूटरचनाम्/NP भङ्क्त्वा/KKS बलात्/KV वागुराम्/NP 
   पर्यन्ताग्निशिखाकलापजटिलात्/NP निर्गत्य/KKS दूरम्/A  वनात्/NP ।/PUNC 
  व्याधानाम्/NP  शरगोचरात्/NP अपि/A जवेन/NP उत्पत्य/KKS धावन्/KNV मृगः/NP 
   कूपान्तः/NP पतितः/KN करोतु/KP विधुरे/NV किम्/AP  वा/A विधौ/NP पौरुषम्/NP ?/PUNC ॥/PUNC  87/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A अहम्/SN एकः/SN अन्यत्र/A गतः/KN ;/PUNC  शेषा/NP मूढतया/NP तत्र/A एव/INTF दुर्गे/NP प्रविष्टाः/KN ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/A सः/SN  दुष्टपरिव्राजकः/NP  रुधिरबिन्दुचर्चिताम्/NV  भूमिम्/NP अवलोक्य/KN तेन्/SN एव/INTF मार्गेण/NP दुर्गम्/NP उपगतः/KN ।/PUNC ततः/A च/APY सुहस्तिकया/NP खनितुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC 
 अथA तेन/SN खनता/KNV प्राप्तम्/KN  तत्/SN निधानम्/NP  यस्य/SN उपरि/A सदैव/INTF अहम्/SN  कृतवसतिः/NV ;/PUNC यस्य/SN उष्मणा/NP महादुर्गम्/NP अपि/A गच्छामि/KP ।/PUNC ततः/A  हृष्टमनाः/NV ताम्रचूडम्/NS इदम्/SN ऊचे/KP अभ्यागतः/NP -/PUNC  “/PUNC भो/ASMB भगवन्/NP !/PUNC इदानीम्/A  स्वपिहि/KP निःशङ्कः/KV ।/PUNC अस्य/SN उष्मणा/NP मूषकः/NP ते/SN जागरणम्/NP  सम्पादयति/KP ।/PUNC ”/PUNC  एवम्/SN उक्त्वा/KKS तत्/SN निधानम्/NP आदाय/KKS मठाभिमुखम्/KV  प्रस्थितौ/KN द्वौ/SN अपि/A ।/PUNC 
 अहम्/SN अपि/A यावत्/A निधानरहितम्/NV  स्थानम्/NP आगच्छामि/KP ,/PUNC तावत्/A अरमणीयम्/NV उद्वेगकारकम्/NV  तत्/SN स्थानम्/NP  वीक्षितुम्/KKS अपि/A न/AN शक्नोमि/KP ।/PUNC अचिन्त्यम्/NP  च/AVK -/PUNC  “/PUNC किम्/AP  करोमि/KP ,/PUNC क्व/AP गच्छामि/KP ,/PUNC कथम्/AP  मे/SN स्यात्/KP मनसः/NP प्रशान्तिः/NP ?/PUNC ”/PUNC  
  एवम्/A  चिन्तयतः/KNV  मे/SN महाकष्टेन/KV सः/SN  दिवसः/NP  व्यतिक्रान्तः/KN ।/PUNC अथ/A अस्तमिते/NV अर्के/NP सोद्वेगः/NV  निरुत्साहः/NV तस्मिन्/SN मठे/NP सपरिवारः/NV प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
  अथ/AVK अस्मत्/SN परिग्रहशब्दम्/NP आकर्ण्य/KKS ताम्रचूडः/NS अपि/A भूयः/A  भिक्षापात्रम्/NP  जर्जरवंशेन/NP ताडयितुम्/KKS  प्रवृत्तः/KN ।/PUNC 
   अथ/A असौ/SN अभ्यागतः/NP प्राह/KP-/PUNC “/PUNC सखे/NP !/PUNC किम्/AP अद्य/A अपि/A निःशंकः/KV  न/AN निद्राम्/NP  गच्छसि/KP ?/PUNC ”/PUNC  
सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भगवन्/NP !/PUNC भूयः/A अपि/A समायातः/KN सपरिवारः/NV सः/SN  दुष्टात्मा/NV मूषकः/NP !/PUNC तत्भयात्/NP जर्जरवंशेन/NP भिक्षापात्रम्/NP  ताडयामि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
ततः/A  विहस्य/KKS अभ्यागतः/NP प्राह/KP –”/PUNC सखे/NP !/PUNC मा/AN भैषीः/KP ।/PUNC 
वित्तेन/NP सह/AUP गतः/KN अस्य/SN कूर्दनोत्साहः/NP ।/PUNC 
सर्वेषाम्/SN अपि/A जन्तूनाम्/NP इयम्/SN एव/INTF स्थितिः/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK—/PUNC 
यत्/SN उत्साही/NP सदा/A मर्त्यः/NP पराभवति/KP यत्/SN जनान्/NP ।/PUNC 
   यत्/SN उद्धतम्/NV  वदेत्/KP वाक्यम्/NP  तत्/SN सर्वम्/SN  वित्तजम्/NV  बलम्/NP ॥/PUNC 88/PUNC ॥/PUNC 
  अथ/A अहम्/SN  तत्/SN श्रुत्वा/KKS कोपाविष्टः/KN  भिक्षापात्रम्/NP उद्दिश्य/KKS विशेषात्/NV उत्कूर्दितः/KN अप्राप्त/NV एव/INTF भूमौ/NP निपतितः/KN ।/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS असौ/SN मे/SN शत्रुः/NP विहस्य/KKS ताम्रचूडम्/NS उवाच/KP —/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB !/PUNC पश्य/KP कौतूहलम्/NP ।/PUNC 
  उक्तम्/KN च/AVK-/PUNC 
अर्थेन/SN बलवान्/NP सर्वः/SN अपि/A अर्थयुक्तः/NP च/APY पण्डितः/NP ।/PUNC 
  पश्य/KP एनम्/SNV  मूषकम्/NP  व्यर्थम्/NV  स्वजातेः/NP समताम्/NP  गतम्/KN ॥/PUNC 89/PUNC ॥/PUNC 
 तत्/SN स्वपिहि/KP त्वम्/SN गतशङ्कः/NV ।/PUNC यत्/SN अस्य/SN उत्पतनकारणम्/NP  तत्/SN आवयोः/SN हस्तगतम्/KN  जातम्/KN ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP-/PUNC 
दंष्ट्राविरहितः/NV सर्पः/NP  मदहीनः/NV यथा/A गजः.NP।/PUNC 
   तथा/A अर्थेन/NP विहीनः/NV अत्र/A पुरुषः/NP  नामधारकः/NV ॥/PUNC “/PUNC 90/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS अहम्/SN  मनसा/NP विचिन्तितवान्/KN –/PUNC अहो/ABS ,/PUNC सत्यम्/NP आह/KP मम/SN एष/SN शत्रुः/NP ।/PUNC यतो/A मम/SN अङ्गुलिमात्रम्/NV अपि/A कूर्दनशक्तिः/NP न/AN अस्ति/KP ,/PUNC तत्/SN धिक्/ABS अर्थहीनस्य/NV पुरुषस्य/NP जीवितम्/NP !/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 अर्थेन/NP च/APY विहीनस्य/NV पुरुषस्य/NP अल्पमेधसः/NV ।/PUNC 
 उच्छिद्यन्ते/KP क्रियाः/NP सर्वा/SN ग्रीष्मे/NP कुसरितः/KN  यथा/ASD ।/PUNC 91/PUNC ॥/PUNC 
 यथा/A काकयवाः/NP प्रोक्ता/KN यथा/A अरण्यभवाः/NV तिलाः/NP ।/PUNC 
 नाममात्रा/ न/AN सिद्धयै/NP स्युः/KP धनहीनाः/NV तथा/A नराः/NP ॥/PUNC 92/PUNC ॥/PUNC 
  सन्तः/ अपि/A नहि/AN राजन्ते/KP दरिद्रस्य/NP इतरे/A गुणाः/NP ।/PUNC 
 आदित्य/NP इव/ASD भूतानाम्/NP  श्रीः/NP गुणानाम्/NP  प्रकाशिनी/NP ॥/PUNC  93/PUNC ॥/PUNC 
 न/AN तथा/A बाध्यते/KP लोके/NP प्रकृत्या/NP निर्धनः/NV  जनः/NP ।/PUNC 
  यथा/A द्रव्याणि/NP सम्प्राप्य/KKS तैः/SN विहीनः/NV सुखे/NP स्थितः/KN ॥/PUNC  94/PUNC ॥/PUNC 
 शुष्कस्य/NV कीटखातस्य/NV वह्निदग्घस्य/NV सर्वतः/A ।/PUNC 
  तरोः/NP अपि/A उषरस्थस्य/NV वरम्/NV  जन्म/NP न/AN च/APY अर्थिनः/NP ॥/PUNC  95/PUNC ॥/PUNC 
  शङ्कनीया/NV हि/A सर्वत्र/A निष्प्रतापा/NV दरिद्रता/NP ।/PUNC 
  उपकर्तुम्/KKS अपि/A प्राप्तं/KN निःस्वम्/NP  सन्त्यज्य/KKS गच्छति/KP ॥/PUNC  96/PUNC ॥/PUNC 
उन्नम्य/KKS उन्नम्य/KKS/DV तत्र/A एव/INTF निर्धनानाम्/NP  मनोरथाः/NP ।/PUNC 
हृदयेषु/NP एव/INTF लीयन्ते/KP विधवास्त्रीस्तनौ/NP इव/ASD ॥/PUNC  97/PUNC ॥/PUNC 
व्यक्तेः/NP अपि/A वासरे/NP नित्यम्/KV  दौर्गत्यतमसा/NP आवृतः/KN ।/PUNC 
अग्रतः/A अपि/A स्थितो/KN यत्नात्/NP न/AN केनापि/A इह/A दृश्यते/KP ॥/PUNC  98/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  विलप्य/KKS अहम्/SN  भग्नोत्साहः/NV तन्निधानम्/NP  गण्डोपधानीकृतम्/NV  दृष्ट्वा/KKS स्वम्/SN  दुर्गम्/NP  प्रभाते/NP गतः/KN ।/PUNC 
ततः/A च/AVK मत्भृत्याः/NP प्रभाते/NP गच्छन्तो/KNV मिथः/KV  जल्पन्ति/KP -/PUNC 
अहो/ABS ,/PUNC असमर्थः/NP अपि/A अयम्/SN उदरपूरणे/NP अस्माकम्/SN ।/PUNC 
केवलम्/A अस्य/SN पृष्ठलग्नानाम्/NP  बिडालादिभ्यो/NP विपत्तयः/NP ।/PUNC 
तत्/A किम्/AP अनेन/SN आराधितेन/KN ?/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
यत्/SN सकाशात्/A न/AN लाभः/NP स्यात्/KP केवलाः/A स्युः/KP विपत्तयः/NP ।/PUNC 
सः/SN  स्वामी/NP दूरतः/A त्याज्यः/KN  विशेषात्/KV अनुजीविभिः/NP ॥/PUNC “/PUNC  99/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  तेषाम्/SN  वचांसि/NP मार्गे/NP श्रृण्वन्/KNV स्वदुर्गम्/NP  प्रविष्टः/KN अहम्/SN ।/PUNC यावत्/A निर्धनत्वात्/NP परिजनमध्यात्/NP कश्चित्/SN अपि/A मम/SN न/AN सम्मुखे/KV अभ्येति/KP ,/PUNC तावत्/A मया/SN चिन्तितम्/KN -/PUNC  अहो/ABS ,/PUNC धिक्/ABS इयम्/SN  दरिद्रता/NP ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
मृतः/NV  दरिद्रः/NV पुरुषः/NP  मृतम्/NV  मैथुनम्/NP अप्रजम्/NV ।/PUNC 
 मृतम्/NV अश्रोत्रियम्/NV  श्राद्धम्/NP  मृतः.NV  यज्ञः/NP तु/A अदक्षिणः/NV ॥/PUNC “/PUNC 100/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  मे/SN चिन्तयतः/KNV ते/SN भृत्या/NP मम/SN शत्रूणाम्/NP  सेवका/NP जाताः/KN ।/PUNC ते/SN च/APY माम्/SN एकाकिनम्/NP  दृष्ट्वा/KKS बिडम्बनाम्/NP कुर्वन्ति/KP ।/PUNC 
अथ/AVK मया/SN एकाकिना/NP योगनिद्राम्/NP  गतेन/KN भूयो/A विचिन्तितम्/KN -/PUNC 
“/PUNC यत्/A तस्य/SN कुतपस्विनः/NP समाश्रयम्/NP  गत्वा/KKS तत्/SN गण्डोपधानवर्त्तिकृताम्/NV  वित्तपेटाम्/NP  शनैः/KV शनैः/KV/DV विदार्य/KKS तस्य/SN निद्रावशंगतस्य/NP स्वदुर्गे/NP तत्/SN वित्तम्/NP आनयामि/KP ,/PUNC येन/SN भूयः/A अपि/A मे/SN वित्तप्रभावेण/NP आधिपत्त्यम्/NP  पूर्ववत्/NV भविष्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
व्यथयन्ति/KP परम्/A  च/APY इतः/A मनोरथशतैः/NP जनाः/NP ।/PUNC 
न/AN अनुष्ठानैः/NP धनैः/NP हीनाः/NV कुलजा/NV विधवा/NP इव/ASD ॥/PUNC  101/PUNC ॥/PUNC 
दौर्गत्यम्/NP देहिनाम्/NP दुःखम्/NP अपमानकरम्/NP वरम्/NP ।/PUNC 
येन/SN स्वैः/SN अपि/A मन्यन्ते/KP जीवन्तः/KNV अपि/A मृता/KN इव/ASD ॥/PUNC  102/PUNC ॥/PUNC 
दैन्यस्य/NP पात्रताम्/NP एति/KP पराभूतेः/NP परम्/NV  पदम्/NP ।/PUNC 
विपदाम्/NP आश्रयः/NP शश्वद्/INTF दौर्गत्यकलुषीकृतः/KN ॥/PUNC  103/PUNC ॥/PUNC 
लज्जन्ते/KP बान्धवाः/NP तेन/SN संबन्धम्/NP  गोपयन्ति/KP च/APY ।/PUNC 
मित्राणि/NP अमित्रताम्/NP यान्ति/KP यस्य/SN न/AN स्युः/KP कपर्दकाः/NP ॥/PUNC  104/PUNC ॥/PUNC 
मूर्त्तम्/KNV  लाघवम्/NP एव/INTF एतत्/SN अपायानाम्//NP इदम्/SN  गृहम्/NP ।/PUNC 
पर्यायः/NP  मरणस्य/NP अयम्/SN  निर्धनत्वं/NP शरीरिणाम्/NP ॥/PUNC  105/PUNC ॥/PUNC 
अजाधूलिः/NP इव/ASD त्रस्तैः/KN मार्जनीरेणुवत्/KV जनैः/NP ।/PUNC 
दीपखट्वा/NP उच्छाया/NP इव/ASD त्यज्यते/KP निर्धनः/NV  जनः/NP ॥/PUNC  106/PUNC ॥/PUNC 
शौचावशिष्टयाः/NV अपि/A अस्ति/KP किञ्चित्/A कार्यम्/KN  क्वचित्/A मृदा/NP ।/PUNC 
निर्धनेन/NV जनेन/NP एव/INTF न/AN तु/A किञ्चित्/A प्रयोजनम्/NP ॥/PUNC  107/PUNC ॥/PUNC 
अधनः/NP  दातुकामः/NV अपि/A सम्प्राप्तः/KN धनिनाम्/NP  गृहम्/NP ।/PUNC 
मन्यते/KP याचकः/NP अयम्/SN धिक्/ABS दारिद्रयम्/NP  खलु/INTF देहिनाम्/NP ॥/PUNC  108/PUNC ॥/PUNC 
अतः/A वित्तापहारम्/NP  विदधतः/KNV यदि/A मे/SN मृत्युः/NP स्यात्/KP तथापि/A शोभनम्/NP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
स्ववित्तहरणम्/NP  दृष्ट्वा/KKS यो/SN हि/A रक्षति/KP असून्/NP नरः/NP ।/PUNC 
पितरः/NP अपि/A न/AN गृह्णन्ति/KP तत्/SN दत्तम्/KN  सलिलाञ्जलिम्/NP ॥/PUNC  109/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/APY -/PUNC  
   गवार्थे/NP ब्राह्मणार्थे/NP च/APY स्त्रीवित्तहरणे/NP तथा/APY ।/PUNC 
   प्राणान्/NP त्यजति/KP यः/SN  युद्धे/NP तस्य/SN लोकाः/NP सनातनाः/NV ॥/PUNC  110/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  निश्चित्य/KKS रात्रौ/NP तत्र/A गत्वा/KKS निद्रावशम्/NP उपागतस्य/KN पेटायाम्/NP  मया/SN यावत्/A मया/SN छिद्रम्/NP  कृतम्/KN  तावत्/A प्रबुद्धः/KN  दुष्टतापसः/NP ।/PUNC 
ततः/A च/AVK जर्जरवंशप्रहारेण/NP शिरसि/NP ताडितः/KN कथञ्चित्/A आयुषः/NP सावशेषतया/KV निर्गतः/KN अहम्/SN  न/AN मृतः/KN च/APY ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
 प्राप्तव्यम्/KNV अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ,/PUNC देवः/NP अपि/A तम्/SN  लङ्घयितुम्/KKS  न/AN शक्तः/KN ।/PUNC 
 तस्मात्/SN न/AN शोचामि/KP न/AN विस्मयः/NP  मे/SN ,/PUNC यत्/SN अस्मदीयम्/NP  न/AN हि/A तत्/SN परेषाम्/NP ॥/PUNC  111/PUNC ॥/PUNC 
काककूर्मौ/NP पृच्छतः/KP -/PUNC  “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ”/PUNC  ?/PUNC हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC  
4/PUNC :/PUNC वणिक्पुत्रकथा/NP 
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SN नगरे/NP सागरदत्तः/NS  नाम/A वणिक्/NP ।/PUNC तत्सूनुना/NP रूपकशतेन/SN विक्रीयमाणः/KNV पुस्तकम्/NP  गृहीतः/KN ।/PUNC तस्मिन्/SN च/APY लिखितम्/KN अस्ति/KP -/PUNC  
प्राप्तव्यम्/KNV अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ,/PUNC देवः/NP अपि/A तम्/SN  लङ्घयितुम्/KKS  न/AN शक्तः/KN ।/PUNC 
तस्मात्/SN न/AN शोचामि/KP न/AN विस्मयः/NP  मे/SN ,/PUNC यत्/SN अस्मदीयम्/NP  न/AN हि/A तत्/SN तत्/SN परेषाम्/SN ॥/PUNC 112/PUNC ॥/PUNC 
तद्/SN दृष्ट्वा/KKS सागरदत्तेन/NS तनुजः/NP पृष्टः/KN -/PUNC  पुत्र/NP !/PUNC कियता/AP मूल्येन/NP एष/SN ग्रन्थः/NP  गृहीतः/KN ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC रूपकशत्तेन/NP ?/PUNC ।/PUNC ”/PUNC  
तत्/SN श्रुत्वा/KKS सागरदत्तः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC धिक्/ABS मूर्ख/NP !/PUNC त्वम्/SN  लिखतैकश्लोकम्/NP  रूपकशतेन/SN यत्/SN गृह्णासि/KP ,/PUNC एतया/SN बुद्धया/NP कथम्/AP  द्रव्योपार्जनम्/NP  करिष्यसि/KP ?/PUNC तत्/SN अद्यप्रभृति/A त्वया/SN मे/SN गृहे/NP न/AN प्रवेष्टव्यम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  एवं/A निर्भर्त्स्य/KKS गृहात्/NP निःसारितः/KN ।/PUNC 
 सः/SN  च/APY तेन/SN निवदेन/NP विप्रकृष्टम्/KN  देशान्तरम्/NP  गत्वा/KKS किम्/AP अपि/A नगरम्/NP आसाद्य/KKS अवस्थितः/KN ।/PUNC 
अथ/A कतिपयदिवसैः/NP तन्नगरनिवासिना/NP केनचित्/A असौ/SN पृष्टः/KN -/PUNC  “/PUNC कुतः/AP  भवान्/SN आगतः/KN ?/PUNC किं/AP नामधेयः/NP  वा/A ?/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  असौ/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC प्राप्तव्यम्/KN अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ।/PUNC ”/PUNC 
अथ/A अन्येन/SN अपि/A पृष्टेन/KN अनेन/SN तथा/A एव/INTF उत्तरम्/NP  दत्तम्/KN ।/PUNC एवम्/A  यः/SN कश्चित्/SN पृच्छति/KP तस्य/SN इदम्/SN एव/INTF उत्तरम्/NP ददाति/KP ।/PUNC एवम्/SN च/A तस्य/SN नगरस्य/NP मध्ये/NP “/PUNC प्राप्तव्यम्/KN अर्थम्/NP “/PUNC  इति/AUD प्रसिद्धम्/NV  नाम/NP जातम्/KN ।/PUNC अथ/A राजकन्या/NP चन्द्रवती/NS नाम/A अभिनवरूपयौवनसम्पन्ना/NV सखीद्वितीया/NP एकस्मिन्/SN महोत्सवदिवसे/NP नगरम्/NP  निरीक्षमाणा/KNV अस्ति/KP ।/PUNC तत्र/A एव/INTF च/APY कश्चित्/SN राजपुत्रः/NP अतीवरूपसम्पन्नः/NV  मनोरमः/NV च/APY कथम्/AP अपि/A तस्या/SN दृष्टिगोचरम्/KV  गतः/KN ।/PUNC तद्दर्शनसमकालम्/NP एव/INTF कुसुमबाणहतया/NP तथा/A निजसख्यभिहिता/KN -/PUNC  “/PUNC सखि/NP !/PUNC यथा/A किल/INTF अनेन/SN समागमः/NP भवति/KP ,/PUNC तथा/A अद्य/A त्वया/SN यतितव्यम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  
  एवम्/A  च/AVK श्रुत्वा/KKS सा/SN सखी/NP तत्/SN सकाशम्/KV  गत्वा/KKS शीघ्रम्/KV अब्रवीत्/KP -/PUNC यत्/SN —/PUNC ”/PUNC अहम्/SN  चन्द्रवत्या/NS तव/SN अन्तिकम्/A  प्रेषिता/KN भणितम्/KN च/APY त्वाम्/SN  प्रति/AUP तया/SN यत्/SN  मम/SN त्वत्/SN दर्शनात्/NP मनोभवेन/NP पश्चिमावस्था/NP कृता/KN ।/PUNC तत्/SN अपि/A शीघ्रम्/KV एव/INTF मत्/SN अन्तिके/NP न/AN समेष्यसि/KP ,/PUNC तदा/A मे/SN मरणम्/NP शरणम्/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC  तत्/SN श्रुत्वा/KKS तेन/SN अभिहितम्/KN -/PUNC  “/PUNC रात्रौ/NP सौधावलम्बितया/NV दृढवरत्रया/NP त्वया/SN तत्र/A आरोढव्यम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC यदि/A एवम्/A  निश्चयः/NP  भवत्याः/SN तत्/A अहम्/SN एवम्/A  करिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  इति/AUD निश्चित्य/KKS सखी/NP चन्द्रवतीसकाशम्/NP  गता/KN ।/PUNC 
 अथ/A आगतायाम्/KN  रजन्याम्/NP  सः/SN  राजपुत्रः/NP स्वचेतसा/NP व्यचिन्तयत्/KN -/PUNC  अहो/ABS ,/PUNC महत्/NV अकृत्यम्/NP एतत्/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  गुरोः/NP सुताम्/NP  मित्रभार्याम्/NP स्वामिसेवकगेहिनीम्/NP ।/PUNC 
  यः/SN  गच्छति/KP पुमान्/NP लोके/NP तम्/SN आहुः/KP ब्रह्मघातिनम्/NP ॥/PUNC  113/PUNC ॥/PUNC 

अपरम्/SN च/AVK -/PUNC 
अयशः/NP प्राप्यते/KP येन/SN येन/SN चापि/A अगतिः/NP भवेत्/KP ।/PUNC 
स्वार्थात्/NP च/AVK भ्रश्यते/KP येन/SN तत्/SN कर्म/NP न/AN समाचरेत्/KP ॥/PUNC  114/PUNC ॥/PUNC 
इति/AUD सम्यक्/KV विचार्य/KKS तत्/SN सकाशम्/KV  न/AN जगाम/KP ।/PUNC 
अथ/AVK प्राप्तव्यमर्थः/NS पर्यटन्/KNV धवलगृहपार्श्वे/NP रात्रौ/NP अलम्बितवरत्राम्/NP  दृष्ट्वा/KKS कौतुकाविष्टहृदयः/NP ताम्/SN आलम्ब्य/KKS अधिरूढः/KN ।/PUNC तथा/A च/APY राजपुत्र्या/NP “/PUNC सः/SN  एव/INTF अयम्/SN ”/PUNC  इति/AUD आश्वस्तचित्तया/NV स्नानखादनपानाच्छादनादिना/NP सम्मान्य/KKS तेन/SN सह/AUP शयनतलम्/NP आश्रितया/NV तत्/SN अङ्गसंस्पर्शसंजातहर्षरोमाञ्चितगात्रया/NV उक्तम्/KN —/PUNC ”/PUNC युष्मद्/SN दर्शनमात्रानुरक्तया/NP मया/SN आत्मा/NP प्रदत्तः/KN अयम्/SN ।/PUNC त्वद्वर्जम्/SN अन्यः/SN  भर्त्ता/NP मनसि/NP अपि/A मे/SN न/AN भविष्यति/KP इति/AUD ।/PUNC तत्/SN कस्मात्/AP मया/SN सह/AUP न/AN ब्रवीषि/KP ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC प्राप्तव्यम्/KNV अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ।/PUNC ”/PUNC  इति/AUD युक्ते/KN तया/SN अन्यः/SN अयम्/SN इति/AUD मत्वा/KKS धवलगृहात्/NP उत्तार्य/KKS मुक्तः/KN ।/PUNC सः/SN  तु/A   खण्डदेवकुले/NP गत्वा/KKS सुप्तः/KN ।/PUNC 
अथ/AVK तत्र/A कयाचित्/SN स्वैरिण्या/NP दत्तसङ्केतकः/NV  यावत्/A दण्डपाशिकः/NP प्राप्तः/KN तावत्/A असौ/SN पूर्वसुप्तः/KN तेन/SN दृष्टो/KN ,/PUNC रहस्यसंरक्षणार्थम्/NP अभिहितः/KN च/APY -/PUNC  “/PUNC कः/AP  भवान्/NP ?/PUNC ”/PUNC  
 सः/SN अब्रवीत्/KP —/PUNC ”/PUNC प्राप्तव्यम्/NV अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
  तत्/SN श्रुत्वा/KKS दण्डपाशिकेन/NP अभिहितम्/KN  यत्/SN -/PUNC  शून्यम्/NP  देवगृहम्/NP इदम्/SN ,/PUNC तदत्र/A मदीयस्थाने/NP गत्वा/KKS स्वपिहि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 तथा/A प्रतिपद्य/KKS सः/SN  मतिविपर्यासात्/NP अन्यशयने/NP सुप्तः/KN ।/PUNC 
अथ/AVK तस्य/SN आरक्षकस्य/NP कन्या/NP विनयवती/NS नाम/A रूपयौवनसम्पन्ना/NV कस्यापि/A पुरुषस्य/NP अनुरक्ता/KN सङ्केतम्/NP  दत्त्वा/KKS तत्र/A शयने/NP सुप्ता/KN आसीत्/KP ।/PUNC 
अथ/AVK सा/SN तम्/SN आयान्तम्/NP  दृष्ट्वा/KKS “/PUNC सः/SN  एव/INTF अयम्/SN अस्मत्/SN वल्लभः/NP ”/PUNC  इति/AUD रात्रौ/NP घनतरान्धकारव्यामोहिता/KN उत्थाय/KKS भोजनाच्छादनादिक्रियाम्/NP  कारयित्वा/KKS गान्धर्वविवाहेन/NP आत्मानम्/SN  विवाहयित्वा/KKS तेन/SN समं/AUP शयने/NP स्थिता/KN विकसितवदनकमला/NP तम्/SN आह/KP -/PUNC  “/PUNC किम्/AP अद्य/A अपि/A मया/SN सह/AUP विश्रब्धम्/KN  भवान्/SN न/AN ब्रवीति/KP ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC प्राप्तव्यम्/NV अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ।/PUNC ”/PUNC  इति/AUD श्रुत्वा/KKS तया/SN चिन्तितम्/KN  यत्/SN -/PUNC  कार्यम्/NP असमीक्षितम्/NV  क्रियते/KP तस्य/SN इदृक्/A फलविपाकः/NP भवति/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC एवं/A विमृश्य/KKS सविषादया/KV तया/SN निःसारितः/KN असौ/SN ।/PUNC 
 सः/SN  च/A यावत्/A वीथीमार्गेण/NP गच्छति/KP ,/PUNC तावत्/A अन्यविषयवासी/NV वरकीर्तिः/NS नाम/A वरः/NP  महता/NV वाद्यशब्देन/NP आगच्छति/KP ।/PUNC प्राप्तव्यमर्थः/NS अपि/A तैः/SN सह/AUP गन्तुम्/KKS आरब्धवान्/KN ।/PUNC 
अथ/A यावत्/A प्रत्यासन्ने/KN लग्नसमये/NP राजमार्गासन्नश्रेष्ठिद्वारे/NP रचितवेदिकायाम्/NP  कृतकौतुकमङ्गलवेशा/NV वणिक्सुता/NP तिष्ठति/KP ,/PUNC 
तावत्/A मदमत्तः/NV  हस्ती/NP आरोहकम्/NP  हत्वा/KKS प्रणश्यत्/KN जनकोलाहलेन/NP लोकम्/NP आकुलयन्/KNV तम्/SN एव/INTF उद्देशम्/NP  प्राप्तः/KN ।/PUNC 
तम्/SN  च/A दृष्ट्वा/KKS सर्वे/SN वरानुयायिनः/NP  वरेण/NP सह/AUD प्रणश्य/KKS दिशः/NP  जग्मुः/KP ।/PUNC 
अथ/A अस्मिन्/SN अवसरे/NP भयतरललोचनाम्/NV एकाकिनीम्/NV  कन्याम्/NP अवलोक्य/KKS “/PUNC मा/AN भैषीः/KP ,/PUNC अहम्/SN  परित्राता/NP ”/PUNC  इति/AUD सुधीरम्/KV  स्थिरीकृत्य/KKS दक्षिणपाणौ/NP सङ्गृह्य/KKS महासाहसिकतया/NP प्राप्तव्यमर्थः/NS परुषवाक्यैः/NP हस्तिनम्/NP  निभर्त्सितवान्/KN ।/PUNC 
 ततः/A कथमपि/A दैवयोगात्/NP अपयाते/KN हस्तिनि/NP यावत्/A ससुहृत्/NV बान्धवः/NP  वरकीर्तिः/NS अतिक्रान्ते/NV लग्नसमये/NP समागच्छति/KP तावत्/A वधूः/NP अन्येन/SN हस्ते/NP गृहीता/KN तिष्ठति/KP ।/PUNC तत्/SN दृष्ट्वा/KKS वरकीर्तिनाः/NS अभिहितम्/KN—/PUNC भोः/ASMB  श्वसुरः/NP !/PUNC रुद्धम्/KN इदम्/SN  त्वया/SN अनुष्ठितम्/KN  यत्/SN मह्यम्/SN  प्रदाय/KKS कन्यानि/NP अस्मै/SN प्रदत्ता/KN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC अहम्/SN अपि/A हस्तिभयपलायितः/KN  भवद्भिः/SN सह/AUP आयातः/KN ,/PUNC न/AN जाने/KP किम्/AP इदम्/SN  वृत्तम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  इति/AUD अभिधाय/KKS दुहितरम्/NP  प्रष्टुम्/KKS आरब्धवान्/KN —/PUNC ”/PUNC वत्से!/PUNC न/AN त्वया/SN सुन्दरम्/KV  कृतम्/KN ,/PUNC तत्/SN कथ्यताम्/KP  कः/AP अयम्/SN  वृत्तान्तः/NP ?/PUNC ”/PUNC  
सा/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC यत्/SN अहम्/SN अनेन/SN प्राणसंशयात्/NP रक्षिता/KN ,/PUNC तत्/A एनम्/SN  मुक्त्वा/KKS मम/SN जीवन्त्या/NV न/AN अन्यः/SN पाणिम्/NP  ग्रहीष्यति/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
  अनेन/SN वार्ताव्यतिकरेण/NP रजनी/NP व्युष्टा/KN ।/PUNC 
अथ/A प्रातः/NP तत्र/A सञ्जाते/KN महाजनसमवाये/NP तम्/SN  वार्ताव्यतिकरम्/NP  श्रुत्वा/KKS राजदुहिता/NP तम्/SN उद्देशम्/NP आगता/KN ।/PUNC कर्णपरम्परया/NP श्रुत्वा/KKS दण्डपाशिकसुता/NP अपि/A तत्र/SN एव/INTF आगता/KN ।/PUNC 
अथ/A तम्/SN  महाजनसमवायम्/NP  श्रुत्वा/KKS राजा/NP अपि/A तत्र/A एव/INTF आजगाम/KP ,/PUNC प्राप्तव्यमर्थम्/NS प्राह/KP च/AVK -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC विश्रब्धम्/KN  कथय/KP ,/PUNC कीदृशः/AP असौ/SN वृत्तान्तः/NP ?/PUNC ”/PUNC  
 अथ/AVK सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC प्राप्तव्यम्/NV अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  राजकन्या/NP स्मृत्वा/KKS प्राह/KP—/PUNC ”/PUNC देवः/NP अपि/A तम्/SN  लङ्घयितुम्/KKS  न/AN शक्तः/KN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 

  ततः/A  दण्डपाशिकसुता/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC तस्मात्/SN न/AN शोचामि/KP न/AN विस्मयः/NP  मे/SN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
तम्/SN अखिललोकवृत्तान्तम्/NP आकर्ण्य/KKS वणिक्सुता/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC यत्/SN अस्मदीयम्/SN  न/AN हि/A तत्/SN परेषाम्/NP '/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  अभयदानम्/NP  दत्वा/KKS राजा/NP पृथक्/A -/PUNC पृथक्/A/DV वृत्तान्तान्/NP ज्ञात्वा/KKS अवगततत्त्वः/NV तस्मै/SN प्राप्तव्यमर्थाय/NS स्वदुहितरम्/NP  सबहुमानम्/NV  ग्रामसहस्रेण/NP समम्/AUP  सर्वालङ्कारपरिवारयुताम्/NV  दत्वा/KKS ,/PUNC “/PUNC त्वम्/SN  मे/SN पुत्रः/NP असि/KP ”/PUNC  इति/AUD नगरविदितम्/KN  तम्/SN  यौवराज्ये/NP अभिषिक्तवान्/KN ।/PUNC दण्डपाशिकेन/NP अपि/A स्वदुहिता/NP स्वशक्त्या/NP वस्त्रदानादिना/NP सम्भाव्य/KKS प्राप्तव्यमर्थाय/NS प्रदत्ता/KN ।/PUNC 
अथ/A प्राप्तव्यमर्थेन/NS अपि/A स्वीयपितृमातरौ/NP समस्तकुटुम्ब/NP आवृतौ/KN तस्मिन्/SN नगरे/NP संमानपुरःसरम्/KV  समानीतौ/KN ।/PUNC अथA सः/SN अपि/A स्वगोत्रेण/NP सह/AUP विविधभोगान्/NP उपभुञ्जानः/KNV सुखेन/NP अवस्थितः/KN ।/PUNC 
 अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC  “/PUNC प्राप्तव्यम्/NV अर्थम्/NP  लभते/KP मनुष्यः/NP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
  तत्/A एतत्/SN सकलम्/NV  सुख/NP -/PUNC दुःखम्/NP अनुभूय/KKS परम्/NP  विषादम्/NP उपागतः/KN अनेन/SN मित्रेण/NP त्वत्/SN सकाशम्/KV आनीतः/KN ।/PUNC तत्/SN एतत्/SN मे/SN वैराग्यकारणम्/NP ।/PUNC ”/PUNC 
मन्थरकः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC भवति/KP सुहृदयम्/NP असन्दिग्धम्/NV ,/PUNC यत्/SN क्षुत्क्षामः/NP अपि/A शत्रुभूतम्/NP  त्वाम्/SN  भक्ष्यस्थाने/NP स्थितम्/KN एवम्/A  पृष्ठम्/NP आरोप्य/KKS आनयति/KP ,/PUNC न/AN मार्गे/NP अपि/A भक्षयति/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK -/PUNC  
  विकारम्/NP  याति/KP नो/SN चित्तम्/NP  वित्ते/NP यस्य/SN कदाचन/A ।/PUNC 
  मित्रम्/NP  स्यात्/KP सर्वकाले/NP च/A कारयेत्/KP मित्रम्/NP उत्तमम्/NV ॥/PUNC 115/PUNC ॥/PUNC 
  विद्वद्भिः/NP सुहृदाम्/NP अत्र/A चिह्नैः/NP एतैः/SN असंशयम्/NP ।/PUNC 
  परीक्षाकरणम्/NP  प्रोक्तम्/KN  होम/NP अग्निः/NP इव/ASD पण्डितैः/NP ॥/PUNC 116/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
 आपत्काले/NP तु/A सम्प्राप्ते/KN यत्/SN मित्रम्/NP  मित्रम्/NP एव/INTF तत्/SN ।/PUNC 
 वृद्धिकाले/NP तु/A सम्प्राप्ते/KN दुर्जनः/SN अपि/A सुहृत्/NP भवेत्/KP ॥/PUNC 117/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN मम/SN अपि/A अद्य/A अस्य/SN विषये/NP विश्वासः/NP समुत्पन्नः/KN ,/PUNC यतः/A  नीतिविरुद्ध/NV इयम्/SNV  मैत्री/NP मांसाशिभिः/NV वायसैः/NP सह/AUP जलचराणाम्/NP ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC  
  मित्रम्/NP  कोपि/A न/AN कस्यापि/A नितान्तम्/KN  न/AN च/A वैरकृत्/NP ।/PUNC 
  दृश्यते/KP मित्रविधि/NP अवस्तात्/A कार्यात्/NP वैरी/NP परीक्षितः/KN ॥/PUNC 118/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN स्वागतम्/NP  भवतः/SN ।/PUNC स्वगृहवत्/KV अस्यताम्/KP अत्र/A सरः/NP तीरे/NP ।/PUNC यत्/SN च/A वित्तनाशः/NP  विदेशवासः/NP च/APY ते/SN सञ्जातः/KN तत्र/A विषये/NP सन्तापः/NP  न/AN कर्त्तव्यः/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
 अभ्रः/NP छाया/NP खलप्रीतिः/NP सिद्धम्/NV अन्नम्/NP  च/APY योषितः/NP ।/PUNC 
किञ्चित्/A कालोपभोग्यानि/NV यौवनानि/NP धनानि/NP च/APY ॥/PUNC 119/PUNC ॥/PUNC 
अतएव/A ,/PUNC विवेकिनः/NP  जितात्मानः/NP  धनस्पृहाम्/NP  न/AN कुर्वन्ति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
सुसञ्चितैः/NV जीवनवत्/KV सुरक्षितैः/KN-/PUNC  निजैः/NV अपि/A देहे/NP न/AN वियोजितैः/KN क्वचित्/A ।/PUNC 
पुंसः/NP  यम्/SN अन्तम्/NP  व्रजतः/KNV अपि/A निष्ठुरैः/NV एतैः/SN धनैः/NP पञ्चपदी/NP न/AN दीयते/KP ॥/PUNC  120॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC  
यथा/ASD आमिषं/NP जले/NP मत्स्यैः/NP भक्ष्यते/KP श्वापदैः/NP भुवि/NP ।/PUNC 
आकाशे/NP पक्षिभिः/NP च/APY एव/INTF तथा/ASD सर्वत्र/A वित्तवान्/NP ॥/PUNC 121/PUNC ॥/PUNC 
निर्दोषम्/NV अपि/A वित्ताढ्यम्/NP  दोषैः/NP योजयते/KP नृपः/NP ।/PUNC 
निर्धनः/NP प्राप्तदोषः/NV अपि/A सर्वत्र/A निरुपद्रवः/NP ॥/PUNC 122/PUNC ॥/PUNC 
अर्थानाम्/NP अर्जने/NP दुःखम्/NP अर्जितानाम्/NP  च/APY रक्षणे/NP ।/PUNC 
नाशे/NP दुःखम्/NP  व्यये/NP दुःखम्/NP  धिक्/ABS अर्थान्/NP कष्टसंश्रयान्/NV ॥/PUNC 123/PUNC ॥/PUNC 
अर्थार्थी/NP यानि/SN कष्टानि/NP मूढः/NP अयम्/SN  सहते/KP जनः/NP ।/PUNC 
शतांशेन/NP अपि/A मोक्षार्थी/NP तानि/SN चेत्/A मोक्षम्/NP आप्नुयात्/KP ॥/PUNC 124/PUNC ॥/PUNC 
अपरम्/A  विदेशवासजम्/NV अपि/A वैराग्यम्/NP  त्वया/SN न/AN कार्यम्/KN ।/PUNC यतः/AVK -/PUNC  
कः/SN  धीरस्य/NP मनस्विनः/NP स्वविषयः/NP ,/PUNC कः/SN  वा/A विदेशः/NP स्मृतः/KN ,/PUNC 
यम्/SN  देशम्/NP  श्रयते/KP तम्/SN एव/INTF कुरुते/KP बाहुप्रतापार्जितम्/KN ।/PUNC 
यत्/SN दंष्ट्रानखलाङ्गुलप्रहरणः/NV सिंहः/NP  वनम्/NP गाहते/KP ,/PUNC 
तस्मिन्/SN न/AN एव/INTF हतद्विपेन्द्ररुधिरैः/NP तृष्णाम्/NP  छिनत्ति/KP आत्मनः/SN ॥/PUNC 125/PUNC ॥/PUNC 
अर्थहीनः/NP परदेशे/NP गतः/KN अपि/A यः/SN प्रज्ञावान्/NV भवति/KP ,/PUNC सः/SN  कथञ्चित्/A अपि/A न/AN सीदति/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  कः/AP अतिभारः/NP समर्थानाम्/NP  किम्/AP  दूरम्/NP  व्यवसायिनाम्/NP ।/PUNC 
  कः/AP  विदेशः/NP सविद्यानाम्/NP  कः/AP परः/NP प्रियवादिनाम्/NP ॥/PUNC 126/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN प्रज्ञानिधिः/NV भवान्/SN न/AN प्राकृतपुरुषतुल्यः/NV ।/PUNC अथवा/A :/PUNC -/PUNC -/PUNC 
 उत्साहसम्पन्नम्/NP अदीर्घसूत्रम्/NP  क्रियाविधिज्ञम्/NP  व्यसनेषु/NP असक्तम्/KN ।/PUNC 
शूरम्/NP  कृतज्ञम्/NP  दृढसौहृदम्/NP च/APY लक्ष्मीः/NP स्वयम्/SN  मार्गति/KP वासहेतोः/NP ॥/PUNC 127/PUNC ॥/PUNC 
अपरम्/A  प्राप्तः/KN अपि/A अर्थः/NP कर्मप्राप्त्या/NP नश्यति/KP ।/PUNC तत्/SN एतावन्ति/A दिनानि/NP त्वदीयम्/SN आसीत्/KP ।/PUNC मुहूर्तम्/NP अपि/A न/AN आत्मीयम्/SN  भोक्तुम्/KKS  न/AN लभ्यते/KP ।/PUNC स्वयम्/SN आगतम्/KN अपि/A विधिना/NP अपह्रियते/KP ।/PUNC 
  अर्थस्य/NP उपार्जनम्/NP  कृत्वा/KKS न/AN एव/INTF भोगम्/NP  समश्नुते/KP ।/PUNC 
  अरण्यम्/NP  महत्/NV आसाद्य/KKS मूढः/NV सोमिलकः/NS  यथा/ASD ॥/PUNC 128/PUNC ॥/PUNC 
हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ”/PUNC  ?/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC  
5/PUNC :/PUNC    मन्दभाग्यसोमिलककथा/NP

कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP सोमिलकः/NS नाम/A कौलिकः/NP वसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  च/A अनेकविधपट्टरचनारञ्जितानि/NV वस्त्राणि/NP उत्पादयति/KP ।/PUNC  परम्/A  तस्य/SN च/A अनेकविधपट्टरचनानिपुणस्य/NP अपि/A न/AN भोजन/NP आच्छादनाभिः/NP अधिकम्/NV  कथमपि/A अर्थमात्रम्/NP  सम्पद्यते/KP ।/PUNC अथ/A अन्ये/SN तत्र/A सामान्यकौलिकाः/NP स्थूलवस्त्रसम्पादनविज्ञानिनो/NV महर्धिः/NP सम्पन्नाः/KN ।/PUNC तान्/SN अवलोक्य/KKS सः/SN  स्वभार्याम्/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC प्रिये/NP !/PUNC पश्य/KP एतान्/SN स्थूलपट्टकारकान्/NP धनकनकसमृद्धान्/NV ।/PUNC तत्/A अधारणकम्/NV मम/SN एतत्/SN स्थानम्/NP ।/PUNC तत्/SN अन्यत्र/A उपार्जनाय/NP गच्छामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  सा/SN प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB  प्रियतम्/NP !/PUNC मिथ्याप्रलपितम्/NP एतद्/SN यत्/A अन्यत्र/A गतानाम्/KN  धनम्/NP  भवति/KP ,/PUNC स्वस्थाने/NP न/AN भवति/KP इति/AUD ”/PUNC ।/PUNC  उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
   उत्पतन्ति/KP यत्/SN आकाशे/NP निपतन्ति/KP महीतले/NP ।/PUNC 
 धरणि/NP अन्तम्/NP अपि/A प्राप्ता/KN न/AN अदत्तम्/NP उपतिष्ठति/KP ॥/PUNC 129/PUNC ॥/PUNC  तथा/A च/AVK -/PUNC  
   न/AN हि/A भवति/KP यत्/SN न/AN भाव्यम्/KN ,/PUNC भवति/KP च/APY भाव्यम्/KN  विना/A यत्नेन/NP ।/PUNC 
   करतलगतम्/KN अपि/A नश्यति/KP यस्य/SN तु/A भवितव्यता/NP नास्ति/KP ॥/PUNC 130/PUNC ॥/PUNC 
   यथा/A धेनुसहस्रेषु/NP वत्सः/NP  विन्दति/KP मातरम्/NP ।/PUNC 
   तथा/A पुराकृतम्/NV  कर्म/NP कर्तारम्/NP अनुगच्छति/KP ॥/PUNC 131/PUNC ॥/PUNC 
   शेते/KP सह/AUP शयानेन/KN गच्छन्तम्/KN अनुगच्छति/KP ।/PUNC 
   नराणाम्/NP  प्राक्तनम्/NV  कर्म/NP तिष्ठति/KP अथ/A सहात्मना/NP ॥/PUNC  132/PUNC ॥/PUNC 
   यथा/A छायातपौ/NP नित्यम्/NV  सुसम्बद्धौ/NV परस्परम्/A ।/PUNC 
   एवम्/A  कर्म/NP च/APY कर्ता/NP च/APY शंश्लिष्टौ/KNV इतरेतरम्/KV ॥/PUNC  133/PUNC ॥/PUNC 
 तस्मात्/SN अत्रेव/A व्यवसायपरः/NP  भव/KP ”/PUNC ।/PUNC कौलिक/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC प्रिये/NP !/PUNC न/AN सम्यक्/A अभिहितम्/KN  भवत्या/SN ।/PUNC व्यवसायम्/NP  विना/A कर्मम्/NP  न/AN फलति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
यथा/A एकेन/SN न/AN हस्तेन/NP तालिका/NP सम्प्रपद्यते/KP ।/PUNC 
तथा/A उद्यमपरित्यक्तम्/NP न/AN फलम्/NP  कर्मणः/NP स्मृतम्/KN ।/PUNC 134/PUNC ॥/PUNC 
पश्य/KP कर्मवशात्/NP प्राप्तम्/KN भोज्यकाले/NP अपि/A भोजनम्/NP ।/PUNC 
हस्तोद्यमम्/NP  विना/A वक्त्रम्/NP  प्रविशेत्/KP न/AN कथञ्चन/A ॥/PUNC 135/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
  उद्योगिनम्/NV  पुरुषसिंहम्/NP उपैति/KP लक्ष्मी/NP -/PUNC 
   दैवम्/NP  हि/A देयम्/KN इति/AUD कापुरुषा/NP वदन्ति/KP ।/PUNC 
  दैवम्/NP  निहत्य/KKS कुरु/KP पौरुषम्/NP आत्मशक्त्या/NP,/PUNC 
   यत्ने/NP कृते/KN यदि/A न/AN सिध्यति/KP कः/AP अत्र/A दोषः/NP ?/PUNC ॥/PUNC 136/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
   उद्यमेन/NP हि/A सिध्यन्ति/KP कार्याणि/NP न/AN मनोरथैः/NP ।/PUNC 
   न/AN हि/A सिंहस्य/NP सुप्तस्य/NV प्रविशन्ति/KP मुखे/NP मृगाः/NP ॥/PUNC 137/PUNC ॥/PUNC 
उद्यमेन/NP विना/A राजन्/NP !/PUNC न/AN सिद्ध्यन्ति/KP मनोरथाः/NP ।/PUNC 
कातरा/NP इति/AUD जल्पन्ति/KP यत्/SSN भाव्यम्/KN  तत्/SSN भविष्यति/KP ॥/PUNC 138/PUNC ॥/PUNC 
स्वशक्त्या/NP कुर्वतः/KNV कर्म/NP न/AN चेत्/A सिद्धिम्/NP  प्रयच्छति/KP ।/PUNC 
न/AN उपालभ्यः/KKS पुमान्/NP तत्र/A दैवान्तरितपौरुषः/NV ॥/PUNC 139/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN मया/SN अवश्यम्/KV  देशान्तरम्/NP  गन्तव्यम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  इति/AUD निश्चित्य/KKS वर्धमानपुरम्/NS  गतः/KN ।/PUNC तत्र/A च/A वर्षत्रयम्/SMKY  स्थित्वा/KKS सुवर्णशतत्रयोपार्जनम्/NP  कृत्वा/KKS भूयः/A स्वगृहम्/NP  प्रस्थितः/KN ।/PUNC 
अथ/A अर्धपथे/NP गच्छतः/KNV तस्य/SN कदाचित्/A अटव्याम्/NP  पर्यटतः/KNV  भगवान्/NP रविः/NP अस्तम्/NP उपागतः/KN ।/PUNC तदा/A असौ/SN व्यालभयात्/NP स्थूलतरवटस्कन्धम्/NP आरुह्य/KKS यावत्/A प्रसुप्तः/KN तावत्/A निशीथे/NP स्वप्ने/NP द्वौ/SMKY पुरुषौ/NP रौद्राकारौ/NV परस्परम्/A  प्रजल्पन्तौ/NV अश्रृणोत्/KP ।/PUNC 
तत्र/A एकः/SMK  आह/KP -/PUNC  “भोः/ASMB  कर्तः/NS ,/PUNC त्वम्/SN  किम्/AP  सम्यक्/A न/AN वेत्सि/KP यद्/A अस्य/SN सोमिलकस्य/NS भोजनाच्छादनाभिः/NP अधिका/NV समृद्धिः/NP नास्ति/AN ।/PUNC तत्/A किम्/AP  त्वया/SN अस्य/SN सुवर्णशतत्रयम्/NP  प्रदत्तम्/KN ?/PUNC “/PUNC  
  सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB  कर्मन्/NS !/PUNC मया/SN अवश्यम्/KV  दातव्यम्/KN  व्यवसायिनाम्/NP ।/PUNC तत्र/A च/A तस्य/SN परिणतिः/NP त्वदायत्ता/SN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
अथ/A यावत्/A असौ/SN कौलिकः/NP प्रबुद्धः/KN सुवर्णग्रन्थिम्/NP अवलोकयति/KP तावत्/A रिक्तम्/NV  पश्यति/KP ।/PUNC ततः/A साक्षेपम्/KV  चिन्तयामास/KP -/PUNC  “/PUNC अहो/ABS किम्/AP एतत्/SN ?/PUNC महता/NS कष्टेन/NP उपार्जितम्/KN  वित्तम्/NP  हेलया/NP क्वापि/A गतम्/KN ।/PUNC तत्/A व्यर्थश्रमः/NP अकिञ्चनः/NP कथम्/AP  स्वपत्न्या/NP मित्राणाम्/NP च/APY मुखम्/NP  दर्शयिष्यामि/KP ”/PUNC ?/PUNC इति/AUD निश्चित्य/KKS तत्/SN एव/INTF पत्तनम्/NP गतः/KN ।/PUNC  तत्र/A च/A वर्षमात्रेण/NP अपि/A सुवर्णशतपञ्चकम्/NP उपार्ज्य/KKS भूयः/A अपि/A स्वस्थानम्/NP  प्रति/AUP प्रस्थितो/KN  यावत्/A अर्धपथे/NP स्थितम्/KN अटवीगतम्/NP  तम्/SN  वटम्/NP  समासादयति/KP तावत्/A  भगवान्/NP भानुः/NP  अस्तम्/NP जगाम/KP ।/PUNC 
  अथ/A सुवर्णनाशभयात्/NP सुश्रान्तः/KN अपि/A न/AN विश्राम्यति/KP ,/PUNC केवलम्/A  कृतगृहोत्कण्ठः/NP सत्वरम्/KV  व्रजति/KP ।/PUNC अत्रान्तरे/A द्वौ/SMKY पुरुषौ/NP तादृशौ/A दृष्टिदेशे/NP समागच्छन्तौ/NV जल्पन्तौ/NV च/APY अश्रृणोत्/KP ।/PUNC तत्र/A एकः/SMK प्राह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB  कर्तः!/PUNC किं/AP त्वया/SN एतस्य/SN सुवर्णशतपञ्चकम्/NP  प्रदत्तम्/KN ?/PUNC तत्/SN किम्/AP  न/AN वेत्सि/KP यत्/A भोजनाच्छादनाभिः/NP अधिकम्/NP अस्य/SN किञ्चित्/A नास्ति/KP “/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN  आह/KP—/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB  कर्मन्/NP !/PUNC मया/SN अवश्यम्/KV  देयम्/KN  व्यवसायिनाम्/NP ।/PUNC तस्य/SN परिणामः/NP त्वदायत्तः/KN ।/PUNC तत्किम्/AP  माम्/SN उपालम्भयसि/KP ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS सोमिलकः/NS  यावत्/A ग्रन्थिम्/NP अवलोकयति/KP तावत्/A सुर्वणम्/NP  नास्ति/KP ।/PUNC ततः/A परम्/NV  दुःखम्/NP आपन्नः/KN  व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC  “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC किम्/AP  मम/SN धनरहितस्य/NP जीवितेन/NP ?/PUNC तत्/A अत्र/A वटवृक्षे/NP आत्मानम्/SN उद्वध्य/KKS प्राणान्/NP त्यजामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  एवम्/A  निश्चित्य/KKS दर्भमयीम्/NV  रज्जुम्/NP  विधाय/KKS स्वकण्ठे/NP पाशम्/NP  नियोज्य/KKS शाखायाम्/NP आत्मानम्/SN  निबध्य/KKS यावत्/A प्रक्षिपति/KP तावद्/A एकः/SMK पुमान्/NP आकाशस्थ/NV एव/INTF इदम्/SN आह/KP—/PUNC “/PUNC भो/ASMB भोः/ASMB/DV  सोमिलक/NS !/PUNC मा/AN एवम्/A  साहसम्/NP  कुरु/KP ।/PUNC अहम्/SN  ते/SN वित्तापहारकः/NP ।/PUNC न/AN ते/SN भोजनाच्छादनाभिः/NP अधिकाम्//NV  वराटिकाम्/NP अपि/A सहे/KP ,/PUNC तत्/SN गच्छ/KP स्वगृहम्/NP  प्रति/AUP ।/PUNC अन्यत्/SN च/A भवदीय/SN साहसेन/NP अहम्/SN  तुष्टः/KN ।/PUNC तथा/A मे/SN न/AN स्याद्/KP व्यर्थम्/NV  दर्शनम्/NP ।/PUNC तत्/SN प्रार्थ्यताम्/KP अभीष्टः/NV  वरः/NP कश्चित्/SN ।/PUNC ”/PUNC  
 सोमिलकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC यदि/A एवम्/A  तत्/A देहि/KP मे/SN प्रभूतम्/NV  धनम्/NP ।/PUNC ”/PUNC  
 सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP करिष्यसि/KP भोगरहितेन/NV धनेन/NP ?/PUNC यतः/A तव/SN भोजनाच्छादनाभ्यधिका/NV प्राप्तः/KN अपि/A न/AN अस्ति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK-/PUNC  
    किम्/AP तया/SN क्रियते/KP लक्ष्म्या/NP या/SN वधूः/NP इव/ASD केवला/A ।/PUNC 
    या/SN न/AN वेश्या/NP इव/ASD सामान्या/NV पथिकैः/NP उपभुज्यते/KP  “/PUNC  ॥/PUNC  140/PUNC ॥/PUNC 
सोमिलकः/NS  आह/KP—/PUNC ”/PUNC यद्यपि/A तस्य/SN धनस्य/NP भोगः/NP  न/AN अस्ति/KP ,/PUNC तथापि/A तत्/SN भवतु/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  कृपणः/NP अपि/A कुलीनः/NP अपि/A सज्जनैः/NP वर्जितः/KN सदा/A ।/PUNC 
  सेव्यते/KP सः/SN  नरः/NP  लोकैः/NP यस्य/SN स्यात्/KP वित्तसञ्चयः/NP ॥/PUNC  141/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
   शिथिलौ/NV च/APY सुवृद्धौ/NV च/APY पततः/KN पततो/KN न/AN वा/A ।/PUNC 
   निरीक्षितौ/KN मया/SN भद्रे/NP !/PUNC दशवर्षाणि/NP पञ्च/SMK च/APY ॥/PUNC  142/PUNC ॥/PUNC 
पुरुष/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC किम्/AP एतत्/SN ”/PUNC  ?/PUNC सः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC 
 
6/PUNC :/PUNC वृषभानुगश्रृगालकथा/NP
कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP तीक्ष्णविषाणः/NS  नाम/A महावृषभः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  च/A मदातिरेकात्/NP परित्यक्तनिजयूथः/NV श्रृङ्गाभ्याम्/NP  नदीतटानि/NP विदारयन्/KNV स्वेच्छया/NP मरकतसदृशानि/NV शष्पाणि/NP भक्षयन्/KNV अरण्यचरः/NP  बभूव/KP ।/PUNC 
अथ/A तत्र/A एव/INTF वने/NP प्रलोभकः/NS  नाम/A श्रृगालः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  कदाचित्/A स्वभार्यया/NP सह/AUP नदीतीरे/NP सुखोपविष्टः/KN तिष्ठति/KP ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/A सः/SN  तीक्ष्णविषाणः/NS  जलार्थम्/NP  तदेव/INTF पुलिनम्/NP अवतीर्णः/KN ।/PUNC ततः/A च/APY तस्य/SN लम्बमानौ/KNV वृषणौ/NP अवलोक्य/KKS श्रृगाल्या/NP श्रृगालः/NP अभिहितः/KN -/PUNC  “/PUNC स्वामिन्/NP ,/PUNC पश्य/KP अस्य/SN वृषभस्य/NP मांसपिण्डौ/NP  लम्बमानौ/KNV यथा/A स्थितौ/KN ।/PUNC तत्/SN एतौ/SN क्षणेन/NP प्रहरेण/NP वा/A पतिष्यतः/KP ।/PUNC एवम्/A  ज्ञात्वा/KKS भवता/SN पृष्ठानुयायिना/NP भाव्यम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  
  श्रृगालः/NP  आह/KP -/PUNC  प्रिये/NP !/PUNC न/AN ज्ञायते/KP कदाचित्/A एतयोः/SN पतनम्/NP  भविष्यति/KP वा/A न/AN वा/A ?/PUNC तत्/SN किम्/AP  वृथाश्रमाय/NP माम्/SN  नियोजयसि/KP ?/PUNC अत्रस्थः/NP तावत्/A जलार्थम्/NP आगतान्/KN मूषकान्/NP भक्षयिष्यामि/KP समम्/AUP  त्वया/SN ।/PUNC मार्गः/NP अयम्/SN  यत्/A तत्/SN तेषाम्/SN ।/PUNC अपरम्/A ,/PUNC यदि/A त्वाम्/SN  मुक्त्वा/KKS अस्य/SN तीक्ष्णविषाणस्य/NS वृषभस्य/NP पृष्ठे/NP गमिष्यामि/KP तदागत्य/KKS अन्यः/SN कश्चित्/SN एतत्/SN स्थानम्/NP समाश्रयिष्यति/KP ।/PUNC तत्/SN न/AN एतत्/SN युज्यते/KP कर्तुम्/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  यः/SN ध्रुवाणि/NP परित्यज्य/KKS अध्रुवाणि/NP निषेवते/KP ।/PUNC 
   ध्रुवाणि/NP तस्य/SN नश्यन्ति/KP अध्रुवम्/NP नष्टम्/NV एव/INTF च/APY ॥/PUNC 143/PUNC ॥/PUNC 
शृगाली/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC कापुरुषः/NP त्वम्/SN ,/PUNC यत्/SN किञ्चित्/A प्राप्तम्/KN  तेन/SN एव/INTF सन्तोषम्/NP  करोषि/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
 सुपूरा/NV स्यात्/KP कुनदिका/NP सुपूरः/NV मूषिकाञ्जलिः/NP ।/PUNC 
 ससन्तुष्टः/NV कापुरुषः/NP स्वल्पकेन/NP अपि/A तुष्यति/KP ॥/PUNC 144/PUNC ॥/PUNC 
तस्मात्/SN पुरुषेण/NP सदा/A एव/INTF उत्साहवता/NP भाव्यम्/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  यत्र/A उत्साहसमारम्भः/NP  यत्र/A आलस्यविहीनता/NP ।/PUNC 
  नयविक्रमसंयोगः/NP तत्र/A श्रीः/NP अचला//NV ध्रुवम्/INTF ॥/PUNC 145/PUNC ॥/PUNC 
   न/AN दैवम्/NP इति/AUD सञ्चिन्त्य/KKS त्यजेत्/KP उद्योगम्/NP आत्मनः/SN ।/PUNC 
  अनुयोगम्/NP  विना/A तैलम्/NP  तिलानाम्/NP  न/AN उपजायते/KP ॥/PUNC 146/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC  
  यः/SN स्तोकेन/NP अपि/A सन्तोषम्/NP  कुरुते/KP मन्दधीर्जनः/NP ।/PUNC 
  तस्य/SN भाग्यविहीनस्य/NP दत्ता/NV श्रीः/NP अपि/A मार्ज्यते/KP ॥/PUNC 147/PUNC ॥/PUNC 
यत्/A च/A त्वम्/SN  वदसि/KP “/PUNC एतौ/SN पतिष्यतो/NP न/AN वेति/A ”/PUNC  तत्/SN अपि/A अयुक्तम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  कृतनिश्चयिनः/NP  वन्द्याः/NP तुङ्गिमा/NP न/AN प्रशस्यते/KP ।/PUNC 
  चातकः/NP कः/SN  वराकः/NP अयम्/SN  यस्य/SN इन्द्र/NS वारिवाहकः/NP ॥/PUNC 148/PUNC ॥/PUNC 
अपरम्/A मूषकमांसस्य/NV निर्विण्णा/KP अहम्/SN ।/PUNC एतौ/SN च/AVK मांसपिण्डौ/NP पतनप्रायौ/NP दृश्येते/KP ,/PUNC तत्/SN सर्वथा/A न/AN अन्यथा/AVK कर्तव्यम्/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  अथ/A असौ/SN तत्/SN आकर्ण्य/KKS मूषकप्राप्तिस्थानम्/NP परित्यज्य/KKS तीक्ष्णविषाणस्य/NS पृष्टम्/NP अन्वगच्छत्/KP ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC  
   तावत्/A स्यात्/KP सर्वकृत्येषु/NP पुरुषः/NP अत्र/A स्वयम्/SN  प्रभुः/NP ।/PUNC 
   स्त्रीवाक्याङ्कुशविक्षुण्णः/NP  यावत्/A न/AN  ह्रियते/KP बलात्/KV ॥/PUNC 149/PUNC ॥/PUNC 
   अकृत्यम्/NP  मन्यते/KP कृत्यम्/NP अगम्यम्/NP  मन्यते/KP सुगम्/NP ।/PUNC 
   अभक्ष्यम्/NP  मन्यते/KP भक्ष्यं/NP स्त्रीवाक्यप्रेरितः/NV  नरः/NP ॥/PUNC 150/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A सः/SN  तस्य/SN पृष्ठतः/KV सभार्यः/NV परिभ्रमन्/KNV चिरकालम्/NP अनयत्/KP ।/PUNC न/AN च/A तयोः/SN पतनम्/NP अभूत्/KP ।/PUNC ततः/A च/A निर्वेदात्/NP पञ्चदशे/NV वर्षे/NP श्रृगालः/NP स्वभार्याम्/NP आह/KP -/PUNC  
“/PUNC शिथिलौ/NV च/APY सुवृद्धौ/NV च/APY पततः/NP पततः/NP न/AN वा/A ।/PUNC 
निरीक्षतः/KN  मया/SN भद्रे/NP !/PUNC दशवर्षाणि/SMKY पञ्च/SMK च/APY ॥/PUNC 151/PUNC ॥/PUNC 
 तयोः/SN तत्पश्चात्/A अपि/A पातः/NP  न/AN भविष्यति/KP ,/PUNC तत्/A तदेव/INTF स्वस्थानम्/NP  गच्छावः/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC  “/PUNC शिथिलौ/NP च/APY सुवृद्धौ/NP च/APY ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC     
पुरुष/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC यद्येवम्/A  तद्/A गच्छ/KP भूयः/A अपि/A वर्द्धमानपुरम्/NP ।/PUNC तत्र/A द्वौ/SMKY वणिक्पुत्रौ/NP वसतः/KP ।/PUNC एकः/SMK  गुप्तधनः/NS ,/PUNC द्वितीयः/SMKP  उपभुक्तधनः/NS ।/PUNC ततः/A तयोः/SN स्वरूपम्/NP  बुद्ध्वा/KKS एकस्य/SN वरः/NP प्रार्थनीयः/NV ।/PUNC यदि/A ते/SN धनेन/NP प्रयोजनम्/NP अभक्षितेन/NP ,/PUNC ततः/A त्वाम्/SN अपि/A गुप्तधनम्/NP  करोमि/KP ।/PUNC अथवा/A,/PUNC दत्तभोग्येन/NV धनेन/NP ते/SN प्रयोजनम्/NP  तत्/A उपभुक्तधनम्/NP  करोमि/KP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS अदर्शनम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
 सोमिलकः/NS अपि/A विस्मितमना/KV भूयः/A अपि/A वर्धमानपुरम्/NS  गतः/KN ।/PUNC अथ/A सन्ध्यासमये/NP श्रान्तः/KN कथमपि/A तत्पुरम्/NP  प्राप्तः/KN  गुप्तधनगृहम्/NP  पृच्छन्/KNV कृच्छ्रात्/KV लब्ध्वा/KKS अस्तमितसूर्यम्/NP  प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
 अथ/A असौ/SN भार्यापुत्रसमेतेन/SN गुप्तधनेन/NP निर्भर्त्स्यमानः/KNV हठात्/NP  गृहम्/NP  प्रविश्य/KKS उपविष्टः/KN ।/PUNC ततः/A च/A भोजनवेलायाम्/NP  तस्य/SN अपि/A भक्तिवर्जितम्/NV किञ्चित्/A अशनम्/NP  दत्तम्/KN ।/PUNC 
 ततः/A  भुक्त्वा/KKS तत्र/A एव/INTF यावत्/A सुप्तो/KN निशीथे/NP पश्यति/KP ,/PUNC तावत्/A तौ/SN अपि/A द्वौ/SMKY पुरुषौ/NP परस्परम्/KV  मन्त्रयतः/KP ।/PUNC तत्र/A एकः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB  कर्तः/NP !/PUNC किम्/AP  त्वया/SN अस्य/SNV गुप्तधनस्य/NS अन्यः/SN अधिकः/NV  व्ययः/NP  निर्मितः/KN  यत्/SN सोमिलकस्य/NS अनेन/SN भोजनम्/NP दत्तम्/KN ?/PUNC एतत्/SN अयुक्तम्/KN  त्वया/SN कृतम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  
  सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB  कर्मन्/NP !/PUNC न/AN मम/SN अत्र/A दोषः/NP ।/PUNC मया/SN पुरुषस्य/NP लाभः/NP क्षतिः/NP च/A दातव्या/KN ।/PUNC तत्/SN परिणतिः/NP पुनः/A त्वदायत्ता/SN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
अथ/AVK असौ/SN यावत्/A उत्तिष्ठति/KP तावद्/A गुप्तधनः/NS  विषूचिकया/NP खिद्यमानः/KNV  रुजा/NP अभिभूतः/KN क्षणम्/NP  तिष्ठति/KP ।/PUNC ततः/A  द्वितीये/SMKP अह्नि/NP तत्/SN दोषेण/NP कृतः/KN उपवासः/NP सञ्जातः/KN ।/PUNC 
 सोमिलकः/NS अपि/A प्रभाते/NP तत्/SN गृहात्/NP निष्क्रम्य/KKS उपभुक्तधनगृहम्/NP  गतः/KN ।/PUNC तेन/SN अपि/A च/A अभ्युत्थानादिना/NP सत्कृतः/KN  विहितभोजनाच्छादनसंमानः/NP तस्य/SN एव/INTF गृहे/NP भव्यशय्याम्/NP आरुह्य/KKS सुष्वाप/KP ।/PUNC 
ततः/A च/A निशीथे/NP यावत्/A पश्यति/KP तावत्/A तौ/SN एव/INTF द्वौ/SMKY पुरुषौ/NP मिथः/KV  मन्त्रयतः/KP ।/PUNC अथ/A तयोः/SN एक/SN आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB  कर्तः/NS !/PUNC अनेन/SN सोमिलकस्य/NS उपकारम्/NP  कुर्वता/KNV प्रभूतो/NV व्ययः/NP कृतः/KN ,/PUNC तत्/A कथय/KP ,/PUNC कथम्/AP अस्य/SN उद्धारकविधिः/NP भविष्यति/KP ?/PUNC अनेन/SN सर्वम्/SN एतद्/SN व्यवहारकगृहात्/NP समानीतम्/KN ।/PUNC ”/PUNC  
 सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB  कर्मन्/NS !/PUNC मम/SN कृत्यम्/KN एतत्/SN ,/PUNC परिणतिः/NP त्वदायत्ता/KN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
अथ/A प्रभातसमये/NP राजपुरुषः/NP राजप्रसादजम्/NP  वित्तम्/NP आदाय/KKS समायात/KN उपभुक्तधनाय/NP समर्पयामास/KP ।/PUNC तत्/SN दृष्ट्वा/KKS सोमिलकः/NS चिन्तयामास/KP -/PUNC  “/PUNC सञ्चयरहितः/NV अपि/A वरम्/NV एष/SNV उपभुक्तधनः/NS ,/PUNC न/AN असौ/SN कदर्यः/NV  गुप्तधनः/NS ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  अग्निहोत्रफला/NV वेदाः/NP शीलवृत्तफलम्/NV  श्रुतम्/NP ।/PUNC 
  रतिपुत्रफला/NV दारा/NP दत्तभुक्तफलम्/NV  धनम्/NP ॥/PUNC 152/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN विधाता/NP माम्/SN  दत्तभुक्तफलम्/NP  करोतु/KP ,/PUNC  न/AN कार्यम्/KN  मे/SN गुप्तधनेन/NP |/PUNC ततः/A सोमिलकः/NS  दत्तभुक्तधनः/NV सञ्जातः/KN ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC  “/PUNC अर्थस्य/NP उपार्जनम्/NP  कृत्वा/KKS ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
“/PUNC तत्/A भद्र/NV हिरण्यक/NS !/PUNC एवम्/A  ज्ञात्वा/KKS धनविषये/NP सन्तापः/NP  न/AN कार्यः/KN ।/PUNC अथ/A विद्यमानम्/ अपि/A धनम्/NP  भोगबन्ध्यतया/NP तत्/SN अविद्यमानम्/NP  मन्तव्यम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
   गृहमध्यनिखातेन/NV धनेन/NP धनिनः/NP  यदि/A ।/PUNC 
   भवामः/KP किम्/AP  न/AN तेन/SN एव/INTF धनेन/NP धनिनः/NP  वयम्/SN ?/PUNC ॥/PUNC 153/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC  
   उपार्जितानाम्/NV अर्थानाम्/NP  त्याग/NP एव/INTF हि/A रक्षणम्/NP ।/PUNC 
  तडागोदरसंस्थानाम्/NV  परीवाह/NP इव/ASD अम्भसाम्/NP ॥/PUNC 154/PUNC ॥/PUNC 
  दातव्यम्/KN  भोक्तव्यम्/KN  धनविषये/NP सञ्चयो/NP न/AN कर्तव्यः/KN ।/PUNC 
  पश्य/KP इह/A मधुकरीणाम्/NP  सञ्चितम्/NV अर्थम्/NP  हरन्ति/KP अन्ये/SN ॥/PUNC 155/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC  
  दानम्/NP  भोगः/NP  नाशः/NP तिस्रः/SMKP  गतयः/NP  भवन्ति/KP वित्तस्य/NP ।/PUNC 
  यः/SN  न/AN ददाति/KP न/AN भुङ्क्ते/KP तस्य/SN तृतीया/NV गतिः/NP भवति/KP ॥/PUNC 156/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  ज्ञात्वा/KKS विवेकिना/NV न/AN स्थित्यर्थम्/NP  वित्तोपार्जनम्/NP  कर्तव्यम्/KN ।/PUNC यतः/A  दुःखाय/NP तत्/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC  
  धनादिकेषु/NP खिद्यन्ते/KP येः/SN अत्र/A मूर्खाः/NP सुखाशयाः/NV ।/PUNC 
  तप्ता/KN ग्रीष्मेण/NP सेवन्ते/KP शैत्यार्थम्/NP  ते/SN हुताशनम्/NP ॥/PUNC 157/PUNC ॥/PUNC 
सर्पाः/NP पिबन्ति/KP पवनम्/NP  न/AN च/APY दुर्बलाः/NV ते/SN ,/PUNC शुष्कैः/NV तृणैः/NP वनगजा/NP बलिनः/NV  भवन्ति/KP ।/PUNC 
कन्दैः/NP फलैः/NP मुनिवरा/NP गमयन्ति/KP कालम्/NP सन्तोषः/NP एव/INTF पुरुषस्य/NP परम्/NV निधानम्/NP ।/PUNC 158/PUNC ॥/PUNC 

संतोषामृततृप्तानाम्/NV यत्/SN सुखम्/NP शान्तचेतसाम्/NP ।/PUNC 
कुतः/AP तत्/SN अनलुब्धानाम्/NP इतः/A चेतः/A च/APY धावताम्/NP ?/PUNC ॥/PUNC 159/PUNC ॥/PUNC 
पीयूषम्/NP इव/ASD सन्तोषम्/NP  पिबताम्/KN  निर्वृतिः/NP परा/NV ।/PUNC 
दुःखम्/NP  निरन्तरम्/NV  पुंसाम्/NP असन्तोषवताम्/NV  पुनः/A ॥/PUNC 160/PUNC ॥/PUNC 
निरोधात्/NP चेतसः/NP अक्षाणि/NP निरुद्धानि/NV अखिलानि/NV अपि/A ।/PUNC 
आच्छादिते/KNV रवौ/NP मेघैः/NP आच्छन्नाः/KN स्युः/KP गभस्तयः/NP ॥/PUNC 161/PUNC ॥/PUNC 
वाञ्छाविच्छेदनम्/NP  प्राहुः/KP स्वास्थ्यम्/NP  शान्ताः/NV महर्षयः/NP ।/PUNC 
वाञ्छा/NP निवर्तते/KP न/AN अर्थैः/NP पिपासा/NP इव/ASD अग्निसेवनैः/NP ॥/PUNC 162/PUNC ॥/PUNC 
अनिन्द्यम्/NP अपि/A निन्दन्ति/KP स्तुवन्ति/KP अस्तुत्यम्/NP उच्चकैः/KV ।/PUNC 
स्वापतेयकृते/NP मर्त्याः/NP किम्/AP  किम्/AP/DV  नाम/A न/AN कुर्वते/KP ?/PUNC ॥/PUNC 163/PUNC ॥/PUNC 
धर्मार्थम्/NP  यस्य/SN वित्तेहा/NP वरम्/NP  तस्य/SN निरीहता/NP ।/PUNC 
प्रक्षालनात्/NP हि/A पङ्कस्य/NP दूरात्/A अस्पर्शनम्/NP  वरम्/NV ॥/PUNC  164/PUNC ॥/PUNC 
दानेन/NP तुल्यः/NP  निधिः/NP अस्ति/KP न/AN अन्यः/SN ,/PUNC लोभात्/NP च/APY न/AN अन्यः/SN अस्ति/KP रिपुः/NP पृथिव्याम्/NP ।/PUNC 
विभूषणम्/NP  शीलसमम्/NP  न/AN च/APY अन्यत्/SN,/PUNC सन्तोषतुल्यम्/NP  धनम्/NP अस्ति/KP न/AN अन्यत्/SN ॥/PUNC  165/PUNC ॥/PUNC 
दारिद्र्यस्य/NP परा/NV मूर्तिः/NP याच्ञा/NP न/AN द्रविणाल्पता/NP ।/PUNC 
जरद्गवधनः/NV शर्वः/NP तथापि/A परमेश्वरः/NP ॥/PUNC 166/PUNC ॥/PUNC 
  सकृत्/A कन्दुकपातेन/SN पतति/KP आर्यः/NP पतन्/NP अपि/A ।/PUNC 
  तथा/A पतति/KP मूर्खः/NP तु/A मृत्पिण्डपतनम्/NP  यथा/A ॥/PUNC 167/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  ज्ञात्वा/KKS भद्र/NP !/PUNC त्वया/SN सन्तोषः/NP कार्यः/KN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
मन्थरकवचनम्/NP आकर्ण्य/KKS वायसः/NP  आह/KP—/PUNC 
“/PUNC मन्थरकः/NP  यत्/SN एवम्/A  वदति/KP तत्/SN त्वया/SN चित्ते/NP कर्त्तव्यम्/KN ।/PUNC 
अथवा/A,/PUNC साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
  सुलभाः/NV पुरुषा/NP राजन्/NP सततम्/KN  प्रियवादिनः/NV ।/PUNC 
  अप्रियस्य/NP च/APY पथ्यस्य/NP वक्ता/NP श्रोता/NP च/APY दुर्लभः/NP ॥/PUNC 168/PUNC ॥/PUNC 
  अप्रियाणि/NP अपि/A पथ्यानि/NP ये/SN वदन्ति/KP नृणाम्/NP इह/A ।/PUNC 
  त/SN एव/INTF सुहृदः/NP प्रोक्ताः/KN ,/PUNC अन्ये/SN स्युः/KP नामधारकाः/NP ॥/PUNC 169/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A एवम्/A  जल्पताम्/KN  तेषाम्/SN  चित्राङ्गः/NS  नाम/A हरिणः/NP  लुब्धकत्रासितः/KN तस्मिन्/SN एव/INTF सरसि/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
अथ/A आयान्तम्/KN  ससम्भ्रमम्/KV अवलोक्य/KKS लघुपतनकः/NS  वृक्षम्/NP आरूढः/KN ।/PUNC हिरण्यकः/NS  निकटवर्तिनम्/NV  शरस्तम्बम्/NP  प्रविष्टः/KN ।/PUNC मन्थरकः/NS सलिलाशयम्/NP आस्थितः/KN ।/PUNC 
 अथ/A लघुपतनकः/NS  मृगम्/NP  सम्यक्/ परिज्ञाय/KKS मन्थरकम्/NS उवाच/KP –/PUNC एहि/KP एहि/KP/DV सखे/NP मन्थरक/NP !/PUNC मृगः/NP अयम्/SN  तृषार्तः/NV अत्र/A समायातः/KN सरसि/NP प्रविष्टः/KN तस्य/SN शब्दः/NP अयम्/SN  न/AN मानुषसंभवः/NV ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS मन्थरकः/NS  देशकालोचितम्/NP आह/KP -/PUNC 
“/PUNC भो/ASMB लघुपतनक/NS !/PUNC यथा/A अयम्/SN  मृगः/NP  दृश्यते/KP प्रभूतम्/NV उच्छ्वासम्/NP उद्वहन्/KNV उद्भ्रान्तदृष्ट्या/NP पृष्ठतः/KV अवलोकयति/KP ,/PUNC तत्/SN न/AN तृषार्त्तः/NP  एषः/SN।/PUNC 
नूनम्/A  लुब्धकत्रासितः/NP ।/PUNC 
तत्/SN ज्ञायताम्/KP अस्य/SN पृष्टे/NP लुब्धका/NP आगच्छन्ति/KP ,/PUNC न/AN वा/A ?/PUNC ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
भयत्रस्तः/NV  नरः/NP श्वासम्/NP  प्रभूतम्/NV  कुरुते/KP मुहुः/KV ।/PUNC 
दिशः/NP अवलोकयति/KP एव/INTF न/AN स्वास्थ्यम्/NP  व्रजति/KP क्वचित्/A ”/PUNC  ॥/PUNC 170/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS चित्राङ्गः/NS  आह/KP —/PUNC “/PUNC भो/ASMB मन्थरक/NS !/PUNC ज्ञातम्/KN  त्वया/SN सम्यक्/A  मे/SN त्रासकारणम्/NP ।/PUNC अहम्/SN  लुब्धकशरप्रहारात्/NP उद्धारितः/KN कृच्छ्रेण/KV अत्र/A समायातः/KN ।/PUNC मम/SN यूथम्/NP  तैः/SN लुब्धकैः/NP व्यापादितम्/KN  भविष्यति/KP ।/PUNC तत्/SN शरणागतस्य/NP मे/SN दर्शय/KP किञ्चित्/A अगम्यम्/NV  स्थानम्/NP  लुब्धकानाम्/NP ।/PUNC ”/PUNC  तत्/SN आकर्ण्य/KKS मन्थरक/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB  चित्राङ्ग/NS !/PUNC श्रूयताम्/KP  नीतिशास्त्रम्/NP -/PUNC 
द्वौ/SMKY उपायौ/NP इह/A प्रोक्तौ/KN विमुक्तौ/NP शत्रुदर्शने/NP ।/PUNC 
हस्तयोः/NP चालनात्/NV एकः/SN  द्वितीयः/SMKP पादवेगजः/NV ॥/PUNC 171/PUNC ॥/PUNC 
 तद्/SN गम्यताम्/KP  शीघ्रम्/KV  सघनम्/NV  वनम्/NP ,/PUNC यावत्/A अत्र/A अपि/A न/AN आगच्छन्ति/KP ते/SN दुरात्मानः/NV लुब्धकाः/NP ।/PUNC ”/PUNC  
  अत्र/A अन्तरे/A लघुपतनकः/NS सत्त्वरम्/KV अभ्युपेत्य/KKS उवाच/KP -/PUNC  “/PUNC भो/ASMB मन्थरक/NS !/PUNC गताः/KN ते/SN लुब्धकाः/NP स्वगृहोन्मुखाः/NV प्रचुरमांसपिण्डधारिणः/NV ।/PUNC तत्/SN चित्राङ्गः/NS त्वम्/SN  विश्रब्धः/KN  वनात्/NP बहिर्भव/KP ।/PUNC ”/PUNC 
ततः/A ते/SN चत्वारः/SMKPY मित्रभावम्/NP आश्रिताः/KN तस्मिन्/SN सरसि/NP मध्याह्नसमये/NP वृक्षछायायाम्/NP  अधस्तात्/A सुभाषितगोष्ठीसुखम्/NP अनुभवन्तः/KNV ,/PUNC सुखेन/KV कालम्/NP  नयन्ति/KP ।/PUNC 
  अथवा/A युक्तम्/KN एतत्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
सुभाषितरसास्वादबद्धरोमाञ्चकञ्चुकाः/NP ।/PUNC
विना/A अपि/A सङ्गमम्/NP  स्त्रीणाम्/NP  सुधियः/NP सुखम्/NP आसते/KP ॥/PUNC 172/PUNC ॥/PUNC 
सुभाषितमयद्रव्यसङ्ग्रहम्/NP  न/AN करोति/KP यः/SN ।/PUNC 
सः/SN  तु/A प्रस्तावयज्ञेषु/NP काम्/SN  प्रदास्यति/KP दक्षिणाम्/NP ॥/PUNC 173/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
सकृत्/KV उक्तम्/NP  न/AN गृह्णाति/KP स्वयम्/SN  वा/A न/AN करोति/KP यः/SN ।/PUNC 
यस्य/SN सम्पुटिका/NP न/AN अस्ति/KP कुतः/AP तस्य/SN सुभाषितम्/NP ?/PUNC ॥/PUNC 174/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A एकस्मिन्/SN अहनि/NP गोष्ठीसमये/NP चित्राङगः/NS  नायातः/KN ।/PUNC अथ/A ते/SN व्याकुलीभूताः/KN परस्परम्/A  जल्पितुम्/KKS आरब्धाः/KN ।/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC किम्/AP अद्य/A सुहृत्/NP न/AN समायातः/KN ?/PUNC किम्/AP  सिंहादिभिः/NP क्वापि/A व्यापादितः/KN ,/PUNC उत/A लुब्धकैः/NP,/PUNC अथवा/A अनले/NP प्रपतितः/KN ,/PUNC  गर्तेविषमे/NP वा/A नवतृणलौल्यात्/NP ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
स्वगृहोद्यानगते/NP अपि/A स्निग्धैः/NP पापम्/NP  विशङ्क्यते/KP मोहात्/NP ।/PUNC 
   किमु/A दृष्टबह्वपायप्रतिभयकान्तारमध्यस्थे/NP ॥/PUNC 175/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A मन्थरकः/NS  वायसम्/NP आह/KP -/PUNC  “/PUNC भो/ASMB लघुपतनक/NS !/PUNC अहम्/SN  हिरण्यकः/NS च/APY तावद्/A द्वौ/SMKY अपि/A अशक्तौ/KN तस्य/SN अन्वेषणम्/NP  कर्तुम्/KKS  मन्दगतित्वात्/NP ,/PUNC ।/PUNC तद्/A गत्वा/KKS त्वम्/SN अरण्यम्/NP  शोधय/KP यदि/A कुत्रचित्/A तम्/SN  जीवन्तम्/NP  पश्यसि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
तत्/SN आकर्ण्य/KKS लघुपतनकः/NS  न/AN अतिदूरे/A यावत्/A  गच्छति/KP तावत्/A पल्वलतीरे/NP चित्राङ्गः/NS कूटपाशनियन्त्रितः/NV तिष्ठति/KP ।/PUNC 
तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS शोकव्याकुलितमनाः/NP तम्/SN अवोचत्/KP —/PUNC 
 “/PUNC भद्र/NP !/PUNC किम्/AP इदम्/SN  ?/PUNC ”/PUNC  
 चित्राङ्गः/NS अपि/A वायसम्/NP अवलोक्य/KKS विशेषेण/KV दुःखितमना/NP बभूव/KP ।/PUNC 
अथवा/A युक्तम्/KN एतत्/SN -/PUNC 
अपि/A मन्दत्वम्/NP आपन्नः/KN  नष्टः/KN  वा/A अपि/A इष्टदर्शनात्/NP ।/PUNC 
 प्रायेण/A प्राणिनाम्/NP  भूयः/A  दुःखावेगः/NP अधिकः/NV भवेत्/KP ॥/PUNC 176/PUNC ॥/PUNC 
ततः/A च/A वाष्पावसाने/NP चित्राङ्गः/NS  लघुपतनकम्/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC सञ्जातः/KN अयम्/SN  तावत्/A मम/SN मृत्युः/NP ।/PUNC तत्/SN युक्तम्/KN  सम्पन्नम्/KN  यत्/SN भवता/SN सह/AUP मे/SN दर्शनम्/NP  सञ्जातम्/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
प्राणात्यये/NP समुत्पन्ने/KN यदि/A स्यात्/KP मित्रदर्शनम्/NP ।/PUNC 
 द्वयोः/SN सुखप्रदम्/NV तत्/SN च/APY जीवितः/NP अपि/A मृतस्य/NP च/APY ॥/PUNC 177/PUNC ॥/PUNC  
तत्/SN क्षन्तव्यम्/KN यत्/SN मया/SN प्रणयात्/NP सुभाषितगोष्ठीषु/NP अभिहितम्/KN ।/PUNC तथा/A हिरण्यकमन्थरकौ/NS मम/SN वाक्यात्/NP वाच्यौ/KN –/PUNC
अज्ञानात्/NP ज्ञानतः/NP  वा/A अपि/A दुरुक्तम्/NP  यत्/SN उदाहृतम्/KN ।/PUNC 
 तत्/SN क्षन्तव्यम्/KN  युवाभ्याम्/SN  मे/SN कृत्वा/KKS प्रीतिपरम्/NV  मनः/NP ॥/PUNC 178/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS लघुपतनकम्/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC न/AN भेतव्यम्/KN अस्मद्विधैः/NV मित्रैः/NP विद्यमानैः/NV ।/PUNC 
यावत्/A अहम्/SN  द्रुततरम्/KV  हिरण्यकम्/NS  गृहीत्वा/KKS आगच्छामि/KP ।/PUNC 
अपरम्/A ,/PUNC ये/SN सत्पुरुषाः/NP भवन्ति/KP ते/SN व्यसने/NP न/AN व्याकुलत्वम्/NP उपयान्ति/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 सम्पदि/NP यस्य/SN न/AN हर्षः/NP  विपदि/NP विषादः/NP रणे/NP न/AN भीरुत्वम्/NP ।/PUNC 
 तम्/SN  भुवनत्रयतिलकम्/NV  जनयति/KP जननी/NP सुतम्/NP  विरलम्/NV ”/PUNC  ॥/PUNC 179/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS लघुपतनकः/NS चित्राङ्गम्/NS आश्वास्य/KKS यत्र/A हिरण्यकमन्थरकौ/NS तिष्ठतः/KP तत्र/A गत्वा/KKS सर्वम्/SN  चित्राङ्गपाशपतनम्/NP  कथितवान्/KN ।/PUNC हिरण्यकम्/NS  च/APY चित्राङ्गपाशमोक्षणम्/NP  प्रति/AUP कृतनिश्चयम्/NV  पृष्ठम्/NP आरोप्य/KKS भूयः/A अपि/A सत्त्वरम्/KV  चित्राङ्गसमीपे/NP गतः/KN ।/PUNC 
  सः/SN अपि/A मूषकम्/NP अवलोक्य/KKS किञ्चित्/A जीविताशया/NP संश्लिष्टः/KN आह/KP -/PUNC 
“/PUNC आपत्/NP नाशाय/NP विबुधैः/NP कर्तव्याः/KN सुहृदः/NP अमलाः/NV ।/PUNC 
न/AN तरति/KP आपदम्/NP  कश्चित्/SN यः/SN अत्र/A मित्रविवर्जितः/NP ”/PUNC  ॥/PUNC 180/PUNC ॥/PUNC 
 हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC त्वम्/SN  तावत्/A नीतिशास्त्रज्ञः/NP  दक्षमतिः/NP,/PUNC तत्/SN कथम्/AP अत्र/A कूटपाशे/NP पतितः/KN ”/PUNC  ?/PUNC ।/PUNC 
   सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भो/NP !/PUNC न/AN कालः/NP अयम्/SN  विवादस्य/NP ।/PUNC तत्/SN न/AN यावत्/A सः/SN  पापात्मा/NV लुब्धकः/NP समभ्येति/KP तावद्/A  द्रुततरम्/KV  कर्त्तय/KP इमम्/SN  मत्/SN पादपाशम्/NP “/PUNC ।/PUNC 
  तत्/SN आकर्ण्य/KKS विहसि/KKS आह/KP हिरण्यकः/NS -/PUNC  “/PUNC किम्/AP  मयि/SN अपि/A समायाते/KN लुब्धकात्/NP बिभेषि/KP ?/PUNC यतः/A शास्त्रम्/NP  प्रति/AUP महती/NV मे/SN विरक्तिः/NP सम्पन्ना/NV यद्/SN भवद्विधा/SN अपि/A नीतिशास्त्रविदः/NP  एनाम्/SN अवस्थाम्/NP  प्राप्नुवन्ति/KP ,/PUNC तेन/SN त्वाम्/SN  पृच्छामि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  सा/SN आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC कर्मणा/NP बुद्धिः/NP अपि/A हन्यते/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
कृतान्तपाशबद्धानाम्/NV  दैवोपहतचेतसाम्/NV ।/PUNC 
बुद्धयः/NP कुब्जगामिन्यः/NV  भवन्ति/KP महताम्/NP अपि/A ॥/PUNC 181/PUNC ॥/PUNC 
विधात्रा/NP रचिता/KN या/SN सा/SN ललाटे/NP अक्षरमालिका/NP ।/PUNC 
न/AN ताम्/SN  मार्जयितुम्/KKS  शक्ताः/KN स्वबुद्धया/NP अपि/A अतिपण्डिताः/NP ”/PUNC  ॥/PUNC 182/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/SN  तयोः/SN प्रवदतोः/KNV सुहृद्व्यसनसन्तप्तहृदयः/NV  मन्थरकः/NP शनैः/KV शनैः/KV/DV तम्/SN  प्रदेशम्/NP आजगाम/KP ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS लघुपतनकः/NS  हिरण्यकम्/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC न/AN शोभनम्/NP आपतितम्/KN !/PUNC “/PUNC  
 हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC किम्/AP  सः/SN  लुब्धकः/NP समायाति/KP ?/PUNC ”/PUNC  
  सः/SN  आह/KP -/PUNC  “/PUNC आस्ताम्/KP  तावत्/A लुब्धकवार्ता/NP ,/PUNC एष/SN मन्थरकः/NP समागच्छति/KP ।/PUNC तत्/SN अनीतिः/NP अनुष्ठिता/KN अनेन/SN ।/PUNC यतः/A  वयम्/SN अपि/A अस्य/SN कारणात्/NP नूनम्/A  व्यापादनम्/NP  यास्यामः/KP ।/PUNC यदि/A सः/SN  पापात्मा/NV लुब्धकः/NP समागमिष्यति/KP ,/PUNC तत्/SN अहम्/SN  तावत्/A खम्/NP उत्पतिष्यामि/KP ।/PUNC त्वम्/SN  पुनः/A बिलम्/NP  प्रविश्य/KKS आत्मानम्/SN  रक्षयिष्यसि/KP ।/PUNC चित्राङ्गः/NP अपि/A वेगेन/KV दिगन्तरम्/NP  यास्यति/KP ।/PUNC एष/SN पुनः/A जलचरः/NP स्थले/NP कथम्/AP  भविष्यति/KP इति/AUD व्याकुलः/NP अस्मि/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 अत्र/A अन्तरे/A प्राप्तः/KN असौ/SN मन्थरकः/NS ।/PUNC हिरण्यकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP न/AN युक्तम्/KN अनुष्ठितम्/KN  भवता/SN यत्/SN अत्र/A समायातः/KN ।/PUNC तत्/A भूयः/A अपि/A द्रुततरम्/KV  गम्यताम्/KP ,/PUNC यावत्/A असौ/SN लुब्धकः/NP  न/AN समायाति/KP ।/PUNC ”/PUNC  
  मन्थरकः/NS  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP किम्/AP  करोमि/KP ,/PUNC न/AN शक्नोमि/KP तत्रस्थः/NV  मित्रव्यसनाग्निदाहम्/NP  सोढुम्/KKS ,/PUNC तेन/SN अहम्/SN अत्र/A आगतः/KN ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
दयितजनविप्रयोगः/NP  वित्तवियोगाः/NP च/APY केन/SN सह्याः/NV स्युः/KP ।/PUNC 
  यदि/A सुमहौषधिकल्पः/NV  वयस्यजनसङ्गमः/NP  न/AN स्यात्/KP ॥/PUNC 183/PUNC ॥/PUNC 
  वरम्/NV  प्राणपरित्यागः/NP  न/AN वियोगः/NP  भवादृशैः/SN ।/PUNC 
  प्राणा/NP जन्मान्तरे/NP भूयः/A  न/AN भवन्ति/KP भवत्/SN विधाः/A ”/PUNC  ॥/PUNC 184/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  तस्य/SN प्रवदतः/KNV,/PUNC आकर्णपूरितशरासनः/NV  लुब्धकः/NP अपि/A उपागतः/KN ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS मूषकेण/NP तस्य/SN स्नायुपाशः/NP तत्क्षणात्/NP खण्डितः/KN ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/A चित्राङ्गः/NS सत्वरम्/KV  पृष्ठम्/NP अवलोकयन्/KNV प्रधावितः/KN ।/PUNC लघुपतनकः/NS  वृक्षम्/NP आरूढः/KN हिरण्यकः/NS च/APY समीपवर्तिबिलम्/NP  प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
 अथ/A असौ/SN लुब्धकः/NP  मृगगमनाद्/NP विषण्णवदनः/NV  व्यर्थश्रमः/NV तम्/SN  मन्थरकम्/NS  मन्दम्/KV  मन्दम्/KV/DV  स्थलमध्ये/NP गच्छन्तम्/KNV  दृष्टवान्/KN ।/PUNC अचिन्तयत्/KP च/APY -/PUNC  “/PUNC यद्यपि/A कुरङ्गः/NP  धात्रा/NP अपहृतः/KN तथापि/A अयम्/SN  कूर्मः/NP  आहारार्थम्/NP  सम्पादितः/KN ।/PUNC तत्/A अद्य/A अस्य/SN आमिषेण/NP मे/SN कुटुम्बस्य/NP आहारनिर्वृत्तिः/NP भविष्यति/KP ”/PUNC ।/PUNC एवम्/A  विचिन्त्य/KKS तम्/SN  दर्भैः/NP सञ्छाद्य/KKS धनुषि/NP समारोप्य/KKS स्कन्धे/NP कृत्वा/KKS गृहम्/NP  प्रति/AUP प्रस्थितः/KN ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/NV तम्/SN  नीयमानम्/KNV अवलोक्य/KKS हिरण्यकः/NS  दुःखाकुलः/KV पर्यदेवयत्/KP -/PUNC  कष्टम्/NP  भोः/ASMB ,/PUNC कष्टम्/NP आपतितम्/KN ।/PUNC 
एकस्य/SN दुःखस्य/NP न/AN यावत्/A अन्तम्/NP गच्छामि/KP अहम्/SN  पारम्/NP इव/ASD अर्णवस्य/NP ।/PUNC 
तावत्/A द्वितीयम्/SMKP  समुपस्थितम्/KN  मे/SN ,/PUNC छिद्रेषु/NP अनर्था/NP बहुलीभवन्ति/KP ॥/PUNC 185/PUNC ॥/PUNC 
यावत्/A अस्खलितम्/NV  यावत्/A सुखम्/NP  याति/KP समे/NV पथि/NP ।/PUNC 
स्खलिते/KN च/APY समुत्पन्ने/KN विषमम्/NP  च/APY पदे/NP पदे/NP/DV ॥/PUNC 186/PUNC ॥/PUNC 
यत्/SN नम्रम्/NV  सगुणम्/NV  च/APY अपि/A यत्/SN च/APY आपत्सु/SN न/AN सीदति/KP ।/PUNC 
धनुः/NP मित्रम्/NP  कलत्रम्/NP  च/APY दुर्लभम्/NV  शुद्धवंशजम्/NV ॥/PUNC 187/PUNC ॥/PUNC 
न/AN मातरि/NP न/AN दारेषु/NP न/AN सोदर्ये/NP न/AN च/APY आत्मजे/NP ।/PUNC 
विश्रम्भः/NP तादृशः/A पुंसाम्/NP  यादृक्/A मित्रे/NP निरन्तरे/NV ॥/PUNC 189/PUNC ॥/PUNC 
यदि/A तावत्/A कृतान्तेन/NP मे/SN धननाशः/NP  विहितः/KN तत्/SN मार्गश्रान्तस्य/NP मे/SN विश्रामभूतम्/NV  मित्रम्/NP  कस्मात्/AP अपहृतम्/KP ?/PUNC अपरम्/A अपि/A मित्रम्/NP ,/PUNC परम्/A  मन्थरकसमम्/NV  न/AN स्यात्/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
असम्पत्तौ/NP परः/NP  लाभः/NP  गुह्यस्य/NP कथनम्/NP  तथा/A ।/PUNC 
  आपद्विमोक्षणम्/NP  च/APY एव/INTF मित्रस्य/NP एतत्/SN फलत्रयम्/NP ॥/PUNC 190/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN अस्य/SN पश्चात्/A न/AN अन्यः/SN सुहृत्/NP मे/SN ।/PUNC तत्/SN किम्/AP  मम/SN उपरि/A अनवरतम्KV  व्यसनशरैः/NP वर्षति/KP हन्त/ABS विधिः/NP ?/PUNC यतः/A आदौ/NP तावद्/A वित्तनाशः/NP ,/PUNC ततः/A परिवारभ्रंशः/NP ,/PUNC ततः/A  देशत्यागः/NP ,/PUNC ततः/A मित्रवियोगः/NP इति/AUD ।/PUNC अथवा/A स्वरूपम्/NP एतत्/SN सर्वेषाम्/SN एव/INTF जन्तूनाम्/NP  जीवितधर्मस्य/NP च।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
कायः/NP संनिहितापायः/NV सम्पदः/NP क्षणभङ्गुराः/NV ।/PUNC 
समागमाः/NP सापगमाः/NP सर्वेषाम्/SN एव/INTF देहिनाम्/NP ॥/PUNC 191/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
क्षते/NP प्रहाराः/NP निपतन्ति/KP अभीक्ष्णम्/KV ,/PUNC धनक्षये/NP दीप्यति/KP जाठराग्निः/NP ।/PUNC 
  आपत्सु/NP वैराणि/NP समुल्लसन्ति/KP ,/PUNC छिद्रेषु/NP अनर्था/NP बहुलीभवन्ति/KP ॥/PUNC 192/PUNC ॥/PUNC 
अहो/ABS ,/PUNC साधु/NP उक्तम्/KN  केनापि/A -/PUNC 
शोकारातिभयत्राणम्/NV  प्रीतिविश्रम्भभाजनम्/NV ।/PUNC 
  केन/SN रत्नम्/NP इदम्/SN  सृष्टम्/KN  मित्रम्/NP इति/AUD अक्षरद्वयम्/NP ॥/PUNC  193/PUNC ॥/PUNC 
अत्र/A अन्तरे/A चाक्रन्दपरौ/NV चित्राङ्गलघुपतनकौ/NS तत्र/A एव/INTF समायातौ/KN ।/PUNC अथ/A हिरण्यकः/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC किम्/AP  वृथा/NV प्रलपितेन/NP ?/PUNC तत्/SN यावत्/A एष/SN मन्थरकः/NS दृष्टिगोचरात्/NP न/AN नीयते/KP तावत्/A अस्य/SN मोक्षोपायः/NP चिन्त्यताम्/KP ,/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
व्यसनम्/NP प्राप्य/KKS यः/SN  मोहात्/NP केवलम्/A  परिदेवयेत्/KP ।/PUNC 
 क्रन्दनम्/NP वर्धयति/KP एव/INTF तस्य/SN अन्तम्/NP  न/AN अधिगच्छति/KP ॥/PUNC 194/PUNC ॥/PUNC 
 केवलम्/A व्यसनस्य/SN उक्तम्/KN  भेषजम्/NP  नयपण्डितैः/NP ।/PUNC 
 तस्य/SN उच्छेदसमारम्भः/NP विषादपरिवर्जनम्/NP ॥/PUNC  195/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/AVK -/PUNC 
अतीतलाभस्य/NP सुरक्षणार्थं/NP ,/PUNC भविष्यलाभस्य/NP च/APY सङ्गमर्थम्/NP ।/PUNC 
आपत्/NP प्रपन्नस्य/KN च/APY मोक्षणार्थम्/NP  यत्/SN मन्त्र्यते/KP असौ/SN परमः/NV हि/INTF मन्त्रः/NP ॥/PUNC 196/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS वायसः/NP  आह/KP -/PUNC  “/PUNC भो/ASMB ,/PUNC यदि/A एवम्/A  तत्/SN क्रियताम्/KP  मत्/SN वचः/NP ।/PUNC एष/SN चित्राङ्गः/NS अस्य/SN मार्गे/NP गत्वा/KKS किञ्चित्/A पल्वलम्/NP आसाद्य/KKS,/PUNC तस्य/SN तीरे/NP निश्चेतनः/NP  भूत्वा/KKS पततु/KP ।/PUNC अहम्/SN अपि/A अस्य/SN शिरसि/NP समारुह्य/KKS मन्दैः/NV चञ्चुप्रहारैः/NP शिरम्/NP  उल्लेखयिष्यामि/KP ,/PUNC येन/SN असौ/SN दुष्टलुब्धकः/NP अमुम्/SN  मृतम्/KN  मत्वा/KKS चञ्चुप्रहरणप्रत्ययेन/NP मन्थरकम्/NS  भूमौ/NP क्षिप्त्वा/KKS मृगार्थं/NP परिधाविष्यति/KP ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/A त्वया/SN दर्भमयानि/NV पाशानि/NP खण्डनीयानि/NV,/PUNC येन/SN असौ/SN मन्थरकः/NS  द्रुततरम्/KV  पल्वलम्/NP  प्रविशति/KP ।/PUNC ”/PUNC  
 चित्राङ्गः/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC भद्रः/NV अयम्/SN  त्वया/SN दृष्टः/KN  मन्त्रः/NP ।/PUNC नूनम्/A  मन्थरकः/NS अयम्/SN  मुक्तः/KN  मन्तव्यः/KN ,/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
सिद्धिम्/NP  वा/A यदि/A वा/A असिद्धिम्/NP चित्तोत्साहः/NP निवेदयेत्/KP ।/PUNC 
  प्रथमम्/SMKP  सर्वजन्तूनाम्/NP  तत्/SN प्राज्ञः/NP वेत्ति/KP न/AN इतरः/SN ॥/PUNC 197/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN एवम्/A  क्रियताम्/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  तथा/A अनुष्ठिते/KN सः/SN  लुब्धकः/NP तथा/A एव/INTF मार्गासन्नपल्वलतीरस्थम्/NP चित्राङ्गम्/NS वायससनाथम्/NV अपश्यत्/KP ।/PUNC 
तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS हर्षितमना/NP व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC 
“/PUNC नूनम्/A  पाशबन्धनवेदनया/NP वराकः/NP अयम्/SN  मृगः/NP स/SN अवशेषजीवितः/NV पाशम्/NP त्रोटयित्वा/KKS कथम्/AP अपि/A एतत्/SN वनान्तरम्/NP  यावत्/A प्रविष्टः/KN तावत्/A मृतः/KN ।/PUNC 
तत्/SN वश्यः/NV अयम्/SN  कच्छपः/NP सुयन्त्रितत्वात्/NP ।/PUNC 
तत्/A एनम्/SN अपि/A तावत्/A गृह्णामि/KP ।/PUNC 
“/PUNC  इति/AUD अवधार्य/KKS कच्छपम्/NP  भूतले/NP प्रक्षिप्य/KKS मृगम्/NP उपाद्रवत्/KP ।/PUNC 
एतस्मिन्/SN अन्तरे/A हिरण्यकेन/NP वज्रोपमदंष्ट्राप्रहरणेन/NP तत्/SN दर्भवेष्टनम्/NP  खण्डशः/KV कृतम्/NP ।/PUNC 
मन्थरकः/NS अपि/A तृणमध्यात्/NP निष्क्रम्य/KKS समीपवर्तिनम्/NV  पल्वलम्/NP  प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
चित्राङ्गः/NS अपि/A अप्राप्तस्य/KN अपि/A तस्य/SN,/PUNC ततः/A उत्थाय/KKS वायसेन/NP सह/AUP पलायितः/KN ।/PUNC 
  एतस्मिन्/SN अन्तरे/A विलक्षः/NV  विषादपरः/NV  लुब्धकः/NP  निवृत्तः/KN  यावत्/A पश्यति/KP ,/PUNC तावत्/A कच्छपः/NP अपि/A गतः/KN ।/PUNC ततः/A च/A तत्र/A उपविश्य/KKS इमम्/SN  श्लोकम्/NP अपठत्/KP -/PUNC 
“/PUNC प्राप्तः/KN  बन्धनम्/NP अपि/A अयम्/SN  गुरुमृगः/NP तावत्/A त्वया/SN मे/SN हृतः/KN ,/PUNC 
 सम्प्राप्तः/KN कमठः/NP सः/SN  च/APY अपि/A नियतम्/KN  नष्टम्/KN  तव/SN आदेशतः/NP ।/PUNC 
क्षुत्क्षामः/NP अत्र/A वने/NP भ्रमामि/KP शिशुकैः/NP त्यक्तः/KN समम्/AUP  भार्यया/NP,/PUNC 
 यत्/SN च/APY अन्यत्/SN न/AN कृतम्/KN  कृतान्त/NP !/PUNC कुरुते/KP तत्/SN च/APY अपि/A सह्यम्/NP  मया/SN ”/PUNC  ॥/PUNC  198/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  बहुविधम्/KV  विलप्य/KKS स्वगृहम्/NP  गतः/KN ।/PUNC अथ/A तस्मिन्/SN व्याधे/NP दूरतरम्/NP  गते/KN ,/PUNC सर्वे/SN अपि/A ते/SN काककूर्ममृगमूषकाः/NP परम्/A आनन्दभाजः/NV परस्परम्/A आलिङ्ग्य/KKS पुनर्जातम्/NP इव/ASD आत्मानम्/SN  मन्यमानाः/KNV तत्/SN एव/INTF सरः/NP सम्प्राप्य/KKS महासुखेन/NP सुभाषितकथागोष्ठीविनोदेन/KV कालम्/NP  नयन्ति/KP स्म/A ।/PUNC 
  एवम्/A  ज्ञात्वा/KKS विवेकिना/NP मित्रसङ्ग्रहः/NP कार्यः/KN ।/PUNC न/AN च/A मित्रेण/NP सह/AUP व्याजेन/NP वर्त्तितव्यम्/KN ”/PUNC  इति/AUD ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/A -/PUNC 
यः/SN मित्राणि/NP करोति/KP अत्र/A न/AN कौटिल्येन/NP वर्त्तते/KP ।/PUNC 
   तैः/SN समम्/AUP  न/AN पराभूतिम्/NP  सम्प्राप्नोति/KP कथञ्चन/A ॥/PUNC 199/PUNC ॥/PUNC 	
॥/PUNC  इति/AUD महामहोपाध्यायश्रीविष्णुशर्मविरचिते/NV पञ्चतन्त्रे/NS 
  मित्रसम्प्राप्तिः/NS नाम/A द्वितीयम्/SMKP  तन्त्रम्/NP  समाप्तम्/KN ।/PUNC 
 -/PUNC -/PUNC -/PUNC -/PUNC -/PUNC -/PUNC -/PUNC   -/PUNC -/PUNC -/PUNC -/PUNC -/PUNC  -/PUNC -/PUNC 

[/PUNC २/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC शशकगजयूथपकथा/NS )/PUNC 
कस्मिंश्चित्/SNV वने/NP चतुर्दन्तः/NS नाम/A महागजः/NV  यूथाधिपः/NV प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तत्र/A कदाचित्/A महति/NV अनावृष्टिः/NP सञ्जाता/KN ,/PUNC प्रभूतवर्षाणि/NP यावत्/A ।/PUNC तया/SN तडागह्रदपल्वलसरांसि/NP शोषम्/NP उपगतानि/NV । /PUNC 
 अथ/A तैः/SNV समस्तगजैः/NP सः/SNV  गजराजः/NP प्रोक्तः/KP —/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC पिपासाकुला/NV गजकलभाः/NP  मृतप्रायाः/NV अपरे/NP मृताः/NP च/APY ।/PUNC तत/A अन्विष्यतां/NP कश्चित्/SNV जलाशयः/NP  यत्र/A जलपानेन/NP स्वस्थताम्/NP  व्रजन्ति/KP ।/PUNC “/PUNC 
 ततः/A चिरम्/KV  ध्यात्वा/KKS तेन/SN अभिहितम्/KN —/PUNC “/PUNC अस्ति/KP महाह्रदः/NP  विविक्ते/NV प्रदेशे/NP स्थलमध्यगतः/NV पातालगङ्गाजलेन/NP सदा/A एव/A पूर्णः/NV, तत्/A तत्र/A गम्यताम्/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KN पञ्चरात्रम्/SAMY उपसर्पद्भिः/KNV समासादितः/KN तै/SN सः/SNV  ह्नदः/NP ।/PUNC तत्र/A स्वेच्छया/NP जलम्/NP अवगाह्य/KKS अस्तमनवेलायाम्/NP  निष्क्रान्ताः/KN ।/PUNC तस्य/SNV ह्रदस्य/NP समन्तात्/NP शशकबिलानि/NV असङ्खयानि/NV सुकोमलभूमौ/NP तिष्ठन्ति/KP ।/PUNC तानि/SN अपि/A समस्तैः/NV अपि/A तैः/SNV गजैः/NP इतः/A ततः/A  भ्रमद्भिः/KNV  परिभग्नानि/NV ।/PUNC बहवः/NV शशकाः/NP  भग्नपादशिरोग्रीवा/NV विहिताः/KN ,/PUNC केचित्/SNV मृताः/NV, केचित्/SNV जीवशेषा/NV जाताः/KN ।/PUNC 

 अथ/A गते/KNV तस्मिन्/SNV गजयूथे/NP शशकाः/NP सोद्वेगा/NP गजपादक्षुण्णसमावासाः/NV केचित्/SNV भग्नपादाः/NV ,/PUNC अन्ये/NP जर्जरितकलेवराः/NV  रुधिरप्लुताः/NV ,/PUNC अन्ये/NP हतशिशवः/NV  बाष्पपिहितलोचनाः/NV समेत्य/KKS मन्त्रं/NP चक्रुः/KP -/PUNC “ /PUNC अहो/ASMB !/PUNC विनष्टा/KNV वयम्/SN ,/PUNC नित्यम्/A एव/AUD एतद्/SNV गजयूथम्/NP आगमिष्यति/ ,/PUNC यतः/A  न/ANअन्यत्र/A जलम्/NP अस्ति/KP ।/PUNC तत्/A सर्वेषाम्/SN  नाशः/NP  भविष्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/A - /PUNC 
 स्पृशन्/KNV अपि/A गजः/NP  हन्ति/KP जिघ्रन्/KNV अपि/A भुजङ्गमः/NP ।/PUNC 
 हसन्/KNV अपि/A नृपः/NP  हन्ति/KP मानयन्/KNV अपि/A दुर्जनः/NP ॥/PUNC 81/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A चिन्त्यताम्/KP  कश्चित्/SNV उपायः/NP ”/PUNC ।/PUNC तत्र/A एकः/SAMY प्रोवाच/KP –/PUNC ”/PUNC गम्यताम्/KP  देशत्यागेन/NP ।/PUNC किम्/AP अन्यत्/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/A मनुना/NS व्यासेन/NS च/APY -/PUNC 
 त्यजेत्/KP एकम्/SAMY  कुलस्यार्थे/NP ग्रामस्यार्थे/NP कुलम्/NP  त्यजेत्/KP ।/PUNC 
 ग्रामम्/NP  जनपदस्यार्थे/NP आत्मार्थे/NP पृथिवीम्/NP  त्यजेत्/KP ॥/PUNC 82/PUNC ॥/PUNC 
 क्षेम्याम्/NV  शस्यप्रदाम्/NV  नित्यम्/A  पशुवृद्धिकरीम्/NV अपि/A ।/PUNC 
 परित्यजेत्/KP नृपः/NP  भूमिम्/NP आत्मार्थम्/NP अविचारयन्/KNV ॥/PUNC 83/PUNC ॥/PUNC 
 आपदर्थे/NP धनम्/NP  रक्षेद्/KP ,/PUNC दारान्/NP रक्षेत्/KP धनैः/NP अपि/A ।/PUNC 
 आत्मानम्/NP  सततम्/NP  रक्षेत्/KP दारैः/NP अपि/A धनैः/NP अपि/A ”/PUNC ॥/PUNC 84/PUNC ॥/PUNC 
ततः/A च/A अन्ये/SN प्रोचुः/KP –/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC पितृपैतामहम्/NV  स्थानम्/NP  न/ANशक्यते/KP सहसा/KV त्यक्तुम्/KKS ।/PUNC तत्क्रियताम्/KP  तेषाम्/SN  कृते/KN काचिद्/SNV विभीषिका/NP यत्कथम्/A अपि/A दैवात्/KV न/ANसमायान्ति/KP । /PUNC 
 उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 निर्विषेण/NV अपि/A सर्पेण/NP कर्त्तव्या/KNV महती/NV फटा/NP ।/PUNC 
 विषम्/NP  भवतु/KP मा/A वा/A अस्तु/KP फटाटोपो/NP भयङ्करः/NV ”/PUNC ॥/PUNC 85/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A अन्ये/SN प्रोचुः/KP —/PUNC “/PUNC यदि/A एवम्/AUD  ततः/A तेषाम्/SN  महत्/NV विभीषिकास्थानम्/NP अस्ति/KP , /PUNC येन/ न/ANआगमिष्यन्ति/KP ।/PUNC सा/SN च/APY चतुरदूतायत्ता/KNV विभीषिका/NP ।/PUNC यतः/A  विजयदत्तः/NS  नाम/A राजा/NP अस्मत्/SN स्वामी/NP शशकः/NP चन्द्रमण्डले/NP निवसति/KP ।/PUNC तत्प्रेष्यताम्/KP  कश्चित्/SNV मिथ्यादूतः/NP  यूथाधिपसकाशम्/NP  यत्/A चन्द्रः/NP त्वाम्/SN अत्र/A ह्रदे/NP आगच्छन्तम्/KNV  निषेधयति/KP ।/PUNC यतः/A अस्मत्/A परिग्रह/NP अस्य/SN समन्ताद्/NP वसति/KP ।/PUNC एवम्/AUD अभिहिते/KN श्रद्धेयवचनात्/NP कदाचित्/A निवर्तते/KP ।/PUNC “/PUNC 
अथ/A अन्ये/SN प्रोचुः/KP –/PUNC ”/PUNC यदि/A एवम्/AUD  तत्/A अस्ति/KP लम्बकर्णः/NS  नाम/A शशकः/NP ।/PUNC सः/SN  च/APY वचनरचनाचतुरः/NV  दूतकर्मज्ञः/NV ।/PUNC सः/SN तत्र/A प्रेष्यताम्/KP ,/PUNC इति/AUD ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
 साकारः/NV  निस्पृहः/NV  वाग्मी/NV नानाशास्त्रविचक्षणः/NV ।/PUNC 
 परचित्तावगन्ता/NV च/APY राज्ञः/NP  दूतः/NP सः/SN  इष्यते/KP ॥/PUNC 86/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/A -/PUNC 
 यः/SN  मूर्खम्/NV  लौल्यसम्पन्नम्/NV  राजा/NP दूतम्/NP  समाचरेत्/KP ।/PUNC 
 मिथ्यावादम्/NV  विशेषेण/NP तस्या/SN कार्यम्/NP  न/ANसिध्यति/KP ॥/PUNC 87/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A अन्विष्यताम्/KP ,/PUNC यथा/A अस्माद्/SNV व्यसनात्/NP आत्मनाम्/NP  सुनिर्मुक्तिः/NP ”/PUNC ।/PUNC 
अथ/A अन्ये/SN प्रोचुः/KP —/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC युक्तम्/NP एतत्/SN ।/PUNC न/ANअन्यः/SN कश्चित्/SNV उपाय/NP अस्माकम्/SN जीवितस्य/NP ।/PUNC तत्तथा/A एव/AUD क्रियताम्/KP ।/PUNC “/PUNC 
 अथ/A लम्बकर्णः/NS गजयूथाधिपसमीपे/NP निरूपितः/KNV गतः/KN च/APY ।/PUNC तथा/A अनुष्ठिते/KN लम्बकर्ण/NS अपि/A गजमार्गम्/NP आसाद्य/KKS अगम्यस्थलाम्/NP आरुह्य/KKS तम्/SNV  गजम्/NP उवाच/KP -/PUNC 
 “/PUNC भो/ASMB ,/PUNC भो/ASMB दुष्टगज/NP !/PUNC किम्/AP एवम्/AUD  लीलया/NV निःशङ्कतया/SN अत्र/A चन्द्रह्रदे/NS आगच्छसि/KP ।/PUNC तत्/A न/ANआगन्तव्यम्/KN ,/PUNC निवर्त्त्यताम्/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/SN आकर्ण्य/KKS विस्मितमना/NV गजः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC कः/SN त्वम्/SN ?/PUNC ” /PUNC ।/PUNC 
 सः/SN  आह/KP —/PUNC “/PUNC अहम्/SNV  लम्बकर्णः/NS  नाम/A शशकः/NP चन्द्रमण्डले/NP वसामि/KP ।/PUNC साम्प्रतम्/A  भगवता/NV चद्रमसा/NP तव/SN पार्श्वे/NP प्रहितः/KNV  दूतः/NP ।/PUNC जानाति/KP एव/AUD भवान्/SN यथार्थवादिनः/NV  दूतस्य/NP न/ANदोषः/NP करणीयः/KN ।/PUNC दूतमुखाः/NP  हि/A राजानः/NP सर्व/SN एव/AUD ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 उद्यतेषु/NV अपि/A शस्त्रेषु/NV बन्धुवर्गबधेषु/NV अपि/A ।/PUNC 
 परुषाणि/NP अपि/A जल्पन्तः/KNV बध्या/NV दूता/NP न/ANभूभुजा/NP ॥/PUNC 88/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB शशक/NP !/PUNC तत्कथय/KP भगवतः/NV चन्द्रमसः/NP सन्देशम्/NP ,/PUNC येन/SN सत्वरम्/KV  क्रियते/KP ।/PUNC “/PUNC 
 सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC भवत/SN अतीतदिवसे/NP यूथेन/NP सह/AUP आगच्छता/KN प्रभूताः/NV शशका/NP निपातिताः/KN ।/PUNC  तत्किम्/AP  न/ANवेत्ति/KP भवान्/SN यत्/A मम/SN परिग्रह/NP अयम्/SNV ।/PUNC तत्/A यदि/A जीवितेन/NP ते/SN प्रयोजनम्/NP ,/PUNC तदा/A केन/SNV अपि/A प्रयोजनेन/NP अत्र/A ह्रदे/NP न/ANआगन्तव्यम्/KN ”/PUNC इति/AUD सन्देशः/NP ।/PUNC 
 गजः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC अथ/A क्व/P वर्तते/KP भगवान्/NV स्वामी/NV चन्द्रः/NS ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC अत्र/A ह्रदे/NP साम्प्रतम्/A  शशकानां/NP भवद्यूथमथितानाम्/NV  हतशेषाणाम्/NV  समाश्वासनाय/KKS समायातिष्ठति/KP ।/PUNC अहम्/SN  पुनः/KV तव/SN अन्तिकम्/A  प्रेषितः/KN ।/PUNC “/PUNC 
 गज/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC यदि/A एवम्/AUD ,/PUNC तद्दर्शय/KKS मे/SN तम्/SN  स्वामिनम्/NP ,/PUNC येन/SN प्रणम्य/KKS अन्यत्र/A गच्छामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 शशकः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC आगच्छ/KP मया/SN सह/AUP एकाकी/NP ,/KP येन/SN दर्शयामि/KP । /PUNC “/PUNC 
तथ/A अनुष्ठिते/KN शशकः/NP निशासमये/ तम्/SNV  गजम्/NP  ह्रदतीरे/NP नीत्वा/KKS जलमध्ये/NP स्थितम्/KNV  चन्द्रबिम्बम्/NP अदर्शयत्/KP ।/PUNC आह/KP च/A —/PUNC “/PUNC भो/ASMB !/PUNC एष/SN नः/SN स्वामी/NP जलमध्ये/NP समाधिस्थः/NV तिष्ठति/KP प्रणम्य/KKS सत्वरम्/KV  व्रज/KP ,/PUNC इति/AUD ।/PUNC नो/AN चेत्/A समाधिभङ्गाद्/NP भूयः/A अपि/A प्रभूतम्/NV  कोपम्/NP  करिष्यति/KP ।/PUNC “/PUNC 
 अथ/A गजः/NP अपि/A त्रस्तमना/NV तम्/SN प्रणम्य/KKS पुनः/KV आगमनाय/NP प्रस्थितः/KN ।/PUNC शशकाः/NP च/A तत्/SNV दिनात्/NP आरभ्य/KKS सपरिवाराः/NP सुखेन/NP स्वेषु/NV स्थानेषु/NP तिष्ठन्ति/KP स्म/A ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC व्यपदेशेन/NP महताम्/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC अपि/A च/A क्षुद्रमलसं/NV कापुरषम्/NV  व्यसनिनम्/NV अकृतज्ञम्/NV पृष्ठप्रलपनशीलम्/NV  स्वामित्वेन/NP न/ANअभियोजयेत्/KP जीवितकामः/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 क्षुद्रम्/NV अर्थपतिम्/NV  प्राप्य/KKS न्यायान्वेषणतत्परौ/NV ।/PUNC 
 उभौ/SN अपि/A क्षयम्/NP प्राप्तौ/KNV पुरा/A शशकपिञ्जलौ/NP ”/PUNC ॥/PUNC 89/PUNC ॥/PUNC 
ते/SN प्रोचुः/KP – “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC  सः/SN आह/KP –/PUNC 
[/PUNC ३/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC शशकपिञ्जलकथा/NS )/PUNC 
कस्मिन्/SNV चिद्/A वृक्षे/NP पुरा/A अहम्/SN अवसम्/KP ।/PUNC तत्र/A अधस्तात्/A कोटरे/NP कपिञ्जलः/NS नाम/A चटकः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC अथ/A सदा/A एव/A अस्तमयवेलायाम/NP आगतयः/KNV द्वयः/SMKY अनेकसुभाषितगोष्ठया/NV देवर्षिब्रह्मर्षिपुराणचरितकीर्त्तनेन/NV च/APY पर्यटनदृष्टानेककौतूहलप्रकथनेन/NV च परमसुखम्/NP अनुभवतोः/KNV कालः/NP व्रजति/KP ।/PUNC अथ/A कदाचित्/A कपिञ्जलः/NS प्राणयात्रार्थम्/NP अन्यैः/SNV चटकैः/NP सह/AUP अन्यम्/SNV पक्वशालिप्रायम्/NV  देशम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
ततः/A  यावत्/A निशासमये/NP अपि/A न/ANआयातः/KN तावत्/A अहम्/SN  सः/SNV उद्वेगमनाः/NV तत्/SNV वियोगदुःखितः/NV चिन्तितवान्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC किम्/AP अद्य/A कपिञ्जलः/NS  न/ANआयातः/KN ?/PUNC किम्/AP  केन/SNV अपि/A पाशेन/NP बद्धः/KN ,/PUNC आहास्वित्/NP केन/SN अपि/A व्यापादितः/KN ?/PUNC सर्वथा/A यदि/A कुशला/NP भवति/KP ,/PUNC तत्/A  माम्/SN  विना/AUP न/ANतिष्ठति/KP ।/PUNC ”/PUNC एवम्/A  चिन्तयतः/KN  वहूनि/NV अहानि/NP व्यतिक्रान्तानि/NV ।/PUNC ततः/A च/A तत्र/A कोटरे/NP कदाचित्/A शीघ्रगः/NS  नाम/A शशक/NP अस्तमनवेलायाम्/NP आगत्य/KKS प्रविष्टः/KN ।/PUNC मया/SN अपि/A कपिञ्जलनिराशत्वेन/NP न/ANनिवारितः/KN ।/PUNC 
 अथ/A अन्यस्मिन्/SNV अहनि/NP कपिञ्जलः/NS शालिभक्षणात्/NP अतीव/A पीवरतनुः/NV स्वम्/NV आश्रयम्/NP  स्मृत्वा/KKS भूयः/KV अपि/A तत्र/A एव/A समायातः/KN ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
 न/AN तादृक्/ASD जायते/KP सौख्यम्/NP अपि/A स्वर्गे/NP शरीरिणाम्/NP ।/PUNC 
 दारिद्र्य/NP अपि/A हि यादृक्/ASD स्यात्/KP स्वदेशे/NP स्वपुरे/NP गृहे/NP ॥/PUNC 90/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A असौ/SNV कोटरान्तर्गतम्/NP शशकम्/NP दृष्टवा/KKS साक्षेपम्/KV आह/KP –/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB शशक/NP !/PUNC न/ANत्वया/SN सुन्दरम्/NV  कृतम्/KN यत्/A मम/SN आवसथस्थाने/NP प्रविष्टः/KN असि/KP ।/PUNC तत्/A शीघ्रम्/KV  निष्क्रम्यताम्/KP । /PUNC 
शशकः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC न/ANतव/SN इदम्/SNV गृहम्/NP ,/PUNC किन्तु/A मम/SN एव/A ।/PUNC तत्/A किम्/AP  मिथ्या/A परुषाणि/NP जल्पसि/KP ?/PUNC 
 उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 वापीकूपतडागानां/NP देवालयकुजन्मनाम्/NP ।/PUNC 
 उत्सर्गात्/NP परतः/A स्वाम्यम्/NP अपि/A कर्तुं/KKS न/ANशक्यते/KP ॥/PUNC 91/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/A -/PUNC 
 प्रत्यक्षम्/A  यस्य/SN यद्/SN  भुक्तम्/NP  क्षेत्राद्यम्/NP  दश/SAMY वत्सरान्/NP ।/PUNC 
 तत्र/A भुक्तिः/NP प्रमाणं/NP स्यात्/KP न/ANसाक्षी/NP न/ANअक्षराणि/NP वा/A ॥/PUNC 92/PUNC ॥/PUNC 
 मानुषाणाम्/NP अयम्/SNV  न्यायः/NP  मुनिभिः/NP परिकीर्त्तितः/KN ।/PUNC 
 तिरश्चाम्/NP  विहङ्गानाम्/NP यावत्/A एव/A समाश्रयः/NP/KN ॥/PUNC 93 ॥/PUNC 
तत्/A मम/SN एतद्/SNV गृहम्/NP ,/PUNC न/ANतव/SN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
कपिञ्जलः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः ! यदि/A स्मृतिम्/NP  प्रमाणीकरोषि/KP ,/PUNC तत्/A आगच्छ/KP मया/SN सह/AUP ,/PUNC येन/SN स्मृतिपाठकम्/NP पृच्छावः/KP ।/PUNC सः/SN यस्य/SN ददाति/KP सः/SN  गृह्णातु/KP ।/PUNC ” /PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KN मया/SN अपि/A चिन्तितम्/KN  -/PUNC किम्/AP अत्र/A भविष्यति/KP ?/PUNC मया/SN द्रष्टव्यः/KN अयम्/SNV  न्यायः/NP ”/PUNC ।/PUNC ततः/A कौतुकात्/NP अहम्/SN अपि/A तौ/SN अनुप्रस्थितः/KP ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/NP तीक्ष्णदंष्ट्रः/NS  नाम/A अरण्यमार्जारः/NP तयोः/SN विवादम्/NP  श्रुत्वा/KKS मार्गासन्न/NV नदीतटम्/NP आसाद्य/KKS कृतकुशोपग्रहः/NV  निमीलितनयन/NV ऊर्ध्वबाहुः/NV अर्धपादस्पृष्टभूमिः/NV श्रीसूर्याभिमुखः/NV  इमाम्/SNV  धर्मोपदेशनाम्/NP अकरोत्/KP —/KP “/PUNC अहो/BS , /PUNC असारः/NP अयम्/SNV  संसारः/NP ।/PUNC क्षणभङ्गुराः/NV प्राणाः/NP ।/PUNC स्वप्नसदृशः/NV प्रियसमागमः/NP ।/PUNC इन्द्रजालवत्/NP  कुटुम्बपरिग्रह/NP अयम्/SNV ।/PUNC तद्/A धर्मम्/NP  मुक्त्वा/KKS न/ANअन्या/SNV गतिः/NP अस्ति/KP ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 अनित्यानि/NV शरीराणि/NP विभवः/NP  न/ANएव/A शाश्वतः/NV ।/PUNC 
 नित्यम्/A  सन्निहितः/NV  मृत्युः/NP कर्त्तव्यः/KN  धर्मसङ्ग्रहः/NP ॥/PUNC 94/PUNC ॥/PUNC 
 यस्य/SN धर्मविहीनानि/NV दिनानि/NP आयान्ति/KP यान्ति/KP च/APY ।/PUNC 
 सः/SN  लोहकारभस्त्रा/NP इव/SD श्वसन्/NP अपि/A न/ANजीवति/KP ॥/PUNC 95/PUNC ॥/PUNC 
 न/ANआच्छादयति/KP कौपीनम्/NP  न/ANदंशमशकापहम्/NP ।/PUNC 
 शुनः/NP पुच्छम्/NP इव/SD व्यर्थम्/NV  पाण्डित्यम्/NP  धर्मवर्जितम्/NV ॥/PUNC 96/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/SN च/A -/PUNC 
 पुलाकाः/NP  इव/SD धान्येषु/NP पुत्तिकाः/NP  इव/SD पक्षिषु/NP ।/PUNC 
 मशकाः/NP  इव/SD मर्त्त्येषु/NP येषाम्/SN  धर्मः/NP  न/ANकारणम्/NP ॥/PUNC 97/PUNC ॥/PUNC 
 श्रेयः/NP पुष्पफलम्/NP  वृक्षात्/NP धनः/NP श्रेयः/NP  घृतम्/NP  स्मृतम्/KN ।/PUNC 
 श्रेयः/NP तैलम्/NP च/APY पिण्याकात्/NP श्रेयान्/NP धर्मः/NP तु/A मानुषात्/NP ॥/PUNC 98/PUNC ॥/PUNC 
 सृष्टा/NP मूत्रपुरीषार्थम्/NP आहाराय/NP च/APY केवलम्/A ।/PUNC 
 धर्महीनाः/NV परार्थाय/NP पुरुषाः/NP पशवः/NP  यथा/SD ॥/PUNC 99/PUNC ॥/PUNC 
 स्थैर्यम्/NP  सर्वेषु/SNV कृत्येषु/KN शंसन्ति/KP नयपण्डिताः/NP ।/PUNC 
बह्वन्तराययुक्तस्य/NV धर्मस्य/NP त्वरिता/NV गतिः/NP ॥/PUNC 100/PUNC ॥/PUNC 
संक्षेपात्/NP कथ्यते/KP धर्मः/NP  जनाः/NP किम्/AP  विस्तरेण/NP वः/A ।/PUNC 
परोपकारः/NP पुण्याय/NP पापाय/NP परपीडनम्/NP ॥/PUNC 101/PUNC ॥/PUNC 
श्रूयताम्/KP  धर्मसर्वस्वम्/NP  श्रुत्वा/KKS च/APY एव/INTF अवधार्यताम्/KP ।/PUNC 
आत्मनः/NP प्रतिकूलानि/NP परेषाम्/NP  न/ANसमाचरेत्/KP ”/PUNC ॥/PUNC 102/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A तस्य/SN ताम्/SNV  धर्मोपदेशनाम्/SNV  श्रुत्वा/KKS शशकः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB भोः/ASMB कपिञ्जल/NS !/KP एष/SNV नदीतीरे/NP तपस्वी/NV धर्मवादी/NP तिष्ठति/KP ,/PUNC तत्/A एनम्/SN  पृच्छावः/KP ”/PUNC ।/PUNC 
कपिञ्जलः/NS आह/KP —/PUNC “/PUNC ननु/A स्वभावतः/NP अस्माकम्/SN  शत्रुभूतः/NP अयम्/SN अस्ति/KP ,/PUNC तत्/A दूरे/NP स्थितौ/NP पृच्छावः/KP ।/PUNC 
कदाचित्/A अस्य/SN व्रतवैकल्यम्/NP  सम्पद्यते/KP ”/PUNC ।/PUNC 
ततः/A  दूरस्थितौ/NP उचतुः/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB तपस्विन्/NP !/PUNC धर्मोपदेशक/NV !/PUNC आवयोः/SN विवादः/NP  वर्त्तते/KP ।/PUNC 
तत्/A धर्मशास्त्रद्वारेन/NP अस्माकम्/SN  निर्णयम्/NP  कुरु/KP ।/PUNC यः/SSN  हीनवादी/NP सः/SSN  ते/SN भक्ष्यः/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्रौ/NP !/PUNC मा/DV मा/A एवम्/AUD  वदतम्/KP ।/PUNC निवृत्तः/NV अहम्/SN  नरकपातकमार्गात्/NP ।/PUNC अहिंसा/NP एव/A धर्ममार्गः/NP ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 अहिंसापूर्वकः/NV  धर्मः/NP  यस्मात्/SSN सद्भिः/NP उदाहृतः/NP ।/PUNC 
 यूकामत्कुणदंशादीः/NP तस्मात्/SSN तान्/SN अपि/A रक्षयेत्/KP ॥/PUNC 103/PUNC ॥/PUNC 
 हिंसकानि/NV अपि/A भूतानि/NP यः/SSN  हिनस्ति/KP सः/SSN  निर्घृणः/NV ।/PUNC 
 सः/SSN  याति/KP नरक/NP घोरम्/NV  किम्/AP  पुनः/A यः/SSN शुभानि/NV च/APY ॥/PUNC 104/PUNC ॥/PUNC 
 एते/SNV अपि/A ये/SNV याज्ञिकाः/NP  यज्ञकर्मणि/NP पशून्/NP व्यापादयन्ति/KP ,/PUNC ते/SNV मूर्खाः/NP परमार्थम्/NP  श्रुतेः/NP न/ANजानन्ति/KP ।/PUNC तत्र/A किल/A एतत्/SN उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC अजैः/NP यष्टव्यम्/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC अजा/NP व्रीहयः/NP तावत्/A सप्तवर्षिकाः/NP कथ्यन्ते/KP ,/PUNC न/ANपुनः/KV पशुविशेषाः/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY - /PUNC 
 वृक्षान्/NP छित्वा/KKS पशून्/NP हत्वा/KKS कृत्वा/KKS रुधिरकर्दमम्/NP ।/PUNC 
 यदि/A एवम्/AUD गम्यते/KP स्वर्गे/NP नरके/NP केन/P गम्यते/KP ॥/PUNC 105/PUNC ॥/PUNC 
 तत्/A न/ANअहम्/SN  भक्षयिष्यामि/KP ,/PUNC परम्/A  जयपराजयनिर्णयम्/NP करिष्यामि/KP ।/PUNC किन्तु/A अहम्/SN  वृद्धः/NP  दूरात्/AUP युवयोः/NP भाषान्तरम्/NP  सम्यङ्क/A न/ANश्रृणोमि/KP ।/PUNC एवम्/AUD ज्ञात्वा/KKS मम/SN समीपवर्तिनौ/NP भूत्वा/KKS मम/SN अग्रे/NP न्यायम्/NP  वदतम्/KP ,/PUNC येन/SN विज्ञाय/KKS विवादपरमार्थम्/NP  वचः/NP  वदतः/KP  मे/SN परलोकबाधः/NP  न/ANभवति/KP ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/A यतः/A -/PUNC 
 मानात्/NP वा/A यदि/A वा/A लोभात्/NP क्रोधात्/NP वा/A यदि/A वा/A भयात्/NP ।/PUNC 
 यः/SSN  न्यायम्/NP अन्यथा/A ब्रूते/KP सः/SSN  याति/KP नरकम्/NP  नरः/NP ॥/PUNC 106/PUNC ॥/PUNC 
 पञ्च/SAMY पश्वनृते/NP हन्ति/KP दश/SAMY हन्ति/KP गवानृते/NP ।/PUNC 
 शतम्/SAMY  कन्यानृते/NP हन्ति/KP सहस्रं/SAMY पुरुषानृते/NP ॥/PUNC 107/PUNC ॥/PUNC 
 उपविष्टः/NV सभामध्ये/NP यः/SSN न/ANवक्ति/KP स्फुटम्/NP  वचः/NP ।/PUNC 
 तस्माद्/A दूरेण/NP सः/SSN  त्याज्या/KKS न्यायम्/NP  वा/A कीर्त्तयेत्/KP ॠतम्/NP ॥/PUNC 108/PUNC ॥/PUNC 
 तस्मात्/A विश्रब्धौ/NP मम/SN कर्णॊपान्तिके/NP स्फुटम्/NP  निवेदयतम्/KP ।/PUNC “/PUNC 
 किम्/AP  बहुना/NP ,/PUNC तेन/SN क्षुद्रेण/NP तथा/A तौ/SN पूर्णम्/NP  विश्वासितौ/NV यथा/A तस्य/SN उत्सङ्गवर्त्तिनौ/NV सञ्जातौ/NV ।/PUNC 
 ततः/A च/A तेन/SN अपि/A समकालम्/NP एव/A एकः/SAMY पदान्तेन/NP आक्रान्तः/KN ,/PUNC अन्यः/NP  दंष्ट्राक्रकचेन/NP च/APY ।/PUNC एवम्/AUD द्वौ/SMKY अपि/A गतप्राणौ/NV भक्षितौ/NV इति/AUD ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP - /PUNC “/PUNC क्षुद्रम्/NV अर्थपतिम्/NP  प्राप्य/KKS ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
भवन्तः/SN अपि/A एनम्/SNV  दिवान्धम्/NV  क्षुद्रम्/NV अर्थपतिम्/NP आसाद्य/KKS रात्र्यन्धाः/NP सन्तः/KP शशकपिञ्जलमार्गेण/NP यास्यन्ति/KP ।/PUNC एवम्/AUD ज्ञात्वा/KKS यत्/SSN उदुचितम्/NP तत्/SN विधेयम्/NP अतः/A परम्/NP ”/PUNC ।/PUNC 
अथ/A तस्य/SN तत्/SNV वचनम्/NP आकर्ण्य/KKS “/PUNC साधु/NP अनेन/SN अभिहितम्/KN ”/PUNC इति/AUD उक्त्वा/KKS “ /PUNC भूयः/A अपि/A पार्थिवार्थम्/NP  समेत्य/KKS मन्त्रयिष्यामहे/KP ,/PUNC ”/PUNC इति/AUD ब्रुवाणाः/KNV सर्वे/SNV पक्षिणः/NP  यथाभिमतम्/NP  जग्मुः/KP ।/PUNC केवलम्/A अवशिष्टः/NV भद्रासनोपविष्टाभिषेकाभिमुखः/NV दिवान्धः/NV कृकालिकया/NP सह/AUP आस्ते/KP ।/PUNC आह/KP च/AVK  —/PUNC “/PUNC कः/SN कः/SN अत्र/A भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP अद्य/A अपि/A न/ANक्रियते/KP मम/SN अभिषेकः/NP ?/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/A श्रुत्वा/KKS कृकालिकया/NP अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC तव/SN अभिषेकेकृतः/KN अयम्/SNV  विघ्नः/NP  वायसेन/NP ।/PUNC गताः/KN च/APY सर्वे/SNV विहगा/NP यथेप्सितासु/NP दिक्षु/NP ।/PUNC केवलम्/A एकः/SAMY अयम्/SNV  वायसः/NP अवशिष्टः/NV केन/P अपि/A हेतुना/NP तिष्ठति/KP ।/PUNC तत्/A त्वरितम्/KV उत्तिष्ठ/KP ,/PUNC येन/A त्वाम्/SN  स्वाश्रयम्/NP  प्रापयामि/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्/A श्रुत्वा/KKS सविषादम्/NV उलूकः/NP  वायसम्/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB भोः/ASMB दुष्टात्मन्/NP !/PUNC किम्/AP  मया/SN ते/SN उपकृतम्/KNV  यत्/A राज्याभिषेकः/NP  मे/SN विघ्नितः/KN ?/PUNC तत्/A अद्य/A प्रभृति/NP सान्वयम्/NP आवयोः/SN वैरम्/NP  सञ्जातम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/A - /PUNC 
 रोहति/KP सायकैः/NP विद्धम्/NP  छिन्नम्/NP  रोहति/KP च/APY असिना/NP ।/PUNC 
 वाचा/NP दुरुक्तम्/NV  वीभत्सम्/NV  न/ANप्ररोहति/KP वाक्क्षतम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 109/PUNC ॥/PUNC 
इति/AUD एवम्/AUD अभिधाय/KKS कृकालिकया/NP सह/AUP स्वाश्रयम्/NP  गतः/KN ।/PUNC अथ/A भयव्याकुलः/NV  वायसः/NP  व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC अकारणम्/NV  वैरम्/NP आसादितम्/KNV  मया/SN ।/PUNC किम्/AP इदम्/SNV  व्याहृतम्/NP ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 अदेशकालज्ञम्/NV अनायतिक्षमम्/NV ,/PUNC यत्/SNV अप्रियम्/NV  लाघवकारि/NP च/APY आत्मनः/NP ।/PUNC 
 यत्/SN च/APY अब्रवीत्/KP कारणवर्जितम्/NV  वचः/NP ,/PUNC न/ANतत्/SNV वचः/NP स्यात्/KP विषम/NP एव/INTF तत्/SNV वचः/NP ॥/PUNC 110/PUNC ॥/PUNC 
 बलोपपन्नः/NV अपि/A हि/A बुद्धिमान्/NV नरः/NP ,/PUNC परंम्/A  नयेत्/KP न/ANस्वयम्/SN एव/INTF वैरिताम्/NP ।/PUNC 
 भिषङ्मम्/NP अस्ति/KP इति/AUD विचिन्त्य/KKS भक्षयेत्/KP कारणात्/NP कः/SN  हि/A विचक्षणः/NV  विषम्/NP ॥/PUNC 111/PUNC ॥/PUNC 
 परपरिवादः/NP परिषदि/NP न/ANकथञ्चित्/A पण्डितेन/NP वक्तव्यः/KN ।/PUNC 
 सत्यम्/NP अपि/A तत्/SN न/ANवाच्यम्/KN  यत्/SNV उक्तम्/KN असुखावहम्/NP  भवति/KP ॥/PUNC 112/PUNC ॥/PUNC 
सुहृद्भिः/NP आप्तैः/NP सकृत्/NP विचारितम्/KN ,/PUNC स्वयम्/SN  च/APY बुद्धया/NP प्रविचारि्ताश्रयम्/NP ।/PUNC 
करोति/KP कार्यम्/NP  खलु/A यः/SSN सः/SSN  बुद्धिमान्/NV ,/PUNC सः/SN  एव/INTF लक्ष्म्या/NP यशसाम्/NP  च/APY भाजनम्/NP ॥/PUNC 113/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/AUD विचिन्त्य/KKS काकः/NP अपि/A प्रयातः/KN ।/PUNC तदा/A प्रभृति/NP अस्माभिः/SN सह/AUP कौशिकानाम्/NP अन्वयगतम्/NV  वैरम्/NP अस्ति/KP ।/PUNC 
 मेघवर्णः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC तात/NP एवम्/AUD गते/KN अस्माभिः/SN किम्/AP  कृतम्/KN अस्ति/KP ?/PUNC ” /PUNC 
 सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC वत्स/NP !/PUNC एवं/AUD गते/KN अपि/A षाङ्गुण्यात्/NP अपरः/SNV छलः/NP अपि/A उपायः/NP अस्ति/KP ।/PUNC तम्/SN अङ्गीकृत्य/KKS स्वयम्/SN एव/INTF अहम्/SN  तत्/SN विजयाय/KKS यास्यामि/KP ।/PUNC रिपून्/NP वञ्चयित्वा/KKS वधिष्यामि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/A यतः/A/ -/PUNC 
 बहुबुद्धिसमायुक्ताः/NV सुविज्ञानाः/NV छलः/NP उत्कटाः/NV ।/PUNC 
 शक्ताः/NP वञ्चयितुम्/KKS  धूर्त्ताः/NP ब्राह्मणम्/NP छगलात्/NP इव/SD ”/PUNC ॥/PUNC 114/PUNC ॥/PUNC 
मेघवर्णः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
[/PUNC ४/PUNC  ]/PUNC 
 (/PUNC धूर्तब्राह्मणछागकथा/NS )/PUNC 
कस्मिंश्चित्/SNV अधिष्ठाने/NP मित्रशर्मा/NP नाम/A ब्राह्मणः/NP कृताग्निहोत्रपरिग्रहः/NV प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तेन/SN कदाचित्/A माघमासे/NP सौम्यानिले/NP प्रवाति/KP मेघाच्छादिते/NV गगने/NP मन्दम्/KV मन्दम्/DV प्रवर्षति/KP पर्जन्ये/NP पशुप्रार्थनाय/NP कञ्चिद्/SNV ग्रामान्तरम्/NP  गत्वा/KKS कश्चित्/SNV यजमानः/NP याचितः/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB यजमान्/NP !/PUNC आगामिन्याम्/NV आमावस्यायाम्/NP अहम्/SN  यक्ष्यामि/KP यज्ञम्/NP ,/PUNC तत्/A देहि/KP मे/SN पशुम्/NP एकम्/SAMY ।/PUNC 
अथ/A तेन/SN तस्य/SN शास्त्रोक्तः/NV पीवरतनुः/NV पशुः/NP प्रदत्तः/KN ।/PUNC सः/SN अपि/A तम्/SN असमर्थम्/NP इतः/DV च/APY इतः/A च/APY गच्छन्तम्/KNV  विज्ञाय/KKS स्कन्धे/NP कृत्वा/KKS सत्वरम्/KV स्वपुराभिमुखः/NP प्रतस्थे/KP ।/PUNC 

अथ/A तस्य/SN गच्छतः/KN  मार्गे/NP त्रयः/SAMY  धूर्ताः/NP क्षुत्क्षामकण्ठाः/NV संमुखा/NP बभूवुः/KP ।/PUNC तैः/SN च/APY तादृशम्/NV  पीवरम्/NV पशुम्/NP  स्कन्धे/NP आरूढम्/KNV अवलोक्य/KKS मिथः/NP अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC अस्य/SNV पशोः/NP भक्षणात्/NP अद्यतनीयः/NV हिमपातः/NP  व्यर्थताम्/NP  नीयते/KP ।/PUNC तत्/A एनम्/SN  वञ्चयित्वा/KKS पशुम्/NP आदाय/KKS शीतत्राणम्/NP कुर्मः/KP ।/PUNC 
 अथ/A तेषाम्/SN एकतमः/SAMP वेशपरिवर्तनम्/NP  विधाय/KKS संमुखः/NV  भूत्वापरमार्गेण/NP तम्/SNV आहिताग्निम्/NP ऊचे/KP — /PUNC “/PUNC भोः/DV भोः/ASMB बालाग्निहोत्रिन्/NP !/PUNC किम्/AP एवम्/AUD जनविरुद्धम्/NV  हास्यकार्यम्/NP अनुष्ठीयते/KP , /PUNC यत्/A एष/SNV सारमेयः/NP अपवित्रः/NV स्कन्धाधिरूढ़ः/NP  नीयते/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/A यतः/A -/PUNC 
 श्वानकुक्कुटचाण्डालाः/NP समस्पर्शाः/NV प्रकीर्त्तिताः/KN ।/PUNC 
 रासभोष्ट्रौ/NP विशेषेण/NP तस्मात्/SN तान्/SN एव/INTF संस्पृशेत्/KP ”/PUNC ॥/PUNC 115/PUNC ॥/PUNC 
 ततः/A च/A तेन/SNV कोपाभिभूतेन/NP अभिहितम्/KN —/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC किम्/AP अन्धः/NP  भवान्/SN ? /PUNC यत्/A पशुम्/NP  सारमेयम्/NP  प्रतिपादयसि/KP ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC ”/PUNC ब्रह्मन्/NP !/PUNC कोपः/NP त्वया/SN न/ANकार्यः/NP ।/PUNC यथा/A इच्छम्/KNV  गम्यताम्/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
अथ/A यावत्/A किञ्चित्/SN अध्वनः/NP अन्तरम्/AUP  गच्छति/KP ,/PUNC तावत्/A द्वितीयः/SAMY  धूर्त्तः/NP सम्मुखे/NP समुपेत्य/KKS तम्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ब्रह्मन्/NP !/PUNC कष्टम्/NP  कष्टम्/DV !/PUNC यदा/A अपि/A वल्लभः/NP अयम्/SN  ते/SN मृतवत्सः/NP तथापि/A स्कन्धम्/NP आरोपयितुम्/KKS अयुक्तम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/A यतः/A -/PUNC 
 तिर्यचम्/NP  मानुषम्/NP  वा/A अपि/A यः/SN  मृतम्/NV  संस्पृशेत्/KP कुधीः/NP ।/PUNC 
 पंचगव्येन/NP शुद्धिः/NP स्यात्/KP तस्य/SN चान्द्रायणेन/NP च/APY ॥/PUNC 116/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A असौ/SN सकोपम्/NP इदम्/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB किमन्धः/NP  भवान्/SN ?/PUNC यत्/A पशुम्/NP  मृतवत्सम्/NV  वदसि/KP ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भगवन्/NP !/PUNC मा/A कोपम्/NP  कुरु/KP ।/PUNC अज्ञानात्/NP मया/SN अभिहितम्/KN ,/PUNC तत्/A त्वम्/SN आत्मरुचिम्/NP  समाचर/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 अथ/A यावत्/A स्तोकम्/A  वनान्तरम्/NP  गच्छति/KP तावत्/A तृतीयः/SAMY अन्यवेशधारी/NV धूर्त्तः/NP सम्मुखः/NV समुपेत्य/KKS तम्/SN उवाच/KP —/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/NP अयुक्तम्/KN एतत्/SN ,/PUNC यत्/A त्वम्/SN  रासभम्/NP  स्कन्धाधिरूढम्/NV  नयसि/KP ।/PUNC तत्/A त्यज्यताम्/KP एषः/SN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 यः/SN स्पृशेत्/KP रासभम्/NP  मर्त्यः/NV  ज्ञानात्/NP अज्ञानतः/NP अपि/A वा/A ।/PUNC 
 सचैलम्/NV  स्नानम्/NP उद्दिष्टम्/NP  तस्य/SN पापप्रशान्तये/NP ॥/PUNC 117/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A त्यज/KP एनम्/SN  यावत्/A अन्यः/SN कश्चित्/SN न/ANपश्यति/KP ”/PUNC ।/PUNC अथ/A असौ/SN तम्/SNV  पशुम्/NP  रासभम्/NP  मन्यमानः/KNV  भयाद्/NP भूमौ/NP प्रक्षिप्य/KKS स्वगृहम्/NP उद्दिश्य/KKS प्रपलायितः/KN ।/PUNC 
 ततः/A ते/SN त्रयः/SAMY  मिलित्वा/KKS तम्/SNV  पशुम्/NP आदाय/KKS यथेच्छया/NP भक्षितुम्/KKS आरब्धाः/KN ।/PUNC अत/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC बहुबुद्धिसमायुक्ता/KN इति/AUD ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
 अभिनवसेवकविनयैः/NP प्राघुणिकोक्तैः/NP विलासिनीरुदितैः/NP ।/PUNC 
 धूर्त्तजनवचननिकरैः/NP इह/A कश्चित्/SN अवञ्चितः/NP  न/ANअस्ति/KP ॥/PUNC 118/PUNC ॥/PUNC 
किम्/AP च/APY ,/PUNC दुर्बलैः/NP अपि/A बहुभिः/NP सह/AUP विरोधः/NP  न/ANयुक्तः/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
बहवः/NP  न/ANविरोद्धव्या/KN दुर्जयः/NV  हि/A महाजनः/NP ।/PUNC 
स्फुरन्तम्/NV अपि/A नागेन्द्रम्/NP  भक्षयन्ति/KP पिपीलिकाः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 119/PUNC ॥/PUNC 
मेघवर्णः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC स्थिरजीवी/NS कथयति/KP -/PUNC 
[/PUNC ५/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC पिपीलिकाभुजङ्गमकथा/NS )/PUNC 
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV वल्मीके/NP महाकायः/NV कृष्णसर्पः/NV अतिदर्पः/NS  नाम/A ।/PUNC सः/SN  कदाचिद्/A विलानुसारिमार्गम्/NP उत्सृज्य/KKS अन्येन/SN लघुद्वारेण/NP निष्क्रमितुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC निष्क्रामतः/KNV च/APY तस्य/SN महाकायत्वात्/NP दैववशतया/NP लघुविवरत्वात्/NP च/APY शरीरे/NP व्रणः/NP समुत्पन्नः/KN ।/PUNC अथ/A ब्रणशोणितगन्धानुसारिणीभिः/NV पिपीलिकाभिः/NP सर्वतः/AUP  व्याप्तः/NP  व्याकुलीकृतः/NP च/APY ।/PUNC कति/SN व्यापादयति/KP ,/PUNC कति/SN वा/A ताडयति/KP ।/PUNC अतिप्रभूतत्वाद्विस्तारितबहुव्रणाभिः/NP क्षतसर्वाङ्गः/NV अतिदर्पः/NS पञ्चत्वम्/NP उपगतः/KN ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP —/PUNC “/PUNC बहवः/NP  न/ANविरोद्धव्याः/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/A अत्र/A अस्ति/KP किञ्चित्/SN मे/SN वक्तव्यम्/KN ।/PUNC देव/NP !/PUNC तत्/SN अवधार्य/KKS यथा/A उक्तम्/KN अनुष्ठीयताम्/KP ।/PUNC “/PUNC 
 मेघवर्णः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC तात!/PUNC समादेशय/KP ।/PUNC तव/SN आदेशः/NP  न/ANअन्यथा/A कर्त्तव्यः/KN । /PUNC “/PUNC 
 स्थिरजीवीः/NS  प्राह/KP -/PUNC “/PUNC वत्स/NP !/PUNC समाकर्णय/KP तर्हि/A सामादीनतिक्रम्य/KKS यः/A  मया/SN पञ्चमः/SAMY उपायः/NP  निरूपितः/KN ।/PUNC तत्/A माम्/SN  विपक्षभूतम्/NP  कृत्वा/KKS अतिनिष्ठुरवचनैनिर्भत्स/KKS यथा/SD विपक्षप्रणिधीनाम्/NP  प्रत्ययः/NP  भवति/KP तथा/SD समाहृतरुधिरैः/NP आलिप्यस्य/KKS एव/INTF न्यग्रोधस्य/NP अधस्तात्/NP प्रक्षिप्य/KKS , /PUNC गम्यताम्/KP  पर्वतम्/NV ऋष्यमूकम्/NS  प्रति/AUP ।/PUNC 
 तत्र/A सपरिवारः/NP तिष्ठ/KP ।/PUNC यावत्/A अहम्/SN  समस्तान्/NV सपत्नान्/NP सुप्रणीतेन/NV विधिना/NP विश्वास्य/KKS अभिमुखान्/NP कृत्वा/KKS कृतार्थः/NP  ज्ञातदुर्गमध्यः/NP दिवसे/NP तान्/SN अन्धताम्/NP  प्राप्तान्/NV ज्ञात्वा/KKS व्यापादयामि/KP ।/PUNC ज्ञातम्/KN  मया/SN सम्यक्/A ,/PUNC न/ANअन्यथा/A अस्माकम्/SN  सिद्धिः/NP इति/AUD ।/PUNC यतः/A  दुर्गम/NP एतत्/SNV अपसाररहितम्/NV  केवलम्/A  बधाय/NP भविष्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/A यतः/A -/PUNC 
 अपसारसमायुक्तं/NV नयज्ञैः/NP दुर्गम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC 
 अपसारपरित्यक्तम्/NV  दुर्गव्याजेन/NP बन्धनम्/NP ॥/PUNC 120/PUNC ॥/PUNC 
न/ANच/APY त्वया/SN मत्/SN अर्थम्/SN  कृपा/NP कार्या/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 अपि/A प्राणसमानिष्टान्/NV पालितान्/NV लालितान्/NV अपि/A ।/PUNC 
 भृत्यान्/NP युद्धे/NP समुत्पन्ने/KNV पश्येत्/KP शुष्कम्/NP इव/SD इन्धनम्/NP ॥/PUNC 121/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/A -/PUNC 
 प्राणवत्/NP रक्षयेद्/KP भृत्यान्/NP स्वकायम्/NP इव/SD पोषयेत्/KP ।/PUNC 
 सदा/A एकदिवसस्यार्थे/NP यत्र/A स्यात्/KP रिपुसङ्गमः/NP ॥/PUNC 122/PUNC ॥/PUNC 
तत/A त्वया/SN अहम्/SN  न/ANअत्र/A विषये/NP प्रतिषेधनीयः/KN ।/PUNC “/PUNC इति/AUD उक्त्वा/KKS तेन/SN सह/AUP शुष्ककलहम्/NP  कर्त्तुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC 
अथ/A अन्ये/SN तस्य/SN भृत्याः/NP स्थिरजीविनम्/NS उच्छृङ्खलवचनैः/NP जल्पन्तम्/KN अवलोक्य/KKS तस्य/SN वधाय/NP उद्यता/NV मेघवर्णेन/NP अभिहिताः/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC निवर्त्तध्वम्/KP  यूयम्/SN ।/PUNC अहम्/SN एव/INTF अस्य/SN शत्रुपक्षपातिनः/NV  दुरात्मनः/NP स्वयम्/SN निग्रहम्/NP  करिष्यामि/KP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD अभिधाय/KKS तस्य/SN उपरि/A समारुह्य/KKS लघुभिः/NV चञ्चुप्रहारैः/NP तम्/SN प्रहृत्य/KKS आहृतरुधिरेण/NP प्लावयित्वा/KKS तद्/SN उपदिष्टम्/KN ऋष्यमूकपर्वतम्/NP  सपरिवारः/NP  गतः/KN ।/PUNC 
एतस्मिन्/SNV अन्तरे/NP कृकालिकया/NP द्विषत्प्रणिधीभूतया/NV तत्सर्वम्/SN  मेघवर्णस्य/NS अमात्यव्यसनम्/NP उलूकराजस्य/NP निवेदितम्/KN  यत्/A –/PUNC ”/PUNC तव/SN अरिः/NP सम्प्रति/A भीतः/NV क्वचित्प्रचलितः/KN सपरिवारः/NV ”/PUNC इति/AUD । /PUNC 
अथ/A उलूकाधिपः/NP तदाकर्ण्य/KKS अस्तमनवेलायाम्/NP समागत्यः/NV सपरिजनः/NV वायसवधार्थम्/NP  प्रचलितः/KN ,/PUNC प्राह/KP च/APY —/PUNC “/PUNC त्वर्यताम्/KP त्वर्यताम्/DV ,/PUNC भीतः/NV शत्रुः/NP पलायनपरः/NV पुण्यैः/NP लभ्यते/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
शत्रोः/NP प्रचलने/NP छिद्रम्/NP एकम्/SAMY अन्यत्/SN च/APY संश्रयम्/NP ।/PUNC 
कुर्वाणः/KN जायते/KP वश्यः/NP व्यग्रत्वे/KN राजसेविनाम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 123/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/AUD ब्रुबाणः/KN समन्तात्/NP न्यग्रोधपादपम्/NP अधः/A परिवेष्ट्य/KKS व्यवस्थितः/KN ।/PUNC यावत्/A न/ANकश्चित्/SN वायसः/NP  दृश्यते/KP ,/PUNC तावत्/A शाखाग्रम्/NP अधिरूढः/KN हृष्टमनाः/NV वन्दिभिः/NP अभिष्टूयमानः/KNV अरिमर्दनः/NS तान्/SN प्रोवाच/KP-/PUNC “/PUNC अहो/ASMB ,/PUNC ज्ञायताम्/KP तेषाम्/SN मार्गः/NP ।/PUNC कतमेन/P मार्गेण/NP प्रनष्टाः/KN काकाः/NP ?/PUNC ।/PUNC तत्/A यावत्/A न/ANदुर्गम्/NP  समाश्रयन्ति/KP तावत्/A एव/INTF पृष्ठतः/NP  गत्वा/KKS व्यापादयामि/KP । /PUNC 
उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
 वृतिम्/NP अपि/A आश्रितः/NV शत्रुरबध्यः/NP स्यात्/KP जिगीषुणा/NP ।/PUNC 
 किम्/AP  पुनः/KV संश्रितः/NP  दुर्गम्/NP  सामग्रया/NP परया/NP युतम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 124/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A एतस्मिन्/SNV प्रस्तावे/NP स्थिरजीवी/NS चिन्तयामास/KP –/PUNC यत्/A एते/SN अस्मत्/SN शत्रवः/NP अनुपलब्धाः/KN अस्मत्/SN वृत्तान्ताः/NP  यथागतमेव/KV यान्ति/KP ,/PUNC तता/A मया/SN न/ANकिञ्चित्/A कृतम्/KN  भवति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/A - /PUNC 
 अनारम्भः/NP  हि/A कार्याणाम्/NP  प्रथमम्/SAMY  बुद्धिलक्षणम्/NP ।/PUNC 
 आरब्धस्य/NP अन्तगमनम्/NP  द्वितीयम्/SAMY  बुद्धिलक्षणम्/NP ॥/PUNC 125/PUNC ॥/PUNC 
 तद्/A वरम्/A  अनारम्भः/NP ,/PUNC न/ANच/APY आरम्भविघातः/NP ।/PUNC तत्/A अहम्/SN एतान्/SN शब्दम्/NP  संश्राव्य/KKS आत्मानम्/NP  दर्शयामि/KP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD विचार्य/KKS मन्दम्/DV  मन्दम्/KV  शब्दम्/NP अकरोत्/KP । /PUNC तत्/A श्रुत्वा/KKS ते/SNV सकला/NV अपि/A उलूकाः/NP तत्/SN वधाय/KKS प्रजग्मुः/KP ।/PUNC अथ/A तेन/SN उक्तम्/KN —/PUNC “/PUNC अहो/BS !/PUNC अहम्/SN  स्थिरजीवी/NS नाम/A मेघवर्णस्य/NS मन्त्री/NP ।/PUNC मेघवर्णेन/NS एव/INTF इदृशम्/NV अवस्थाम्/NP  नीतः/KN ।/PUNC तत्/A निवेदयता/KN आत्मस्वाम्यग्रे/NP ।/PUNC तेन/SN सह/AUP बहुवक्तव्यम्/NP अस्ति/KP !/PUNC 
 अथ/A तैः/SN निवेदितः/KN सः/SN  उलूकराजः/NP  विस्मयाविष्टः/KNV तत्क्षणात्/KV तस्य/SN सकाशम्/A  गत्वा/KKS प्रोवाच/KP - /PUNC “/PUNC भोः/DV भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP एताम्/SNV  दशाम्/NP  गतः/KN त्वम्/SN ,/PUNC तत्/SN कथ्यताम्/KP । /PUNC “/PUNC 
 स्थिरजीवी/NS प्राह/KP —/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC श्रूयताम्/KP  मे/SN एतत्/SNV अवस्थाकारणम्/NP ।/PUNC अतीतदिने/NP सः/SNV  दुरात्मा/NV मेघवर्णः/NS  युष्मत्/SN व्यापादितान्/KNV प्रभूतवायसान्/NP दृष्टवा/KKS युष्माकम्/SN उपरि/A कोपशोकग्रस्तः/NV  युद्धार्थम्/NP  प्रचलितः/KN आसीत्/KP ।/PUNC ततः/A  मया/SN अभिहितम्/KN  —/PUNC “/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC न/NP युक्तम्/KN  भवतः/SN तद्/SN उपरि/A गन्तुम्/KKS ;/PUNC बलवन्तः/KNV एते/SN ,/PUNC बलहीनाः/NV च/APY वयम्/SN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 बलीयसा/NP हीनबलः/NP  विरोधम्/NP  न/ANभूतिकामः/KN  मनसा/NP अपि/A वाञ्छेत्/KP ।/PUNC 
 न/ANबध्यते/KP अत्यन्तबलः/NP  हि/A यस्माद्/SN  व्यक्तम्/KN  प्रणाशः/KN अस्ति/KP पतङ्गवृत्तेः/NP ॥/PUNC 126/PUNC ॥ /PUNC 
तत्/A  तस्य/SN उपायनप्रदानेन/NP सन्धिः/NP एव/INTF युक्तः/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 बलवन्तम्/NV  रिपुम्/NP  दृष्टवा/KKS सर्वस्वम्/NP अपि/A बुद्धिमान्/NP ।/PUNC 
 दत्त्वा/KKS हि/A रक्षयेत्/KP प्राणान्/NP रक्षितैः/KN तैः/SN धनम्/NP  पुनः/KV ”/PUNC ॥/PUNC 127/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A श्रुत्वा/KKS तेन/SN दुर्जनप्रकोपितेन/NV त्वत्/SN पक्षपातिनम्/NV  माम्/SN आशङ्कमानेन/NP इमाम्/SNV  दशाम्/NP  नीतः/KP । /PUNC तत्/A तव/SN पादौ/NP साम्प्रतम्/A  मे/SN शरणम्/NP ।/PUNC किम्/AP  बहुना/NP विज्ञप्तेन/KN –/PUNC यावत्/A अहम्/SN  प्रचलितुम्/KN  शक्नोमि/KP तावत्/A त्वाम्/SN  तस्य/SN आवासे/NP नीत्वा/KKS सर्ववायसक्षयम्/NP  विधास्यामि/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 अथ/A अरिमर्दनः/NS तत्/SN आकर्ण्य/KKS पितृपितामहक्रमागतमन्त्रिभिः/NP सार्द्धम्/AUP  मन्त्रयाञ्चक्रे/KP ।/PUNC तस्य/SN च/APY पञ्च/SAMY मन्त्रिणः/NP ।/PUNC तत्/A यथा/A रक्ताक्षः/NS ,/PUNC क्रूराक्षः/NS ,/PUNC दीप्ताक्षः/NS ,/PUNC वक्रनासः/NS ,/PUNC प्राकारकर्णः/NS च/APY इति/AUD ।/PUNC तत्र/A आदौ/KV रक्ताक्षम्/NS अपृच्छत्/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP ! /PUNC एष/SN तावत्/A अस्य/SNV रिपोः/NP मन्त्री/NP मम/SN हस्तगतः/KNV ।/PUNC तत्/A किम्/AP  क्रियताम्/KP ?/PUNC ” /PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 रक्ताक्ष/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC किम्/AP अत्र/A चिन्त्यते/KP ।/PUNC अविचारमयम्/KV  हन्तव्यः/KP ।/PUNC /PUNC यतः/A -/PUNC 
 हीनः/NV शत्रुः/NP निहन्तव्यः/KN यावत्/A न/ANबलवान्/NP भवेत्/KP ।/PUNC 
 प्राप्तस्वपौरुषबलः/NP पश्चाद्/A भवति/KP दुर्जयः/NP ॥/PUNC 128/PUNC ॥/PUNC 
किम्/A च/A -/PUNC स्वयम्/SN उपागता/KNV श्रीः/NP त्यज्यमाना/KN शपति/KP इति/AUD लोके/NP प्रवादः/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/A -/PUNC 
 कालः/NP  हि/A सकृत्/A अभ्येति/KP यत्/A नरम्.NP  कालकाङिक्षणम्/NV ।/PUNC 
 दुर्लभः/NV सः/SN  पुनः/KV तेन/SN कालः/NP कर्माचिकीर्षता/KN ॥/PUNC 129/PUNC ॥/PUNC 
श्रूयते/KP च/A यथा/A -/PUNC 
 चितिकाम्/NV  दीपिताम्/NP  पश्य/KP फटाम्/NV  भग्नाम्/NP  मम/SN एव/INTF च/APY ।/PUNC 
 भिन्नश्लिष्टा/NV तु/A या/SNV प्रीतिः/NP न/ANसा/SN स्नेहेन/NP वर्धते/KP ”/PUNC ॥/PUNC 130/PUNC ॥/PUNC 


अरिमर्दनः/NS प्राह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC ।/PUNC रक्ताक्षः/NS कथयति/KP -/PUNC 
[/PUNC ६/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC ब्राह्मणसर्पकथा/NS )/PUNC 
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV अधिष्ठाने/NP हरिदत्तः/NS  नाम/A ब्राह्मणः/NP ।/PUNC तस्य/SN च/APY कृषिम्/NP  कुर्वतः/KN सदा/A एव/INTF निष्फलः/NV कालः/NP अतिवर्तते/KP ।/PUNC अथ/A एकस्मिन्/SNV दिवसे/NP सः/SNV  ब्राह्मणः/NP  उष्णकालावसाने/NP घर्मार्तः/NV स्वक्षेत्रमध्ये/NP वृक्षच्छायायाम्/NP  प्रसुप्तः/KNV अनतिदूरे/NP वल्मीकः/NP उपरि/A प्रसारितबृहत्फटाटोपभीषणम्/NV  भुजङ्गमम्/NP  दृष्टवा/KKS चिन्तयामास/KP —/PUNC “/PUNC नूनम्/A एषा/SNV क्षेत्रदेवता/NP मया/SN कदाचित्/A अपि/A न/ANपूजिता/KN । /PUNC तेन/SN इदम्/SN  मे/SN कृषिकर्म/NP विफलीभवति/KP तत्/A अस्या/SN अहम्/SN  पूजाम्/NP अद्य/A करिष्यामि/KP ।/PUNC इति/AUD अवधार्य/KKS ,/PUNC कुतः/A अपि/A क्षीरम्/NP  याचित्वा/KKS शरावे/NP निक्षिप्य/KKS वल्मीक/NP अन्तिकम्/A उपगत्य/KKS उवाच/KP -/PUNC 
 “/PUNC भोः/ASMB क्षेत्रपाल/NP !/PUNC मया/SN एतावन्तम्/SNV  कालम्/NP  न/ANज्ञातम्/KN  यत्/A त्वम्/SN अत्र/A वससि/KP ,/PUNC तेन/SN पूजा/NP न/ANकृता/KN ।/PUNC तत्/A साम्प्रतम्/A  क्षमस्व/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC एवम्/AUD उक्त्वा/KKS दुग्धम्/NP च/APY निवेद्य/KKS गृहाभिमुखम्/NP  प्रायात/KP ।/PUNC अथ/A प्रातः/A यावत्/A आगत्य/KKS पश्यति/KP तावत्/A दीनारकम्/NP एकम्/SAMY  शरावे/NP दृष्टवान्/KN ।/PUNC एवम्/AUD च/A प्रतिदिनम्/A एकाकी/NP समागत्य/KKS तस्मै/SN क्षीरम्/NP  ददाति/KP ,/PUNC एक/DV एकम्/SAMY च/APY दीनारम्/NP  गृह्णाति/KP ।/PUNC 
अथ/A एकस्मिन्/SNV दिवसे/NP वल्मीके/NP क्षीरनयनाय/NP पुत्रम्/NP  निरूप्य/KKS ब्राह्मणः/NP  ग्रामान्तरम्/NP  जगाम/KP ।/PUNC पुत्रः/NP अपि/A क्षीरम्/NP  तत्र/A नीत्वा/KKS संस्थाप्य/KKS च/APY पुनः/KV गृहम्/NP  समायातः/KN ।/PUNC दिनान्तरे/NP तत्र/A गत्वा/KKS दीनारम्/NP एकम्/SAMY  च/APY दृष्टवा/KKS गृहीत्वा/KKS च/APY चिन्तितवान्/KN –/PUNC ”/PUNC नूनम्/A  सौवर्णदीनारपूर्णः/NV  वल्मीकः/NP ।/PUNC तदत्/A एनम्/SN  हत्वा/KKS सर्वम्/SN एकवारम्/NP ग्रहीष्यामि/KP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD एवम्/AUD  सम्प्रधार्य/KKS अन्येद्यः/A क्षीरम्/NP  ददता/KNV ब्राह्मणपुत्रेण/NP सर्पः/NP  लगुडेन/NP शिरसि/NP ताडितः/KN । /PUNC ततः/A कथम्/A अपि/A दैववशात्/NP अदमुक्तजीवितः/NP एव/INTF रोषात्/NP तम्/SN एव/INTF तीव्रविषदशनैः/NP तथादशत्/KP यथा/A सः/SN  सद्यः/A पञ्चत्वम्/NP उपागतः/KN ।/PUNC स्वजनैः/NP च/APY न/ANअतिदूरे/A क्षेत्रस्य/NP काष्ठसञ्चयैः/NP संस्कृतः/NP । /PUNC 
 अथ/A द्वितीयदिने/NP तस्य/SN पिता/NP समायातः/KN ।/PUNC स्वजनेभ्यः/NP सुतविनाशकारणम्/NP  श्रुत्वा/KKS तथा/A एव/INTF समर्थितवान्/KN ।/PUNC अब्रवीत्/KP च/A-/PUNC 
 “/PUNC भूतान्/NP यः/SN  न/ANअनुगृह्णाति/KP हि/A आत्मनः/NP शरणागतान्/NP ।/PUNC 
  भूतार्थाः/NP तस्य/SN नश्यन्ति/KP हंसाः/NP पद्मवने/NP यथा/A ”/PUNC ॥/PUNC 131/PUNC ॥/PUNC 
पुरुषैः/NP उक्तम्/KN  —/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ? ”/PUNC ब्राह्मणः/NP कथयति/KP -/PUNC 

 [/PUNC ७/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC हैमहंस-/PUNC कथा/NS )/PUNC 
 “/PUNC अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV अधिष्ठाने/NP चित्ररथः/NS नाम/A राजा/NP ।/PUNC तस्य/SN योधैः/NP सुरक्ष्यमाणम्/NV  पद्मसरः/NS  नाम/A सरः/NP तिष्ठति/KP ।/PUNC तत्र/A च/APY प्रभूताः/NV जाम्बूनदमयाः/NV हंसाः/NP तिष्ठन्ति/KP ।/PUNC षण्मासे/NP -/PUNC षण्मासे/NP पिच्छम/NP एकैकं/SAMY परित्यजन्ति/KP ।/PUNC 
 अथ/A तत्र/A सरसि/NP सौवर्णः/NV बृहत्पक्षी/NP समायातः/KN ।/PUNC तैः/SN च/APY उक्तः/KN —/PUNC “/PUNC अस्माकम्/SN  मध्ये/NP त्वया/SN न/ANवस्तव्यम्/KN ।/PUNC येन/SNV कारणेन/NP अस्माभिः/SN षण्मासान्ते/NP पिच्छैकैकदानं/NP कृत्वा/KKS गृहीतम्/KN एतत्/SNV सरः/NP ।/PUNC एवम्/AUD च/AVK, किम्/AP बहुना/SN ,/PUNC परस्परम्/SN  द्वैधम्/NP उत्पन्नम्/KN ।/PUNC 
सः/SN च/APY राज्ञः/NP शरणम्/NP  गतः/KN अब्रवीत्/KP —/PUNC “/PUNC देव/NP !/NP एते/SNV पक्षिणः/NP एवम्/AUD वदन्ति/KP यत्/A —/PUNC अस्माकम्/SN  राजा/NP किम्/AP करिष्यति/KP !/PUNC न/ANकस्या/SNV अपि/A आवासम्/NP  दद्मः/KP ।/PUNC “/PUNC मया/SN च/APY उक्तम्/KN  -/PUNC “/PUNC न/ANशोभनम्/NP युष्माभिः/SN अभिहितम्/KN ।/PUNC अहम्/SN गत्वा/KKS राज्ञे/NP निवेदयिष्यामि/KP ।/PUNC एवम्/AUD स्थिते/KN ,/PUNC देवः/NP प्रमाणम्/NP ।/PUNC “/PUNC 
ततः/A राजा/NP भृत्यान्/NP अब्रवीत्/KP —/PUNC “/PUNC भोः/DV भोः/ASMB !/PUNC गच्छतः/KP सर्वान्/SNV पक्षिणः/NP गतासून्/NP कृत्वा/KKS शीघ्रम्/KV आनयत/KP ”/PUNC ।/PUNC 
राजादेशान्तरम्/NP एव/INTF प्रचेलुस्ते/KP ।/PUNC अथ/A लगुडहस्तान्/NV राजपुरुषान्/NP दृष्टवा/KKS तत्र/A एकेन/SAMY पक्षिणा/NP वृद्धेन/NV उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB स्वजनाः/NP !/PUNC न/ANशोभनम्/NV आपतितम्/NP ।/PUNC सर्वैः/SN एकम्/SAMY अतीभूय/KKS शीघ्रम्/KV उत्पतितव्यम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
 तैः/SN च/APY तथा/A अनुष्ठितम्/KN ।/PUNC अतः/A अहम्/SN ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC भूतान्/NP यः/SN न/ANअनुगृह्णाति/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
इति/AUD उक्त्वा/KKS पुनः/A अपि/A ब्राह्मणः/NP प्रत्यूषे/NP क्षीरम्/NP  गृहीत्वा/KKS तत्र/A गत्वा/KKS तारस्वरेण/NP सर्पम्/NP अस्तौत्/KP ।/PUNC तदा/A सर्पः/NP चिरम्/A  वल्मीकद्वारान्तर्लीनं/NP एव/INTF ब्राह्मणम्/NP  प्रति/AUP उवाच/KP -/PUNC “/PUNC त्वम्/SN  लोभात्/NP अत्र/A आगतः/KN पुत्रशोकम्/NP अपि/A विहाय/KKS ।/PUNC अतः/A परम्/A  तव/SN मम/SN च/APY प्रीतिः/NP न/NP उचिता/KN ।/PUNC तव/SN पुत्रेन/NP यौवनोन्मदेन/NV अहम्/SN  ताडितः/KN ,/PUNC मया/SN सः/NP  दृष्टः/KN । /PUNC कथम्/A  मया/SN लुगडप्रहारः/NP  विस्मर्तव्यः/KN ,/PUNC त्वया/SN च/APY पुत्रशोकदुःखम्/NP  विस्मर्तव्यम्/KN ?/PUNC इति/AUD उक्त्वा/KKS बहुमूल्यम्/NV  हरिकमणिम्/NP  तस्मै/SN दत्त्वा/KKS -/PUNC “/PUNC अतः/A परम्/A  पुनः/A त्वया/SN न/ANआगन्त्वयम्/KN ”/PUNC इति/AUD पुनः/A उक्त्वा/KKS विवरान्तर्गतः/KN ।/PUNC 
 ब्राह्मणम्/NP च/APY मणिं/NP  गृहीत्वा/KKS पुत्रबुद्धिम्/NP  निन्दयन्/KP स्वगृहम्/NP आगतः/KN ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP — /PUNC “/PUNC चितिकाम्/NV  दीपिताम्/NP  पश्य/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 तत्/A अस्मिन्/SN हते/KN अयत्नात्/NP एव/INTF राज्यम्/NP अकण्टकम्/NP  भवतः/SN भवति/KP “/PUNC ।/PUNC 
 तस्यै/SN तद्/SNV वचनम्/NP  श्रुत्वा/KKS क्रूराक्षम्/NS  पप्रच्छ/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC त्वम्/SN  किम्/AP  मन्यसे/KP ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC 
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC निर्दयम्/NP एतत्/SN यत्/SN अनेन/NP अभिहितम्/KN ।/PUNC यत्/A कारणम्/NP  “/PUNC शरणागतः/NP  न/ANबध्यते/KP ।/PUNC सुष्ठु/NV खलु/A इदम्/SNV आख्यानम्/NP -/PUNC 
 श्रूयते/KP हि/A कपोतेन/NP शत्रुः/NP शरणम्/NP आगतः/KN ।/PUNC 
 पूजितः/KN च/APY यथान्यायम्/NP  स्वैः/NP च/APY मांसैः/NP निमन्त्रितः/KN ॥/PUNC 132/PUNC ॥/PUNC 
अरिमर्दनः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC क्रूराक्षः/NS कथयति/KP -/PUNC 
[/PUNC ८/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC कपोतलुब्धककथा/NS )/PUNC 
कश्चित्/SN क्षुद्रसमाचारः/NS प्राणिनाम्/NP  कालसन्निभः/NS ।/PUNC 
विचचार/KP महारण्ये/NP घोरः/NS शकुनिलुब्धकः/NP ॥/PUNC 133/PUNC ॥/PUNC 
नैव/A कश्चित्/SN सुवृत्तस्य/NP न/ANसम्बन्धी/NP न/ANबान्धवः/NP ।/PUNC 
सः/SN  तैः/SN सर्वैः/SN परित्यक्तः/KN तेन/SN रौद्रेण/NP कर्मणा/NP ॥/PUNC 134/PUNC ॥/PUNC 
अथवा/A -/PUNC 
ये/SSN नृशंसा/NS दुरात्मानः/NS प्राणिनाम्/NP प्राणनाशकः/NS ।/PUNC 
उद्वेजनीया/NS भूतानाम्/NP व्याला/NP इव/SD भवन्ति/KP ते/SSN ॥/PUNC 135/PUNC ॥/PUNC 
सः/SN पञ्जरकम्/NP आदाय/KKS पाशम्/NP च/APY लगुडम्/NP तथा/A ।/PUNC 
नित्यम/A एव/INTF वनम्/NP  याति/KP सर्वप्राणिविहिंसकः/NS ॥/PUNC 136/PUNC ॥/PUNC 
अन्येद्युः/A भ्रमतः/KNV तस्य/SN वने/NP कापि/SN कपोतिका/NP ।/PUNC 
जाता/KNV हस्तगता/KN ताम्/SN  सः/SN  प्राक्षिपत्/KP पञ्जरान्तरे/NP ॥/PUNC 137/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A कृष्णा/NV दिशः/NP सर्वा/SN वनस्थस्य/NP अभवन्/KP घनैः/NP ।/PUNC 
वातवृष्टिः/NP च/APY महती/NS क्षयकाल/NP इव/SD अभवत्/KP ॥/PUNC 138/PUNC ॥/PUNC 
ततः/A सः/SN  त्रस्तहृदयः/NS कम्पमानः/NS  मुहुः/KV मुहुः/DV ।/PUNC 
अन्वेषयन्/KNV परित्राणम्/NP आससाद/KP वनस्पतिम्/NP ॥/PUNC 139/PUNC ॥/PUNC 
मुहूर्त्तम्/NP  पश्यते/KP यावत्/A वियत्/NP विमलतारकम्/NS ।/PUNC 
प्राप्य/KN वृक्षम्/NP  वदति/KP एवम्/AUD —/PUNC “/PUNC यः/SN अत्र/A तिष्ठति/KP कश्चन/SN ॥/PUNC 140/PUNC ॥ /PUNC 
तस्य/SN अहम्/SN  शरणम्/NP  प्राप्तः/KN सः/SN  परित्रातु/KP माम्/SN इति/AUD ।/PUNC 
शीतेन/NP भिद्यमानम्/NS  च/APY क्षुधया/NP गतचेतसम्/NS ”/PUNC ॥/PUNC 141/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A तस्य/SNV तरोः/NP स्कन्धे/NP कपोतः/NP सुचिरोषितः/NS ।/PUNC 
भार्याविरहितः/NS तिष्ठन्/KNV विललाप/KP सुदुःखितः/NS ॥/PUNC 142/PUNC ॥/PUNC 
 “/PUNC वातवर्षः/NP महान/NS आसीत्/KP न/ANच/APY आगच्छति/KP मे/SN प्रिया/NP ।/PUNC 
तया/SN विरहितम्/KN  हि/A एतत्/SNV शून्यम्/NV अद्य/A गृहम्/NP  मम/SN ॥/PUNC 143/PUNC ॥/PUNC 
पतिव्रता/NV पतिप्राणा/NV पत्युः/NP प्रियहिते/NP रता/NV ।/PUNC 
यस्य/SN स्यात्/KP तादृशी/SNV भार्या/NP धन्यः/NV सः/SNV  पुरुषः/NP भुवि/NP ॥/PUNC 144/PUNC ॥/PUNC 
न/ANगृहम्/DV  गृहम्/NP इति/AUD आहुः/KP गृहिणी/NP गृहम्/NP उच्यते/KP ।/PUNC 
गृहम्/NP  हि/A गृहिणीहीनम्/NV अरण्यसदृशम्/NP  मतम्/KN ॥/PUNC 145/PUNC ॥/PUNC 
पञ्जरस्था/NS ततः/A श्रुत्वा/KKS भर्तुः/NP दुःखान्वितम्/SN  वचः/NP ।/PUNC 
कपोतिका/NP सुसन्तुष्टा/NS वाक्यम्/NP च/APY इदम्/SNV अथ/A आह/KP सा/SN ॥/PUNC 146/PUNC ॥/PUNC 
 “/PUNC न/ANसा/SN स्त्री/NP इति/AUD अभिमन्तव्या/KN यस्या/SN भर्ता/NP न/ANतुष्यति/KP ।/PUNC 
तुष्टे/KN भर्त्तरि/NP नारीणाम्/NP  तुष्टाः/KN स्युः/KP सर्वदेवताः/NP ॥/PUNC 147/PUNC ॥/PUNC 
दावाग्निना/NP विदग्ध/KN एव/SD सपुष्पस्तबका/NV लता/NP ।/PUNC 
भस्मीभवतु/KP सा/SNV नारी/NP यस्या/SN भर्ता/NP न/ANतुष्यति/KP ॥/PUNC 148/PUNC ॥/PUNC 
मितम्/NP  ददाति/KP हि/A पिता/NP मितम्/NP  भ्राता/NP मितम्/NP  सुतः/NP ।/PUNC 
अमितस्य/NP हि/A दातारम्/NV  भर्त्तारम्/NP  का/SN न/ANपूजयेत्/KP ”/PUNC ॥/PUNC 149/PUNC ॥/PUNC 
पुनः/KV च/A अब्रवीत्/KP -/PUNC 
 “/PUNC श्रृणुषु/KP अवहितः/KN कान्त/NP !/PUNC यत्/A ते/SN वक्ष्यामि/KP अहम्/SN  हितम्/KN ।/PUNC 
 प्राणैः/NP अपि/A त्वया/SN नित्यम्/A  संरक्ष्यः/KP शरणागतः/KN ॥/PUNC 150/PUNC ॥/PUNC 
 एष/SNV शाकुनिकः/NP शेते/KP तव/SN आवासम्/NP  समाश्रितः/KN ।/PUNC 
 शीतार्त्तः/NV च/APY क्षुधार्त्तः/NV च/APY पूजाम्/NP अस्मै/SN समाचर/KP ॥/PUNC 151/PUNC ॥/PUNC 
 यः/SN सायम्/NP अतिथिम्/NP  प्राप्तम्/KN  यथाशक्ति/NP न/ANपूजयेत्/KP ।/PUNC 
 तस्य/SN असौ/SN दुष्कृतम्/NP  दत्त्वा/KKS सुकृतम्/NP  च/APY अपकर्षति/KP ॥/PUNC 152/PUNC ॥/PUNC 
 मा/N च/APY अस्मै/SN त्वम्/SN  कृथा/KP द्वेषम्/NP  बद्धा/KN अनेन/SN इति/AUD मत्/SN प्रिया/NP ।/PUNC 
 स्वकृतैः/NP एव/INTF बद्धः/KN अहम्/SN  प्राक्तनैः/NV कर्मबन्धनैः/NP ॥/PUNC 153/PUNC ॥/PUNC 
यतः/A —/PUNC 
 दारिद्र्यरोगदुःखानि/NP बन्धनव्यसनानि/NP च/APY ।/PUNC 
 आत्म/NP अपराधवृक्षस्य/NP फलानि/NP एतानि/SNV देहिनाम्/KP ॥/PUNC 154/PUNC ॥/PUNC 
 तस्मात्/A त्वम्/SN  द्वेषम्/NP उत्सृज्य/KKS मद्बन्धनसमुद्भवम्/NV ।/PUNC 
 धर्मे/NP मनः/NP समाधाय/KKS पूजय/KP एनम्/SN  यथाविधि/NP ”/PUNC ॥/PUNC 155/PUNC ॥/PUNC 
 तस्याः/SN तत्/SNV वचनम्/NP  श्रुत्वा/KKS धर्मयुक्तिसमन्वितम्/NV ।/PUNC 
 उपगम्य/KKS ततः/A अधृष्टः/NV कपोतः/NP प्राह/KP लुब्धकम्/NP ॥/PUNC 156/PUNC ॥/PUNC 
 “/PUNC भद्र/NP !/PUNC सुस्वागतम्/NP  ते/SN अस्तु/KP ब्रूहि/KP किम्/AP करवाणि/KP ते/SN ।/PUNC 
 सन्तापः/NP च/APY न/ANकर्त्तव्यः/NP स्वगृहे/NP वर्तते/KP भवान्/SN ”/PUNC ॥/PUNC 157/PUNC ॥/PUNC 
 तस्य/SN तत्/SNV वचनम्/NP  श्रुत्वा/KKS प्रत्युवाच/KP विहङ्गहा/NP ।/PUNC 
 “/PUNC कपोत/NP !/PUNC खलु/A शीतम्/NP  मे/SN हिमत्राणम्/NP  विधीयताम्/KP ”/PUNC ॥/PUNC 158/PUNC ॥ /PUNC 
 सः/SN गत्वा/KKS अङ्गारकम्/NP  नीत्वा/KKS पातयामास/KP पावकम्/NP ।/PUNC 
 ततः/A शुष्केषु/NV पर्णेषु/NP तम्/SN आशु/KV समदीपयत्/KP ॥/PUNC 159/PUNC ॥/PUNC 
 सुसन्दीप्तम्/KN  ततः/A कृत्वा/KKS तम/SN आह/KP शरणागतम्/NP ।/PUNC 
 “प्रतापयस्व/KP विश्रब्धम्/NP  स्वगात्राणि/NP अत्र/A निर्भयः/NP ॥/PUNC 160/PUNC ॥/PUNC 
 न/ANच/APY अस्ति/KP विभवः/NP कश्चित्/SN नाशये/KP येन/SN ते/SN क्षुधम्/NP ।/PUNC
 सहस्रम्/SAMY  भरते/KP कश्चित्/SN शतम्/SAMY अन्यः/SN दश/SAMY अपरः/SN ।/PUNC 
 मम/SN त्वकृतपुण्यस्य/NP क्षुद्रस्य/NP आत्मा/NP अपि/A दुर्भरः/NP ॥/PUNC 161/PUNC ॥/PUNC 
 एकस्य/SAMY अपि/A अतिथेः/NP अन्नम्/NP यः/SN प्रदातुम्/KN न/ANशक्तिमान्/NP ।/PUNC 
 तस्य/SN अनेकपरिक्लेशे/NV गृहे/NP किम्/AP वसतः/KN फलम्/NP ?/PUNC ॥/PUNC 162/PUNC ॥/PUNC 
 तत्/A तथा/A साधयाम्/KP एतत्/SNV शरीरम्/NP दुःखजीवितम्/NV ।/PUNC 
 यथा/A भूयः/NP  न/ANवक्ष्यामि/KP न/ANअस्ति/KP इति/AUD अर्थिसमागमे/NP ”/PUNC ॥/PUNC 163/PUNC ॥/PUNC 
 सः/SN  निनिन्द/KP किल/A आत्मानम्/NP न/ANतु/A तम्/SN  लुब्धकम्/NP  पुनः/A ।/PUNC 
 उवाच/KP “/PUNC तर्पयिष्ये/KP त्वाम्/SN मुहूर्त्तम्/NP  प्रतिपालय/KP ”/PUNC ॥/PUNC 164/PUNC ॥/PUNC 
 एवम्/AUD उक्त्वा/KKS सः/SN धर्मात्मा/NP प्रहृष्टेन/NP अन्तरात्मना/NP ।/PUNC 
 तम्/SNV अग्निम्/NP सम्परिक्रम्य/KKS प्रविवेश/KP स्ववेश्मवत्/NV ॥/PUNC 165/PUNC ॥/PUNC 
 ततः/A तम्/SN लुब्धकः/NP  दृष्टवा/KKS कृपया/NP पीडितः/KN भृशम्/NP ।/PUNC 
 कपोतम्/NP अग्नौ/NP पतितम्/NV  वाक्यमम्/NP एतत्/SNV अभाषत/KP ॥/PUNC 166/PUNC ॥/PUNC 
 “/PUNC यः/SN करोति/KP नरः/NP पापम्/NP न/ANतस्य/SN आत्मा/NP ध्रुवम्/NP प्रियः/NV ।/PUNC 
आत्मना/NP हि/A कृतम्/KN पापम्/NP आत्मना/NP एव/AUD हि/A भुज्यते/KP ॥/PUNC 167/PUNC ॥/PUNC 
 सः/SNV अहम्/SN  पापमतिः/NP च/APY एव/AUD पापकर्मरतः/NV सदा/A ।/PUNC 
 पतिष्यामि/KP महाघोरे/NV नरके/NP न/ANअत्र/A संशयः/NP ॥/PUNC 168/PUNC ॥/PUNC 
 नूनम्/A  मम/SN नृशंसस्य/NP प्रति/AUP आदर्शः/NP सुदर्शितः/KN ।/PUNC 
 प्रयच्छता/KN स्वमांसानि/NP कपोतेन/NP महात्मना/NV ॥/PUNC 169/PUNC ॥/PUNC 
 अद्य/A प्रभृति/A देहम्/NP स्वम्/NV  सर्वभोगविवर्जितम्/NV ।/PUNC 
 तोयम्/NP स्वल्पम्/NV यथा/A ग्रीष्मे/NP शोषयिष्यामि/KP अहम्/SN  पुनः/KV ॥/PUNC 170/PUNC ॥/PUNC 
 शीतवातातपसहः/NV कृशाङ्गः/NV मलिनः/NV तथा/A ।/PUNC 
 उपवासैः/NP बहुविधैः/NV चरिष्ये/KP धर्मम्/NP उत्तमम्/NV ”/PUNC ॥/PUNC 171/PUNC ॥/PUNC 
 ततो/A यष्टिम्/NP शलाकाम्/NP च/APY जालकम्/NP पञ्जरम्/NP तथा/A ।/PUNC 
 बभञ्ज/KP लुब्धकः/NP दीनाम्/NV कपोतीम्/NP च/APY मुमोच/KP ताम्/SNV ॥/PUNC 172/PUNC ॥/PUNC 
 लुब्धकेन/NP ततः/A मुक्ता/NV दृष्टवा/KKS अग्नौ/NP पतितम्/NV पतिम्/NP ।/PUNC 
 कपोती/NP विललापार्त्ता/NV शोकसन्तापमानसा/NV ॥/PUNC 173/PUNC ॥/PUNC 
 “/PUNC न/ANकार्यम्/NP अद्य/A मे/SN नाथ/NP !/PUNC जीवितेन/NP त्वया/SN विना/AUP ।/PUNC 
 दीनायाः/NV पतिहीनायाः/NV किम्/AP  नार्या/NP जीविते/KN फलम्/NP ॥/PUNC 174/PUNC ॥/PUNC 
 मानः/NP  दर्पः/NP तु/A अहङ्कारः/NP कुलपूजा/NP च/APY बन्धुषु/NP ।/PUNC 
 दासभृत्यजनेषु/NP आज्ञा/NP वैधव्येन/NP प्रणश्यति/KP ॥/PUNC 175/PUNC ॥/PUNC 
 एवम्/AUD  विलप्य/KKS बहुशः/NP कृपणम्/NV  भृशदुःखिता/NV ।/PUNC 
 पतिव्रता/NV सुसन्दीप्तम्/NV तम्/SNV एव/AUD अग्निम्/NP विवेश/KP सा/SN ॥/PUNC 176/PUNC ॥/PUNC 
 ततः/A दिव्याम्बरधरा/NV दिव्याभरणभूषिता/NV ।/PUNC 
 भर्तारम्/NP सा/SN विमानस्थम्/NV  ददर्श/KKS स्वम्/NP कपोतिका/NP ॥/PUNC 177/PUNC ॥/PUNC 
 सः/SN अपि/A दिव्यतनुः/NP भूत्वा/KKS यथार्थम्/NP इदम्/SN अब्रवीत्/KP ।/PUNC 
 अहो/ASMB माम्/SN अनुगच्छन्त्या/NV कृतम्/KN साधु/NP शुभे/NP !/PUNC त्वया/SN ॥/PUNC 178/PUNC ।।/PUNC 
 तिस्रः/SAM कोट्योऽर्द्धकोटी/SAMY च/APY यानि/SN रोमाणि/NP मानुषे/NP ।/PUNC 
 तावत्काल/NP वसेत्/KP स्वर्गे/NP भर्तारम्/NP  या/SN अनुगच्छति/KP ॥/PUNC 179/PUNC ॥/PUNC 
 कपोतदेहः/NP सूर्यास्ते/NP प्रत्यहम्/NP  सुखम्/NP अन्वभूत्/KP ।/PUNC 
 कपोतदेहवत्सा/NP आसीत्/KP प्राक्पुण्यप्रभवम्/NP  हि/A तत्/SN ॥/PUNC 180/PUNC ॥/PUNC 
 शोकाविष्टः/NV ततः/A  व्याधः/NP  विवेश/KP च/APY वनम्/NP  घनम्/NV ।/PUNC 
 प्राणिहिंसाम्/NP परित्यज्य/KKS बहुनिर्वेदवान्/KN भृशम्/NP ॥/PUNC 181/PUNC ॥/PUNC 
 तत्र/A दावानलम्/NP  दृष्टवा/KKS विवेश/KP विरताशयः/NV ।/PUNC 
 निर्दग्धकल्मषः/NP  भूत्वा/KKS स्वर्गसौख्यम्/NP अवाप्तवान्/KN ॥/PUNC 182/PUNC ॥/PUNC 
 अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC श्रूयते/KP हि/A कपोतेन/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS अरिमर्दनः/NS  दीप्ताक्षम्/NS  पृष्टवान्/KN -/PUNC “/PUNC एवम्/SN अवस्थिते/KN किम्/AP भवान्/SN मन्यते/KP ”/PUNC ? । /PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC न/ANहन्तव्य/KN एव/AUD अयम्/SN ।/PUNC यतः/A -/PUNC 
 या/SN मम/SN उद्विजते/KP नित्यम्/A  सा/SN माम्/SN अद्य/A अवगूहते/KP ।/PUNC 
 प्रियकारक/NP !/PUNC भद्रम्/NP  ते/SN यत्/SSN मम/SN अस्ति/KP हरस्व/KP तत्/SSN ”/PUNC ॥/PUNC 183/PUNC ॥ /PUNC 
चौरेण/NP च/APY अपि/A उक्तम्/KN -/PUNC 
 “हर्तव्यम्/KN  ते/SN न/ANपश्यामि/KP हर्तव्यम्/KN  चेत्/A भविष्यति/KP ।/PUNC 
 पुनः/KV अपि/A आगमिष्यामि/KP यत्/A इयम्/SN  न/ANअवगूहते/KP ”/PUNC ॥/PUNC 184/PUNC ॥/PUNC 
अरिमर्दनः/NS पृष्टवान्/KN –/PUNC “/PUNC का/SN च/APY न/ANअवगूहते/KP ?/PUNC कः/SN च/APY अयम्/SNV  चौरः/NP ? /PUNC इति/AUD विस्तरतः/KV श्रोतुम्/KN इच्छामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 दीप्ताक्षः/NS कथयति/KP -/PUNC 
[/PUNC ९/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC चौरवृद्धवणिक्-कथा/NS )/PUNC 
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV अधिष्ठाने/SNV कामातुरः/NS  नाम/A वृद्धवणिक्/NP ।/PUNC तेन/SN च/APY कामोपहतचेतसा/NP मृतभार्येण/NP काचित्/SNV निर्धनवणिकसुता/NP प्रभूतम्/NV धनम्/NP  दत्त्वा/KKS उद्वाहिता/KN ।/PUNC अथ/A सा/SNV दुःखाभिभूता/NP तम्/SNV वृद्धवणिजम्/NP द्रष्टुम्/KKS अपि/A न/ANशशाक/KP ।/PUNC युक्तम्/KN च/APY एतत्/SN -/PUNC 
श्वेतम्/NV पदम्/NP शिरसि/NP यत्/SSN तु/A शिरोरुहाणां/NP ,/PUNC 
स्थानम्/NP परम्/A परिभवस्य/NP तत्/SN एव/AUD पुंसाम्/NP ।/PUNC 
आरोपितास्थिशकलम्/NP परिहृत्य/KKS यान्ति/KP ,/PUNC 
 चाण्डालकूपम्/NP इव/SD दूरतरम्/NP  तरुण्यः/NP ॥/PUNC 185/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/APY -/PUNC 
 गात्रम्/NP  सङ्कुचितम्/NV  गतिविगलिता/NV दन्ताः/NP च/APY नाशङ्गताः/NV ,/PUNC 
 दृष्टिः/NP भ्राम्यति/KP रूपम्/NP अपि/A उपहतम्/KN  वक्त्रम्/NP च/APY लालायते/KP ।/PUNC 
 वाक्यम्/NP  न/ANएव/A करोति/KP बान्धवजनः/NP पत्नी/NP न/ANशुश्रूषते/KP ,/PUNC 
 धिक्/A कष्टम्/NP  जरयाभिभूतपुरुषम्/NP  पुत्रः/NP अपि/A अवज्ञायते/KP ॥/PUNC 186/PUNC ॥/PUNC 
 अथ/A कदाचित्/A सा/SN तेन/SN सकशयने/NP पराङ्मुखी/NV यावत्/AVK तिष्ठति/KP तावद्/AVK गृहे/NP चोरः/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC सा/SN अपि/A तम्/SNV  चौरम्/NP  दृष्टवा/KKS भयव्याकुलिता/NV वृद्धम्/NP अपि/A तम्/SNV  पतिम्/NP  गाढम्/KV  समालिलिङ्ग/KP । /PUNC सः/SN अपि/A विस्मयात्पुलकाङ्कितसर्वगात्रः/NV चिन्तयामास/KP —/PUNC ”/PUNC अहो/BS ,/PUNC किम्/AP एषा/SN माम्/SN अद्य/A अवगूहते/KP ?/PUNC ”/PUNC यावत्/AVK निपुणतया/KV पश्यति/KP तावद्/AVK गृहकोणैकदेशे/NP चौरम्/NP  दृष्टवा/KKS व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC नूनम्/A एषा/SN अस्य/SN भयात्/NP माम्/SN आलिङ्गति/KP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD ज्ञात्वा/KKS तम्/SNV  चौरम्/NP आह/KP -/PUNC 
 “/PUNC या/SSN ममोद्विजते/KP नित्यम्/A  सा/SSN माम्/SN अद्य/A अवगूहते/KP ।/PUNC 
 प्रियकारक/NP !/PUNC भद्रम्/NP  ते/SN यत्/SSN मम/SN अस्ति/KP हरस्व/KP तत्/SSN ”/PUNC ॥/PUNC 187/PUNC ॥ /PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS चौरः/NP अपि/A आह/KP -/PUNC 
 “/PUNC हर्तव्यम्/KN  ते/SN न/ANपश्यामि/KP हर्तव्यम्/KN  चेत्/A भविष्यति/KP ।/PUNC 
 पुनः/KV अपि/A आगमिष्यामि/KP यदि/A इयम्/SN  न/ANअवगूहते/KP ”/PUNC ॥/PUNC 188/PUNC ॥/PUNC 
तस्मात्/A चौरस्य/NP अपि/A उपकारिणः/NP श्रेयः/NP चिन्त्यते/KP ,/PUNC किम्/AP  पुनः/KV न/ANशरणागतस्य/NP ?/PUNC । /PUNC अपि/A च/APY अयम्/SN तैः/SN विप्रकृतः/KN अस्माकम्/SN एव/INTF पुष्टये/NP भविष्यति/KP ,/PUNC तदीयरन्ध्रदर्शनाय/KKS च/AVK ;/PUNC इति/AUD अनेककारणेन/NP अयम्/SN अवध्यः/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
एतत्/SN आकर्ण्य/KKS अरिमर्दनः/NS अन्यम्/SNV  सचिवम्/NP  वक्रनासम्/NS  पप्रच्छ/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC साम्प्रतम्/A एव/A स्थिते/KN किम्/AP  कर्तव्यम्/KN ”/PUNC ?/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC देव/NP !/PUNC अवध्यः/NV अयम्/SN ।/PUNC यतः/A -/PUNC 
 शत्रवः/NP अपि/A हितायैव/NP विवदन्तः/KN परस्परम्/SN ।/PUNC 
 चौरेण/NP जीवितम्/NP  दत्तम्/KN  राक्षसेन/NP तु/A गोयुगम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 189/PUNC ॥/PUNC 
अरिमर्दनः/NS प्राह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC 
वक्रनासः/NS कथयति/KP -/PUNC 

 [/PUNC १०/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC ब्राह्मणचौरपिशाच-कथा/NS )/PUNC 
 अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV अधिष्ठाने/NP दरिद्रः/NV  द्रोणनामा/NS ब्राह्मणः/NP प्रतिग्रहधनः/NV ,/PUNC सततम्/A  विशिष्टवस्त्रानुलेपनगन्धमाल्यालङ्कारताम्बूलादिभोगपरिवर्जितः/NV ,/PUNC प्ररूढकेशश्मश्रुनखरोमोपचितः/NV ,/PUNC शीतोष्णवातवर्षादिभिः/NP परिशोषितशरीरः/NV ।/PUNC तस्य/SN च/APY केन/SNV अपि/A यजमानेन/NP अनुकम्पया/NP शिशुगोयुगम्/NP  दत्तम्/KN ।/PUNC ब्राह्मणेन/NP च/APY बालभावात्/NP आरभ्य/NP याचितघृततैलयवसादिभिः/NP सम्वर्ध्य/KKS सुपुष्टम्/NP  कृतम्/KN ।/PUNC 
 तत्/SN च/APY दृष्टवा/KKS सहसा/NP एव/A कश्चित्/SNV चौरः/NP चिन्तितवान्/KP -/PUNC “/PUNC अहम्/SN अस्य/SNV ब्राह्मणस्य/NP गोयुगम्/NP इदम्/SNV अपहरिष्यामि/KP ”/PUNC इति/AUD निश्चित्य/KKS निशायाम्/NP बन्धनपाशम्/NP गृहीत्वा/KKS यावत्/A प्रस्थितः/KN तावत्/KKS अर्धमार्गे/NP प्रविरलतीक्ष्णदन्तपङ्क्तिः/NV ,/PUNC उन्नतनासावंशः/NV ,/PUNC प्रकटरक्तान्तनयनः/NV ,/PUNC उपचितस्नायुसन्ततगात्रः/NV ,/PUNC शुष्ककपोलः/NV ,/PUNC सुहुतहुतवहपिङ्गलश्मश्रुकेशशरीरः/NV कश्चित्/SN दृष्टः/KN ।/PUNC दृष्टवा/KKS च/APY तम्/SN  तीव्रभयत्रस्तः/NV अपि/A चौरः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC कः/SN  भवान्/SN ?/PUNC ” /PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC सत्यवचनः/NS अहम्/SN  ब्रह्मराक्षसः/NV ।/PUNC भवान्/SN अपि/A आत्मानम्/NP  निवेदयतु/KP ।/PUNC “/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC ”/PUNC अहम्/SN  क्रूरकर्मा/NS चौरः/NP ,/PUNC दरिद्रब्राह्मणस्य/NP गोयुगम्/NP  हर्तुम्/KN  प्रस्थितः/KN अस्मि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 अथ/A जातप्रत्ययः/NV राक्षसः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC षष्ठाह्नकालिकः/NV अहम्/SN ।/PUNC अतः/A तम्/SNV एव/AUD ब्राह्मणम्/SN अद्य/A भक्षयिष्यामि/KP ।/PUNC तत्/SN सुन्दरम्/NV इदम्/SN ।/PUNC एककार्यावेलायाम्/NP । /PUNC “/PUNC
 अथ/A तौ/SN तत्र/A गत्वा/KKS एकान्ते/NP कालम्/NP अन्वेषयन्तौ/NV स्थितौ/KN ।/PUNC 
 प्रसुप्ते/NV च/APY ब्राह्मणे/NP तद्भक्षणार्थम्/NP  प्रस्थितम्/KNV  राक्षसम्/NP  दृष्टवा/KKS चौरः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC न/ANएष/SNV न्यायः/NP ।/PUNC यतः/A  गोयुगे/NP मया/SN अपहृते/KNV पश्चात्/A त्त्वम्/SN एनम्/SNV  ब्राह्मणम्/NP  भक्षय/KP ।/PUNC “/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC कदाचित्/A अयम्/SNV  ब्राह्मणः/NP  गोशब्देन/NP बुध्येत/KP तत्/A अनर्थकः/NV अयम्/SNV  मम/SN आरम्भः/NP स्यात्/KP ।/PUNC “/PUNC 
 चौरः/NP अपि/A अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC तव/SN अपि/A यदि/A भक्षणायोपस्थितस्य/NP अन्तरे/NP एकः/SAMY अपि/A अन्तरायः/NP स्यात्/KP ,/PUNC तत्/A अहम्/SN अपि/A न/ANशक्नोमि/KP गोयुगम्/NP अपहर्तुम्/KKS ।/PUNC अतः/A प्रथमम्/SAMY  मया/SN अपहृते/KNV गोयुगे/NV पश्चात्/A त्वया/SN ब्राह्मणः/NP  भक्षयितव्यः/KN ।/PUNC “/PUNC 
 इत्थम्/A  च/APY अहमहमिकया/NP तयोः/SN विवदतोः/KN समुत्पन्ने/KN द्वैधे/NP प्रतिरववशात्/NP ब्राह्मणः/NP  जजागार/KP ।/PUNC 
अथ/A तम्/SNV  चौरः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC ब्राह्मण/NP !/PUNC त्वाम्/SN एव/A अयम्/SNV  राक्षसः/NP  भक्षयितुम्/KN इच्छति/KP ।/PUNC “/PUNC 
 एवम्/AUD  श्रुत्वा/KKS उत्थाय/KKS ब्राह्मणः/NP सावधानः/NP  भूत्वा/KKS इष्टदेवतामन्त्रध्यानेन/NP आत्मानम्/NP  राक्षसात्/NP उद्गूर्णलगुडेन/NP च/APY चौराद्/NP गोयुगम्/NP  ररक्ष/KP ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC शत्रवः/NP अपि/A हिताय/NP एव/AUD ”/PUNC इति/PUNC ।/PUNC  
 अथ/A तस्य/SN वचनम्/NP अवधार्य/KKS अरिमर्दनः/NS पुनः/A अपि/A प्राकारकर्णम्/NS अपृच्छत्/KP -/PUNC “/PUNC कथय/KP किम्/AP अत्र/A मन्यते/KP भवान्/SN ?/PUNC ”/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC अवध्यः/NV  एव/A अयम्/SN ।/PUNC यतः/A  रक्षितेन/NV अनेन/SN कदाचित्/A परस्परप्रीत्या/NP कालः/NP सुखेन/NP गच्छति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
 परस्पर/SN मर्माणि/NP ये/SSN न/ANरक्षन्ति/KP जन्तवः/NP ।/PUNC 
 त/SSN एव/A निधनम्/NP  यान्ति/KP वल्मीकोदरसर्पवत्/KV ”/PUNC ॥/PUNC 190/PUNC ॥/PUNC 
अरिमर्दनः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC ।/PUNC 
प्राकरकर्णः/NS कथयति/KP -/PUNC 

 [/PUNC ११/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC वल्मीकोदरस्थसर्पकथा/NS )/PUNC 
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV नगरे/NP देवशक्तिः/NS नाम/A राजा/NP ।/PUNC तस्य/SN च/APY पुत्रः/NP  जठरवल्मीकाश्रयेणोरगेण/NP प्रतिदिनम्/A  प्रत्यङ्गम्/NP  क्षीयते/KP ।/PUNC अनेकोपचारैः/NP सत्/KP वैद्यैः/NP सत्/KP शास्त्रोपदिष्टौषधयुक्त्या/NP चिकित्स्यमानः/NV अपि/A न/ANस्वास्थ्यमम्/NP  आप्नोति/KP ।/PUNC 
 अथ/A असौ/SNV राजपुत्रः/NP  निर्वेदात्/NP देशान्तरम्/NP  गतः/KN ।/PUNC कस्मिंश्चित्/SNV नगरे/SNV भिक्षाटनम्/NP  कृत्वा/KKS महति/NV देवालये/NP कालम्/NP  यापयति/KP ।/PUNC 
 अथ/A तत्र/A नगरे/NP बलिः/NS नाम/A राजा/NP अस्ते/KP ।/PUNC तस्य/SN च/APY द्वे/SAMY दुहितरौ/NP यौवनस्थे/NP तिष्ठतः/KP । /PUNC ते/SN च/APY प्रतिदिवसमादित्योदये/NP पितुः/NP पादान्तिकम्/NP आगत्य/KKS नमस्कारम्/NP  चक्रतुः/KP ।/PUNC तत्र/A च/APY एक/SAMY अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC विजयस्व/KP महाराज/NP !/PUNC यस्य/SN प्रसादात्सर्वम्/NP  सुखम्/NP लभ्यते/KP । /PUNC “/PUNC 
 द्वितीया/SAMY तु/A “/PUNC विहितम्/KN  भुङक्ष्व/KP महाराज/NP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD ब्रवीति/KP ।/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS प्रकुपितः/NV  राजा/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB  मन्त्रिणः/NP !/PUNC एनाम्/SNV  दुष्टभाषिणीम्/NV  कुमारिकाम्/NP  कस्यचित्/SNV वैदेशिकस्य/NP प्रयच्छत/KP ,/PUNC येन/SN निजविहितम्/KN इयम्/SN एव/A भुङ्क्ते/KP । /PUNC 
 अथ/A तथा/A इति/AUD प्रतिपद्य/KP ,/PUNC अल्पपरिवारा/NV सा/SNV कुमारिका/NP मन्त्रिभिः/NP तस्य/SNV देवकुलाश्रितराजपुत्रस्य/NP प्रतिपादिता/KN ।/PUNC सा/SN अपि/A प्रहृष्टमनसा/NV तम्/SNV  पतिम्/NP  देववत्/KV प्रतिपद्य/KKS आदाय/KKS च/APY अन्यविषयम्/NP  गता/KN ।/PUNC 
 ततः/A कस्मिंश्चित्/SNV दूरतरनगरप्रदेशे/SNV गत्वा/KKS तडागतटे/NP राजपुत्रम्/NP आवासरक्षायै/NP निरूप्य/KKS स्वयम्/NP च/APY घृततैललवणतण्डलादिक्रयनिमित्तम्/NP  सपरिवारा/NP गता/KN ।/PUNC कृत्वा/KKS च/APY क्रयविक्रयम्/NP  यावत्/A आगच्छति/KP तावत्/A सः/SNV  राजपुत्रः/NP  वल्मीकोपरि/NP कृतमूर्धा/NP प्रसुप्तः/KN ।/PUNC तस्य/SN च/APY मुखाद्/NP भुजगः/NP फणम्/NP  निष्क्रम्य/KKS वायुम्/NP अश्नाति/KP ।/PUNC तत्र/A एव/A च/APY वल्मीके/NP अपरः/SNV सर्पः/NP  निष्क्रम्य/KKS तथा/A एव/A आसीत्/KP । /PUNC 
 अथ/A तयोः/SN परस्परदर्शनेन/NP क्रोधसंरक्तलोचनयोः/NV मध्यात्/NP वल्मीकस्थेन/NV सर्पेण/NP उक्तम्/KN  भो/ASMB  भो/DV  दुरात्मन्/NP ! /PUNC कथम्/A  सुन्दरसर्वाङ्गम्/NV  राजपुत्रम्/NP इत्थम्/A  कदर्ययसि/KP ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC 
 (/PUNC ततः/A)/PUNC मुखस्थः/NV अहिः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भोः/DV  भोः/ASMB !/PUNC त्वया/SN अपि/A दुरात्मन/NP अस्य/SNV बल्मीकस्य/NP मध्ये/NP कथम्/A इदम्/SNV  दूषितम्/NV  हाटकपूर्णम्/NV  कलशयुगलम्/NP ?/PUNC ”/PUNC 
 एवम्/AUD परस्परस्य/SN मर्मानि/NP उद्घाटितवन्तौ/KN ।/PUNC 
पुनः/A वल्मीकस्थः/NV अहिः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB दुरात्मन्/NP !/PUNC भेषजम्/NP इदम्/SNV  ते/SN किम्/AP  कः/SN अपि/A न/ANजानाति/KP यत्/A जीर्णोत्कालितकाञ्जिकराजिकापानेन/NP भवान्/SN विनाशम्/NP उपयाति/KP ।/PUNC “ /PUNC 
 अथ/A उदरस्थः/NV अहिः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC तव/SN अपि/A एतत्/SNV भेषजम्/  किम्/AP  कश्चित्/SN अपि/A न/ANवेत्ति/KP यत्/A उष्णतैलेन/NP वा/APY महोष्णोदकेन/NP वा/APY तव/SN विनाशः/NP स्यात्/KP ?/PUNC ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 एवम्/A च/APY सा/SNV राजकन्या/NP विटपान्तरिता/NV तयोः/SN परस्परालापान्/NV मर्ममयान्/NP आकर्ण्य/KKS तथा/A एव/A अनुष्ठितवती/KN ।/PUNC विधायाव्यङ्गनीरोगम्/NV  भर्तारम्/NP  निधिम्/NP च/APY परम्/A आसाद्य/KKS स्वदेशाभिमुखम्/NP  प्रायात्/KP । /PUNC पितृमातृस्वजनैः/NP प्रतिपूजिता/KN विहितोपभोगम्/NP  प्राप्य/KKS सुखेनावस्थिता/KN ।/PUNC 
 अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC परस्परस्य/SN मर्माणि/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/A श्रुत्वा/KKS स्वयम्/NP अरिमर्दनः/NS अपि/A एवम्/A  समर्थितवान्/KP ।/PUNC तथा/A च/APY अनुष्ठितम्/KN  दृष्ट्वा/KKS अन्तर्लीनम्/NP  विहस्य/KKS रक्ताक्षः/NS पुनः/KV अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC कष्टम्/NP !/PUNC विनाशितः/KN अयम्/SN  भवद्भिः/SN अन्यायेन/NP स्वामी/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
 अपूज्या/NP यत्र/A पूज्यन्ते/KP पूज्यानाम्/NP विमानना/NP ।/PUNC 
 त्रीणि/SAMY तत्र/A प्रवर्तन्ते/KP दुर्भिक्षम्/NP  मरणम्/NP  भयम्/NP ॥/PUNC 191/PUNC ॥/PUNC 
 प्रत्यक्षे/NP अपि/A कृते/KN पापे/NP मूर्खः/NP साम्ना/NP प्रशाम्यति/KP ।/PUNC 
 रथकारः/NP स्वकाम्/NV  भार्याम्/NP  सजाराम्/NV शिरसा/NP अवहत्/KP ’/PUNC ॥/PUNC 192/PUNC ॥/PUNC 
मन्त्रिणः/NP प्राहुः/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC ।/PUNC 
रक्ताक्षः/NS कथयति/KP -/PUNC
 
 [/PUNC १२/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC रथकारवधू/NS -/PUNC कथा/NS )/PUNC 
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV अधिष्ठाने/NP वीरवरः/NS  नाम/A रथकारः/NP ।/PUNC तस्य/SN भार्या/NP कामदमनी/NS ।/PUNC सा/SN च/APY पुंश्चली/NV जनापवादयुक्ता/NV ।/PUNC सः/SN अपि/A तस्याः/SN परीक्षणार्थम्/NP व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC अथ/A मया/SN अस्याः/SN परीक्षणम्/NP कर्त्तव्यम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY यतः/A -/PUNC 
 यदि/A स्यात्/KP पावकः/NP शीतः/NV प्रोष्णः/NV  वा/APY शशलाञ्छनः/NP ।/PUNC 
 स्त्रीणाम्/NP  तदा/A सतीत्वम्/NP स्यात्/KP यदि/A स्यात्/KP दुर्जनः/NP हितः/NP ॥/PUNC 193/PUNC ॥/PUNC 
जानामि/KP च/APY एनाम्/SNV लोकवचनात्/NP असतीम्/NP ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
 यत्/ASMB च/APY वेदेषु/NP शास्त्रेषु/NP न/ANदृष्टम्/KN  न/ANच/APY संश्रुतम्/KN ।/PUNC 
 तत्/ASMB सर्वम्/SN  वेत्ति/KP लोकः/NP अयम्/SN यत्/SN स्यात्/KP ब्रह्माण्डमध्यगम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 194/PUNC ॥ /PUNC 
एवम्/A सम्प्रधार्य/KKS भार्याम्/NP अवोचत्/KP -/PUNC “/PUNC प्रिये/NP !/PUNC प्रभाते/NP अहम्/SN  ग्रामान्तरम्/NP  यास्यामि/KP ।/PUNC तत्र/A कतिचित्/SNV दिनानि/NP लगिष्यन्ति/KP ।/PUNC तत्/A त्वया/SN किम्/SN अपि/A पाथेयम्/NP  मम/SN योग्यम्/KN विधेयम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
सा/SN अपि/A तद्/SNV वचनं/NP श्रुत्वा/KKS हर्षितचित्ता/NV औत्सुक्यात्सर्वकार्याणि/NP सन्त्यज्य/KKS सिद्धम्/NV अन्नम्/NP  घृतशर्कराप्रायम्/NV अकरोत्/KP ।/PUNC 
 अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
 दुर्दिवसे/NP घनतिमिरे/NP दुःसञ्चारेषु/NP नगरमार्गेषु/NP ।/PUNC 
 पत्युः/NP विदेशगमने/NP परमसुखम्/NP  जघनचपलायाः/NP ॥/PUNC 195/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A असौ/SN प्रत्यूषे/NP उत्थाय/KKS स्वगृहात्/NP निर्गतः/KN ।/PUNC सा/SN अपि/A तम्/SN  प्रस्थितम्/KN विज्ञाय/KKS प्रहसितवदना/NV अङ्गसंस्कारम्/NP कुर्वाणा/KN कथञ्चित्तम्/KV  दिवसम्/NP अत्यवाहयत्/KP ।/PUNC अथ/A पूर्वपरिचितविटगृहे/NP गत्वा/KKS तम्/SN  प्रति/AUP उक्तवती/KP -/PUNC “/PUNC सः/SN  दुरात्मा/NV मे/SN पतिः/NP ग्रामान्तरम्/NP  गतः/KN ।/PUNC तत्/A त्वया/SN अस्मत्/SN गृहे/NP प्रसुप्ते/NV जने/NP समागन्तव्यम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
 तथा/A अनुष्ठिते/KN सः/SNV  रथकारः/NP अरण्ये/NP दिनम्/NP अतिवाह्य/KKS प्रदोषे/NP स्वगृहे/NP अपरद्वारेण/NP प्रविश्य/KKS शय्याधः/NP तले/NP निभृतः/KN  भूत्वा/KKS स्थितः/KN ।/PUNC एतस्मिन्/SNV अन्तरे/NP सः/SNV  देवदत्तः/NS समागत्य/KKS तत्र/A शयने/NP उपविष्टः/KN ।/PUNC तम्/SN दृष्टवा/KKS रोषाविष्टचित्तः/NV रथकारः/NP  व्यचिन्तयत्/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP एनम्/SN उत्थाय/KKS हन्मि/KP ?/PUNC अथवा/A हेलया/NP एव/INTF प्रसुप्तौ/NV द्वौ/SMKY अपि/A एतौ/SN व्यापादयामि/KP ?/PUNC परम्/A  पश्यामि/KP तावत्/A अस्याः/SN चेष्टितं/KN ,/PUNC श्रृणोमि/KP च/APY अनेन/SN सह/AUP अलापान्/NP ”/PUNC ।/PUNC 
 अत्र/A अन्तरे/NP सा/SN गृहद्वारम्/NP  निभृतम्/KV  पिधाय/KKS शयनतलम्/NP आरूढा/KN ।/PUNC अथ/A तस्याः/SN तत्र/A आरोहन्त्या/NV रथकारशरीरे/NP पादो/NP विलग्नः/KN ।/PUNC ततः/A सा/A व्यचिन्तयत्/KP —/PUNC “/PUNC नूनम्/A एतेन/SNV दुरात्मना/NV रथकारेण/NP मत्परीक्षणार्थम्/NP  भाव्यम्/KN ।/PUNC ततः/A स्त्रीचरित्रविज्ञानम्/NP  किम्/AP अपि/A करोमि/KP ”/PUNC । /PUNC 
 एवम्/A तस्याः/SN चिन्तयन्त्याः/NV सः/SNV  देवदत्तः/NS स्पर्शोत्सुकः/NV  बभूव/KP ।/PUNC अथ/A तया/SN कृताञ्जलिपुटया/NP अभिहितम्/KN -/PUNC भो/ASMB महानुभाव/NP !/PUNC न/ANमे/SN शरीरम्/NP  त्वया/SN स्पर्शनीयम्/NV ,/PUNC यतः/A अहम्/SN  पतिव्रता/NV महासती/NV च/APY ।/PUNC नचेत्/A शापं/NP दत्वा/KKS त्वाम्/SN भस्मसात्/NP करिष्यामि/KP ।/PUNC “ /PUNC 
 सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC यदि/A एवम्/A  तर्हि/A त्वया/SN किम्/AP अहम्/SN आहूतः/KN ?/PUNC ”/PUNC 
 सा/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC श्रृणुष्व/KP एकाग्रमनाः/NV ,/PUNC अहम्/SN अद्य/A प्रत्यूषे/NP देवतादर्शनार्थ/NP चण्डिकायतनम्/NP  गता/KN ।/PUNC तत्र/A अकस्मात्/A खे/NP वाणी/NP सञ्जाता/KN —/PUNC “/PUNC पुत्रि/NP !/PUNC किम्/AP  करोमि/KP ,/PUNC भक्ता/NP असि/KP मे/SN त्वम्/SN ,/PUNC परम्/A षण्मासाभ्यन्तरे/NP विधिनियोगात्/NP विधवा/NP भविष्यसि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 ततः/A मया/SN अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC भगवति/NP !/PUNC यथा/A त्वम्/SN आपदं/NP वेत्सि/KP ,/PUNC तथा/A तत्प्रतीकारम्/NP अपि/A जानासि/KP ।/PUNC तत्/A अस्ति/KP कश्चित्/SNV उपायः/NP  येन/SN मे/SN पतिः/NP शतसवत्सरजीवी/NP भवति/KP ?/PUNC ”/PUNC 
 ततः/A तया/SN अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC वत्से/NP !/PUNC सन्/KP अपि/A न/ANअस्ति/KP ,/PUNC यतः/A तव/SN आयत्तः/KN सः/SNV  प्रतीकारः/NP ।/PUNC “/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS मया/SN अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC देवि/NP !/PUNC यदि/A तत्/SNV मम/SN प्राणैः/NP भवति/KP तत्/SN आदेशय/KP ,/PUNC येन/SN करोमि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 अथ/A देव्या/NP अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC यदि/A अद्य/A परपुरुषेण/NP सह/AUP एकस्मिन्/SNV शयने/NP समारुह्य/KKS आलिङ्गनम्/NP  करोषि/KP ,/PUNC तत्/A तव/SN भर्त्तृसक्तः/NV अपमृत्युः/NP तस्य/SN सञ्चरति/KP ।/PUNC भर्त्ता/NP अपि/A पुनः/A वर्षशतम्/NP  जीवति/KP ।/PUNC तेन/SN त्वम्/SN  मया/SN अभ्यर्थितः/KN ।/PUNC तत्/A यत्/SN किञ्चित्/SNV कर्त्तुमनाः/KN तत्/SN कुरुष्व/KP ।/PUNC न/ANहि/A देवतावचनम्/NP अन्यथा/A भविष्यति/KP इति/AUD निश्चयः/NP ।/PUNC “/PUNC 
 ततः/A अन्तर्हासविकासमुखः/NV सः/SN  तत्/SNV उचितम्/NP आचचार/KP ।/PUNC सः/SNV अपि/A रथकारः/NP  मूर्खः/NV तस्याः/SN तत्/SNV वचनम्/NP आकर्ण्य/KKS पुलकाञ्चिततनुः/NV शय्याधस्तलात्/NP निष्क्रम्य/KKS ताम्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC साधु/NP पतिव्रते/NP !/PUNC साधु/NP कुलनन्दिनि/NP !/PUNC अहम्/SN  दुर्जनवचनशङ्कितहृदयः/NV त्वत्/SN परीक्षानिमित्तम्/NP  ग्रामान्तरव्याजम्/NP  कृत्वा/KKS अत्र/A खट्वाधः/NP तले/NP निभृतम्/NP  लीनः/NV ।/PUNC तत्/A एहि/KP ,/PUNC आलिङ्ग/KP माम/SN ।/PUNC त्वम्/SN  स्वभर्तृभक्तानाम्/NP  मुख्या/NV नारीणाम्/NP  यत्/A एवम्/A  ब्रह्मव्रतम्/NP  प्रसङ्गे/NP अपि/A पालितवती/KP ।/PUNC मम/SN आयुः/NP वृद्धिकृते/KN अपमृत्युविनाशार्थम्/NP च/APY त्वमेवम्/NP  कृतवती/KP ।/PUNC “/PUNC ताम्/SN एवम्/A उक्त्वा/KKS सस्नेहम्/NP आलिङ्गितवान्/KP ।/PUNC स्कन्धे/NP तम्/SN आरोप्य/KKS तम्/SNV अपि/A देवदत्तम्/NS उवाच/KP - /PUNC “/PUNC भो/ASMB महानुभाव/NP !/PUNC मत्/SN पुण्यैः/NP त्वम्/SN इह/A आगतः/KN ।/PUNC त्वत्/SN प्रसादात्/NP मया/SN प्राप्तम्/KN  वर्षशतप्रमाणमायुः/NP ।/PUNC तत्/A त्वम्/SN अपि/A माम्/SN आलिङ्ग्य/KKS मत्/NP स्कन्धे/NP समारोह/KP ” /PUNC इति/AUD जल्पन/KN न/ANइच्छन्तम्/KNV अपि/A देवदत्तम्/NS आलिङ्ग्य/KKS बलात्/NP स्वकीयस्कन्धे/NP आरोपितवान्/KP । /PUNC ततः/A च/APY नृत्यम्/NP कृत्वा/KKS -/PUNC “/PUNC हे/ASMB ब्रह्मव्रतधारिणाम्/NP  धुरीण/NP !/PUNC त्वया/SN अपि/A मयि/SN उपकृतम्/KN ”/PUNC इत्यादि/A उक्त्वा/KKS स्कन्धात्/NP उत्तार्य/KKS यत्र/A यत्र/A स्वजनगृहद्वारादिषु/NP बभ्राम/KP तत्र/A तत्र/A तयोः/SNV उभयोः/NP अपि/A तत्/SNV गुणवर्णनम्/NP अकरोत्/KP ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “ /PUNC प्रत्यक्षे/NP अपि/A कृते/KNV पापे/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/SN सर्वथा/A मूलोत्खाता/NV वयम्/SN  विनष्टाः/NV स्मः/KP ।/PUNC सुष्ठु/NP खलु/A इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
 मित्ररूपाः/NP  हि/A रिपवः/NP सम्भाव्यन्ते/KP विचक्षणः/NP ।/PUNC 
 ये/SN हितम्/NV  वाक्यम्/NP उत्सृज्य/KKS विपरीतोपसेविनः/NP ॥/PUNC 196/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/APY -/PUNC 
 सन्तः/KP अपि/A अर्थाः/NP  विनश्यन्ति/KP देशकालविरोधिनः/NP ।/PUNC 
 अप्राज्ञान्/NV मन्त्रिणः/NP प्राप्य/KKS तमः/NP सूर्योदये/NP यथा/A ॥/PUNC 197/PUNC ॥/PUNC 
ततः/A तत्/SNV वचः/NP अनादृत्य/KKS सर्वे/SN ते/SNV स्थिरजीविनम्/NS उत्क्षिप्य/KKS स्वदुर्गम्/NP आनेतुम्/KKS आरब्धाः/KN ।/PUNC अथ/A आनीयमानः/NV स्थिरजीवी/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC अद्य/A अकिञ्चित्करेण/NP एतत्/SNV अवस्थेन/NP किम्/AP  मया/SN उपसङ्गृहीतेन/NP ?/PUNC यत्/A कारणम्/NP इच्छामि/KP दीप्तम्/NV वह्निम्/NP अनुवेष्टुम्/KN ।/PUNC तत्/A अर्हसि/KP माम्/SN अग्निप्रदानेन/NP समुद्धर्त्तुम्/KN ”/PUNC ।/PUNC 
 अथ/A रक्ताक्षः/NS तस्य/SN अन्तर्गतभावम्/NP ज्ञात्वा/KKS अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC किमर्थम्/P अग्निपतनम्/NP इच्छसि/KP ?/PUNC ”/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC अहम्/SN तावत्/A युष्मदर्थे/SN इमाम्/SNV आपदम्/NP  मेघवर्णेन/NS प्रापितः/KN ,/PUNC तत्/A इच्छामि/KP तेषाम्/SN वैरयातनार्थम्/NP उलूकत्वम्/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS राजनीतिकुशलः/NV  रक्त्ताक्षः/NS प्राह/KP –/PUNC ”/PUNC भद्र/NP !/PUNC कुटिल:/NV त्वम्/SN कृतकवचनचतुरः/NV च/APY ।/PUNC तत्/A त्वम्/SN उलूकयोनिगतः/NV अपि/A स्वकीयाम्/NV एव/AUD वायसयोनिम्/NP  बहु/NP मन्यसे/KP ।/PUNC श्रूयते/KN च/APY एतत्/SNV आख्यानकम्/NP -/PUNC  
 सूर्यम्/NP  भर्तारम्/NP उत्सृज्य/KKS पर्जन्यम्/NP मारुतम्/NP गिरिम्/NP ।/PUNC 
 स्वजातिम्/NP  मूषिका/NP प्राप्ता/KN स्वजातिः/NP उरतिक्रमा/NV ॥/PUNC 198/PUNC ॥/PUNC 
मन्त्रिणः/NP प्रोचुः/KP —/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC रक्ताक्षः/NS कथयति/KP -/PUNC 

[/PUNC ८/PUNC ]/PUNC


[/PUNC १३/PUNC ]/PUNC
 (/PUNC मूषिकाविवाह-कथा/NS )/PUNC 
 अस्ति/KP विषमशिलातलस्खलिदम्बुनिर्घोषश्रवणसन्त्रस्तमत्स्यपरिवर्तनसञ्जनितश्वेतफेनशबलतरङ्गाया/NV गङ्गायाः/NS तटे/NP जपनियमतपःस्वाध्यायोपवासयोगक्रियानुष्ठानपरायणैः/NV परिपूतपरिमितजलजिघृक्षुभिः/NV कन्दमूलफलशैवालाभ्यवहारकदर्थितशरीरैः/NV वल्कलकृतकौपीनमात्रप्रच्छादनैः/NV तपस्विभिः/NP आकीर्णम्/NV आश्रमपदम्/NP ।/PUNC तत्र/A याज्ञवल्क्यः/NS  नाम/A कुलपतिः/NP आसीत्/KP । /PUNC
तस्य/SN जाह्नव्या/NS स्नात्वा/KKS उपस्प्रष्टुम्/KN आरब्धस्य/NV करतले/NP श्येनमुखात्/NP परिभ्रष्टा/NV मूषिका/NP पतिता/KNV ।/PUNC ताम्/SN  दृष्टवा/KKS न्यग्रोधपत्रे/NP अवस्थाप्य/KKS पुनः/A स्नात्वोपस्पृश्य/KKS च/APY  प्रायश्चितादिक्रियाम्/NP कृत्वा/KKS मूषिकाम्/NP  ताम्/SNV  स्वतपः/NP बलेन/NP कन्यकाम्/NP कृत्वा/KKS समादाय/KP स्वाश्रमम्/NP अनिनाय/KP ।/PUNC अनपत्याम्/NV  च/APY  जायाम्/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC गृह्यताम्/KP इयम्/SN तव/SN दुहितोत्न्ना/NP ,/PUNC प्रयत्नेन/NP सम्वर्द्धनीया/NV ”/PUNC इति/AUD  ।/PUNC ततः/AVK तया/SN सम्वर्द्धिता/NV लालिता/NV पालिता/NV च/APY यावद्/A द्वादशवर्षा/NV सञ्जाता/KN ।/PUNC अथ/A विवाहयोग्याम्/NV ताम्/SN दृष्ट्वा/KKS भर्तारम्/NP एवम्/A जाया/NP उवाच/KP —/PUNC “/PUNC भो/ASMBभर्तः/NP !/PUNC किम्/AP इदम्/SN  न/AN अवबुध्यसे/KP यथा/A अस्याः/SNV स्वदुहितुः/NP विवाहसमयातिक्रमः/NP भवति/KP ?/PUNC ”/PUNC 
 असौ/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC साधु/NP उक्तम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC
 स्त्रियः/NP पुरा/A सुरैः/NP भुक्ता/KN सोमगन्धर्ववह्निभिः/NP ।/PUNC
 भुञ्जते/KP मानुषाः/NP पश्चात्/A तस्माद्/AVK दोषो/NP न/AN विद्यते/KP ॥/PUNC 199/PUNC ॥/PUNC
 सोमः/NP तासाम्/SN  ददौ/KP शौचम्/NP गन्धर्वाः/NP शिक्षिताम्/KP  गिरम्/NP ।/PUNC
 पावकः/NP सर्वम्/SN एध्यत्वम्/KP  तस्मान्/AVK निष्कल्मषाः/NV स्त्रियः/NP ॥/PUNC 200/PUNC।/PUNC
 असम्प्राप्तरजा/NV गौरी/NS प्राप्ते/KP रजसि/NP रोहिणी/NS ।/PUNC
 अव्यञ्जना/NP भवेत्/KP कन्या/NP कुचहीना/NV च/APY नग्निका/NS ॥/PUNC 201/PUNC ॥/PUNC
 व्यञ्जनैः/NP अस्तु/KP समुत्पन्नः/KN सोमो/NS भुङ्क्ते/KP हि/A कन्यकाम्/NP ।/PUNC
 पयोधराभ्याम्/NP गन्धर्वा/NP रजस्य/NP अग्निः/NS प्रतिष्ठितः/KN ॥/PUNC 202/PUNC ॥/PUNC
 तस्माद्/AVK विवाहयेत्/KP कन्याम्/AN यावत्/AVK न/AN ॠतुमती/NP भवेत्/KP ।/PUNC
 विवाहः/NP च/APY अष्टवर्षायाः/NV कन्यायाः/NP तु/A प्रशस्यते/KP ॥/PUNC 203/PUNC ॥/PUNC
 व्यञ्जनम्/NP हन्ति/KP वै/A पूर्वम्/NP परम्/A  चैव/A पयोधरौ/NP ।/PUNC
 रतिः/NV अरिष्टाः/NV तथा/A लोकान्/NP हन्यात्/KP च/APY पितरम्/NP  रजः/NP ॥/PUNC 204/PUNC ॥/PUNC
 ऋतुमत्याम्/NP तु/A तिष्ठन्त्याम्/KNV स्वेच्छादानम्/NP  विधीयते/KP ।/PUNC
 तस्मात्/AVK उद्वाहयेत्/KP नग्नाम्/NP मनुः/NS स्वायम्भुवः/NV अब्रवीत्/KP ॥/PUNC 205/PUNC ॥/PUNC
 पितृवेश्मनि/NP या/SSN कन्या/NP रजः/NP पश्यति/KP असंस्कृता/NV ।/PUNC
 अविवाह्या/NV तु/A सा/SSN कन्या/NP जघन्या/NV वृषली/NV स्मृता/KN ॥/PUNC 206/PUNC ॥/PUNC
 श्रेष्ठेभ्यः/NV सदृशेभ्यः/NV च/APY जघन्येभ्यः/NV रजस्वला/NP।/PUNC
 पित्रा/NP देया/NP विनिश्चित्य/KKS यतः/AVK दोषः/NP न/AN विद्यते/KP ॥/PUNC 207/PUNC ॥/PUNC
 अतः/AVK अहम्/SN एनाम्/SN सदृशाय/NP प्रयच्चामि/KP ,/PUNC न/AN अन्यस्मै/SN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC
 ययोः/SSN एव/A समम्/NV वित्तम्/NP ययोः/SSN एव/INTF समम्/NV  कुलम्/NP ।/PUNC
 तयोः/SSN विवाहः/NP सख्यम्/NP च/APY न/AN तु/A पुष्टविपुष्टयोः/NP ॥/PUNC 208/PUNC ॥/PUNC
तथा/A च/AVK -/PUNC
 कुलञ्च/NP शीलञ्च/NP सनाथता/NP च/APY,/PUNC विद्या/NP च/APY  वित्तम्/NP च/APY  वपुः/NP वयः/NP च/APY  ।/PUNC
 एतान्/SNV गुणान्/NP सप्त/SMK विचिन्त्य/KP देया/NV ,/PUNC कन्या/NP बुधैः/NP शेषम्/NP अचिन्तनीयम्/NP ॥/PUNC 209 /PUNC ॥/PUNC
 तत्/SN यत्/AVK यस्याः/NP  रोचते/KP तदा/A भगवन्तम्/NV आदित्यम्/NP आहूय/KP तस्मै/SN प्रयच्छामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 सा/SN प्राह/KP -/PUNC “इह/A कः/SN  दोषः/NP ?/PUNC क्रियताम्/KP एतत्/SN ।/PUNC“ अथ/A मुनिना/NP रविः/NS आहूतः/KN ।/PUNC वेदमन्त्रामन्त्रणप्रभावात्/NP तत्क्षणात्/NP एव/INTF अयम्/SN उपगम्य/KKS आदित्यः/NS प्रोवाच/KP -/PUNC “ /PUNCभगवन्/NP !/PUNC किम्/AP अहम्/SN आहूतः/KN ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC एषा/SNV मदीया/NP कन्यका/NP तिष्ठति/KP ।/PUNC यदि/A एषा/SN त्वाम्/SN  वृणोति/KP तर्हि/A उद्वहस्व/KP”/PUNC इति/AUD  ।/PUNC एवम्/AUD  उक्त्वा/KKS स्वदुहितरम्/NP उवाच/KP -/PUNC “ /PUNC पुत्रि/NP !/PUNC किम्/AP तव/SN रोचते/KP एष/SNV भगवान्/NV त्रैलोक्यदीपः/NV  भानुः/NS ”/PUNC ?/PUNC । /PUNC 
 पुत्रिका/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC तात/NP !/PUNC अतिदहनात्मकः/NV अयम्/SN  न/AN अहम्/SN एनम्/SN अभिलषामि/KP ।/PUNC तस्मात्/AVK अन्यः/SN प्रकृष्टतरः/NV कश्चित्/SNV आहूयताम्/KP ।/PUNC “/PUNC अथ/A तस्या/SN तत्/SNV वचनम्/NP  श्रुत्वा/KKS मुनिः/NP भास्करम्/NS उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भगवन्/NP !/PUNC त्वत्तः/SN अपि/A अधिकः/NP अस्ति/KP कश्चित्/SN ?/PUNC ”/PUNC भास्करः/NS प्राह/KP -/PUNC “/PUNC अस्ति/KP मत्तः/SN अपि/A अधिकः/NV  मेघः/NP  येन/SN आच्छादितः/KN अहम्/SN अदृश्यः/NP  भवामि/KP ।/PUNC“ अथ/A मुनिना/NP मेघम्/NP अपि/A आहूय/KKS कन्याभिहिता/KN -/PUNC “/PUNC पुत्रिके/NP !/PUNC किम्/AP अस्मै/SN त्वाम्/SN  प्रयच्छामि/KP ?/PUNC ” /PUNC 
 सा/SN प्राह/KP -/PUNC “/PUNC कृष्णवर्णः/NV अयम्/SN  जडात्मा/NV च/APY  ।/PUNC तत्/AVK अस्मात्/SN अन्यस्य/SN प्रधानस्य/NP कस्यचित्/SNV माम्/SN  प्रयच्छ/KP ।/PUNC “/PUNC अथ/A मुनिना/NP मेघः/NP अपि/A पृष्टः/KN -/PUNC “ /PUNC भो/ASMBमेघ/NP !/PUNC त्वत्तः/SN अपि/A अधिकः/NP अस्ति/KP कश्चित्/SN ?/PUNC ”/PUNC मेघेन/NP उक्तम्/KN  -/PUNC “/PUNCमत्तः/SN अधिकः/NP अस्ति/KP वायुः/NP ।/PUNC वायुना/NP हतः/KN अहम्/SN  सहस्रधा/NP यामि/KP । /PUNC“ तत्/SN श्रुत्वा/KKS मुनिना/NP वायुः/NP आहूतः/KN ।/PUNC आह/KP च/AVK -/PUNC “/PUNC पुत्रिके/NP ! /PUNC किम्/AP एष/SNV वायुः/NP ते/SN विवाहाय/NP उत्तमः/NV प्रतिभाति/KP ?/PUNC ”/PUNC सा/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC तात/NP !/PUNC अतिचपलः/NV अयम्/SN ,/PUNC तत्/AVK अस्मात्/SN अपि/A अधिकः/NP कश्चित्/SN आनीयताम्/KP ।/PUNC 
 मुनिः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNCवायो/NP !/PUNC त्वत्तः/SN अपि/A अधिकः/NP अस्ति/KP कश्चित्/SN ?/PUNC ” /PUNC वायुना/NP उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC मत्तः/SN अपि/A अधिकः/NP अस्ति/KP पर्वतः/NP, तेन/SN संस्तभ्य/KKS बलवान्/NV अपि/A अहम्/SN  ध्रिये/KP ।/PUNC “/PUNC अथ/A मुनिः/NP पर्वतम्/NP आहूय/KKS कन्याम्/NP उवाच/KP -/PUNC “/PUNC पुत्रिके/NP !/PUNC किम्/AP  त्वाम्/SN अस्मै/SN प्रयच्छामि/KP ?/PUNC ”/PUNC सा/SN प्राह/KP –/PUNC “ /PUNCतात/NP !/PUNC कठिनात्मकः/NV अयम्/SNV  स्तब्धः/NV च/APY  ।/PUNC तत्/AVK अन्यस्मै/NP देहि/KP माम्/SN । /PUNC “/PUNC मुनिना/NP पर्वतः/NP पृष्टः/KN -/PUNC “/PUNC भो/ASMBपर्वतराज/NP !/PUNC त्वत्तः/SN अपि/A अधिकः/NP अस्ति/KP कश्चित्/SN ?/PUNC ”/PUNC 
 गिरिणा/NP उक्तम्/KN  -/PUNC “/PUNC मत्तः/SN अपि/A अधिकाः/NP सन्ति/KP मूषका/NP ये/SN  मत्/SN शरीरम्/NP  बलात्/NP विदारयन्ति/KP ।/PUNC “/PUNC 
ततः/AVK  मुनिः/NP मूषकम्/NP आहूय/KKS तस्या/SN अदर्शयत्/KP ।/PUNC आह/KP च/AVK -/PUNC “/PUNC पुत्रिके/NP ! /PUNC त्वाम्/SN अस्मै/SN प्रयच्छामि/KP ?/PUNC ”/PUNC किम्/AP एष/SNV प्रतिभाति/KP ते/SN मूषिकराजः/NP ?/PUNC ” /PUNC सा/SN अपि/A तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS “/PUNC स्वजातीय/NV एष/SN ’/PUNC इति/AUD  मन्यमाना/NV पुलकोदधुषितशरीरा/NV उवाच/KP —/PUNC “/PUNC तात/NP !/PUNC माम्/SN  मूषिकाम्/NP  कृत्वा/KKS अस्मै/SN प्रयच्छ/KP , /PUNC येन/A स्वजातिविहितम्/KN  गृहिणीधर्मम्/NP अनुतिष्ठामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 ततः/AVK सः/SN अपि/A स्वतपोबलेन/NP ताम्/SN  मूषिकाम्/NP  कृत्वा/KKS तस्मै/SN प्रादात्/KP।/PUNC अतः/AVK अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC सूर्यम्/NS  भर्त्तारम्/NP उत्सृज्य/KKS ”/PUNC इति/AUD  ।/PUNC
 अथ/A रक्ताक्षवचनम्/NP अनादृत्य/KKS तैः/SN स्ववंशविनाशाय/NP सः/SN  स्वदुर्गम्/NP उपनीतः/KN ।/PUNC नीयमानः/NV च/APY  अन्तर्लीनमवहस्य/NP स्थिरजीवी/NS व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC
 “/PUNC हन्यताम्/KP इति/AUD  येन/SN उक्तम्/KN  स्वामिनः/NP  हितवादिना/NP ।/PUNC
 सः/SN  एव/INTF एकः/SMK अत्र/A सर्वेषाम्/SN  नीतिशास्त्रार्थतत्त्ववित्/NV ॥/PUNC 210/PUNC ॥/PUNC
तदा/A यदि/A तस्य/SN वचनम्/NP अकरिष्यन्/KP एते/SN ततः/AVK  न/AN स्वल्पः/NP अपि/A अनर्थः/NP अभविष्यत्/KP एतेषाम्/SN ” /PUNC ।/PUNC 
 अथ/A दुर्गद्वारम्/NP  प्राप्य/KKS अरिमर्दनः/NS अब्रवीत्/KP —/PUNC भो/DV भो/ASMB ?/PUNC हितैषिणः/NV अस्य/SNV स्थिरजीविनः/NS  यथा/A समीहितम्/NV  स्थानम्/NP  प्रयच्छत/KP ।/PUNC “/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS स्थिरजीवी/NS व्यचिन्तयत्/KP —/PUNC “/PUNC मया/SN तावत्/A एषाम्/SN  बधोपायः/NP चिन्तनीयः/NV । /PUNC सः/SN  मया/SN मध्यस्थेन/NP न/AN साध्यते/KP ,/PUNC यतः/AVK मदीयम्/SN इङ्गितादिकम्/NP  विचारयन्तः/KN ते/SN अपि/A सावधाना/NP भविष्यन्ति/KP ।/PUNC तद्दुर्गद्वारम्/NP अधिश्रितः/KN अभिप्रेतम्/NP साधयामि/KP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD  निश्चित्य/KKS उलूकपतिम्/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC युक्तम्/KN इदम्/SN  यत्स्वामिना/NP प्रोक्तम्/KN  परम्/A अहम्/SN अपि/A नीतिज्ञः/NP ते/SN अहितः/NP च/APY।/PUNC यद्यपि/A अनुरक्तः/NV शुचिः/NP तथा/A अपि/A दुर्गमध्ये/NP आवासः/NP  न/AN अर्हः/KP।/PUNC तत्/AVK अहम्/SN अत्र/A एव/A दुर्गद्वारस्थः/NP प्रति/AUP अहम्/SN  भवत्/SN पादपद्मरजःपवित्रीकृततनुः/NP सेवाम्/NP  करिष्यामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 “/PUNC तथा/A ”/PUNC इति/AUD  प्रतिपन्ने/KN प्रतिदिनम्/A उलूकपतिसेवकाः/NP ते/SN प्रकामम्/NV आहारम्/NP  कृत्वा/KKS उलूकराजादेशात्प्रकृष्टमांसाहारम्/NP  स्थिरजीविने/NS प्रयच्छन्ति/KP ।/PUNC 
 अथ/A कतिपयैः/SN अहोभिः/NP मयूर/NP इव/ASD सः/SN  बलवान्/NP संवृत्तः/KN ।/PUNC अथ/A रक्ताक्षः/NS स्थिरजीविनम्/NS  पोष्यमाणम्/KNV  दृष्ट्वा/KKS सविस्मयः/NV  मन्त्रिजनम्/NP  राजानम्/NP च/APY  प्रति/AUP आह/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS  ,/PUNC मूर्खः/NV अयम्/SN  मन्त्रिजनः/NP  भवान्/SN चेत्/A एवम्/INTF अहम्/SN अवगच्छामि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK - /PUNC
पूर्वन्तात्/NP अहम्/SN  मूर्खः/NV  द्वितीयः/SMKP पाशबन्धकः/NV ।/PUNC
ततः/AVK  राजा/NP च/APY  मन्त्री/NP च/APY  सर्वम्/SN  वै/A मूर्खमण्डलम्/NV ॥/PUNC 211/PUNC ॥/PUNC


[/PUNC १३/PUNC ]/PUNC
 (/PUNC सुवर्णपुरीषपक्षि-/PUNC कथा/NS )/PUNC
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV पर्वतैकदेशे/NP महान्/NV वृक्षः/NP ।/PUNC तत्र/A च/AVK सिन्धुकनामा/NS कः/SNV अपि/A पक्षी/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तस्य/SN पुरीषे/NP सुवर्णम्/NP उत्पद्यते/KP ।/PUNC अथ/A कदाचित्/A तम्/SN उद्देशम्/NP  व्याधः/NP कः/SNV अपि/A समाययौ/KP ।/PUNC सः/SN  च/APY  पक्षी/NP तदग्रत/A एव/INTF पुरीषम्/NP उत्ससर्ज/KP ।/PUNC अथ/A पातसमकालम्/NP एव/INTF तत्सुवर्णींभूतम्/NP  दृष्ट्वा/KKS व्याधः/NP  विस्मयम्/NP अगमत्/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS  , /PUNC मम/SN शिशुकालात्/NP आरभ्य/? शकुनिबन्धव्यसनिनः/NP अशीति/SMKY वर्षाणि/NP समभूवन्/KP ,/PUNC न/AN च/APY  कदाचित्/A अपि/A पक्षिपुरीषे/NP सुवर्णम्/NP  दृष्टम्/KN ”/PUNC इति/AUD  विचिन्त्य/KKS तत्र/A वृक्षे/NP पाशम्/NP  बबन्ध/KP । /PUNC 
 अथ/A असौ/SNV अपि/A पक्षी/NP मूर्खः/NV तत्र/A एव/A विश्वस्तचित्तः/NV  यथापूर्वम्/A उपविष्टः/KN तत्कालम्/NP एव/A पाशेन/NP बद्धः/KN । /PUNC व्याधः/NP तु/A तत्पाशात्/NP उन्मुच्य/KKS पञ्जरके/NP संस्थाप्य/KKS निजावासम्/NP  नीतवान्/KN ।/PUNC अथ/A चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC किम्/AP अनेन/SNV सापायेन/NV पक्षिणा/NP अहम्/SN  करिष्यामि/KP ?/PUNC यदि/A कदाचित्/A कः/SN अपि/A अमुम्/SN इदृशम्/INTF  ज्ञात्वा/KKS राज्ञे/NP निवेदयिष्यति/KP तत्/AVK नुनम्/A  प्राणसंशयः/NP  मे/SN भवेत्/KP अतः/AVK स्वयम्/NP एव/INTF पक्षिणम्/NP  राज्ञे/NP निवेदयामि/KP”/PUNC इति/AUD  विचार्य/KKS तथा/A एव/INTF अनुष्ठितवान्/KN ।/PUNC
 अथ/A राजा/NP अपि/A तम्/SNV  पक्षिणम्/NP  दृष्ट्वा/KKS विकसितनयनवदनकमलः/NV पराम्/A  तुष्टिम्/NP उपागतः/KN !/PUNC प्राह/KP च/AVK एवम्/INTF  -/PUNC “/PUNC हंहः/ASMB!/PUNC रक्षापुरुषाः/NP !/PUNC एनम्/SNV  पक्षिणम्/NP  यत्नेन/NP रक्षत/KP ।/PUNC अशनपानादिक/NP च/APY  अस्य/SN यथेच्छम्/NV  प्रयच्छत/KP ।/PUNC “/PUNC 
 अथ/A मन्त्रिणा/NP अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC किम्/AP अनेन/SNV अश्रद्धेयव्याधवचनप्रत्ययमात्रपरिगृहीतेन/NP अण्डजेन/NP ? /PUNC किम्/AP  कदाचित्/A पक्षिपुरीषे/NP सुवर्णम्/NP  सम्भवति/KP ?/PUNC तत्/AVK मुच्यताम्/KP  पञ्जरबन्धनात्/NP अयम्/SNV  पक्षी/NP ”/PUNC इति/AUD  ।/PUNC 
 मन्त्रिवचनात्/NP राज्ञा/NP मोचितः/KN असौ/SNV पक्षी/NP उन्नतद्वारतोरणे/NP समुपविश्य/KKS सुवर्णमयीम्/NV  विष्ठाम्/NP  विधाय/KKS - /PUNC “/PUNC पूर्वम्/NP  तावत्/A अहम्/SN  मूर्खः/NV ”/PUNC इति/AUD  श्लोकम्/NP  पठित्वा/KKS यथासुखम्/NP आकाशमार्गेण/NP प्रायात्/KP ।/PUNC 
 अतः/AVK अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC पूर्वम्/NP  तावत्/A अहम्/SN मूर्खः/NV ”/PUNC इति/AUD  ।/PUNC
अथ/A ते/SN पुनः/A अपि/A प्रतिकूलदैवतया/NP हितम्/NV अपि/A रक्ताक्षवचनम्/NP अनादृत्य/KKS भूयः/NV तम्/SN  प्रभूतमांसादिविधिना/NP आहारेण/NP पोषयामासुः/KP ।/PUNC अथ/A रक्ताक्षः/NS स्ववर्गम्/NP आहूय/KKS रहः/NP प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS  ,/PUNC एतावत्/A एव/A अस्मत्/SN भूपतेः/NP कुशलम्/NP  दुर्गः/NP च/APY  ।/PUNC तत्/AVK उपदिष्टम्/KN  मया/SN यत्कुलक्रमागतः/NV सचिवः/NP अभिधत्ते/KP ।/PUNC तत्/AVK वयम्/SN अन्यत्पर्वतदुर्गम्/NP  सम्प्रति/A समाश्रयामः/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK -/PUNC
अनागतम्/NP  यः/SSN कुरुते/KP सः/SSN  शोभते/KP ,/PUNC सः/SSN  शोच्यते/KP यः/SSN  न/AN करोति/KP अनागतम्/NP । /PUNC
वने/NP अत्र/A संस्थस्य/NP समागता/KN जरा/NP ,/PUNC विलस्य/NP वाणी/NP न/AN कदापि/A मे/SN श्रुता/KN ॥/PUNC 212 /PUNC ॥/PUNC
ते/SN प्रोचुः/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC रक्ताक्षः/NS कथयति/KP -/PUNC

 [/PUNC १५/PUNC ]/PUNC
 (/PUNC सिंहजम्बुकगुहा-/PUNC कथा/NS )/PUNC
 कस्मिंश्चित्/SNV वनोद्देशे/NP खरनखरः/NS  नाम/A सिंहः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  कदाचित्/A इतिश्चेतः/A च/APY  परिभ्रमन्/KNV क्षुत्क्षामकण्ठः/NV  न/AN किञ्चित्/SN अपि/A सत्त्वम/NP आससाद/KP ।/PUNC ततः/AVK च/APY  अस्तमनसमये/NP महतीम्/NV  गिरिगुहाम्/NP आसाद्य/KKS प्रविष्टः/KN चिन्तयामासः/KP  -/PUNC “/PUNC नूनम्/A एतस्याम्/SNV  गुहायाम्/NP  रात्रौ/NP केन/SN अपि/A सत्त्वेन/NP आगन्तव्यम्/KN  तत्/AVK निभृतः/KN  भूत्वा/KKS तिष्ठामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 एतस्मिन्/SNV अन्तरे/NP तत्स्वामी/NV दधिपुच्छः/NS  नाम/A श्रृगालः/NP समायातः/KN ।/PUNC सः/SN च/APY यावत्/AVK पश्यति/KP तावत्/AVK सिंहपदपद्धतिः/NP गुहायाम्/NP  प्रविष्टा/KN ,/PUNC न/AN च/APY  निष्क्रमणम्/NP  गता/KN ।/PUNC ततः/AVK च/APY  अचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS  ,/PUNC विनष्टः/KN अस्मि/KP ।/PUNC नूनम्/A अस्याम्/SN अन्तर्गतेन/NV सिंहेन/NP भाव्यम्/KN ।/PUNC तत्/AVK किम्/AP  करोमि/KP ?/PUNC कथम्/A  ज्ञास्यामि/KP ?/PUNC ”/PUNC ।/PUNC एवम्/INTF  विचिन्त्य/KKS द्वारस्थः/NP फूत्कर्तुम्/KN आरब्धः/KN -/PUNC “/PUNC अहः/ABS बिल/NP !/PUNC अहः/ABS बिल/NP !/PUNC”/PUNC इति/AUD उक्त्वा/KKS तूष्णीभूय/NP भूयः/NP अपि/A तथा/A एव/A प्रत्यभाषत/KP -/PUNC “ /PUNC भोः/ASMB!/PUNC किम्/AP  न/AN स्मरसि/KP ,/PUNC यत्/AVK मया/SN त्वया/SN सह/UA समयः/NP कृतः/KN अस्ति/KP यत्/AVK मया/SN बाह्यात्/NP समागतेन/KN त्वम्/SN  वक्तव्यः/NP ,/PUNC त्वया/SN च/APY  अहम्/SN अकारणीयः/NP इति/AUD ।/PUNC तत्/AVK यदि/A माम्/SN  न/AN आह्वयसि/KP ततः/AVK अहम्/SN  द्वितीयम्/SMKP  विलम्/NP  यास्यामि/KP । /PUNC "/PUNC 
 अथ/A तत्/SN श्रुत्वा/KKS सिंहः/NP चिन्तितवान्/KP -/PUNC “/PUNC नूनम्/A एषा/SNV गुहा/NP अस्य/SN समागतस्य/NP सदा/A समाह्वानम्/NP  करोति/KP ,/PUNC परम्/A अद्य/A मत्/SN भयात्/NP न/AN किञ्चित्/SN ते/SN।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
 भयसन्त्रस्तमनसाम्/NP  हस्तपादादिकाः/NV क्रियाः/NP ।/PUNC
 प्रवर्तन्ते/KP न/AN वाणी/NP च/APY  वेपथुः/NP च/APY  अधिकः/NP  भवेत्/KP ॥/PUNC 213/PUNC ॥/PUNC
तत्/AVK अहम्/SN अस्य/SN आह्वानम्/NP  करोमि/KP,/PUNC येन/A तत्/SN अनुसारेण/NP प्रविष्टः/KN अयम्/SN  मे/SN भोज्यताम्/NP  यास्यति/KP ।/PUNC “/PUNC एवम्/INTF  सम्प्रधार्य/KKS सिंहः/NP तस्या/SN आह्वानम्/NP अकरोत्/KP ।/PUNC अथ/A सिंहशब्देन/NP सा/SNV गुहा/NP प्रतिरवसम्पूर्णा/NV अन्यान्/SNV अपि/A दूरस्थान्/NV अरण्यजीवान्/NV त्रासयामास/KP ।/PUNC 
श्रृगलः/NP अपि/A पलायमान/NV इमम्/SNV  श्लोकम्/NP अपठत्/KP -/PUNC
अनागतम्/NP  यः/SSN कुरुते/KP सः/SSN  शोभते/KP ,/PUNC सः/SSN  शोच्यते/KP यः/SSN  न/AN करोति/KP अनागतम्/NP । /PUNC
वने/NP अत्र/A संस्थस्य/NP समागता/KN जरा/NP ,/PUNC बिलस्य/NP वाणी/NP न/AN कदापि/A मे/SN श्रुता/KN ॥/PUNC 214 /PUNC ॥/PUNC
तत्/AVK एवम्/INTF  मत्वा/KKS युष्माभिः/SN मया/SN सह/UA गन्तव्यम्/KN इति/AUD ।/PUNC एवम्/INTF अभिधाय/KKS आत्मानुयायिपरिवारानुगतः/NV  दूरदेशान्तरम्/NP रक्ताक्षः/NS जगाम/KP ।/PUNC
अथ/A रक्ताक्षे/NS गते/KN स्थिरजीवी/NS अतिहृष्टमना/NV व्यचिन्तयम्/KP -/PUNC “/PUNC अहः/ABS कल्याणम्/NP अस्माकम्/SN उपस्थितम्/NV  यत्/AVK रक्ताक्षः/NS  गतः/KN।/PUNC यतः/AVK सः/SN दीर्घदर्शी/NV ।/PUNC एते/SN च/APY मूढमनसः/NV ।/PUNC ततः/AVK  मम/SN सुखघात्याः/NP सञ्जाता/KN (/PUNC एते/SN )/PUNC ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK - /PUNC
न/AN दीर्घदर्शिनः/NV यस्य/SSN मन्त्रिणः/NP स्युः/KP महीपतेः/NP ।/PUNC
क्रमायाता/KN ध्रुवम्/NP तस्य/SSN न/AN चिरात्/A स्यात्/KP परिक्षयः/NP ॥/PUNC 215/PUNC ॥/PUNC
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
मन्त्रिरूपा/NV हि/A रिपवः/NP सम्भाव्यन्ते/KP विचक्षणैः/NP ।/PUNC
ये/SN हितम्/NV वाक्यम्/NP उत्सृज्य/KKS विपरीतोपसेविनः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 216/PUNC ॥/PUNC
 एवम्/INTF विचन्त्य/KKS स्वकुलाये/NP एक/SMK एकाम्/SMKY वनकाष्ठिकाम्/NP गुहादीपनार्थम्/NP  दिने/DVदिने/NP प्रक्षिपति/KP । /PUNC न/AN च/APY ते/SNV मूर्खाः/NV उलूकाः/NP विजानन्ति/KP ,/PUNC यत्/AVK एष/SN कुलायम्/NP अस्मत्/SN दाहाय/NP वृद्धिम्/NP  नयति/KP ।/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
अमित्रम्/NP कुरुते/KP मित्रम्/NP मित्रम्/NP द्वेष्टि/KP हिनस्ति/KP च/APY  ।/PUNC
शुभम्/NP वेत्ति/KP अशुभम्/NP पापम्/NP भद्रम्NP दैवहतः/NV नरः/NP ॥/PUNC 217/PUNC 
अथ/A कुलायव्याजेन/NP दुर्गद्वारे/NP कृते/KN काष्ठनिचये/NP सञ्जाते/KN सूर्योदये/NP अन्धताम्/NP प्राप्तेषू/KNV उलूकेषु/NP सत्सु/KP स्थिरजीवी/NS शीघ्रम्/KV गत्वा/KKS मेघवर्णम्/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC दाहसाध्या/NV कृता/KN रिपुगुहा/NP ।/PUNC तत्/SN सपरिवारः/NP समेत्य/KKS एक/SMK एकाम्/SMKY  वनकाष्ठिकाम्/NP  ज्वलन्तीम्/NV  गृहीत्वा/KKS गुहाद्वारे/NP अस्मत्/SN कुलाये/NP प्रक्षिप/KP ,/PUNC येन/A सर्वे/SNV शत्रवः/NP कुम्भीपाकनकप्रायेण/NP दुःखेन/NP म्रियन्ते/KP ।/PUNC “/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS प्रहृष्टः/NV  मेघवर्णः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC तात/NP !/PUNC कथय/KP आत्मवृत्तान्तम्/NP ।/PUNC चिरात्/A अद्य/A दृष्टः/KN असि/KP ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC वत्स/NP !/PUNC न/AN अयम्/SNV  कथनस्य/NP कालः/NP ।/PUNC यतः/AVK कदाचित्/A अस्य/SN रिपोः/NP कश्चित्/SNV प्रणिधिः/NP मम/SN इह/A आगमनम्/NP निवेदयिष्यति/KP ,/PUNC तत्/AVK ज्ञानात्/NP अन्धः/NP अन्यत्र/A अपसरणम्/NP करिष्यति/KP ।/PUNC तत्/AVK त्वर्यताम्/KP ,/PUNC त्वर्यताम्/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY  -/PUNC
शीघ्रकृत्येषु/NV कार्येषु/NP विलम्बयति/KP यः/SN  नरः/NP ।/PUNC
तत्/AVK कृत्यम्/KN देवताः/NP तस्य/SN कोपात्/NP विघ्नन्त्यसंशयम्/NP ॥/PUNC 218/PUNC ॥/PUNC
तथा/A च/AVK -/PUNC
यस्य/SN यस्य/DV हि/A कार्यस्य/NP फलितस्य/NP विशेषतः/NP ।/PUNC
क्षिप्रम्/NP अक्रियमाणस्य/NP कालः/NP पिबति/KP तत्/SN रसम्/NP ॥/PUNC 219/PUNC ॥/PUNC
तद्/AVK गुहायाम्/NP आयातस्य/NV ते/SN हतशत्रोः/NP सर्वम्/SNV सविस्तरम्/NP निर्व्याकुलतया/NP कथयिष्यामि/KP ।/PUNC“/PUNC
अथ/A असौ/SN तत्/SNV वचनम्/NP आकर्ण्य/KKS सपरिजन/NP एक/SMK एकाम्/SMKY  ज्वलन्तीम्/NV वनकाष्ठिकाम्/NP चञ्चु/NP अग्रेण/NP गृहीत्वा/KKS तद्गुहाद्वारम्/NP प्राप्य/KKS स्थिरजीविकुलाये/NP प्राक्षिपत्/KP।/PUNC ततः/AVK सर्वे/SNV ते/SN दिवान्धा/NP रक्ताक्षवाक्यानि/NP स्मरन्तः/KNV द्वारस्य/NP आवृतत्वात्/NP अनिःसरन्तः/KNV  गुहामध्ये/NP कुम्भीपाकन्यायम्/NP आपन्नाः/KN मृताः/KN च/APY ।/PUNC 
एवम्/INTF शत्रून्/NP निशेषताम्/NP नीत्वा/KKS भूयः/NP अपि/A मेघवर्णः/NS तत्/SN एव/A न्यग्रोधपादपदुर्गम्/NP जगाम/KP ।/PUNC ततः/AVK सिंहासनस्थः/NV भूत्वा/KKS सभामध्ये/NP प्रमुदितमनाः/NV स्थिरजीविनम्/NP अपृच्छत्/KP -/PUNC “/PUNC तात/NP !/PUNC कथम्/A त्वया/SN शत्रुमध्ये/NP गतेन/KN एतावत्पर्यन्तम्/UA कालः/NP नीतः/KN ?/PUNC तत्/AVK अत्र/A कौतुकम्/NP अस्माकम्/SN वर्तते/KP ।/PUNC तत्/SN कथ्यताम्/KP ।/PUNC यतः/AVK -/PUNC
वरम्/A अग्नौ/NP प्रदीप्ते/NP तु/A प्रपातः/KN पुण्यकर्मणाम्/NP ।/PUNC
न/AN च/APY अरिजनसंसर्गः/NP मुहूर्तम्/NP अपि/A सेवितः/KN ”/PUNC ॥/PUNC 220/PUNC ॥/PUNC
तत्/SN आकर्ण्य/KKS स्थिरजीवी/NS आह/KP —/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC आगामिफलवाञ्छया/NP कष्टम्/NP अपि/A सेवकः/NP  न/AN जानाति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK -/PUNC
 उपनतभयैः/NP यः/SSN यः/DV मार्गः/NP  हितार्थकरः/NP भवेत्/KP ,/PUNC 
 सः/SSN  सः/DV निपुणतया/NV बुद्धया/NP सेव्यः/KN महान्/NV कृपणः/NP अपि/A वा/A ।/PUNC
 करिकरनिभौ/NV ज्याघाताङ्कौ/NV महास्त्रविशारदौ/NV ,/PUNC 
 वलयरणितौ/NV स्त्रीवत्/ASD वाहू/NP कृतौ/KN न/AN किरीटिना/NS ?/PUNC ॥/PUNC 221/PUNC ॥/PUNC
शक्तेन/NP अपि/A सदा/A जनेन/NV विदुषा/NV कालान्तरापेक्षिणा/NV,/PUNC
वस्तव्यम्/NP  खलु/A वक्रवाक्यविषमे/NV क्षुद्रे/NV अपि/A पाते/NP जने/NP ।/PUNC
दर्वीव्यग्रकरेण/NV धूम्रमलिनेन/NV आयासमुक्तेन/NV च/APY
 भीमेन/NS अतिबलेन/NP मत्स्यभवेन/NP कि/SN नोषितम्/KN  सूदवत्/ASD ॥/PUNC 222/PUNC ॥/PUNC
यत्/SSN वा/A तत्/SSN वा/A विषमपतितः/NP साधु/NP वा/A गर्हितम्/NP  वा/A ,/PUNC
 कालापेक्षी/NV पिहितनयनः/NV  बुद्धिमान्/NP कर्म/NP कुर्यात्/KP ।/PUNC
किम्/AP  गाण्डीवस्फुरत्/NV उरुगुणास्फालनक्रूरपाणिः/NV न/AN आसीत्/KP लीलान्/NP अटनविलसन्मेखली/NV सव्यसाची/NS ?/PUNC ॥ /PUNC 223/PUNC ॥/PUNC
सिद्धिम्/NP प्रार्थयता/NV जनेन/NP विदुषा/NV तेजः/NP निगृह्य/KKS स्वकम्/NP ,/PUNC
 सत्त्वोत्साहवता/NP अपि/A दैवविधिषु/NP स्थैर्यम्/NP प्रकार्यम्/NP क्रमात्/NP ।/PUNC
देवेन्द्रद्रविणेशवरान्तकसमैः/NV अपि/A अन्वितः/NP भ्रातृभिः/NP ,/PUNC
 किम्/AP  क्लिष्टः/NV सुचिरम्/NV त्रिदण्डम्/NP अवहत्/KP श्रीमान्/NV न/AN धर्मात्मजः/NP ?/PUNC ॥/PUNC 224/PUNC ॥ /PUNC
रूपाभिजनसम्पन्नौ/NV कुन्तीपुत्रौ/NP बलान्वितौ/NV ।/PUNC
गोकर्मरक्षाव्यापारे/NP विराटप्रेष्यताम्/KN गतौ/KN ॥/PUNC 225/PUNC ॥/PUNC
रूपेण/NP अप्रतिमेन/NV यौवनगुणैः/NV श्रेष्ठे/NV कुले/NP जन्मना/NP ,/PUNC 
कान्त्या/NP श्रीः/NP इव/ASD यात्र/NP सा/SN अपि/A विदशाम्/NP कालक्रमात्/NP आगता/KN ।/PUNC
सैरन्ध्री/NS इति/AUD सगर्वितम्/NP युवतिभिः/NP साक्षेपम्/NP अज्ञाप्तया/NV ,/PUNC
द्रौपद्या/NS ननु/A मत्स्यराजभवने/NP घृष्टम्/KN  चिरम्/A चन्दनम्/NP ॥/PUNC 226/PUNC ॥/PUNC
मेघवर्णः/NS आह/KP —/PUNC “/PUNC तात/NP !/PUNC असिधाराव्रतम्/NP इदम्/SN मन्ये/KP यत्/AVK अरिणा/NP सह/UA संवासः/NP ।/PUNC “/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC ”/PUNC देव/NP !/PUNC एवम्/UAD एतत्/SN ।/PUNC परम्/A  न/AN तादृक्/ASD मूर्खसमागमः/NP क्व/A अपि/A मया/SN दृष्टः/KN ।/PUNC न/AN च/APY  महाप्रज्ञम्/NV अनेकशास्त्रेषु/NV अप्रतिमबुद्धिम्/NV  रक्ताक्षम्/NS  विना/UA धीमान्/NP ।/PUNC यत्/AVK कारणम्/NP  तेन/SN मदीयम्/SN  यथा/A अवस्थितम्/NV  चित्तम्/NP  ज्ञातम्/KN ।/PUNC ये/SN पुनः/A अन्ये/SN मन्त्रिणः/NP ते/SN महामूर्खा/NV मन्त्रिमात्रव्यपदेशोपजीविनः/NV अतत्त्वकुशला/NV यैः/SN इदम्/SN अपि/A न/AN ज्ञातम्/KN  यत्/AVK -/PUNC
 अरितः/NP अभ्यागतः/KN  भृत्यः/NP  दुष्टः/NV तत्सङ्गतत्परः/NV ।/PUNC
 अपसर्पसधर्मत्वात्/NP नित्योद्वेगी/NP च/APY  दूषितः/NV ॥/PUNC 227/PUNC ॥/PUNC
 आसने/NP शयने/NP याने/NP पानभोजनवस्तुषु/NP ।/PUNC
 दृष्टान्तरम्/NP  प्रमत्तेषु/NP प्रहरन्ति/KP अरयः/NP अरिषु/NP ॥/PUNC 228/PUNC ॥/PUNC
 तस्मात्/AVK सर्वम्/SN  प्रयत्नेन/NP त्रिवर्गनिलयम्/NP  बुधः/NP ।/PUNC
 आत्मानम्/NP आदृतः/KN  रक्षेत्/KP प्रमादात्/NP हि/A विनश्यति/KP ॥/PUNC 229/PUNC ॥/PUNC
साधु/NP च/APY  इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
 सन्तापयन्ति/KP कम्/SN अपथ्यभुजम्/NP  न/AN रोगा/NP ,/PUNC दुर्मन्त्रिणम्/NP  कम्/SN उपयान्ति/KP न/AN नीतिदोषाः/NP । /PUNC 
 कम्/SN  श्रीः/NP न/AN दर्पयति/KP कम्/SN  न/AN निहन्ति/KP मृत्युः/NP ,/PUNC कम्/SN  स्वीकृता/NP न/AN विषयाः/NP परिपीडयन्ति/KP ॥/PUNC 230/PUNC ॥/PUNC
 लुब्धस्य/NP नश्यति/KP यशः/NP पिशुनस्य/NP मैत्री/NP ,/PUNC नष्टक्रियस्य/NP कुलम्/NP अर्थपरस्य/NP धर्मः/NP ।/PUNC
 विद्या/NP बलम्/NP  व्यसनिनः/NP कृपाणस्य/NP सौख्यम्/NP ,/PUNC राज्यम्/NP  प्रमत्तसचिवस्य/NP नराधिपस्य/NP ॥/PUNC 231 /PUNC ॥/PUNC
तत्/AVK राजन्/NP !/PUNC असिधाराव्रतम्/NP  मया/SN आचरितम्/NP अरिसंसर्गात्/NP इति/AUD यत्/AVK भवत/SN उक्तम्/KN  तत्/AVK मया/SN साक्षात्/NP एव/A अनुभूतम्/NP ।/PUNC
 अपमानम्/NP  पुरस्कृत्य/KKS मानम्/NP  कृत्वा/KKS तु/A पृष्ठतः/KN ।/PUNC
 स्वार्थम्/NP अभ्युद्धरेत्/KP प्राज्ञः/NP स्वार्थभ्रंशः/NP  हि/A मूर्खता/NP ॥/PUNC 232/PUNC ॥/PUNC
 स्कन्धेन/NP अपि/A वहेत्/KP शत्रुम्/NP  कालम्/NP आसाद्य/KKS बुद्धिमान्/NP ।/PUNC
 वहता/NV कृष्णसर्पेण/NP मण्डूका/NP विनिपापिताः/KN ॥/PUNC 233/PUNC ॥/PUNC
मेघवर्णः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC स्थिरजीवी/NS कथयति/KP -/PUNC

[/PUNC १६/PUNC ]/PUNC
 (/PUNC मण्डूकमन्दविषसर्पकथा/NS )/PUNC

अस्ति/KP वरुणाद्रिसमीपे/NP एकस्मिन्/SNV प्रदेशे/NP परिणतवया/NV मन्दविषः/NS  नाम/A कृष्णसर्पः/NP ।/PUNC सः/SN  एवम्/AUD चित्ते/NP सञ्चिन्तितवान्/KN –/PUNC  ”/PUNC कथम्/A  नाम/NP मया/SN सुखोपायवृत्त्या/NP वर्त्तितव्यम्/KN “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 ततः/AVK  बहुमण्डूकम्/NV  ह्रदम्/NP उपगम्य/KKS धृतिपरीतम्/NP इव/ASD आत्मानम्/NP  दर्शितवान्/KN  ।/PUNC अथ/A तथास्थिते/KN तस्मिन्/SNV उदकप्रान्तगतेन/NV एकेन/SMKY मण्डूकेन/NP पृष्टः/KN -/PUNC  “/PUNC माम/SN !/PUNC किम्/AP अद्य/A यथापूर्वम्/NP आहारार्थम्/NP  न/AN विहरसि/KP ?/PUNC  ”/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC कुतः/NP  मे/SN मन्दभाग्यस्य/NP आहाराभिलाषः/NP !/PUNC यत्/AVK कारणम्/NP -/PUNC अद्य/A रात्रौ/NP प्रदोषे/NP एव/INTF मया/SN आहारार्थम्/NP  विहरमाणेन/NP दृष्ट/KN एकः/SMK  मण्डूकः/NP  ।/PUNC तत्/SN ग्रहणार्थम्/NP  मया/SN क्रमः/NP सञ्चितः/KN  ।/PUNC सः/SN अपि/A माम्/SN  दृष्टवा/KKS मृत्युभयेन/NP स्वाध्यायप्रसक्तानाम्/NV  ब्राह्मणानाम्/NP अन्तरम्/UA अपक्रान्तः/KN  न/AN विभावितः/KN  मया/SN क्व/A अपि/A गतः/SN । /PUNC तत्सदृशमोहितचित्तेन/NV मया/SN कस्यचित्/SNV ब्राह्मणस्य/NP सूनोः/NP हृदतटजलान्तस्थः/NV अङ्गुष्ठः/NP  दष्टः/KN ।/PUNC ततः/AVK असौ/SN सपदि/NP पञ्चत्वम्/NP उपागतः/KN ।/PUNC 
 अथ/A तस्य/SN पित्रा/NP दुःखितेन/NV अहम्/SN  शप्तः/KN  यथा/A -/PUNC  “/PUNC दुरात्मन्/NP !/PUNC त्वया/SN निरपराधः/NV  मत्सुतः/NP  दष्टः/KN ।/PUNC तत्/AVK अनेन/SNV दोषेण/NP त्वम्/SNV  मण्डूकानाम्/NP  वाहनम्/NP  भविष्यसि/KP । /PUNC तत्प्रसादलब्धजीविकया/NP च/APY  वर्त्तिष्यसे/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC ततः/AVK अहम्/SN  युष्माकम्/SN  वाहनार्थम्/NP आगत/NP अस्मि/KP ।/PUNC 
 तेन/SN सः/SN  सर्वमण्डूकानाम्/NP इदम्/SN अवेदितम्/KN ।/PUNC ततः/AVK तैः/SN प्रहृष्टमनोभिः/NV सर्वैः/SN एव/A गत्वा/KKS जलपादनाम्नः/NS  दर्दुरराजस्य/NP विज्ञप्तम्/KN ।/PUNC अथ/A असौ/SN अपि/A मन्त्रिपरिवृतः/NV अति/NV अद्भुतम्/NP इदम्/SN इति/AUD मन्यमानः/KN ससम्भ्रमम्/NP  ह्रदात्/NP उत्तीर्य/KKS मन्दविषस्य/NP फणिनः/NP फणप्रदेशम्/NP अधिरूढः/KN ।/PUNC शेषाः/NP  अपि/A यथा/A ज्येष्ठम्/NP  तत्पृष्ठोपरि/NP समारुरुहुः/KN ।/PUNC किम्/AP  बहुना/NP  ,/PUNC तदुपरि/NP स्थानम्/NP प्राप्तवन्तः/KN तस्य/SN अनुपदम्/NP  धावन्ति/KP ।/PUNC मन्दविषः/NS अपि/A तेषाम्/SN  तुष्ट्यर्थम्/NP अनेकप्रकारान्/NV गतिविशेषान्/NP अदर्शयत्/KP ।/PUNC अथ/A जलपादः/NS  लब्धतदङ्गसंस्पर्शसुखः/NV तम्/SN आह/KP -/PUNC 
 न/AN तथा/A करिणा/NP यानम्/NP  तुरगेण/NP रथेन/NP वा/A ।/PUNC
 नरयानेन/NP नावा/NP वा/A यथा/A मन्दविषेण/NS मे/SN ॥/PUNC 234/PUNC ॥/PUNC
अथ/A अन्येद्युः/NP मन्दविषः/NS छद्मना/NP मन्दम्/DV मन्दम्/KV  विसर्पति/KP ।/PUNC तत्/SN च/APY  दृष्टवा/KKS ,/PUNC जलपादः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NS मन्दविष/NS !/PUNC यथापूर्वम्/NP  किम्/AP अद्य/A साधु/KV नोह्यते/KP ? /PUNC  ”/PUNC ।/PUNC मन्दविषः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC देव/NP !/PUNC अद्य/A आहारवैकल्यात्/NP न/AN मे/SN वोढुम्/NP  शक्तिः/NP अस्ति/KP ।/PUNC “/PUNC अथ/A असौ/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC  ”/PUNC भद्र/NP ! /PUNC भक्षय/KP क्षुद्रमण्डूकान्/NP ।/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS प्रहर्षितसर्वगात्रः/NV  मन्दविषः/NS ससम्भ्रम्/KV अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC मम/SN अयम्/SN एव/AUD विप्रशापः/NP अस्ति/KP ।/PUNC तत्/SN तव/SN अनेन/SNV अनुज्ञावचनेन/NP प्रीतः/KN अस्मि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 ततः/A असौ/SN नैरन्तर्येण/NP मण्डूकान्/NP भक्षयन्/KNV कतिपयैः/SNV अहोभिः/NP बलवान्/NP संवृत्तः/KN ।/PUNC प्रहृष्टः/KN च/APY  अन्तर्लीनम्/NP अवहस्य/KKS इदम्/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC
 मण्डूका/NP विविधात्/NV आस्वादात्/NP छलपूर्वोपसाधिताः/KN ।/PUNC
 कियन्तम्/A  कालम्/NP अक्षीणा/NP भवेयुः/KP खादतः/NP  मम/SN ॥/PUNC 235/PUNC ॥/PUNC
जलपादः/NS अपि/A मन्दविषेण/NS कृतकवचनव्यामोहितचित्तः/NV किम्/A अपि/A न/AN अवबुध्यते/KP ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/NP अन्यः/SN  महाकायः/NV कृष्णसर्पः/NP तम्/SN उद्देशम्/NP  समायातः/KN ।/PUNC तम्/SN  च/APY  मण्डूकैः/NP वाह्यमानम्/NP  दृष्ट्वा/KKS विस्मयम्/NP अगमत्/KP ।/PUNC आह/KP च/AVK -/PUNC  “/PUNC वयस्य/NP !/PUNC यत्/AVK अस्माकम्/SN अशनम्/NP  तैः/SN कथम्/A  वाह्यसे/KP ?/PUNC विरुद्धम्/NP एतत्/SN ।/PUNC “/PUNC मन्दविषः/NS अब्रवीत्/KP -/PUNC
  “/PUNC सर्वमेतत्/SN विजानामि/KP यथा/A वाह्यः/NP अस्मि/KP दर्दुरैः/NP ।/PUNC
 किञ्चित्कालम्/NP  प्रतीक्षे/NP अहम्/SN  घृतान्धः/NV  ब्राह्मणः/NP  यथा/A ”/PUNC ॥/PUNC 236/PUNC ॥/PUNC
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC कथम्/A एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC मन्दविषः/NS कथयति/KP -/PUNC

 [/PUNC १७/PUNC ]/PUNC
 (/PUNC घृतान्धब्राह्मणकथा/NS )/PUNC
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SNV अधिष्ठाने/NP यज्ञदत्तः/NS  नाम/A ब्राह्मणः/NP ।/PUNC तस्य/SN भार्या/NP पुंश्चली/NV अन्यासक्तमना/NV अजस्रम्/NP  विटाय/NP सखण्डघृतान्/NV घृतपूरान्/NP कृत्वा/KKS भर्त्तुः/NP चौरिकया/KV प्रयच्छति/KP ।/PUNC
अथ/A कदाचिद्/A भर्त्ता/NP दृष्ट्वा/KKS अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC किम्/AP एतत्/SN परिपच्यते/KP ? /PUNC कुत्र/A वाजस्रम्/NP  नयसीदम्/KP ?/PUNC कथय/KP सत्यम्/NP ।/PUNC “/PUNC 
 सा/SN च/APY  उत्पन्नप्रतिभा/NV कृतकवचनैः/NP भर्त्तारम्/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC अस्ति/KP अत्र/A न/AN अतिदूरे/NP भगवत्या/NV देव्या/NP आयतनम्/NP  तत्र/A अहम्/SN उपोषिता/NV सती/NP बलिम्/NP  भक्ष्यविशेषान्/NP च/APY  अपूर्वात्/NP नयामि/KP । /PUNC “/PUNC
अथ/A तस्य/SN पश्यतः/KNV  गृहीत्वा/KKS तत्सकलम्/NP  देव्या/NP आयतनाभिमुखी/NP प्रतस्थे/KP ।/PUNC यत्कारणम्/NP  देव्या/NP निवेदितेन/NV अनेन/SNV मदीयः/NP  भर्त्तैवम्/NP  मस्यते/KP यत्/AVK मम/SN ब्राह्मणी/NP भगवत्याः/NP कृते/KN भक्ष्यविशेषात्/NP नित्यम्/A एव/AUD  नयति/KP इति/AUD ।/PUNC अथ/A देव्या/NP आयतने/NP गत्वा/KKS स्नानार्थम्/NP  नद्याम्/NP अवतीर्य/KKS यावत्/A स्नानक्रियाम्/NP  करोति/KP तावद्/A भर्ता/NP अपि/A मार्गान्तरेण/NP आगत्य/KKS देव्याः/NP पृष्ठतः/NP अदृश्यः/KV अवतस्थे/KP ।/PUNC
 अथ/A सा/SN ब्राह्मणी/NP स्नात्वा/KKS देव्या/NP आयतनम्/NP आगत्य/KKS स्नानानुलेपनमाल्यधूपबलिक्रियादिकम्/NP  कृत्वा/KKS देवीम्/NP  प्रणम्य/KKS व्यजिज्ञपत्/KP -/PUNC  “/PUNC भगवति/NP केन/SN प्रकारेण/NP मम/SN भर्त्तः/NP अन्धः/NP  भविष्यति/KP ? 
 तश्रुत्वा/KKS स्वरभेदेन/NP देवीपृष्ठस्थितः/NV  ब्राह्मणः/NP  जगाद/KP -/PUNC  “/PUNC यदि/A त्वम्/SN अजस्रम्/NV  घृतपूर/NP आदिभक्ष्यम्/NP  तस्मै/SN भत्र/NP प्रयच्छसि/KP ततः/AVK सः/SN  शीघ्रम्/KV अन्धः/NP  भविष्यति/KP ।/PUNC “/PUNC 
 सा/SN तु/A बन्धकी/NV कृतकवचनविचिन्तमानसा/NV तस्मै/SNV ब्राह्मणाय/NP तत्/SN एव/INTF नित्यम्/A  प्रददौ/KP ।/PUNC अथ/A अन्येद्युः/A ब्राह्मणेन/NP अभिहितम्/KN -/PUNC  “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC न/AN अहम्/SN  सुतराम्/NP  पश्यामि/KP । /PUNC “/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS चिन्तितमनया/NP -/PUNC  “/PUNC देव्याः/NP प्रसादः/NP अयम्/SN  प्राप्तः/KN ” /PUNC इति/AUD ।/PUNC
 अथ/A तस्या/SN हृदयवल्लभः/NV  विटः/NP तत्सकाशम्/NP  “/PUNC अन्धीभूतः/NV अयम्/SNV  ब्राह्मणः/NP किम्/AP  मम/SN करिष्यति/KP इति/AUD ”/PUNC निःशङ्कम्/NP  प्रतिदिनम्/A अभ्येति/KP ।/PUNC अथ/A अन्येद्युः/A तम्/SN  प्रविशन्तम्/KNV अभ्याशगतम्/NV  दृष्टवा/KKS केशैः/NP गूहीत्वा/KKS लगुडपार्ष्णिप्रभृतिप्रहारैः/NP तावत्/A अताडयत्/KP यावत्/A असौ/SN पञ्चत्वम्/NP आप/KN । /PUNC ताम्/SNV अपि/A दुष्टपत्नीम्/NP  छिन्ननासिकाम्/NP  कृत्वा/KKS विससर्ज/KP ।/PUNC अतः/AVK अहम्/SN  ब्रवीमि/KP - /PUNC “/PUNC सर्वम्/SNV एतत्/SN विजानामि/KP  ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC
 अथ/A मन्दविषः/NS अन्तर्लींनम्/NP अवहस्य/KKS पुनः/KV अपि/A  “/PUNC मण्डूका/NP विवधास्वादाः/NP ”/PUNC -/PUNC इति/AUD  तत्/SN एव/INTF अब्रवीत्/KP ।/PUNC अथ/A जलपादः/NS तत्/SN श्रुत्वा/KKS सुतराम्/NP  व्यग्रहृदयः/NV-/PUNC किम्/AP अनेन/SN अभिहितम्/KN इति/AUD ,/PUNC तम्पृच्छत्/KP -/PUNC  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC किम्/AP  त्वया/SN अभिहितम्/KN इदम्/SNV  विरुद्धम्/NV  वचः/NP ”/PUNC ?/PUNC ।/PUNC 
 अथ/A असौ/SN आकारप्रच्छादनार्थम्/NP “/PUNC नः/AN किञ्चित्/NP ”/PUNC-/PUNC इति/AUD अब्रवीत्/KP ।/PUNC तथा/A इव/A कृतकवचनव्यामोहितचित्तः/NV  जलपादः/NS तस्य/SN दुरभिसन्धिम्/NP  न/AN अवबुध्यते/KP ।/PUNC किम्/AP  बहुना/NP - /PUNC तथा/A तेन/SN सर्वे/SN अपि/A भक्षिताः/KN, यथा/A बीजमात्रम्/NP अपि/A न/AN अवशिष्टम्/NP ।/PUNC अतः/AVK अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC  “/PUNC स्कन्धेन/NP अपि/A वहेत्/KP शत्रुम्/NP इति/AUD ।/PUNC
 अथ/A राजन्/NP !/PUNC यथा/A मन्दविषेण/NS बुद्धिबलेन/NP मण्डूका/NP निहताः/KN ,/PUNC तथा/A मया/SN अपि/A सर्वे/SNV अपि/A वैरिण/NP इति/AUD ।/PUNC साधु/NP च/APY  इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
 वने/NP प्रज्वलितः/NV वह्निः/NP दहन्मूलानि/NP रक्षति/KP ।/PUNC
 समूलोन्मूलनम्/NP कुर्यात्/KP वायुर्यः/NP  मृदुशीतलः/NV ”/PUNC ॥/PUNC 237/PUNC ॥/PUNC
मेघवर्णः/NS आह/KP —/PUNC “/PUNC तात/NP !/PUNC सत्यम्/NP एव/INTF एतत्/SN ,/PUNC ये/SSN महात्मानः/NP  भवन्ति/KP ते/ASMBN महासत्त्वा/NV आपत्/NP गता/KN अपि/A प्रारब्धम्/NP  न/AN विसर्जयन्ति/KP ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/APY यतः/AVK -/PUNC
 महत्त्वम्/NP एतत्/SN महताम्/NV नयालङ्कारधारिणाम्/NP ।/PUNC
 न/AN मुञ्चन्ति/KP यत्/AVK आरब्धम्/NP कृच्छ्रे/NP अपि/A व्यसनोदये/NP ॥/PUNC 238/PUNC ॥/PUNC
तथा/A च/AVK -/PUNC
 प्रारभ्यते/KP न/AN खलु/A विघ्नभयेन/NP नीचैः/NP ,/PUNC
 प्रारभ्य/KN विघ्नविहिता/NP विरमन्ति/KP मध्याः/NP ।/PUNC
 विघ्नैः/NP पुनः/DVपुनः/KV अपि/A प्रतिहन्यमानाः/NV ,/PUNC
 प्रारभ्य/KN च/APY  उत्तमजना/NP न/AN परित्यजन्ति/KP ॥/PUNC 239/PUNC ॥/PUNC
तत्कृतम्/KN  निष्कण्टकम्/NV  मम/SN राज्यम्/NP  शत्रून्निःशेषताम्/NP  नयता/KN त्वया/SN ।/PUNC अथवा/A युक्तम्/KN एतत्/SN नयवेदिनाम्/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY  यतः/AVK -/PUNC
 ऋणशेषम्/NP  च/APY  अग्निशेषम्/NP  शत्रुशेषम्/NP  तथा/A एव/INTF च/APY  ।/PUNC
 व्याधिशेषम्/NP च/APY  निःशेषम्/NP  कृत्वा/KKS प्राज्ञः/NP  न/AN सीदति/KP ”/PUNC ॥/PUNC 240/PUNC ॥/PUNC
सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC  “/PUNC देव/NP !/PUNC भाग्यवान्/NV त्वम्/SN एव/INTF असि/KP यस्य/SN आरब्धम्/NP  सर्वम्/SN एव/INTF संसिध्यति/KP ।/PUNC तत्/AVK न/AN केवलम्/A  शौर्यम्/NP  कृत्यम्/KN  साधयति/KP ,/PUNC किन्तु/A प्रज्ञया/NP यत्/SSN क्रियते/KP तत्/SN एव/INTF विजयाय/NP भवति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY  यतः/AVK —/PUNC
  “/PUNC शस्त्रैः/NP हता/KN न/AN हि/A हता/KN रिपवः/NP  भवन्ति/KP ,/PUNC 
 प्रज्ञाहताः/NV तु/A रिपवः/NP सुहता/KN भवन्ति/KP ।/PUNC
 शस्त्रम्/NP  निहन्ति/KP पुरुषस्य/NP शरीरम्/NP एकम्/SMK 
प्रज्ञा/NP कुलम्/NP च/APY  विभवम्/NP च/APY  यशः/NP च/APY  हन्ति/KP ॥/PUNC 241/PUNC ॥/PUNC
 तत्/SN एवम्/AUD प्रज्ञापुरुषकाराभ्याम्/NP  युक्तस्य/NP अयत्नेन/NP कार्यसिद्धयः/NP सम्भवन्ति/KP ।/PUNC
 यतः/AVK -/PUNC
 प्रसरति/KP मतिः/NP कार्य/NP आरम्भे/NP दृढीभवति/KP स्मृतिः/NP ,/PUNC
 स्वयम्/A उपनमन्ति/KP अर्था/NP मन्त्रः/NP  न/AN गच्छति/KP विप्लवम्/NP ।/PUNC
 स्फुरति/KP सफलः/NP तर्कः/NP चित्तम्/NP  समुन्नतिम्/NP अश्नुते/KP ,/PUNC 
 भवति/KP च/APY  रतिः/NP श्लाघ्ये/NV कृत्ये/KN नरस्य/NP भविष्यतः/NP ॥/PUNC 242/PUNC ॥/PUNC
 तथा/A नयत्यागशौर्यसम्पन्ने/NV पुरुषे/NP राज्यम्/NP इति/AUD ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC
 त्यागिनि/NP शूरे/NP विदुषि/NP च/APY  संसर्गरुचिः/NV जनः/NP  गुणः/NP  भवति/KP ।/PUNC
 गुणवति/NP धनम्/NP  धनात्/NP श्रीः/NP श्रीमत्याज्ञा/NP ततः/A  राज्यम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 243/PUNC ॥/PUNC
मेघवर्ण/NS आह/KP -/PUNC  “/PUNC नूनम्/A  सद्यःफलानि/NV नीतिशास्त्राणि/NP यत्/AVK त्वया/SN अनुकृत्येन/NP अनुप्रविश्य/KKS अरिमर्दनः/NS सपरिजनः/NV  निःशेषितः/NV ।/PUNC स्थिरजीवीः/NS  आह/KP -/PUNC
  “/PUNC तीक्ष्णोपायप्राप्तिगम्यः/NP अपि/A यः/SNV अर्थः/NP तस्य/SN अपि/A आदौ/A संश्रयः/NP साधुयुक्तः/NP ।/PUNC
 उत्तुङ्ग/NV अग्रः/NV सारभूतः/NV  वनानाम्/NP  ,/PUNC न/AN अनभ्यर्च्यत्/KP छिद्यते/KP पादपेन्द्रः/NP ॥/PUNC 244/PUNC ॥ /PUNC
अथवा/A ,/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC किम्/AP  तेन/SN अभिहितेन/KN ,/PUNC यत्/AVK अनन्तरकाले/NP क्रियारहितम्/NP , /PUNC असुखसाध्यम्/NP  वा/A भवति/KP ।/PUNC साधु/NP च/APY  इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
 अनिश्चितैः/NP अध्यवसायभीरुभिः/NP ,/PUNC पदे/DVपदे/NP दोषशतानुदर्शिभिः/NP ।/PUNC
 फलेर्विसंवादम्/NP उपागता/KN गिरः/NP ,/PUNC प्रयान्ति/KP लोके/NP परिहासवस्तुताम्/NP ॥/PUNC 245/PUNC ॥/PUNC
न/AN च/APY  लघुषु/NV अपि/A कर्त्तव्येषु/NP धीमद्भिः/NP अनादरः/NP कार्यः/NP ।/PUNC यतः/AVK -/PUNC
 शक्ष्यामि/KP कर्तुम्/NP इदम्/SN अल्पम्/NV अयत्नसाध्यम्/NV अत्र/A आदरः/NP क/SN इति/AUD कृत्यम्/NP उपेक्षणः/NP ।/PUNC
 केचित्प्रमत्तमनसः/NV परितापदुःखम्/NP आपत्प्रसङ्गसुलभम्/NP  पुरुषाः/NV प्रयान्ति/KP ॥/PUNC 246/PUNC ॥/PUNC
 तत्/SN अद्य/A जितारेः/NV मद्विभोः/NP यथापूर्वम्/KV  निद्रालाभः/NP  भविष्यति/KP ।/PUNC
उच्यते/KP च/APY  एतत्/SN -/PUNC
निःसर्पे/NV हतसर्पे/NV वा/A भवने/NP सुप्यते/KP सुखम्/KV ।/PUNC
दृष्टनष्टभुजङ्गे/NP तु/A निद्रा/NP दुःखेन/KV लभ्यते/KP ॥/PUNC 247/PUNC ॥/PUNC
तथा/A च/APY  -/PUNC
विस्तीर्णव्यवसायसाध्यम्/NV अहताम्/NV  स्निग्धोपयुक्ताशिषाम्/NV  ,/PUNC 
 कार्याणाम्/NP  नयसाहसोन्नतिमताम्/NV इच्छापदारोहिणाम्/NP ।/PUNC
मानोत्सेकपराक्रमव्यसनिनः/NP पारम्/NP  न/AN यावत्/A गताः/KN ,/PUNC 
 सामर्षे/NV हृदये/NP अवकाशविषया/NP तावत्/A कथम्/A  निर्वृतिः/KN ॥/PUNC 248/PUNC ॥/PUNC
तत्/AVK अवसितकार्य्यारम्भस्य/NP विश्राम्यतीव/NP मे/SN हृदयम्/NP ।/PUNC तत्/AVK इदम्/SN अधुना/A निहतकण्टकम्/NV  राज्यम्/NP  प्रजापालनतत्परः/NP  भूत्वा/KKS पुत्रादिक्रमेण/KV अचलत्/KP छत्रासनश्रीः/NP चिरम्/A  भुङ्क्ष्व/KP ।/PUNC अपि/A च/AVK -/PUNC
 प्रजा/NP न/AN रञ्जयेत्/KP यः/SN तु/A राजा/NP रक्षादिभिः/NP गुणैः/NP ।/PUNC
 अजागलस्तनस्य/NP एव/INTF तस्य/SN राज्यम्/NP  निरर्थकम्/NV ॥/PUNC 249/PUNC ॥/PUNC
 गुणेषु/NP रागः/NP  व्यसनेषु/NP अनादरः/NP  ,/PUNC रतिः/NP सुभृत्येषु/NP च/APY  यस्य/SNV भूपतेः/NP ।/PUNC
 चिरम्/A  सः/SN  भुङ्क्ते/KP चलचामरांशुकाम्/NP  ,/PUNC सितातपत्राभरणाम्/NV  नृपश्रियम्/NP ॥/PUNC 250/PUNC ॥/PUNC
 न/AN च/APY  त्वया/SN प्राप्तराज्यः/NP अहम्/SN इति/AUD मत्वा/KKS श्रीमदेन/KV आत्मा/NP व्यंसयितव्यः/KN ।/PUNC यत्कारणम्/AVK  -/PUNC चला/NV हि/A राज्ञः/NP  विभूतयः/NP ।/PUNC वंशारोहणवत्/KN राज्यलक्ष्मीः/NP दुरारोहा/NV क्षणनिपाता/NV च/APY  । /PUNC पारदरसवत्/KN प्रयत्नशतैः/NP अपि/A धार्यमाणा/NV दुर्धरा/NV ।/PUNC प्रशस्ताधिता/NP अपि/A अन्ते/NP विप्रलम्भिनी/NP ।/PUNC वानरजातिः/NP इव/ASD विद्रुता/NV अनेकचित्ता/NV ।/PUNC पद्मपत्रोदकम्/NP इव/ASD अघटितसंश्लेषा/NP ।/PUNC पवनगतिः/NP इव/ASD अतिचपला/NV ।/PUNC अनार्यसङ्गतिम्/NP इव/ASD अस्थिरा/NV ।/PUNC आशीविष/NP इव/ASD दुरुपचारा/NP ।/PUNC सन्ध्याभ्रलेख/NP इव/ASD मुहूर्तरागा/NP ।/PUNC जलबुद्बुदावली/NP इव/ASD स्वभावभङ्गुरा/NV ।/PUNC शरीरप्रकृतिः/NP इव/ASD कृत्घ्ना/NV ।/PUNC स्वप्नलब्धद्रव्यराशिः/NP इव/ASD क्षणदृष्टनष्टा/NP ।/PUNC 
अपि/A च/AVK -/PUNC
 यदा/A इव/A राज्ये/NP क्रियते/KP अभिषेकः/NP तदा/A इव/A बुद्धिः/NP व्यसनेषु/AN योज्या/KN ।/PUNC
 घटा/NP हि/A राज्ञाम्/NP अभिषेककाले/NP सह/UA अम्भसा/NP इव/ASD अपदम्/NP उद्गिरन्ति/KP ॥/PUNC 251/PUNC ॥/PUNC
 न/AN च/APY  कश्चित्/SNV अनधिगमनीयः/NP  नाम/A अस्ति/KP आपदाम्/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY  -/PUNC
 रामस्य/NP व्रजनम्/NP  बलेः/NP नियमनम्/NP  पाण्डोः/NP सुतानाम्/NP  वनम्/NP  ,/PUNC
 वृष्णीनाम्/NP  निधनम्/NP  नलस्य/NP नृपते/NP राज्यात्परिभ्रंशनम्/NP ।/PUNC
 नाट्याचार्यकम्/NP अर्जुनस्य/NP पतनम्/NP  सञ्चिन्त्य/KKS लङ्केश्वरे/NP ,/PUNC 
 सर्वम्/SNV  कालवशात्/NP जनः/NP अत्र/A सहते/KP कः/SN कम्/SN  परित्रायते/KP ॥/PUNC 252/PUNC ॥/PUNC
 क्व/A सः/SNV  दशरथः/NS स्वर्गे/NP भूत्वा/KKS महेन्द्रसुहृद्/NP गतः/KN ,/PUNC
 क्व/A सः/SNV  जलनिधेः/NP वेलाम्/NP  बद्ध्वा/KKS नृपः/NV सगरः/NS तथा/A ।/PUNC
 क्व/A सः/SNV  करतलात्/NP जातः/KN  वैन्यः/NV सूर्यतनुः/NV मनुः/NS 
 ननु/A बलवता/NV कालेन/NP एते/SN प्रबोध्य/KKS निमीलिताः/KN ॥/PUNC 253/PUNC ॥/PUNC
 मान्धाता/NS क्व/A गतः/KN त्रिलोकविजयी/NV राजा/NV क्व/A सत्यव्रतः/NS ,/PUNC
 देवानाम्/NP  नृपतिः/NP गतः/KN क्व/A नहुषः/SN सत्/KP शास्त्रवित्/NV केशवः/NS ।/PUNC
मन्ये/KP ते/SN सरथाः/NV सकुञ्जरवराः/NV शक्रासनाध्यासिनः/NV
 कालेन/NP एव/INTF महात्मना/NP ननु/A कृताः/KN कालेन/NP निर्वासिताः/KN ॥/PUNC 254/PUNC ॥/PUNC
अपि/A च/AVK -/PUNC
 सः/SNV  च/APY  नृपतिः/NP ते/SN सचिवास्ताः/NP प्रमदाः/NP तानि/SNV काननवनानि/NP ।/PUNC
 सः/SN  च/APY  ते/SN च/APY  ताः/SN च/APY  तानि/SN च/APY  कृतान्तदष्टानि/NV नष्टानि/NP ॥/PUNC 255/PUNC ॥ /PUNC
 एवम्/AUD मत्तकरिकर्णचञ्चलाम्/NV  राज्यलक्ष्मीम्/NP अवाप्य/KKS न्यायैकनिष्ठः/NP  भूत्वा/KKS उपभुङ्क्ष्व/KP ”/PUNC ।/PUNC
 ॥/PUNC इति/AUD महामहोपाध्यायश्रीविष्णुशर्मविरचितम्/NV  
 काकोलूकीयम्/NS नाम/A तृतीयम्/SMKP  तन्त्रम्/NP  समाप्तम्/KN ॥/PUNC 

पञ्चतन्त्रे/NS -/PUNC 
:/PUNC अथ/A लब्धप्रणाशम्/NS :/PUNC 
   (/PUNC चतुर्थतन्त्रम्/NP )/
अथ/A इदम्/SN आरभ्यते/KP लब्धप्रणाशम्/NS  नाम/NP चतुर्थम्/SMKP  तन्त्रम्/NP ,/PUNC यस्य/SN अयम्/SN आदिमः/NV श्लोकः/NP -/PUNC 
समुत्पन्नेषु/KNV कार्येषु/NP बुद्धिः/NP यस्य/SSN न/AN हीयते/KP ।/PUNC 
सः/SN  एव/INTF दुर्गम्/NP  तरति/KP जलस्थः/NV  वानरः/NP  यथा/A ॥/PUNC 1/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN यथा/A अनुश्रूयते/KP -/PUNC 
अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SN समुद्रोपकण्ठे/NV महाञ्जम्बूपादपः/NP सदाफलः/NV ।/PUNC तत्र/SN च/AVK रक्तमुखः/NS  नाम/NP वानरः/NP प्रतिवसति/KP स्म/KP ।/PUNC तत्र/SN च/AVK तस्य/SN तरोः/NP अधः/A कदाचित्करालमुखः/NS  नाम/NP मकरः/NP समुद्रसलिलात्/NP निष्क्रम्य/KKS सुकोमलबालुकासनाथे/NV तीरोपान्ते/NP निरविशत्/KP ।/PUNC 
ततः/A च/AVK रक्तमुखेन/NS  सः/SN  प्रोक्तः/KP -/PUNC "/PUNC भोः/ASMB !/PUNC भवान्/SN समभ्यागतः/NV अतिथिः/NP,/PUNC तत्/SN भक्षयतु/KP मया/SN दत्तानि/KP अमृततुल्यानि/NV जम्बूफलानि/NP।/PUNC उक्तम्/KP च/AVK -/PUNC 
प्रियः/NP  वा/A यदि/A वा/A द्वेष्यः/NV  मूर्खः/NV  वा/A यदि/A पण्डितः/NV ।/PUNC 
वैश्वदेवान्तम्/NP आपन्नः/KN सः/SSN अतिथिः/NP स्वर्गसंक्रमः/NV ॥/PUNC 2/PUNC ॥/PUNC 
न/AN पृच्छेत्/KP चरणम्/NP  गोत्रम्/NP  न/AN च/APY विद्याम्/NP  कुलम्/NP  न/AN च/APY ।/PUNC 
अतिथिम्/NP  वैश्वदेवान्ते/NP श्राद्धे/NP च/APY मनुः/NS अब्रवीत्/KP ॥/PUNC 3/PUNC ॥/PUNC 
दूरमार्गश्रमश्रान्तम्/KN  वैश्वदेवान्तम्/NP आगतम्/KN ।/PUNC 
अतिथिम्/NP  पूजयेत्/KP यस्तु/SN सः/SN  याति/KP परमाम्/NV  गतिम्/KP ॥/PUNC 4/PUNC ॥/PUNC 
अपूजितः/NV अतिथिः/NV यस्य/SN गृहात्/NP याति/KP विनिःश्वसन्/KNV ।/PUNC 
गच्छन्ति/KP विमुखाः/NV तस्य/SN पितृभिः/NP सह/A देवताः/NP "/PUNC ॥/PUNC 5/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS तस्मै/ जम्बूफलानि/  ददौ/KP ।/ सः/SN अपि/A तानि/SN भक्षयित्वा/KKS तेन/SN सह/A चिरम्/A  गोष्ठीसुखम्/NP अनूभूय/KKS,/PUNC भूयः/A अपि/A स्वभवनम्/NP अगात्/KP ।/PUNC 
एवम्/A  नित्यम्/A एव/INTF तौ/SN वानरमकरौ/NP जम्बूच्छायास्थितौ/NV विविधशास्त्रगोष्ठ्या/NP कालम्/NS नयन्तौ/KP सुखेन/KV तिष्ठतः/KP ।/PUNC सः/SN अपि/A मकरः/NP  भक्षितशेषाणि/NV जम्बूफलानि/NP गृहम्/NP गत्वा/KKS स्वपत्न्याः/NP प्रयच्छति/KP ।/PUNC 
अथ/A अन्यस्मिन्/SN दिवसे/NP तया/SN सः/SN पृष्टः/KN -/PUNC "/PUNC नाथ/NP !/PUNC क्व/SN एवम्/ASD विधानि/NP अमृतफलानि/NP प्राप्नोषि/KP ?/PUNC “/PUNC 
सः/SN आह/KP -/PUNC "/PUNC भद्रे/ASMB !/PUNC मम/SN अस्ति/KP परमसुहृत्/NV रक्तमुखः/NS नाम/NP वानरः/NP ,/PUNC सः/SN  प्रीतिपूर्वकम्/KV इमानि/SN फलानि/NP प्रयच्छति/KP ।/PUNC "/PUNC 
 अथ/A तया/SN अभिहितम्/KP  -/PUNC "/PUNC यः/SN सदैव/A अमृतप्रायाणि/NV ईदृशानि/A फलानि/NP भक्षयति/KP ,/PUNC तस्य/SN हृदयम्/NP अमृतमयम्/NV भविष्यति/KP ।/PUNC तत्/SN यदि/AVK मया/SN भार्यया/NP ते/SN प्रयोजनम्/NP ,/PUNC ततः/A तस्य/SN हृदयम्/NP मह्यम्/SN प्रयच्छ/KP ,/PUNC येन/SN तत्/SN भक्षयित्वा/KKS जरामरणरहिता/NV त्वया/SN सह/A भोगान्भुनज्मि/KP ।/PUNC "/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC "/PUNC भद्रे/ASMB !/PUNC मा/AN मा/AN एवम्/A  वद/KP ।/PUNC यतः/AVK सः/SN प्रतिपन्नः/KN अस्माकम्/SN भ्राता/NP ।/PUNC अपरम्/A फलदाता/NP ।/PUNC ततः/A व्यापादयितुम्/KP न/AN शक्यते/KP ।/PUNC तत्/SN त्यज/KP एनम्/SN मिथ्याग्रहम्/NP ।/PUNC उक्तम्/KP च/A -/PUNC 
एकम्/SMK प्रसूयते/KP माता/NP द्वितीयम्/SMKP वाक्/NP प्रसूयते/KP ।/PUNC 
वाग्जातम्/KN अधिकम्/KV  प्रोचुः/KP सोदर्यात्/NP अपि/A बान्धवात्/NP "॥/PUNC 6/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A मकरी/NP आह/KP –/PUNC ”/PUNC त्वया/SN कदाचित्/A अपि/A मम/SN वचनम्/NP  न/AN अन्यथा/A कृतम्/KN ,/PUNC तत्/SN नूनम्/A  सा/SN वानरी/NP भविष्यति/KP ।/PUNC यतः/AVK तस्या/SN अनुरागतः/NP सकलम्/NP अपि/A दिनम्/NP  तत्र/A गमयसि/KP ।/PUNC तत्/SN त्वम्/SN ज्ञातः/KN मया/SN सम्यक्/A ।/PUNC यतः/AVK -/PUNC 
साह्लादम्/KV वचनम्/NP प्रयच्छसि/KP न/AN मे/SN नः/SN वाञ्छितम्/KN किञ्चन/A ,/PUNC 
प्रायः/A प्रोच्छ्वसिषि/KP द्रुतम्/KV हुतवहज्वालासमम्/NV रात्रिषु/NS ।/PUNC 
 कण्ठाश्लेषपरिग्रहे/KP शिथिलता/KV यत्/SSN न/AN आदरात्/KV चुम्बसे/KP ,/PUNC 
 तत्/SN ते/SN धूर्त्त/NP हृदि/NP स्थिता/KN प्रियतमा/NP काचित्/SN मम/SN इव/ASD अपरा/SN "/PUNC ॥/PUNC 7/PUNC ॥/PUNC 
सः/SN अपि/A पत्न्याः/NP पादोपसंग्रहम्/KP  कृत्वा/KKS अङ्कोपरि/KV निधाय/KKS तस्याः/SN कोपकोटिम्/KV आपन्नायाः/KN सुदीनम्/KV उवाच/KP -/PUNC 
  "/PUNC मयि/SN ते/SN पादपतिते/SNV किंकरत्वम्/KV उपागते/KN ।/PUNC 
   त्वम्/SN  प्राणवल्लभे/ASMB !/PUNC कस्मात्कोपने/ASMB !/PUNC कोपम्/NP एष्यसि/KP "/PUNC ॥/PUNC 8 ॥/PUNC 
सा/SN अपि/A तद्वचनम्/NP आकर्ण्य/KKS अश्रुप्लुतमुखी/SNV तम्/SN उवाच/KP -/PUNC 
सार्द्धम्/A  मनोरथशतैः/NP तव/SN धूर्त्त/SNV !/PUNC कान्ता/NP,/PUNC सा/SN एव/INTF स्थिता/SNV मनसि/NP कृत्रिमभावरम्या/NV ।/PUNC 
अस्माकम्/SN अस्ति/KP न/AN कथञ्चित्/SN इह/A अवकाशः/NP तस्मात्/SN कृतम्/KN  चरणपातविडम्बनाभिः/NP ॥/PUNC 9 ॥/PUNC 
अपरम्/A ,/PUNC सा/SN यदि/A तव/SN बल्लभा/NP न/AN भवति/KP ,/PUNC तत्किम्/AP  मया/SN भणितः/KN अपि/A ताम्/SN  न/AN व्यापादयसि/KP ?/PUNC अथ/A यदि/A सः/SN  वानरः/NP तत्/SSN कः/AP तेन/SN सह/A तव/SN स्नेहः/NS ?/PUNC तत्किम्/AP  बहुना/A ,/PUNC यदि/A तस्य/SN हृदयम्/NP  न/AN भक्षयामि/KP तर्हि/A मया/SN प्रायः/A उपवेशन/NP  कृतम्/KN  विद्धि/KP ।/PUNC “/PUNC  
  एवम्/A  तस्याः/SN तम्/SN  निश्चयम्/NP  ज्ञात्वा/KKS ,/PUNC चिन्ताव्याकुलितहृदयः/SNV सः/SN प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ASMB ,/PUNC साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
  वज्रलेपस्य/NS मूर्खस्य/NP नारीणाम्/NP  कर्कटस्य/NS च/APY ।/PUNC 
  एकः/SMK  ग्रहः/NP तु/A मीनानाम्/NP  नीलीमद्यपयोः/NP तथा/A ॥/PUNC 10/PUNC ॥/PUNC 
तत्किम्/AP  करोमि/KP ?/PUNC कथम्/AP  सः/SN  मे/SN वध्यः/NP  भवति/KP ”/PUNC ?/PUNC इति/AUD विचिन्त्य/KKS वानरपार्श्वम्/NP अगमत्/KP ।/PUNC वानरः/NP अपि/A चिरात्/A आयान्तम्/KP  तम्/SN  सोद्वेगम्/KV अवलोक्य/KKS प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC किम्/AP अद्य/A चिरवेलया/NP समायातः/KN असि/KP ?/PUNC कस्मात्/AP साह्लादम्/KV  न/AN आलपसि/KP ?/PUNC न/KP  सुभाषितानि/NP पठसि/KP ?/PUNC “/PUNC 
 सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC मित्र/NP !/PUNC अहम्/SN  तव/SN भातृजायया/NP निष्ठुरतरैः/NV वाक्यैः/NP अभिहितः/KP –/PUNC “/PUNC भोः/ASMB कृतघ्न/NP !/PUNC मा/AN मे/SN त्वम्/SN  स्वमुखम्/NP  दर्शय/KP ।/PUNC यतः/A त्वम्/SN  प्रतिदिनम्/NP  मित्रम्/NP अपजीवसि/KP ,/PUNC न/AN च/AVK तस्य/SN पुनः/A प्रत्युपकारम्/NP  गृहदर्शनमात्रेण/NP अपि/A करोषि/KP ,/PUNC तत्/SSN ते/SN प्रायश्चित्तम्/NP अपि/A न/AN अस्ति/KP ।/PUNC उक्तम्/KP च/AVK -/PUNC 
ब्रह्मघ्ने/NP च/APY सुरापे/NP च/APY चौरे/NP भग्नव्रते/NP शठे/NP ।/PUNC 
 निष्कृतिविहिता/KN सद्भिः/NP कृतघ्ने/NP न/AN अस्ति/KP निष्कृतिः/NP ॥/PUNC 11/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SSN त्वम्/SN  मम/SN देवरम्/NP  गृहीत्वा/KKS अद्य/A प्रत्युपकारार्थम्/NP  गृहम्/NP आनय/KP ,/PUNC नो/SN चेत्/A त्वया/SN सह/A मे/SN परलोके/NP दर्शनम्/NP इति/AUD ।/PUNC तत्/SN अहम्/SN  तया/A एवम्/A  प्रोक्तः/KP तव/SN सकाशम्/KV आगतः/KP ।/PUNC तत्/SN अद्य/A तया/SN सह/A त्वदर्थे/NP कलाहयतः/KKS  मम/SN इयती/A वेला/NP विलग्ना/NV ।/PUNC तत्/SN आगच्छ/KP मे/SN गृहम्/NP ।/PUNC तव/SN भ्रातृपत्नी/NP रचितचतुष्का/NV प्रगुणितवस्त्रमणिमाणिक्य/NP आदि/A उचिताभरणा/NV द्वारदेशबद्धबन्दनमाला/NV सोत्कण्ठा/NV तिष्ठति/KP ।/PUNC “/PUNC 
मर्कट/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC युक्तम्/KV अभिहितम्/KP  मद्भ्रातृपत्न्या/NP ।/PUNC उक्तम्/KP च/AVK -/PUNC 
वर्जयेत्/KP कौलिकाकारम्/NV मित्रम्/NV प्राज्ञतरः/NV नरः/NP ।/PUNC 
आत्मनः/SN संमुखम्/SNV नित्यम्/A य/SN आकर्षति/KP लोलुपः/SNV ॥/PUNC 12/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 ददाति/KP प्रतिगृह्णणाति/KP गुह्यम्/NP आख्याति/NP पृच्छति/NP ।/PUNC 
 भुङ्क्ते/KP भोजयते/KP च/APY एव/INTF षड्विधम्/A  प्रीतिलक्षणम्/NP ॥/PUNC 13/PUNC ॥/PUNC 
परम्/A  वयम्/SN  वनचराः/NP ,/PUNC युष्मदीयम्/SN  च/APY जलान्ते/NV गृहम्/NP ।/PUNC तत्कथम्/AP  शक्यते/KP तत्र/SN गन्तुम्/KKS ;/PUNC तस्मात्/SN ताम्/SN अपि/A मे/SN भ्रातृपत्नीम्/NP अत्र/SN आनय/KP ,/PUNC येन/SN प्रणम्य/KKS तस्या/SN आशीर्वादम्/NP गृह्णामि/KP ।/PUNC “/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC अस्ति/KP समुद्रान्तरे/NV सुरम्ये/NV पुलिनप्रदेशे/NV अस्मदीयम्/SN  गृहम्/NP ।/PUNC तत्/SN मम/SN पृष्ठम्/NP आरुढः/KN सुखेन/KV अकुतोभयः/KV  गच्छ/KP ।/PUNC “/PUNC सः/SN अपि/A तत्/SN श्रुत्वा/KKS सानन्दम्/KV आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A तत्किम्/AP विलम्ब्यते/KP ;/PUNC त्वर्यताम्/KP ।/PUNC एषः/SN अहम्/SN  तव/SN पृष्ठम्/NP आरूढः/KN ।/PUNC 
  तथा/A अनुष्ठिते/NV अगाधे/NV जलधौ/NP गच्छन्तम्/KKS  मकरम्/NP आलोक्य/KKS भयत्रस्तमना/NV वानरः/NP प्रोवाच/KP -/PUNC 
  “/PUNC भ्रातः/NP !/PUNC शनैः/DV शनैः/DV गम्यताम्/KP ,/PUNC जलकल्लोलैः/NP प्लाव्यते/KP मे/SN शरीरम्/NP ।/PUNC “/PUNC  
 तदाकर्ण्य/KKS मकरः/NP चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC असौ/A अगाधम्/NV  जलम्/NP  प्राप्तः/KN  मे/SN वशः/NP सञ्जातः/KN !/PUNC मत्पृष्ठगतः/KN तिलमात्रम्/KV अपि/A चलितुम्/NP  न/AN शक्नोति/KP ;/PUNC तस्मात्कथयामि/KP अस्य/SN निजाभिप्रायम्/NP ,/PUNC येन/SN अभीष्टदेवतास्मरणम्/KN  करोति/KP ।/PUNC आह/KP च/AVK -/PUNC “/PUNC मित्र/NP !/PUNC त्वम्/SN  मया/SN वधाय/NP समानीतः/KP  भार्यावाक्येन/NP विश्वास्य/NP ।/PUNC तत्स्मर्यताम्/KP अभीष्टदेवता/NP ।/PUNC “/PUNC 
  सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भ्रातः/NP !/PUNC किम्/AP  मया/SN तस्याः/SN तव/SN अपि/A च/AVK अपकृतम्/KN ,/PUNC येन/SN मे/SN वधोपायः/NP चिन्तितः/KN ?/PUNC ”/PUNC मकरः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC तस्याः/SN तावत्/A तव/SN हृदयस्य/NP अमृतमयफलरसास्वादनम्/NP इष्टस्य/NP भक्षणे/KN दोहदः/NP सञ्जातः/KN ,/PUNC तेन/SN एतत्/SN अनुष्ठितम्/KN ।/PUNC ”/PUNC प्रत्युत्पन्नमतिः/NP वानरः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/ !/PUNC यदि/A एवम्/A ,/PUNC तत्किम्/AP  त्वया/SN मम/SN तत्र/A एव/INTF न/AN व्याहृतम्/KN ,/PUNC येन/SN स्वहृदयम्/NP  जम्बूकोटरे/NP सदा/A एव/INTF मया/SN यत्/SN सुगुप्तम्/NP  कृतम्/KN तत्/SN भातृपत्न्या/NP अर्पयामि/KP ।/PUNC त्वया/SN अहम्/SN  शून्यहृदयः/SNV अत्र/A कस्मात्/AP आनीतः/KN ?/PUNC “/PUNC 
 तत्/SN आकर्ण्य/KKS मकरः/NP सानन्दम्/KV आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A ,/PUNC तत्/SN अर्पय/KP मे/SN हृदयम्/NP ,/PUNC येन/SN सा/SN दुष्टपत्नी/SNV तत्/SN भक्षयित्वा/KKS अनशनात्/NP उत्तिष्ठति/KP ।/PUNC अहम्/SN  त्वाम्/SN  तम्/SN एव/INTF जम्बूपादपम्/NP  प्रापयामि/KP ”/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS निवृत्त्य/KKS जम्बूतलम्/NP अगात्/KP ।/PUNC 
 वानरः/NP अपि/A कथम्/AP अपि/A जल्पितविविधदेवतोपचारपूजः/NV तीरम्/NP आसादितवान्/KN ।/PUNC ततः/A च/AVK दीर्घतरचङ्क्रमणेन/NP तम्/SN एव/INTF जम्बूपादपम्/NP आरूढः/KN चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC  लब्धाः/KN तावत्प्राणाः/NP ।/PUNC अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
  न/AN विश्वसेत्/KP अविश्वस्ते/NP विश्वस्ते/NP अपि/A न/AN विश्वसेत्/KP ।/PUNC 
विश्वासात्/NP भयम्/NP उत्पन्नम्/NP  मूलानि/NP अपि/A निकृन्तति/KP ॥/PUNC 14/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN मम/SN एतत्/SN अद्य/A पुनः/A जन्मदिनम्/NP इव/ASD सञ्जातम्/KN ,/PUNC ”/PUNC इति/AUD चिन्तयमानम्/KN  मकरः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC अर्पय/KP तत्/SN हृदयम्/NP ,/PUNC यथा/A ते/SN भ्रातृपत्नी/NP भक्षयित्वा/KKS अनशनात्/NP उत्तिष्ठति/KP ।/PUNC 
“/PUNC अथ/A विहस्य/KKS ,/PUNC निर्भर्त्सयन्/KKS वानरः/NP तम्/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC धिक्/ABS धिक्/DV मूर्ख/NP !/PUNC विश्वासघातक/NP !/PUNC किम्/AP  कस्यचित्/SN हृदयद्वयम्/NP  भवति/KP ,/PUNC तत्/SN आशु/KV गम्यताम्/KP  जम्बूवृक्षस्य/NP अधस्तलात्/NP ,/PUNC न/AN भूयः/A अपि/A त्वया/SN अत्र/A आगन्तव्यम्/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/A -/PUNC 
  सकृत्/NV दुष्टम्/NP  च/APY यः/SN  मित्रम्/NP  पुनः/A सन्धातुम्/KKS इच्छति/ ।/PUNC 
  सः/SSN  मृत्युम्/NP उपगृह्णाति/KP गर्भम्/NP अश्वतरी/NP यथा/A ॥/PUNC 15/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS मकरः/NP सविलक्षम्/KV  चिन्तितवान्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC मया/SN अतिमूढेन/SNV किम्/AP अस्य/SN स्वचित्ताभिप्रायः/NP  निवेदितः/KN ?/PUNC ,/PUNC तत्/SN यदि/A असौ/A पुनः/A अपि/A कथञ्चित्/AP विश्वासम्/NP  गच्छति/KP तत्/SN भूयः/A अपि/A विश्वासयामि/KP ”/PUNC ।/PUNC आह/KP च/AVK -/PUNC “/PUNC मित्र/NP !/PUNC हास्येन/NP मया/SN ते/SN अभिप्रायः/NP  लब्धः/KN ,/PUNC तस्या/SN न/AN किञ्चित्/AP तव/SN हृदयेन/NP प्रयोजनम्/NP ।/PUNC तत्/SN आगच्छ/KP प्राघुणिकन्यायेन/NP अस्मत्/SN गृहम्/NP ।/PUNC तव/SN भ्रातृपत्नी/NP सोत्कण्ठा/NV वर्तते/KP ।/PUNC “/PUNC 
  वानर/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB दुष्ट/NP !/PUNC गम्यताम्/KP ।/PUNC अधुना/A न/AN अहम्/SN आगमिष्यामि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
बुभुक्षितः/NP किम्/AP  न/AN करोति/KP पापम्/NP ,/PUNC 
क्षीणा/NV नरा/NP निष्करुणा/NV भवन्ति/KP ।/PUNC 
आख्याहि/KP भद्रे/NP !/PUNC प्रियदर्शनस्य/NP ,/PUNC 
न/AN गङ्गदत्तः/NS पुनरेति/KP कूपम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 16/PUNC ॥/PUNC 

  [/PUNC १/PUNC ]/PUNC 
( गङ्गदत्तप्रियदर्शनयोः/NS कथा/NP )
कस्मिंश्चित्/SN कूपे/NP गङ्गदत्तः/NS  नाम/A मण्डूकराजः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  कदाचित्/A दायादैः/NP उद्वेजितः/KN अरघट्टघटीम्/NP आरुह्य/KKS निष्क्रान्तः/KP ।/PUNC अथ/A तेन/SN चिन्तितम्/KP  यत्/SN -/PUNC “/PUNC कथम्/AP  तेषाम्/SN  दायादानाम्/NP  मया/SN प्रत्युपकारः/NP कर्त्तव्यः/KN ?/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
आपदि/NP येन/SN अपकृतम्/KN  येन/SN च/APY हसितम्/KN  दशासु/NP विषमासु/NV ।/PUNC 
अपकृत्य/KKS तयोः/SN उभयोः/SNV पुनः/A अपि/A जातम्/KN  नरम्/NP  मन्ये/KP ॥/PUNC 17/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  चिन्तयन्/KKS बिले/NP प्रविशन्तम्/KKS  प्रियदर्शनाभिधम्/NV  कृष्णसर्पम्/NP अपश्यत्/KP ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS भूयः/A अपि/A अचिन्तयत्/KP यत्/AVK -/PUNC “/PUNC एनम्/SN तत्र/A कूपे/NP नीत्वा/KKS ,/PUNC सकलदायादानाम्/NP उच्छेदम्/NP  करोमि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
शत्रुणा/NP योजयेत्/KP शत्रुम्/NP  बलिना/NP बलवत्तरम्/NV ।/PUNC 
स्वकार्याय/NP यतः/A न/AN स्यात्/KP काचित्/SN पीडा/NP अत्र/A तत्क्षये/KKS ॥/PUNC 18/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
शत्रुम्/NP उन्मूलयेत्/KP प्राज्ञः/NP तीक्ष्णम्/NP  तीक्ष्णेन/NV शत्रुणा/NP ।/PUNC 
व्यथाकरम्/NP  सुखार्थाय/NP कण्टकेन/NP एव/INTF कण्टकम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 19/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  सः/SN  विभाव्य/KKS विलद्वारम्/NP  गत्वा/KKS तम्/SN आहूतवान्/KN -/PUNC “/PUNC एहि/DV एहि/DV प्रियदर्शन/NS !/PUNC एहि/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS सर्पः/NP चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC य/SN एष/SN माम/SN आह्वयति/KP ,/PUNC सः/SN  स्वजातीयः/NP  न/AN भवति/KP ।/PUNC यतः/AVK  न/AN एषा/SN सर्पवाणी/NP ।/PUNC अन्येन/SN केन/SN अपि/A सह/A मम/SN मर्त्त्यलोके/NP सन्धानम्/NP  न/AN अस्ति/KP ।/PUNC तत्/SN अत्र/A एव/INTF दुर्गे/NP स्थितः/KN तावत्/A वेद्मि/KP -/PUNC कः/AP अयम्/SN  भविष्यति/KP ?/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  यस्य/SN न/AN ज्ञायते/AN शीलम्/NP  न/AN कुलम्/NP  न/AN च/APY संश्रयः/NP ।/PUNC 
 न/AN तेन/SN सङ्गतिम्/NP  कुर्यात्/KP इति/AUD उवाच/KP बृहस्पतिः/NS ॥/PUNC 20/PUNC ॥/PUNC 
कदाचित्/SN कोऽपि/SN मन्त्रवादी/NP  ओषधिचतुरः/NP  वा/A माम्/SN आहूय/KKS बन्धने/NP क्षिपति/KP ,/PUNC अथवा/A कश्चित्/SN पुरुषः/NP  वैरम्/NP आश्रित्य/KKS कस्यचित्/SN भक्षणार्थे/NP माम्/SN आह्वयति/KP ।/PUNC आह/KP च/AVK -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC कः/AP  भवान्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC अहम्/SN  गङ्गदत्तः/NS  नाम/A मण्डूकाधिपतिः/NV त्वत्/SN सकाशे/NP मैत्र्यर्थम्/KN अभ्यागतः/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS सर्पः/NP  आह/KP -/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC अश्रद्धेयम्/NP एतत्/SN यत्/AVK -/PUNC तृणानाम्/NP  वह्निना/NP सह/A सङ्गमः/ ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
यः/SN  यस्य/SN जायते/KP वध्यः/KN सः/SN  स्वप्ने/NP अपि/A कथंचन/A ।/PUNC 
न/AN तत्/SN समीपम्/SNV अभ्य़ॆति/KV तत्/SN किम्/AP एवम्/A  प्रजल्पसि/KP ?/PUNC ”/PUNC ॥/PUNC 21/PUNC ॥/PUNC 
गङ्गदत्त/NS आह/KP -/PUNC भोः/ASMB !/PUNC सत्यम्/SNV एतत्/SN ।/PUNC स्वभाववैरी/SNV त्वम्/SN अस्माकम्/SN ,/PUNC परं/A परपरिभवात्/NP प्राप्तः/KN अहम्/SN  ते/SN सकाशम्/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
सर्वनाशे/NP न/AN सञ्जाते/KN प्राणानाम्/NP अपि/A संक्षये/NP ।/PUNC 
  अपि/A शत्रुम्/NP  प्रणम्य/KKS अपि/A रक्षेत्/KP प्राणान्/NP धनानि/NP च/APY ॥/PUNC 22/PUNC ॥/PUNC 
 सर्पः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC कथय/KP कस्मात्/AP ते/SN परिभवः/NP ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC दायादेभ्यः/NP ।/PUNC ”/PUNC सः/SN अपि/A आह/KP -/PUNC “/PUNC क्व/AP ते/SN आश्रयः/NP -/PUNC वाप्याम्/NP ,/PUNC कूपे/NP ,/PUNC तडागे/NP ,/PUNC  ह्रदे/NP वा/A ?/PUNC तत्कथय/KP स्व/SN आश्रयम्/NP ।/PUNC ”/PUNC तेन/SN उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC पाषाणचयनिबद्धे/NV कूपे/NP ।/PUNC ”/PUNC सर्पः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS अपदाः/SNV  वयम्/SN ।/PUNC तत्/SN न/AN अस्ति/KP तत्र/A मे/SN प्रवेशः/NP ।/PUNC प्रविष्टस्य/NP च/AVK स्थानम्/NP  न/AN अस्ति/KP ,/PUNC यत्र/A स्थितः/KN तव/SN दायादान्/NP व्यापादयामि/KP ।/PUNC तत्/SN  गम्यताम्/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
यत्/AVK शक्यम्/NP  ग्रसितुम्/KKS  शस्तम्/KN  ग्रस्तम्/KN परिणमेत्/KP च/AVK यत्/AVK ।/PUNC 
हितम्/KN च/AVK परिणामे/NP यत्/AVK तत्/AVK आद्यम्/NP भूतिम्/NP इच्छता/KN ”/PUNC ॥/PUNC 23/PUNC ॥/PUNC 
 गङ्गदत्तः/NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC समागच्छ/KP त्वम्/SN ।/PUNC अहम्/SN  सुखोपायेन/NP तत्र/A तव/SN प्रवेशम्/NP  कारयिष्यामि/KP ।/PUNC तथा/A तस्य/SN मध्ये/SNV जलोपान्ते/NV रम्यतरम्/NV  कोटरम्/NP अस्ति/KP ,/PUNC तत्र/A स्थितः/KN त्वम्/SN  लीलया/NP दायादान्/NP व्यापादयिष्यसि/KP ।/PUNC “/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS सर्पः/NP  व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC अहम्/SN  तावत्/A परिणतवयाः/SNV कदाचित्/A कथञ्चित्/A मूषकम्/NP एकम्/SMK प्राप्नोमि/KP ।/PUNC तत्सुखावहः/NV जीवनोपायः/NS अयम्/SN अनेन/SN कुलाङ्गारेण/NP मे/SN दर्शितः/KN  ।/PUNC तत्/A/SN  गत्वा/KKS तान्/SN मण्डूकान्/SNV भक्षयामि/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
  यः/SN  हि/A प्राणपरिक्षीणः/SNV सहायपरिवर्जितः/SNV ।/PUNC 
  सः/SN  हि/A सर्वसुखोपायाम्/NV  वृत्तिम्/NP आरचयेत्/KP  बुधः/NP ॥/PUNC 24/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  विचिन्त्य/KKS तम्/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB गङ्गदत्त/NS !/PUNC यदि/A एवम्/A  तदग्रे/SNV भव/KP ,/PUNC येन/SN तत्र/A गच्छावः/KP ।/PUNC ”/PUNC गङ्गदत्तः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB प्रियदर्शन/NS !/PUNC अहम्/SN  त्वाम्/SN  सुखोपायेन/KV तत्र/A नेष्यामि/KP ,/PUNC स्थानम्/NP  च/AVK दर्शयिष्यामि/KP ।/PUNC परम्/A  त्वया/SN अस्मत्परिजनः/NP रक्षणीयः/KN ।/PUNC केवलम्/A  यान्/SN अहम्/SN  तव/SN दर्शयिष्यामि/KP ,/PUNC ते/SN एव/INTF भक्षणीयाः/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC सर्पः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC साम्प्रतम्/A  त्वम्/SN  मे/SN मित्रम्/NP  जातम्/KN ।/PUNC तत्/A न/AN भेतव्यम्/KN ।/PUNC तव/SN वचनेन/NP भक्षणीयाः/KN ते/SN दायादाः/NP ।/PUNC ”/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS बिलात्/NP निष्क्रम्य/KKS तम्/SN आलिङ्ग्य/KKS च/AVK ,/PUNC तेन/SN एव/INTF सह/A प्रस्थितः/KN ।/PUNC 
अथ/A कूपम्/NP आसाद्य/KKS आरघट्टघटिकामार्गेण/NP सर्पः/NP तेन/SN सह/A तस्य/SN आलयम्/NP  गतः/KN ।/PUNC ततः/A च/AVK गङ्गदत्तेन/NS कृष्णसर्पः/NP  कोटरे/NP धृत्वा/KKS दर्शिताः/KN ते/SN दायादाः/NP ।/PUNC ते/SN च/AVK तेन/SN शनैः/DV शनै/DV भक्षिताः/KN ।/PUNC अथ/A मण्डूक/NP अभावे/NP सर्पेण/NP अभिहितम्/KP  -/PUNC “/PUNC भद्र/NP ! निःशेषिताः/KN ते/SN रिपवः/NP ।/PUNC तत्प्रयच्छ/KP अन्यत्/A मे/SN किञ्चित्/A भोजनम्/NP यतः/A अहम्/SN त्वया/SN अत्र/A -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC कृतम्/KN  त्वया/SN मित्रकृत्यम्/NP ,/PUNC तत्साम्प्रतम्/A अनेन/SN एव/INTF घटिकायन्त्रमार्गेण/NP गम्यताम्/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 सर्पः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB गङ्गदत्त/NS !/PUNC न/AN सम्यक्/A अभिहितम्/KP त्वया/SN ।/PUNC कथम्/AP अहम्/SN  तत्र/A गच्छामि/KP ?/PUNC मदीयबिलदुर्गम्/NP अन्येन/SN रुद्धम्/KN  भविष्यति/KP ।/PUNC तस्मात्/A अत्रस्थस्य/SN मे/SN मण्डूकम्/NP एकैकम्/SMKY  स्ववर्गीयम्/KN प्रयच्छ,/PUNC नो/AN चेत्/A सर्वान्/SN अपि/ASD भक्षयिष्यामि/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS गङ्गदत्तः/NS व्याकुलमना/SNV व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC किम्/AP एतत्/SN मया/SN कृतम्/KN  सर्पम्/NP आनयता/KN ?/PUNC तत्/SN यदि/A निषेधयिष्यामि/KP तत्सर्वान्/SN अपि/A भक्षयिष्यति/KP ।/PUNC अथवा/A युक्तम्/KN उच्यते/KP -/PUNC 
यः/SN अमित्रम्/NP  कुरुते/KP मित्रम्/NP  वीर्याभ्यधिकम्/NV  आत्मनः/SN ।/PUNC 
सः/SN  करोति/KP न/AN सन्देहः/NP स्वयम्/SN  हि/A विषभक्षणम्/NP ॥/PUNC 25/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN प्रयच्छामि/KP अस्य/SN एवम्/A  प्रतिदिनम्/A/UA  सुहृदम्/NP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
सर्वस्वहरणे/NP शक्तम्/NV  शत्रुम्/NP  बुद्धियुता/NV नराः/NP ।/PUNC 
तोषयन्ति/KP अल्पदानेन/KP बाडवम्/NP  सागरः/NP  यथा/ASD ॥/PUNC 2 6/PUNC ॥/PUNC 
तथा/ASD च/AVK -/PUNC 
यः/SN  दुर्बलः/NP अणून्/NP अपि/A याच्यमानः/KN ,/PUNC 
बलीयसा/NP यच्छति/KP न/AN एव/INTF साम्ना/NP ।/PUNC 
प्रयच्छते/KP न/AN एव/INTF च/AVK कर्षमात्रम्/NP ,/PUNC 
खारीम्/NP  सः/SN  चूर्णस्य/NP पुनः/A ददाति/KP ॥/PUNC 27/PUNC ॥/PUNC 
तथा/ASD च/A -/PUNC 
सर्वनाशे/NP समुत्पन्ने/KN अर्द्धम्/NP  त्यजति/KP पण्डितः/NP ।/PUNC 
अर्द्धेन/NP कुरुते/KP कार्यम्/NP  सर्वनाशः/NP  हि/A दुःसहः/NP ॥/PUNC 28/PUNC ॥/PUNC 
न/AN स्वल्पस्य/NP कृते/KN भूरि/A नाशयेत्/KP मतिमान्नरः/NP ।/PUNC 
एतत्/SN एव/INTF हि/A पाण्डित्यम्/NP  यत्स्वल्पात्/NP भूरिरक्षणम्/NP ॥/PUNC 29/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  निश्चित्य/KKS नित्यम्/A एकैकम्/A  तम्/SN आदिशति/KP ।/PUNC सः/SN अपि/A तम्/SN  भक्षयित्वा/KKS तस्य/SN परोक्षे/NP अन्यान्/SN अपि/A भक्षयति/KP ।/PUNC 
  अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
यथा/A हि/A मलिनैः/NV वस्त्रैः/NP यत्र/A तत्र/A उपविश्यते/KP ।/PUNC 
एवम्/A  चलितवित्तः/NP तु/A वित्तशेषम्/NP  न/AN रक्षति/KP ॥/PUNC 30/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A अन्यदिने/NP तेन/SN अपरान्/A मण्डूकान्/NP भक्षयित्वा/KKS गङ्गदत्तसुतः/NV यमुनादत्तः/NS  भक्षितः/KN ।/PUNC तम्/SN  भक्षितम्/KN  ज्ञात्वा/KKS गङ्गदत्तः/NS तारस्वरेण/KV धिक्/DV धिक्/DV इति/AUD प्रलापपरः/NP कथञ्चित्/A अपि/A न/AN विरराम/KP !/PUNC ततः/A स्वपत्न्या/NP अभिहितः/KP -/PUNC 
 किम्/AP  क्रन्दसि/KP दुराक्रन्द/NP !/PUNC स्वपक्षक्षयकारक/NP !/PUNC ।/PUNC 
 स्वपक्षस्य/NP क्षये/NP जाते/KN कः/AP  नः/SN त्राता/NP भविष्यति/KP  ॥/PUNC 31/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A अद्य/A अपि/A विचिन्त्यताम्/KP आत्मनः/SN  निष्क्रमणम्/NP,/PUNC अस्य/SN वधोपायम्/NP  च/APY ।/PUNC 
अथ/A गच्छता/NV कालेन/NP सकलम्/NV अपि/A कवलितम्/NV  मण्डूककुलम्/NP ।/PUNC केवलम्/A एकः/SMK  गङ्गदत्तः/NS तिष्ठति/KP ।/PUNC ततः/A प्रियदर्शनेन/NS भणितम्/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB गङ्गदत्त/NS !/PUNC बुभुक्षितः/KN अहम्/SN ।/PUNC निःशेषिताः/NV सर्वे/SN मण्डूकाः/NP ।/PUNC तत्/SN दीयताम्/KP मे/SN किञ्चित्/A भोजनम्/NP  ।/PUNC यतः/A अहम्/SN  त्वया/SN अत्र/SN आनीतः/KP ।/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC न/AN त्वया/SN अत्र/A विषये/NP मयि/SN अवस्थिते/SNV कापि/SN चिन्ता/NP कार्या/KN ।/PUNC तत्/SN यदि/A माम्/SN  प्रेषयसि/KP ,/PUNC ततः/A अन्यकूपस्थानात्/NP अपि/A मण्डूकान्/NP विश्वास्य/KKS अत्र/A आनयामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
  सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC मम/SN तावत्/A त्वम्/SN अभक्ष्यः/SNV  भ्रातृस्थाने/NP ,/PUNC तत्/SN यदि/A एवम्/A  करोषि/KP ,/PUNC तत्साम्प्रतम्/A  पितृस्थाने/NP भवसि/KP ।/PUNC तत्/SN एवम्/A  क्रियताम्/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC सः/SN अपि/A तत्/SN आकर्ण्य/KKS आरघट्टघटिकाम्/NP आश्रित्य/KKS विविधदेवतोपकल्पितपूजोपयाचितः/SNV तस्मात्/SN  कूपात्विनिष्क्रान्तः/KN ।/PUNC प्रियदर्शनः/NS अपि/A तदागमनाकाङ्क्षया/NP तत्रस्थः/NP प्रतीक्षमाणः/KN तिष्ठति/KP ।/PUNC 
 अथ/A चिरात्/A अनागते/NV गङ्गदत्ते/NS प्रियदर्शनः/NS अन्यकोटरनिवासिनीम्/NV  गोधाम्/NP उवाच/KP –/PUNC “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC क्रियताम्/KP स्तोकम्/A साहाय्यम्/NP ।/PUNC यतः/A चिरपरिचितः/NV ते/SN गङ्गदत्तः/NS ।/PUNC तत्/SN  गत्वा/KKS तत्सकाशम्/SNV  कुत्रचित्/A जलाशये/NP अन्विष्य/KKS ,/PUNC मम/SN सन्देशम्/NP  कथय/KP ,/PUNC येन/SN आगम्यताम्/KP एकाकिना/SNV अपि/A भवता/SN द्रुततरम्/SNV ,/PUNC यदि/A अन्ये/SN मण्डूका/NP न/AN आगच्छन्ति/KP ।/PUNC अहम्/SN  त्वया/SN विना/A न/AN अत्र/A वस्तुम्/KKS  शक्नोमि/KP ।/PUNC तथा/A यदि/A अहम्/SN  तव/SN विरुद्धम्/NP आचरामि/KP तत्/SN सुकृतम्/NP अन्तरे/A मया/SN विधृतम्/KN ।/PUNC “/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
गोधा/NP अपि/A तत्/SN वचनात्/NP गङ्गदत्तम्/NS  द्रुततरम्/KV अन्विष्य/KKS आह/KP –/PUNC “/PUNC भद्र/NP गङ्गदत्त/NS !/PUNC सः/SN  तव/SN सुहृत्/NV प्रियदर्शनः/NS तव/SN मार्गम्/NP  समीक्षमाणः/KNV तिष्ठति/KP ।/PUNC तत्/A शीघ्रम्/KV आगम्यताम्/KP इति/AUD ।/PUNC अपरम्/A च/AVK ,/PUNC तेन/SN तव/SN विरूद्धकरणे/NP सुकृतम्/NP अन्तरे/A धृतम्/KN ।/PUNC तन्निःशङ्केन/NV मनसा/NP समागम्यताम्/KP ।/PUNC “/PUNC 
”/PUNC तत्/SN आकर्ण्य/KKS गङ्गदत्तः/NS आह/KP -/PUNC 
बुभुक्षितः/NP किम्/AP  न/AN करोति/KP पापम्/NP  क्षीणा/NV नराः/NP  निष्करुणा/NV भवन्ति/KP ।/PUNC 
आख्याहि/KP भद्रे/NP !/PUNC प्रियदर्शनस्य/NS,/PUNC न/AN गङ्गदत्तः/NS पुनः/A एति/KP कूपम्/NP ॥/PUNC 32/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS सः/SN  ताम्/SN  विसर्जयामास/KP ।/PUNC 
 तत्/A भो/ASMB दुष्ट/NV जलचर/NP !/PUNC अहम्/SN अपि/A गङ्गदत्तः/SN इव/ASD त्वत्/SN गृहे/NP न/AN कथञ्चित्/A अपि/A यास्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS मकरः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC न/AN एतत्/SN युज्यते/KP ।/PUNC सर्वथा/A एव/INTF मे/SN कृतघ्नतादोषम्/NP अपनय/KP मत्/SN गृहागमनेन/KP ।/PUNC अथवा/A अत्र/A अहम्/SN अनशनात्/NP प्राणत्यागम्/NP तव/SN उपरि/A करिष्यामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
  वानरः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC मूढ/NP !/PUNC किम्/AP अहम्/SN लम्बकर्णः/NS मूर्खः/NP ,/PUNC यत्/AVK दृष्टापायः/NV अपि/A स्वयम्/SN एव/INTF तत्र/A गत्वा/KKS आत्मानम्/SN  व्यापादयामि/KP ?/PUNC 
  आगतः/KN च/APY गतः/KN च/APY एव/INTF दृष्ट्वा/KKS सिंहपराक्रमम्/NP ।/PUNC 
  अकर्णहृदयः/SNV  मूर्खः/SNV  यः/SN  गत्वा/KKS पुनः/A आगतः/KN ”/PUNC ॥/PUNC 33/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC सः/SN  कः/AP  लम्बकर्णः/NS ?/PUNC कथम्/AP  दृष्टापायः/NV अपि/A मृतः/KN ?/PUNC तत्/SN मे/SN निवेद्यताम्/KP ”/PUNC ।/PUNC वानरः/NP  आह/KP -/PUNC 

  [/PUNC २/PUNC ]/PUNC 
   (/PUNC सिंहलम्बकर्णयोः/NS कथा/NP )/PUNC 
 कस्मिंश्चित्/SN वनोद्देशे/NV करालकेशरः/NS  नाम/A सिंहः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तस्य/SN च/AVK धृसरकः/SN  नाम/A श्रृगालः/NP सदैव/A अनुयायी/NV परिचारकः/NV अस्ति/KP ।/PUNC अथ/A कदाचित्/A तस्य/SN हस्तिना/NP सह/A युध्यमानस्य/NV शरीरे/NP गुरुतराः/NV प्रहाराः/NP सञ्जाताः/KN ,/PUNC यैः/SN पदमेकम्/NP अपि/A चलितुम्/KKS  न/AN शक्नोति/KP ।/PUNC तस्य/SN अचलनात्/NP च/APY धूसरकः/NS क्षुत्क्षामकण्ठः/NV  दौर्बल्यम्/NP  गतः/KN अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP तम्/SN अवोचत्/KP “/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC बुभुक्षया/NP पीङितः/SNV अहम्/SN  पदात्पदम्/NP अपि/A चलितुम्/KKS  न/AN शक्नोमि/KP ,/PUNC तत्/AVK कथम्/ P ते/SN शुश्रूषाम्/NP  करोमि/KP ?/PUNC ”/PUNC 
 सिंह/NP आह/KP –/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB !/PUNC गच्छ/KP ,/PUNC अन्वेषय/KP किञ्चित्/A सत्त्वम्/NP ,/PUNC येन/SN इमाम्/NV अवस्थाम्/NP  गतः/KN अपि/A व्यापादयामि/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN आकर्ण्य/KKS श्रृगालः/NP अन्वेषयन्/KNV कञ्चित्/SN समीपवर्त्तिनम्/NV  ग्रामम्/NP आसादितवान्/KN ।/PUNC तत्र/A लम्बकर्णः/NS  नाम/A गर्दभः/NS तडागोपान्ते/NV प्रविरलदूर्वाङ्कुरान्/NP कृच्छ्रात्/KV आस्वादयन्KNV दृष्टः/KN ।/PUNC ततः/A च/AVK समीपवर्त्तिना/NP भूत्वा/KKS तेन/SN अभिहितः/KN –/PUNC ”/PUNC माम/NP !/PUNC नमस्कारः/NP अयम्/SN  मदीयः/NV  सम्भाव्यताम्/KP ।/PUNC चिराद्/A दृष्टः/KN असि/KP तत्/AVK कथय/KP किम्/AP एवम्/A  दुर्बलताम्/NP  गतः/KN ?/PUNC ”/PUNC 
 सः/SN  आह/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB भगिनीपुत्र/NP !/PUNC किम्/AP  कथयामि/KP ,/PUNC रजकः/NP अतिनिर्दयः/NV अतिभारेण/NP माम्/SN  पीडयति/KP ।/PUNC घासमुष्टिम्/NP अपि/A न/AN प्रयच्छति/KP ।/PUNC केवलम्/A  दूर्वाङ्कुरान्/NP धूलिमिश्रितान्/NV भक्षयामि/KP ।/PUNC तत्/AVK कुतः/AP मे/SN शरीरे/NP पुष्टिः/NP ”/PUNC ?/PUNC शृगालः/NP  आह/KP –/PUNC ”/PUNC माम/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A ,/PUNC तत्/SN अस्ति/KP मरकतसदृशशष्पप्रायः/NV  नदीसनाथः/NV  रमणीयतरः/NV प्रदेशः/NP ।/PUNC तत्र/A आगत्य/KKS मया/SN सह/A सुभाषितगोष्ठीसुखम्/NP अनुभवन्/KNV तिष्ठ/KP ।/PUNC ”/PUNC लम्बकर्णः/NS  आह/KP –/PUNC ”/PUNC भो/ASMB भगिनीसुत/NP !/PUNC युक्तम्/NV उक्तम्/KN  भवता/SN ।/PUNC परम्/A  वयम्/SN  ग्राम्याः/NV पशवः/NP अरण्यचारिणाम्/NP  वध्याः/NP ।/PUNC तत्किम्/AP  तेन/SN भव्यप्रदेशेन/NP ?/PUNC ”/PUNC 
श्रृगालः/NP  आह/KP –/PUNC ”/PUNC माम/NP !/PUNC मा/AN एवम्/A  वद/KP ।/PUNC मत्/SN भुजपञ्जरपरिरक्षितः/NV सः/SNV  देशः/NP ।/PUNC तत्/SN न/AN अस्ति/KP कस्यचित्/SN अपरस्य/SN तत्र/A प्रवेशः/NP ।/PUNC परम्/A अनेन/SN एव/INTF विधिना/NP रजककदर्थिताः/NV तत्र/A तिस्रः/SMKY  रासभ्यः/NP अनाथाः/NV सन्ति/KP ।/PUNC ताः/SN च/APY पुष्टिम्/NP आपन्नाः/KN  यौवनोत्कटाः/NV  इदम्/SN  माम्/SN ऊचुः/KP –/PUNC ”/PUNC यदि/A त्वम्/SN अस्माकम्/SN  सत्यः/NV  मातुलः/NP तदा/A किञ्चित्/A  ग्रामान्तरम्/NP  गत्वा/KKS अस्मत्/SN योग्यम्/NV  कञ्चित्/SN पतिम्/NP आनय/KP ।/PUNC  तदर्थे/KKS त्वाम्/SN अहम्/SN  तत्र/A नयामि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
  अथ/A श्रृगालवचनानि/NP श्रुत्वा/KKS कामपीडिताङ्गः/NV  लम्बकर्णः/NS तम्/SN अवोचत्/KP –/PUNC ”/PUNC भद्र/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A  तत्/APY अग्रे/NP भव/KP ,/PUNC येन/SN त्वरितम्/KV  तत्र/A गच्छावः/KP ”/PUNC ।/PUNC 
  अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
   न/AN अमृतम्/NP  न/AN विषम्/NP  किञ्चित्/A एकाम्/INTF  मुक्त्वा/KKS नितम्बिनीम्/NP ।/PUNC 
   यस्याः/SN सङ्गेन/NP जीव्येत/KP ,/PUNC म्रियेत/KP च/APY वियोगतः/NP ॥/PUNC 34/PUNC ॥/PUNC 
तथा/ASD च/AVK -/PUNC 
  यासाम्/SN  नाम्ना/NP अपि/A कामः/NP स्यात्/KP सङ्गमम्/NP  दर्शनम्/NP  विना/A ।/PUNC 
  तासाम्/SN  दृक्सङ्गमम्/NP  प्राप्य/KKS ,/PUNC यन्/AN द्रवति/KP कोतुकम्/NP ॥/PUNC 35/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK अनुष्ठिते/KN  रासभः/NP श्रृगालेन/NP सह/A सिंहान्तिकम्/NP आगतः/KN ।/PUNC सिंहः/NP अपि/A व्यथाकुलितः/NP तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS यावत्/AVK समुत्तिष्ठति/KP ,/PUNC तावत्/AVK रासभः/NP पलायितुम्/KKS आरब्धवान्/KKS ।/PUNC अथ/A तस्य/SN पलायमानस्य/NV सिंहेन/NP तलप्रहारः/NP  दत्तः/KN ।/PUNC सः/SN  च/APY मन्दभाग्यस्य/NP व्यवसायः/NP  इव/ASD व्यर्थताम्/NP  गतः/KN ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/A श्रृगालः/NP कोपाविष्टः/NV तम्/SN उवाच/KP –/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP एवंविधः/NV प्रहारः/NP ते/SN यत्/AVK  गर्दभः/NP अपि/AVK तव/SN पुरतः/UA  बलाद्/KV गच्छति/KP ,/PUNC तत्कथम्/AP  गजेन/NP सह/A युद्धम्/NP  करिष्यसि/KP ?/PUNC तत्/SN दृष्टम्/NV  ते/SN बलम्/NP ।/PUNC ”/PUNC 
 अथ/A विलक्षस्मितम्/NV  सिंह/NP आह/KP –/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP अहम्/SN  करोमि/KP ?/PUNC मया/SN न/AN क्रमः/NP सज्जीकृत/NV आसीत्/KP ।/PUNC अन्यथा/A गजः/NP अपि/A मत्क्रमाक्रान्तः/NV  न/AN गच्छति/KP ।/PUNC ”/PUNC 
  श्रृगालः/NP  आह/KP “/PUNC अथ/A अपि/A एकवारम्/KV  तव/SN अन्तिके/NP तम्/SN आनेष्यामि/KP ।/PUNC परम्/A  त्वया/SN सज्जीकृतक्रमेण/NP स्थातव्यम्/KN ।/PUNC ”/PUNC सिंह/NP आह/KP ,/PUNC -/PUNC ”/PUNC भद्र/NP !/PUNC यः/SN  माम्/SN  प्रत्यक्षम्/KV  दृष्ट्वा/KKS गतः/KN ,/PUNC सः/SN  पुनः/A कथम्/AP अत्र/A गमिष्यति/KP ?/PUNC तत्/AVK अन्यत्/A किमपि/SN सत्त्वम्/NP अन्विष्यताम्/KP ।/PUNC ”/PUNC श्रृगाल/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP  तव/SN अनेन/SN व्यापारेण/NP ?/PUNC त्वम्/SN  केवलम्/A  सज्जितक्रमः/KV तिष्ठ/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 तथा/AVK अनुष्ठिते/KN श्रृगालः/NP अपि/A यावत्/AVK रासभमार्गेण/NP गच्छति/KP ,/PUNC तावत्/AVK तत्र/A एव/INTF स्थाने/NP चरन्/KNV दृष्टः/KN ।/PUNC अथ/A श्रृगालम्/NP  दृष्ट्वा/KKS रासभः/NP प्राह/KP –/PUNC “/PUNC भगिनीसुत/NP !/PUNC शोभनस्थाने/NP त्वया/SN अहम्/SN  नीतः/KN !/PUNC द्राङ्मृत्युवशम्/SNV  गतः/KN ।/PUNC तत्कथय/KP किम्/AP  तत्सत्त्वम्/NP  यस्य/SN अतिरौद्रवज्रसदृशकरप्रहारात्/NP अहम्/SN  मुक्तः/KN ?/PUNC ”/PUNC 
  तत्/SN श्रुत्वा/KKS प्रहसन्/KNV श्रृगालः/NP  आह/KP –”/PUNC भद्र/NP !/PUNC रासभीः/NP  त्वाम्/SN आयान्तम्KNV  दृष्ट्वा/KKS सानुरागम्/KV आलिङ्गितुम्/KKS  समुत्थिता/KN ।/PUNC त्वम्/SN च/APY कातरत्वात्/NP नष्टः/KN ।/PUNC सा/SN पुनः/A न/AN शक्ता/KN त्वाम्/SN  विना/A स्थातुम्/KNV ।/PUNC तया/SN तु/A नश्यतः/ ते/SN अवलम्बनार्थम्/KN हस्तः/NP क्षिप्तः/KN  न/AN अन्यकारणेन/NP ।/PUNC तत्/AVK आगच्छ/KP,/PUNC सा/SN त्वत्कृते/KV प्रायोपवेशनोपविष्टा/KV तिष्ठति/KP ।/PUNC एतत्/SN वदति/KP यत्/SSN ,/PUNC -/PUNC “/PUNC लम्बकर्णः/NP  यदि/A मे/SN भर्त्ता/NP न/AN भवति/KP ,/PUNC तत्/SSN अहम्/SN अग्नौ/NP जले/NP वा/A प्रविशामि/KP ।/PUNC न/AN पुनः/A तस्य/SN वियोगम्/NP  सोढुम्/KKS  शक्नोमि/KP ”/PUNC ।/PUNC तत्प्रसादम्/KV  कृत्वा/KKS तत्र/A आगम्यताम्/KP ,/PUNC नो/A चेत्/A तव/SN स्त्रीहत्या/NP भविष्यति/KP ।/PUNC 
  अपरम्/A ,/PUNC भगवान्/NV कामः/NP कोपम्/NP  तव/SN उपरि/A करिष्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY -/PUNC 
 स्त्रीमुद्राम्/NP  मकरध्वजस्य/NP जयिनीम्/NV  सर्वार्थसम्पत्करीम्/NV ,/PUNC 
   ये/SN मूढाः/NP प्रविहाय/KKS यान्ति/KP कुधियः/NP  मिथ्याफलान्वेषिणः/NP ।/PUNC 
  ते/SN तेन/SN एव/INTF निहत्य/KKS निर्दयतरम्/KV  नग्नीकृता/KN मुण्डिताः/KN 
   केचित्/A रक्तपटीकृताः/KN च/APY जटिलाः/NP कापालिकाः/NP च/APY अपरे/NP ”/PUNC ॥/PUNC 36/PUNC ॥/PUNC 
  अथ/A असौ/A तत्/SN वचनम्/NP  श्रद्धेयतया/KV श्रुत्वा/KKS ,/PUNC भूयः/A अपि/AVK तेन/SN सह/A प्रस्थितः/KN ।/PUNC अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
   जानन्/KNV अपि/A नरः/NP  दैवात्प्रकरोति/KP विगर्हितम्/NP ।/PUNC कर्म/NP किम्/AP  कस्यचित्/SN लोके/NP गर्हितम्/KN  रोच्यते/KP कथम्/AP ?/PUNC ॥/PUNC 37/PUNC ॥/PUNC 
  अत्र/A अन्तरे/A सज्जितक्रमेण/KV सिंहेन/NP सः/SN  लम्बकर्णः/NP  व्यापादितः/KN ।/PUNC ततः/A तम्/SN  हत्वा/KKS श्रृगालम्/NP  रक्षकम्/NP  निरूप्य/KKS स्वयम्/SN  सः/SN  स्नानार्थम्/KN  नद्याम्/NP  गतः/KN ।/PUNC श्रृगालेन/NP अपि/AVK लौल्योत्सुक्यात्/KV तस्य/SN कर्णहृदयम्/NP  भक्षितम्/KN ।/PUNC 
  अत्र/A अन्तरे/A सिंहः/NP  यावत्स्नात्वा/KKS ,/PUNC कृतदेवार्चनः/NV ,/PUNC प्रतर्पितपितृगणः/NV समायाति/KP तावत्/AVK कर्णहृदयरहितः/NV  रासभः/NP तिष्ठति/KP ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS कोपपरीतात्मा/NV सिंहः/NP श्रृगालम्/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC पाप/NP !/PUNC किम्/AP इदम्/SN अनुचितम्/NV  कर्म/NP समाचरितम्/KN ,/PUNC यत्कर्णहृदयभक्षणेन/NP अयम्/SN उच्छिष्टताम्/NP  नीतः/KN ”/PUNC ।/PUNC श्रृगालः/NP सविनयम्/KV आह/KP –/PUNC ”/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC मा/AN मा/DV एवम्/A  वदः/KP ,/PUNC कर्णहृदयरहितः/NV अयम्/SNV  रासभ/NP आसीत्/KP ,/PUNC येन/SN इह/A आगत्य/KKS त्वाम्/SN अवलोक्य/KKS भूयः/A अपि/A आगतः/KN ।/PUNC अथ/A तत्/SN वचनम्/NP  श्रद्धेयम्/NV  मत्वा/KKS सिंहः/NP तेन/SN एव/INTF सह/A संविभज्य/KKS निःशङ्कितमनाः/NV तम्/SN  भक्षितवान्/KKS ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP –/PUNC ”/PUNC आगतः/KN च/APY गतः/NP च/APY एव/INTF …/PUNC ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/SN मूर्ख/NP !/PUNC कपटम्/NP  कृतम्/KN  त्वया/SN ।/PUNC परम्/A  युधिष्ठिरेणेव/NS सत्यवचनेन/NP विनाशितम्/KN ।/PUNC अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
स्वार्थम्/NP उत्सृज्य/KKS यः/SSN  दम्भी/NP सत्यम्/NP  ब्रूते/KP सुमन्दधीः/NP ।/PUNC 
सः/SSN  स्वार्थाद्/NP भ्रश्यते/KP नूनम्/A  युधिष्ठिरः/NS  इव/ASD अपरः/A ”/PUNC ॥/PUNC 38/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP आह/KP –/PUNC ”/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC 

  [/PUNC ३/PUNC ]/PUNC 
  (/PUNC युधिष्ठिर/NS -/PUNC कुम्भकारकथा/NS )/PUNC 

 कस्मिंशचित्/SN अधिष्ठाने/NP कुम्भकारः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  कदाचित्/A प्रमादात्/NP अर्द्धभग्नघटकर्परतीक्ष्णाग्रस्य/NP उपरि/A महता/NV वेगेन/NV धावन्/KKS पतितः/KN ।/PUNC ततः/A कर्परकोट्या/NP पाटितललाटः/NP  रुधिरप्लाविततनुः/NV कृच्छ्रात्/NV उत्थाय/KKS स्वाश्रयम्/NP गतः/KN ।/PUNC ततः/A च/AVK अपथ्यसेवनात्स/NP प्रहारः/NP तस्य/SN करालताम्/NP  गतः/KN ।/PUNC कृच्छ्रेण/NP च/AVK नीरोगताम्/NP  नीतः/KN ।/PUNC 
अथ/A कदाचित्/A  दुर्भिक्षपीडिते/NV देशे/NP सः/SN  कुम्भकारः/NP क्षुत्क्षामकण्ठः/NV कैश्चित्/SN राजसेवकैः/NP सह/A देशान्तरम्/NP  गत्वा/KKS ,/PUNC कस्य/SN अपि/A राज्ञः/NP सेवकः/NP  बभूव/KP ।/PUNC सः/SN  च/AVK राजा/NP तस्य/SN ललाटे/NP विकरालम्/NV  प्रहारक्षतम्/NP  दृष्ट्वा/KKS चिन्तयामास/KP यत्/A –/PUNC “/PUNC वीरः/NP पुरुषः/NP कश्चित्/SN अयम्/SN  ।/PUNC नूनम्/A  तेन/SN ललाटपट्टे/NP सम्मुखप्रहारः/NV ।/PUNC ”/PUNC अतः/A तम्/SN  सम्मानादिभिः/NP सर्वेषाम्/SN  राजपुत्राणाम्/NP  मध्ये//NP विशेषप्रसादेन/KV पश्यति/KP स्म/A ।/PUNC ते/SN अपि/A राजपुत्राः/NP तस्य/SN तम्/SN  प्रसादातिरेकम्/NP  पश्यन्तः/KKS परम्/A ईर्ष्याधर्मम्/NP  वहन्तः/KKS  राजभयात्/NP न/AN किञ्चित्/A उचुः/KP ।/PUNC 
  अथ/A अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP तस्य/SN भूपतेः/NP विग्रहे/NP तेन/SN भूपतिना/NP समुपस्थिते/NV वीरसम्भावनायाम्/NP  क्रियमाणायाम्/KKS  प्रकल्प्यमानेषु/NP गजेषु/NP ,/PUNC सन्नह्यमानेषु/NV वाजिषु/NP,/PUNC योधेषु/NP प्रगुणीक्रियमाणेषु/NV,/PUNC तेन/SN भूभुजा/NP सः/SN  कुम्भकारः/NP प्रस्तावनानुगतम्/KN  पृष्टः/KN  निर्जने/NP –/PUNC ”/PUNC भो/ASMB राजपुत्र/NP !/PUNC किम्/AP  ते/SN नाम/NP ?/PUNC का/AP च/APY जातिः/NP ?/PUNC कस्मिन्/AP सङ्ग्रामे/NP प्रहारः/NP अयम्/SN  ते/SN ललाटे/NP लग्नः/KN ?/PUNC ।/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC ”/PUNC देव/NP !/PUNC न/AN अयम्/SN  शस्त्रप्रहार/NP ।/PUNC युद्धिष्ठिराभिधः//NP कुलालः/NP अहम्/SN  जात्या/NP ।/PUNC मत्/SN गेहे/NP अनेककर्पराणि/NP आसन्/KP ।/PUNC अथ/A कदाचित्/A मद्यपानम्/NP  कृत्वा/KKS निर्गतः/KN प्रधावन्/KKS कर्परोपरि/NP पतितः/KN ।/PUNC तस्य/SN प्रहारविकारः/NP अयम्/SN  मे/SN ललाटे/NP एवम्/A  विकरालताम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
तत्/NP आकर्ण्य/KKS राजा/NP सव्रीडम्/KV आह/KP –/PUNC “/PUNC अहो/ASMB ,/PUNC वञ्चितः/KN अहम्/SN राजपुत्रानुकारिणा/NV अनेन/SN कूलालेन/NP तत्/SN दीयताम्/KP  द्रागेतस्य/SN चन्द्रार्धः/NP ।/PUNC ”/PUNC तथा/A अनुष्ठिते/KN कुम्भकारः/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC दैव/NP !/PUNC मा/AN मा/DV एवम्/A  कुरु/KP ।/PUNC पश्य/KP मे/SN रणे/NP हस्तलाघवम्/NP ।/PUNC ”/PUNC राजा/NP प्राह/KP –/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB !/PUNC सर्वगुणसम्पन्नो/SNV भवान्/SN ,/PUNC तथापि/A गम्यताम्/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
 शूरः/NV च/APY कृतविद्यः/NV च/APY दर्शनीयः/NV असि/KP पुत्रक/NP ।/PUNC 
 यस्मिन्/SN कुले/NP त्वम्/SN उत्पन्नः/KN गजः/NP तत्र/A न/AN हन्यते/KP ”/PUNC ॥/PUNC 39/PUNC ॥/PUNC 
कुम्भकारः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC राजा/NP कथयति/KP -/PUNC 

    [/PUNC ४/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC सिंहदम्पतिश्रृगालपुत्रयोः/NP कथा/NP )/PUNC 

कस्मिंश्चित्/SN देशे/NP सिंहदम्पती/NP प्रतिवसतः/KP स्म/A ।/PUNC अथ/A सिंही/NP पुत्रद्वयम्/NP अजीजनत्/KP ।/PUNC सिंहः/NP अपि/A नित्यम्/KV एव/INTF मृगान्/NP व्यापाद्य/KKS सिंह्ये/NP ददाति/KP ।/PUNC अथ/A अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP तेन/SN किम्/AP अपि/A न/AN आसादितम्/KN ।/PUNC वने/NP भ्रमतः/KNV अपि/A तस्य/SN रविः/NP अस्तम्/NP  गतः/KN ।/PUNC अथ/A तेन/SN स्वगृहम्/NP आगच्छता/KKS श्रृगालशिशुः/NP प्राप्तः/KN ।/PUNC सः/SN  च/AVK बालकः/NP अयम्/SN इति/AUD अवधार्य्य/KKS ,/PUNC यत्नेन/NP दंष्ट्रामध्यगतम्/NV  कृत्वा/KKS सिंह्यै/NP जीवन्तम्/KNV एव/INTF समर्पितवान्/KKS ।/PUNC 
ततः/A सिंह्या/NP अभिहितम्/KN  –/PUNC “/PUNC भोः/ASMB कान्त/NP !/PUNC त्वया/SN आनीतम्/KP  किञ्चित्/A अस्माकम्/SN  भोजनम्/NP ?/PUNC ”/PUNC सिंह/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC प्रिये/NP !/PUNC मया/SN अद्य/A एनम्/SN  श्रृगालशिशुम्/NP  परित्यज्य/KKS न/AN किञ्चित्/A सत्त्वम्//NP आसादितम्/KN ।/PUNC सः/SN  च/APY मया/SN बालः/NP अयम्/SN इति/AUD मत्वा/KKS न/AN व्यापादितः/KP  विशेषात्/NV स्वजातीयः/NP च/APY ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
स्त्रीविप्रलिङ्गिबालेषु/NP प्रहर्त्तव्यम्/KKS  न/AN कर्हिचित्/A ।/PUNC 

प्राणत्यागे/NP अपि/A सञ्जाते/KN विश्वस्तेषु/NP विशेषतः/KV ॥/PUNC 40/PUNC ॥/PUNC 
इदानीम्/A त्वम्/SN एनम्/SN  भक्षयित्वा/KKS पथ्यम्/NP कुरु/KP ।/PUNC प्रभाते/NP अन्यत्किञ्चित्/SN उपार्जयिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC सा/SN प्राह/KP –/PUNC “/PUNC भोः/ASMB कान्त/NP !/PUNC त्वया/SN बालकः/NP अयम्/SN इति/AUD विचिन्त्य/KKS न/AN हतः/KN ,/PUNC तत्कथम्/AP एनम्/SN अहम्/SN स्वोदरार्थे/KKS विनाशयामि/KP ?/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
अकृत्यम्/NP न/AN एव/INTF कर्त्तव्यम्/KKS प्राणत्यागे/NP अपि/A उपस्थिते/KN ।/PUNC 
न/AN च/APY कृत्यम्/NP परित्याज्यम्/NP धर्मः/NP एष/SN सनातनः/NP ॥/PUNC 41/PUNC ॥/PUNC 
तस्मात्/AVK मम//SN अयम्/SN तृतीयः/SMKP पुत्रः/NP भविष्यति/KP ।/PUNC ”/PUNC इति/AUD एवम्/A उक्त्वा/KKS सा/SN तम्/SN अपि/A स्वस्तनक्षीरेण/NP पराम्/A पुष्टिम्/NP अनयत्/KP ।/PUNC एवम्/A  ते/SN त्रयः/SMKY अपि/A शिशवः/NP परस्परज्ञातजातिविशेषा/NV एकाचारविहारा/NV बाल्यसमयम्/NP निर्वाहयन्ति/KP स्म/A ।/PUNC 
  अथ/A कदाचित्/A तत्र/A वने/NP भ्रमन्/KNV अरण्यगजः/NP समायातः/KN ।/PUNC तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS तौ/SN सिंहसुतौ/NP द्वौ/SMKY अपि/A कुपिताननौ/NV तम्/SN  प्रति/AUP प्रचलितौ/NV यावत्/AVK ,/PUNC तावत्/AVK तेन/SN श्रृगालसुतेन/NP अभिहितम्/KN –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC गजः/NP अयम्/SN  युष्मत्/SN कुलशत्रुः/NP ।/PUNC तत्/AVK न/AN गन्तव्यम्/KKS एतस्य/SN अभिमुखम्/NP ”/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS गृहम्/NP  प्रधावितः/KN ।/PUNC तौ/SN अपि/A ज्येष्ठबान्धवभङ्गात्/NP निरुत्साहताम्/NP  गतौ/KN ।/PUNC 
अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
 एकेन/NP अपि/A सुधीरेण/NP सोत्साहेन/NP रणम्/NP  प्रति/AUP ।/PUNC 
  सोत्साहम्/NP  जायते/KP सैन्यम्/NP  भग्ने/KN भङ्गम्/NP अवाप्नुयात्/KP ॥/PUNC 42/PUNC ॥/PUNC 
 तथा/A च/AVK -/PUNC 
 अत/A एव/INTF हि/A वाञ्छन्ति/KP भूपाः/NP  योधान्/NP महाबलान्/NV ।/PUNC 
 शूरान्/NP वीरान्/NP कृतोत्साहान्/NV वर्जयन्ति/KP च/AVK कातरान्/NP ॥/PUNC 43/PUNC ॥/PUNC 
अथ/A तौ/SN द्वौ/SMKY अपि/A भ्रातरौ/NP गृहम्/NP  प्राप्य/KKS पित्रोः/NP अग्रतः/NP  विहसन्तौ/KKS ज्येष्ठभ्रातृचेष्टितम्/NP ऊचतुः/KP ।/PUNC यथा/A अयम्/SN  गजम्/NP  दृष्टवा/KKS दूरतः/KV अपि/A प्रनष्टः/KN ।/PUNC सः/SN अपि/A तदाकर्ण्य/KKS कोपाविष्टमनाः/NV प्रस्फुरिताधरपल्लवः/NV ताम्रलोचनः/NV त्रिशिखाम्/NV  भ्रकुटिम्/NP  कृत्वा/KKS तौ/SN निर्भर्त्सयन्/KNV परुषतरवचनानि/NP उवाच/KP ।/PUNC ततः/AVK सिंह्या/NP एकान्ते/NP नीत्वा/KKS प्रबोधितः/KN असौ/A –/PUNC “/PUNC वत्स/NP !/PUNC मा/AN एवम्/A  कदाचित्/A जल्प/KP ।/PUNC भवदीय/SN लघुभ्रातरौ/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  अथ/A असौ/A सान्त्ववचनेन/NP प्रभूततरकोपाविष्टः/NV ताम्/NV उवाच/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP अहम्/SN एताभ्याम्/SN  शौर्येण/NP ,/PUNC रूपेण/NP ,/PUNC विद्याभ्यासेन/NP ,/PUNC कौशलेन/NP वा/A हीनः/NP ,/PUNC येन/SN माम्/SN उपहसतः/KP ?/PUNC तत्/AVK मया/SN अवश्यम्/KV एतौ/SN व्यापादनीयौ/NV ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN आकर्ण्य/KKS सिंही/NP तस्य/SN जीवितम्/SN इच्छन्ति/KP अन्तौ/NP इह/A अस्य/SN प्राह/KP -/PUNC 
 शूरः/NP असि/KP कृतविद्यः/NP असि/KP दर्शनीयः/NP असि/KP पुत्रक/NP ।/PUNC 
 यस्मिन्/SN कुले/NP त्वम्/SN उत्पन्नः/KN गजः/NP तत्र/A न/AN हन्यते/KP ॥/PUNC 44/PUNC ॥/PUNC 
 तत्/AVK सम्यक्/A श्रृणु/KP –/PUNC “/PUNC वत्स/NP !/PUNC त्वम्/SN  श्रृगालीसुतः/NP ।/PUNC कृपया/NP मया/SN स्वस्तनक्षीरेण/NP पुष्टिम्/NP  नीतः/KN ।/PUNC तत्/AVK यावत्/AVK एतौ/SN मत्पुत्रौ/NP शिशुत्वात्/NP त्त्वाम्//SN  श्रृगालम्/NP  न/AN जानीतः/KP ,/PUNC तावत्/AVK  द्रुततरम्/KV  गत्वा/KKS स्वजातीयानाम्/NP  मध्ये/NP मिलितः/KN  भव/KP ।/PUNC नो/AN चेत्/A आभ्याम्/SN  हतः/KN  मृत्युपथम्/NP  समेष्यसि/KP ।/PUNC ”/PUNC सः/SN अपि/A तत्/SN वचनम्/NP  श्रुत्वा/KKS भयव्याकुलमनाः/NV शनैः/DV शनैः/DV अपसृत्य/KKS ,/PUNC स्वजात्या/NP मिलितः/KN ।/PUNC 
  तस्मात्/AVK त्वम्/SN अपि/A यावत्/AVK एते/SN राजपुत्राः/NP त्वाम्/SN  कुलालम्/NP  न/AN जानन्ति/KP ,/PUNC तावत्/AVK  द्रुततरम्/KV अपसर/KP ।/PUNC नो/AN चेत्/A एतेषाम्/SN  सकाशात्/NP विडम्बनाम्/NP  प्राप्य/KKS मरिष्यसि/KP ।/PUNC ”/PUNC कुलालः/NP अपि/A तत्/SN आकर्ण्य/KKS सत्त्वरम्/KV  प्रनष्टः/KN ।/PUNC ”/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP –/PUNC “/PUNC स्वार्थम्/NP उत्सृज्य/KKS यः/SN  दम्भी/NP इति/AUD ।/PUNC धिक्/ABS मूर्ख/NP !/PUNC यत्/AVK त्वया/SN स्त्रियार्थे/KN एतत्/SN कार्य्यम्/NP अनुष्ठातुम्/KKS आरब्धम्/KN ।/PUNC न/AN हि/A स्त्रीणाम्/NP  कथञ्चित्/A विश्वासम्/NP उपगच्छेत्/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
  यदर्थे/KN स्वकुलम्/NP  त्यक्तम्/KN  जीवितार्द्धम्/NP च/APY हारितम्/KN ।/PUNC 
  सा/SN माम्/SN  त्यजति/KP निःस्नेहा/SNV ,/PUNC कः/SN स्त्रीणाम्/NP  विश्वसेत्/KP नरः/NP ॥/PUNC 45/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC वानरः/NP आह/KP -/PUNC 

 [/PUNC ५/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC ब्राह्मणदम्पत्योः/NP कथा/PUNC )/PUNC 

 अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP कोऽपि/SN ब्राह्मणः/NP ।/PUNC तस्य/SN च/APY भार्या/NP प्राणेभ्यः/NP अपि/A अतिप्रिया/NV आसीत्/KP ।/PUNC सा/SN अपि/A प्रतिदिनम्/KV  कुटुम्बेन/NP सह/A कलहम्/NP  कुर्वाणा/KNV न/AN विश्राम्यति/KP ।/PUNC सः/SN अपि/A ब्राह्मणः/NP कलहम्/NP असहमानः/KKS  भार्यावात्सल्यात्/NP स्वकुटुम्बम्/NP  परित्यज्य/KKS ब्राह्मण्या/NP सह/A विप्रकृष्टम्/NV  देशान्तरम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
  अथ/A महाटवीमध्ये/NP ब्राह्मण्या/NP अभिहितः/NP  –/PUNC “/PUNC आर्यपुत्र/NP !/PUNC तृष्णा/NP माम्/SN  बाधते/KP ,/PUNC तत्/SN उदकम्/NP  क्व/AP अपि/A अन्वेषय/KP ।/PUNC ”/PUNC अथ/A असौ/A तदवचनानन्तरम्/NP  यावत्/AVK उदकम्/NP  गृहीत्वा/KKS समागच्छति/KP ,/PUNC तावत्/AVK ताम्/SN  मृताम्/NV अपश्यत्/KP ।/PUNC अतिवल्लभतया/KV विषादम्/NP  कुर्वन्/KNV यावत्/AVK विलपति/KP ,/PUNC तावत्/AVK आकाशे/NP वाचम्/NP  श्रृणोति/KP ।/PUNC तथा/AVK हि/A -/PUNC “/PUNC यदि/A ब्राह्मण/NP !/PUNC त्वम्/SN  स्वकीयजीवितस्य/NP अर्द्धम्/NP ददासि/KP ,/PUNC ततः/AVK ते/SN जीवति/KP ब्राह्मणी/NP ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS ब्राह्मणेन/NP शुचीभूय/KKS तिसृभिः/SMKY वाचाभिः/NP स्वजीवितार्द्धम्/NP  दत्तम्/KN ।/PUNC वाक्/NP समम्/A एव/INTF च/AVK सा/SN ब्राह्मणी/NP जीविता/KN ।/PUNC ”/PUNC 
 अथ/A तौ/SN जलम्/NP  पीत्वा/KKS वनफलानि/NP च/APY भक्षयित्वा/KKS गन्तुम्/KKS आरब्धौ/KN ।/PUNC ततः/AVK क्रमेण/NP कस्यचित्/SN नगरस्य/NP प्रदेशे/NP पुष्पवाटिकाम्/NP  प्रविश्य/KKS ब्राह्मणः/NP भार्याम्/NP अभिहितवान्/KN –/PUNC “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC यावत्/AVK अहम्/SN भोजनम्/SN गृहीत्वा/KKS समागच्छामि/KP ,/PUNC तावत्/AVK अत्र/A त्वया/SN स्थातव्यम्/KKS ।/PUNC ”/PUNC इति/AUD अभिधाय/KKS ब्राह्मणः/NP  नगरमध्ये/NP जगाम/KP ।/PUNC 
  अथ/A तस्याम्/SN  पुष्पवाटिकायाम्/NP  पङ्गुररघट्टम्/NP  खेलयन्/KNV दिव्यगिरा/NP सङ्गीम्/NP उद्गिरति/KP ।/PUNC तत्/SN च/APY श्रुत्वा/KKS कुसुमेषुणार्दितया/NP ब्राह्मण्या/NP तत्सकाशम्/NP  गत्वा/KKS अभिहितम्/KN  “/PUNC भद्र/NP !/PUNC यदि/A माम्/SN  न/AN कामयसे/KP ,/PUNC तत्/SN मत्सक्ता/KN स्त्रीहत्या/NP तव/SN भविष्यति/KP ।/PUNC ”/PUNC पङ्गुः/NP अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP  व्याधिग्रस्तेन/NV मया/SN करिष्यसि/KP ?/PUNC ”/PUNC  
 सा/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP अनेन/SN उक्तेन/KN !/PUNC अवश्यम्/A  त्वया/SN सह/A मया/SN सङ्गमः/NP कर्त्तव्यः/KKS ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS सः/SN  तथा/A कृतवान्/KN ।/PUNC सुरतानन्तरम्/NP  सा/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC इतः/A प्रभृति/A यावत्/AVK जीवम्/NP  मया/SN आत्मा/NP भवते/SN दत्तः/KN ”/PUNC इति/AUD ज्ञात्वा/KKS भवान्/SN अपि/A अस्माभिः/SN सह/A आगच्छतु/KP ।/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP  –/PUNC “/PUNC एवम्/A अस्तु/KP ।/PUNC ”/PUNC 
 अथ/A ब्राह्मणः/NP  भोजनम्/NP  गृहीत्वा/KKS ,/PUNC समागत्य/KKS तया/SN सह/A भोक्तुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC सा/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC एष/SN पङ्गुः/NP बुभुक्षितः/NV ।/PUNC तत्/SN एतस्य/SN अपि/A कियन्तम्/A अपि/A ग्रासम्/NP  देहि/KP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC तथा/A अनुष्ठितेKN ब्राह्मण्या/NP अभिहितम्/KN –/PUNC “/PUNC ब्राह्मण/NP !/PUNC सहायहीनः/NV त्वम्/SN ।/PUNC यदा/A ग्रामान्तरम्/NP  गच्छसि/KP ,/PUNC तदा/A मम/SN वचनसहायः/NP अपि/A न/AN अस्ति/KP ।/PUNC तत्/SN एनम्/SN  पङ्गुम्/NP  गृहीत्वा/KKS गच्छावः/KP ।/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC न/AN शक्नोमि/KP आत्मानम्/SN अपि/A आत्मना/SN वोढुम्/KKS ,/PUNC किम्/AP  पुनः/A एनम्/SN  पङ्गुम्/NP ?/PUNC ”/PUNC सा/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC पेटाभि/NP अन्तरस्थम्/NV एनम्/SN अहम्/SN नेष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्कृतकवचनव्यामोहितचित्तेन/NV तेन/SN प्रतिमन्नम्/KN ।/PUNC तथा/AVK अनुष्ठिते/KN अन्यस्मिन्/SN दिने/NP कूपोपकण्ठे/NP विश्रान्तः/NV  ब्राह्मणः/NP तया/SN पङ्गुपुरुषासक्तया/NV सम्प्रेर्यम्/NV  कूपान्तः/NP पातितः/KN ।/PUNC सा/SN अपि/A पङ्गुम्/NP  गृहीत्वा/KKS कस्मिंश्चित्/SN नगरे/NP प्रविष्टा/KN ।/PUNC 
  तत्र/A शुल्कचौर्य्यरक्षानिमित्तम्/KN  राजपुरुषैः/NP इतः/A ततः/A  भ्रमद्भिः/KN तन्मस्तकस्था/NV पेटा/NP दृष्टा/KN ,/PUNC बलात्/KV आच्छिद्य/KP राज्ञः/NP अग्रे/NP नीता/KN च/APY ।/PUNC यावत्/AVK ताम्/SN उद्घाटयति/KP ,/PUNC तावत्/AVK तम्/SN  पङ्गुम्/NP  ददर्श/KP ।/PUNC ततः/A सा/SN ब्राह्मणी/NP विलापम्/NP  कुर्वन्ती/KNV राजपुरुषानुपदम्/NV एव/INTF तत्र/A आगता/KN ,/PUNC राज्ञा/NP पृष्टा/KN –/PUNC “/PUNC कः/AP  वृत्तान्तः/NP ?/PUNC ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC सा/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC मम/SN एषः/SN  भर्त्ता/NP व्याधिबाधितः/NV  दायादसमूहैः/NP उद्वेजितः/NV  मया/SN स्नेहव्याकुलितमानसया/NV शिरसि/NP कृत्वा/KKS भवदीयनगरे/NP आनीतः/KN ।/PUNC ”/PUNC 
  तत्/AVK श्रुत्वा/KKS राजा/NP अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC ब्राह्मणि/NP !/PUNC त्वम्/SN  मे/SN भगिनी/NP ,/PUNC ग्रामद्वयम्/NP  गृहीत्वा/KKS भर्त्रा/NP सह/A भोगान्/NP भुञ्जाना/KNV सुखेन/NP तिष्ठः/KP ।/PUNC ”/PUNC अथ/A सः/SN  ब्राह्मणः/NP  देववशात्/NP केन/SN अपि/A साधुना/NP कूपात्/NP उत्तारितः/KN परिभ्रमन्/KNV तत्/SN एव/INTF नगरम्/NP आयातः/KN ,/PUNC तया/SN दुष्टभार्य्यया/NP  दृष्टः/KN  राज्ञे/NP निवेदितः/KN च/APY –/PUNC “/PUNC राजन्/NP !/PUNC अयम्/SN  मम/SN भर्त्तुः/NP वैरी/NP समायातः/KN ।/PUNC ”/PUNC राज्ञा/NP अपि/A बधः/NP  आदिष्टः/KN ।/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC अनया/SN मम/SN सक्तम्/KN  किञ्चित्/A  गृहीतम्/KN अस्ति/KP यदि/A त्वम्/SN  धर्मवत्सलः/NP ,/PUNC तदा/A दापय/KP ।/PUNC ”/PUNC राजा/NP अब्रवीत्/KP  –/PUNC “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC यत्/SN त्वया/SN अस्य/SN सक्तम्/KN  किञ्चित्/A  गृहीतम्/KN अस्ति/KP ,/PUNC तत्समर्पय/KP ।/PUNC ”/PUNC सा/SN प्राह/KP –/PUNC “/PUNC देव!/PUNC मया/SN न/AN किञ्चित्/A  गृहीतम्/KN ।/PUNC ”/PUNC ब्राह्मणः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC यत्/SN मया/SN त्रिवाचिकम्/NV  स्वजीवितार्धम्/NP  दत्तम्/KN ,/PUNC तद्/SN देहि/KP ।/PUNC ”/PUNC अथA सा/SN राजभयात्/NP तथैव/A “/PUNC त्रिवाचिकम्/NV एव/INTF जीवितार्धम्/NP  मया/SN दत्तम्/KN ”/PUNC इति/AUD जल्पन्ती/NP प्राणैः/NP विमुक्ता ।/PUNC ततः/AVK सविस्मयम्/KV राजा/NP अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  ब्राह्मणेन/NP अपि/A पूर्ववृत्तान्तः/NP सकलः/NV अपि/A तस्मै/SN निवेदितः/KN ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP –/PUNC “/PUNC यदर्थे/KN स्वकुलम्/NP  त्यक्तम्/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
वानरः/NP पुनः/A आह/KP –/PUNC “/PUNC साधु/KV च/AVK इदम्/SN उपाख्यानकम्/NP  श्रूयते/KP -/PUNC 
   न/AN किम्/AP  दद्यात्/KP न/AN किम्/AP  कुर्य्यात्/KP स्त्रीभिः/NP अभ्यर्थितः/KN  नरः/NP ।/PUNC 
   अनश्वाः/NP  यत्र/A ह्रेषन्ते/KP शिरः/NP पर्वणि/NP मुण्डितम्/KN ॥/PUNC 46/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC वानरः/NP कथयति/KP -/PUNC 

    [/PUNC ६/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC नन्द/NS -/PUNC वररुचि/NS कथा/NP )/PUNC 
“/PUNC अतिप्रख्यातबलपौरुषः/NV अनेकनरेन्द्रवृन्दमुकुटमरीचिजालजटिलीकृतपादपीठः/NV शरच्छशाङ्ककिरणनिर्मलयशाः/NV ।/PUNC पृथिव्याः/NP  भर्त्ता/NV नन्दः/NS  नाम/A राजा/NP ।/PUNC तस्य/SN सर्वशास्त्राधिगतसमस्ततत्त्वः/NV सचिवः/NP  वररुचिः/NS नाम/A ।/PUNC तस्य/SN च/AVK प्रणयकलहेन/NP जाया/NP कुपिता/NV ।/PUNC सा/SN च/APY अतीव/NV वल्लभा/NV अनेकप्रकारम्/KV परितोष्यमाणा/KNV अपि/A न/AN प्रसीदति/KP ;/PUNC ब्रवीति/KP च/AVK भर्त्ता/NP –/PUNC ”/PUNC भद्रे/NV ,/PUNC येन/SN प्रकारेण/NP तुष्यसि/KP तम्/SN वद/KP ।/PUNC निश्चितम्/KV करोमि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
  ततः/AVK कथञ्चित्/A तया/SN उक्तम्/KN  –/PUNC ”/PUNC यदि/A शिरः/NP  मुण्डयित्वा/KKS मम/SN पादयोः/NP निपतसि/KP तदा/A प्रसादाभिमुखी/NP भवामि/KP ।/PUNC “/PUNC तथा/A अनुष्ठिते/KN च/APY सा/SN प्रसन्ना/NV आसीत्/KP ।/PUNC अथ/A नन्दस्य/NS भार्या/NP अपि/A तथैव/A रुष्टा/NV ,/PUNC प्रसाद्यमाना/KNV अपि/A न/AN तुष्यति/KP ।/PUNC तेन/SN उक्तम्/KN –/PUNC “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC त्वया/SN विना/A मुहूर्त्तम्/NP अपि/A न/AN जीवामि/KP ।/PUNC पादयोः/NP पतित्वा/KKS त्वाम्/SN  प्रसादयामि/KP ।/PUNC ”/PUNC सा/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC ”/PUNC यदि/A खलीनम्/NP  मुखे/NP प्रक्षिप्य/KKS अहम्/SN  तव/SN पृष्ठे/NP समारुह्य/KKS त्वाम्/SN  धावयामि/KP ,/PUNC धावितः/KNV तु/A यदि/A अश्ववत्/? ह्रेषसे/KP तदा/A प्रसन्ना/NV भवामि/KP ।/PUNC ”/PUNC राज्ञा/NP अपि/A तथैव/A अनुष्ठितम्/KN ।/PUNC 
 अथ/A प्रभातसमये/NP सभायाम्/NP उपविष्टस्य/NV राज्ञः/NP समीपे/? वररुचिः/NS आयातः/KN ।/PUNC तम्/SN च/APY दृष्ट्वा/KKS राजा/NP पप्रच्छ/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB वररुचे/NS !/PUNC कस्मिन्/SN पर्वणि/NP मुण्डितम्/NV  शिरः/NP त्वया/SN ?/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC 
   “/PUNC न/AN किम्/AP  दद्यात्/KP न/AN किम्/AP  कुर्यात्/KP स्त्रीभिः/NP अभ्यर्थितः/KN  नरः/NP ।/PUNC 
  अनश्वाः/NP  यत्र/A ह्रेषन्ते/KP तत्र/A पर्वणि/NP मुण्डितम्/KN ”/PUNC ॥/PUNC 47/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK भो/ASMB दुष्टमकर/NP !/PUNC त्वम्/SN अपि/A नन्दवररुचिवत्/ASD स्त्रीवश्यः/NP ।/PUNC ततः/YV  भद्रः/NP ।/PUNC तत्/SN भणितेन/NP त्वया/SN माम्/SN  प्रति/AUP वधोपायप्रयासः/NP प्रारब्धः/KN ।/PUNC परम्/A  स्ववाग्दोषेण/NP एव/INTF प्रकटीभूतः/NP ।/PUNC अथवा/A साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
 “/PUNC आत्मनः/SN  मुखदोषेण/NP बध्यन्ते/NP शुकसारिकाः/NP ।/PUNC 
 वकाः/NP तत्र/A न/AN बध्यन्ते/KP मौनम्/NP  सर्वार्थसाधनम्/NV ॥/PUNC 48/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
 सुगुप्तम्/NV  रक्ष्यमाणः/KNV अपि/A दर्शयन्/KNV दारुणम्/NV  वपुः/NP ।/PUNC 
 व्याघ्रचर्मप्रतिच्छन्नः/NV  वाक्कृते/NP रासभः/NP  हतः/KN ॥/PUNC 49/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC वानरः/NP कथयति/KP -/PUNC 

   [/PUNC ७/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC वाचालरासभ-/PUNC कथा/NP )/PUNC 

 कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP शुद्धपटः/NS नाम/A रजकः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तस्य/SN च/AVK गर्दभः/NP एकः/SMK अस्ति/KP ।/PUNC सः/SN अपि/A घासाभावात्/NP अतिदुर्बलताम्/NP  गतः/KN ।/PUNC अथ/A तेन/SN रजकेन/NP अटव्याम्/NP  परिभ्रमता/KNV मृतव्याघ्रः/NP दृष्टः/KN ,/PUNC चिन्तितम्/KP च/APY –/PUNC “/PUNC अहो/ABS !/PUNC शोभनम्/NV आपतितम्/KN ।/PUNC अनेन/SN व्याघ्रचर्मणा/NP प्रतिच्छाद्य/KKS रासभम्/NP  रात्रौ/NP यवक्षेत्रेषु/NP उत्स्रक्ष्यामि/KP ,/PUNC येन/SN व्याघ्रम्/NP  मत्वा/KKS समीपवर्त्तिनः/NV क्षेत्रपाला/NP एनम्/SN  न/AN निष्कासयिष्यन्ति/KP ।/PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KP रासभः/NP यथेच्छया/NP यवभक्षणम्/NP करोति/KP ।/PUNC प्रत्यूषे/NP भूयः/A अपि/A रजकः/NP स्वाश्रयम्/NP नयति/KP ।/PUNC एवम्/A  गच्छता/KNV कालेन/NP सः/SN  रासभः/NP पीवरतनुः/NV जातः/KN ।/PUNC कृच्छ्रात्/KV बन्धनस्थानम्/NP अपि/A नीयते/KP ।/PUNC अथ/A अन्यस्मिन्/SN अहनि/NP सः/SN  मदोद्धतः/SNV  दूरात्/KV रासभीशब्दम्/NP अश्रृणोत्/KP ।/PUNC तत्/SN श्रवणमात्रेण/NP एव/INTF स्वयम्/SN  शब्दायितुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC अथ/A ते/SN क्षेत्रपालाः/NP “/PUNC रासभः/NP अयम्/SN  व्याघ्रचर्मप्रतिच्छन्नः/NV “/PUNC इति/AUD ज्ञात्वा/KKS लगुडशरपाषाणप्रहारैः/NP तम्/SN  व्यापादितवन्तः/KN ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP –/PUNC “/PUNC सुगुप्तः/NP  रक्ष्यमाणः/KNV अपि/A ”/PUNC इत्यादि/AUD ।/PUNC 
अथ/A एवम्/A  तेन/SN सह/A वदतः/KNV मकरस्य/KP जलचरेण/NP एकेन/SMKY आगत्य/KKS अभिहितम्/KN –/PUNC “/PUNC भो/ABS मकरः/NP !/PUNC त्वदीया/SN भार्या/NP अनशनोपविष्टा/NV ,/PUNC त्वयि/SN चिरयति/KP प्रणयाभिभवात्/NP विपन्ना/NV ।/PUNC ”/PUNC एवम्/A  तत्/SN वज्रपातसदृशवचनम्/NP आकर्ण्य/KKS अतीव/A व्याकुलितहृदयः/NP प्रलपितुम्/KKS एवम्/A  चकार/KP –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC किम्/AP इदम्/SN  सञ्जातम्/KN  मे/SN मन्दभाग्यस्य/NP ?/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
   माता/NP यस्य/SN गृहे/NP न/AN अस्ति/KP भार्या/NP च/APY प्रियवादिनी/NV ।/PUNC 
  अरण्यम्/NP  तेन/SN गन्तव्यम्/KN  यथा/ASD अरण्यम्/NP  तथा/ASD गृहम्/NP ॥/PUNC 50/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK मित्र/NP !/PUNC क्षम्यताम्/KP  मया/SN ते/SN अपराधः/NP कृतः/KN ।/PUNC सम्प्रति/A अहम्/SN  तु/A स्त्रीवियोगात्/NP वैश्वानरप्रवेशम्/NP  करिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS वानरः/NP प्रहसन्/KNV प्रोवाच/KP –/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC ज्ञातम्/KN  मया/SN प्रथमम्/SMKP एव/INTF यत्/AVK त्वम्/SN  स्त्रीवश्यः/NP,/PUNC स्त्रीजितः/NP च/NP ।/PUNC साम्प्रतम्/A च/AVK प्रत्ययः/NP सञ्जातः/KN ।/PUNC तत्/AVK मूढ/NP !/PUNC आनन्दे/NP अपि/A जाते/KN त्वम्/SN  विषादम्/NP  गतः/KN ।/PUNC तादृक्/A भार्यायाम्/NP  मृतायाम्/NV उत्सवम्/NP  कर्त्तुम्/KKS  युज्यते/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/SN -/PUNC 
या/SN भार्या/NP दुष्टचारित्रा/NV सततम्/NP  कलहप्रिया/NV ।/PUNC 
भार्यारूपेण/NP सा/SN ज्ञेया/KN विदग्धैः/NP दारुणा/NP जरा/NP ॥/PUNC 51/PUNC ॥/PUNC 
तस्मात्/AVK सर्वप्रयत्नेन/NP नाम/NP अपि/A परिवर्जयेत्/KP ।/PUNC 
स्त्रीणाम्/NP इह/A हि/A सर्वासाम्/SN ,/PUNC यः/SN  इच्छेत्/KP सुखम्/NP आत्मनः/SN ॥/PUNC 52/PUNC ॥/PUNC 
यत्/SN अन्तः/NP तत्/SN न/AN जिह्वायाम्/NP  यत्/SN जिह्वायाम्/NP  न/AN तद्/SN हि/A ।/PUNC 
यत्/SN बहिः/NP तत्/SN न/AN कुर्वन्ति/KP ,/PUNC विचित्रचरिताः/NV स्त्रियः/NP ॥/PUNC 53/SN ॥/PUNC 
के/SN नाम/A न/AN विनश्यन्ति/KP मिथ्याज्ञानात्/NP नितम्बिनीम्/NP ।/PUNC 
रम्याम्/NV  ये/SN  उपसर्पन्ति/KP ,/PUNC दीपाभाम्/NV  शलभा/NP यथा/A ॥/PUNC 54/PUNC ॥/PUNC 
अन्तः/A विषमया//NV हि/A एता/SN बहिः/NP च/APY एव/INTF मनोरमाः/NV ।/PUNC 
गुञ्जाफलसमाकाराः/NV स्वभावात्/NP एव/INTF योषितः/NP ॥/PUNC 55/PUNC ॥/PUNC 
ताडिताः/KN  अतिदण्डेन/NP शस्त्रैः/NP अपि/A विखण्डिताः/KN ।/PUNC 
न/AN वशम्/NP  योषितः/NP  यान्ति/KP न/AN दानैः/NP न/AN च/APY संस्तवैः/NP ॥/PUNC 56/PUNC ॥/PUNC 
आस्ताम्/KP  तावत्किम्/AP अन्येन/SN दौरात्म्येन/NP इह/A योषिताम्/NP ।/PUNC 
विधृतम्/KN  स्वोदरेण/NP अपि/A घ्नन्ति/KP पुत्रम्/NP  स्वकम्/SN  रुषा/NP ॥/PUNC 57/PUNC ॥/PUNC 
रूक्षायाम्/NP  स्नेहसद्भावम्/NP  कठोरायाम्/NV  सुमादर्वम्/NP ।/PUNC 
नीरसायाम्/NP  रसम्/NP  बालः/NP  बालिकायाम्/NP  विकल्पयेत्/KP ॥/PUNC 58/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC अस्ति/KP एतत्/SN ,/PUNC परम्/A  किम्/AP  करोमि/KP ?/PUNC मम/SN अनर्थद्वयम्/NP एतत्/SN सञ्जातम्/KN ।/PUNC एकः/SMK तावत्/AVK  गृहभङ्गः/NP ,/PUNC अपरः/A त्वत्/SN विधेन/A मित्रेण/NP सह/A चित्तविश्लेषः/NP ।/PUNC अथवा/A भवति/KP एवम्/A  दैवयोगात्/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/APY यतः/AVK -/PUNC 
यादृशम्/A  मम/SN पाण्डित्यम्/NP  तादृशम्/A  द्विगुणम्/NP  तव/SN ।/PUNC 
न/AN अभूत्/KP जारः/NP  न/AN भर्त्ता/NP च/APY किम्/AP  निरीक्षसि/KP नग्निके/NP ?/PUNC ”/PUNC ॥/PUNC 59/PUNC ॥/PUNC 
वानरः/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC मकरः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC 

     [/PUNC ८/PUNC ]/PUNC 
  (/PUNC नग्निका/NP -/PUNC हालिकवधूकथा/NP )/PUNC 

  कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP हालिकदम्पती/NP प्रतिवसतः/KP स्म/A ।/PUNC सा/SN च/APY हालिकभार्या/NP पत्युः/NP वॄद्धभावात्/NP सदैव/A अन्यचित्ता/NV,/PUNC न/AN कथञ्चित्/A गृहे/NP स्थैर्यम्/NP आलम्बते/KP ।/PUNC केवलम्/A  परपुरुषान्वेषमाणा/KNV परिभ्रमति/KP ।/PUNC अथ/A केनचित्/SN परिवित्तापहारकेण/NV धूर्त्तेन/NP सा/SN लक्षिता/KN ,/PUNC विजने/NP प्रोक्ता/KN च/ –/PUNC “/PUNC सुभगे/NP !/PUNC मृतभार्यः/NV अहम्/SN ,/PUNC त्वत्/SN दर्शनेन/NP स्मरपीडितः/NV च/APY ।/PUNC तत्/SN दीयताम्/KN  मे/SN रतिदक्षिणा/NP ।/PUNC ”/PUNC 
  ततः/AVK तया/SN अभिहितम्/KN  –/PUNC “/PUNC भोः/ASMB सुभग/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A ,/PUNC तत्/SN अस्ति/KP मे/SN पत्युः/NP प्रभूतम्/NV  धनम्/NP ।/PUNC सः/SN  च/APY वृद्धत्वात्/NP प्रचलितुम्/KKS अपि/A असमर्थः/NV ।/PUNC ततः/AVK तत्/SN धनम्/NP आदाय/KKS अहम्/SN आगच्छामि/KP ,/PUNC येन/SN त्वया/SN सह/A अन्यत्र/A गत्वा/KKS यथेच्छया/NV रतिसुखम्/NP अनुभविष्यामि/KP ।/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP –/PUNC “/PUNC रोचते/KP मह्यम्/SN अपि/A एतत्/SN ।/PUNC तत्प्रत्यूषे/NP अत्र/A स्थाने/NP शीघ्रम्/KV एव/INTF समागन्तव्यम्/KN ,/PUNC येन/SN शुभतरम्/NV  किञ्चित्/SN नगरम्/NP  गत्वा/KKS त्वया/SN सह/A जीवलोकः/NP सफलीक्रियते/KP ।/PUNC ”/PUNC 
 सा/SN अपि/A “/PUNC तथा/AVK ”/PUNC इति/AUD प्रतिज्ञाय/KKS ,/PUNC प्रहसितवदना/NV स्वगृहम्/NP गत्वा/KKS ,/PUNC रात्रौ/NP प्रसुप्ते/NV भर्त्तरि/NP सर्वम्/SN  वित्तम्/NP आदाय/KKS ,/PUNC प्रत्यूषसमये/NP तत्/SN कथितस्थानम्/NP उपाद्रवत्/KP ।/PUNC धूर्त्तः/NP अपि/A ताम्/SN अग्रे/NP विधाय/KKS दक्षिणाम्/NS  दिशम्/NP आश्रित्य/KKS सत्वरगतिः/KV प्रस्थितः/KN ।/PUNC 
एवम्/A  तयोः/SN व्रजतोः/KNV योजनद्वयमात्रेण/NP अग्रतः/A काचित्/SN नदी/NP समुपस्थिता/KN ।/PUNC ताम्/SN  दृष्ट्वा/KKS धूर्त्तः/NP चिन्तयामास/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP अहम्/SN अनया/SN यौवनप्रान्ते/NP वर्त्तमानया/NV करिष्यामि/KP ?/PUNC किम्/AP च/APY कदा/A अपि/A अस्याः/SN पृष्ठतः/NP कः/SN अपि/A सष्यति/KP ,/PUNC तत्/SN मे/SN महान्/NV अनर्थः/NP स्यात्/KP ।/PUNC तत्केवलम्/A अस्याः/SN वित्तम्/NP आदाय/KKS गच्छामि/KP ।/PUNC 
इति/AUD निश्चित्य/KKS ताम्/SN उवाच/KP –/PUNC “/PUNC प्रिये/NP !/PUNC सुदुस्तरा/NV इयम्/SNV  महानदी/NP ।/PUNC तत्/SN अहम्/SN  द्रव्यमात्राम्/NP  पारे/NP धृत्वा/KKS समागच्छामि/KP ।/PUNC ततः/AVK त्वाम्/SN एकाकिनीम्/NP  स्वपृष्ठम्/NP आरोप्य/KKS सुखेन/NP उत्तारयिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC सा/SN प्र/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC सुभग/NP !/PUNC एवम्/A  कियताम्/A ।/PUNC ”/PUNC इति/AUD उक्त्वा/KKS अशेष/NV वित्तम्/NP  तस्मै/SN समर्पयामास/KP ।/PUNC अथ/A तेन/SN अभिहितम्/KN  –/PUNC “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC परिधान/NP आच्छादनवस्त्रम्/NP अपि/A समर्पय/KP ,/PUNC येन/SN जलमध्ये/NP निःशङ्का/NP व्रजसि/KP ।/PUNC ”/PUNC तथा/ अनुष्ठिते/KN धूर्त्तः/NP  वित्तम्/NP  वस्त्रयुगलम्/NP च/APY आदाय/KKS यथाचिन्तितविषयम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
 सा/SN अपि/A कण्ठनिवेशितहस्तयुगला/NV सोद्वेगा/NV नदीपुलिनदेशे/NP उपविष्टा/NV यावत्/AVK तिष्ठति/KP ,/PUNC तावत्/AVK एतस्मिन्/SN अनन्तरे/NP काचित्/SN श्रृगालिका/NP मांसपिण्डगृहीतवदना/NV तत्र/A आजगाम/KP ।/PUNC आगत्य/KKS च/AVK यावत्पश्यति/KP ,/PUNC तावत्/AVK नदीतीरे/NP महान्मत्स्यः/NP सलिलात्/NP निष्क्रम्य/KKS बहिः/NP स्थितः/KN आस्ते/KP ।/PUNC एनम्/SN च/AVK दृष्ट्वा/KKS सा/SN मांसपिण्डम्/NP  समुत्सृज्य/KKS तम्/SN  मत्स्यम्/NP  प्रत्युपाद्रवत्/KP ।/PUNC अत्र/A अन्तरे/A आकाशात्/NP अवतीर्य/KKS कः/SN अपि/A गृध्रः/NP तम्/SN  मांसपिण्डम्/NP आदाय/KKS ,/PUNC पुनः/A खम्/NP उत्पपात/KP ।/PUNC मत्स्यः/NP अपि/A श्रृगालिकाम्/NP  दृष्टवा/KKS नद्याम्/NP  प्रविवेश/KP ।/PUNC 
 सा/SN श्रृगालिका/NP व्यर्थश्रमा/NV गृध्रम्/NP अवलोकयन्ती/KNV ,/PUNC तया/SN नग्निकया/NP सस्मितम्/NV अभिहिता/KN -/PUNC 
“/PUNC गृध्रेण/NP अपहृतम्/KN  मांसम्/NP  मत्स्यः/NP अपि/A सलिलम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
मत्स्यमांसपरिभ्रष्टे/NV किम्/AP  निरीक्षसि/KP जम्बूकि/NP ?/PUNC ”/PUNC ॥/PUNC 60/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS श्रृगालिका/NP ताम्/SN अपि/A पतिधनजारपरिभष्टाम्/NV  दृष्ट्वा/KKS सोपहासमाह/KP -/PUNC 
“/PUNC यादृशम्/A  मम/SN पाण्डित्यम्/NP  तादृशम्/A  द्विगुणम्/NP  तव/A ।/PUNC 
न/AN अभूत्/KP जारः/A न/AN भर्त्ता/NP च/APY किम्/AP  निरीक्षसि/KP नग्निके/NP ?/PUNC ”/PUNC ॥/PUNC 61/PUNC॥/PUNC 
  एवम्/A  तस्य/SN कथयतः/KNV पुनः/A अन्येन/A जलचरेण/NP आगत्य/KKS निवेदितम्/KN  यद्/AVK –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC त्वदीयम्/SN  गृहम्/NP अपि/A अपरेण/NP महामकरेण/NP गृहीतम्/KN ।/PUNC ”/PUNC तत्/SN श्रुत्वा/KKS असौ/A अतिदुःखितमनाः/NV तम्/SN  गृहात्/NP निःसारयितुम्/KKS उपायम्/NP  चिन्तयामास/KP –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC पश्यत/KP मे/SN दैवोपहतत्वम्/NP -/PUNC 
मित्रम्/NP  हि/SN अमित्रताम्/NP  यातम्/KN अपरम्/AVK  मे/SN प्रिया/NP मृता/NV ।/PUNC 
गृहम्/NP अन्येन/SN च/APY क्रान्तम्/KN  किम्/AP अद्य/A अपि/A भविष्यति/KP ?/PUNC ॥/PUNC 62/PUNC ॥/PUNC 
अथवा/A युक्तम्/KN इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
क्षते/NP प्रहारा/NP निपतन्ति/KP अभीक्ष्णम्/NP अन्नक्षये/NP दीप्यति/KP जाठरNV अग्निः/NP ।/PUNC 
आपत्सु/NP वैराणि/NP समुद्भवन्ति/KP ,/PUNC वामे/NP विधौ/NP सर्वमिदम्/NP  नराणाम्/NP ॥/PUNC 63/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN किम्/AP  करोमि/KP ?/PUNC किम्/AP अनेन/SN सह/A युद्धम्/NP  करोमि/KP ?/PUNC किम्/AP वा/A साम्ना/NP एव/INTF सम्बोध्य/KKS गृहात्/NP निःसारयामि/KP ?/PUNC किम्/AP वा/A भेदम्/NP ,/PUNC दानम्/NP  वा/A करोमि/KP ?/PUNC अथवा/A ,/PUNC अमुम्/A एव/INTF वानरमित्रम्/NP  पृच्छामि/KP ?/PUNC 
उक्तम्/ KN च/AVK -/PUNC 
यः/SN पृष्ट्वा/KKS कुरुते/KP कार्यम्/NP  प्रष्टव्यान्/KN स्वाहितान्/NV गुरून्/NP ।/PUNC 
न/AN तस्य/SN जायते/KP विघ्नः/NP कस्मिंश्चित्/SN अपि/A कर्मणि/NP ॥/PUNC 64/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A  सम्प्रधार्य/KKS ,/PUNC भूयः/A अपि/A तम्/SN एव/INTF जम्बूवृक्षम्/NP आरूढ/NV कपिम्/NP अपृच्छत्/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC पश्य/KP मे/SN मन्दभाग्यताम्/NP  यत्/AVK -/PUNC सम्प्रति/A गृहम्/NP अपि/A मे/SN बलवत्तरेण/NV मकरेण/NP रुद्धम्/KN ।/PUNC तदहम्/SN  त्वाम्/SN  प्रष्टुम्/KKS अभ्यागतः/KN !/PUNC कथय/KP किम्/AP  करोमि/KP ?/PUNC सामादीनाम्/NP उपायानाम्/NP  मध्ये/NP कस्य/SN अत्र/A विषयः/NP ?/PUNC ”/PUNC सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB कृतघ्न/NP !/PUNC पापचारिन्/NV !/PUNC मया/SN निषिद्धः/KN अपि/A किम्/AP  भूयः/A माम्/SN अनुसरसि/KP ?/PUNC न/AN अहम्/SN  तव/SN मूर्खस्य/NP उपदेशम्/NP अपि/A दास्यामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS मकरः/NP प्राह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC सापराधस्य/NV मे/SN पूर्वस्नेहम्/NP अनुस्मृत्य/KKS हितोपदेशम्/NP  देहि/KP ।/PUNC ”/PUNC वानरः/NP  आह/KP -/PUNC ”/PUNC न/AN अहम्/SN  ते/SN कथयिष्यामि/KP ,/PUNC यत्/AVK भार्य्यावाक्येन/NP भवता/SN अहम्/SN  समुद्रे/NP प्रक्षेप्तुम्/KKS  नीतः/KN ,/PUNC तत्/SN एव/INTF न/AN युक्तम्/KN ।/PUNC यद्यपि/A भार्या/NP सर्वलोकात्/NP अपि/A वल्लभा/NP भवति/KP ,/PUNC तथापि/A न/AN मित्राणि/NP बान्धवाः/NP च/AVK भार्यावाक्येन/NP समुद्रे/NP क्षिप्यन्ते/KP ।/PUNC तत्/SN मूर्ख/NP !/PUNC मूढत्वेन/NP नाशः/NP तव/SN प्राक्/NP एव/INTF निवेदित/KN आसीत्/KP ।/PUNC यतः/AVK -/PUNC 
सताम्/NP  वचनम्/NP आदिष्टम्/KN  मदेन/NP न/AN करोतिKP यः/SSN ।/PUNC 
सः/ASMBN  विनाशम्/NP अवाप्नोति/KP घण्टोष्ट्र/NP इव/ASD सत्वरम्/A ॥/PUNC 65/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP  आह/KP -/PUNC ”/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 

  [/PUNC ९/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC घण्टोष्ट्रकथा/NP )/PUNC 

 कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP उज्ज्वलकः/NS  नाम/A रथकारः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC सः/SN  च/AVK अतीव/A दारिद्र्य/NP उपहतः/KN चिन्तितवान्/KN –/PUNC अहो/ABS,/PUNC धिक्/ABS इयम्/SN  दरिद्रता/NP अस्मत्/SN गृहे/NP ,/PUNC यतः/AVK सर्वः/SN अपि/A जनः/NP स्वकर्मणि/NP एव/INTF रतः/KN तिष्ठति/KP ।/PUNC अस्मदीयः/SN पुनः/A व्यापारः/NP  न/AN अत्र/A अधिष्ठाने/NP अर्हति/KP ।/PUNC यतः/AVK सर्वलोकानाम्/NP  चिरन्तनाः/NV चतुर्भूमिका/NV गृहाः/NP सन्ति/KP ,/PUNC मम/SN एकम्/SMK अपि/A तत्/SN न/AN अस्ति/KP ।/PUNC तत्किम्/AP  मदीयेन/SNV रथकारत्वेन/NP प्रयोजनम्/NP ।/PUNC ”/PUNC इति/AUD चिन्तयित्वा/KKS देशात्/NP निष्क्रान्तः/KN ।/PUNC 
 यावत्/AVK किञ्चित्/A वनम्/NP  गच्छति/KP ,/PUNC तावत्/AVK गह्वराकारवनगहनमध्ये/NP सूर्यास्तमनवेलायाम्/NP  स्वयूथाद्/NP भ्रष्टाम्/NV  प्रसववेदनया/NP पीड्यमानाम्/KKS उष्ट्रीम्/NP अपश्यत्/KP ।/PUNC सः/SN  च/AVK दासेरकयुक्ताम्/NV उष्ट्रीम्/NP  गृहीत्वा/KKS स्वस्थानाभिमुखः/NV प्रस्थितः/KN ।/PUNC गृहम्/NP आसाद्य/KKS रज्जुम्/NP  गृहीत्वा/KKS ताम्/SN उष्ट्रिकाम्/NP  बबन्ध/KP ।/PUNC ततः/AVK च/AVK तीक्ष्णम्/NV  परशुम्/NP आदाय/KKS तस्याः/SN कृते/A पल्लवानयनार्थम्/KKS  पर्वतैकदेशे/NP गतः/KN ।/PUNC तत्र/A च/AVK नूतनानि/NV कोमलानि/NV बहूनि/NV पल्लवानि/NP छित्त्वा/KKS शिरसि/NP समारोप्य/KKS ,/PUNC तस्याः/SN  अग्रे/NP निचिक्षेप/KP ।/PUNC तया/SN च/AVK तानि/SN शनैः/DV शनैः/DV भक्षितानि/KP ।/PUNC 
  पश्चात्/AVK पल्लवभक्षणप्रभावात्/NP अहर्निशम्/NP  पीवरतनुः/NV उष्ट्री/NP सञ्जाता/KN ।/PUNC सः/SN अपि/AVK दासेरकः/NP  महान्/NV उष्ट्रः/NP सञ्जातः/KN ।/PUNC ततः/AVK सः/SN  नित्यम्/A एव/INTF दुग्धम्/NP  गृहीत्वा/KKS स्वकुटुम्बम्/NP  परिपालयति/KP ।/PUNC अथ/A रथकारेण/NP वल्लभत्वाद्/NP दासेरकग्रीवायाम्/NP  महती/NV घण्टा/NP प्रतिबद्धा/KN ।/PUNC पश्चात्/AVK रथकारः/NP  व्यचिन्तयत्/KP –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC किम्/AP अन्यैः/NV दुष्कृतकर्मभिः/NP ।/PUNC यावत्/AVK मम/SN एतस्मात्/SN एव/INTF उष्ट्रीपरिपालनात्/NP अस्य/SN कुटुम्बस्य/NP भव्यम्/NP  सञ्जातम्/KN  तत्किम्/AP अन्येन/NV व्यापारेण/NP ?/PUNC ”/PUNC 
 एवम्/A  विचिन्त्य/KKS गृहम्/NP आगत्य/KKS प्रियाम्/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC भद्रे/NP !/PUNC समीचीनः/NV अयम्/SN  व्यापारः/NP ।/PUNC तव/SN सम्मतिः/SN चेत्/A कुतः/AP अपि/A धनिकात्/NP किञ्चित्/A द्रव्यम्/NP आदाय/KKS मया/SN गुर्जरदेशे/NP गन्तव्यम्/KKS  करभग्रहणाय/NP,/PUNC तावत्/AVK त्वया/SN एतौ/SN यत्नेन/NP रक्षणीयौ/NP,/PUNC यावत्/AVK अहम्/SN अपराम्/A उष्ट्रीम्/NP  नीत्वा/KKS समागच्छामि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
 ततः/AVK च/AVK गुर्जरदेशम्/NP  गत्वा/KKS ऊष्ट्रीम्/NP गृहीत्वा/KKS स्वगृहम्/NP आगतः/KN ।/PUNC किम्/AP बहुना/A तेन/SN तथा/AVK कृतम्/KN  यथा/AVK तस्य/SN प्रचुराः/NV  उष्ट्र्यः/NP करभाः/NP च/APY सम्मिलिताः/KN ।/PUNC ततः/AVK तेन/SN महदुष्ट्रयूथम्/NP  कृत्वा/KKS रक्षापुरुषः/NP धृतः/KN ।/PUNC 
 तस्य/SN प्रतिवर्ष/NP वृत्त्या/NP करभम्/NP एकम्/SMKY प्रयच्छति/KP ।/PUNC अन्यत्/SN च/AVK अहर्निशम्/NP दुग्धपानम्/KN तस्य/SN निरूपितम्/KN ।/PUNC एवम्/A  रथकारः/NP अपि/A नित्यम्/A एव/INTF उष्ट्रीकरभव्यापारम्/NP  कुर्वन्/KNV सुखेन/NP तिष्ठति/KP ।/PUNC 
  अथ/A ते/SN दासेरका/NP अधिष्ठान/NP उपवने/NP आहारार्थम्/KKS  गच्छन्ति/KP ।/PUNC कोमलवल्लीः/NP यथेच्छया/KV भक्षयित्वा/KKS महति/NV सरसि/NP पानीयम्/NP  पीत्वा/KKS ,/PUNC सायन्तनसमये/NP मन्दम्/DV  मन्दम्/DV  लीलया/KV गृहम्/NP आगच्छन्ति/KP ।/PUNC सः/SN  च/APY पूर्वदासेरकः/NP  मदातिरेकात्/NP पृष्ठे/NP आगत्य/KKS मिलति/KP ।/PUNC ततः/AVK तैः/SNV कलभैः/NP अभिहितम्/KN –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC मन्दमतिः/NV अयम्/SNV  दासेरकः/NP  यथा/A यूथाद्भ्रष्टः/KN पृष्ठे/NP स्थित्वा/KKS घण्टाम्/NP  वादयन्/KNV आगच्छति/KP ।/PUNC यदि/A कस्य/SN अपि/A दुष्टसत्त्वस्य/NP मुखे/NP पतिष्यति/KP ,/PUNC तत्/A नूनम्/A  मृत्युम्/NP अवाप्स्यति/KP ।/PUNC ”/PUNC 
  अथ/A एकदा/A तैः/SN निषिद्धः/KN सन्/A अपि/A सः/SN  तत्/SN वचने/NP कर्णम्/NP अदत्त्वा/KKS एव/INTF मदातिरेकात्/NP  घण्टाम्/NP  वादयन्/KNV वनम्/NP  प्रविष्टः/KN ।/PUNC इत्थम्/A  तस्य/SN तद्वनम्/NP  गाहमानस्य/KNV तत्रस्थः/NP कश्चित्/SN सिंहः/NP  घण्टारवम्/NP आकर्ण्य/KKS शब्दानुसारेण/KV दृष्टिम्/NP  निपात्य/KKS अवलोकयति/KP -/PUNC यत्/AVK उष्ट्रीदासेरकाणाम्/NP  यूथम्/NP  गच्छति/KP ।/PUNC सः/SN  तु/A पुनः/A प्रतिदिवसम्/NP इव/ASD पृष्ठे/NP क्रीडाम्/NP  कुर्वन्/KNV वल्लरीः/NP चरन्/KNV यावत्/AVK तिष्ठति/KP ,/PUNC तावत्/AVK अन्ये/NP दासेरकाः/NP पानीयम्/NP  पीत्वा/KKS स्वगृहे/NP गताः/KN ।/PUNC सः/SN अपि/A वनात्/NP निष्क्रम्य/KKS यावत्/AVK  दिशः/NP अवलोकयति/KP ,/PUNC तावत्/AVK न/AN कञ्चित्/SN मार्गम्/NP  पश्यति/KP ,/PUNC वेत्ति/KP वा/A ।/PUNC ततः/AVK यूथात्/NP  भ्रष्टः/KN  मन्दम्/DV  मन्दम्/DV  बृहत्/NV शब्दम्/NP  कुर्वन्/KNV यावत्/AVK कियत्/A दूरम्/NP  गच्छति/KP ,/PUNC तावत्/AVK तत्/SN शब्दानुसारी/NV सिंहः/NP अपि/A क्रमम्/NP  कृत्वा/KKS निभृतः/KN अग्रे/KNV व्यवस्थितः/KN ।/PUNC 
 ततः/AVK  यावत्/AVK उष्ट्रः/NP समीपम्/AUP आगतः/KN ,/PUNC तावत्/AVK सिंहेन/NP लम्फयित्वा/KKS ग्रीवायाम्/NP गृहीतः/KN मारितः/KN च/APY ।/PUNC अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP –/PUNC “/PUNC सताम्/NP  वचनम्/NP आदिष्टम्/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
  अथ/A तत्/SN श्रुत्वा/KKS मकरः/NP प्राह/KP –/PUNC “/PUNC भद्र/NV !/PUNC 
प्राहुः/KP साप्तपदम्/NV  मैत्रम्/NP  जनाः/NP शास्त्रविचक्षणाः/NV ।/PUNC 
मित्रताम्/NP च/APY पुरस्कृत्य/KKS किञ्चित्/A वक्ष्यामि/KP तत्/SN शृणु/KP ॥/PUNC 66/PUNC ॥/PUNC 
उपदेशप्रदातृणाम्/NP  नराणाम्/NP  हितम्/NP इच्छताम्/NV ।/PUNC 
परस्मिन्/SN इह/A लोके/NP च/APY व्यसनम्/NP  न/AN उपपद्यते/KP ॥/PUNC 67/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK सर्वथा/A कृतघ्नस्य/NP अपि/A मे/SN कुरु/KP प्रसादम्/NP उपदेशप्रदानेन/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
उपकारिषु/NP यः/SN साधुः/NP साधुत्वे/NP तस्य/SN कः/AP  गुणः/NP ?/PUNC ।/PUNC 
अपकारिषु/NP यः/SSN साधुः/NP सः/SSN  साधुः/NP सद्भिः/NP उच्यते/PUNC ”/PUNC ॥/PUNC 68/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN आकर्ण्य/KKS वानरः/NP प्राह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A ,/PUNC तर्हि/A तत्र/A गत्वा/KKS तेन/SN सह/A युद्धम्/NP  कुरु/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
हतः/KN त्वम्/SN  प्राप्स्यसि/KP स्वर्गम्/NP  जीवन्/KNV गृहम्/NP अथो/A  यशः/NP ।/PUNC 
युध्यमानस्य/KNV ते/SN भावि/NV गुणद्वयम्/NP अनुत्तमम्/NV ॥/PUNC 69/PUNC ॥/PUNC 
उत्तमम्/NP  प्रणिपातेन/KN शूरम्/NP  भेदेन/KN योजयेत्/KP ।/PUNC 
नीचम्/NP अल्पप्रदानेन/KN समशक्तिम्/NP  पराक्रमैः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 70/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP प्राह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 

 [/PUNC १०/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC चतुरकश्रृगालकथा/NP )/PUNC 

आसीत्/KP कस्मिंश्चित्/SN वनोद्देशे/NP महाचतुरकः/NS नाम/NP श्रृगालः/NP ।/PUNC तेन/SN कदाचित्/A अरण्ये/NP स्वयम्/SN मृतः/KN गजः/NP समासादितः/KP ।/PUNC सः/SN  तस्य/SN समन्तात्/UA परिभ्रमति/KP ,/PUNC परम्/A  कठिनाम्/NV  त्वचम्/NP  भेत्तुं/KKS न/AN शक्नोति/KP ।/PUNC अत्र/A अवसरे/NP इतः/DV च/APY इतः/A च/APY विचरन्/KNV कश्चित्/SN सिंहः/NP तत्र/A एव/INTF प्रदेशे/NP समाययौ/KP ।/PUNC अथ/A सिंहम्/NP  समागतम्/KN  दृष्टवा/KKS सः/SN  क्षितितलविन्यस्तमौलिमण्डलः/SNV ,/PUNC संयोजितकरयुगलः/NV सविनयम्/NV उवाच/KP –/PUNC “/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC त्वदीयः/SN अहम्/SN  लागुडिकः/NP स्थितः/KN त्वदर्थम्/KKS  गजम्/NP इमम्/SN  रक्षामि/KP ।/PUNC तत्/AVK एनम्/SN  भक्षयतु/KP स्वामी/NP ।/PUNC ”/PUNC 
  तम्/SN  प्रणतम्/KN  दृष्टवा/KKS सिंहः/NP प्राह/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB  !/PUNC न/AN अहम्/SN अन्येन/SN हतम्/KN  सत्त्वम्/KN  कदाचित्/A अपि/A भक्षयामि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
वने/NP अपि/A सिंहा/NP मृगमांसभक्ष्या/NV बुभुक्षिता/KN न/AN एव/INTF तृणम्/NP  चरन्ति/KP ।/PUNC 
एवम्/A  कुलीना/NP व्यसनाभिभूताः/NV ,/PUNC न/AN नीतिमार्गम्/NP  परिलङ्घयन्ति/KP ॥/PUNC 71/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK तव/SN एव/INTF गजः/NP अयम्/SN  मया/SN प्रसादीकृतः/KN ।/PUNC ”/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS श्रृगालः/NP सानन्दम्/KV आह/KP –/PUNC “/PUNC युक्तम्/KN इदम्/SN  स्वामिनः/NP  निजभृत्येषु/NP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK -/PUNC 
अन्त्यावस्थः/NV अपि/A महान्/NP स्वामिगुणान्/NV न/AN जहाति/KP तु/A शुद्धतया/NP ।/PUNC 
न/AN श्वेतभावम्/NP उज्झति/KP शङ्खः/NP शिखिभुक्तिमुक्तः/KNV अपि/A ”/PUNC ॥/PUNC 72/PUNC ॥/PUNC 
  अथ/A सिंहे/NP गते/KN कश्चित्/SN व्याघ्रः/NP  समाययौ/KP ।/PUNC तम्/SN अपि/A दृष्ट्वा/KKS असौ/A व्यचिन्तयत्/KP –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC एकः/SMK तावत्/AVK  दुरात्मा/NP प्रणिपातेन/NP अपवाहितः/KN तत्/SN कथम्/AP इदानीम्/A एनम्/SN अपवाहयिष्यामि/KP !/PUNC नूनम्/A  शूरः/NP अयम्/SN ।/PUNC न/AN खलु/A भेदम्/NP  विना/A साध्यः/NP  भविष्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK -/PUNC 
न/AN यत्र/A शक्यते/KP कर्त्तुम्/KKS  साम/NP दानम्/NP अथ/A अपि/A वा/A ।/PUNC 
भेदः/NP तत्र/A प्रयोक्तव्यः/KN  यतः/AVK सः/SN  वशकारकः/NP ॥/PUNC 73/PUNC ॥/PUNC 
किंच/A -/PUNC सर्वगुणसम्पन्नः/NP अपि/A भेदेन/NP बध्यते/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK -/PUNC 
अन्तःस्थेन/NV अविरुद्धेन/NV सुवृत्तेन/NV अतिचारुणा/NV ।/PUNC 
अन्तः/A भिन्नेन/NV सम्प्राप्तम्/KN  मौक्तिकेन/NP अपि/A बन्धनम्/NP ॥/PUNC 74/PUNC ॥/PUNC  
एवम्/AVK  सम्प्रधार्य/KKS ,/PUNC तस्य/SN अभिमुखः/NV  भूत्वा/KKS गर्वोन्नतकन्धऱः/NV ससम्भ्रमम्/NV उवाच/KP –/PUNC “/PUNC माम/SN !/PUNC कथम्/AP अत्र/A भवान्/SN मृत्युमुखे/NP प्रविष्टः/KN ?/PUNC येन/AVK ,/PUNC एषः/SN  गजः/NP सिंहेन/NP व्यापादितः/KN ,/PUNC सः/SN  च/AVK माम/SN एतत्/SN रक्षणे/NP नियुज्य/KKS नद्याम्/NP  स्नानार्थम्/KKS  गतः/KN ।/PUNC तेन/SN गच्छता/KNV मम/SN समादिष्टम्/KN  –/PUNC “/PUNC यदि/A कश्चित्/SN इह/A व्याघ्रः/NP समायाति/KP तर्हि/A त्वया/SN सुगुप्तम्/KN  माम्/SN आवेदनीयम्/KN ,/PUNC येन/AVK वनम्/NP इदम्/SN  मया/SN निर्व्याघ्रः/NP कर्त्तव्यम्/KN ।/PUNC यतः/AVK पूर्वम्/NP  व्याघ्रेण/NP एकेन/SMKY मया/SN व्यापादितः/KN  गजः/NP शून्ये/NP भक्षयित्वा/KKS उच्छिष्टताम्/NP  नीतः/KN ,/PUNC तत्/SNV दिनात्/NP आरभ्य/KKS व्याघ्रान्/NP प्रति/AUP प्रकुपितः/KN अस्मि/KP ।/PUNC ”/PUNC 
  तत्/SN श्रुत्वा/KKS व्याघ्रः/NP सन्त्रस्तः/KN तम्/SN आह/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB भागिनेय/NP !/PUNC देहि/KP मे/SN प्राणदक्षिणाम्/NP ।/PUNC त्वया/SN तस्य/SN अत्र/A चिराय/A अपि/A कापि/SN वार्ता/NP न/AN आख्येया/NP ।/PUNC ”/PUNC एवम्/A अभिधाय/KKS सत्वरम्/KV  पलायाञ्चक्रे/KP ।/PUNC 
 अथ/A गते/KN व्याघ्रे/NP तत्र/A कश्चित्/SN  द्वीपी/NP समायातः/KN ।/PUNC तम्/SN अपि/A दृष्ट्वा/KKS असौ/A व्यचिन्तयत्/KP –/PUNC “/PUNC दृढद्रंष्टा/NV अयम्/SNV  चित्रकः/KP ।/PUNC तत्/SN अस्य/SN पार्श्वात्/NP अस्य/SNV गजस्य/NP यथा/AVK चर्मच्छेदः/NP  भवति/KP ,/PUNC तथा/AVK करोमि/KP ।/PUNC ”/PUNC एवम्/A  निश्चित्य/KKS तम्/SN अपि/A उवाच/KP –/PUNC “/PUNC भो/ASMB भगिनीसुत/NP !/PUNC किम्/AP इति/AUD चिरात्/A दृष्टः/KN असि/KP !/PUNC बुभुक्षितः/KN  इव/ASD लक्ष्यसे/KP ?/PUNC तत्/SN अतिथिः/NP असि/KP मे/SN ।/PUNC तत्/AVK एष/SN गजः/NP सिंहेन/NP हतः/KN तिष्ठति/KP ।/PUNC अहम्/SN च/AVK अस्य/SN तत्/SN आदिष्टः/KN  रक्षपालः/NP ।/PUNC परम्/A  तथा/A अपि/A यावत्/AVK सिंहः/NP  न/AN समायाति/KP ,/PUNC तावत्/AVK अस्य/SNV गजस्य/NP मांसम्/NP  भक्षयित्वा/KKS तृप्तिम्/NP  कृत्वा/KKS द्रुततरम्/KV व्रज/KP ।/PUNC ”/PUNC 
  सः/SN आह/KP –/PUNC “/PUNC माम/SN !/PUNC यदि/A एवम्/A तत्/SN न/AN कार्यम्/NP मे/SN मांसाशनेन/NP ।/PUNC यतः/AVK  जीवन्नरः/NP  भद्रशतानि/NP पश्यति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
यत्/SN शक्यम्/NP  ग्रसितुम्/KKS  शस्तम्/KN  ग्रस्तम्/KN  परिणमेत्/KP च/AVK यत् ।/PUNC 
हितम्/KN च/APY परिणामे/NP यत्/SSN तत्/SSN आद्यम्/NP  भूतिम्/NP इच्छताम्/KP ॥/PUNC 75/SMKP ॥/PUNC 
तत्/AVK सर्वथा/A तत्/SN एव/INTF भुज्यते/KP ,/PUNC यत्/AVK एव/INTF परिणमति/KP ।/PUNC तत्/AVK अहम्/SN इतः/A अपयास्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC श्रृगालः/NP  आह/KP –/PUNC “/PUNC भोः/ASMB अधीर/NP !/PUNC विश्रब्धः/KN  भूत्वा/KKS भक्षय/KP त्वम्/SN ।/PUNC तस्य/SN आगमनम्/NP  दूरतः/A अपि/A तव/SN अहम्/SN  निवेदयिष्यामि/KP ।/PUNC ”/PUNC तथा/A अनुष्ठिते/KN द्वीपिना/NP भिन्नाम्/NV  त्वचम्/NP  विज्ञाय/KKS जम्बुकेन/NP अभिहितम्/KN  –/PUNC “/PUNC भो/ASMB  भगिनीसुत/NP !/PUNC गम्यताम्/KP ।/PUNC एषः/SN  सिंहः/NP समायाति/KP ।/PUNC ”/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS चित्रकः/NP  दूरम्/A  प्रनष्टः/KN ।/PUNC 
 अथ/A यावत्/AVK असौ/A तत्/SN भेदकृतद्वारेण/NP किञ्चित्/A मांसम्/NP  भक्षयति/KP ,/PUNC तावत्/AVK अतिसङ्क्रुद्धः/NV अपरः/NV श्रृगालः/NP समाययौ/KP ।/PUNC अथ/A तम्/SN आत्मतुल्यपराक्रमम्/SNV  दृष्ट्वा/KKS एनम्/SN  श्लोकम्/NP अपठत्/KP -/PUNC 
उत्तमम्/NP  प्रणिपातेन/NP शूरम्/NP  भेदेन/NP योजयेत्/KP ।/PUNC 
नीचम्/NP अल्पप्रदानेन/NP समशक्तिम्/NP  पराक्रमैः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 76/PUNC ॥/PUNC 
ततः/AVK च/AVK तदभिमुखम्/NV  कृतप्रयाणः/NV स्वदंष्ट्राभिः/NP तम्/SN  विदार्य/KKS दिगन्तभाजम्/NV  कृत्वा/KKS स्वयम्/SN  सुखेन/NP चिरकालम्/NP  हस्तिमांसम्/NP  बुभुजे/KP ।/PUNC 
 एवम्/A  त्वम्/SN अपि/A तम्/SN  रिपुम्/SN  स्वजातीयम्/NP  युद्धेन/NP परिभूय/KKS दिगन्तभाजम्/NV  कुरु/KP ।/PUNC नो/AN चेत्/A पश्चात्/A  बद्धमूलात्/NP अस्मात्/SN त्वम्/SN अपि/A विनाशम्/NP अवाप्स्यसि/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK यतः/AVK -/PUNC 
सम्भाव्यम्/KN  गोषु/NP सम्पन्नम्/KN  सम्भाव्यम्/KN  ब्राह्मणे/NP तपः/NP ।/PUNC 
सम्भाव्यम्/KN  स्त्रीषु/NP चापल्यम्/NP  सम्भाव्यम्/KN  जातितः/NP  भयम्/NP ॥/PUNC 77/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/A च/AVK -/PUNC 
सुभिक्षाणि/NP विचित्राणि/NV शिथिलाः/NP पौरयोषितः/NP ।/PUNC 
एकः/SMK दोषः/NP विदेशस्य/NP स्वजातिः/NP यत्/SN विरुध्यते/KP ॥/PUNC 78/PUNC ॥/PUNC 
मकरः/NP आह/KP –/PUNC “/PUNC कथम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC वानरः/NP अब्रवीत्/KP -/PUNC 

 [/PUNC ११/PUNC ]/PUNC 
 (/PUNC चित्राङ्गसारमेयस्यकथा/NP )/PUNC 

अस्ति/KP कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP चित्राङ्गः/NS  नाम/NP सारमेयः/NP ।/PUNC तत्र/A च/AVK चिरकालम्/NP  दुर्भिक्षम्/NP  पतितम्/KN ।/PUNC अन्नाभावात्/NP सारमेयादयः/NP  निष्कुलताम्/NP  गन्तुम्/KKS आरब्धाः/KN ।/PUNC अथ/A चित्राङ्गः/NS क्षुत्क्षामकण्ठः/NV तत्/SN भयाद्/NP देशान्तरम्/NP  गतः/NP ।/PUNC तत्र/A च/APY कस्मिंश्चित्/SN पुरे/NP कस्यचित्/SN गृहमेधिनः/NP  गृहिण्याः/NP प्रमादेन/NP प्रतिदिनम्/NP  गृहम्/NP  प्रविश्य/KKS विविध/NV अन्नानि/NP भक्षयन्/KNV पराम्/NV  तृप्तिम्/NP  गच्छति/KP परम्/A  तत्/SN गृहात्/NP बहिः/A निरगमत्/KP ,/PUNC अन्यैः/NV मदोद्धतसारमेयैः/NP सर्वदिक्षु/NP परिवृत्य/KKS सर्वाङ्गम्/NP  दंष्ट्राभिः/NP विदार्यते/KP ।/PUNC 
 ततः/AVK तेन/SN विचिन्तितम्/KP –/PUNC “/PUNC अहो/ABS ,/PUNC वरम्/NV  स्वदेशः/NP  यत्र/A दुर्भिक्षे/NP अपि/A सुखेन/NP आस्थीयते/KP ,/PUNC न/AN च/APY कोपि/SN युद्धम्/NP  करोति/KP ।/PUNC तत्/SN एव/INTF स्वनगरम्/NP  व्रजामि/KP ”/PUNC इति/AUD अवधार्य/KKS स्वस्थानम्/NP  प्रतिजगाम/KP ।/PUNC अथ/A असौ/A देशान्तरात्समायातः/KN सर्वैः/SN अपि/A स्वजनैः/NP पृष्टः/KN -/PUNC ”/PUNC भोः/ASMB चित्राङ्ग/NS !/PUNC कथय/KP अस्माकम्/SN  देशान्तरवार्त्ताम्/NP ।/PUNC कीदृक्/AP देशः/NP ?/PUNC किम्/AP  चेष्टितम्/KN  लोकस्य/NP ?/PUNC कः/AP आहारः/NP ?/PUNC कः/AP च/APY व्यवहारः/NP तत्र/A इति/AUD ।/PUNC 
 सः/SN  आह/KP –/PUNC “/PUNC किम्/AP  कथ्यते/KP विदेशस्य/NP स्वरूपविषयः/NP ?/PUNC 
सुभिक्षाणि/NP विचित्राणि/NV शिथिलाः/NV पौरयोषितः/NP ।/PUNC 
एकः/SMK  दोषः/NP  विदेशस्य/NP स्वजातिः/NP यत्/SN विरुध्यते/KP ॥/PUNC 79/PUNC ॥/PUNC 
 सः/SN अपि/SN मकरः/NP तत्/SN उपदेशम्/ NP श्रुत्वा/KKS कृतमरणनिश्चयः/NV  वानरम्/NP अनुज्ञाप्य/KKS स्वाश्रयम्/NP  गतः/KN ।/PUNC तत्र/A च/APY तेन/SN स्वगृहप्रविष्टेन/NV आततायिना/NP सह/A विग्रहम्/NP  कृत्वा/KKS दृढसत्त्वावष्टम्भात्/NP च/APY तम्/SN  व्यापाद्य/KKS स्वाश्रयम्/NP च/APY लब्ध्वा/KKS सुखेन/NP चिरकालम्/NP अतिष्ठत्/KP ।/PUNC साधु/KV इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
अकृत्वा/KKS पौरुषम्/NP  या/SNV श्रीः/NP किम्/AP  तया/SN अपि/A सुभोग्यया/NV ।/PUNC 
जरद्गवः/NP समश्नाति/KP दैवात्/NP उपनतम्/KN  तृणम्/NP ॥/PUNC 80/PUNC ॥/PUNC 

इति/AUD श्रीविष्णुशर्मविरचिते/NV पञ्चतन्त्रे/NS लब्धप्रणाशम्/NS  नाम/A चतुर्थम्/SMKP  तन्त्रम्/NP ॥/PUNC 
      ****/PUNC 


(/PUNC पञ्चमं/SMKP तन्त्रम्/NP )/PUNC 
(/PUNC आमुख/NP )/PUNC 
क्षपणककथा/NP
अथ/A इदम्/SN आरभ्यते/KP अपरीक्षितकारकं/NS नाम/A पञ्चमं/SMKP तन्त्रम्/NP ।/PUNC यस्य/SN अयम्/SNV आदिमः/NV श्लोकः/NP -/PUNC 
 कुदृष्टं/NP कुपरिज्ञातं/NP कुश्रुतं/NP कुपरीक्षितम्/NP ।/PUNC 
 तत्/SSN  नरेण/NP न/ANकर्त्तव्यं/KN नापितेन/NP अत्र/A यत्/SSN कृतम्/KN ॥/PUNC 1/PUNC ॥/PUNC 
तद्यथा/A अनुश्रूयते/KP -/PUNC “/PUNC अस्ति/KP दाक्षिणात्ये/NV जनपदे/NP पाटलिपुत्रं/NS नाम/A नगरम्/NP ।/PUNC तत्र/A मणिभद्रो/NS नाम/A श्रेष्ठी/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तस्य/SN च/A धर्मार्थकाममोक्षकर्माणि/NP कुर्वतः/KNV विधिवशाद्/NV धनक्षयः/NP सञ्जातः/KN ।/PUNC ततः/AVK विभवक्षयाद्/NP अपमानपरम्परया/NP परं/NV विषादं/NP ।/PUNC अथ/A अन्यदा/A रात्रौ/NP सुप्तः/KN चिन्तितवान्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS, धिक्/BS इयम्/SN  दरिद्रता/NP ।/PUNC “/PUNC 
उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
शीलं/NP शौचम्/NP  क्षान्तिः/NP दाक्षिण्यम्/NP  मधुरता/NP कुले/NP जन्म/NP ।/PUNC 
न/ANविराजन्ति/KP हि/A सर्वे/SN ,/PUNC वित्तविहीनस्य/NV पुरुषस्य/NP ॥/PUNC 2/PUNC ॥/PUNC 
मानः/NP  वा/A दर्पः/NP  वा/A विज्ञानम्/NP  विभ्रमः/NP सुबुद्धिः/NP वा/A ।/PUNC 
सर्वम्/SN  प्रणश्यति/KP समम्/A ,/PUNC वित्तविहीनः/NV  यदा/A पुरुषः/NP ॥/PUNC 3/PUNC ॥/PUNC 
प्रतिदिवसम्/NP  याति/KP लयम्/NP  वसन्तवाताहृत/NV एव/A शिशिरश्रीः/NP ।/PUNC 
बुद्धिः/NP बुद्धिमताम्/NP अपि/A कुटुम्बभरचिन्तया/NP सततम्/KV ॥/PUNC 4/PUNC ॥/PUNC 
नश्यति/KP विपुलमतेः/NP अपि/A बुद्धिः/NP पुरुषस्य/NP मन्दविभवस्य/NV ।/PUNC 
घृतलवणतैलतण्डुलवस्त्रेन्धनचिन्तया/NP सततम्/KV ॥/PUNC 5 ॥/PUNC 
गगनम्/NP इव/ASD नष्टतारम्/NP  शुष्कम्/NP इव/ASD सरः/NP,/PUNC श्मशानम्/NP इव/ASD रौद्रम्/NP ।/PUNC 
प्रियदर्शनम्/NV अपि/A रूक्षम्/NP ,/PUNC भवति/KP गृहम्/NP  धनविहीनस्य/NP ॥/PUNC 6/PUNC ॥/PUNC 
न/ANविभाव्यन्ते/KP लघवः/NP  वित्तविहीनाः/NP पुरः/A अपि/A निवसन्तः/KN ।/PUNC 
सततम्/KV  जातविनष्टाः/KN पयसाम्/NP इव/ASD बुद्बुदाः/NP पयसि/NP ॥/PUNC 7/PUNC ॥/PUNC 
सुकुलम्/NP  कुशलम्/NP ,/PUNC सुजनम्/NP  विहाय/KKS ,/PUNC कुलकुशलशीलविकले/NP अपि/A ।/PUNC 
आढ्ये/NP,/PUNC कल्पतरौ/NP इव/ASD नित्यम्/KV  रज्यन्ति/KP जननिवहाः/NP ॥/PUNC 8/PUNC ॥/PUNC 
विफलम्/NV इह/A पूर्वसुकृतं/NP ,/PUNC विद्यावन्तः/NP अपि/A कुलसमुद्भूताः/NP ।/PUNC 
यस्य/SSN यदा/A विभवः/NP स्यात्/KP तस्य/SSN तदा/A दासताम्/NP  यान्ति/KP ॥/PUNC 9/PUNC ॥/PUNC 
लघुः/NV अयम्/SN आह/KP न/ANलोकः/NP कामम्/KV  गर्जन्तम्/KNV अपि/A पतिम्/NP  पयसाम्/NP ।/PUNC 
सर्वम्/SN अलज्जाकरम्/NV इह/A ,/PUNC यत्/SN यत्/DV कुर्वन्ति/KP परिपूर्णाः/NP ॥/PUNC 10/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/AVK  संप्रधार्य/KKS भूयः/A अपि/A अचिन्तयत्/KP –/PUNC ”/PUNC तत्/AVK अहम्/SN अनशनम्/NP  कृत्वा/KKS प्राणान्/NP उत्सृजामि/KP ।/PUNC  किम्/AP अनेन/SN नः/SN  व्यर्थजीवितव्यसनेन/NP ?/PUNC ”/PUNC एवम्/AVK  निश्चयम्/NP  कृत्वा/KKS सुप्तः/KN ।/PUNC  अथ/A तस्य/SN स्वप्ने/NP पद्मनिधिः/NS क्षपणकरूपः/NP  दर्शनम्/NP  दत्त्वा/KKS प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB श्रेष्ठिन्/NP !/PUNC मा/N त्वम्/SN  वैराग्यम्/NP  गच्छ/KP ।/PUNC  
अहम्/SN  पद्मनिधिः/NS तव/SN पूर्वपुरुषोपार्जितः/NV ।/PUNC  तत्/AVK अनेन/SN एव/A रूपेण/NP प्रातः/A त्वद्गृहम्/NP आगमिष्यामि/KP ।/PUNC  तत्/A त्वया/SN अहम्/SN  लगुडप्रहारेण/NP शिरसि/NP ताडनीयः/KN ,/PUNC येन/SN कनकमयः/NV  भूत्वा/KKS अक्षयः/NP  भवामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
अथ/A प्रातः/A प्रबुद्धः/KN सन्/KNV स्वप्नम्/NP  स्मरन्/KNV चिन्ताचक्रम्/NP आरुढः/KN तिष्ठति/KP -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC सत्यः/NP अयम्/SN  स्वप्नः/NP किम्/AP वा/A असत्यः/NP  भविष्यति/KP ,/PUNC न/ANज्ञायते/KP ।/PUNC  अथवा/A नूनम्/A मिथ्या/NP अनेन/SN भाव्यम्/NP ।/PUNC  यतः/AVK अहम्/SN अहर्निशम्/KV  केवलम्/A वित्तम्/NP एव/A चिन्तयामि/KP ।/PUNC  उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
व्याधितेन/NV सशोकेन/NV चिन्ताग्रस्तेन/NV जन्तुना/NP ।/PUNC 
कामार्तेन/NV अथ/A मत्तेन/NV दृष्टः/KN स्वप्नः/NP  निरर्थकः/NV ॥/PUNC 11/PUNC ॥/PUNC 
एतस्मिन्/SN अन्तरे/A तस्य/SN भार्यया/NP कश्चित्/SN नापितः/NP पादप्रक्षालनाय/NP आहूतः/KN ।/PUNC  अत्र/A अन्तरे/A च/APYयथानिर्दिष्टः/KN क्षपणकः/NS सहसा/KV प्रादुर्बभूव/KP ।/PUNC 
अथ/A सः/SN  तम्/SN आलोक्य/KKS प्रहृष्टमनाः/NV यथा/A आसन्नकाष्ठदण्डेन/NP तम्/SN  शिरसि/NP अताडयत्/KP ।/PUNC  सः/SN अपि/A सुवर्णमयः/NV  भूत्वा/KKS तत्क्षणात्/KV भूमौ/NP निपतितः/KP ।/PUNC 
अथ/A तम्/SN  सः/SN  श्रेष्ठी/NP निभृतम्/KN स्वगृहमध्ये/NP कृत्वा/KKS नापितम्/NP  सन्तोष्य/KKS प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC तत्/SN एतत्/SN धनम्/NP ,/PUNC वस्त्राणि/NP च/APYमया/SN दत्तानि/KN गृहाण/KP ।/PUNC  भद्र/NP !/PUNC पुनः/A कस्यचित्SN न/ANआख्येयः/KN अयम्/SNV  वृत्तान्तः/NP ।/PUNC “/PUNC 
 नापितः/NP अपि/A स्वगृहम्/NP  गत्वा/KKS व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC नूनम्/A एते/SN सर्वे/SN अपि/A नग्नकाः/NP शिरसि/NP ताडिताः/KN काञ्चनमयाः/NV भवन्ति/KP ।/PUNC  तत्/AVK अहम्/SN अपि/A प्रातः/A प्रभूतान्/KN आहूय/KKS लगुडैः/NP शिरसि/NP हन्मि/KP ,/PUNC येन/AVK प्रभूतम्/KN  हाटकम्/NP मे/SN भवति/KP ।/PUNC “/PUNC एवम्/AUD चिन्तयतः/KNV  महता/NV कष्टेन/NP निशा/NP व्यतिचक्राम/KP ।/PUNC  “/PUNC 
अथ/A प्रभाते/NP अभ्युत्थाय/KKS बृहल्लगुडम्/NP एकम्/SMKPY प्रगुणीकृत्य/KKS ,/PUNC क्षपणकविहारम्/NP  गत्वा/KKS जिनेन्द्रस्य/NP प्रदक्षिणत्रयम्/NP  विधाय/KKS ,/PUNC जानुभ्याम्/NP अवनिं/NP गत्वा/KKS वक्त्रद्वारन्यस्तोत्तरीयाञ्चलः/NV तारस्वरेण/KV इमम्/SNV  श्लोकम्/NP अपठत्/KP -/PUNC 
“/PUNC जयन्ति/KP ते/SNV जिनाः/NP येषाम्/SN केवलज्ञानशालिनाम्/NV ।/PUNC 
आजन्मनः/KV स्मरोत्पत्तौ/NP मानसेन/NP उषरायितम्/KN ॥/PUNC 12/PUNC ॥/PUNC 
अन्यत्/A च/AVK -/PUNC 
सा/SSN जिह्वा/NP या/SSN जिनम्/NP  स्तौति/KP तत्/SSN चित्तम्/NP  यत्/SSN जिने/NP रतम्/KN ।/PUNC 
तौ/SN एव/INTF च/APYकरौ/NP श्लाघ्यौ/NP यौ/SN तत्/AVK पूजाकरौ/NV करौ/NP ॥/PUNC 13/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
ध्यानव्याजम्/NP उपेत्य/KKS चिन्तयसि/KP काम्/SN उन्मील्य/KKS चक्षुः/NP क्षणम्/NP ,/PUNC 
पश्य/KP अनङ्गशरातुरम्NV  जनम्/NP इमम्/SN  त्राता/NP अपि/A नः/AN रक्षसि/KP ।/PUNC 
मिथ्याकारुणिकः/NP असि/KP निर्घृणतरः/NP त्वत्तः/SN कुतः/P अन्यः/SN पुमान्/NP,/PUNC 
सेर्ष्यम्/KV  मारवधूभिः/NP इति/AUD अभिहितः/KN  बौद्धः/NV  जिनः/NP पातु/KP वः/SN ॥/PUNC 14/SN ॥/PUNC 
एवम्/AUD संस्तुत्य/KKS ततः/A प्रधानक्षपणकम्/NP आसाद्य/KKS क्षितिनिहितजानुचरणः/NV ”/PUNC नमः/NP अस्तु/KP वन्दे/KP ”/PUNC इति/AUD उच्चार्य/KKS ,/PUNC लब्धधर्मवृद्ध्याशीर्वादः/NV ,/PUNC  सुखमालिकानुग्रहलब्धव्रतादेशः/NV ,/PUNC उत्तरीयनिबद्धग्रन्थिः/NP सप्रश्रयम्/KV इदम्/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC भगवन्/NP !/PUNC अद्य/A विहरणक्रिया/NP समस्तमुनिसमेतेन/KV अस्मद्गृहे/NP कर्तव्या/KN ।/PUNC “/PUNC  
 सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB श्रावक/NP !/PUNC धर्मज्ञः/NP अपि/A किम्/AP एवम्/A वदसि/KP ,/PUNC किम्/AP वयम्/SN  ब्राह्मणसमानाः/NP यत्/A आमन्त्रणम्/NP  करोषि/KP ?/PUNC वयम्/SN  सदैव/INTF तत्/SN कालपरिचर्यया/NP भ्रमन्तः/KNV  भक्तिभाजम्/NV  श्रावकम्/NP अवलोक्य/KKS तस्य/SN गृहे/NP गच्छामः/KP ।/PUNC  तेन/SN कृच्छ्रात्/KV अभ्यर्थिताः/KN तद्गृहे/NP प्राणधारणमात्राम्/NV अशनक्रियाम्/NP  कुर्मः/KP ।/PUNC  तत्/AVK गम्यताम्/KP ,/PUNC न/ANएवम्/A भूयः/A अपि/A वाच्यम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
तत्/AVK श्रुत्वा/KKS नापितः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC भगवन्/NP !/PUNC वेद्मि/KP अहम्/SN  युष्मद्धर्मम्/NP ।/PUNC  परम्/A भवतः/SN बहुश्रावकाः/NP  आह्वयन्ति/KP ।/PUNC साम्प्रतम्/A पुनः/A पुस्तकात्/NP छादनयोग्यानि/NV कर्पटानि/NP बहुमूल्यानि/NV प्रगुणीकृतानि/KP ।/PUNC तथा/A पुस्तकानाम्//NP लेखनार्थम्/NP  लेखकानाम्/NP च/APY वित्तम्/NP सञ्चितम्/KN आस्ते/KP ।/PUNC तत्/SN सर्वथा/A कालोचितम्/NP कार्यम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
 ततः/AVK नापितः/NP अपि/A स्वगृहम्/NP गतः/KN ।/PUNC  तत्र/A च/APY गत्वा/KKS खादिरमयम्/NV  लगुडम्/NP सज्जीकृत्य/KKS कपाटयुगलम्/NP द्वारि/NP समाधाय/KKS सार्द्धप्रहरैकसमये/NP भूयः/A अपि/A विहारद्वारम्/NP आश्रित्य/KKS सर्वान्/SN क्रमेण/NP निष्क्रामतः/KN  गुरुप्रार्थनया/NP स्वगृहम्/SN आनयत्/KP ।/PUNC  ते/SN अपि/A सर्वे/SN कर्पटवित्तलोभेन/NP भक्तियुक्तान्/NV अपि/A परिचितश्रावकान्/NP परित्यज्य/KKS प्रहृष्टमनसः/NV तस्य/SN पृष्ठतः/KV/?  ययुः/KP ।/PUNC  अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
एकाकी/NV गृहसन्त्यक्तः/KV पाणिपात्रः/NV  दिगम्बरः/NP ।/PUNC 
सः/SN अपि/A संवाह्यते/KP लोके/NP तृष्णया/NP पश्य/KP कौतुकम्/NP ॥/PUNC 15/PUNC ॥/PUNC 
जीर्य्यन्ते/KP जीर्यतः/KN केशाः/NP  दन्ताः/NP  जीर्यन्ति/KP जीर्यतः/KN ।/PUNC 
चक्षुः/NP श्रोत्रे/NP च/APYजीर्यते/KP ,/PUNC तृष्णैका/NP तरुणायते/KP ॥/PUNC 16/PUNC ॥/PUNC 
ततः/A परम्/SN  गृहमध्ये/NP तान्/SN प्रवेश्य/KKS ,/PUNC द्वारम्/NP  निभृतम्/KV  विधाय/KKS लगुडप्रहारैः/NP शिरसि/NP अताडयत्/KP ।/PUNC  ते/SN अपि/A ताड्यमाना/KNV एके/SN मृताः/NP ,/PUNC अन्ये/SN भिन्नमस्तकाः/NV फूत्कर्त्तुम्/KKS उपचक्रमिरे/KP ।/PUNC  अत्र/A अन्तरे/SN तम्/SN आक्रन्दम्/NP आकर्ण्य/KKS ,/PUNC कोटरक्षपालेन/NP अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC भो/ASMB भोः/DV !/PUNC किम्/AP अयम्/SN  कोलाहलः/NP  नगरमध्ये/NP ?/PUNC तत्/SN गम्यताम्/KP !/PUNC ”/PUNC 
ते/SN च/APYसर्वे/SN तत्/SN आदेशकारिणः/NP तत्/SN सहिता/NV वेगात्/NP तत्/SN गृहम्/NP  गताः/KN  यावत्/AVK पश्यन्ति/KP तावत्/AVK रुधिरप्लावितदेहाः/NV पलायमाना/KNV नग्नका/NP दृष्टाः/KN ।/PUNC  पृष्टाः/KN च/APYभोः/ASMB ,/PUNC किम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ते/SN प्रोचुः/KP यथावस्थितम्/NV  नापितवृत्तम्/NP ।/PUNC 
 तैः/SN अपि/A सः/SNV  नापितः/NP  बद्धः/KN  हतशेषैः/NP सह/A धर्माधिष्ठानम्/NP  नीतः/KN ।/PUNC  तैः/SN नापितः/NP पृष्टः/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC किम्/AP एतत्/SN भवता/SN कुकृत्यम्/NP अनुष्ठितम्/KN ?/PUNC ”/PUNC 
 सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC किम्/AP करोमि/KP ।/PUNC  मया/SN श्रेष्ठिमणिभद्रगृहे/NP दृष्टः/KN एवंविधः/NV  व्यतिकरः/NP ।/PUNC “/PUNC सः/SN अपि/A सर्वं/SN मणिभद्रवृत्तान्तम्/NP  यथादृष्टम्/KN अकयथत्/KP ।/PUNC  ततः/AVK श्रेष्ठिनम्/NP आहूय/KKS ,/PUNC ते/SN भणितवन्तः/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB श्रेष्ठिन्/NP !/PUNC किम्/AP त्वया/SN कश्चित्/SN क्षपणकः/NP  व्यापादितः/KN ?/PUNC ”/PUNC ततः/A तेन/SN अपि/A सर्वः/SN क्षपणकवृत्तान्तः/NP तेषाम्/SN  निवेदितः/KN ।/PUNC  अथ/A तैः/SN अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC शूलम्/NP आरोप्यताम्/KP असौ/A दुष्टात्मा/NV कुपरीक्षितकारी/NV नापितः/NP ।/PUNC “/PUNC 
 तथा/A अनुष्ठिते/KN तैः/SN अभिहितम्/KN -/PUNC 
“/PUNC कुदृष्टम्/NP  कुपरिज्ञातम्/NP  कुश्रुतं/NP कुपरीक्षितम्/NP ।/PUNC 
तत्/SN नरेण/NP न/ANकर्त्तव्यम्/KN ,/PUNC नापितेन/NP अत्र/A यत्/SN कृतम्/KN ”/PUNC ॥/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
“/PUNC अपरीक्ष्य/KKS न/ANकर्त्तव्यम्/KN  कर्त्तव्यम्/KN  सुपरीक्षितम्/NP ।/PUNC 
पश्चात्/A भवति/KP सन्तापः/NP  ब्राह्मण्या/NP नकुले/NP यथा/A ”/PUNC ॥/PUNC 17/PUNC ॥/PUNC 
मणिभद्रः/NP  आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC 
ते/SN धर्माधिकारिणः/NP प्रोचुः/KP -/PUNC 
1/PUNC :/PUNC ब्राह्मणीनकुलस्य/NP -/PUNC कथा/NP
कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP देवशर्मा/NS नाम/A ब्राह्मणः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC  तस्य/SN भार्या/NP प्रसूता/NV सुतम्/NP अजनयत्/KP ।/PUNC  तस्मिन्/SN एव/INTF दिने/NP नकुली/NP नकुलम्/NP  प्रसूय/KKS मृता/KN ।/PUNC  अथ/A सा/SN सुतवत्सला/NP दारकवत्/KV तम्/SN अपि/A नकुलम्/NP  स्तन्यदानाभ्यङ्गमर्दनादिभिः/NP पुपोष/KP ।/PUNC  परम्/A तस्य/SN न/ANविश्वसिति/KP ।/PUNC  अपत्यस्नेहस्य/NP सर्वस्नेहातिरिक्ततया/NP सततम्/KV एवम्/A आशङ्कते/KP यत्/AVK -/PUNC कदाचित्/A एष/SN स्वजातिदोषवशात्/NP अस्य/SN दारकस्य/NP विरुद्धम्/KV आचरिष्यति/KP इति/AUD ।/PUNC  
उक्तम्/KN  च/APY-/PUNC 
कुपुत्रः/NP अपि/A भवेत्/KP पुंसाम्/NP  हृदयानन्दकारकः/NV ।/PUNC 
दुर्विनीतः/NV कुरूपः/NV अपि/A ,/PUNC मूर्खः/NV अपि/A,/PUNC व्यसनी/NV खलः/NV ॥/PUNC 18/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A च/APYभाषते/KP लोकः/NP चन्दनम्/NP  किल/A शीतलम्/NV ।/PUNC 
पुत्रगात्रस्य/NP संस्पर्शः/NP चन्दनात्/NP अतिरिच्यते/KP ॥/PUNC 19/PUNC ॥/PUNC 
सौहृदस्य/NP न/ANवाञ्छन्ति/KP जनकस्य/KP हितस्य/NP च/APY।/PUNC 
लोकाः/NP प्रपालकस्य/NP अपि/A ,/PUNC यथा/A पुत्रस्य/NP बन्धनम्/NP ॥/PUNC 20/PUNC ॥/PUNC 
अथ/AVK सा/SN कदाचित्/A शय्यायाम्/NP  पुत्रम्/NP  शाययित्वा/KKS जलकुम्भम्/NP आदाय/KKS ,/PUNC पतिम्/NP उवाच/KP -/PUNC “/PUNC ब्राह्मण/NP !/PUNC जलार्थम्/NP अहम्/SN  तडागे/NP यास्यामि/KP ।/PUNC  त्वया/SN पुत्रः/NP अयम्/SN  नकुलात्/NP रक्षणीयः/KN ।/PUNC “/PUNC 
 अथ/AVK तस्याम्/SN  गतायाम्/KN ,/PUNC ब्राह्मणः/NP अपि/A शून्यम्/NV  गृहम्/NP  मुक्त्वा/KKS भिक्षार्थम्/NP  क्वचित्/A निर्गतः/KN ।/PUNC  अत्र/A अन्तरे/SN दैववशात्/NP कृष्णसर्पः/NP  बिलात्/NP निष्क्रान्तः/KN ।/PUNC  नकुलः/NP अपि/A तम्/SN  स्वभाववैरिणम्/NP  मत्वा/KKS ,/PUNC भ्रातृरक्षणार्थम्/NP  सर्पेण/NP सह/A युद्ध्वा/KKS ,/PUNC सर्पम्/NP  खण्डशः/KV कृतवान्/KN ।/PUNC  ततः/A  रुधिराप्लावितवदनःNV सानन्दम्/NV  स्वव्यापारप्रकाशनार्थम्/NP  मातुः/NP संमुखः/KV  गतः/KN ।/PUNC  माता/NP अपि/A तम्/SN  रुधिरक्लिन्नमुखम्/NV आलोक्य/KKS शङ्कितचित्ता/NV “/PUNC नूनम्/A अनेन/SN दुरात्मना/NP मे/SN दारकः/NP  भक्षितः/KN ”/PUNC इति/AUD विचिन्त्य/KKS कोपात्/NP तस्य/SN उपरि/A तम्/SN  जलकुम्भम्/NP  चिक्षेप/KP ।/PUNC 
एवम्/A सा/SN नकुलम्/NP  व्यापाद्य/KKS यावत्/AVK प्रलपन्ती/KNV गृहे/NP आगच्छति/KP तावत्/AVK सुतः/NP तथा/A एव/INTF सुप्तः/KN तिष्ठति/KP ।/PUNC  समीपे/NP कृष्णसर्पम्/NP  खण्डशः/KV कृतम्/KN अवलोक्य/KKS पुत्रवधशोकेन/NP आत्मशिरः/NP  वक्षःस्थलम्/NP  च/APYताडितुम्/KKS आरब्धा/KN ।/PUNC 
अत्र/A अन्तरे/A ब्राह्मणः/NP  गृहीतनिर्वापः/NV समायातः/KN  यावत्/AVK पश्यन्ति/KP ,/PUNC तावत्/AVK पुत्रशोकाभितप्ता/NV ब्राह्मणी/NP प्रलपति/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB भो/DV लोभात्मन्/NP !/PUNC लोभाभिभूतेन/NV त्वया/SN न/ANकृतम्/KN  मत्/SN वचः/NP ।/PUNC  तत्/SN अनुभव/KP साम्प्रतम्/A पुत्रमृत्युदुःखवृक्षफलम्/NP ।/PUNC “/PUNC अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
“/PUNC अतिलोभः/NP  न/ANकर्त्तव्यः/KN  लोभम्/NP  नैव/INTF परित्यजेत्/KP ।/PUNC 
अतिलोभाभिभूतस्य/NP चक्रम्/NP  भ्रमति/KP मस्तके/NP ”/PUNC ॥/PUNC 21/PUNC ॥/PUNC 
 ब्राह्मणः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सा/SN प्राह/ -/PUNC 
2/PUNC :/PUNC लोभाविष्टचक्रधर/NP -/PUNC कथा/NP
कस्मिश्चित्SN अधिष्ठाने/NP चत्वारः/SMKY  ब्राह्मणपुत्राः/NP परस्परम्/A मित्रताम्/NP  गता/KN वसन्ति/KP स्म/A ।/PUNC  ते/SN च/APYअपि/A दारिद्र्योपहताः/NV परस्परम्/A मन्त्रम्/NP  चक्रुः/KP -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC धिक्/BS इयम्/SN  दरिद्रता/NP ।/PUNC  उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
वरम्/NP  वनम्/NP  व्याघ्रगजादिसेवितम्/NV ,/PUNC 
जनेन/NP हीनम्/NV  बहुकण्टकावृतम्/NV ।/PUNC 
तृणानि/NP शय्या/NP परिधानवल्कलम्/NP ,/PUNC 
न/ANबन्धुमध्ये/NP धनहीनजीवितम्/NP ॥/PUNC 22/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
स्वामी/NP द्वेष्टि/KP सुसेवितः/KN अपि/A ,/PUNC सहसा/A प्रोज्झन्ति/KP सत्/NV बन्धवाः/NP ,/PUNC 
राजन्ते/KP न/ANगुणाः/NP त्यजन्ति/KP तनुजाः/NP ,/PUNC स्फारीभवन्ति/KP आपदः/NP ।/PUNC 
भार्या/NP साधु/NV सुवंशजा/NV अपि/A भजते/KP नः/SN ,/PUNC यान्ति/KP मित्राणि/NP च/APY,/PUNC 
अपि/A नृणाम्/NP ,/PUNC येषाम्/SN  न/ANहि/A स्यात्/KP धनम्/NP ॥/PUNC 23/PUNC ॥/PUNC 
शूरः/NV सुरूपः/NV सुभगः/NV च/APYवाग्मी/NV ,/PUNC 
शस्त्राणि/NP शास्त्राणि/NP विदांकरोतु/KP ।/PUNC 
अर्थम्/NP  विना/A न/ANएव/INTF यशः/NP च/APYमान/NP,/PUNC 
प्राप्नोति/KP मर्त्यः/NP अत्र/A मनुष्यलोके/NP ॥/PUNC 24/PUNC ॥/PUNC 
तानि/SN इन्द्रियाणि/NP अविकलानि/NV ,/PUNC तदेव/INTF नाम,/PUNC 
सा/SNV बुद्धिः/NP अप्रतिहता/NV ,/PUNC वचनम्/NP  तदेव/INTF ।/PUNC 
अर्थोष्मणा/NP विरहितः/NV पुरुषः/NP सः/SN  एव/INTF
बाह्यः/NV क्षणेन/NP भवति/KP इति/AUD विचित्रम्/NV एतत्/SN ॥/PUNC 25/PUNC ॥/PUNC 
तत्/SN गच्छामः/KP कुत्रचित्/A अर्थाय/NP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD संमन्त्र्य/KKS स्वदेशम्/NP  पुरम्/NP  च/APYस्वसुहृत्/NP सहितम्/NV  गृहम्/NP  च/APYपरित्यज्य/KKS ,/PUNC प्रस्थिताः/KN ।/PUNC  अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
सत्यम्/NP  परित्यजति/KP मुञ्चति/KP बन्धुवर्गम्/NP ,/PUNC 
शीघ्रम्/KV  विहाय/KKS जननीम्/NP अपि/A जन्मभूमिम्/NP ।/PUNC 
सन्त्यज्य/KKS ,/PUNC गच्छति/KP विदेशम्/NP अभि/A इष्टलोकम्/NP ,/PUNC 
चिन्ताकुलीकृतमतिः/NV पुरुषः/NP अत्र/A लोके/NP ॥/PUNC 26/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A क्रमेण/KV गच्छन्तः/KNV अवन्तीम्/NP  प्राप्ताः/KN ।/PUNC  तत्र/A सिप्राजले/NP कृतस्नानाः/NV महाकालम्/NP  प्रणम्य/KKS यावत्/AVK निर्गच्छन्ति/KP ,/PUNC तावद्/AVK भैरवानन्दः/NS  नाम/A योगी/NP संमुखः/KV  बभूव/KP ।/PUNC  ततः/YV तम्/SN  ब्राह्मणोचितविधिना/NP संभाव्य/KKS ,/PUNC तेन/SN एव/INTF सह/A तस्य/SN मठम्/NP  जग्मुः/KP ।/PUNC  अथ/A तेन/SN पृष्टाः/KN -/PUNC “/PUNC कुतः/AP भवन्तः/SN समायाताः/KN ?/PUNC क्व/P यास्यथ/KP ?/PUNC किम्/AP प्रयोजनम्/NP ?/PUNC ”/PUNC 
 ततः/AVK तैः/SN अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC वयम्/SN  सिद्धियात्रिकाः/NP ,/PUNC तत्र/A यास्यामः/KP  यत्र/A धनाप्तिः/NP मृत्युः/NP वा/A भविष्यति/KP इति/AUD एष/SN निश्चयः/NP ।/PUNC “/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
दुष्प्राप्याणि/NV बहूनि/SN च/APYलभ्यन्ते/KP वाञ्छितानि/NV द्रविणानि/NP ।/PUNC 
अवसरतुलिताभिरलम्/NV  तनुभिः/NP साहसिकपुरुषाणाम्/NP ॥/PUNC 27/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
पतति/KP कदाचित्/A नभसः/NP खाते/NP ,/PUNC पातालतः/NP अपि/A जलम्/NP इति/AUD ।/PUNC 
दैवम्/NP अचिन्त्यम्/NV  बलवद्/NV ,/PUNC बलवान्/NV ननु/A पुरुषकारः/NV अपि/A ॥/PUNC 28/PUNC ॥/PUNC 
अभिमतसिद्धिः/NP अशेषा/NV भवति/KP हि/A पुरुषस्य/NP पुरुषकारेण/NP ।/PUNC 
दैवम्/NP इति/AUD यत्/SN अपि/A कथयसि/KP पुरुषगुणः/NP सः/SN अपि/A अदृष्टाख्यः/NP ॥/PUNC 29/PUNC ॥/PUNC 
लोकात्/NP तृणम्/NP इव/ASD तुलयन्ति/KP साधु/NV साहसिकाः/NP ।/PUNC 
प्राणान्/NP अद्भुतम्/NV एतत्/SN चरितम्/NP ,/PUNC चरितम्/NP  हि/A उदाराणाम्/NP ॥/PUNC 30/PUNC ॥/PUNC 
क्लेशस्य/NP अङ्गम्/NP अदत्त्वा/KKS सुखम्/NP एव/INTF सुखानि/NP न/ANइह/SN लभ्यन्ते/KP ।/PUNC 
मधुभित्/NP मथनायः/NP तैः/SN आश्लिष्यति/KP बाहुभिः/NP लक्ष्मीम्/NP ॥/PUNC 31/PUNC ॥/PUNC 
तस्य/SN कथम्/AP न/ANचला/NV स्यात्/KP पत्नी/NP विष्णोः/NV नृसिंहकस्य/NV अपि/A ।/PUNC 
मासान्/SN चतुरः/NV  निद्राम्/NP  यः/SN सेवति/KP जलगतः/KV सततम्/KV ॥/PUNC 32/PUNC ॥/PUNC 
दुरधिगमः/NV परभागः/NP  यावत्/SN पुरुषेण/NP साहसः/NP  न/ANकृतम्/SN ।/PUNC 
जयति/KP तुलाम्/NP अधिरूढः/NV  भास्वान्/NP इह/SN जलदपटलानि/NP ॥/PUNC 33/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK कथ्यताम्/KP अस्माकम्/SN  कश्चिद्/SN धनोपायः/NP  विवरप्रदेशशाकिनीसाधनश्मशानसेवनमहामांसविक्रयसाधकवर्तिप्रभृतीनाम्/NP एकतमः/SN इति/AUD ।/PUNC 
अद्भुतशक्तिः/SN भवान्/SN श्रूयते/KP ।/PUNC  वयम्/SN अपि/A अतिसाहसिकाः/NV ।/PUNC  उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
महान्त/NP एव/INTF महताम्/NV अर्थम्/NP  साधयितुम्/KKS  क्षमाः/NV ।/PUNC 
ऋते/A समुद्रात्/NP अन्यः/SN कः/AP बिभर्त्ति/KP वडवानलम्/NP ?/PUNC ॥/PUNC 34/PUNC ॥/PUNC 
भैरवानन्दः/NS अपि/A तेषाम्/SN  सिद्ध्यर्थम्/NP  बहु/A उपायम्/NP  सिद्धवर्त्तिचतुष्टयम्/NP  कृत्वा/KKS अर्पयत्/KP ।/PUNC  आह/KP च/AVK -/PUNC “/PUNC गम्यताम्/KP  हिमालयदिशि/NP ।/PUNC  तत्र/A संप्राप्तानाम्/KN  यत्र/A वर्त्तिः/NP पतिष्यति/KP ,/PUNC तत्र/A निधानम्/NP असन्दिग्धम्/NV  प्राप्स्यथ/KP ।/PUNC  तत्र/A स्थानम्/NP  खनित्वा/KKS निधिम्/NP  गृहीत्वा/KKS व्याघुट्यताम्/KP ।/PUNC “/PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KN तेषाम्/SN  गच्छताम्/KP एकतमस्य/SN हस्तात्/NP वर्तिः/NP निपपात/KP ।/PUNC  अथ/v असौ/A यावत्तम्/SN  प्रदेशम्/NP  खनति/KP ,/PUNC तावत्/AVK ताम्रमयी/NV भूमिः/NP ।/PUNC  ततः/AVK तेन/SN अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC गृह्यताम्/KP  स्वेच्छया/KV ताम्रम्/NP ”/PUNC ।/PUNC  
अन्ये/SN प्रोचुः/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मूढ/NP !/PUNC किम्/AP अनेन/SN क्रियते/KP यत्/SN प्रभूतम्/KN अपि/A दारिद्र्यम्/NP  न/ANनाशयति/KP ।/PUNC  तत्/SN उत्तिष्ठ/KP ,/PUNC अग्रतः/SN  गच्छामः/KP ।/PUNC “/PUNC 
 सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC यान्तु/KP भवन्तः/SN ।/PUNC  न/ANअहम्/SN अग्रे/NP यास्यामि/KP ।/PUNC “/PUNC एवम्/A अभिधाय/KKS ताम्रम्/NP  यथेच्छया/KV गृहीत्वा/KKS प्रथमः/SMKP  निवृत्तः/KN ।/PUNC 
 ते/SN त्रयः/SMKY अपि/A अग्रे/NP प्रस्थिताः/KN ।/PUNC  अथ/A किञ्चित्/A मात्रम्/NV  गतस्य/KN अग्रेसरस्य/NP वर्तिः/NP निपपात/KP ।/PUNC 
सः/SN अपि/A यावत्/AVK खनितुम्/KKS आरब्धः/KN तावद्/AVK रूप्यमयी/NV क्षितिः/NP ।/PUNC  ततः/AVK प्रहर्षितः/KN प्राह/KP –/PUNC यत्/SN -/PUNC “/PUNC भो/ASMB भो/DV ,/PUNC गृह्यताम्/KP  यथेच्छया/KV रूप्यम्/NP ।/PUNC  न/ANअग्रे/NP गन्तव्यम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
 तौ/SN ऊचतुः/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC पृष्ठतः/NP ताम्रमयी/NV भूमिः/NP ,/PUNC अग्रतः/NP  रूप्यमयी/NV ।/PUNC  तत्/AVK नूनम्/A अग्रे/NP सुवर्णमयी/NV भविष्यति/KP ।/PUNC  किञ्च/A अनेन/SN प्रभूतेन/KN अपि/A दारिद्र्यनाशः/NP  न/ANभवति/KP ।/PUNC  तत्/AVK आवाम्/SN अग्रे/NP यास्यावः/KP ।/PUNC “/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS द्वौ/SMKY अपि/A अग्रे/NP प्रस्थितौ/KN ।/PUNC  सः/SN अपि/A स्वशक्त्या/NP रुप्यम्/SN आदाय/KKS निवृतः/KN ।/PUNC 
अथ/A तयोः/SN अपि/A गच्छतोः/KNV एकस्य/SN अग्रे/NP वर्तिः/NP पपात/KP ।/PUNC  सः/SN अपि/A प्रहृष्टः/KN  यावत्/AVK खनति/KP ,/PUNC तावत्/AVK सुवर्णभूमिम्/NP  दृष्ट्वा/KKS द्वितीयम्/SMKP  प्राह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC गृह्यताम्/KP स्वेच्छया/NP सुवर्णम्/NP ।/PUNC सुवर्णात्/NP अन्यत्/SN न/ANकिञ्चित्/A उत्तमम्/NP भविष्यति/KP ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN प्राह/KP -/PUNC “/PUNC मूढ/NP !/PUNC न/ANकिञ्चिद्/A वेत्सि/KP ।/PUNC प्राक्/A ताम्रम्/NP ,/PUNC ततः/A  रूप्यम्/NP ,/PUNC ततः/A सुवर्णम्/NP ।/PUNC  तत्/SN नूनम्/A अतः/SN परम्/A रत्नानि/NP भविष्यन्ति/KP ,/PUNC येषाम्/SN एकतमेन/NP अपि/A दारिद्र्यनाशः/NP  भवति/KP ।/PUNC  तत्/AVK उत्तिष्ठ/KP ,/PUNC अग्रे/NP गच्छावः/KP ।/PUNC  किम्/AP अनेन/SN भारभूतेन/NV अपि/A प्रभूतेन/NV ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN  प्राह/KP -/PUNC “/PUNC गच्छतु/KP भवान्/SN ।/PUNC  अहम्/SN अत्र/A स्थितः/KN त्वाम्/SN  प्रतिपालयिष्यामि/KP ।/PUNC “/PUNC तथा/A अनुष्ठिते/KN ,/PUNC सः/SN अपि/A गच्छन्/KNV एकाकी/NV ,/PUNC ग्रीष्मार्कप्रतापसन्तप्ततनुः/NV पिपासाकुलितः/NV सिद्धिमार्गच्युत/NV इतः/A च/APYइतः/A च/APYबभ्राम/KP ।/PUNC 
अथ/A भ्राम्यन्/KNV ,/PUNC स्थलोपरि/NP पुरुषैकम्/NP  रुधिरप्लावितगात्रम्/NV  भ्रमच्चक्रमस्तकम्/NV अपश्यत्/KP ।/PUNC  ततः/AVK  द्रुततरम्/KV  गत्वा/KKS तम्/SN अवोचत्/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC कः/P भवान्/SN ? किम्/AP एव/INTF चक्रेण/NP भ्रमता/KNV शिरसि/NP तिष्ठसि/KP ? तत्/AVK कथय/KP मे/SN यदि/A कुत्रचित्/A जलम्/NP अस्ति/KP ।/PUNC “/PUNC 
एवम्/A तस्य/SN प्रवदतः/KNV तत्/SN चक्रम्/NP  तत्क्षणात्/NP तस्य/SN शिरसः/NP ब्राह्मणमस्तके/NP चटितम्/KN ।/PUNC 
सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC किम्P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC मम/SN अपि/A एवम्/A एतत्/SN शिरसि/NP चटितम्/NP ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC तत्/A कथय/KP कदा/A एतत्/SN उत्तरिष्यति/KP ?/PUNC महती/NV मे/SN वेदना/NP वर्तते/KP ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN आह/KP -/PUNC “/PUNC यदा/A त्वम्/SN इव/ASD कश्चित्/SN धृतसिद्धवर्तिः/NP एवम्/A आगत्य/KKS ,/PUNC त्वाम्/SN आलापयिष्यति/KP तदा/A तस्य/SN मस्तकम्/NP  चटिष्यति/KP ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN  आह/KP -/PUNC “/PUNC कियत्/P कालः/NP तव/SN एव/INTF स्थितस्य/KN ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC साम्प्रतम्/A कः/AP राजा/NP धरणीतले/NP ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC वीणावत्सराजः/NS ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC अहम्/SN  तावत्/SN कालसङ्ख्याम्/NP  न/ANजानामि/KP ।/PUNC  परम्/A यदा/A रामः/NS  राजा/NP आसीत्/KP तदा/A अहम्/SN  दारिद्र्योपहतः/KN सिद्धवर्तिम्/NP आदाय/KKS अनेन/SN पथा/NP समायातः/KN ।/PUNC  ततः/AVK  मया/SN अन्यः/SN नरः/NP  मस्तकधृतचक्रः/NV  दृष्टः/KN ,/PUNC पृष्टः/KN च/APY।/PUNC  ततः/AVK च/AVK एतत्/SN जातम्/KN ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC कथम्/AP तव/SN एवं/A स्थितस्य/KN भोजनजलप्राप्तिः/NP आसीत्/KP ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC धनदेन/NS निधानहरणभयात्/NP सिद्धानाम्/NP एतत्/SN चक्रपतनरुपम्/NV  भयम्/NP  दर्शितम्/KN ।/PUNC  तेन/SN कश्चित्/SN अपि/A न/ANआगच्छति/KP ।/PUNC  यदि/A कश्चित्/SN आयाति/KP ,/PUNC सः/SN  क्षुत्पिपासानिद्रारहितः/NV ,/PUNC जरामरणवर्जितः/NV केवलम्/A एवम्/A वेदनाम्/NP अनुभवति/KP इति/AUD ।/PUNC  तत्/AVK आज्ञापय/KP माम्/SN  स्वगृहाय/NP ।/PUNC “/PUNC  इति/AUD उक्त्वा/KKS गतः/KN ।/PUNC 
तस्मिन्/SN चिरयति/KP सः/SN  सुवर्णसिद्धिः/NS तस्य/SN अन्वेषणपरः/NV तत्/SN पदपङ्क्त्या/NP यावत्/AVK किञ्चिद्/A वनान्तरम्/NP आगच्छति/KP ,/PUNC तावत्/AVK रुधिरप्लावितशरीरः/NV तीक्ष्णचक्रेण/NP मस्तके/NP भ्रमता/KNV सवेदनः/NV क्वणन्/KNV उपविष्टः/KN तिष्ठति/KP इति/AUD ददर्श/KP ।/PUNC  ततः/AVK तत्/SN समीपवर्तिना/NV भूत्वा/KKS ,/PUNC सर्वार्थम्/NP  पृष्टः/KN -/PUNC “/PUNC  भद्र/NP !/PUNC किम्/AP एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC 
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC विधिनियोगः/NP ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/AP तत्/SN ?/PUNC  कथय/KP कारणम्/NP एतस्य/SN ।/PUNC “/PUNC 
सः/SN अपि/A तेन/SN पृष्टः,/PUNC सर्वम्/SN  चक्रवृत्तान्तम्/NP अकथयत्/KP ।/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS असौ/A तम्/SN  विगर्हयन्/KNV इदम्/SN आह/KP  -/PUNC “/PUNC भो/ASMB !/PUNC निषिद्धः/KN त्वम्/SN मया/SN अनेकशः/KV न/AN श्रृणोषि/KP मे/SN वाक्यम्/NP ।/PUNC  तत्/A किम्/AP क्रियते/KP !/PUNC विद्यावान्/NV अपि/A,/PUNC कुलीनः/NV अपि/A,/PUNC बुद्धिरहितः/NV ।/PUNC  
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
“/PUNC वरम्/NP  बुद्धिः/NP न/ANसा/SN विद्या/NP विद्याया/NP बुद्धिः/NP उत्तमा/NV ।/PUNC 
बुद्धिहीना/NP विनश्यन्ति/KP ,/PUNC यथा/AVK ते/SN सिंहकारकाः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 35/PUNC ॥/PUNC 
चक्रधरः/NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC 
3/PUNC :/PUNC सिंहकारकमूर्खब्राह्मणकथा/NP
“/PUNC कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP चत्वारः/SMKY  ब्राह्मणपुत्राः/NP परस्परम्/NV  मित्रभावम्/NP उपगता/KN वसन्ति/KP स्म/A ।/PUNC  तेषाम्/SN  त्रयः/SMKY शास्त्रपारङ्गताः/NV ,/PUNC परन्तु/A बुद्धिरहिताः/NV ।/PUNC  एकः/SMK तु/A बुद्धिमान्/NV ,/PUNC केवलं/A शास्त्रपराङ्मुखः/NV ।/PUNC  अथ/A तैः/SN कदाचित्/A मित्रैः/NP मन्त्रितम्/KN  -/PUNC “/PUNC कः/AP गुणः/NP  विद्यायाः/NP ,/PUNC येन/SN देशान्तरम्/NP  गत्वा/KKS भूपतीन्/NP परितोष्य/KKS अर्थोपार्जना/NP न/ANक्रियते/KP ।/PUNC  तत्/AVK पूर्वदेशम्/NP  गच्छामः/KP ।/PUNC “/PUNC 
तथा/AVK अनुष्ठिते/KN किञ्चित्/A मार्गम्/NP  गत्वा/KKS ,/PUNC तेषाम्/AN  ज्येष्ठतरः/NP प्राह/KP -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC अस्माकम्/SN एकः/SMK चतुर्थः/SMKP  मूढः/NP ,/PUNC केवलम्/A बुद्धिमान्/NP ।/PUNC  न/ANच/AVK राजप्रतिग्रहः/NP  बुद्ध्या/NP लभ्यते/KP ,/PUNC विद्याम्/NP  विना/A ।/PUNC  तत्/AVK न/ANअस्मै/SN स्वोपार्जितम्/KN  दास्यामि/KP ।/PUNC  तद्/AVK गच्छतु/KP गृहम्/NP ।/PUNC “/PUNC  ततः/AVK  द्वितीयेन/SMK अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC सुबुद्धे/NP ! गच्छ/KP त्वम्/SN  स्वगृहम्/NP ,/PUNC यतः/A ते/SN विद्या/NP न/ANअस्ति/KP ।/PUNC “/PUNC  ततः/AVK तृतीयेन/SMKY अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC न/ANयुज्यते/KP एवम्/A कर्त्तुम्/KKS ,/PUNC यतः/A वयम्/SN  बाल्यात्/NP प्रभृति/A एकत्र/A क्रीडिताः/KN ।/PUNC  तत्/AVK आगच्छतु/KP महानुभावः/NP अस्मतदुपार्जितवित्तस्य/NP समभागी/NP भविष्यति/KP इति/AUD ।/PUNC  
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
किम्/AP तया/SN क्रियते/KP लक्ष्म्या/NP ,/PUNC या/SN वधूः/NP इव/ASD केवला/A ।/PUNC 
या/SN न/ANवेश्या/NP इव/ASD सामान्या/NV पथिकैः/NP उपभुज्यते/KP ॥/PUNC 36/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
अयम्/SN  निजः/SN परः/SN  वेति/A गणना/NP लघुचेतसाम्/NP ।/PUNC 
उदारचरितानाम्/NP तु/A वसुधा/NP एव/INTF कुटुम्बकम्/NP ॥/PUNC 37/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK आगच्छतु/KP एषः/SN अपि/A ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 तथा/A अनुष्ठिते/KN तैः/SN मार्गाश्रितैः/KN अटव्याम्/NP  कतिचित्/A अस्थीनि/NP दृष्टानि/KN ।/PUNC  ततः/AVK च/AVK एकेन/SN अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC अद्य/A विद्याप्रत्ययः/NP क्रियते/KP ।/PUNC  किञ्चित्/A एतत्/SN सत्त्वम्/NP  मृतम्/NV  तिष्ठति/KP ।/PUNC  तद्/AVK विद्याप्रभावेण/NP जीवनसहितम्/NP  कुर्मः/KP ।/PUNC  अहम्/SN अस्थिसञ्चयम्NP  करोमि/KP ।/PUNC “/PUNC  ततः/A च/AVK तेन/SN औत्सुक्यात्/NP अस्थिसञ्चयः/NP कृतः/KN ।/PUNC  द्वितीयेन/SMKP चर्ममांसरूधिरम्/NP  संयोजितम्/KN ।/PUNC  तृतीयः/SMK अपि/A यावत्/AVK जीवनम्/NP  सञ्चारयति/KP ,/PUNC तावत्/AVK सुबुद्धिना/NS निषिद्धः/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB तिष्ठतु/KP भवान्/SN ।/PUNC  एष/SN सिंहः/NP  निष्पाद्यते/KP ।/PUNC  यदि/A एनम्/SN  सजीवम्/NV  करिष्यति/KP ततः/A सर्वान्/SN अपि/A व्यापादयिष्यति/KP ।/PUNC “/PUNC इति/AUD तेन/SN अभिहितः/KN सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC धिक्/BS मूर्ख/NP !/PUNC न/ANअहम्/SN  विद्याया/NP विफलताम्/NP करोमि/KP ।/PUNC “/PUNC  ततः/AVK तेन/SN अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC तर्हि/A प्रतीक्षस्व/KP क्षणम्/NP ,/PUNC यावत्/SN अहम्/SN  वृक्षम्/NP आरोहामि/KP ।/PUNC “/PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KN ,/PUNC यावत्/AVK सजीवः/NP कृतः/KN तावत्/AVK ते/SN त्रयः/SMKY अपि/A सिंहेन/NP उत्थाय/KKS व्यापादिताः/KN ।/PUNC  सः/SN  च/AVK पुनः/A वृक्षात्/NP अवतीर्य/KKS ,/PUNC गृहम्/NP  गतः/KN ।/PUNC “/PUNC  अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC वरम्/NP  बुद्धिः/NP न/ANसा/SNV विद्या/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC  अतः/A परम्/A उक्तम्/KN  च/AVK सुवर्णसिद्धिना/NS -/PUNC 
“/PUNC अपि/A शास्त्रेषु/NP कुशला/NP लोकाचारविवर्जिताः/NP ।/PUNC 
सर्वे/SNV ते/SN हास्यतां/NP यान्ति/KP यथा/A ते/SN मूर्खपण्डिताः/NP “/PUNC ॥/PUNC 5.38/PUNC  ॥/PUNC 
चक्रधरः/NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
4/PUNC :/PUNC मूर्खपण्डितकथा/NP
कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP चत्वारः/SMKY  ब्राह्मणाः/NP परस्परम्/NV  मित्रत्वम्/NP आपन्ना/KN वसन्ति/KP स्म/A ।/PUNC  बालभावे/NP तेषाम्/SN  मतिः/NP अजायत/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB !/PUNC देशान्तरम्/NP  गत्वा/KKS ,/PUNC विद्याया/NP उपार्जनम्/NP  क्रियते/KP ।/PUNC “/PUNC  
 अथ/A अन्यस्मिन्SN दिवसे/NP ते/SN ब्राह्मणाः/NP परस्परम्/NV  निश्चयम्/NP  कृत्वा/KKS विद्योपार्जनार्थम्/NP  कान्यकुब्जे/NS गताः/KN ।/PUNC  तत्र/A च/AVK विद्यामठे/NP गत्वा/KKS पठन्ति/KP ।/PUNC  एवम्/A द्वादशाब्दानि/ यावत्/A एकचित्ततया/KV पठित्वा/KKS ,/PUNC विद्याकुशलाः/NV ते/SNV सर्वे/SN सञ्जाताः/KN ।/PUNC 
ततः/AVK तैः/SN चतुर्भिः/SMKY मिलित्वा/KKS उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC वयम्/SN  सर्वविद्यापारङ्गताः/ ।/PUNC  तत्/AVK उपाध्यायम्/NP उत्कलापयित्वा/KKS स्वदेशे/NP गच्छामः/KP ।/PUNC  
तथैव/A अनुष्ठीयताम्/KP इति/AUD उक्त्वा/KKS ब्राह्मणा/NP उपाध्यायम्/NP उत्कलापयित्वा/KKS ,/PUNC अनुज्ञाम्/NP  लब्ध्वा/KKS पुस्तकानि/NP नीत्वा/KKS ,/PUNC प्रचलिताः/KN ।/PUNC  
यावत्/A किञ्चित्/A मार्गम्/NP  यान्ति/KP ,/PUNC तावद्/A द्वौ/SMKY पन्थानौ/NP समायातौ/KN दृष्ट्वा/KKS उपविष्टाः/KN सर्वे/SN ।/PUNC  
तत्र/A एकः/SMK प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC केन/P मार्गेण/NP गच्छामः/KP ?/PUNC ”/PUNC 
 एतस्मिन्/SNV समये/NP तस्मिन्/SNV पत्तने/NP कश्चिद्/SN वणिक्पुत्रः/NP  मृतः/KN ।/PUNC  तस्य/SN दाहाय/NP महाजनः/NP  गतः/KN अभूत्/KP ।/PUNC  ततः/A चतुर्णाम्/SMKY  मध्यात्/NP एकेन/SN पुस्तकम्/NP अवलोकितम्/KN  -/PUNC “/PUNC महाजनः/NP  येन/SN गतः/KN सः/SN  पन्थाः/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC  तत्/AVK महाजनमार्गेण/NP गच्छामः/KP ।/PUNC 
 अथ/AVK ते/SN पण्डिता/NP यावत्/SN महाजनमेलापकेन/NP सह/UA यान्ति/KP ,/PUNC तावत्/A रासभः/NP कश्चित्/SN तत्र/A श्मशाने/NP दृष्टः/KN ।/PUNC  अथ/A द्वितीयेन/SMKP पुस्तकम्/NP उद्घाट्य/KKS अवलोकितम्/KN -/PUNC 
“/PUNC उत्सवे/NP व्यसने/NP प्राप्ते/KN दुर्भिक्षे/NP शत्रुसङ्कटे/NP ।/PUNC 
राजद्वारे/NP श्मशाने/NP च/APY यः/SSN तिष्ठति/KP सः/SSN  बान्धवः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 39/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK अहो/BS !/PUNC अयम्/SN अस्मदीयः/SN  बान्धवः/NP ।/PUNC  ततः/AVK कश्चित्/SN तस्य/SN ग्रीवायाम्/NP  लगति/KP ,/PUNC पादौ/NP प्रक्षालयति/KP ।/PUNC  
अथ/AVK यावत्/A ते/SNV पण्डिताः/NP दिशावलोकनम्/NP  कुर्वन्ति/KP तावत्/A कश्चित्/SNV उष्ट्रः/NP  दृष्टः/KN ।/PUNC  तैः/SN च/APYउक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC एतत्/SN किम्/AP ?/PUNC 
 तावत्/A तृतीयेन/SMKP पुस्तकम्/NP उद्घाट्य/KKS उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC धर्मस्य/NP त्वरिता/NV गतिः/NP ।/PUNC  तत्/AVK नूनम्/A एष/SN धर्मः/NP तावत/A ।/PUNC “/PUNC  चतुर्थेन/SMKP उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC इष्टम्/NP  धर्मेण/NP योजयेत्/KP ”/PUNC ।/PUNC  
 अथ/AVK तैः/SN च/APYरासभः/NP  उष्ट्रगीवायाम्/NP  बद्धः/KN ।/PUNC  तत्/SN तु/A केनचित्/SN तत्/SN स्वामिनः/NP रजकस्य/NV अग्रे/KV कथितम्/KN ।/PUNC  यावत्/A रजकः/NP तेषाम्/SN  मूर्खपण्डितानाम्/NP  प्रहारकरणाय/KKS समायातः/KN तावत्/A ते/SN प्रनष्टाः/KN ।/PUNC 
 ततः/AVK  यावत्/A अग्रे/A किञ्चित्/A स्तोकम्/A मार्गम्/NP  यान्ति/KP तावत्/A काचित्/SN नदी/NP समासादिता/KN ।/PUNC 
तस्य/SN जलमध्ये/NP पलाशपत्रम्/NP आयातम्/KN  दृष्ट्वा/KKS पण्डितेन/NP एकेन/SN उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC आगमिष्यति/KP यत्/SSN पत्रम्/NP  तत्/SSN अस्मान्/SN तारयिष्यति/KP ”/PUNC 
एतत्/SN कथयित्वा/KKS तत्/SNV पत्रस्य/NP उपरि/A पतितः/KN यावत्/A नद्या/NP नीयते/KP तावत्/A तम्/SN  नीयमानम्/KNV अवलोक्य/KKS अन्येन/SN पण्डितेन/NP केशान्तम्/NP  गृहीत्वा/KKS उक्तम्/KN -/PUNC 
“/PUNC सर्वनाशे/NP समुत्पन्ने/KN अर्द्धम्/NP  त्यजति/KP पण्डितः/NP ।/PUNC 
अर्द्धेन/NP कुरुते/KP कार्यम्/NP ,/PUNC सर्वनाशः/NP  हि/A दुःसहः/NV ”/PUNC ॥/PUNC 40/PUNC ॥/PUNC 
इति/AUD उक्त्वा/KKS तस्य/SN शिरच्छेदः/NP  विहितः/KN ।/PUNC 
अथ/A तैः/SN च/APYपश्चाद्/KV गत्वा/KKS कश्चित्/SN ग्रामः/NP  आसादितः/KN ।/PUNC  ते/SN अपि/A ग्रामीणैः/NP निमन्त्रिता/KN पृथग्/NV गृहेषु/NP नीताः/KN ।/PUNC  ततः/AVK ,/PUNC एकस्य/SN सूत्रिका/NP घृतखण्डसंयुता/NV भोजने/NP दत्ता/KN ।/PUNC 
ततः/AVK  विचिन्त्य/KKS पण्डितेन/NP उक्तम्/KN  यत्/AVK -/PUNC “/PUNC दीर्घसूत्री/NP विनश्यति/KP ”/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS भोजनम्/NP  परित्यज्य/KKS गतः/KN ।/PUNC  तथा/AVK द्वितीयस्य/SMKP मण्डका/NP दत्ताः/KN ,/PUNC तेन/SN अपि/A उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC अतिविस्तारविस्तीर्णं/NP तत्/SNV भवेत्/KP न/ANचिरायुषम्/NP ”/PUNC ।/PUNC  सः/SN  च/APYभोजनम्/NP  त्यक्त्वा/KKS गतः/KN ।/PUNC  
अथ/AVK तृतीयस्य/SMKP वटिका/NP भोजने/NP दत्ता/KN ।/PUNC  तत्र/A अपि/A तेन/SN पण्डितेन/NP उक्तम्/KN -/PUNC “/PUNC छिद्रेषु/NP अनर्था/NP बहुली/NV भवन्ति/KP ”/PUNC ।/PUNC  एवम्/A ते/SN त्रयः/SMKY अपि/A पण्डिताः/NP क्षुत्क्षामकण्ठाः/NV ,/PUNC लोकैः/NP हास्यमानाः/KNV ततः/AV स्थानात्/NP स्वदेशम्/NP  गताः/KN ”/PUNC ।/PUNC 
अथ/AVK सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC यत्/A त्वम्/SN लोकव्यवहारम्/NP अजानन्/KNV मया/SN वार्यमाणः/KNV अपि/A न/ANस्थितः/KN ततः/AVK ईदृशीम्/NV अवस्थाम्/NP उपगतः/KN ।/PUNC अतः/AVK अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC अपि/A शास्त्रेषु/NP कुशलाः/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS चक्रधरः/NS  आह/KP  -/PUNC अहो/BS ,/PUNC अकारणम्/NV एतत्/SNV यतः/AVK हि/A -/PUNC 
सुबुद्धयः/NP  विनश्यन्ति/KP दुष्टदैवेन/NP नाशिताः/KN ।/PUNC 
स्वल्पधीः/NP अपि/A तस्मिन्/SN तु/A कुले/NP नन्दति/KP सन्ततम्/KV ॥/PUNC 41/PUNC ॥/PUNC 
उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
अरक्षितं/KN तिष्ठति/KP दैवरक्षितम्/KN ,/PUNC सुरक्षितम्/KNV  दैवहतम्/KN  विनश्यति/KP ।/PUNC 
जीवति/KP अनाथः/NP अपि/A वने/NP विसर्जितः/KN ,/PUNC कृतप्रयत्नः/NP अपि/A गृहे/NP न/ANजीवति/KP ॥/PUNC 42/PUNC ॥/PUNC 
तथा/AVK च/APY-/PUNC 
शतबुद्धिः/NS शिरःस्थः/NV अयम्/SNV  लम्बते/KP च/APYसहस्रधीः/NS ।/PUNC 
एकबुद्धिः/NS अहम्/SNV  भद्रे/NP !/PUNC क्रीडामि/KP विमले/NV जले/NP ॥/PUNC 43/PUNC ॥/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ''/PUNC सः/SN  आह/KP  -/PUNC 
5/PUNC :/PUNC मत्स्यमण्डूककथा/NP
“/PUNC कस्मिंश्चित्/SNV जलाशये/NP शतबुद्धिः/NS सहस्रबुद्धिः/NP च/APY द्वौ/SMKY मत्स्यौ/NP निवसतः/KP स्म/A ।/PUNC अथ/AVK तयोः/SN एकबुद्धिः/NS नाम/A मण्डूकः/NP  मित्रताम्/NP  गतः/KN ।/PUNC  एवम्/A ते/SN त्रयः/SMKY अपि/A जलतीरे/NP वेलायाम्/NP  कञ्चित्/A कालम्/NP  सुभाषितगोष्ठीसुखम्/NP अनुभूय/KKS ,/PUNC भूयः/A अपि/A सलिलम्/NP  प्रविशन्ति/KP ।/PUNC  
अथ/AVK कदाचित्/A तेषाम्/SN  गोष्ठीगतानाम्/KN जालहस्ता/NV धीवराः/NP प्रभूतैः/NV मत्स्यैः/NP व्यापादितः/KN मस्तके/NP विधृतैः/NV अस्तमनवेलायाम्/NP  तस्मिन्/SN जलाशये/NP समायाताः/KN ।/PUNC ततः/AVK सलिलाशयम्/NP  दृष्ट्वा/KKS मिथः/A प्रोचुः/KP -/PUNC “/PUNC अहो/BS !/PUNC बहुमत्स्यः/NV अयम्/SNV  ह्रदः/NP  दृश्यते/KP ,/PUNC स्वल्पसलिलः/NV च/APY।/PUNC  तत्/AVK प्रभाते/NP अत्र/A आगमिष्यामः/KP ”/PUNC ।/PUNC एवम्/A उक्त्वा/KKS स्वगृहम्/NP गताः/KN ।/PUNC 
 मत्स्याः/NP च/APYविषण्णवदना/NV मिथः/KV मन्त्रम्/NP  चक्रुः/KP ।/PUNC ततः/AVK  मण्डूकः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC शतबुद्धे/NP !/PUNC श्रुतम्/KN  धीवरोक्तम्/KN  भवता/SN ?/PUNC  तत्/AVK किम्/AP अत्र/A युज्यते/KP कर्त्तुम्/KKS ,/PUNC पलायनम्/NP अवष्टम्भः/NP वा/A ?/PUNC यत्/SN कर्त्तुम्/KKS युक्तम्/KN भवति/KP ,/PUNC तत्/AVK आदिश्यताम्/KP अद्य/A ”/PUNC ।/PUNC  
तत्/SN श्रुत्वा/KKS सहस्रबुद्धिः/NS प्रहस्य/KKS आह/KP  -/PUNC “/PUNC भो/ASMB !/PUNC मित्र/NP मा/N भैषीः/KP ,/PUNC तयोः/SN वचनश्रवणमात्रात्/NP एव/INTF भयम्/NP  न/ANकार्यम्/KN ?/PUNC  न/ANभेतव्यम्/KN ।/PUNC  उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
सर्पाणाम्/NP च/APYखलानाम्/NP च/APYसर्वेषाम्/SNV  दुष्टचेतसाम्/NP ।/PUNC 
अभिप्राया/NP न/ANसिध्यन्ति/KP तेन/SN इदम्/SN  वर्तते/KP जगत्/NP ॥/PUNC 44/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK तावत्/A तेषाम्/SN आगमनम्/NP अपि/A न/ANसम्पत्स्यते/KP ।/PUNC  भविष्यति/KP वा/A तर्हि/A त्वाम्/SN  बुद्धिप्रभावेण/NV आत्मसहितम्/NP रक्षयिष्यामि/KP ।/PUNC यतः/A अनेकाम्/SN  सलिलचर्याम्/NP अहम्/SN जानामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 तत्/SN आकर्ण्य/KKS शतबुद्धिः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB युक्तम्/KN उक्तम्/KN भवता/SN ।/PUNC  सहस्रबुद्धिः/NS एव/INTF भवान्/SN ।/PUNC  अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
बुद्धेः/NP बुद्धिमताम्/NP  लोके/NP न/ANअस्ति/KP अगम्यम्/NP  हि/A किञ्चन/A ।/PUNC 
बुद्ध्या/NP यतः/A हता/KN नन्दाः/NP चाणक्येन/NP आसिपाणयः/NV ॥/PUNC 45/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
न/ANयत्र/A अस्ति/KP गतिः/NP वायः/NP  रश्मीनाम्/NP  च/APYविवस्वतः/NP ।/PUNC 
तत्र/A अपि/A प्रविशति/KP आशु/NV बुद्धिः/NP बुद्धिमताम्/NP  सदा/A ॥/PUNC 46/PUNC ॥/PUNC 
ततः/AVK  वचनश्रवणमात्रात्/NP अपि/A पितृपर्यायागतम्/NV  जन्मस्थानम्/NP  त्यक्तुम्/KKS  न/ANशक्यते/KP ।/PUNC  
उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
न/ANतत्/SN स्वर्गे/NP अपि/A सौख्यम्/NP  स्यात्/KP दिव्यस्पर्शन/NV शोभने/NV ।/PUNC 
कुस्थाने/NP अपि/A भवेत्/KP पुंसाम्/NP  जन्मनः/NP  यत्र/A सम्भवः/NP ॥/PUNC 47/PUNC ॥/PUNC 
तत्र/A कदाचित्/A अपि/A गन्तव्यम्/KN ।/PUNC  अहम्/SN  त्वाम्/SN  बुद्धिप्रभावेण/KV रक्षयिष्यामि/KP ।/PUNC  
मण्डूकः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भद्रौ/NP !/PUNC मम/SN तावत्/A एका/SMKY एव/INTF बुद्धिः/NP पलायनपरा/NV ।/PUNC  तत्/AVK अहम्/SN अन्यम्/SN  जलाशयम्/NP अद्य/A एव/INTF सभार्यः/NV  यास्यामि/KP ”/PUNC ।/PUNC  एवम्/A उक्त्वा/KKS सः/SN  मण्डूकः/NP  रात्रौ/NP एव/INTF अन्यजलाशयम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
 धीवरैः/NP अपि/A प्रभाते/NP आगत्य/KKS ,/PUNC जघन्यमध्यमोत्तमजलचराः/NP मत्स्यकूर्ममण्डूककर्कटादयः/NP  गृहीताः/KN ।/PUNC  तौ/SN अपि/A शतबुद्धिसहस्रबुद्धी/NS सभार्यौ/NV पलायमानौ/NV चिरम्/KV आत्मानम्/SN  गतिविशेषविज्ञानैः/NP कुटिलचारेण/NP रक्षन्तौ/KP अपि/A जाले/NP निपतितौ/KP ,/PUNC व्यापादितौ/KP च/APY।/PUNC 
अथ/AVK अपराह्णसमये/NP प्रहृष्टाः/KN ते/SN धीवराः/NP स्वगृहम्/NP  प्रति/AUP प्रस्थिताः/KN ।/PUNC  गुरुत्वात्/KN च/APYएकेन/SN शतबुद्धिः/NS स्कन्धे/NP कृतः/KN ।/PUNC  सहस्रबुद्धिः/NS प्रलम्बमानः/KKS  नीयते/KP ।/PUNC  ततः/AVK च/APYवापीकण्ठोपगतेन/NV मण्डूकेन/NP तौ/SN तथा/A नीयमानौ/KKS दृष्ट्वा/KKS अभिहिता/KN स्वपत्नी/NP -/PUNC “/PUNC प्रिये/NP !/PUNC पश्य/KP पश्य/DV -/PUNC 
शतबुद्धिः/NS शिरस्थः/NV अयम्/SNV ,/PUNC लम्बते/KP च/APYसहस्रधीः/NS ।/PUNC 
एकबुद्धिः/NS अहम्/SNV  भद्रे/NP !/PUNC क्रीडामि/KP विमले/NV जले/NP ”/PUNC ॥/PUNC 
अतः/A च/AVK “/PUNC वरम्/NV  बुद्धिः/NP न/ANसा/SN विद्या/NP ”/PUNC यत्/AVK भवता/SN उक्तम्/KN  तत्र/A इयम्/SNV  मे/SN मतिः/NP यत्/AVK ,/PUNC न/ANएकान्तेन/NP बुद्धिः/NP अपि/A प्रमाणम्/NP ”/PUNC ।/PUNC  
सुवर्णसिद्धिः/NS प्राह/KP -/PUNC “/PUNC यद्यपि/A एतत्/SN अस्ति/KP ,/PUNC तथापि/A मित्रवचनम्/NP न/ANलंघनीयम्/NV ।/PUNC  परम्/A किम्/AP क्रियते/KP ,/PUNC निवारितः/KN अपि/A मया/SN न/ANस्थितः/KN असि/KP ,/PUNC अतिलौल्यात्/NP विद्याहङ्कारात्/NP च/APY।/PUNC  
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
साधु/NV मातुल/NP !/PUNC गीतेन/NP,/PUNC मया/SN प्रोक्तः/KN अपि/A न/ANस्थितः/KN ।/PUNC 
अपूर्वः/NV अयम्/SN  मणिः/NP बद्धः/KN सम्प्राप्तम्/KN  गीतलक्षणम्/NP ॥/PUNC 48/PUNC ॥/PUNC 
चक्रधरः/NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
6/PUNC :/PUNC रासभशृगालकथा/NP
“/PUNC कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP उद्धतः/NS  नाम/A गर्दभः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC  सः/SN सदैव/INTF रजकगृहे/NP भारोद्वहनम्/NP  कृत्वा/KKS रात्रौ/NP स्वेच्छया/KV पर्यटति/KP ।/PUNC  ततः/A प्रत्युषे/NP बन्धनभयात्/NP स्वयमेव/INTF रजकगृहम्/NP आयाति/KP ।/PUNC  रजकः/NP अपि/A ततः/A तम्/SN  बन्धनेन/NP नियुनक्ति/KP ।/PUNC 
 अथ/AVK तस्य/SN रात्रौ/NP पर्यटतः/KNV ,/PUNC कदाचित्/A शृगालेन/NP सह/UA मैत्री/NP संजाता/KN ।/PUNC  सः/SN  च/APYपीवरत्वात्/NP वृतिभङ्गम्/NP  कृत्वा/KKS कर्कटिकाक्षेत्रे/NP शृगालसहितः/KV प्रविशति/KP ।/PUNC  एवम्/A तौ/SN यदृच्छया/KV चिर्भटिकाभक्षणम्/NP  कृत्वा/KKS ,/PUNC प्रत्यहम्/NP  प्रत्युषे/NP स्वस्वस्थानम्/NP  व्रजतः/KP ।/PUNC 
अथ/AVK कदाचित्/A तेन/SN मदोद्धतेन/NV रासभेन/NP क्षेत्रमध्यस्थितेन/NV शृगालः/NP अभिहितः/KN -/PUNC “/PUNC भो/ASMB भगिनीसुत/NP !/PUNC पश्य/KP पश्य/DV ,/PUNC अतीव/NV निर्मला/NV रजनी/NP ,/PUNC तत्/AVK अहम्/SN  गीतम्/NP  करिष्यामि/KP ।/PUNC  तत्/AVK कथय/KP कतमेन/SN रागेण/NP करोमि/KP ?/PUNC  
सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC माम/SN !/PUNC किम्/AP अनेन/SN वृथा/NV अनर्थप्रचालनेन/NP ?/PUNC  यतः/AVK चौरकर्मप्रवृत्तौ/NV आवाम्/SN ,/PUNC निभृतैः/NV च/APYचौरजारैः/NP अत्र/A स्थातव्यम्/KN ।/PUNC  उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
कासयुक्तः/NP त्यजेत्/KP चौर्यम्/NP  निद्रालुः/NP चेत्/A सः/SN  पुंश्चलीम्/NP ।/PUNC 
जिह्वालौल्यम्/NP  रुजाक्रान्तः/NP  जीवितम्/NP  यः/SN अत्र/A वाञ्छति/KP ॥/PUNC 49/PUNC ॥/PUNC 
अपरम्/AVK  त्वदीयम्/SN  गीतम्/NP  न/ANमधुरस्वरम्/NV ,/PUNC शङ्खशब्दानुकार/NV दूरात्/KV अपि/A श्रूयते/KP ।/PUNC  तत्/AVK अत्र/A क्षेत्रे/NP रक्षापुरुषाः/NP सुप्ताः/KN सन्ति/KP ।/PUNC  ते/SN उत्थाय/KKS वधम्/NP  बन्धनम्/NP  वा/A करिष्यन्ति/KP ।/PUNC  तत्/AVK भक्षय/KP तावत्/A अमृतमयीः/NV चिर्भटीः/NP ।/PUNC  मा/N त्वम्/SN अत्र/A गीतव्यापारपरः/NV  भव/KP ।/PUNC “/PUNC 
 तत्/AVK श्रुत्वा/KKS रासभः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC वनाश्रयत्वात्/NP त्वम्/SN  गीतरसम्/NP  न/ANवेत्सि/KP ,/PUNC तेन/SN एतत्/SN ब्रवीषि/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
“/PUNC शरत्ज्योत्स्ना/NP आह/KP ते/SN दूरम्/A तमसि/NP प्रियसन्निधौ/NP ।/PUNC 
धन्यानाम्/NP  विशति/KP श्रोत्रे/NP गीतझङ्कारजा/NV सुधा/NP ”/PUNC ॥/PUNC 50/PUNC ॥/PUNC 
शृगालः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC माम/SN !/PUNC अस्ति/KP एतत्/SN ,/PUNC परं/A न/ANवेत्सि/KP त्वम्/SN  गीतम्/NP ,/PUNC केवलम्/A उन्नत्/KV असि/KP ।/PUNC  तत्/AVK किम्/AP तेन/SN स्वार्थभ्रंशकेन/NP ?/PUNC ”/PUNC 
 रासभः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC धिक/BS धिक्/DV मूर्ख/NP !/PUNC किम्/AP अहम्/SN  न/ANजानामि/KP गीतम्/NP ?/PUNC  तत्/AVK यथा/A तस्य/SN भेदाः/NP शृणु/KP -/PUNC 
सप्त/SMKY स्वराः/NP त्रयः/SMKY  ग्रामा/NP मूर्च्छनाः/NP च/APYएकविंशतिः/SMY ।/PUNC 
तालाः/NP तु/A एकोनपञ्चाशत्/SMKY तिस्रः/SMKY  मात्रा/NP लयाः/NP त्रयः/SMKY ॥/PUNC 51/PUNC ॥/PUNC 
स्थानत्रयम्/NP  यतिनाम्/NP  च/APYषडास्यानि/NP रसा/NP नव/SMKPY ।/PUNC 
रागाः/NP षट़त्रिंशतिः/SMKY भावाः/NP चत्वारिंशत्/SMKY ततः/A स्मृताः/KN ॥/PUNC 52/PUNC ॥/PUNC 
पञ्चाशी/SMKPY इति/AUD अधिकम्/NV हि/A एतत्/SN गीताङ्गानाम्/NP  शतम्/SMKY स्मृतम्/KN ।/PUNC 
स्वयमेव/INTF पुरा/A प्रोक्तम्/KN  भरतेन/NS श्रुतेः/NP परम्/A ॥/PUNC 53/PUNC ॥/PUNC 
न/ANअन्यत्/A गीतात्/NP प्रियम्/NP  लोके/NP देवानाम्/NP अपि/A दृश्यते/KP ।/PUNC 
शुष्कस्नायुस्वराह्लादात्/NP त्रि/SMKY अक्षम्/NP  जग्राह/KP रावणः/NS ॥/PUNC 54/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK कथम्/AP भगिनीसुत/NP !/PUNC माम्/SN अनभिज्ञम्/NV  वदन्/KNV विनारयसि/KP ?/PUNC  शृगालः/NP  आह/KP  -/PUNC माम/SN !/PUNC यदि/A एवम्/A ,/PUNC तत्/AVK अहम्/SN  तावत्/A वृतेः/NP द्वारस्थितः/NV क्षेत्रपालम्/NP अवलोकयामि/KP,/PUNC त्वम्/SN  पुनः/A स्वेच्छया/KV गीतम्/NP  कुरु/KP ”/PUNC ।/PUNC  
तथा/AVK अनुष्ठिते/KN रासभरटनम्/NP आकर्ण्य/KKS क्षेत्रपः/NP क्रोधात्/NP दन्तान्/NP घर्षयन्/KNV प्रधावितः/KN ।/PUNC  यावत्/A रासभः/NP  दृष्टः/KN तावत्/A लगुडप्रहारैः/NP तथा/A हतः/KN ,/PUNC यथा/A प्रताडितः/KN  भूपृष्ठे/NP पतितः/KN ।/PUNC  ततः/AVK च/AVK सच्छिद्रम्/NV उलूखलम्/NP  तस्य/SN गले/NP बद्ध्वा/KKS क्षेत्रपालः/NP प्रसुप्तः/KN ।/PUNC  रासभः/NP अपि/A स्वजातिस्वभावात्/NP गतवेदनः/NV क्षणेन/NP अभ्युत्थितः/KN ।/PUNC 
 उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
“/PUNC सारमेयस्य/NP च/APYअश्वस्य/NP रासभस्य/NP विशेषतः/NV ।/PUNC 
मुहूर्त्तात्/NP परतः/A न/ANस्यात्/KP प्रहारजनिता/NV व्यथा/NP ”/PUNC ॥/PUNC 55/PUNC ॥/PUNC 
ततः/AVK तम्/SN एव/INTF उदूखलम्/NP आदाय/KKS वृत्तिम्/NP  चूणयित्वा/KKS पलायितुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC  अत्र/A अन्तरे/A शृगालः/NP अपि/A दूरात्/KV एव/INTF तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS सस्मितम्/KV आह/KP  -/PUNC 
“/PUNC साधु/NV मातुल/NP !/PUNC गीतेन/NP ,/PUNC मया/SN प्रोक्तः/KN अपि/A न/ANस्थितः/KN ।/PUNC 
अपूर्वः/NV अयम्/SNV  मणिः/NP बद्धः/KN सम्प्राप्तम्/KN  गीतलक्षणम्/NP ।/PUNC 
तत्/SN भवान्/SN अपि/A मया/SN वार्यमाणः/KNV अपि/A न/ANस्थितः/KN “/PUNC  ।/PUNC  
तत्/SN श्रुत्वा/KKS चक्रधरः/NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP सत्यम्/NP एतत्/SN ।/PUNC  अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
“/PUNC यस्य/SN नास्ति/KP स्वयंप्रज्ञा/NP मित्रोक्तम्/NP  न/NP करोति/KP यः/SN ।/PUNC 
सः/SN  एव/INTF निधनम्/NP  याति/KP यथा/A मन्थरकौलिकः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 56/PUNC ॥/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
7/PUNC :/PUNC मन्थरकौलिककथा/NP
“/PUNC कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP मन्थरकः/NS  नाम/A कौलिकः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC  तस्य/SN कदाचित्/A पटकर्माणि/NP कुर्वतः/KNV सर्वपटकर्मकाष्ठानि/NP भग्नानि/NV ।/PUNC  ततः/A सः/SN  कुठारम्/NP आदाय/KKS वने/NP काष्ठार्थम्/NP  गतः/KN ।/PUNC  सः/SN  च/APYसमुद्रतटे/NP यावत्/A भ्रमन्/KNV प्रयातः/KN ,/PUNC तावत्/A तत्र/A शिंशपापादपः/NP तेन/SN दृष्टः/KN ।/PUNC  ततः/A चिन्ततवान्/KN -/PUNC “/PUNC महान्/NV अयम्/SNV  वृक्षः/NP  दृश्यते/KP ।/PUNC  तत्/AVK अनेन/SN कर्त्तितेन/KN प्रभूतानि/NV पटकर्मोपकरणानि/NP भविष्यन्ति/KP ”/PUNC ।/PUNC  इति/AUD अवधार्य/KKS तस्य/SN उपरि/A कुठारम्/NP उत्/A क्षिप्तवान्/KN ।/PUNC 
 अथ/AVK तत्र/A वृक्षे/NP कश्चित्/SN व्यन्तरः/NP समाश्रित/KNV आसीत्/KP ।/PUNC  अथ/AVK तेन/SN अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC मदाश्रयः/NV अयम्/SNV  पादपः/NP सर्वथा/A रक्षणीयः/KN ।/PUNC  यतः/A अहम्/SN अत्र/A महासौख्येन/KV तिष्ठामि/KP ,/PUNC समुद्रकल्लोलस्पर्शनात्/KV शीतवायुना/NP आप्यायितः/KN ”/PUNC ।/PUNC  कौलिकः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP अहम्/SN  करोमि/KP ,/PUNC दारुसामग्रीम्/NP  विना/A मे/SN कुटुम्बम्/NP  बुभुक्षया/NP पीड्यते/KP ।/PUNC  तस्मात्/AVK अन्यत्र/A शीघ्रम्/KV  गम्यताम्/KP ।/PUNC  अहम्/SN एनम्/SN  कर्त्तयिष्यामि/KP ”/PUNC ।/PUNC  
व्यन्तरः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC तुष्टः/KN तव/SN अहम्/SN ।/PUNC  तत्/A प्रार्थ्यताम्/KP अभीष्टम्/NP किञ्चित्/A ।/PUNC  रक्ष/KP एनम्/SN  पादपम्/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC  
कौलिक/NP आह/KP  -/PUNC “/PUNC यदि/A एवम्/A तत्/A अहम्/SN  स्वगृहम्/NP  गत्वा/KKS स्वमित्रम्/NP ,/PUNC स्वभार्याम्/NP  च/APYपृष्ट्वा/KKS आगमिष्यामि/KP ,/PUNC ततः/A त्वया/SN देयम्/KN ”/PUNC ।/PUNC 
अथ/AVK “/PUNC तथा”/PUNC इति/AUD व्यन्तरेण/NP प्रतिज्ञाते/KN ,/PUNC सः/SN  कौलिकः/NP प्रहृष्टः/KN स्वगृहम्/NP  प्रति/AUP निवृत्तः/KN यावत्/A अग्रे/NP गच्छति/KP ,/PUNC 
तावत्/A ग्रामप्रवेशे/NP निजसुहृदम्/NV  नापितम्/NP अपश्यत्/KP ।/PUNC ततः/AVK तस्य/SN व्यन्तरवाक्यम्/NP  निवेदयामास/KP यत्/A -/PUNC 
‘अहो/BS मित्र/NP !/PUNC मम/SN कश्चित्/SN व्यन्तरः/NP सिद्धः/NV ।/PUNC तत्/AVK कथय/KP किम्/AP प्रार्थये/KP ?/PUNC '/PUNC 
अहम्/SN  त्वाम्/SN प्रष्टुम्/KKS आगतः/KN ”/PUNC ।/PUNC 
नापितः/KN  आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC यदि/A एवम्/A तत्/AVK राज्यम्/NP प्रार्थयस्व/KP ,/PUNC येन/SN त्वम्/SN  राजा/NP भवसि/KP ,/PUNC अहम्/SN  त्वत्/SN मन्त्री/NP ।/PUNC  द्वौ/SMKY अपि/A इह/A सुखम्/NP अनुभूय/KKS ,/PUNC परलोकसुखम्/NP अनुभवावः/KP ।/PUNC 
उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
राजा/NP दानपरः/NV नित्यम्/NV इह/A कीर्त्तिम्/NP अवाप्य/KKS च/APY ।/PUNC 
तत्/SN प्रभावात्/NP पुनः/A स्वर्गम्/NP  स्पर्धते/KP त्रिदशैः/NP सह/AUP॥/PUNC 58/PUNC ॥/PUNC 
कौलिकः/NP आह/KP  –/PUNC “/PUNC अस्ति/KP एतत्/SN तथापि/A गृहिणीम्/NP पृच्छामि/KP ”/PUNC ।/PUNC  
सः/SN आह/KP –/PUNC “/PUNC भद्र/NV !/PUNC शास्त्रविरुद्धम्/NP एतत्/SN यत्/A स्त्रिया/NP सह/AUP मन्त्रः/NP ।/PUNC यतः/AVK ताः/SN स्वल्पमतयः/NV भवन्ति/KP ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
भोजनाच्छादने/NP दद्यात्/KP ऋतुकाले/NP च/APYसङ्गमम्/NP ।/PUNC 
भूषणात्/NP यम्/SN च/AVK नारीणाम्/NP न/ANताभिः/SN मन्त्रयेत्/KP सुधीः/NP ॥/PUNC 59/PUNC ॥/PUNC 
यत्र/A स्त्री/NP ,/PUNC यत्र/A कितवः/NP ,/PUNC बालः/NP यत्र/A प्रशासिता/NP ।/PUNC 
तत्/SN गृहम्/NP क्षयम्/NP आयाति/KP ,/PUNC भार्गवः/NP हि/A इदम्/SN अब्रवीत्/KP ॥/PUNC 60/PUNC ॥/PUNC 
तावत्/A स्यात्/KP सुप्रसन्न/NV अस्यः/SN तावत्/A गुरुजने/ रतः/KN ।/PUNC 
पुरुषः/NP  योषिताम्/NP यावत्/SN न/ANश्रृणोति/KP वचः/NP रहः/NV ॥/PUNC 61/PUNC ॥/PUNC 
एताः/SN स्वार्थपरा/NV नार्यः/NP ,/PUNC केवलम्/A स्वसुखे/KV रताः/KN ।/PUNC 
न/ANतासाम्/SN  वल्लभः/NP कोपि/A सुतः/NP अपि/A स्वसुखम्/NP विना/A ॥/PUNC 62/PUNC ॥/PUNC 
कौलिकः/NP आह/KP -/PUNC “/PUNC तथापि/A प्रष्टव्या/KN सा/SN मया/SN ।/PUNC यतः/A पतिव्रता/NV सा/SN ।/PUNC अपरम्/A ,/PUNC ताम्/SN अपृष्ट्वा/KKS अहम्/SN  न/ANकिञ्चित्/A करोमि/KP ”/PUNC ।/PUNC  
एवम्/A तम्/SN अभिधाय/KKS सत्वरम्/KV  गत्वा/KKS ताम्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC प्रिये/NP !/PUNC अद्य/A अस्माकम्/SN  कञ्चित्/SN व्यन्तरः/NP सिद्धः/NV ।/PUNC  
सः/SN वाञ्छितम्/KN प्रयच्छति/KP ।/PUNC  तत्/AVK अहम्/SN  त्वाम्/SN  प्रष्टुम्/KKS आगतः/KN ।/PUNC  तत्/AVK कथय/KP किम्/AP प्रार्थये/KP ?/PUNC  एष/SN तावत्/A मम/SN मित्र/NP नापितः/NV  वदति/KP एवम्/A यत्/AVK -/PUNC “/PUNC राज्यम्/NP  प्रार्थयस्व/KP ”/PUNC ।/PUNC  सा/SN आह/KP  -/PUNC “/PUNC आर्यपुत्र/NP !/PUNC का/P मतिः/NP नापितानाम्/NV ?/PUNC  तत्/SN न/ANकार्यम्/KN  तत्/SN वचः/NP ।/PUNC 
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
चारणैः/NP बन्दिभिः/NP नीचैः/NP नापितैः/NP बालकैः/NP अपि/A ।/PUNC 
न/ANमन्त्रम्/NP मतिमान्/NP कुर्यात्/KP सार्द्धम्/UA  भिक्षुभिः/NP एव/INTF च/APY॥/PUNC 63/PUNC ॥/PUNC 
अपरम्/A महती/NV क्लेशपरम्परा/NV  एषा/SNV राज्यस्थितिः/NP ,/PUNC सन्धिविग्रहयानासनसंश्रयद्धैधीभावादिभिः/NP कदाचित्/A पुरुषस्य/NP सुखम्/NP  न/ANप्रयच्छति/KP इति/AUD ।/PUNC  यतः/AVK -/PUNC 
यदा/A एव/INTF राज्ये/NP क्रियते/KP अभिषेकः/NP तदा/A एव/INTF याति/KP व्यसनेषु/NP बुद्धिः/NP ।/PUNC 
घटा/NP नृपाणाम्/NP अभिषेककाले/NP सह/UA अम्भसा/NP एव/INTF आपदम्/NP उद्गिरन्ति/KP ॥/PUNC 64/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
रामस्य/NP व्रजनम्/KN  वने/NP,/PUNC निवसनम्/KN  पाण्डोः/NP सुतानाम्/NP  वनम्/NP ,/PUNC 
वृष्णीनाम्/NP  निधनम्/KN ,/PUNC नलस्य/NP नृपते/NV राज्यात्/NP परिभ्रंशनम्/KN ।/PUNC 
सौदासम्/NP  तदवस्थम्/KN अर्जुनबधम्/NP  संचिन्त्य/KKS लङ्केश्वरं/NP,/PUNC 
दृष्ट्वा/KKS राज्यकृते/NP विडम्बनगतम्/KN ,/PUNC तस्मात्/AVK न/ANतत्/SN वाच्छयेत्/KP ॥/PUNC 65/PUNC ॥/PUNC 
यदर्थम्/NP  भ्रातरः/NP पुत्रा/NP अपि/A वाञ्छन्ति/KP ये/SN निजाः/SN ।/PUNC 
वधम्/NP  राज्यकृताम्/KKS  राज्ञाम्/NP ,/PUNC तत्/SNV राज्यम्/NP  दूरतः/KV त्यजेत्/KP ॥/PUNC 66/PUNC ॥/PUNC 
कौलिकः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC सत्यम्/NV उक्तम्/KN  भवत्या/SN ।/PUNC  तत्/AVK कथय/KP किम्/AP प्रार्थये/KP ?/PUNC 
 सा/SN आह/KP  -/PUNC “/PUNC त्वम्/SN  तावत्/A एकम्/SMK  पटम्/NP  नित्यम्/KV एव/INTF निष्पादयसि/KP ।/PUNC  तेन/SN सर्वा/SN व्ययशुद्धिः/NP संपद्यते/KP ।/PUNC  इदानीम्/A त्वम्/SN आत्मनः/SN अन्यत्/SN बाहुयुगलम्/NP  द्वितीयम्/SMKP  शिरः/NP च/APYयाचस्व/KP ,/PUNC येन/SN पटद्वयम्/NP  संपादयसि/KP पुरतः/A पृष्ठतः/A च/APY।/PUNC  एकस्य/SN मूल्येन/NP गृहे/NP यथापूर्वम्/A व्ययम्/NP  सपादयिष्यसि/KP ,/PUNC द्वितीयस्य/SMKP मूल्येन/NP विशेषकृत्यानि/NP करिष्यसि/KP ।/PUNC  एवम्/A सौख्येन/NP स्वजातिमध्ये/NP श्लाघ्यमानस्य/KNV कालः/NP  यास्यति/KP ,/PUNC लोकद्वयस्य/NP उपार्जना/NP च/APYभविष्यति/KP ।/PUNC “/PUNC 
 सः/SN अपि/A तत्/SN आकर्ण्य/KKS प्रहृष्टः/KN प्राह/KP -/PUNC “/PUNC साधु/ABS पतिव्रते/NP !/PUNC साधु/BS !/PUNC युक्तम्/KN उक्तम्/KN  भवत्या/SN ।/PUNC  तत्/AVK एवम्/A करिष्यामि/KP ।/PUNC  एष/SN मे/SN निश्चयः/NP ”/PUNC ।/PUNC 
 ततः/A असौ/A गत्वा/KKS व्यन्तरम्/NP  प्रार्थयाञ्चक्रे/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC यदि/A मम/SN ईप्सितम्/KN  प्रयच्छसि/KP तत्/A देहि/KP मे/SN द्वितीयम्/SMKP  बाहुयुगलम्/NP  शिरः/NP च/APY।/PUNC “/PUNC 
एवम्/A अभिहिते/KN ,/PUNC तत्क्षणात्/NP एव/INTF सः/SN द्विशिराः/NV चतुर्बाहुः/NV च/APYसञ्जातः/KN ।/PUNC  ततः/A हृष्टमना/NV यावत्/A गृहम्/NP आगच्छति/KP तावत्/A लोकैः/NP “/PUNC राक्षसः/NP अयम्/SNV ”/PUNC इति/AUD मन्यमानैः/KNV लगुडपाषाणप्रहारैः/NP ताडितः/KN ,/PUNC मृतः/KN च/APY।/PUNC  
अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC यस्य/SN न/ANअस्ति/KP स्वयंप्रज्ञा/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
चक्रधरः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC सत्यम्/NV एतत्/SN ।/PUNC  सर्वः/SN अपि/A जनः/NP अश्रद्धेयाम्/NV आशापिशाचिकाम्/NP  प्राप्य/KKS हास्यपदवीम्/NP  याति/KP ।/PUNC  अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP केनापि/A -/PUNC 

अनागतवतीम्/NV  चिन्ताम्/NP असंभाव्याम्/NV  करोति/KP यः/SN ।/PUNC 
सः/SN एव/INTF पाण्डुरः/KV शेते/KP सोमशर्मपिता/NP यथा/A ' ॥/PUNC 67/PUNC ॥/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 

8/PUNC :/PUNC भाविसोमशर्मपितृकथा/NP

“/PUNC कस्मिंश्चित्/SN नगरे/NP कश्चित्त्/SN स्वभावकृपणः/NS  नाम/A ब्राह्मणः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC  तेन/SN भिक्षार्जितैः/NV शक्तुभिः/NP भुक्तशेषैः/NV कलशः/NP संपूरितः/KN ।/PUNC  तम्/SN च/AVK घटम्/NP  नागदन्ते/NP अवलम्ब्य/KKS तस्य/SN अधस्तात्/A खट्वाम्/NP  निधाय/KKS सततम्/A एकदृष्ट्या/NP तम्/SN अवलोकयति/KP ।/PUNC 
 अथ/AVK कदाचित्/A रात्रौ/NP सुप्तः/KN चिन्तयामास/KP -/PUNC यत्/AVK परिपूर्णः/NV अयम्/SNV  घटः/NP तावत्/A शक्तुभिः/NP वर्त्तते/KP ।/PUNC  तत्/AVK यदि/A दुर्भिक्षम्/NP  भवति/KP ,/PUNC तदा/A अनेन/SN रूप्यकाणाम्/NP  शतम्/NP उत्पत्स्यते/KP ।/PUNC  ततः/A तेन/SN मया/SN अजाद्वयम्/NP  ग्रहीतव्यम्/KN ।/PUNC  ततः/A षाण्मासिकप्रसववशात्/NP ताभ्याम्/SN  यूथम्/NP  भविष्यति/KP ।/PUNC  ततः/A अजाभिः/NP प्रभूता/NV गाः/NP ग्रहीष्यामि/KP ।/PUNC  गोभिः/NP महिषीः/NP ।/PUNC  महिषीभिः/NP बडवाः/NP ।/PUNC  बडवाप्रसवतः/NP प्रभूता/NV अश्वा/NP भविष्यन्ति/KP ।/PUNC  तेषाम्/SN  विक्रयात्/NP प्रभूतम्/NV  सुवर्णम्/NP  भविष्यति/KP ।/PUNC  सुवर्णेन/NP चतुःशालम्/NV  गृहम्/NP  सम्पत्स्यते/KP ।/PUNC 
 ततः/A कश्चित्/SN ब्राह्मणः/NP  मम/SN गृहम्/NP आगत्य/KKS प्राप्तवयस्काम्/NV  रूपाढ्याम्/NV  कन्याम्/NP  दास्यति/KP ।/PUNC  तत्/SN सकाशात्/A पुत्रः/NP  मे/SN भविष्यति/KP ।/PUNC  तस्य/SN अहम्/SN  “/PUNC सोमशर्मा/NS ”/PUNC इति/AUD नाम/NP करिष्यामि/KP ।/PUNC  ततः/A तस्मिन्/SN जानुचलनयोग्ये/NV सञ्जाते/KN अहम्/SN  पुस्तकम्/NP  गृहीत्वा/KKS अश्वशालायाः/NP पृष्ठदेशे/NP उपविष्टः/KN तत्/SN अवधारयिष्यामि/KP ।/PUNC  अत्र/A अन्तरे/A सोमशर्मा/NS माम्/SN  दृष्ट्वा/KKS ,/PUNC जनन्युत्सङ्गात्/NP जानुप्रचलनपरः/NV अश्वखुरासन्नवर्त्ती/NV मत्/SN समीपम्/KV आगमिष्यति/KP ।/PUNC  ततः/A अहम्/SN  ब्राह्मणीम्/NP  कोपाविष्टः/KN अभिधास्यामि/KP -/PUNC “/PUNC गृहाण/KP तावत्/A बालकम्/NP ”/PUNC ।/PUNC  सा/SN अपि/A गृहकर्मव्यग्रतया/NP अस्मत्/SN वचनम्/NP  न/ANश्रोष्यति/KP ।/PUNC  ततः/A अहम्/SN  समुत्थाय/KKS ,/PUNC ताम्/SN  पादप्रहारेण/NP ताडयिष्यामि/KP ।/PUNC  
एवम्/A तेन/SN ध्यानस्थितेन/NV तथैव/INTF पादप्रहारः/NP  दत्तः/KN ;/PUNC सः/SN  घटः/NP  भग्नः/NV ,/PUNC स्वयम्/SN च/APYशक्तुभिः/NP पाण्डुरताम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC अनागतवतीम्/NV  चिन्ताम्/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC एवम्/A एतत्/SN ।/PUNC  कः/P ते/SN दोषः/NP ।/PUNC  यतः/A सर्वः/SN अपि/A लोभेन/NP विडम्बितः/KN  बाध्यते/KP ।/PUNC  
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
“/PUNC यः/SN  लौल्यात्/NP कुरुते/KP कर्म/NP ,/PUNC न/ANएव/INTF उदर्कम्/NP अवेक्षते/KP ।/PUNC 
विडम्बनाम्/NP अवाप्नोति/KP स/SN ,/PUNC यथा/A चन्द्रभूपतिः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 68/PUNC ॥/PUNC 
चक्रधरः.NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN  आह/KP  -/PUNC 

9/PUNC :/PUNC चन्द्रभूपतिकथा/NP

कस्मिंश्चित्/SN नगरे/NP चन्द्रः/NS  नाम/A भूपतिः/NV प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC  तस्य/SN पुत्राः/NP  वानरक्रीडारताः/KN  वानरयूथम्/NP  नित्यमेव/INTF अनेकभोजनभक्ष्यादिभिः/NP पुष्टिम्/NP  नयन्ति/KP स्म/A ।/PUNC  अथ/AVK वानरयूथाधिपः/NP  यः/SSN सः/SSN  औशनसबार्हस्पत्यचाणक्यमतवित्/NV ,/PUNC तत्/AVK अनुष्ठाता/NP च/APYतान्/SN सर्वान्/SN अपि/A अध्यापयति/KP स्म/A ।/PUNC 
 अथ/AVK तस्मिन्/SN राजगृहे/NP लघुकुमारवाहनयोग्यम्/NV  मेषयूथम्/NP अस्ति/KP ।/PUNC  तन्मध्यात्/NP एकः/SN  जिह्वालौल्यात्/NP अहर्निशम्/NP  निःशङ्कम्/KV  महानसे/NP प्रविश्य/KKS यत्/SN पश्यति/KP,/PUNC तत्सर्वम्/SN  भक्षयति/KP ।/PUNC  ते/SN च/APYसूपकारा/NP यत्किञ्चित्/A काष्ठम्/NP ,/PUNC मृत्मयम्/NV  भाजनम्/NP ,/PUNC कांस्यपात्रम्/NP ,/PUNC ताम्रपात्रम्/NP  वा/A पश्यन्ति/KP ,/PUNC तेन/SN आशु/A ताडयन्ति/KP ।/PUNC 
 सः/SN अपि/A वानरयूथपः/NP तद्/SN दृष्ट्वा/KKS व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC अहो/ASMB ,/PUNC मेषसूपकारकलहः/NP अयम्/SNV  वानराणाम्/NP  क्षयाय/NP भविष्यति/KP ।/PUNC  यतः/A अन्नासास्वादलम्पटः/NV अयम्/SNV  मेषः/NP ,/PUNC महाकोपाः/NV च/APYसूपकारा/NP यथासन्नवस्तुना/NP प्रहरन्ति/KP ।/PUNC  तद्यदि/A वस्तुनः/NP अभावात्/NP कदाचित्/A उल्मुकेन/NP ताडयिष्यन्ति/KP तत्/AVK उर्णप्रचुरः/NV अयम्/SNV  मेषः/NP स्वल्पेन/NV अपि/A वह्निना/NP प्रज्वलयिष्यति/NP ।/PUNC तद्/SN दद्दह्यमानः/NV पुनः/A अश्वकुट्याम्/NP समीपवर्तिन्याम्/NP प्रवेक्ष्यति/KP  ।/PUNC सा/SN अपि/A तृणप्राचुर्यात्/KV ज्वलिष्यति/KP ।/PUNC ततः/A अश्वा/NP वह्निदाहम्/NP अवाप्स्यन्ति/KP ।/PUNC  
शालिहोत्रेण/NS पुनः/A एतत्/SN उक्तम्/KN  यत्/AVK -/PUNC “/PUNC वानरवसया/NP अश्वानाम्/NP  वह्निदाहदोषः/NP प्रशाम्यति/KP ”/PUNC तत्/AVK नूनम्/A एतेन/SN भाव्यम्/KN ।/PUNC  एषः/SN  अत्र/A निश्चयः/NP ।/PUNC  एवम्/A निश्चित्य/KKS सर्वान्/SNV वानरान्/NP आहूय/KKS रहसि/NP प्रोवाच/KP ।/PUNC  यत्/AVK -/PUNC 
मेषेण/NP सूपकाराणाम्/NP  कलहः/NP  यः/SSN अत्र/A जायते/KP ।/PUNC 
सः/SSN  भविष्यति/KP असन्दिग्धम्/NV  वानराणाम्/NP क्षयावहः/NV ॥/PUNC 69/PUNC ॥/PUNC 
तस्मात्/AVK स्यात्/KP कलहः/NP  यत्र/A गृहे/NP नित्यम्/NV अकारणः/NV ।/PUNC 
तत्/SNV गृहम्/NP  जीवितम्/NP  वाञ्छन्/KNV दूरतः/KV परिवर्जयेत्/KP ॥/PUNC 70/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
कलहान्तानि/NV हर्म्याणि/NP कुवाक्यान्तम्/NV  च/APYसौहृदम्/NP ।/PUNC 
कुराजान्तानि/NV राष्ट्राणि/NP कुकर्मान्तम्/NV  यशः/NP  नृणाम्/NP ॥/PUNC 71/PUNC ॥/PUNC 
तत्/AVK न/ANयावत्/A सर्वेषाम्/SN  संक्षयः/NP  भवति/KP ,/PUNC तावत्/A एव/INTF एतत्/SN राजगृहम्/NP  सन्त्यज्य/KKS वनम्/NP  गच्छामः/KP ।/PUNC  अथ/AVK तत्/SNV तस्य/SN वचनम्/NP अश्रद्धेयम्/KV  श्रुत्वा/KKS मदोद्धता/NV वानराः/NP प्रहस्य/KKS प्रोचुः/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC भवतः/SN  वृद्धभावात्/NP बुद्धिवैकल्यम्/NP  सञ्जातम्/KN ,/PUNC येन/SN एतत्/SN ब्रवीषि/KP ।/PUNC  उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
वदनं/NP दशनैः/NP हीनम्/NV ,/PUNC लाला/NP स्रवति/KP नित्यशः/KV ।/PUNC 
न/ANमतिः/NP स्फुरति/KP क्वापि/A बाले/NP वृद्धे/NP विशेषतः/KV ॥/PUNC 72/PUNC ॥/PUNC 
न/ANवयम्/SN  स्वर्गसमानोपभोगान्/NV नानाविधान्/NV भक्ष्यविशेषान्/NP राजपुत्रः/NP स्वहस्तदत्तान्/NV अमृतकल्पान्/NV परित्यज्य/KKS तत्र/A अटव्याम्/NP  कषायकटुतिक्तक्षाररूक्षफलानि/NP भक्षयिष्यामः/KP ।/PUNC “/PUNC  
तत्/AVK श्रुत्वा/KKS अश्रुकलुषाम्/NV  दृष्टिम्/NP  कृत्वा/KKS सः/SN  प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC रे/ASMB रे/DV मूर्खाः/NP !/PUNC यूयम्/SN एतस्य/SNV सुखस्य/NP परिणामम्/NP  न/ANजानीथ/KP ।/PUNC किम्पाकरसा/NP स्वादनप्रायम्/NV एतत्/SN सुखं/NP परिणामे/NP विषवत्/NV भविष्यति/KP ।/PUNC  तत्/SN अहम्/SN  कुलक्षयम्/NP  स्वयम्/SN  न/ANअवलोकयिष्यामि/KP ।/PUNC  साम्प्रतम्/A वनम्/NP  यास्यामि/KP ।/PUNC  उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
मित्रम्/NP  व्यसनसम्प्राप्तम्/NV  स्वस्थानम्/NP  परपीडितम्/NV ।/PUNC 
धन्याः/NV ते/SSN ये/SSN न/ANपश्यन्ति/KP देशभङ्गम्/NP  कुलक्षयम्/NP ”/PUNC ॥/PUNC 73/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A अभिधाय/KKS सर्वान्/SN तान्/SN परित्यज्य/KKS सः/SN  यूथाधिपः/NP अटव्याम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
अथ/AVK तस्मिन्/SN गते/KN अन्यस्मिन्/SNV अहनि/NP सः/SN  मेषः/NP  महानसे/NP प्रविष्टः/KN ,/PUNC यावत्/A सूपकारेण/NP न/ANअन्यत्/SN किञ्चित्/A समासादितम्/KN  तावत्/A अर्द्धज्वलितकाष्ठेन/NP ताड्यमानः/KNV  जाज्वल्यमानशरीरः/NV शब्दायमानः/KNV अश्वकुट्याम्/NP  प्रत्यासन्नवर्तिन्याम्/NV  प्रविष्टः/KN ।/PUNC 
 तत्र/A तृणप्राचुर्ययुक्तायाम्/NV  क्षितौ/NP तस्य/SN प्रलुठतः/KN सर्वत्र/A अपि/A वह्निज्वालाः/NP तथा/A समुत्थिताः/KN यथा/A केचित्/SN अश्वाः/NP स्फुटितलोचनाः/NV पञ्चत्वम्/NP  गताः/KN ।/PUNC  केचित्/SN बन्धनानि/NP त्रोटयित्वा/KKS,/PUNC अर्धदग्धशरीरा/NV इतः/A चेतः/A च/APYह्रेषायमाणा/KNV धावमानाः/KNV ,/PUNC सर्वम्/SN अपि/A जनसमूहम्/NP आकुलीचक्रुः/KP ।/PUNC 
अत्र/AVK अन्तरे/A राजा/NP सविषादः/NV शालिहोत्रज्ञान/NV वैद्यान्/NP आहूय/KKS ,/PUNC प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC प्रोच्यताम्/KP एषाम्/SNV अश्वानाम्/NP  कश्चित्/SN दाहोपशमनोपायः/NP ”/PUNC ।/PUNC  ते/SN अपि/A शास्त्राणि/NP विलोक्य/KKS प्रोचुः/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC प्रोक्तम्/KN अत्र/SN विषये/NP भगवता/NV शालिहोत्रेण/NS ,/PUNC यत्/AVK -/PUNC 
“/PUNC कपीनाम्/NP  मेदसा/NP दोषः/NP  वह्निदाहसमुद्भवः/NV ।/PUNC 
अश्वानाम्/NP  नाशम्/NP अभ्येति/KP ,/PUNC तमः/NP सूर्योदये/NP यथा/ASD ”/PUNC ॥/PUNC 74/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A क्रियताम्/KP एतत्/SN चिकित्सितम्/NP  द्राक्/A ,/PUNC यावत्/A एते/SN न/ANदाहदोषेण/NP विनश्यन्ति/KP ।/PUNC 
 सः/SN अपि/A तत्/SN आकर्ण्य/KKS समस्तवानरवधम्/NP आदिष्टवान्/KP ।/PUNC  किम्/AP बहुना/SN –/PUNC सर्वे/SN अपि/A ते/SN वानरा/NP विविधायुधलगुडपाषाणादिभिः/NP व्यापादिताः/KN -/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
अथ/AVK सः/SN अपि/A वानरयूथपः/NP तम्/SN  पुत्रपौत्रभ्रातृसुतभागिनेयादिसंक्षयम्/NP  ज्ञात्वा/KKS विषादम्/NP उपागतः/KN ,/PUNC सन्त्यक्ताहारक्रियः/NV  वनात्/NP वनम्/NP  पर्यटति/KP ।/PUNC  अचिन्तयत्/KP च/APY-/PUNC “/PUNC कथम्/P अहम्/SN  तस्य/SN नृपापसदस्य/NP अनृणताकृत्येन/NP अपकृत्यम्/NP  करिष्यामि/KP ।/PUNC 
 उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
मर्षयेत्/KP धर्षणाम्/NP यः/SSN अत्र/A वंशजाम्/NV  परनिर्मिताम्.NV ।/PUNC 
भयात्/NP वा/A यदि/A वा/A कामात्/NP सः/SSN  ज्ञेयः/KN पुरुषाधमः/NV ”/PUNC ॥/PUNC 75/PUNC ॥/PUNC 
अथ/AVK तेन/SN वृद्धवानरेण/NP कुत्रचित्/A पिपासाकुलेन/NV भ्रमता/KNV पद्मिनीखण्डमण्डितम्/NV  सरः/NP समासादितम्/KN ।/PUNC  तत्/A यावत्/A सूक्ष्मेक्षिकया/NP अवलोकयति/KP तावत्/A वनचरमनुष्याणाम्/NP  पदपङ्क्तिप्रवेशः/NP अस्ति/KP न/ANनिष्क्रमणम्/NP ।/PUNC  ततः/A चिन्तितम्/KN -/PUNC “/PUNC नूनम्/A अत्र/A जलान्ते/NP दुष्टग्राहेण/NP भाव्यम्/KN ।/PUNC  तत्/SN पद्मिनीनालम्/NP आदाय/KKS दूरस्थः/NP अपि/A जलम्/NP  पिबामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KN तत्/SN मध्यात्/NP राक्षसः/NP  निष्क्रम्य/KKS ,/PUNC रत्नमालाविभूषितकण्ठः/NV  तम्/SN उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB !/PUNC अत्र/A यः/SSN सलिले/NP प्रवेशम्/NP  करोति/KP सः/SSN  मे/SN भक्ष्यः/KN इति/AUD ।/PUNC  तत्/SN न/ANअस्ति/KP धूर्त्ततरः/NP त्वत्समः/SN अन्यः/SN यः/SN पानीयम्/NP अनेन/SNV विधिना/NP पिबति/KP ।/PUNC  ततः/A तुष्टः/KN अहम्/SN ,/PUNC प्रार्थयस्व/KP हृदयवाञ्छितम्/KN ”/PUNC ।/PUNC  
कपिः/NP आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC कियती/SN ते/SN भक्षणशक्ति/NP ?/PUNC ”/PUNC 
 सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC शतसहस्रायुतलक्षाणि/SMKY अपि/A जलप्रविष्टानि/KN भक्षयामि/KP ।/PUNC  बाह्यतः/SN शृगालः/NP अपि/A माम्/SN  धर्षयति/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 वानरः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC अस्ति/KP मे/SN केनचित्/SNV भूपतिना/NP सह/UA अत्यन्तम्/NV  वैरम्/NP ।/PUNC  यदि/A एनाम्/SN  रत्नमालाम्/NP  मे/SN प्रयच्छसि/KP ,/PUNC तत्/SN सपरिवारम्/NV अपि/A तम्/SN  भूपतिम्/NP  वाक्यप्रपञ्चेन/NP लोभयित्वा/KKS अत्र/A सरसि/NP प्रवेशयामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN अपि/A श्रद्धा/NP इयम्/SN  वचः/NP तस्य/SN श्रुत्वा/KKS रत्नमालाम्/NP  दत्वा/KKS प्राह/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC यत्/AVK समुचितम्/KN  भवति/KP तत्/SN कर्त्तव्यम्/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
 वानरः/NP अपि/A रत्नमालाविभूषितकण्ठः/NV वृक्षप्रासादेषु/NP परिभ्रमन्/KNV जनैः/NP दृष्टः/KN ,/PUNC पृष्टः/KN च/APY-/PUNC “/PUNC भो/ASMB यूथप/NP !/PUNC भवान्/SN इयन्तम्/A/SN  कालम्/NP  कुत्र/A स्थितः/KN ?/PUNC  
भवता/SN ईदृक्/SN रत्नमाला/NP कुत्र/A लब्धा/KN ,/PUNC या/SN दीप्त्या/NP सूर्यम्/NP अपि/A तिरस्करोति/KP ”/PUNC ।/PUNC 
वानरः/NP प्राह/KP -/PUNC “/PUNC अस्ति/KP कुत्रचित्/A अरण्ये/NP गुप्ततरम्/NV  महत्/NV सरः/NP  धनदनिर्मितम्/NV ।/PUNC 
तत्र/A सूर्ये/NP अर्धोदिते/NV रविवारे/NP यः/SSN कश्चित्/SN निमज्जति/KP ,/PUNC सः/SN  धनदप्रसादात्/NP ईदृक्/A रत्नमालाविभूषितकण्ठः/NV  निस्सरति/KP ।/PUNC 
अथ/AVK भूभुजा/NP तत्/SN आकर्ण्य/KKS ,/PUNC सः/SN  वानरः/NP समाहूतः/KN ,/PUNC पृष्टः/KN च/APY-/PUNC “/PUNC भो/ASMB यूथाधिप/NP !/PUNC किम्/AP सत्यम्/NP एतत्/SN ,/PUNC रत्नमालासनाथम्/NV सरः/NP अस्ति/KP क्व/P अपि/A ”/PUNC ?/PUNC 
 कपिः/NP आह/KP  -/PUNC “/PUNC स्वामिन्/NP !/PUNC एष/SN प्रत्यक्षतया/NV मत्कण्ठस्थितया/NV रत्नमालया/NP प्रत्ययः/NP ते//SN ।/PUNC  तत्/A यदि/A रत्नमालया/NP प्रयोजनम्/NP  तत्/AVK मया/SN सह/UA कमपि/A प्रेषय/KP ,/PUNC येन/SN दर्शयामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS नृपतिः/NP आह/KP  -/PUNC “/PUNC यदि/A एवम्/A ,/PUNC तत्/SN अहम्/SN  सपरिजनः/NV स्वयम्/SN एष्यामि/KP ,/PUNC येन/SN प्रभूता/NV रत्नमालाः/NP उत्पद्यन्ते/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 वानरः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC एवम्/A क्रियताम्/KP ”/PUNC ।/PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KN ,/PUNC भूपतिना/NP सह/UA रत्नमालालोभेन/NP सर्वे/SN कलत्रभृत्याः/NP प्रस्थिताः/KN ।/PUNC  वानरः/NP अपि/A राज्ञा/NP दोलाधिरूढेन/NP स्वोत्सङ्गे/NP आरोपितः/KN सुखेन/KV प्रीतिपूर्वम्/NV आनीयते/KP ।/PUNC  अथवा/A साधु/NP इदम्/NV उच्यते/KP -/PUNC 
“/PUNC तृष्णे/ASMB !/PUNC देवि/NP !/PUNC नमः/NP तुभ्यम्/SN ,/PUNC यया/SN वित्तान्विता/KN अपि/A ।/PUNC 
अकृत्येषु/NP नियोज्यन्ते/KP ,/PUNC भ्राम्यन्ते/KP दुर्गमेषु/NP अपि/A ॥/PUNC 76/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/APY-/PUNC 
इच्छति/KP शती/NP सहस्रम्/NP ,/PUNC सहस्री/NP लक्षम्/NP ईहते/KP ।/PUNC 
लक्षाधिपः/NP तथा/A राज्यम्/NP ,/PUNC राज्यस्थः/NP स्वर्गम्/NP ईहते/KP ॥/PUNC 77/PUNC ॥/PUNC 
जीर्यन्ते/KP जीर्यतः/KN केशाः/NP ,/PUNC दन्ता/NP जीर्यन्ति/KP जीर्यतः/KN ।/PUNC 
जीर्यतः/KN चक्षुषी/NP श्रोत्रे/NP ,/PUNC तृष्णा/NP एका/SN तरुणायते/KP ॥/PUNC 78/PUNC ॥/PUNC 
अथ/AVK तत्/SN सरः/NP समासाद्य/KKS वानरः/NP प्रत्यूषसमये/NP राजानम्/NP उवाच/KP -/PUNC 
“/PUNC देव/NP !/PUNC अत्र/A अर्धोदिते/NV सूर्ये/NP अन्तर्प्रविष्टानाम्/KN सिद्धिः/NP भवति/KP तत्/AVK सर्वः/SN अपि/A जन/NP एकदा/A एव/INTF प्रविशतु/KP ।/PUNC त्वया/SN पुनः/A मया/SN सह/UA प्रवेष्टव्यम्/KN ,/PUNC येन/SN पूर्वदृष्टस्थानम्/NP आसाद्य/KKS ,/PUNC प्रभूताः/KN ते/SN रत्नमाला/NP दर्शयामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
अथ/AVK प्रविष्टाः/KN ते/SN लोकाः/NP सर्वे/SN भक्षिता/KN राक्षसेन/NP ।/PUNC  अथ/AVK तेषु/SNV चिरमाणेषु/KNV राजा/NP वानरम्/NP आह/KP  -/PUNC “/PUNC भो/ASMB यूथाधिप/NP !/PUNC किम्/AP इति/AUD चिरायति/KP मे/SN परिजनः/NP ”/PUNC ?/PUNC 
तत्/SN श्रुत्वा/KKS वानरः/NP सत्वरम्/KV  वृक्षम्/NP आरुह्य/KKS ,/PUNC राजानम्/NP उवाच/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB दुष्टनरपते/NP !/PUNC राक्षसेन/NP अन्तः/NV सलिलस्थितेन/NV भक्षितः/KN ते/SN परिजनः/NP ।/PUNC  साधितम्/KN  मया/SN कुलक्षयजम्/NV  वैरम/NP,/PUNC तत्/AVK गम्यताम्/KP ।/PUNC  त्वम्/SN  स्वामी/NP इति/AUD मत्वा/KKS न/ANअत्र/A प्रवेशितः/KN ।/PUNC उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
कृते/KN प्रतिकृतम्/KN कुर्यात्/KP हिंसिते/KN प्रतिहिंसितम्/KN ।/PUNC 
न/ANतत्र/A दोषम्/NP पश्यामि/KP ,/PUNC यः/SN दुष्टे/NP दुष्टम्/NP आचरेत्/KP ॥/PUNC 79/PUNC ॥/PUNC 
तत्/A त्वया/SN मम/SN कुलक्षयः/NP कृतः/KN ,/PUNC मया/SN पुनः/A तव/SN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC  
अथ/AVK एतत्/SN आकर्ण्य/KKS ,/PUNC राजा/NP कोपाविष्टः/KN पदाति/NV एकाकी/NV यथा/A आयात/KNV मार्गेण/NP निष्क्रान्तः/KN ।/PUNC  
अथ/AVK तस्मिन्/SN भूपतौ/NP गते/KNV राक्षसः/NP तृप्तः/KN  जलात्/NP निष्क्रम्य/KKS सानन्दम्/KV इदम्/SN आह/KP  -/PUNC 
“/PUNC हतः/KNV शत्रुः/NP ,/PUNC कृतम्/KNV  मित्रम्/NP ,/PUNC रत्नमाला/NP न/ANहारिता/KN ।/PUNC 
नालेन/NP पिबता/KNV तोयम्/NP भवता/KN साधु/BS वानर/NP ॥/PUNC 80/PUNC ॥/PUNC 
अतः/A अहम्/SN  ब्रव्रीमि/KP -/PUNC “/PUNC यः/SN लौल्यात्/NP कुरुते/KP कर्म/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS ,/PUNC भूयः/A अपि/A सः/SN चक्रधरम्/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC प्रेषय/KP माम्/SN ,/PUNC येन/SN स्वगृहम्/NP गच्छामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 चक्रधरः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भद्र/NP !/PUNC आपतदर्थे/KKS धनमित्रसङ्ग्रहः/NP क्रियते/KP ।/PUNC  तत्/A माम्/SN एवंविधम्/KV त्यक्त्वा/KKS क्व/P यास्यसि/KP ?/PUNC उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
यः/SSN त्यक्त्वा/KKS सापदम्/NV  मित्रम्/NP  याति/KP निष्ठुरताम्/NP  वहन्/KNV ।/PUNC 
कृतघ्नः/NP तेन/NS पापेन/NP नरके/NP याति/KP असंशयम्/NV ”/PUNC ॥/PUNC 81/PUNC ॥/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC सत्यम्/NP एतत्/SNV यदि/A गम्यस्थाने/NP शक्तिः/NP भवति/KP ।/PUNC  एतत्/SN पुनः/A मनुष्याणाम्/NP अगम्यस्थानम्/NP ।/PUNC  
न/ANअस्ति/KP कस्य/SN अपि/A त्वाम्/SN उन्मोचयितुम्/KKS शक्तिः/NP ।/PUNC अपरम्/A यथा/A यथा/DV चक्रभ्रमवेदनया/NP तव/SN मुखविकारम्/NP पश्यामि/KP तथा/A तथा/DV अहम्/SN एतत्/SN जानामि/KP यत्/SN द्राक्/A गच्छामि/KP ,/PUNC मा/N कश्चित्/SN मम/SN अपि/A अनर्थः/NP भवेत्/KP इति/AUD ।/PUNC  यतः/AVK -/PUNC 
यादृशी/A वदनच्छाया/NP दृश्यते/KP तव/SN वानर/NP ।/PUNC 
विकालेन/NP गृहीतः/KN असि/KP ,/PUNC यः/SSN परैति/KP सः/SN  जीवति/KP “/PUNC ॥/PUNC 82/PUNC ॥/PUNC 
चक्रधरः/NS  आह/KP -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ?/PUNC ”/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
10/PUNC :/PUNC विकालवानरकथा/NP
“/PUNC कस्मिंश्चित्/SN नगरे/NP भद्रसेनः/NS नाम/NV राजा/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC तस्य/SN सर्वलक्षणसम्पन्ना/NV रत्नवती/NS नाम/A कन्या/NP अस्ति/KP ।/PUNC ताम्/SN कश्चित्/SN राक्षसः/NP जिहीर्षति/KP ।/PUNC रात्रौ/NP आगत्य/KKS उपभुङ्क्ते/KP ,/PUNC परम्/A कृतरक्षोपधानाम्/NV हर्त्तुम्/KKS  न/ANशक्नोति/KP ।/PUNC सा/SN अपि/A तत्समये/NP रक्षः/NP सान्निध्यजाम्/NV अवस्थाम्/NP अनुभवति/KP कम्पादिभिः/NP ।/PUNC 
 एवम्/A अतिक्रामति/KP काले/NP कदाचित्/A सः/SN राक्षसः/NP मध्यनिशायाम्/NP  गृहकोणे/NP स्थितः/KN ।/PUNC सा/SNV अपि/A राजकन्या/NP स्वसखीम्/NP उवाच/KP -/PUNC “/PUNC सखि/NP !/PUNC पश्य/KP एषः/SN विकालः/NS समये/NP नित्यम्/A एव/INTF माम्/SN कदर्थयति/KP ।/PUNC अस्ति/KP तस्य/SNV दुरात्मनः/NP प्रतिषेधोपायः/NP कश्चित्/SNV ”/PUNC ?/PUNC  
तत्/SN श्रुत्वा/KKS राक्षसः/NP अपि/A व्यचिन्तयत्/KN -/PUNC “/PUNC नूनम्/A यथा/A अहम्/SN ,/PUNC तथा/A अन्यः/SN अपि/A कश्चित्/SNV विकाल/NS नाम/A अस्या/SN हरणाय/NP नित्यम्/A एव/INTF आगच्छति/KP ;/PUNC परम्/A सः/SN अपि/A एनाम्/SN हर्त्तुम्/KKS  न/ANशक्नोति/KP ।/PUNC  
तत्/A तावत्/A अश्वरूपम्/NP कृत्वा/KKS अश्वमध्यगतः/KV निरीक्षयामि/KP -/PUNC किम्/AP रूपः/NP सः/SN किम्/AP प्रभावः/NP च/APYइति/AUD ”/PUNC ।/PUNC एवम्/A राक्षसः/NP अश्वरूपम्/NP  कृत्वा/KKS अश्वानाम्/NP  मध्ये/KV तिष्ठति/KP ।/PUNC 
तथा/A अनुष्ठिते/KN निशीथसमये/NP राजगृहे/NP कश्चित्/SNV अश्वचौरः/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC सः/SN  च/APYसर्वान्/SN अश्वान्/NP अवलोक्य/KKS ,/PUNC तम्/SN  राक्षसम्/NP अश्वतमम्/NP  विज्ञाय/KKS अधिरूढः/KN ।/PUNC  
अत्र/A अन्तरे/A राक्षसः/NP चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC नूनम्/A एष/SN विकालनामा/NP माम्/SN चौरम्/NP मत्वा/KKS कोपात्/NP निरहन्तुम्/KKS आगतः/KN ।/PUNC 
ततः/A किम्/AP करोमि/KP ”/PUNC एवम्/A चिन्तयन्/KNV सः/SN अपि/A तेन/SN खलीनम्/NP मुखे/NP निधाय/KKS ,/PUNC कशाघातेन/NP ताडितः/KN ।/PUNC 
अथ/AVK असौ/A भयत्रस्तमनाः/NP प्रधावितुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC  
चौरः/NP अपि/A दूरम्/A गत्वा/KKS,/PUNC खलीनाकर्षणेन/NP तम्/SN  स्थिरम्/KV कर्त्तुम्/KKS आरब्धवान्/KN ।/PUNC  
सः/SN तु/A वेगात्/NP वेगतरम्/KV गच्छति/KP ।/PUNC अथ/AVK तम्/SN  तथा/A अगणितखलीनाकर्षणम्/NP मत्वा/KKS चौरः/NP चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC अहो/ASMB ,/PUNC न/AN एवंविधा/KV वाजिनः/NP भवन्ति/KP अगणितखलीनाः/NV ।/PUNC तत्/AVK नूनम्/A अनेन/SN अश्वरूपेण/NP राक्षसेन/NP भवितव्यम्/KN ।/PUNC  यत्/AVK यदि/A कञ्चित्/SN पांशुलम्/NV भूमिदेशम्/NP अवलोकयामि/KP तदा/A आत्मानम्/SN  तत्र/A पातयामि/KP ।/PUNC न/ANअन्यथा/A मे/SN जीवितव्यम्/NP अस्ति/KP ।/PUNC एवम्/A चिन्तयत/KP इष्टदेवताम्/NP  स्मरतः/KNV तस्य/SN सः/SNV अश्वः/NP वटवृक्षस्य/NP तले/NP निष्क्रान्तः/KN ।/PUNC चौरः/NP अपि/A वटप्ररोहम्/NP आसाद्य/KKS तत्र/A एव/INTF विलग्नः/KN ।/PUNC ततः/YV द्वौ/SMKPY अपि/A तौ/SN पृथक्भूतौ/NV परमानन्दभाजौ/NV ,/PUNC जीवितविषये/NP लब्धप्रत्याशौ/NP सम्पन्नौ/KN ।/PUNC 
“/PUNC अथ/AVK तत्र/A वटे/NP कश्चित्/SN राक्षससुहृत्/NV वानरः/NP स्थितम्/KN आसीत्/KP ।/PUNC  तेन/SN राक्षसम्/NP  त्रस्तम्/KN आलोक्य/KKS ,/PUNC व्याहृतम्/KN  -/PUNC “/PUNC भो/ASMB मित्र/NP !/PUNC किम्/AP एवम्/A पलाय्यते/KP अलीकभयेन/KV ?/PUNC त्वत्/SN भक्ष्यः/NP अयम्/SNV  मानुषः/NP ,/PUNC भक्ष्यताम्/KP ”/PUNC ।/PUNC  
सः/SN अपि/A वानरवचः/NP निशम्य/KKS ,/PUNC स्वरूपम्/NP आधाय/KKS शङ्कितमनाः/KN स्खलितगतिः/NV निवृत्तः/KN ।/PUNC चौरः/NP अपि/A तम्/SN वानराहूतम्.KN ज्ञात्वा/KKS ,/PUNC कोपात्/NP तस्य/SN लाङगूलम्/NP लम्बमानम्/NV  मुखे/NP निधाय/KKS ,/PUNC चर्वितवान्/KN ।/PUNC  
वानरः/NP अपि/A तम्/SN राक्षसाभ्यधिकम्/NV मन्यमानः/KNV  भयात्/NP न/ANकिञ्चित्/A उक्तवान्/KN ।/PUNC केवलम्/A व्यथार्तः/NV  निमीलितनयनः/NV तिष्ठति/KP ।/PUNC  राक्षसः/NP अपि/A तम्/SN  तथाभूतम्/KN अवलोक्य/KN श्लोकम्/NP एनम्/SNV अपठत्/KP -/PUNC 
यादृशी/SN वदनच्छाया/NP दृश्यते/KP तव/SN वानर/NP !/PUNC ।/PUNC 
विकालेन/NS गृहीतः/KN असि/KP ,/PUNC यः/SSN परैति/KP स/SSN जीवति/KP ॥/PUNC 
इति/AUD उक्त्वा/KKS प्रनष्टः/KN च/APY ।/PUNC 
“/PUNC तत्/AVK प्रेषय/KP माम्/SN ,/PUNC येन/SN गृहम्/NP  गच्छामि/KP ।/PUNC  त्वम्/SN पुनः/A अनुभुङ्क्ष्व/KP अत्र/A स्थित/KN एव/INTF लोभवृक्ष/NP फलम्/NP ”/PUNC ।/PUNC  
चक्रधरः/NS प्राह/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB अकारणम्/KV एतत्/SN दैववशात्/KV सम्पद्यते/KP नृणाम्/NP  शुभाशुभम्/NP ।/PUNC  उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
दुर्गः/NP त्रिकूटः/NS ,/PUNC परिखा/NP समुद्रः/NP ,/PUNC रक्षांसि/NP योधा/NP धनदात्/NP च/APYवित्तम्/NP ।/PUNC 
शास्त्रम्/NP  च/APY यस्य/SN उशनसा/NS प्रणीतम्/KN ,/PUNC सः/SNV रावणः/NS देववशात्/KV विपन्नः/KNV ॥/PUNC 83/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
अन्धकः/NP ,/PUNC कुब्जकः/NP च/APY एव/INTF ,/PUNC त्रिस्तनी/NV राजकन्यका/NP ।/PUNC 
त्रयः/SMKY अपि/A अन्यायतः/NP सिद्धाः/KN सम्मुखे/NV कर्मणि/NP स्थिते/KN “/PUNC ॥/PUNC 84/PUNC ॥/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC  सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 

11/PUNC :/PUNC अन्धककुब्जकत्रिस्तनीकथा/NP
“/PUNC अस्ति/KP उत्तरापथे/NP मधुपुरम्/NS  नाम/A नगरम्/NP ।/PUNC 
तत्र/A मधुसेनः/NS नाम/A राजा/NP बभूव/KP ।/PUNC 
तस्य/SN कदाचित्/A विषयसुखम्/NP अनुभवतः/KNV त्रिस्तनी/NV कन्या/NP बभूव/KP ।/PUNC 
अथ/AVK ताम्/SN  त्रिस्तनीम्/NP  जाताम्/KN  श्रुत्वा/KKS,/PUNC सः/SN  राजा/NP कञ्चुकिनः/NP प्रोवाच/KP यत्/AVK -/PUNC 
“/PUNC भोः/ASMB !/PUNC त्यज्यताम्/KP इयम्/SNV त्रिस्तनी/NP ,/PUNC गत्वा/KKS दूरे/NV अरण्ये/NP यथा/A कश्चित्/SN न/ANजानाति/KP ।/PUNC 
 तत्/SN श्रुत्वा/KKS कञ्चुकिनः/NP प्रोचुः/KP -/PUNC “/PUNC महाराज/NP !/PUNC ज्ञायते/KP यत्/AVK अनिष्टकारिणी/NV त्रिस्तनी/NP कन्याNV भवति/KP ।/PUNC  तथापि/A ब्राह्मणाः/NP आहूय/KKS प्रष्टव्याः/KN ,/PUNC येन/SN लोकद्वयम्/NP  न/ANविरुध्यते/KP ।/PUNC  यतः/AVK -/PUNC 
यः/SN सततम्/KV  परिपृच्छति/KP ,/PUNC श्रृणोति/KP ,/PUNC सन्धारयति/KP अनिशम्/KV ।/PUNC 
तस्य/SN दिवाकरकिरणैः/NP नलिनि/NP इव/ASD विवर्द्धते/KP बुद्धिः/NP ॥/PUNC 85/PUNC ॥/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
पृच्छकेन/NP सदा/A भाव्यम्/KN  पुरुषेण/NP विजानता/NV ।/PUNC 
राक्षसेन्द्रगृहीतः/NP अपि/A प्रश्नात्/NP मुक्तः/KN  द्विजः/NP पुरा/A ”/PUNC ॥/PUNC 86/PUNC ॥/PUNC 
राजा/NP आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC  ते/SN प्रोचुः/KP -/PUNC 

12/PUNC :/PUNC राक्षसगृहीतब्राह्मणकथा/NP 

“/PUNC देव/NP !/PUNC कस्मिंश्चित्/SN वनोद्देशे/NP चण्डकर्मा/NS नाम/A राक्षसः/NP प्रतिवसति/NP स्म/A ।/PUNC  एकदा/A तेन/SNV भ्रमता/KNV अटव्याम्/NP  कश्चित्/SN ब्राह्मणः/NP समासादितः/KN ।/PUNC  ततः/A तस्य/SN स्कन्धम्/NP आरुह्य/KKS प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC अग्रेसरः/KV  गम्यताम्/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 ब्राह्मणः/NP अपि/A भयत्रस्तमनाः/NV तम्/SN आदाय/KKS प्रस्थितः/KN ।/PUNC 
अथ/AVK तस्य/SN कमलोदरकोमलौ/NV पादौ/NP दृष्ट्वा/KKS ब्राह्मणः/NP  राक्षसम्/NP अपृच्छत्/KP -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC किम्/AP एवंविधौ/NV ते/SN पादौ/NP अतिकोमलौ/NV ”/PUNC ?/PUNC  राक्षसः/NP  आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC व्रतम्/NP अस्ति/KP ,/PUNC न/ANअहम्/SN आर्द्रपादः/NV  भूमिम्/NP  स्पृशामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
ततः/AVK तत्/SN श्रुत्वा/KKS आत्मनः/SN  मोक्षोपायम्/NP  चिन्तयन्/KNV सरः/NP प्राप्तः/KN ।/PUNC  ततः/YV  राक्षसेन/NP अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC यावत्/A अहम्/SN  स्नानम्/NP  कृत्वा/KKS,/PUNC देवतार्चनविधिम्/NP  विधाय/KKS आगच्छामि/KP,/PUNC तावत्/A त्वया/SN अतः/A स्थानात्/NP अन्यत्र/A न/ANगन्तव्यम्/KN ”/PUNC ।/PUNC  तथा/A अनुष्ठिते/KN द्विजः/NP चिन्तयामास/KP -/PUNC “/PUNC नूनम्/A देवतार्चनविधेः/NP उर्ध्वम्/A माम्/SN एष/SN भक्षयिष्यति/KP ।/PUNC  तत्/A द्रुततरम्/KV  गच्छामि/KP,/PUNC येन/A एष/SN आर्द्रपादः/NV  न/ANमम/SN पृष्ठम्/KV एष्यति/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 तथा/AVK अनुष्ठिते/KN राक्षसः/NP  व्रतभङ्गभयात्/NP तस्य/SN पृष्ठम्/NP  न/ANगतः/KP ”/PUNC ।/PUNC  अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC पृच्छकेन/NP सदा/A भाव्यम्/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
अथ/AVK तेभ्यः/SN तत्/SN श्रुत्वा/KKS राजा/NP द्विजान्/NP आहूय/KKS प्रोवाच/KP -/PUNC “/PUNC भो/ASMB ब्राह्मणाः/NP !/PUNC त्रिस्तनी/NV मे/SN कन्या/NP समुत्पन्ना/KN ,/PUNC तत्/AVK किम्/AP तस्याः/SN प्रतिविधानम्/NP अस्ति/KP ,/PUNC न/ANवा/A ”/PUNC ?/PUNC 
 ते/SN प्रोचुः/KP -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC श्रूयताम्/KP -/PUNC 
हीनाङ्गी/NV वा/A अधिकाङ्गी/NV वा/A या/SN भवेत्/KP कन्यका/NP नृणाम्/NP ।/PUNC 
भर्तुः/SN स्यात्/KP सा/SN विनाशाय/NP ,/PUNC स्वशीलनिधनाय/NP च/APY॥/PUNC 87/PUNC ॥/PUNC 
या/SSN पुनः/A त्रिस्तनी/NV कन्या/NP याति/KP लोचनगोचरम्/NP ।/PUNC 
पितरम्/NP  नाशयति/KP एव/INTF सा/SSN द्रुतम्/KV ,/PUNC न/ANअत्र/A संशयः/NP ॥/PUNC 88/PUNC ॥/PUNC 
तस्मात्/AVK अस्याः/SN दर्शनम्/NP  परिहरतु/KP देवः/NP ।/PUNC 
तथा/AVK यदि/A कश्चित्/SN उद्वाहयति/KP ,/PUNC तत्/AVK एनाम्/SN  तस्मै/SN दत्त्वा/KKS ,/PUNC देशत्यागेन/NP सः/SN  नियोजयितव्यः/KN इति/AUD ।/PUNC 
एवम्/A कृते/KN लोकद्वयाविरुद्धता/NP भवति/KP ।/PUNC “/PUNC 
अथ/AVK तेषाम्/SN  तत्/SNV वचनम्/NP आकर्ण्य/KKS सः/SN  राजा/NP पटहशब्देन/NP सर्वत्र/A घोषणाम्/NP आज्ञापयामास/KP -/PUNC 
“/PUNC अहो/BS !/PUNC त्रिस्तनीम्/NV राजकन्याम्/NP यः/SSN कश्चित्/SN उद्वाहयति/KP ,/PUNC सः/SSN  सुवर्णलक्षम्/NP आप्नोति/KP देशत्यागम्/NP च/APY।/PUNC “/PUNC 
 एवम्/A तस्याम्/SN आघोषणायाम्/NP क्रियमाणायाम्/KNV महान्/NV कालः/NP व्यतीतः/KN ।/PUNC न/ANकश्चित्/SN ताम्/SN प्रतिगृह्णाति/KP ।/PUNC  सा/SN अपि/A यौवनोन्मुखी/NV सञ्जाता/KN सुगुप्तस्थानस्थिता/NV ,/PUNC यत्नेन/SN रक्ष्यमाणा/KNV तिष्ठति/KP ।/PUNC 
अथ/AVK तत्र/A एव/INTF नगरे/NP कश्चित्/SN अन्धः/NP तिष्ठति/KP ।/PUNC तस्य/SN च/AVK मन्थरकनामा/NS कुब्जः/NP अग्रेसरः/NV यष्टिग्राही/NV ।/PUNC ताभ्याम्/SN  तम्/SN  पटहशब्दम्/NP आकर्ण्य/KKS ,/PUNC मिथः/KV  मन्त्रितम्/KN  -/PUNC “/PUNC स्पृश्यते/KP अयम्/SN पटहः/NP ।/PUNC यदि/A कथम्/P अपि/A दैवात्/NP कन्या/NP लभ्यते/KP ,/PUNC सुवर्णप्राप्तिः/NP च/AVK भवति/KP ,/PUNC तदा/YV सुखेन/KV सुवर्णप्राप्त्या/NP कालः/NP व्रजति/KP ।/PUNC  अथ/AVK यदि/A तस्य/SN दोषतः/NP  मृत्युः/NP भवति/KP ,/PUNC दारिद्र्योपात्तस्य/NP अस्य/SNV क्लेशस्य/NP पर्यन्तः/NP भवति/KP ।/PUNC  
उक्तम्/KN च/AVK -/PUNC 
लज्जा/NP स्नेहः/NP स्वरमधुरता/NP बुद्धयः/NP यौवनश्रीः/NP ,/PUNC 
कान्तासङ्गः/NP स्वजनममता/NP दुःखहानिः/NP विलासः/NP ।/PUNC 
धर्मः/NP शास्त्रम्/NP  सुरगुरुमतिः/NP शौचम्/NP आचारचिन्ता/NP,/PUNC 
पूर्णे/NV सर्वे/SN जठरपिठरे/NP प्राणिनाम्/NP सम्भवन्ति/KP ॥/PUNC 89/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS अन्धेन/NP गत्वा/KKS ,/PUNC सः/SN  पटहः/NP स्पृष्टः/KN ।/PUNC  उक्तम्/KN  च/YV -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC अहम्/SN  ताम्/SN कन्याम्/NP उद्वाहयामि/KP ,/PUNC यदि/A राजा/NP मे/SN प्रयच्छति/KP ।/PUNC “/PUNC  
ततः/AVK तैः/SNV  राजपुरुषैः/NP गत्वा/KKS ,/PUNC राज्ञे/NP निवेदितम्/KN  -/PUNC “/PUNC देव/NP !/PUNC अन्धेन/NP केनचित्/SN पटहः/NP स्पृष्टः/KN ।/PUNC  तत्/AVK अत्र/SN विषये/NP देवः/NP प्रमाणम्/NP ”/PUNC ।/PUNC  
राजा/NP प्राह/KP -/PUNC 
“/PUNC अन्धः/NP वा/A बधिरः/NP वा/A अपि/A कुष्ठी/NP वा/A अपि/A अन्त्यजः/NP अपि/A वा/ ।/PUNC 
प्रतिगृह्णातु/KP ताम्/SN  कन्याम्/NP  सलक्षाम्/NV  स्यात्/KP विदेशगः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 90/PUNC ॥/PUNC 
अथ/AVK राजादेशात्/NP तैः/SNV रक्षापुरुषैः/NP तम्/SN  नदीतीरे/NP नीत्वा/KKS सुवर्णलक्षेण/NP समम्/UA  विवाहविधिना/KV त्रिस्तनीम्/NP  तस्मै/SN दत्त्वा/KKS ,/PUNC जलयाने/NP निधाय/KKS कैवर्ताः/NP प्रोक्ताः/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC देशान्तरम्/NP  नीत्वा/KKS कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP अन्धः/NP सपत्नीकः/NP ,/PUNC कुब्जकेन/NP सह/UA मोचनीयः/KN ”/PUNC ।/PUNC  
तथा/A अनुष्ठिते/KN विदेशम्/NP आसाद्य/KKS,/PUNC कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP कैवर्तदर्शिते/NP,/PUNC त्रयः/SMKY अपि/A मूल्येन/NP गृहम्/NP  प्राप्ताः/KN सुखेन/SN कालम्/NP  नयन्ति/KP स्म/A ।/PUNC 
केवलम्/A अन्धः/NP पर्यङ्के/NP सुप्तः/KN तिष्ठति/KP ,/PUNC गृहव्यापारम्/NP  मन्थरकः/NS करोति/KP ।/PUNC  एवम्/A गच्छता/KNV कालेन/NP त्रिस्तन्याः/NP कुब्जकेन/NP सह/UA विकृतिः/NP समपद्यत/KP ।/PUNC  अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC 
“/PUNC यदि/A स्यात्/KP शीतलः/NV  वह्निः/NP चन्द्रमा/NP दहनात्मक/NV ।/PUNC 
सुस्वादुः/NV सागरः/NP स्त्रीणाम्/NP  तत्/AVK सतीत्वम्/NP  प्रजायते/KP ॥/PUNC 91/PUNC ॥/PUNC 
अथ/AVK अन्येद्युः/NP त्रिस्तन्या/NP मन्थरकः/NS अभिहितः/KN -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB सुभग/NP !/PUNC यदि/A एषः/SN अन्धः/NP कथञ्चित्/A व्यापाद्यते/KP ,/PUNC तत्/A आवयोः/SN सुखेन/NP कालः/NP  याति/KP ।/PUNC  तत्/AVK अन्विष्यताम्/KP  कुत्रचित्/A विषम्/NP ,/PUNC येन/SN अस्मै/SN तत्/SN प्रदाय/KKS सुखिनी/NP भवामि/KP ।/PUNC 
अन्यदा/A कुब्जकेन/NP परिभ्रमता/NV ,/PUNC मृतः/NV कृष्णसर्पः/NP प्राप्तः/KN ।/PUNC  तम्/SN  गृहीत्वा/KKS ,/PUNC प्रहृष्टमना/NV गृहम्/NP अभ्येत्य/KKS ,/PUNC ताम्/SN आह/KP  -/PUNC “/PUNC सुभगे/NP !/PUNC लब्धः/KN अयम्/SN  कृष्णसर्पः/NP ।/PUNC  तत्/SN एनम्/SN  खण्डशः/KV कृत्वा/KKS ,/PUNC प्रभूतशुण्ठ्यादिभिः/NP ,/PUNC संस्कार्य/KKS अस्मै/SN विकलनेत्राय/NV मत्स्यामिषम्/NP  भणित्वा/KKS प्रयच्छ/KP ,/PUNC येन/SN द्राक्/A विनश्यति/KP ।/PUNC  यतः/A अस्य/SN मत्स्यामिषम्/NP  सदा/A प्रियम्/NV ”/PUNC ।/PUNC  एवम्/A उक्त्वा/KKS मन्थरकः/NS  बहिर्गतः/KN ।/PUNC  
सा/SN अपि/A प्रदीप्ते/NV वह्नौ/NP कृष्णसर्पम्/NP खण्डशः/A कृत्वा/KKS तक्रस्थाल्याम्/NP आधाय/KKS गृहव्यापाराकुला/NV तम्/SN  विकलाक्षम्/NV  सप्रश्रयम्/NV उवाच/KP -/PUNC 
“/PUNC आर्यपुत्र/NP !/PUNC तव/SN अभीष्टम्/NP मत्स्यमांसम्/NP समानीतम्/KN ।/PUNC 
यतः/A त्वम्/SN सदैव/INTF तत्/SN पृच्छसि/KP ।/PUNC 
ते/SN च/APYमत्स्या/NP वह्नौ/NP पाचनाय/NP तिष्ठन्ति/KP ।/PUNC 
तत्/AVK यावत्/A अहम्/SN  गृहकृत्यम्/NP करोमि/KP ,/PUNC तावत्/A त्वम्/SN  दर्वीम्/NP आदाय/KKS क्षणम्/NP एकम्/SMKY  तान्/SN प्रचालय/KP ”/PUNC ।/PUNC  
सः/SN अपि/A तत्/SN आकर्ण्य/KKS हृष्टमनाः/NV सृक्कणी/NP परिलिहन्/KNV द्रुतम्/KV उत्थाय/KKS दर्वीम्/NP आदाय/KKS प्रमथितुम्/KKS आरब्धः/KN ।/PUNC 
अथ/AVK तस्य/SN मत्स्यात्/NP मथ्नतः/NV  विषगर्भवाष्पेण/NP संस्पृष्टम्/KN  नीलपटलम्/NP  चक्षुर्भ्याम्/NP अगलत्/KP ।/PUNC  असौ/A अपि/A अन्धः/NP तम्/SN  बहुगुणः/NV  मन्यमानः/KNV ,/PUNC विशेषात्/NV नेत्राभ्याम्/NP वाष्पग्रहणम्/NP अकरोत्/KP ।/PUNC 
 ततः/AVK  लब्धदृष्टः/NP जातः/KN  यावत्/A पश्यति/KP ,/PUNC तावत्/A तक्रमध्ये/NP कृष्णसर्पखण्डानि/NP केवलानि/NV एव/INTF अवलोकयति/KP ।/PUNC  ततः/A व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC अहो/BS ,/PUNC किम्/AP एतत्/SN ?/PUNC  मम/SN मत्स्यामिषम्/NP  कथितम्/KN आसीत्/KP अनया/SN ।/PUNC  एतानि/SN तु/A कृष्णसर्पखण्डानि/NP ।/PUNC  तत्/SN तावत्/A विजानामि/KP सम्यक्/A त्रिस्तन्याः/NP चेष्टितम्/KN ,/PUNC किम्/AP मम/SN वधोपायक्रमः/NP कुब्जस्य/NP वा/A ।/PUNC  उताहः/A अन्यस्य/SN वा/A कस्यचित्/SN ”/PUNC ।/PUNC  एवम्/A विचिन्त्य/KKS स्वाकारम्/NP  गूहन्/KNV अन्धवत्/KN कर्म/NP करोति/KP ,/PUNC यथा/A पुरा/A ।/PUNC 
अत्र/A अन्तरे/SN कुब्जः/NP समागत्य/KKS निःशङ्कतया/NP आलिङ्गनचुम्बनादिभिः/NP त्रिस्तनीम्/NP  सेवितुम्/KKS उपचक्रमे/KP ।/PUNC  सः/SN अपि/A अन्धः/NP तम्/SN अवलोकयन्/KNV अपि/A यावत्/A न/ANकिञ्चित्/A शस्त्रम्/NP  पश्यति/KP ,/PUNC तावत्/A कोपव्याकुलमनाः/NV पूर्ववत्/KN शयनम्/NP  गत्वा/KKS ,/PUNC कुब्जम्/NP  चरणाभ्याम्/NP सङ्गृह्य/KKS ,/PUNC सामर्थ्यात्/NP स्वमस्तकोपरि/NP भ्रामयित्वा/KKS त्रिस्तनीम्/NP  हृदये/NP व्यताडयत्/KP ।/PUNC 
 अथ/AVK कुब्जप्रहारेण/NP तस्याः/SN तृतीयः/SMKP स्तनः/NP उरसि/NP प्रविष्टः/KN ।/PUNC  तथा/A बलात्/NP मस्तकोपरि/NP भ्रामणेन/NP कुब्जः/NP प्राञ्जलताम्/NP  गतः/KN ।/PUNC 
 अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC अन्धकः/NP कुब्जकः/NP च/APYएव/INTF इति/AUD ।/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB !/PUNC सत्यम्/NV एतत्/SN ।/PUNC  दैवानुकूलतया/NP सर्व/SN कल्याणम्/NP  सम्पद्यते/KP ।/PUNC  तथापि/A पुरुषेण/NP सताम्/NP  वचनम्/NP  कार्यम्/KN ।/PUNC  न/ANपुनः/A एवम्/A एव/INTF वर्तितव्यम्/KN ।/PUNC  अथ/AVK एवम्/A एव/INTF यः/SSN  वर्त्तते/KP ,/PUNC सः/SSN  त्वम्/SN इव/ASD नूनम्/INTF  विनश्यति/KP ।/PUNC 
तथा/A च/AVK -/PUNC 
एकोदराः/NV पृथक्ग्रीवा/NV अन्यः/SN अन्यफलभक्षिणः/NV ।/PUNC 
असंहता/NV विनश्यन्ति/KP ,/PUNC भारुण्डा/NP इव/ASD पक्षिणः/NP ”/PUNC ॥/PUNC 92/PUNC ॥/PUNC 
चक्रधरः/NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC  सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 
13/PUNC :/PUNC भारुण्डपक्षिकथा/NP
कस्मिंश्चित्/SN सरोवरे/NP भारुण्डनामा/NP पक्षी/NP एकोदरः/NV ,/PUNC पृथक्ग्रीवः/NV प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC  तेन/SN च/APYसमुद्रतीरे/NP परिभ्रमता/KN किञ्चित्/A फलम्/NP अमृतकल्पम्/NP  तरङ्गक्षिप्तम्/NV  सम्प्राप्तम्/KN ।/PUNC  
सः/SN अपि/A भक्षयन्/KNV इदम्/SN आह/KP  -/PUNC “/PUNC अहो/BS !/PUNC बहूनि/SN मया/SN अमृतप्रायाणि/NV समुद्रकल्लोल/NP आहृतानि/KN फलानि/NP भक्षितानि/KN ।/PUNC  परम्/A अपूर्वः/NV अस्य/SN आस्वादः/NP ।/PUNC  तत्/AVK किम्/AP पारिजातहरिचन्दनतरुसंभवम्/NP ?/PUNC  किम्/NP  वा/A किञ्चित्/A अमृतमयफलम्/NP अयम्/SN अव्यक्तेन/NP अपि/A विधिना/NP आपतितम्/KN “/PUNC !/PUNC 
एवम्/A तस्य/SN ब्रुवतः/KNV ,/PUNC द्वितीयमुखेन/NP अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB ,/PUNC यदि/A एवम्/A तत्/A मम/SN अपि/A स्तोकम्/A प्रयच्छ/KP ,/PUNC येन/SN अहम्/SN  अपि/A जिह्वासौख्यम्/NP अनुभवामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 ततः/AVK  विहस्य/KKS प्रथमवक्त्रेण/NP अभिहितम्/KN -/PUNC “/PUNC आवयोः/SN तावत्/A एकम्/SMK उदरम्/NP ,/PUNC एका/SN तृप्तिः/NP च/APYभवति/KP ।/PUNC  ततः/AVK किम्/AP पृथक्भक्षितेन/NP ?/PUNC  वरम्/NP अनेन/SN शेषेण/NP प्रिया/NP तोष्यते/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 एवम्/A अभिधाय/KKS तेन/SN शेषम्/NP  भारुण्ड्याः/NP प्रदत्तम्/KN ।/PUNC सा/SN अपि/A तत्/SN आस्वाद्य/KKS प्रहृष्टतमालिङ्गनचुम्बनसम्भावनादि/NP अनेकचाटुपरा/NV च/AVK बभूव/KP ।/PUNC द्वितीयम्/SMKP  मुखम्/N तद्दिनात्/NP एव/INTF प्रभृति/NV सोद्वेगम्/NV  सविषादम्/NV च/APYतिष्ठति/KP ।/PUNC 
अथ/AVK अन्येद्युः/NP द्वितीयमुखेन/NP विषफलम्/NP  प्राप्तम्/KN ।/PUNC 
तत्/SN दृष्टवा/KKS अपरम्/SN आह/KP  -/PUNC “/PUNC भोः/ASMB निस्त्रिंश/NP !/PUNC पुरुषाधम/NP !/PUNC निरपेक्ष/NP !/PUNC मया/SN विषफलम्/NP आसादितम्/KN ।/PUNC 
तत्/AVK तव/SN अपमानात्/NP भक्षयामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
अपरेण/SN अभिहितम्/KN  -/PUNC “/PUNC मूर्ख/NP !/PUNC मा/N मा/DV एवम्/A कुरु/KP ।/PUNC 
एवम्/A कृते/KN द्वयोः/SN अपि/A विनाशः/NP  भविष्यति/KP ”/PUNC ।/PUNC 
अथ/AVK एवम्/A वदता/KNV तेन/SN अपमानेन/NP तत्/SN फलम्/NP  भक्षितम्/KN ।/PUNC 
किम्/AP बहुना/A ,/PUNC द्वौ/SN अपि/A विनष्टौ/KN “/PUNC  ।/PUNC 
अतः/A अहम्/SN  ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC एकोदराः/NV पृथक्ग्रीवा/NV ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
चक्रधरः/NS  आह/KP  -/PUNC “/PUNC सत्यम्/NP एतत्/SN ।/PUNC तत्/AVK गच्छ/KP गृहम्/NP ।/PUNC  परम्/A एकाकिना/NP न/ANगन्तव्यम्/KN ।/PUNC 
उक्तम्/KN  च/AVK -/PUNC 
एकः/SN स्वादु/NP न/ANभुञ्जीत/KP ,/PUNC न/ANएकः/SN सुप्तेषु/SN जागृयात्/KP ।/PUNC 
एकः/SN  न/ANगच्छेत्/KP अध्वानम्/NP ,/PUNC न/ANएकः/SN च/APY अर्थान्/NP प्रचिन्तयेत्/KP ॥/PUNC 93/PUNC ॥/PUNC 
अपि/A च/AVK -/PUNC 
अपि/A कापुरषः/NP  मार्गे/NP द्वितीयः/SMKP क्षेमकारकः/NP ।/PUNC 
कर्कटेन/NP द्वितीयेन/SMKP जीवितम्/NP  परिरक्षितम्/KN ॥/PUNC 94/PUNC ॥/PUNC 
सुवर्णसिद्धिः/NS आह/KP  -/PUNC “/PUNC कथम्/P एतत्/SN ”/PUNC ?/PUNC सः/SN अब्रवीत्/KP -/PUNC 

14/PUNC :/PUNC ब्राह्मणकर्कटककथा/NP

“/PUNC कस्मिंश्चित्/SN अधिष्ठाने/NP ब्रह्मदत्तनामा/NP ब्राह्मणः/NP प्रतिवसति/KP स्म/A ।/PUNC  सः/SN  च/AVK प्रयोजनवशात्/NP ग्रामे/NP  प्रस्थितः/KN स्वमात्राभिहितः/KN ,/PUNC यत्/AVK -/PUNC “/PUNC वत्स/NP !/PUNC कथम्/P एकाकी/NP व्रजसि/KP ?/PUNC  तत्/A अन्विष्यताम्/KP  कश्चित्/SN द्वितीयः/SMKP सहायः/NP ”/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN  आह/KP  -/PUNC “/PUNC अम्ब/NP !/PUNC मा/N भैषीः/KP ।/PUNC  निरुपद्रवः/NV अयम्/SNV  मार्गः/NP ।/PUNC  कार्यवशात्/KV एकाकी/NP गमिष्यामि/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 अथ/AVK तस्य/SN तम्/SN  निश्चयम्/NP  ज्ञात्वा/KKS,/PUNC समीपस्थवाप्याः/NP सकाशात्/KV कर्कटम्/NP आदाय/KKS मात्राभिहितः/KN -/PUNC “/PUNC वत्स/NP !/PUNC अवश्यम्/NV  यदि/A गन्तव्यम्/KN ,/PUNC तत्/AVK एष/SN कर्कटः/NP अपि/A सहायः/NP भवतु/KP ।/PUNC  तत्/A एनम्/SN  गृहीत्वा/KKS गच्छ/KP ”/PUNC ।/PUNC 
 सः/SN अपि/A मातुः/NP वचनात्/NP उभाभ्याम्/SN  पाणिभ्याम्/NP  सङ्गृह्य/KKS कर्पूरपुटिकामध्ये/NP निधाय/KKS पात्रमध्ये/NP संस्थाप्य/KKS च/APYशीघ्रम्/NP  प्रस्थितः/KN ।/PUNC 
अथ/AVK गच्छन्/KNV ग्रीष्मोष्मणा/NP सन्तप्तः/KN कश्चित्/SN मार्गस्थम्/NV  वृक्षम्/NP आसाद्य/KKS ,/PUNC तत्र/A एव/INTF प्रसुप्तः/KN ।/PUNC  अत्र/A अन्तरे/A वृक्षकोटरात्/NP निर्गत्य/KKS सर्पः/NP तत्समीपम्/NP आगतः/KN ।/PUNC 
 सः/SN  च/APYआभ्यन्तरगताम्/NV  कर्पूरपुटिकाम्/NP अतिलौल्यात्/NP अभक्षयत्/KP ।/PUNC सः/SN अपि/A कर्कटः/NP तत्र/A एव/INTF स्थितः/KN सन्/KNV सर्पप्राणान्/NP अपाहरत्/KP ।/PUNC  ब्राह्मणः/NP अपि/A यावत्/A प्रबुद्धः/KN पश्यति/KP ,/PUNC यावत्/A समीपे/NP मृतः/NV कृष्णसर्पः/NP  निजपार्श्वे/NV कर्पूरपुटिकोपरि/NP स्थितः/NV तिष्ठति/KP ।/PUNC  
तम्/SN  दृष्ट्वा/KKS व्यचिन्तयत्/KP -/PUNC “/PUNC कर्कटेन/NP अयम्/SN  हतः/KN ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
प्रसन्नः/NP भूत्वा/KKS अब्रवीत्/KP -/PUNC “/PUNC भोः/SN !/PUNC सत्यम्/NP अभिहितम्/KN  मम/SN मात्रा/NP यत्/AVK -/PUNC ‘/PUNC पुरुषेण/NP कोपि/SN सहायः/NV कार्यः/KN ।/PUNC 
न/ANएकाकिना/NP गन्तव्यम्/KN ’/PUNC ।/PUNC 
यतः/A मया/SN श्रद्धापूरितचेतसा/NP तद्वचनम्/NP अनुष्ठितम्/KN तेन/SN अहम्/SN कर्कटेन/NP सर्पव्यापादनात्/NP रक्षितः/KN ”/PUNC ।/PUNC 
अथवा/A साधु/NP इदम्/SN उच्यते/KP -/PUNC
“/PUNC क्षीणः/NP श्रयति/KP शशी/NP रविम्/NP ऋद्धः/NP  वर्द्धयति/KP पायसाम्/NP  नाथम्/NP ।/PUNC 
अन्ये/SN विपदि/NP सहायाः/NP धनिनाम्/NP ,/PUNC श्रियम्/NP अनुभवन्ति/KP अन्ये/SN ॥/PUNC 95/PUNC ॥/PUNC 
मन्त्रे/NP तीर्थे/NP द्विजे/NP देवे/NP दैवज्ञे/NP भेषजे/NP गुरौ/NP ।/PUNC 
यादृशी/SN भावना/NP यस्य/SN ,/PUNC सिद्धिः/NP भवति/KP तादृशी/SN ॥/PUNC 96/PUNC ॥/PUNC 
एवम्/A उक्त्वा/KKS असौ/A ब्राह्मणः/NP  यथा/A अभिप्रेतम्/NP  गतः/KN ''/PUNC ।/PUNC अतः/A अहम्/SN ब्रवीमि/KP -/PUNC “/PUNC अपि/A कापुरुषः/NP मार्गे/NP ”/PUNC इति/AUD ।/PUNC 
एवम्/A सुवर्णसिद्धिः/NS तम्/SN अनुज्ञाप्य/KKS स्वगृहम्/NP प्रति/AUP निवृत्तः/KN ।/PUNC 
॥/PUNC इति/AUD श्रीविष्णुशर्मविरचिते/NV पञ्चतन्त्रे/NS अपरीक्षितकारकम्/NS नाम/A पञ्चमम्/SMKP तन्त्रम्/NP समाप्तम्/KN ॥/PUNC 97/PUNC ॥/PUNC 
ध्यात्वा/KKS गुरुपदाम्भोजम्/NP पञ्चतन्त्रे/NS अपरीक्षितम्/NS ।/PUNC 
कारकम्/NP पञ्चमम्/SMKP नाम/A व्याख्याभ्याम्/NP समलङ्कृतम्/KN ॥/PUNC 
॥/PUNC समाप्तम्/KN इदम्/SN पञ्चतन्त्रम्/NS ॥/PUNC 
 
